maxresdefaultउदयपुर ,दिसंबर २०१८ से उदयपुर से अजमेर के बिच चलने वाले ट्रेनों के डीजल इंजन अलविदा हो जायेगे इनकी जगह इलेक्ट्रिक ट्रेन लेलेगी। उदयपुर से अजमेर के बिच रेल के विधुतीकरण का कार्य पुरे जोर से चल रहा है। जिस गति से रेल को विद्युतीकरण करने का कार्य किया जारहा है, उस हिसाब से तय सीमा दिसंबर २०१८ से पहले उदयपुर से अजमेर के बिच चलने वाली रेले विद्युत से चलने वाली हो जायेगी। विद्युतीकरण के बाद अजमेर से उदयपुर के बीच चलने वाली ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रतिघंटा तक हो सकेगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार उदयपुर से अजमेर के बिच रेलवे लाइन के विधुतीकरण का कार्य अजमेर से शुरु होकर भीलवाडा के निकट पहुच गया है। अधिकारी इस प्रयास में लगे हुए है कि तय समय के पहले इस कार्य को पूरा कर लिया जाय। अजमेर में जुलाई में इस काम की शुरुआत उप रेलवे के जीएम अनिल कुमार सिंहल तथा डीआरएम पुनीत चावला की ओर से की गई थी। इस प्रोजेक्ट का बजट 320 करोड़ 18 लाख रुपए है। पहले चरण में फाउंडेशन का काम हो रहा है। इसके बाद अब खंभे लगाने की शुरुआत होने वाली है। इसके बाद वायरिंग, ट्रेक्शन सब स्टेशन निर्माण, कमिशनिंग अवधि में टेस्टिंग और सीआरएससी (मुख्य रेलवे सुरक्षा आयुक्त) के निरीक्षण के बाद इलेक्ट्रिक ट्रेन का सफर शुरू होगा। अजमेर से उदयपुर तक विद्युतीकरण प्रोजेक्ट का समयावधि ढाई साल है। यह समय दिसंबर 2018 में पूरा होना है।
इलेक्ट्रिकट्रेन से रेल यात्रियों को कई फायदे होंगे। उदयपुर से अजमेर के पूरे ब्लॉक में लंबी दूरी की फास्ट ट्रेनें नहीं चल पाती हैं। वहीं कम ट्रेनों का ही परिचालन होता है। इलेक्ट्रिक होने से ट्रेनों की संख्या बढ़ सकेगी। इससे अब तक अजमेर से उदयपुर जहां 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलती हैं, उनकी स्पीड 110 से 130 किमी प्रति घंटे तक हो जाएगी। अजमेर से उदयपुर के बीच 294.52 किमी ट्रैक का विद्युतीकरण किया जाना है।
प्रोजेक्ट में 6 ट्रेक्शन सब स्टेशन (टीएसएस) बनने हैं। उमरडा , मावली घोसुंडा, हमीरगढ़, सरेरी और नसीराबाद में यह बनाए जाने हैं। टीएसएस से ट्रेनों को 25 केवी सप्लाई दी जाती है। टीएसएस बनने के बाद कमिशनिंग में फेज होगा, जिसमें वायरिंग, ट्रेन परिचालन में बिजली संबंधी टेस्टिंग की जाएगी। इन चरणों में हुए काम की जांच आखिर में सीआरएससी करेंगे।

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