एशिया की दूसरी सबसे बडी मीठे पानी की झील 2 मिमी खाली

उदयपुर। एशिया की दूसरी सबसे बडी मीठे पानी की झील जयसमंद पर बने हाथी के पैरों तक लहरों के साथ पहुंचते पानी के बाद बुधवार को अब इसके पैर पानी से ढकने लगे है। लबालब जयसमंद झील अब 2 मिमी खली हे जिसे भरने में 2 दिन लग सकते है। इसके बाद इस पर चादर चलेगी।
जयसमंद ’ढेबर झील’ में गोमती व खरका नदी से लगातार आवक जारी है। लेकिन इसका फेलाव क्षेत्र अधिक होने से इसमें प्रतिदिन हल्की आवक ही हो पा रही है। लगातार आवक के चलते जयसमंद झील पूरी तरह लबालब होकर छलकने को आतूर है। आज इसका जलस्तर 8.36 मीटर रिकॉर्ड किया गया जबकि इसकी पूर्ण भराव क्षमता 8.38 मीटर है। सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विशाल क्षेत्रफल में फेली इस झील में 2 मिमी पानी के लिए अभी दो दिन ओर इंतजार करना पड सकता है। इस आवक के बाद ही झील के अंतिम मुहाने पर स्थित चादर चलने वाले स्थान चादर चलेगी। हालांकि झील पर बने पत्थरों के हाथियों के पैर पानी में डूबने लगे है जो इसके पूरी तरह भरने का संकेत दे रहे है। नैसर्गिक सौन्दर्य से खिली आभा को निहारने इन दिनों पर्यटकों व आसपास की भीड झील किनारे पहुंचने लगी है।
इधर, लेकसिटी में बारिश का दौर आज भी जारी रहा। दोपहर में हुई मध्यम क्रम की बारिश से खूब भिगोया। बाढ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार शाम 7 बजे तक उदयपुर में 7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। सर्वाधिक बारिश गोगुन्दा में 27 मिमी रिकॉर्ड की गई। सीसारमा नदी के 3 फीट बहने से स्वरूपसागर के दो गेट आधा-आधा फीट व मदार नहर 2 फीट बहने से फतहसागर के चारों गेट आधा-आधा इंच खुले हुए है। झरनों व पहाडों से रिसकर आ रहे पानी से बडी झील का जलस्तर भी लगातार बढ रहा है। पूर्ण भराव क्षमता 32 फीट वाली इस झील में 26 फीट पानी आ चुका है। मदार बडा एक इंच व मदार छोटा आधा इंच ओवरफ्लो बह रहे है।

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