सम्पादकीय – रफ़ीक एम् . पठान

 

उदयपुर । आए न तुम तो हम मर न गए

कहने की बात रह गई और दिन गुजर गए।

कुछ इन्ही जज्बातों के साथ साल 2011 विदा हो गया। बीता वक्त लौट के नहीं आता यह सच है लेकिन बीता वत्त€ दे जाता है कुछ सीख, कुछ प्रेरणा, कोई संदेश जिसके अनुसरण से हम अपनी मंजिल की ओर बढ सके। अपनी गलतियों को सुधारते हुए अपने लक्ष्य् तय् कर सके।

वर्ष 2011 लेकसिटी के लिए कई खट्टी मिठीया दे छोड गया । पयर््ाटन नगरी को मानसून का अंतिम दौर सौगात दे गया। दम तोडती शहर की झीलों को लबालब कर इनमें प्राण पूं€ग कर मानो इस शहर के सम्पूर्ण शहर की धडकन झीलों के सरोबार होकर छलकने के साथ ही दीर्घकालिन देवास योजना के लगभग पूर्ण होते चरण ने इस शहर के वाशिन्दों के दिलो को अल्हादित किया। पर्यटन से जुडे लोगों में अपार उत्साह छा गय। पर्यटन सीजन आरंभ होने के साथ ही देशी विदेशी सैलानियों की रौनक ने यहाँ के माहौल को खुशनुमा बना दिया। शहर की धडकन यह झीलें खाली हो जाती है तो पूरा शहर उदास हो जाता है और जब लबालब हो तो हम बल्लेµबल्ले कहते हुए आल्हादित हो जाते है। उत्सवी माहौल के कुछ दिनों बाद ही हमें इसी धकडन की सतह पर तैरते नजर आते आता है प्रदूषण का ताज और हम सब इन से आंखे मूंद कर नजर अंदाज कर अपनी मौज मस्ती में रम जाते हे। यहीं से रूदन हो जाता है इन बेबस धडकनों का। हमें तहे दिल से शहर की इन धडकनों को सदैव इन झीलों को प्रदूषण मुक्त करने का निजी कर्तव्य् निभाना होगा तभी हम संजो कर रख पाऐंगे अपनी इस विरासत को जो हमे हमारे अग्रजो ने पांरम्परिक तोहफे के रूप में दी है।

इसी के साथ इस नये साल की सुप्रभात पर लालिमा लिए उषा किरणों के साथ इस शहर में कौमी एकता का संकल्प भी दोहराना होगा।मैने पूरा भारत भ्रमण किया है। विदेश भी गया हूँ वहां की संस्कृति और संस्कारों से भी रूबरू हुआ हूँ लेकिन उदय्ापुर शहर जल शांतµअमन चैन वाला शहर मुझे कहीं नहीं मिला। पर्यटक विदेशी हो या देशी हमारा अतिथि है हमारी तहजीबµसंस्कृति हमारी मेहमान नवाजी में छलकती है। जब किसी पर के साथ कोई अवांछनीय् घटना होती है तो उसका प्रभाव पूरे शहर की अस्मिता पर पडता है। अपने घर आए मेहमान के साथ कोई अप्रिय् वारदात हमारे अतिथि देवो भव के संदेश को चुनौति देती है।

अपनी आन बान और शान के लिए विश्व में पहचान रखने वाले इस मेवाड अंचल की धरा पर जन्म लेने वाले प्रत्य्ोक नागरिक को वर्ष 2012 में एक संकल्प लेना होगा। इस शहर के नैसर्गिक सोंदर्य को अक्षुण्ण बनाए रखने तथा इस पर्यटन नगरी को सभी प्रदूषणों से मुक्त रखने दृढ संकल्प लेना होगा। हमे उन झीलों को प्रदूषण से मुक्त रखने की चुनौती को स्वीकार करना होगा जो हमारी धडकन हे। हमें उन ऐतिहासिक विरासतों को संजाने का संकल्प लेना होगा। जो हमारी संस्कृति की संवाहक है। हमें उन अतिथिय के मानµसम्मान की रक्षा करनी होगी जो सात समुन्दर पार हमारी संस्कृति की गाथा सुनकर यहा आते है आत्म शांति के लिए। यहाँ महसूस होने वाली सुख शांति न तो पहाडो की चोटियों पर मिलेगी और ना ही समुन्दर के किनारो पर राहत महसूस की। रेतीले धोरो ने भी शरीर को तपाय ही है। जो सुकून हमें महसूस होता है अरावली की इन उपत्काओं के मध्य वैसा और कहीं नहीं जो गर्व हमें हमारी विरासतों पर होता है वैसा आभास और कहीं नही। जो अमनµचैन कौमी एकताµभाईचारा हमें यहाँ दिखाई देता है वैसा ओर कहीं नहीं दिखा। पिछले कुछ समय से कुछ लोगों द्वारा यहाँ की सुख शांति को भी छीनने का दुस्साहस किया जा रहा है। निःसंदेह ये लोग ञमेवाडञ के शूरवीर नहीं हो सकते।

मेवाड तो अपने संदेश ञञ जो दृढ राखे धर्म को ताही रखे करतारञञ के आव्हान के साथ अडीग है। तो आइए नव प्रभात नए वर्ष और नय्ो जोश को हम आत्मसात करते हुए अपने खुबसुरत शहर के नैसर्गिक सोंदर्य को और निखारने का संकल्प ले की,यहाँ की झीलों, संस्कृति, विरासत को संजोने की प्रतीक्षा करें। हम संकल्प ले की यहाँ के भाईचारे कौमी एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने का प्रण ले।

उदयपुर पोस्ट आशा करता है कि ऐसा होगा हमारा नए साल का सफर जहां खुशियों की बरसात होगी और तरक्की का सैलाब होगा इस झीलों की नगरी में।

नववर्ष आपके लिए, परिजनों के लिए, मित्रों के लिए शुभ हो, मंगलमय हो इन्हीं शुभकामनाओं के साथ नया साल मुबारक।

 

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