उदयपुर। “आमजन में विश्वास अपराधियों में डर” यह वाक्य हर पुलिसकर्मी कर्मी कांस्टेबल से लेकर एक आईपीएस तक की रग-रग में बसा हुआ है। पुलिस की इसी शपथ की वजह से एक आम नागरिक चैन की नींद सोता है। हालाँकि सबसे ज्यादा आरोप भी पुलिस पर ही लगते है, और यह वाक्य कभी कभी उल्टा भी दिखाई देता है, लेकिन इस बात को मानना होगा कि साल के 365 दिन बिना छुट्टी के कार्य करने वाले ये समाज के रक्षक की बदोलत ही शहर में शांति व्यवस्था कायम है।
पुलिस के अत्याचार और भ्रष्टाचार की कहानियाँ हर कोई कह देता है, लेकिन इन सबके बावजूद पुलिस ऐसे-ऐसे कार्य कर देती है जिसकी प्रसंशा खुले दिल से होनी चाहिए। लेकिन प्रसंशा छोड़िये एक सम्मान की नज़र उन पर नहीं उठती। अपराधियों में डर के तो कई उदाहरण है लेकिन आम जन में विश्वास की बात सार्थक हुई आज उदयपुर शहर के अम्बामाता थाने में जहाँ कुछ युवा पुलिस कांस्टेबल वाहिद हुसैन का जन्मदिन मनाने केक लेकर पहुच गए और पुरे सम्मान के साथ उन युवाओं ने कांस्टेबल वाहिद हुसैन का जन्म दिन मनाया उन्हें बधाई दी। युवाओं में सिद्धार्थ सोनी ने बताया कि जहाँ पुलिस और थाने के नाम से एक आम आदमी के पसीने छूट जाती है, वहीँ अम्बामाता थाने में कांस्टेबल वाहिद हुसैन का ऐसा व्यवहार देखने को मिला कि पुलिस को लेकर हमारा सारा डर और भ्रम दूर हो गया। सिद्धार्थ ने बताया कि एक केस के दौरान अम्बामाता थाने के कांस्टेबल वाहिद भाई ने हमारी सहायता कि बिना किसी लालच के कानून की बारीकियां समझाते हुए की, क़ानून के दायरे में हमे हर बात को समझाया और हमारी मदद की। सिद्धार्थ सोनी ने बताया मेरे साथ-साथ मेरे साथियों की भी यह भ्रम टूटा की कोई भी पुलिस कर्मी बिना लेन देन के कुछ करता है। वाहिद हुसैन को हमने सहायता के बदले कुछ कहना चाहा तो उन्होंने हाथ जोड़ कर बस एक वाक्य कहा कि आप लोगों का संतोष ही एक पुलिस कर्मी होने के नाते मेरा इनाम है। सिद्धार्थ सोनी ने बताया कि तब से मेरे और मेरे दोस्तों के दिल में एक पुलिस कर्मी के लिए इज्ज़त बढ़ गयी। एक जनवरी को वाहिद भाई का जन्म दिन जब हमने फेसबुक पर देखा तो उनसे पुछ कर हम थाने में केक लेकर गए और उनका जन्म दिन की बधाई दी। वाहिद हुसैन का मानना है कि राजस्थान पुलिस “सेवार्थ कटिबद्धता” के लिए जानी जाती है, और आमजन के सेवार्थ के लिए ही हम है और विनम्रता हमारा पहला सिद्धांत है।
इस दौरान थाने के अन्य पुलिस कर्मी और थाना अधिकारी ने भी वाहिद को बधाइयाँ दी।
सिद्धार्थ सोनी और उनके साथियों का मानना है कि जब एक महकमे की बुराई बढ़ा चड़ा कर बताते है तो उसकी अच्छाइयों का भी खुले दिल से सम्मान करना चाहिए। आम लोगों को एक एक पुलिस कर्मी चाहे सिपाही हो या अफसर उसका और उसके किये गए अच्छे कार्यों का सम्मान करना चाहिए।

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