उदयपुर. हिन्दी को विश्व की भाषा बनाने का संकल्प ले भारत विश्व गुरू है और रहेगा इसमें सबसे बड़ा योगदान हिन्दी भाषा का है. हमें संकल्प लेना चाहिये की हिन्दी के उत्थान एवं प्रचार प्रसार के लिये अधिकाधिक प्रयोग करेगें हिन्दी का स्थान पुरे विश्व में कोई दूसरी भाषा नहीं ले सकती है। हमें अपनी मातृ भाषा का सम्मान करना चाहिये और इसकी सार्थकता के लिये निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिये उक्त विचार जनार्दन राय नगार राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय में चल रहे सात दिवसीय हिन्दी पखवाड़ा के समापन के अवसर पर कुलपति प्रो. एस.एस सांरगदेवोत ने व्यक्त किये . हिन्दी भाषा पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिता आशुभाषण, कविता पाढ, निबन्ध, श्रृतिलेख आदि प्रतियोगताओ के विजेताओ का प्रमापण पत्र देकर सम्मानित किया। प्रतियोगिता में विज्ञान संकाय के समन्वयक डाॅ. जयसिंह जोधा प्रथम स्थान पर रहे जिन्हे प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
प्रख्यात साहित्यकार डा. देवकोठारी, ने कहा कि हर काम हिन्दी में होना चाहिये लोगो को भी इस कार्य के लिये प्रेरित करना चाहिये। विशिष्ठ अथिति इतिहासविद्व डाॅ राज शेखर व्यास ने कहा कि हिन्दी को पूरे राष्ट्र ही नहीं बाहर तक गौरव प्राप्त है। उन्होने हिन्दी को और अधिक बढ़ावा देने पर बल दिया। हिन्दी जोड़ने की भाषा है व लोगो को जोड़ती है व इसमें सवेदना का भाव है। डा. ज्योतिपुंज ने कहा कि हमें अपने बच्चों में हिन्दी को पढ़ने एवं लिखने हेतु प्रेरित करना होगा। निदेशक डा. जीवनसिंह खरकवाल, डा. एस. के मिश्रा, डाॅ. कुलशेखर व्यास ने भी अपने विचार व्यक्त किये। संचालन डाॅ. कुलशेखर व्यास ने किया जबकि धन्यवाद डाॅ. केपी सिंह ने दिया।

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