26 सीटें गंवा कर भी नहीं सीखा कांग्रेस ने सबक, रेल बजट में मेवाड़ वंचित

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उदयपुर. मेवाड़-वागड़ की 28 में से 26 विधानसभा सीटें खोने के बावजूद कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है। इस क्षेत्र में चारों लोकसभा क्षेत्रों के लिए रेल विकास से वंचित ही रखा गया है। यह स्थिति तब है, जब संसद में मेवाड़ का मजबूत प्रतिनिधित्व है। दो बार कार्यवाहक रेल मंत्री रहे डॉ. सीपी जोशी व केंद्रीय गरीबी उन्मूलन मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास, उदयपुर सांसद रघुवीर मीणा और राजसमंद से सांसद गोपालसिंह शेखावत भी अपने क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए पैरवी नहीं कर सके। रेलवे के अंतरिम बजट को मेवाड़ के लिए बेहद निराशजनक माना जा रहा है। रेलवे सलाहकार समिति, उदयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, मार्बल प्रोसेसर्स समिति, चैंबर ऑफ कॉमर्स ने रेल बजट मे मेवाड़ की उपेक्षा पर खेद जताया है।
पदाधिकारियों ने कहा कि नई ट्रेन मिलना तो दूर, वर्तमान में चल रही ट्रेनों के रूट विस्तार, वाया बदलने या फेरे बढ़ाने की जहमत भी नहीं उठाई गई। नई रेल लाइन डालने की दो मुख्य परियोजनाओं को गति देने के लिए बजट स्वीकृति नहीं दी गई।
उदयपुर सिटी के लोगों की डिमांड
बड़ी मांग : कोटा तक इंटरसिटी
उदयपुर-जयपुर के बीच रेगुलर प्रीमियम ट्रेन चलाने, उदयपुर से बैंगलुरू या चेन्नई के लिए सुपरफास्ट ट्रेन चलाने, जोधपुर तक वाया अजमेर, मारवाड़ ट्रेन चलाने तथा उदयपुर-कोटा के बीच नियमित इंटरसिटी ट्रेन चलाने की मांग रेलवे सलाहकार समिति एवं गैर राजनीतिक संगठनों द्वारा की जा रही थी।
नए प्लेटफार्म की नहीं मिली स्वीकृति
सिटी स्टेशन पर ट्रेनों के प्लेटफार्म कम पडऩे से दो नए प्लेटफार्म बनाने की स्वीकृति की मांग रेल अधिकारी भी कर रहे थे। राणा प्रतापनगर स्टेशन पर माल की उतराई व लदान बंद करके सिर्फ यात्री स्टेशन के रूप में डवलप करने की मांग भी की जाती रही है।
ये काम अब तक पूरे नहीं
सिटी स्टेशन यार्ड पर आर-पार ओवरब्रिज बनाने की निर्माण राशि नगर निगम द्वारा देने की मेयर रजनी डांगी की घोषणा के बावजूद रेल प्रशासन ने एनओसी नहीं दी। सिटी स्टेशन पर मेन प्लेटफार्म से 2-3 के बीच सेकंड फुट ओवर ब्रिज की मांग तथा एस्केलेटर्स लगाने की घोषणाओं को लटका रखा है। इसके लिए निगम की ओर से सहमति दी जा चुकी है। इसके बावजूद रेलवे की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। सिटी स्टेशन के बाहर बजट होटल के नाम से भवन का ढांचा खड़ा कर दिया गया, जिसका अधूरा निर्माण पूरा कर रेल यात्रियों को सस्ते किराए पर कमरे उपलब्ध कराने की योजना ठप कर दी गई। इस भवन का कोई उपयोग नहीं हो रहा है।

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