उदयपुर। 54 सालों से भाजपा में रहे कर्मठ कार्यकर्ता दलपत सुराणा ने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे ही दिया। इतना ही नहीं श्री सुराणा ने हाथोहाथ जनता सेना की सदस्यता भी ग्रहण कर ही ली। आपको बता दे कि पिछले दिनों दलपत सुराणा ने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से उदयपुर शहर या मावली से विधानसभा का टिकिट देने की अपील की थी, लेकिन उन्हें आभास हो गया कि पार्टी उन्हें टिकिट नहीं देगी तो सुराणा ने सोमवार को शहर की होटल रोयल इन जो हमेशा बागियों की मुख्य केंद्र रही है। उसमें जनता सेना का दामन थाम लिया और भाजपा की सदस्यता से ही इस्तीफा दे दिया। पूरा मेवाड़ जानता है कि भाजपा के कद्दावर नेता और मेवाड़ भाजपा के स्तम्भ माने जाने वाले गुलाबचंद कटारिया की इस बार काफी कद्दावर और पुराने नेता खिलाफत कर रहे हैं। कुछ समय पहले कटारिया की खुलकर बगावत करते हुए भैरों सिंह शेखावत जागृति मंच भी बनाया गया था। जिसमें भाजपा के दिग्गजों के साथ कटारिया के समधि रोशनलाल जैन तक शामिल हुए थे। ऐसे में यह मान लिया गया था कि इस बार कटारिया की राजनीति में बने रहने की डगर काफी मुश्किल होगी और सोमवार को यह साबित भी हो गया। जब जागृति मंच जनता सेना एक हो गए। आपको बता दे कि जनता सेना सुप्रीमों रणधीर सिंह भीण्डर को कटारिया के विरोध के कारण ही गत विधानसभा चुनावों में वल्लभनगर से टिकिट नहीं मिला था और उन्होंने निर्दलीय लड़ते हुए जम्बो जीत हांसिल की थी, यहां पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार गणपत मेनारिया की जमानत तक जब्त हो गई थी। सोमवार को दलपत सुराणा के जनता सेना में शामिल होते ही उनके उदयपुर से लड़ने की कवायदें तेज हो गई है अब देखना दिलचस्प होगा कि किस तरह कढ़ाई कमल पर भारी पड़ती है। आइए आपको सुनाते है दलपत सुराणा ने भरे गले से कटारिया के लिए क्या कुछ कहा और क्यों 54 साल बाद यह फैसला लिया सुनीए उन्हीं की कहानी उन्हीं जुबानी।

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