पोस्ट न्यूज़। चुनावी सरगर्मियों के बिच एक तरफ तो भाजपा अपने सारे हथकंडे अपना रही है वही २०१८ के चुनावों को देखते हुए वसुंधरा सरकार अपने चौथे वर्ष के जश्न की तैयारी कर रही है वही सोमवार को चित्तौड़गढ़ जिले के बड़ी सादड़ी में भाजपा को बड़ा झटका लग गया जहाँ नगर पालिका अध्यक्ष कांग्रेस का प्रत्याशी बिना किसी विरोध के निर्विरोध निर्वाचित हो गया जब की भाजपा के ११ पार्षद होने के बावदूद कांग्रेस के दिलीप चौधरी निर्विरोध निर्वाचित हो गए। भाजपा में आपसी कहल की वजह से यह समभाव हो पाया।
बीस सदस्यीय बोर्ड में 11 सदस्यों के साथ बहुमत होने के बावजूद भाजपा ने नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं किया। नामांकन पत्र की जांच में चौधरी का आवेदन पत्र सही पाया गया। दोपहर 2 बजे नाम वापसी का समय पूूरा होते ही चौधरी निर्वाचित घोषित हो गए।
भाजपा के चुनाव से दूर रहने के पीछे मुख्य वजह अन्दरूनी कलह को माना जा रहा है। चौधरी की जीत पर शुरू में भाजपा विधायक गौतम दक समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनके भाजपा में शामिल हो जाने की अफवाहे फैला दी एवं चौधरी व दक के साथ वाले पुराने फोटो भी डाल दिए। >इससे एक बार असमंजस की स्थिति बन गई,लेकिन चौधरी ने तुरन्त साफ किया कि ये फोटो किसी पुराने सामाजिक कार्यक्रम के है एवं कांग्रेस नहीं छोड़ी है। चौधरी की जीत चित्तौडग़ढ़ जिले में कांग्रेस का मनोबल बढ़ाने वाली है। वर्तमान में जिले की छह नगरपालिका/परिषद में से किसी भी कांग्रेस का मुखिया नहीं था। गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को भाजपा से निर्वाचित अध्यक्ष पुष्करराज माली के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने से यहां उपचुनाव कराया गया। परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल बन गया तो भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा छा गई।

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