IMG_0077जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ माणिक्य लाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय का इतिहास विभाग 30-31 जनवरी 2014 को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करने जा रहा है । विष्वविद्यालय द्वारा समाज के प्रति अपने दायित्व के निर्वहन की दृष्टि से संगोष्टी के लिए एक ऐसा विषय चुना गया है जिससे भारत वर्ष के इतिहास में ’राजस्थान’ के इतिहास को उचित स्थान दिलाते हुए भारत के इतिहास का पुनःलेखन किया जा सके ।
सम्पूर्ण राजस्थान में पाषाणकाल से ही मनुष्य की गतिविधियों के अवषेष विद्यमान है । प्रस्तर औजार के अतिरिक्त सैकडो की संख्या में पाषाणकालीन चित्र भी खोजे जा चुके है । पुरातात्विक अवषेषो से यह स्पष्ट संकेत होता है कि यहां पाषाणकाल के अन्त्मि चरण में पषुपालन, खेती तथा धातु-निर्माण की समझ विकसित होने लगी थी , इसके प्रमाण उतरी राजस्थान में गणेष्वर संस्कृति तथा दक्षिणी राजस्थान में सबसे पहले गांव अस्तित्व में आये । अरावली के इस क्षेत्र मे विभिन्न धातुओं की खोज तथा उनका प्रयोग भारत में सबसे पहले आरम्भ हुआ ।
राजस्थान का इतिहास शक्ति एवं भक्ति से पूर्ण रहा है । यहा के भौगोलिक पर्यावरण ने यहॉं के निवासियों को धैर्यवान व स्वतंत्रता प्रेमी बनाया है । राजस्थान भारत के गौरवमय इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है ।
राजस्थान का मध्यकाल युद्वों तथा निर्माण का काल रहा है , किन्तु उसके उतरार्द्ध में मराठों तथा ब्रिटिष आक्रमणों के कारण इसका विकास काल अवरूद्ध रहा । इस काल में मेवाड़ के महानायक महाराणा प्रताप ने सदैव मुल संघर्ष में रत् रहकर भारतवर्ष में स्वतंत्रता की चेतना को जगाए रखा । ब्रिटिष काल में हुए राष्टीय आन्दोलन एवं रियासती आन्दोलन प्रताप से प्रेरित रहे, इस काल में जन चेतना से राजस्थान पुनः विकास की ओर उन्मुख होने लगा ।
प्राचीनकाल से ब्रिटिषकाल के आरम्भ तक के इतिहास लेखन ने आमजन को प्रभावित नहीं किया । मुहणोत नैणसी राजस्थान का प्रथम वैज्ञातिक विधि से लिखने वाला इतिहासकार था । किन्तु उसकी लेखन परम्परा का निर्वाह आगे के लेखक नहीं कर पाये । उन्होने राजदरबार में रह कर ख्यात के माध्यम से इतिहास तो लिखा किन्तु उसमें शासकवर्ग को ही केन्द्र में रखा । यहा तक भी हुआ कि उन्होने केवल युद्धों एवं विजय संबंधी घटनाक्रम को ही अधिक महत्व दिया । जिससे कि वे शासक वर्ग को प्रसन्न रख सके ।
अंग्रेज प्रषासनिक अधिकारियों ने उनके हितों के लिए भारत की ऐतिहासिक घटनाओं को क्रमबद्ध कर इतिहास लेखन किया जिसमें उन्होने अपने पक्ष की घटनाओं को प्राथमिकता दी ।
संघोष्ठी निदेषक डॉ. नीलम कौषिक ने बताया संगोष्ठी में भारत के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी भाग लेंगे जिसमें दिल्ली, उतरप्रदेष, हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेष, राजस्थान प्रमुख है । डॉ. कौषिक ने यह भी सूचित किया कि उद्घाटन सत्र में इतिहास एवं संस्कृति विभाग द्वारा ’विरासत’ नामक शोध पत्रिका का विमोचन कराया जायेगा । यह शोध -पत्रिका नेषनल सांइस लाइब्रेरी ;प्ैैछछव्द्ध द्वारा रजिस्टर्ड शोध -पत्रिका होगी ।
जिसमें शोध आलेखों का प्रतिवर्ष प्रकाषन किया जायेगाा । ’विरासत का उद्धेष्य शोध का विस्तार कर उसे समाज के समक्ष प्रस्तुत करना है ।
संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. हेमेन्द्र चौधरी ने बताया कि संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में मुख्य अतिथि कुलाधिपति प्रो. भवानी शंकर गर्ग, एवं रावत श्रीमान हरि सिंह बेंगू पूर्व कृषि मंत्री राजस्थान सरकार होंगे । समापन सत्र की मुख्य अतिथि रजनी डांगी, महापोर नगर निगम उदयपुर एवं विष्ष्ठि अतिथि डॉ. लोकेष शेखावत कुलपति, भगवंत विष्वविद्यालय अजमेंर, कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रों. एस.एस. सारंगदेवोत, कुलपति जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विष्वविद्यालय, उदयपुर करेंगे । अधिष्ठाता डॉ. सुमन पामेचा ने बताया कि संगोष्ठी में सम्पूर्ण राजस्थान के इतिहास का मंथन होगा जो भविष्य में इतिहास लेखन में मदद करेगा ।
संगोष्ठी के उदघाटन सत्र मे प्रतिष्ठित इतिहासकारो कों सम्मानित करने जा रहे है जिन में प्रो. के. एस. गुप्ता, प्रो. गिरीष नाथ माथुर, प्रो. देवीलाल जी पालीवाल, डा़ॅ. जगदीष भाटी एवं सवाई हरिसिंह बेगूॅ प्रमुख रूप से सम्म्लिित है ।
डॉ. गिरीष नाथ माथुर ने बताया कि संगोष्ठी का हमारा उद्धेष्य शोध छात्रों को मूल स्त्रोतों के आधार स्थानीय इतिहास लेखन के लिए प्रेरित करना है । जिससे कि वह हमारे सर्वंागीण विकास का आधार बन सकें ।
डॉ. जीवन सिंह खरकवाल ने बताया कि हमारे विभाग का उद्धेष्य एतिहासिक काल से पूर्व के इतिहास को उत्खनन द्वारा पूर्णता प्रदान करना है ।
डॉ. नीलम कौषिक डॉ. हेमेन्द्र चौधरी
विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी निदेषक आयोजन सचिव

राष्ट्रीय संगोष्ठी
राजस्थान के इतिहास के विभिन्न आयाम
समापन सत्र
31 जनवरी, 2014
मान्य अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती का माल्यापर्ण एवं दीपदान।
मुख्य अतिथि श्रीमती रजनी डांगी, माननीय महापौर नगर निगम, उदयपुर का माल्यापर्ण द्वारा स्वागत के लिए श्रीमती नीलम कौषिक को आमंत्रित करती हूँ।
श्रीमती रजनी डांगी का माल्यापर्ण कर स्वागत के लिए अधिष्ठाता सुमन पामेचा मेड़म को आमंत्रित करती हूँ।
आयोजन सचिव डॉ. हेमेन्द्र चौधरी द्वारा पुष्प गुच्छ से स्वागत।
विषिष्ठ अतिथि डॉ. लोकेष शेखावत, माननीय कुलपति भागवंत विष्वविद्यालय, अजमेर का डॉ. नीलम कौषिक द्वारा पुष्प गुच्छ एवं प्रो. गिरीषनाथ माथुर द्वारा माल्यापर्ण द्वारा स्वागत।
अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत का माल्यापर्ण के लिए डॉ. नीलम कौषिक द्वारा पुष्प गुच्छ एवं डॉ. जीवन सिंह खरकवाल को माल्यापर्ण द्वारा स्वागत के लिए आमंत्रित करती हूँ।
आयोजन सचिव डॉ. हेमेन्द्र चौधरी द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी की दो दिवसीय रपट की प्रस्तुति।
दो सहभागियों के अनुभव
धन्यवाद – प्रो. गिरीषनाथ माथुर।

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