narishvar raoनारीश्वर राव

पॉलीटिकल फॉर्ड : ऐसे चुनावी वादे किए जा रहे हैं, जो कभी पूरे नहीं हो सकते। इन वादों से जनता के बीच विश्वास के नहीं, बल्कि राजनेता बन रहे हैं हंसी के पात्र

पॉलीटिकल चेेंज : चुनाव आयोग को ऐसे राजनेताओं के खिलाफ सख्ती बरतनी चाहिए, ताकि वे जनता से झूठे वादे करने से बचे। आयोग को ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे उसके प्रति जनता का विश्वास बढ़े। यही जनमत है।

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में राज्य विधानसभा चुनाव को लेकर पॉलीटिकल लॉफ्टर चैलेंज शो शुरू हो गया है। भाजपा के प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी हो या फिर आप के अरविंद केजरीवाल, सभी नेता एक-दूसरे को चैलेंज करते हुए जनसभाओं में ऐसे-ऐसे चुनावी वादें कर रहे हैं, जिससे भीड़ के बीच ये हंसी के पात्र बन रहे हैं। उदाहरण के तौर पर प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हुई आमसभा में कच्ची बस्तीवासियों से वादा किया है कि आज जहां उनके कच्चे झोंपड़ें बने हैं, वहीं पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे, जो न तो वित्तीय दृष्टि से संभव है और न ही कानूनन सही है। ऐसे में जनता चुनाव आयोग की तरफ ताक रही है कि वे झूठे वादे करने वाले राजनेताओं पर सख्ती करें, ताकि जनता के साथ हो रही जालसाजी रोकी जा सके।
क्रआपञ्ज द्वारा जारी किया गया चुनावी घोषणा पत्र पूरी तरह से लोकलुभावन घोषणाओं और वादों पर आधारित है। घोषणाओं को लेकर संदेह जताया जा रहा है कि क्या दिल्ली राज्य के पास इतनी धन राशि तथा संसाधन है कि दस प्रतिशत वादे भी पूरे किए जा सकें, जो आधी दरों पर बिजली, निशुल्क पानी जैसी सुविधाएं देने तथा पूरे शहर में लाखों सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए किए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं को सुरक्षा उपलब्ध हो सकेगी। इसी प्रकार, भाजपा प्रत्याशी जैसे किरण बेदी, कई सांसद व मंत्री भी ऐसे ही वादे कर रहे हैं, जो चुनावी उन्माद में कूद गए हैं। साफ दिखाई पड़ रहा है कि वे तरह-तरह प्रलोभनों द्वारा मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इन प्रलोभनों को पूरा करने के लिए बजट की जरूरत होगी, जो कुल वास्तविक बजट से सैंकड़ों गुना अधिक है। दिल्ली राज्य के पास सीमित संसाधन है तथा बड़े पैमाने पर नया राजस्व उत्पन्न करने की गुंजाइश भी अधिक नहीं है, खासतौर से उस स्थिति में जब बहुत सारे चुनावी वादों को पूरा करने के लिए टैक्सों में कटौती करनी होगी तथा आर्थिक अनुदान (सब्सिडी) बढ़ाना होगा, जिससे वर्तमान राजस्व में और भी कमी होगी। ऐसे में ये चुनावी वादें पूरे करना असंभव-सा है।
विशेषज्ञों की नजर में १५ लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए करीब एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की जरूरत होगी, जबकि सरकार की कुल आय ही तीस हजार करोड़ है।
भाजपा, कांग्रेस और आप पार्टी राजधानी में चुनाव प्रचार में जुटी हुई है और मतदाताओं से लगातार ऐसे वादे किए जा रहे हैं, जो वास्तिक धरातल पर कभी संभव नहीं है। ऐसे में जनता झूठे वादे करने वाले इन नेताओं का उपहास कर रही है और क्रसुधी जनञ्ज चुनाव आयोग की तरफ देख रहे हैं कि कब वहां से ऐसे झूठे नेताओं के खिलाफ सख्ती के आदेश जारी होंगे।
प्रधान सेवक ही भाग्य भरोसे : दिल्ली की जनसभाओं में प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि जनता को नसीब वाला नेता चाहिए या भाग्यहीन। वे स्वयं को नसीब वाला और अरिवंद केजरीवाल को भाग्यहीन बता रहे हैं। श्री मोदी भाग्य और दुर्भाग्य की बातें इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि कुछ समय पूर्व विरोधियों ने कहा था कि मोदी का नसीब अच्छा है इसलिए क्रूड ऑयल के दाम नीचे आए हैं। अब विरोधी ये कहने लगे हैं कि देश का प्रधान सेवक भाग्य-दुर्भाग्य में विश्वास रखता है, जो कभी भी देश को भाग्य भरोसे छोड़ सकता है।
आप ने खेला जातिवाद का पैंतरा : अरविंद केजरीवाल की गोत्र को लेकर भाजपा ने दिल्ली में पोस्टर लगवाए हैं, जिसमें उन्हें उपद्रवी गोत्र का बताया गया है। इसको लेकर वे काफी नाराज हैं और चुनाव आयोग को भी शिकायत करने वाले हैं। वे कह रहे हैं कि भाजपा को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि भाजपा ने उनका नहीं, बल्कि पूरे अग्रवाल समाज का अपमान किया है। केजरीवाल को जनता जातिगत पैंतरेबाजी से दूर समझ रही थी, लेकिन भाजपा द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों से वे भी शायद बौखला गए हैं, जो चुनाव के दौरान काम में आने वाले पुराने पैंतरों को देश की राजधानी में खेल रहे हैं।

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