शर्मा हॉस्पीटल में होता है मरीजों की जान के साथ खिलवाड, मानव अंगों से होती है छेड़छाड़

उदयपुर। हम आपको १५ मार्च की न्यूज़ में बताया था कि उदयपुर में भुवाणा चौराहे पर स्थित शर्मा मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पीटल में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है और वहां उपचार करवाना खतरनाक साबित हो सकता है। इस हॉस्पीटल में मरीजों का उपचार नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी हालत में पहुंचा दिया जाता हैं कि अहमदाबाद या अन्य बड़े अस्पतालों में ले जाकर ही उनकी जान को बचाया जा सकता है। आज की इस न्यूज़ में हम आपको वो सारे सबुत बतायेगें जिसके इलाज के लिए इन्होने लाखों रूपये तो लेलिये लेकिन एक मामूली मर्ज का नोसिखिये और नालायक डॉक्टर द्वारा इलाज करते करते कैसे मौत के मूंह में पहुचा दिया।

उदयपुर के भुवाना चोराहे पर स्थित पांच सितारा नुमा बने मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल,.. शर्मा हॉस्पिटल की । इस हॉस्पीटल का संचालन डॉ. अनिल शर्मा और उसकी पत्नी कुसुम शर्मा द्वारा करना बताया जाता है, जहां इनका नालायक और नोसिखिया बेटा डॉक्टर धवल शर्मा डॉक्टरी जैसे पेशे को मजाक समझते हुए लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
मल्टी स्पेशलिस्ट के नाम पर लूटने वाले इन नोसिखिये डॉक्टरों ने उदयपुर शहर के वरिष्ठ पत्रकार नारीश्वर राव को मौत के मूंह में धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी,…. इन नोसिखिये डॉक्टरों के पास पत्रकार नारीश्वर राव गए तो थे किडनी में पथरी निकलवाने का मामूली इलाज करवाने लेकिन इन्होने किडनी को इंजर्ड करते हुए हार्ट का पेशेंट बता दिया और 10 दिन में एक हँसते खेलते जवान को दुनिया से विदा करने का इंतजाम कर दिया ,… वह तो ठीक है परिजनों की तत्परता और शहरवासियों की दुआएं काम आई कि अहमदाबाद ले जाकर उनकी जान बचाई जा सकी।

इस नोसिखिये डॉक्टर धवल शर्मा द्वारा उपचार के नाम पर की गई काली करतूत का खुलासा अहमदाबाद के सिम्ंस हॉस्पीटल में हुआ। अहमदाबाद के डॉक्टरों ने जब इस बात का खुलासा कि उदयपुर के वरिष्ठ पत्रकार नारीश्वर राव की राइट किड्नी में इंजरी है, तो उनके परिजनों के हाथ-पैर फुल गए। पता चला कि शर्मा हॉस्पीटल में नौ फरवरी को डॉ. धवल शर्मा द्वारा पूर्व में ऑपरेशन के दौरान डाले गए स्टैंट को अनाड़ी तरीके से री-मूव करते समय नारीश्वर राव की किड्नी चोटिल हो गई। इससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसका खुलासा सिंस हॉस्पीटल द्वारा दिए गए डिस्चार्ज सर्टिफिकेट से भ्भी होता है, जिसमें बताया गया है कि मरीज को यूरोअप्सीस और किड्नी में गंभीर चोट है, जिसका वहां पर उपचार किया गया।

रिपोर्ट बताती है कि किस तरह शर्मा हॉस्पीटल के नालायक डॉक्टर ने एक अच्छे खासे इंसान की जान को खतरे में डाल दिया। अब हम आपको दिखाते हैं शर्मा हॉस्पीटल का डिस्चार्ज सर्टिफिकेट, जिसमें बताया गया है कि मरीज नारीश्वर राव को यूरीन का इंफेक्शन नहीं, बल्कि हार्ट की तकलीफ है और ११ व १२ फरवरी को भारी मात्रा में श्री राव को दवाइयां दी गई, जिससे उनकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई और उन्हें अहमदाबाद रेफर किया गया। डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में बताया गया कि नारीश्वर राव को जीवन रक्षक उपकरणों के साथ हॉयर सेंटर के लिए रेफर किया जा रहा है। इस दौरान डॉक्टर कुसुम शर्मा और धवल शर्मा ने मरीज नारीश्वर राव और परिजनों को बताया कि सिम्स हॉस्पीटल में उनके परिचित हार्ट विशेषज्ञ डॉ. धवल प्रजापति है, जिनको उनका रेफरेंस देना, लेकिन वहां जाने के बाद पता चला कि नारीश्वर राव को हार्ट की कोई बीमारी ही नहीं है, बल्कि उन्हें यूरीन इंफेक्शन और धवल शर्मा द्वारा दी गई किड्नी की चोट है, जिसका सिंस हॉस्पीटल में दस रोज तक उपचार करके श्री राव की जान बचाई गई। देखिए शर्मा हास्पीटल से दिए गए डिस्चार्ज सर्टिफिकेट को, जिसमें लिखा गया है कि विथ ऑक्सिजन मॉक्स रेफर टू हॉयर सेंटर।

सारी रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर ज़ाहिर है कि शर्मा हॉस्पीटल में मरीजों का उपचार नहीं होता है, बल्कि यहां पहुंचने वाले मरीजों की तबीयत को और अधिक खराब करके उन्हें हायर सेंटर भेज दिया जाता है। पहले तो यहां पर इलाज के नाम पर भारी भरकम फीस वसूली जाती है। बाद में मरीज की तबीयत और बिगाडक़र हॉयर सेंटर भेजा जाता है। अंदेशा होता है कि इनका हॉयर सेंटर से भी कमीशनखोरी का धंधा है। रिपोर्ट जिसमें बताया गया है कि नारीश्वर राव का २० जनवरी को शर्मा हॉस्पीटल में किड्नी स्टोन का ऑपरेशन किय गया और स्टैंट डाला गया, जिसमें बताया गया है कि स्टैंट को तीन से चार हफ्फ्फ्ते बाद री-मूव किया जाएगा। इसी स्टैंट को री-मूव करने के दौरान नालायक डॉ. धवल शर्मा ने नारीश्वर राव की किड्नी को इंजर्ड किया था और उनकी जान पर बन आई थी।
शर्मा हॉस्पीटल से २० से २४ जनवरी के बाद दिया गया डिस्चार्ज सर्टिफिकेट
निष्कर्ष : तो देखा आपने कैसे शर्मा हॉस्पीटल में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ और मानव अंगों के साथ छेड़छाड़ की जाती है। हम आपसे अपील करते है कि ऐसे नालायक और नौसिखिये डॉक्टरों से अपने परिजनों का उपचार नहीं करवाए, क्योंकि ये डॉक्टर आपके अपनों की जान को खतरे में डाल सकते हैं।
हमारे पास कुछ और मरीजों की रिपोर्ट है जिनकी जान के साथ इन्होने खिलवाड़ किया है जिसको हम आपको हमारे अगले भाग में बताएगें

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