अब मोदी के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं, सभी कुछ अच्छा चल रहा है, अब देशवासियों को दिखाएं परिणाम

मनोज बिनवाल

udaipurpostसवा सौ करोड़ देशवासी नए भारत के उज्जवल भविष्य के लिए उसी दिन दौड़ पड़े थे, जब उन्होंने नरेन्द्र मोदी के वादों पर भरोसा करते हुए भाजपा को वोट दिया था। पांच सालों तक विकास की धीमी गति और घपलों-घोटालों के बाद 2014 में कोटि-कोटि भारतीयों ने तीन दशक बाद स्थिर सरकार चुनी । सरकार ने भी अभी तक 8 महीनों में सकारात्मक संकेत दिया है कि वह देश के लिए कुछ करना चाहती है। सत्ता में आते ही मोदी ने अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने में ही अपने कार्यकाल का पहला महीना खर्च किया। मकसद था ढांचागत सुधार के लिए विदेशों से धन जुटाना। इसी वजह से उन्होंने जापान से लेकर अमेरिका और चीन तक इकोनॉमी लिफ्ट का अपना एजेंडा पहुंचाया है। जनता को इस पर भरोसा भी इसलिए विधानसभा चुनाव में भी वह भाजपा को जितवा रही है। लेकिन नए साल में देश को 1 करोड़ नौकरियों की आवश्यकता है। स्मार्ट सिटी, डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करना होगा। मंहगाई में कमी के असर को घरों तक पहुंचाना होगा। यानी नए साल में सरकार को संकेत से ज्यादा धरातल पर कुछ करना होगा। उधर सरकार के लिए सभी कुछ शुभ-शुभ ही हो रहा है। अर्थव्यस्था की विकास दर बढ़ी है। क्रूड आइल के दाम कम होने से देश का वित्तीय घाटा आैर सब्सिडी का बोझ कम हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि बेहतर हुई है। विदेश निवेश बढ़ा है। घरेलू उत्पादन बढ़ रहा है। घरेलू मोर्चे पर पेट्रोल- डीजल के दाम में 12 फीसदी और दैनिक अावश्कताओं की वस्तुओं की कीमतों में भी कुछ कमी आई है। इस साल केन्द्र सरकार के सामने सिर्फ बिहार में ही राजनीितक चुनौती है। यानी पूरा साल काम करने और उनके नतीजे दिखाने के लिए है।

बजट पर रहेंगी नजरें
अब सभी की नजरें आम बजट पर हैं। यह बजट मोदी सरकार का एजेंडा तय करेगा कि सरकार की अगले चार साल के लिए लाइन आफ एक्शन क्या होगी। इससे पहले मोदी सरकार के वित्त मंत्री के तौर पर अरूण जेटली की ओर से पेश किए गए अंतरिम बजट में कुछ करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। इसलिए अब नए बजट पर देश और दुनिया की नजर लगी हुई है। इसमें भी इन प्रमुख मुद्दों पर देशवासी उत्तर चाहेंगे। मसलन
* देशव्यापी जीएसटी यानी गुड्स और सर्विस टैक्स को लागू करने के लिए राज्यों को आर्थिक मदद कैसी दी जाएगी।
* डायरेक्ट टैक्स कोड कैसे लागू होगा और इनडायरेक्ट टैक्स प्रक्रिया का सरलीकरण कैसे होगा।
फूड सबसिडी से लेकर कुकिंग गैस सबसिडी तक को आधार से जोड़ने और बैंक अकाउंट तक सबसिडी को पहुंचाने की चुनौती का भी हल उन्हें निकालना है।
* राेगजगार बढ़ाने के लिए मेक इन इंडिया का फोकस छोटे उद्योगों पर होगा या बडे उद्ममों पर। या दोनों को साथ में रखते हुए कोई मिश्रित फार्मूला होगा।
विनिवेश से भी 38,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा।
* गंगा शुद्धिकरण और किसानों के हालात सुधारने और उन्हें उपज के वाजिब दाम दिलवाने के लिए सरकार की योजना क्या है।
* बजट घाटा संभालने और खर्च में कमी के लिए क्या-क्या किया जा रहा है।

हर साल एक करोड नौकरियां की दरकार
सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती नौकरियों को लेकर है। तीन दशक बाद देश को बहुमत वाली सरकार देने में बेरोजगारी या बेहतर करियर की तलाश में भटक रहे युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसलिए सरकार भी इस दिशा में सक्रिय है। विश्व बैंक के एक अनुमान के अनुसार भारत में हर साल एक करोड़ नौकरियों की जरूरत है। अब इस साल कारपोरेट सेक्टर में 10 लाख नौकरियाें की ही संभावना है। कृषि और इससे जुड़े असंगठित क्षेत्र के रोजगार इससे अलग हैं। यह पिछले कुछ सालों में सबसे बेहतर स्थिति है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि नौकरियों की संख्या बढ़ाने मे कम से कम दो साल का समय लगेगा। तत्काल नौकरियों के लिए सरकार को छोटे और मध्यम उद्योगों पर फोकस करना होगा। तभी साल भर में नई नौकरियां आ सकती हैं। मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी उद्योगों को लगाने के बाद भी नई नौकरियां आने में कम से कम दो साल लग जाएंगे।

स्वच्छता के लिए लाना होगा कानून
मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान का देश भर में अच्छा संदेश गया है। लेकिन जमीन पर इसे और कारगर बनाने के लिए स्वच्छता संबंधी कानून modi pm caricatureलाने की जरूरत है। इसके बिना 2019 तक स्वच्छ बनाने के लक्ष्य को पाने में मुश्किलें आएंगी। पिछली सरकारों ने 14 साल में टॉयलेट बनाने के लिए 15 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं लेकिन स्थिति अभी भी बेहद खराब है। ऐसे में नई सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है और उसने आइटी कंपनी टीसीएस और भारती फाउंडेशन को इस मिशन से जोड़ा है। खासकर गंदगी फैलाने और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वालों पर दंडात्मक प्रावधान करने होंगे।

स्मार्ट सिटी और डिजीटल इंडिया
स्मार्ट सिटी और डिजीटल इंडिया प्रोजेक्ट पर अमल किया जा रहा है यह सरकार को इसी साल दिखाना होगा। पिछले बजट में स्मार्ट सिटी और डिजीटल इंडिया पर सरकार ने पर कम रकम रखी थी।
अंतरिम बजट मे सरकार ने 100 स्मार्ट सिटी के लए 7060 करोड़ का बजट रखा था। यानी एक सिटी के लिए 70 करोड़। जानकारों का कहना है कि यह रकम तो िसर्फ प्लानिंग में ही खत्म हो जाएगी। इसलिए इस साल सरकार को 100 स्मार्ट सिटी बनाने का पूरा प्लान आैर पैसे की व्यवस्था बजट में करनी होगी।
डिजिटल इंडिया योजना के पहले चरण में हर यूनिवर्सिटी में वाई-फाई और स्कूलों में इंटरनेट होगा। 50 हजार गांवों को ब्रॉड बैंड से कनेक्ट किया जाएगा। साथ ही मोबाइल इंटरनेट के जरिए बैंक खातों का संचालन होगा। टेलीमेडिसन से डॉक्टर से सलाह लेना आसान होगा। इसके लिए सरकार ने अंतरिम बजट में एक लाख करोड़ रूपए का प्रावधान किया था। इस पर अभी तक कुछ खास नहीं हुआ है। यह ऐसी योजना है जिस का अमल जनता को आसानी से समझ में आ जाएगा।

महंगाई, कालाधन और लोकपाल
सरकार को इस साल जिन कसौटियों कर कसा जाएगा उनमें महंगाई काे कम करना सबसे प्रमुख है। पेट्रोल-डीजल सस्ते हुए हैं, खाद्य महंगाई कम हुई है, लेकिन अभी इसका उतना फायदा जनता तक नहीं पहुंचा है। नए साल में कीमतों में कमी के असर को घरों तक पहुंचाना होगा। इसके अलावा विदेशों से कालाधन लाना, लोकपाल की नियुक्ति करना, जैसे मुद्दों पर पर सरकार के काम की समीक्षा होगी।

अध्यादेश की राजनीति
संसद में कुछ गतिरोधों के बाद भाजपा ने बीमा में एफडीआई की सीमा बढ़ाने और जमीन अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश का सहारा लिया। कुछ बिल लोकसभा में तो पारित हो चुके हैं। भाजपा को इन बिलों को पारित करवाने में विपक्ष का रचनात्मक सहयोग लेना चाहिए। सरकार का तर्क है कि राज्यसभा में विपक्ष के हंगामें के कारण कुछ बिल पारित नहीं हो पाए। विकास की गति को तेज करने के लिए ऐसा करना जरूरी था। वैसे संसद का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर भी कानूनों में संशोधन किसा जा सकता है। जो भी हो भारत में संसद की सर्वोच्चता बनाए रखी ही जानी चाहिए। इसकी सबसे ज्यादा जिम्मेदारी सत्तापक्ष की होती है और इसे भाजपा को नहीं भूलना चाहिए।

कांग्रेस को विपक्ष की भूमिका में आना ही होगा
इस सब के बीच कांग्रेस अभी भी अपनी भूमिका की तलाश में है। कांग्रेस दोहरे सदमे में है। पहले तो उसे यह स्वीकारने में समय लग रहा है कि वह अब सत्ता से बाहर है। दूसरा वह यह बात भी नहीं पचा पा रही है कि जनता ने उसे प्रमुख विपक्षी दल बनने लायक भी सीटें नहीं दी। और रही सही कसर महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड में हार ने पूरी कर दी। पर उसे विपक्ष की भूमिका में तो आना ही होगा। सवाल भूमिका को लेकर भी है। पार्टी में भूमिका परिवार की होगी या अब किसी कार्यकर्ता को पार्टी में अहम भूमिका सौंपी जाएगी। कांग्रेस को जनता को यह तो बताना ही होगा कि भले भी जतना ने उसे विपक्ष के लायक भी नहीं समझा पर वह इस भूिमका को लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी की तरह निभा रही है। शायद इसी सकारात्मकता में से कंाग्रेस के लिए कोई भविष्य का रास्ता निकले।

अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का मतलब …. ?

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फ्रांस की राजधानी पेरिस में दस पत्रकारों सहित 13 व्यक्तियों की हत्या की जितनी निंदा की जाए कम है। किसी भी सभ्य समाज में हिंसा के लिए ना पहले कभी कोई स्थान था और ना आज है।
हिंसा से किसी समस्या का ना तो कोई हल निकला है और न निकलने की कोई उम्मीद है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी लगाने के प्रयास तब से चल रहे हैं, जब से ये दुनिया बनी है। दौर राजशाही का रहा हो, तानाशाही अथवा लोकतंत्र का, कभी शासकों की तरफ से कलम और जुबान पर रोक लगाने के प्रयास हुए तो कभी किन्हीं संगठनों की तरफ से।
पेरिस में एक मैगजीन के दस पत्रकारों की हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि उसमें छपे कार्टून हमलावरों को पसंद नहीं थे। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करने वाले ऎसे लोगों को जितनी कड़ी सजा दी जाए, कम है। लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कहने, लिखने और विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी है।
हर कोई अपने-अपने तरीके से इस आजादी का उपयोग करता है लेकिन इसका लाभ उठाने वालों को अपनी लक्ष्मण रेखा भी तय करनी होगी। आजादी का मतलब यह कतई नहीं हो सकता कि किसी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करें। आजादी के मायने ये नहीं हो सकते कि किसी की आस्था पर हमला किया जाए।
कार्टून व्यंग्य को अभिव्यक्त करने का अच्छा माध्यम है लेकिन उसमें अश्लीलता को कोई कैसे और क्यों स्वीकार करे? स्वतंत्रता का मतलब स्वच्छंदता कतई नहीं हो सकता। पेरिस की जिस मैगजीन के पत्रकारों पर हमला हुआ वह मैगजीन समय-समय पर अनेक धर्मो पर कार्टून के माध्यम से व्यंग्य करती रही है, इसका पहले भी विरोध होता रहा है। ऎसे कार्टून छापती रही है जिसे परिवार के सदस्य साथ बैठकर देख नहीं सकते।
दुनिया में बड़ी संख्या ऎसे कार्टूनिस्टों की है जो बिना अश्लीलता के भी समाज, राजनीति और धर्म पर व्यंग्य कसते हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करने वाले इस बात को समझें कि उनके कृत्य से किसी को बंदूक उठाने की नौबत ही नहीं आए।
ध्यान इस बात का भी रहे कि हम कबीलाई दौर में नहीं जी रहे हैं जहां हिंसा भी जायज मानी जाती हो और किसी की भावनाओं को आहत करने को भी गलत नहीं माना जाता हो। हम सभ्य और स्वतंत्र समाज में जी रहे हैं जहां स्वच्छंदता के लिए कोई जगह नहीं है।

फ्यूल भरवाते ही पकड़ में आएगा चोरी का वाहन

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भारत पेट्रोलियम ने की व्यवस्था शुरू, मोबाइल पर आएगा एसएमएस

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उदयपुर। अब चोरी की गाड़ी में फ्यूल भरवाते ही चोर पकड़ा जाएगा। यह भारत पेट्रोलियम ने अपने ग्राहकों के लिए शुरू की है। इसके तहत चोर द्वारा भारत पेट्रोलियम के पम्प से गाड़ी में पेट्रोल-डीजल भरवाते ही मालिक को एसएमएस जाएगा, जिसमें तेल की मात्रा, राशि एवं लोकेशन का उल्लेख होगा। इससे मालिक अपनी गाडी की लोकेशन का पता पुलिस को दे सकेगा। राजस्थान में कुछ शहरों में शुरू होने के बाद जल्द ही इस व्यवस्था को उदयपुर में भी लागू किया जाएगा।
चोरी की गाडिय़ों की महीनों तक पुलिस पता नहीं लगा सकती, लेकिन भारत पेट्रोलियम ने ऐसी व्यवस्था शुरू की है कि भारत के पेट्रोलपंप से अगर चोर उस गाड़ी में कितने का भी फ्यूल भरवाता है, तुरंत मालिक के पास इसका एसएमएस चला जाएगा और मालिक को गाड़ी का पता चल जाएगा। इसके लिए मालिक को अपने मोबाइल नंबर का रजिस्ट्रेशन भारत पेट्रोलियम पर करवाना होगा। उदयपुर में यह सुविधा जल्दी ही शुरू होने वाली है। उदयपुर शहर में भारत पेट्रोलियम के आठ पेट्रोलपंप है।
वाहन मालिक घर बैठे रख सकेंगे नजर : एसएमएस सुविधा से उन ग्राहकों को भी फायदा होगा, जिनकी गाड़ी (टैक्सी, ट्रक एवं अन्य भारी वाहन) ड्राइवर चलाते हैं। आमतौर पर ड्राइवर व कंडक्टर गाड़ी में तेल कम भरवाते हैं और बिल ज्यादा लेकर मालिकों को चूना लगाते हैं, लेकिन इस सुविधा के बाद जैसे ही ड्राइवर गाड़ी में पेट्रोल अथवा डीजल भरवाएगा, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस से जानकारी पहुंच जाएगी कि ड्राइवर ने कितनी मात्रा एवं राशि का तेल कहां से भरवाया है। इससे तेल चोरी भी रूकेगी। इसके साथ सरकारी विभागों में होने वाली तेल चोरी भी रूकेगी।
ऐसे करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन : भारत पेट्रोलिमय के उदयपुर जिले के सेल्स अधिकारी हरप्रीतसिंह ने बताया कि कंपनी की तरफ से रजिस्ट्रेशन सुविधा निशुल्क है। इसके लिए ग्राहक को वाहन व मोबाइल नंबर का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जैसे ही पेट्रोल पंप पर रजिस्ट्रशन होगा, उसकी डिटेल कंपनी को भेज दी जाएगी। इसके बाद देशभर में कहीं भी भारत पेट्रोलियम के पम्प से तेल भरवाने पर मालिक को एसएमएस भेजा जाएगा। इसमें तेल भरवाने की मात्रा भी निश्चित नहीं है, मालिक चाहे तो 50 रुपए का भी तेल भरवा सकता है। नागौर शहर में यह सुविधा चौधरी पेट्रोल पंप पर शुरू की गई है।
वर्जन…
भारत पेट्रोलियम कंपनी ने यह सुविधा अभी शुरू कर दी है। ग्राहक इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए भारत पेट्रोलियम के पंप पर अपने मोबाइल नंबर व गाड़ी नम्बर रजिस्टर्ड करवा सकते हैं। उदयपुर में यह सुविधा जल्दी ही शुरू की जायेगी। अभी राजस्थान के अन्य शहरों में हुई है। यहां पर जैसे ही सुविधा शुरू होगी इसके लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
-शीतल अमिन, डायरेक्टर अप्पाजी पेट्रोल पंप

पिस्टल दिखा कार ले कर फरार

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उदयपुर। चीरवा घाटे में मध्यरात्रि बाद करीब एक बजे उदयपुर की ओर आ रहे कार सवार को चार जनों ने बीच राह पिस्टल दिखाकर रोका और मारपीट कर कार लेकर फरार हो गए। प्रथम दृष्टया मामला कार की लोन किस्तें बकाया होने के कारण सीजर द्वारा कार लेकर भागना लग रहा है।
डिप्टी गोपालसिंह ने बताया कि रावजी का हाटा निवासी मनोज कुमार देवगढ़ से उदयपुर की ओर लौट रहा था। उस दौरान घाटे पर भैरव मंदिर से पहले मोड़ पर एक अन्य कार उसके आगे आकर रुकी। उसमें से उतरे युवकों ने उसे पिस्टल दिखाकर नीचे उतरने का इशारा किया। मनोज कार से उतरा। इसके बाद आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और कार ले भागे। कुछ ही देर बाद पीछे से आई पुलिस हॉक को मनोज ने जानकारी दी। वारदात की सूचना मिलने पर डिप्टी व सुखेर थानाधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने शहर में नाकाबंदी करवा दी। मनोज ने पुलिस को बताया कि आरोपी उसका मूणवास से पीछा कर रहे थे। रात भर शहर व उसके आसपास क्षेत्र में नाकाबंदी की गई लेकिन समाचार लिखे जाने तक आरोपियों का कुछ पता नहीं लगा। उधर पुलिस के अनुसार मनोज टैक्सी चलाता है। वह गुरुवार को किसी ग्राहक को टैक्सी से देवगढ़ छोडक़र आ रहा था। लोन की कुछ किस्तें बकाया होने के कारण सीजर कार ले गए।

इसका सिंघल के पास है कोई जवाब ?

उग्रसेन राव
विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक अशोक सिंघल ने कथित संत आसाराम को उसके जघन्य अपराधों से क्रक्लीनचिटञ्ज देते हुए सारे मामले ashok-singhalको हिंदू धर्म पर हमले की संज्ञा दी है। उन्होंने इससे पहले कांची के शंकराचार्य, आतंकी हमले की साजिश में फंसे असीमानंद आदि के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को झूठे बताते हुए कहा है कि क्रक्रहिंदू धर्म व संतों को मिटाने का प्रयास चल रहा है। ऐसी ताकतें हमें मिटाने और हम उन्हें खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। काफी कुछ तो मिटा ही दिया है।ञ्जञ्ज
ङ्क्षहदुओं के स्वयंभू नेता सिंघल ने ये बयान जोधपुर जेल में बंदी आसाराम से मिलने के बाद मीडिया के सामने दिया। सिंघल ने यह भी कहा कि कानून में किसी को भी फंसाया जा सकता है। स्पष्ट है सिंघल धर्म की आड़ में अपराधियों का पक्ष लेकर कानून और व्यवस्था के लिए संकट की स्थिति पैदा कर रहे हैं। वह लोगों को इसाई और इस्माल मानने वालों के खिलाफ भडक़ा रहे हैं। इतना ही नहीं, देश के कानून को भी चुनौती दे रहे हैं।
आसाराम से मिलने के बाद सिंघल ने बताया कि वो पुराने संबंधों के नाते बापू का दु:ख बांटने गए इसलिए यह भी तहकीकात का विषय हो गया है कि दोनों के बीच पुराने अच्छे दिनों में किस प्रकार के ‘सुखदायी सम्बंध’ रहे हैं।
वस्तुत: हिन्दू कोई धर्म नहीं है। ये लोग जिसकी बात कर रहे हैं, वह सनातन धर्म है, जिसका जान-बूझकर नाम नहीं लिया जाता। क्योंकि ऐसा करने से कई सारी चीजें गड़बड़ा जाती हैं। इतिहास देखें तो बाहर से आए आक्रांताओं ने भारतीय भूभाग में रहने वालों को सिन्धु नदी घाटी सभ्यता के कारण हिन्दू नाम दिया। अरबी-फारसी के शब्दकोश में क्रहिन्दूञ्ज शब्द का अर्थ काला-कलूटा, लुच्चा-लफंगा और बदमाश बताया गया है। उस समय इस गाली को नहीं समझा गया और इसे स्थानीय वासियों ने भी अपना लिया।
इसके बाद कश्मीर से लगाकर कन्याकुमारी तक की आबादी को हिन्दू कहा जाने लगा। यानी इस्लाम मानने वाले मुस्लिम हिन्दू, ईसा को मानने वाले इसाई हिन्दू और इसी प्रकार किसी भी पूजा पद्धति में भरोसा रखने वाले सभी हिन्दू ही कहे गए। इसी तर्ज पर सनातन धर्मी भी सनातन हिन्दू कहलाए। इस थ्योरी को एक जमाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी स्वीकार किया लेकिन बाद में राजनीतिक रूप से असुविधा होने पर त्याग दिया। असुविधा यहभी हुई कि इसमें राष्ट्र तो बनता है लेकिन किसी भी प्रकार की क्रघर वापसीञ्ज के लिए कोई जगह नहीं बचती। इसलिए सिंघल के बयान भी लगातार बदलते रहे।
उनसे जब यह पूछा गया कि जैन धर्मावलंबियों को अल्पंसख्यक का दर्जा मिल गया है तो क्यों नहीं इन्हें सनातनधर्मी रामंमंदिर आंदोलन से अलग कर दिया जाए तो वे बोले हिन्दुस्तान में कोई अल्पसंख्यक नहीं हैं। जब उन्हें यह पूछा गया कि सनातन धर्म क्या है तो वे बोले सनातनधर्म ही हिन्दू धर्म है। हिन्दू राष्ट्र बनाने के बारे में पूछने पर कहने लगे, बनाना क्या यह तो हिन्दू राष्ट्र ही है। इस पर जब यह सवाल उठा कि फिर घर वापसी का क्या मतलब तो वे बहस छोडक़र चल दिए?
अब करें विहिप की बात। विश्व हिन्दू परिषद का गठन उदयपुर में हुआ। महाराणा भगवतसिंह इसके प्रथम अध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने हिंदुओं (सनातन धर्मियों) को एकजुट करने के लिए देशभर में क्रक्रएकात्मता-यात्राञ्जञ्ज निकाली। इसके खर्च के लिए क्रमहाराणा प्रताप स्मारक समितिञ्ज के खाते से ४० लाख रुपए निकाले, जिसका जमा खर्च आज दिन तक नहीं हुआ। बाद में विहिप के प्रथम अध्यक्ष हिंदुआ सूर्य महाराणा भगवतसिंह ने गोवा की चर्च में ईसाई युवती क्रिस्टीना से शादी कर उसे पूर्णिमा देवी का नाम दिया। यह युवती महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थी। इस प्रकार उसकी क्रघर वापसीञ्ज हुई। अब सवाल यह है कि विहिप के प्रथम अध्यक्ष ने चर्च मेें जाकर अपनी घर वापसी की अथवा युवती का धर्मांतरण करवाया ? संगठन ने एक विधर्मी से शादी करने पर अपने अध्यक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? इसका सिंघल के पास है कोई जवाब?

जयपुर में वैश्यावृत्ति के आरोप में चार युवतियां अरेस्ट

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sexrpjhonlजयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में जवाहर सर्किल थाना पुलिस ने बुधवार को दबिश देकर वैश्यावृत्ति के आरोप में चार युवतियों तथा एक दलाल को गिरफ्तार किया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार मुखबिर की इत्तिला पर जवाहर नगर के सेक्टर छह स्थित एक मकान पर दबिश देकर शाम करीब चार बजे वैश्यावृत्ति के आरोप में चार युवतियों और एक दलाल को गिरफ्तार किया है। सूत्रों ने बताया कि पीटा एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार युवतियों और दलाल से पूछताछ शुरू कर दी है।

एटीएम से 24 घंटे मिलेगा सरस दूध

milk atmउदयपुर। आपने रूपए देने वाले एटीएम तो देखे हैं, लेकिन सरस डेयरी 24 घंटे दूध देने वाले एटीएम (एनी टाइम मिल्क मशीन) लगाने जा रही है।

उदयपुर से इस सेवा की शुरूआत होगी। उदयपुर डेयरी ने प्रस्ताव बनाकर जयपुर भेज दिया है। मशीन लगाने के लिए सरस ने बिटा सहित अन्य कंपनियों से संपर्क साधा है।

डेयरी अधिकारियों के अनुसार पहले मशीन में दूध की व्यवस्था की जाएगा। इसके बाद सरस की छाछ, दही, लस्सी और अन्य उत्पाद भी इस एटीएम के जरिए मिल सकेंगे।

मशीन में एक समय में 180 लीटर दूध रखने की क्षमता है। एक मशीन की लागत लगभग 3 लाख रूपए आएगी। अभी इस तरह की मशीन पड़ोसी राज्य गुजरात में लगी हैं। इसे देखने जल्द ही डेयरी के अधिकारी वहां जाएंगे।

यूं करेगी काम
दूध वाली मशीन बैंक के एटीएम की तरह ही काम करेगी। इस पर स्क्रीन और रूपए रखने का ब्लॉक होगा। जैसे ही रूपए ब्लॉक में रखे जाएंगे, निर्देशिका खुल जाएगी।

ग्राहक आर्डर करेगा और उत्पाद नोट की तरह निकलकर ग्राहक के सामने होगा। यह मशीन सिक्के, नोट और स्मार्ट कार्ड स्वीकार करेगी। अगर ग्राहक ने 100 रूपए का नोट डाला है और उत्पाद की कीमत 50 रूपए है तो मशीन 50 रूपए लौटा देगी।

शहरवासियों के लिए यह बहुत अच्छी सुविधा होगी। अगर पहली मशीन से बिक्री अच्छी रही तो शहर में और भी मशीन लगा दी जाएगी।
जीवन प्रभाकर, एमडी, सरस उदयपुर डेयरी |

पंचायत चुनाव से पहले ही कांग्रेस को मिली पहली सफलता

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congress- Udaipur postराजसमंद। पंचायत चुनाव के लिए बनाए गए नियमों की अवहेलना पर नाथद्वारा विधायक कल्याण सिंह को भाजपा से नोटिस मिलने के बाद गुरूवार को खमनोर पंचायत समिति के वार्ड से चुनाव लड़ रही उनकी पुत्रवधु प्रियंका ने अपना नाम वापस ले लिया।

इस वार्ड से तीसरा कोई उम्मीदवार नहीं होने से यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। रिश्ते में प्रियंका की ननद दीपिका चौहान निर्विरोध निर्वाचित हो गई।

विधायक की पुत्रवधू के चुनावी मैदान में उतरने का मामला बुधवार को उस वक्त गरमा गया था, जब प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत नामांकन वापस लेने का नोटिस जारी किया।

दोपहर 2.50 बजे निर्वाचन अधिकारी के पास जाकर विधायक पुत्रवधू ने नामांकन वापस ले लिया। इससे पूर्व एक होटल में हुई पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में विधायक कल्याण सिंह भावुक हो गए।

उन्होंने अन्य जिलों में सत्ताधारी लोगों के निकट रिश्तेदारों के पंचायती राज चुनाव में उतरने के आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग ईष्र्यावश उन्हें ही निशाना बना रहे हैं। पार्टी को समान कार्रवाई करनी चाहिए। इधर, इस स बंध में प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी से स पर्क नहीं हो सका।

गौरतलब है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी से मंगलवार शाम शिकायत की गई थी कि जनप्रतिनिधियों को टिकट नहीं देने की नीति के बावजूद विधायक सिंह की पुत्रवधु को खमनोर पंचायत समिति के वार्ड नम्बर 16 से भाजपा ने टिकट दिया है।

इसके बाद परनामी ने नाराजगी जाहिर की और सीएम राजे से चर्चा कर बुधवार को कल्याण सिंह को नोटिस जारी किया।

वो तड़पकर मर गया, लेकिन नहीं बढ़े मदद को हाथ

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dhosa - udaipur postUdaipur. राजस्थान के दौसा में बुधवार को पुलिस और जनता की मरती संवेदनाओं ने एक घायल व्यक्ति को मार ही डाला। एंबुलेंस, पुलिस और जनता… किसी ने भी उसे अस्पताल नहीं पहुंचाया।

हादसे के थोड़ी देर बाद तक वह तड़पता रहा और उसके बाद उसकी मौत हो गई। उकसा शव एक घंटे से अधिक समय तक बीच सड़क पर पड़ा रहा। लेकिन किसी ने भी शव को हटाने की जहमत नहीं उठाई। जनता तो जनता … पास ही स्थित बांदीकुई थाने की पुलिस को भी पहुंचने में लंबा समय लग गया।

एसपी को किया फोन
बांदीकुई थाने के पास एक अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। बाइक सवार विनित गंभीर रूप से घायल हो गया। वह और उसका साथी सड़क पर आ गिरे। विनित का सिर सड़क से टकराया और खून का फव्वारा सड़क पर खुल गया।

लोग वहां से गुजरते रहे… बड़ी संख्या में लोग वहां रूके भी, लेकिन घायलों की मदद नहीं मिली। हादसा बुधवार करीब तीन बजकर पांच मिनट पर हुआ।

करीब पौने चार बजे दौसा एसपी को जानकारी मिली, तब जाकर एक पुलिस जीप आई और विनित के साथी को एसएमएस अस्पताल पहुंचाया गया।

उसके बाद भी करीब सवा चार बजे तक विनित का शव सड़क पर खून से सना पड़ा रहा। बाद में सवा चार बजे बांदीकुई पुलिस की जीप वहां आई और शव को मुर्दाघर में रखवाया।

घरेलू गैस की कालाबाजारी पर अंकुश

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INDIA-ECONOMY-INFLATION-GASउदयपुर। घरेलू गैस के सभी उपभोक्ता अगर आधार नंबर से लिंक हो जाते हैं तो तेल कंपनियों को को केवल उदयपुर शहर में 10 लाख रुपए प्रतिदिन का फायदा होगा। साथ ही गैस सिलेंडर की कालाबाजारी पर पूर्णतया अंकुश लग जाएगा।
तेल कंपनियों के सर्वे के अनुसार अकेले उदयपुर में प्रतिदिन करीब तीन हज़ार से अधिक सिलेंडर की खपत व्यावसायिक उपयोग में होती है, जो कालाबाजारी के जरिए यहां तक पहुचती हैं। तेल कंपनियों और गैस वितरकों का ध्यान अब सभी उपभोक्ताओं को बैंक अकाउंट में आधार नंबर से जोडऩे पर है। गैस वितरक भी उपभोक्ताओं पर इसीलिए दबाव बना रहे हैं।
असल में जिले में घरेलू गैस का उपयोग करने वाले करीब 40 फीसदी उपभोक्ता अब तक बैंक और गैस वितरक को अपने आधार नंबर उपलब्ध करा चुके हैं। जिले के करीब 2.82 लाख उपभोक्ताओं में से इस सप्ताह 1.30 लाख से अधिक उपभोक्ता ऐसे हो जाएंगे, जिनके सिलेंडर की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में जमा होगी।
कालाबाजारी पर अंकुश : इससे फर्जी कनेक्शन या किसी अन्य के नाम का कनेक्शन उपयोग में ले रहे लोगों पर पाबंदी लग जाएगी। एक नाम पर एक से अधिक कनेक्शन वाले या फर्जी नामों से कनेक्शन ले चुके उपभोक्ताओं पर भी अंकुश लगेगा। आधार नम्बर से लिंक होने पर सिलेंडर कोई भी ले, लेकिन सब्सिडी कनेक्शनधारी उपभोक्ता के खाते में ही जाएगी।
रोजाना हो रहा नुकसान : रसोई गैस डीलर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता गोविंद गर्ग ने बताया कि कालाबाजारी के कारण सबसे अधिक नुकसान सीधा तेल कंपनियों को ही हो रहा है। मौजूदा समय में घरेलू गैस सिलेंडर की दर 397 रुपए है। बिना सब्सिडी का सिलेंडर 709 रुपए की दर पर उपलब्ध है। जिस उपभोक्ता ने आधार नंबर उपलब्ध करा दिया है, उसे सिलेंडर 709 रुपए में ही मिलेगा लेकिन उसके बैंक खाते में 312 रुपए सब्सिडी के सीधे जमा हो जाएंगे। इस लिहाज से उसे सिलेंडर मौजूदा दर पर ही मिलेगा। बताया गया है कि तीन हज़ार सिलेंडर की कालाबाजारी होती है तो रोजाना तेल कंपनियों को 10 लाख से अधिक का रुपए का घाटा होता है।