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उदयपुर। महाराणा प्रताप जयंती पर मंगलवार सुबह मोती मगरी में पुष्पांजलि कार्यक्रम के दौरान मेवाड़ राजघराने का विवाद एक बार फिर सार्वजनिक हो गया। महेंद्रसिंह मेवाड़ के छोटे भाई अरविंदसिंह मेवाड़ के बेटे लक्ष्यराजसिंह पुष्पांजलि करके लौट रहे थे, तभी महेंद्रसिंह अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे। रास्ते में क्रोस होने पर लक्ष्यराजसिंह ने आदर पूर्वक अपने बड़े पिता को प्रणाम किया। महेंद्रसिंह ने अभिवादन का कोई जवाब नहीं दिया और दोनों आगे बढ़ गए, लेकिन उनके समर्थक एक-दूसरे को रास्ता नहीं देने पर अड़ गए। महेंद्रसिंह के समर्थकों ने तो लक्ष्यराज के समर्थकों को धकियाते हुए यह भी कह दिया कि हटो रे…!
इसके बाद महेंद्रसिंह मेवाड़ अपने समर्थकों के साथ सीढिय़ा उतर गए। सीढिय़ों के नीचे प्रताप स्मारक समिति के सचिव युद्धवीरसिंह और अन्य पदाधिकारी पांडाल में बैठे थे। तो महेंद्रसिंह के समर्थकों ने वहां जाकर कहा कि महाराणा साहब आ रहे हैं, तो उनके सम्मान में खड़े क्यों नहीं हो रहे हो? इस पर युद्धवीरसिंह ने कहा कि अपनी-अपनी मर्जी है, कोई खड़ा नहीं होना चाहता, तो नहीं होगा। कोई जबरदस्ती थोड़े ही है। दो तीन मिनिट तक असली और नकली महाराणा के बारे में गर्मागर्म बहस चलती रही। बाद में कुछ लोगों ने समझाइश करके मामला शांत किया। इस दौरान महेन्द्रसिंह और लक्ष्यराजसिंह दुर खड़े एक दुसरे को देखते रहे।

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