Udaipur। झीलों में बोटिंग के ठेके आवंटन में अनियामाताताएं और नियमों को साइड में रख कर डिफाल्टर ठेकेदार को बोटिंग का ठेका देने के मामले में सोमवार को High court  ने नगर निगम को जोरदार फटकार लगाईं। High court ने पिछोला बोटिंग (lake Pichola) के टेंडर में हुई अनियमतता की जांच एसीबी को सोंप सात दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सूत्रों की माने तो गड़बड़ी पाए जाने पर महापोर भी हाईकोर्ट में तलब किये जासकते है।
pichola में botting का ठेका आवंटन को लेकर हाईकोर्ट में वाद चल रहा है। जानकारी के अनुसार करीब डेड साल पहले पिछोला में एक करोड़ सतेसठ लाख में मेवाड़ा बोटिंग का ठेका हुआ था। लेकिन Nagar Nigam ने काम देने के बाद वापस से कैंसल कर दिया था। बाद में इस ठेके में स्वरुप सागर और जोड़ कर यष एम्यूजमंेट को ठेका दे दिया। जबकि यश एम्युजमेंट नियमों के आधार पर ठेके की शर्तें ही पूरी नहीं करते ऐसे में एम एम ट्रावेल्स ने दावा किया था कि नियमों के आधार पर वह उससे पहले बात करनी चाहिए थी क्योंकि टेण्डर मेवाड़ा के बाद तो वो ही आ रही थी। वहीं यष एम्यूजमेंट के पास तो इपीएफ भी नहीं था। इसी बीच एम एम ट्रावेल्स व मेवाड़ बोटिंग ने हाईकोर्ट में रीट लगा दी। मेवाड़ बोटिंग का कहना है कि नियमों की अनदेखी करते हुए हमारा ठेका केंसल किया। आज जोधपुर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी माना की यश एम्युसमेंट को दिया गया ठेका कही ना कही गड़बड़ी दर्शाता है। मेवाड़ बोटिंग के अधिवक्ता ने भी बताया की महापौर ने चार माह तक मेवाड़ बोटिंग की फ़ाइल दबा कर रखी और बाद में नए टेंडर जोड़ कर यश एम्युसमेंट को देदिए। इधर एम् एम् ट्रावेल्स वालों का कहना है कि नियमों के आधार पर यश एम्युसमेंट ठेके के योग्य है और इसके बाद अगर किसी को ठेका मिलना चाहिए तो वह एम् एम् ट्रावेल्स को मिलना चाहिए। हाईकोर्ट ने सोमवार को साड़ी बातों को सुनाने के बाद जांच एसीबी को सोंप दी और एक हफ्ते में रिपोर्ट देने की बात कही है। कोर्ट ने अनियमितता साबित होने पर यह भी कहा की महापौर को भी तलब कर लिया जायेगा और अगर इसमे किसी अधिकारी की कोई लिप्तता हुई तो उसके खिलाफ बी कारवाई के निर्देश दिए जा सकते है।

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