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सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में सात साल से बंद थे, दस दिन में एक बार सीबीआई कोर्ट में देनी होगी हाजिरी, दो और साथी आईपीएस की भी जमानत
उदयपुर। मुंबई की सीबीआई कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ प्रकरण में निलंबित आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन और गुजरात के दो आईपीएस अधिकारियों की जमानत अर्जी आज मंजूर कर ली है। इनमें अभय चूड़ासमा और एमएल परमार शामिल है। कोर्ट ने जमानत अवधि के दौरान दस दिन में एक बार, यानी महीने में तीन बार कोर्ट में स्वयं हाजरी देने का आदेश भी दिया है। इससे पूर्व इस मामले में गुजरात के आईपीएस राजकुमार पांडियन की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पांडियन की जमानत सात साल में इस केस की ट्रायल तक शुरू नहीं होने के आधार पर स्वीकृत की थी। इसको आधार मानते हुए दिनेश एमएन सहित तीन आईपीएस अधिकारियों की जमानत मुंबई की सीबीआई कोर्ट ने मंजूर की है।
उल्लेखनीय है सोहराबुद्दीन शेख का २००५ में अहमदाबाद क्षेत्र में फर्जी एनकाउंटर किया गया था। उसके साथ उसकी पत्नी कौसर बी भी थी, जिसकी भी हत्या कर दी गई। सोहराबुद्दीन, कौसर बी और तुलसी प्रजापति को पुलिस ने सांगली स्टेशन से गिरफ्तार किया था,
तब य लोग वीडिया कोच में सवार थे। बाद में तीनों को गुजरात पुलिस के हवाले कर दिया गया। गुजरात पुलिस ने उदयपुर पुलिस को सूचना दी। सोहराब और तुलसी यहां पर हमीद लाला केस में वांटेड थे। बाद में एक फर्जी कहानी रचकर सोहराब का अहमदाबाद में एनकाउंटर कर दिया गया। इसी दौरान कौसर बी की भी नृशंस हत्या कर दी गई। इस फर्जी एनकाउंटर के बाद तुलसी को भीलवाड़ा से गिरफ्तार करने की झूठी कहानी बनाई गई। तुलसी की गिरफ्तारी के एक साल बाद उसकी भी फर्जी मुठभेड़ में गुजरात के साबरकांठा में हत्या कर दी गई। तुलसी की गिरफ्तारी में तत्कालीन डिप्टी सुधीर जोशी, सीआई रणविजयसिंह और भंवरसिंह हाड़ा शामिल थे। ये लोग बाद में एक सीनियर आईपीएस को बचाने के लिए सरकारी गवाह बन गए और दिनेश एमएन के खिलाफ ही गवाही दे दी। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व दिनेश एमएन की एक बार पहले भी जमानत हो चुकी है, तब वे साबरमती जेल में थे।
जेल में है उदयपुर के तीन अधिकारी: दिनेश एमएन के साथ तत्कालीन सीआई अब्दुल रहमान, सब इंस्पेक्टर श्यामसिंह और हिमांशुसिंह मुंबई की जेल में अभी भी बंद है। एमएन की जमानत होने के बाद अब इनको भी जमानत का रास्ता साफ होता दिखाई पड़ रहा है।

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