उदयपुर। विधानसभा चुनाव हो गए परिणाम भी आगये, राज्य में कांग्रेस सत्ता में आगई और उदयपुर शहर विधानसभा से भाजपा के गुलाबचंद कटारिया जीत गए। शहर में १.२५ प्रतिशत ऐसे भी लोग है जिन्हें कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं। जिन्होंने नोटा का उपयोग किया और अपनी असहमति ज़ाहिर की।
जब से एवीएम मशीन में नोटा का बटन आया है लोग इसका उपयोग करने लग गए है। उदयपुर शहर विधान सभा क्षेत्र में करीब १.२५ प्रतिशत लोगों ने नोटा का उपयोग किया।  शहरी विशंसभा में 20५२ लोगों ने इस बटन का उपयोग किया और खड़े हुए किसी भी प्रत्याशी को शहर के विकास के काबिल नहीं समझा। चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार उदयपुर शहर में १५९०७७ लोगों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया। इसमे अगर भाजपा और कांग्रेस के वोट प्रतिशत की बात करें तो ४७ प्रतिशत वोट शेयर भाजपा के गुलाबचंद कटारिया के खाते में गया और कांग्रेस की गिरिजा व्यास के खाते में ४१ प्रतिशत वोट शेयर रहा। निर्दलीय प्रवीन रतालिया और दलपत सुराना जिन्होंने कटारिया का विरोध करते हुए शहर भर काफी प्रचार किया था वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए जनता सेना के दलपत सुराना २.३५ प्रतिशत और प्रवीन रतालिया को ६.८४ प्रतिशत वोट शेयर ही मिला। बाकी के सात प्रत्याशी जो कि आमआदमी पार्टी, शिवसेना और निर्दलीय से खड़े हुए है थे वे एक प्रतिशत का वोट शेयर भी प्राप्त नहीं कर सके।
गुलाबचंद कटारिया के नुकसान की बात करें तो आंबेडकर मंडल जिसके अतुल चंदालिया अध्यक्ष है वहां से भाजपा नुकसान में रही लेकिन हिरन मगरी के सेक्टर में जैन वोटों में सबसे अधिक फायदे में रही और यहीं से कटारिया ने काफी अच्छी बढ़त बना ली। हालाँकि अंदरूनी शहर के भी कई वार्ड ऐसे रहे जहाँ कटारिया को खूब वोट मिले।
चुनाव के बाद बुधवार को जहाँ एक तरफ भाजपा के नेता अपनी जीत का जशन मनाते रहे वही कांग्रेस के कार्यकर्ता और शहरी नेता को सत्ता में आने की ख़ुशी तो थी लेकिन शहर में हार जाने का गम और दिन भर यही जोड़ तोड़ करते रहे की आखिर कहाँ गलती हुई और कहाँ पर कमज़ोर रहे।

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