निजी स्कूलों के और अभिभावकों के बीच फीस को लेके जारी खीचतान अब हाई कोर्ट के आदेश से कम हो जाएगी इस फैसले से स्कूल संचालको को राहत दी गयी है। परन्तु अभिभावकों को फोरी तोर पर ही ये राहत महसूस होगी क्युकी हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की फीस वसूली के मामले में स्कूल संचालकों को राहत देकर अंतरिम व्यवस्था करते हुए ट्यूशन फीसवसूली  की 70 फीसदी राशि को अभिभावकों से तीन  किस्तों में वसूल करने का फैसला सुनाया है।इससे आखिरकार अभिभावकों पर बोझ पड़ेगा ही फिर भी सोमवार को दिए आदेश को स्कूलों ने संतुलित फैसला बताते हुए स्वागत किया।इनका कहना है कि फैसले के साथ शिक्षक, संचालक और उनसे जुड़े परिवारों को ना केवल राहत मिलेगी, बल्कि अभिभावकों के भीतर जीरो सेशन को लेकर चल रहा कंफ्यूजन भी खत्म हो जाएगा।प्राइवेट स्कूल डायरेक्टर्स एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष दिलीप सिंह यादव का कहना है कि इस फैसले से स्कूल ऑनलाइन कक्षा का संचालन करने के साथ ही स्कूल के शिक्षकों के वेतन का भुगतान भी कर सकेंगे। अभिभावक और स्कूल के लिए  यह फैसला सराहनीय है। सीबीएसई कोऑर्डिनेटर और सेंट एंथोनी स्कूल के प्रिंसिपल विलियम डिसूजा ने इसे संतुलित आदेश बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि ऑनलाइन क्लासेज ले रहे शिक्षकों और उनके परिवार के लिए भी यह राहत देने वाला फैसला है। इससे स्कूल खर्चे और वेतन दोनों का भुगतान करने में समर्थ हो सकेगी। बच्चों की शिक्षा और उनके हित मे कार्य करने वाले शिक्षकों की आय, दोनों के हित में यह फैसला हैं। इस आदेश से अभिभावकों पर भी भार नहीं पड़ेगा। साथ ही आदेश ने जीरो सेशन के संशय को खत्म कर दिया। इस आदेश से अभिभावकों को मिलेगी राहत अभिभावक समिति सदस्य प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि निर्णय से संस्था प्रबंधन और अभिभावकों के बीच गतिरोध खत्म होगा। न्यायालय ने किस्तों में ट्यूशन फीस जमा कराने की सुविधा देकर अभिभावकों को राहत दी हैं।

कोर्ट ने जो गाइड लाइन दी है वो इस प्रकार है…….

स्कूल ऑनलाइन कक्षा चला सकते हैं। मार्च से जो भी बकाया फीस है, उसका योग करके 70% तक तीन किस्तों में वसूल किया जा सकेगा। इन किस्तों की अंतिम तारीख 30 सितंबर, 30 नवंबर और 31 जनवरी रहेगी। बाकी फीस का फैसला केस खत्म होने पर किया जाएगा। जिसकी जमा नहीं कराई, उसकी ऑनलाइन कक्षा बंद की जा सकती है, लेकिन स्कूल नाम नहीं काट सकेंगे।

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