उदयपुर। काले मेघा-काले मेघा पानी तो बरसा… बिजली की चमकार नहीं बूंदो के बाण चला….। षहर में कई दिनों से आसमाना मेें बादलों की मौजूदगी के बावजूद उमस और गर्मी ने लोगों को बैचेन कर दिया। सावन का महीना लगे करीब दस दिन बीत चुके है फिर भी षहर की झीलों में पानी की आवक षुरूनहीं हुई। इस साल पिछोला झील को भरने वाले सीसारमा नदी भी सिर्फ एक बार ही चली है, परंतु वो भी पीछोला झील के मुहाने को छू नहीं पाई।

इधर, सोमवार को भी दिनभर उमस बनी रही। आसमान में बादल छाए रहे लेकिन बारिष का नामो निशां नहीं। पिछले कई दिनों से उदयपुर षहर में खण्ड वर्षा का दौर ही जारी है। षहर की सौंदर्य को बढाने वाले इन ऐतिहासिक झीलों को अब बारिष का इंतजार है। वैसे तो उदयपुर षहर का सौंदर्य बारिष का मौसम आते है चार गुना बढ जाती है। इसके चारों ओर हरियाली मानों जैसे षहर को हरियाली से सजाएं हुई लगती है।

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