भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजसमंद की ट्रेप कार्रवाई में दो लाख रुपए की रिश्वत मांगने पर राजनगर थाने से लाइन हाजिर किए कांस्टेबल महावीरसिंह के विरुद्ध पुलिस थानों में मुकदमे दर्ज होने के बाद चौथ वसूली का सारा भंडाफोड़ हो गया। थाने में दर्ज प्रकरण में एफआर लगाने की एवज में 2 लाख रुपए थानेदार के नाम मांगे, जबकि सीआई से एक मुलाकात कराने के नाम पर 10 हजार रुपए भी ऐंठ लिए। यही नहीं, एफआईआर रफा-दफा करने के लिए अनुसंधान अधिकारी को दरकिनार कर 30 हजार रुपए अलग से खुद की फीस मांगी और सिगरेट के लिए हाथोंहाथ 5सौ रुपए भी ऐंठ लिए।
यह खुलासा एसीबी की ओर से कांस्टेबल महावीरसिंह के दो लाख रुपए रिश्वत मांगने पर 14 सितम्बर 18 को किए गए सत्यापन से हुआ। एसीबी के रिकॉर्डर में कैद तथ्यों को खंगाला, तो कांस्टेबल के रिश्वत मांगने के पीछे अप्रत्यक्ष तौर पर कई पुलिस अधिकारियों का दबाव होने का खुलासा हुआ। बातचीत में दो लाख रुपए तो सिर्फ सीआई के नाम पर मांगे थे, जबकि इस प्रकरण के अनुसंधान अधिकारी व एएसआई को कोई राशि नहीं देने की बात सामने आई। कांस्टेबल बोला कि एएसआई को कुछ नहीं आता-जाता तो उन्हें किस बात का पैसा देंगे। फाइल में जो भी लिखना या करना है, उसी के हाथ में है। पैसे आते ही एफआर कट जाएगी। अगर, एएसआई फोन भी करें, तो इधर-उधर होने का बहाना बनाकर टालते रहना और मैं बुलाऊं तो तत्काल आ जाना। मामले में चाहे निर्णय कुछ भी हो, मैं आपको (पीडि़त परिवादी) को बंद नहीं होने दूंगा। मस्त रहो।
यह था मामला: सांगठकला पंचायत के सापोल में राजपूताना फेल्सपार की खदान है। इसमें परिवादी ने राजसमंद के हामिद नूर व सरिता सेन को साझेदार बनाया। साझेदारों ने खदान को नहीं चलाया और वे उनकी निजी मार्बल माइंस का मलबा लाकर साझेदारी वाली फेल्सपार खदान में डालने लगा। इस पर परिवादी ने माइंस में साझेदारी की कार्रवाई निरस्त कराने के लिए सिविल न्यायालय में वाद दायर कर दिया। फिर भी परिवादी को डराने, धमकाने के लिहाज से हामिद नूर व सरिता सेन की ओर से जरिए इस्तगासे के राजनगर थाने में 6 जुलाई 2018 को प्रकरण दर्ज कराया गया। इस मामले की जांच एएसआई रामसिंह कर रहे हैं। उक्त मामले में गिरफ्तारी की बात कहते हुए कांस्टेबल महावीरसिंह रिश्वत मांग रहा था।

आरोपी कांस्टेबल व परिवाद की बातचीत के अंश
कांस्टेबल : प्रकरण में एफआर पर कितने दोगे?
परिवादी : आप बोलो, कितने लोगे।
कांस्टेबल : खान साझेदार का पैसा दे दो।
परिवादी : दो साल में लेबर, खनन पर 17 लाख रुपए खर्च हुए, जो साझेदार नहीं दे रहे और माइंस में डपिंग भी कर दी।
आरोपी : एफआर लगाने, थाने में सेट करना और जो भी करना मुझे ही करना है। सब कर दूंगा और आपका बाल भी बांका नहीं होने दूंगा।
परिवादी : कितने लोगे, फिर मेरे को व्यवस्था करनी पड़ेगी।
आरोपी : दो एक पेटी दे देना।
परिवादी : यह तो ज्यादा है, डेढ़ लाख तक ले लेना।
आरोपी : ठीक है, डेढ़ लाख दे देना।
परिवादी : मलबा डाला, डपिंग किया, डराया व पुलिस कार्रवाई की, जिसका खर्चा तो साझेदारों से लेना ही पड़ेगा।
आरोपी : खान साझेदारों से समझौते के तहत साढ़े सात लाख व कुछ ब्याज दे दो। फिर मैं एफआर लिख दूंगा। कोई भी फोन करें, रामसिंह वगैरह तो उन्हें कह देना इधर उधर हूं। ठोस बात के लिए मैं बुलाऊ तो आ जाना।
परिवादी : ठीक है।
आरोपी : ठीक है, … और भाई मेरी फीस कहा है?
परिवादी : बोलो आपकी फीस भी ?
आरोपी : जो हो, जितनी हो अभी दे दो ?
परिवादी : डेढ़ लाख तो सीआई साहब लेंगे और तो राम सिंहजी को नहीं देने क्या ?
आरोपी : रामसिंह को किस बात के, उसे कुछ आता जाता नहीं, किस बात के पैसे।
परिवादी : मुझे तो मेटर निबटाना है।
आरोपी : मेटर मैं निबटा दूंगा।
परिवादी :आपकी फीस कितनी?
आरोपी : 30 हजार दे देना।
परिवादी :10 तो पहले दे चुका हूं, इसकी व्यवस्था करने में दो तीन दिन लगेंगे।
आरोपी : सीआई साहब बुलाए, मैं बुलाऊ तो डरना मत, मैं सब सेट कर दूंगा।
परिवादी : मैं बंद होने से नहीं डरता हूं।
आरोपी : आप मस्त रहो। कुछ अभी सिगरेट विगरेट के तो रुपए दो ?
परिवादी : सिगरेट के क्या दूं। दो सौ- पांच सौ रुपए दे दूं तो बहुत है।
आरोपी : 5 सौ रुपए दे जाओ।
परिवादी : ये लो पांच सौ
आरोपी : नकली तो नहीं है ?
परिवादी : असली है, नहीं होते तो मना कर देता।
आरोपी : दाएं- बाएं रहना और रुपयों की व्यवस्था कर देना।
परिवादी : एक दो दिन में।
हर पहलू से जांच
कांस्टेबल की ओर से रिश्वत मांगने में जो भी तथ्य सामने आए हैं। उसकी हर एक पहलू से जांच की जाएगी, जो भी दोषी पाए जाएंगे। उनके विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजेश चौधरी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजसमंद

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