उदयपुर। धार्मिक कट्टरता इन दिनों पुरे हिन्दुस्तान में अपने चरम पर है, और यहाँ कट्टरता सिर्फ दूसरे धर्म को लेकर नहीं अपने ही धर्म को लेकर भी है। राजस्थान के उदयपुर शहर में इसका उदाहरण देखने को मिला जब एक युवक ने वहाबी लड़की से निकाह कर लिया तो उसको सुन्नी समुदाय ने वहाबी बता कर अपनी माँ के जनाजे को ना तो कांधा देने दिया ना ही कब्रस्तान में जाने दिया। पुलिस सुरक्षा में जनाजे को कब्रस्तान ले जाया गया और सुपुर्दे ख़ाक किया गया।
राजस्थान के उदयपुर शहर के चमनपुरा में १०० वर्षीय रहमत बाई का इन्तक़ाला हो गया। रहमत बाई के चार बेटे है रफीक, हुसैन, । वह चमन पूरा में रफीक, हुसैन और अब्दुल कादिर एक भाई उदयपुर से बाहर रहता है। रहमत बाई हुसैन और रफीक के साथ चमन पूरा में ही रहती थी। मंगलवार को रहमत बाई का इंतक़ाल हुआ तो अब्दुल कादिर को सुन्नी समुदाय ने माँ के जनाजे को कांधा नहीं देने दिया ना ही कब्रस्तान में दाखिल होने दिया। अब्दुल कादिर ने वहाबी परिवार की बेटी से निकाह किया था तब से ही सुन्नी समुदाय ने कादिर को कथित टूर पर वहाबी करार देदिया था। अब्दुल कादिर ने अपनी मां को इंतकाल के बाद दफनाने के लिए हाथीपोल पुलिस थाने में लिखित में सूचना दी। जब यह बात समाज के लोगों को पता चली तो वे अब्दुल के कब्रिस्तान में आने को लेकर विरोध में गए। इसके बाद मामला बढ़ता देख पुलिस ने भी अब्दुल कादिर को उसकी मां के जनाजे में जाने से रोकने के लिए हाथीपोल थाने में बैठा लिया। तनाव की आशंका पर जनाजा भी पुलिस के साये में निकला। इससे अब्दुल कादिर अपनी ही मां को सुपुर्द-ए-खाक नहीं कर सका। रफीक और हुसैन ने ही सारे रिवाज अदा किए। हुसैन का कहना है कि मामला नहीं बिगड़े इस कारण पुलिस ने कागज पर लिखवाया था। समाज वालों के कहने के कारण अब्दुल कब्रिस्तान में नहीं आ सका।
गौरतलब है कि पहले भी कब्रिस्तान में अन्य फिरके के शव को दफनाने को लेकर हुए विवाद हुआ था। जिसमे खांजीपीरनिवासी मोहम्मद यूसुफ की म़ृत्यू 9 फरवरी 2016 को हुई थी। अगले दिन अश्विनी बाजार स्थित कब्रिस्तान में मृतक के परिजनों ने गाड़ दी थी। परिजन जैसे की घर पहुंचे पीछे से मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तान पहुंच कब्र खाेद लाश बाहर निकाल दी थी।

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