वेदांता ने महिलाओं की भागीदारी का लक्ष्य बढ़ाकर 35% किया।

#HerAtTheCore अभियान की शुरुआत, प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में महिलाओं को आमंत्रण

नई दिल्ली, 6 मार्च | अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वेदांता ग्रुप ने संगठन के सभी स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी 35% तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही #HerAtTheCore नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान और लिंक्डइन के माध्यम से एक हायरिंग ड्राइव शुरू की है, जिसमें महिलाओं को खनन, धातु, तेल एवं गैस, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है।

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब उद्योग का परिदृश्य काफी चुनौतीपूर्ण है। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण के अनुसार 2023–24 में विभिन्न उद्योगों में प्रत्यक्ष रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 18% थी, जबकि खनन और धातु जैसे मुख्य क्षेत्रों में उनकी भागीदारी अभी भी केवल लगभग 6% ही है।

#HerAtTheCore अभियान इस बात को उजागर करने का प्रयास करता है कि भारत औद्योगिक विकास के एक निर्णायक दशक में प्रवेश कर रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को गति दे रहा है, ईवी सप्लाई चेन का निर्माण कर रहा है और उन्नत विनिर्माण तथा प्रौद्योगिकी में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है। धातु, खनिज, तेल एवं गैस और ऊर्जा जैसे क्षेत्र इन उद्योगों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। फिर भी, इन प्रमुख क्षेत्रों में काम करने वाली कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल लगभग 6% ही है, जो भविष्य का निर्माण करेंगे। भारत की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए, उन्हें आगे बढ़ाने वाले उद्योगों में देश की प्रतिभा के पूरे सामर्थ्य का प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है।

वेदांता ग्रुप में आज महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्यबल का 23% है, जो उद्योग के औसत से काफी अधिक है। “6% पर्याप्त नहीं है और 23% तो बस शुरुआत है” संदेश पर आधारित #HerAtTheCore अभियान उद्योग में मौजूद इस अंतर को उजागर करता है और साथ ही मुख्य उद्योगों के भविष्य की कार्यबल को नया रूप देने के अवसर को भी सामने लाता है।

इस पहल पर टिप्पणी करते हुए प्रिया अग्रवाल हेब्बर, नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, वेदांता लिमिटेड और चेयरपर्सन, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने कहा, “भारत की विकास संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उसकी प्रतिभा का पूरा सहयोग आवश्यक है। वेदांता में आज महिलाएं हमारे कुल कार्यबल का 23% हैं, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। हमारा लक्ष्य इसे 35% तक बढ़ाने और अंततः 50% तक पहुंचाने का है। हम केवल प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ा रहे हैं, हम प्रणालियों को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं, उन्नत तकनीकों को लागू कर रहे हैं और जीवन के विभिन्न चरणों के अनुरूप सहायता ढांचे बना रहे हैं, ताकि महिलाएं मुख्य उद्योगों में आगे बढ़ सकें। #HerAtTheCore एक उत्सव भी है और कार्रवाई के लिए आह्वान भी। हम विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाशाली महिलाओं को हमारे साथ जुड़ने और उन क्षेत्रों को आकार देने में योगदान देने के लिए आमंत्रित करते हैं जो दुनिया को ऊर्जा देते हैं।”

समान अवसर प्रदान करने वाली तकनीक

वेदांता ग्रुप की समावेशन रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ उन्नत तकनीक का उपयोग है, जिसके माध्यम से ऐसे सुरक्षित और कौशल-आधारित कार्यस्थल बनाए जा रहे हैं जहां प्रदर्शन को क्षमता के आधार पर आंका जाता है, न कि लिंग के आधार पर। आज खनन और धातु क्षेत्र के संचालन तेजी से बौद्धिक रूप से संचालित होते जा रहे हैं, जहां इंजीनियर डिजिटल सिस्टम और रियल-टाइम एनालिटिक्स के माध्यम से जटिल प्रक्रियाओं का प्रबंधन करते हैं, जबकि भारी कार्य उन्नत मशीनरी और मशीनीकृत उपकरणों द्वारा किए जाते हैं। ऑटोमेशन, डिजिटल ऑपरेशंस सेंटर और रिमोट मॉनिटरिंग ने पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अधिक समान अवसर वाला कार्य वातावरण तैयार किया है।

मुख्य संचालन में बाधाओं को तोड़ना

वेदांता ग्रुप ने महिलाओं के लिए अग्रिम पंक्ति के औद्योगिक कार्यों के अवसर खोलने में अग्रणी भूमिका निभाई है:

· वेदांता एल्युमिनियम के ओडिशा के झारसुगुड़ा संचालन में, जो दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम स्मेल्टर है, पूरी तरह महिलाओं की एक टीम पूरी एल्युमिनियम उत्पादन लाइन (पॉटलाइन) संचालित करती है और उच्च-स्तरीय सटीक स्मेल्टिंग संचालन का प्रबंधन करती है।

· महिलाएं अब बिजली उत्पादन से जुड़े विशेष तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। कई जगह महिलाओं के नेतृत्व वाली टीमें पूरी लोकोमोटिव और सुरक्षा संचालन संभाल रही हैं, जो महत्वपूर्ण प्लांट संचालन को सहयोग देती हैं।

· हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, जो दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी है — में 2019 में भारत सरकार के सुधारों के बाद कंपनी ने भूमिगत खनन में महिला इंजीनियरों की नियुक्ति की। यह भारत के पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान खनन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव माना गया।

· मजबूत सुरक्षा व्यवस्थाओं और सुरक्षित परिवहन के साथ महिलाएं विभिन्न संचालन क्षेत्रों में नाइट शिफ्ट में भी काम कर रही हैं। केर्न ऑयल एंड गैस के मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल में 2019 से महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं और जटिल 24×7 हाइड्रोकार्बन प्रोसेसिंग सिस्टम का प्रबंधन कर रही हैं।

· हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चार पूरी तरह महिलाओं की भूमिगत माइन रेस्क्यू टीमें, जो भारत में अपनी तरह की पहली हैं, ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है। वहीं कोंकोला तांबा खदानें (जाम्बिया) में नचांगा लेडीज माइन रेस्क्यू टीम को प्रशिक्षित किया गया है, जो कंपनी और देश की पहली महिला-नेतृत्व वाली रेस्क्यू यूनिट है।

· वेदांता जिंक इंटरनेशनल (दक्षिण अफ्रीका) में महिलाओं की भागीदारी कुल कार्यबल का 23% है — जो राष्ट्रीय खनन उद्योग के औसत से 3.2% अधिक है। इसे ब्लैक माउंटेन में समर्पित लैक्टेशन रूम, एकल माताओं के लिए आवास आवंटन और गाम्सबर्ग खदान में मातृत्व पीपीई जैसे प्रयासों से समर्थन मिला है।

जीवन के विभिन्न चरणों में महिलाओं का समर्थन

भर्ती से आगे बढ़ते हुए, वेदांता ग्रुप दीर्घकालिक बनाए रखने और विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जिसके लिए:

· मातृत्व अवकाश के बाद संरचित रिटर्नशिप कार्यक्रम

· लचीली कार्य व्यवस्थाएँ और समावेशी शिफ्ट संरचनाएँ

· दूरस्थ स्थानों पर पति/पत्नी के लिए भर्ती नीतियाँ

· उच्च क्षमता वाली महिलाओं के लिए नेतृत्व तेज़ी से विकसित करने वाले कार्यक्रम

· गुणवत्तापूर्ण आवास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बाल देखभाल, खेल अवसंरचना और जीवंत सामुदायिक जीवन प्रदान करने वाली विश्वस्तरीय एकीकृत टाउनशिप तक पहुँच

अभियान से करियर तक

सोशल मीडिया पर तेजी से गति पकड़ रहा #HerAtTheCore अभियान महिला इंजीनियरों, भूवैज्ञानिकों, डेटा वैज्ञानिकों, ऑपरेटरों और नेताओं को वेदांता लिमिटेड के विभिन्न व्यवसायों में भूमिकाओं के लिए आवेदन करने के लिए आमंत्रित करता है।

दिखने वाले रोल मॉडल्स को सक्रिय भर्ती के साथ जोड़ते हुए, वेदांता लिमिटेड यह संदेश देना चाहती है कि मुख्य औद्योगिक क्षेत्र बदल रहे हैं और भारत के औद्योगिक भविष्य में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका है।

हिंदुस्तान जिंक ने सिल्वर रिकवरी पर एडवांस्ड रिसर्च के लिए वर्जीनिया टेक के साथ किया एमओयू

कंपनी का यूएस स्थित, मनोनित आर1 इंस्टीट्यूशन, वर्जीनिया टेक के साथ सहयोग

साइंटिफिक रिसर्च और ग्लोबल एकेडमिक पार्टनरशिप के जरिए मेटलर्जिकल कैपेबिलिटी को मजबूत करना उद्धेश्य

उदयपुर, 3 मार्च 2026। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक एवं टॉप पाँच सिल्वर उत्पादक कंपनी हिन्दुस्तान जिं़क ने वर्जीनिया टेक के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए है जिसके तहत्  स्पेशल प्रोसेसिंग प्लांट जहाँ माइन किए गए ओर को फ्लोटेशन के जरिए ट्रीट कर लेड, जिंक और सिल्वर जैसे कीमती मेटल को अलग और कंसंट्रेट किया जाता है, लेड-जिंक कंसंट्रेटर में सिल्वर रिकवरी को बेहतर बनाने पर फोकस्ड रिसर्च को आगे बढ़ाया जा सके। इसके हिस्से के तौर पर, प्रोसेसिंग के दौरान मेटल को अलग और कंसंट्रेट करने में मदद करने के लिए मिलाए जाने वाले स्पेशल केमिकल, फ्लोटेशन मेथड को बेहतर बनाने और रिएजेंट के इस्तेमाल को ऑप्टिमाइज करने के लिए फोकस्ड साइंटिफिक अध्ययन किया जाएगा, जिससे बेहतर कंसंट्रेट क्वालिटी और अधिक एफिशिएंट प्लांट ऑपरेशन में सहायता मिलेगी। वर्जीनिया टेक, ब्लैक्सबर्ग, वर्जीनिया में मौजूद एक जानी-मानी पब्लिक लैंड-ग्रांट रिसर्च यूनिवर्सिटी है। यह माइनिंग इंजीनियरिंग, मिनरल प्रोसेसिंग और एप्लाइड मेटलर्जिकल रिसर्च में अपनी एक्सपर्टीज के लिए जानी जाती है। इस पार्टनरशिप के जरिए, हिन्दुस्तान जिं़क ग्लोबल रिसर्च नजरिए और टेक्निकल जानकारी के उपयोग के लिए यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम करेगी, जिससे प्रोसेस की बेहतर समझ और इसके कंसंट्रेटर ऑपरेशन में लगातार सुधार में मदद मिलेगी।

यह कोलेबोरेशन हिंदुस्तान जिंक के लेड जिं़क कंसंट्रेटर में सिल्वर रिकवरी को बढ़ाने के लिए एक गहरी साइंटिफिक समझ बनाने पर प्रमुख ध्यान देगा, जिसमें मौजूदा प्लांट कॉन्फिगरेशन के साथ-साथ भविष्य के ओर टाइप में होने वाले बदलावों पर भी विचार किया जाएगा। यह स्टडी फ्लोटेशन सेलेक्टिविटी और ओवरऑल मेटल रिकवरी पर असर डालने वाले मुख्य मेटलर्जिकल फैक्टर की जांच करेगी, जिसमें खास तौर पर रिएजेंट-मिनरल-वॉटर इंटरैक्शन पर जोर दिया जाएगा जो प्रोसेस स्टेबिलिटी और कंसंट्रेट क्वालिटी में अहम भूमिका निभाते हैं।

इस उपलब्धि पर हिन्दुस्तान जिं़क के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि “ हमारा मानना है कि मेटल और माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ का अगला फेज साइंस, इनोवेशन और कोलेबोरेशन से चलेगा। वर्जीनिया टेक के साथ हमारी पार्टनरशिप हमारे नॉलेज इकोसिस्टम को मजबूत करने और भविष्य के लिए हमारे ऑपरेशन्स को तैयार करने में आवश्यक कदम है। विश्व के बड़े संस्थानों के साथ काम करके, हम ऐसी क्षमता बनाना जारी रखेंगे जो माइनिंग एक्सीलेंस की आने वाली पीढ़ी को परिभाषित करेंगी।

वर्जीनिया टेक में माइनिंग और मिनरल्स इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के हेड, एरॉन नोबल ने कहा कि, “हिन्दुस्तान जिं़क के साथ यह पार्टनरशिप ऐसे कोलेबोरेशन को दिखाती है जो मीनिंगफुल इम्पैक्ट डालता है।” “इंडस्ट्री के साथ सीधे जुडकर हम मिनरल रिकवरी पर अपनी कटिंग-एज रिसर्च को ऑपरेशनल चैलेंज एवं अवसरों पर लागू कर सकते हैं। इससे यह सुनिश्चत होगा कि हमारी खोज और जानकारी को आगे बढ़ाने से हम और भी आगे जाएं। हम इस रिसर्च को अधिक प्रभावी रिसोर्स उपयोग, मजबूत सप्लाई चेन और बड़े माइनिंग सेक्टर के लिए टैंजिबल बेनिफिट्स में परिवर्तित कर रहे हैं।”

यह प्रोजेक्ट अधिक प्रोसेस स्टेबिलिटी, बेहतर कंसंट्रेट क्वालिटी और एक जैसे ऑपरेटिंग नतीजों को सहयोग करने के लिए ऑप्टिमाइज्ड ऑपरेटिंग अप्रोच और रिएजेंट सिस्टम को डिफाइन करने की दिशा में भी काम करेगा। परिणामस्वरूप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह की स्ट्रेटेजी बनाने में मदद करेंगे, जिन्हें डायग्नोस्टिक्स, लैबोरेटरी इवैल्यूएशन और टेक्निकल असेसमेंट से सपोर्ट मिलेगा, जिन्हें ऑपरेशन्स में प्रैक्टिकल इम्प्लीमेंटेशन के लिए डिजाइन किया गया है।

इस पार्टनरशिप का एक मुख्य हिस्सा हिन्दुस्तान जिं़क की टीम के लिए नॉलेज ट्रांसफर और टेक्निकल कैपेसिटी बिल्डिंग होगा, जिसमें प्लांट ऑप्टिमाइजेशन, रिएजेंट स्ट्रेटेजी और प्रोसेस इम्प्रूवमेंट पर फोकस करने वाले स्ट्रक्चर्ड वर्कशॉप, ट्रेनिंग सेशन और टेक्निकल एक्सचेंज होंगे।

यह कोलेबोरेशन ग्लोबल पार्टनरशिप के जरिए अपनी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कैपेबिलिटी को मजबूत करने पर हिन्दुस्तान जिं़क के रणनितिक फोकस को और मजबूत करता है। पिछले कुछ वर्षो में, कंपनी ने मिनरल प्रोसेसिंग, क्रिटिकल मेटल्स रिसर्च, जिंक-बेस्ड बैटरी टेक्नोलॉजी और प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन से जुड़े इनिशिएटिव पर आईआईटी सीएसआईआर लैबोरेटरीज और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च जैसे बड़े एकेडमिक और रिसर्च इंस्टीट्यूशन के साथ कार्य किया है। इन कोलेबोरेशन ने इन-हाउस टेक्निकल कैपेबिलिटी बनाने,इनोवेशन को तेज करने और टेक्नोलॉजी-फर्स्ट, फ्यूचर-रेडी मेटल्स कंपनी हिन्दुस्तान जिं़क के लॉन्ग-टर्म विजन को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाई है।

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Hello world!!!

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हिन्दुस्तान जिंक के कर्मचारियों में अब 26.3 प्रतिशत महिलाएं, यह भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में सबसे अधिक और एकमात्र उपलब्धि

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मेटल और माइनिंग में महिलाओं को स्पॉटलाइट करने के लिए 25 दिन का

 ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ कैंपेन लॉन्च

हिन्दुस्तान जिंक के कर्मचारियों में अब 26.3 प्रतिशत महिलाएं,

उदयपुर, 2 मार्च 2026। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक और चांदी के वैश्विक शीर्ष पांच उत्पादकों में से एक, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने जेंडर इंक्लूजन (लैंगिक समानता) की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। कंपनी की वर्कफोर्स में अब 26.3 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में सबसे अधिक है यह एक ऐसा क्षेत्र जिसे पारंपरिक रूप से पुरुषों का काम माना जाता रहा है। कंपनी में अब 745 से अधिक महिलाएं कार्यरत है, जिनमें 314 से अधिक महिला इंजीनियर शामिल हैं। ये महिलाएं अंडरग्राउंड माइंस, स्मेल्टर और तकनीकी कार्यों जैसी प्रमुख भूमिकाओं में कार्य कर रही हैं। हिन्दुस्तान जिं़क ने महिलाओं को फ्रंटलाइन जिम्मेदारियों में शामिल कर एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने पहली बार महिलाओं को खदानों के भीतर, नाइट शिफ्ट में और अंडरग्राउंड माइन रेस्क्यू टीम में शामिल करने जैसी अनूठी पहल की है। रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 के उपयोग ने माइनिंग को और अधिक सुरक्षित बनाया है, जिससे महिलाएं इन तकनीकी क्षेत्रों में बढ़-चढ़कर अपना करियर बना रही हैं।

कंपनी ने महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ावा देने के लिए 25 दिनों का एक खास कैंपेन शुरू किया है, जिसका नाम है “शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन” इस कैंपेन के जरिए कंपनी उन महिलाओं की कहानियों को सामने ला रही है जो माइनिंग और मेटल इंडस्ट्री में अपनी विशेषज्ञता और साहस से बदलाव ला रही हैं। इसमें विज्ञान की छात्राओं को भी माइनिंग ऑपरेशंस का अनुभव कराया गया है। इन ऑपरेशन्स को आत्मविश्वास और अनुभव के साथ लीड करने वाली असाधारण महिलाओं से मिला जा रहा है। यह ऑपरेशन्स में साइंस से कहीं अधिक है, यह साइंस में महिलाएँ हैं जो एक बदलाव की लहर जगा रही हैं, जो स्टेम स्टूडेंट्स को प्रेरित करने की नींव से बनी है। कैंपेन के मुख्य हिस्से में, कंपनी ने भारत के सबसे उत्कृष्ट साइंस कॉलेज से 15 से अधिक डाइनैमिक महिलाओं को एक इमर्सिव सोशल एक्सपेरिमेंट के लिए आमंत्रित किया गया।  उन्होंने हिन्दुस्तान जिं़क के माइनिंग ऑपरेशन्स में काम किया, लोगों की सोच को हकीकत से जोड़ा और मेटल्स और माइनिंग में आगे बढ़ने के लिए अपनी क्षमता को जगाया। इससे पहले, अलग-अलग स्टेम महिलाओं को अपने क्षेत्र में आत्मविश्वास से आगे बढ़ कर कार्य करते हुए अवगत कराया गया, साथ ही काम पर जिंक महिलाओं की जीवंत डे इन द लाइफ झलकियों को भी दिखाया,  इंडस्ट्री के अनुभवों के साथ टेस्टिमोनियल्स भी दिखाए गये है। यह दिखाता है कि मेटल्स का भविष्य साइंस में महिलाओं पर क्यों निर्भर करता है, सिर्फ हिस्सा लेने के लिए नहीं, बल्कि इनोवेट करने, लीड करने और फील्ड को फिर से डिफाइन करने के लिए और इसका मकसद हैवी इंडस्ट्री और स्टेम करियर में महिलाएं क्या हासिल कर सकती हैं, इस बारे में सोच को फिर से परिभाषित करना है।

इस बदलाव को हिन्दुस्तान जिं़क की डिजिटल माइंस लीड कर रही हैं, जो टेली-रिमोट अंडरग्राउंड ऑपरेशन, ड्रोन-बेस्ड सर्विलांस, रियल-टाइम एनालिटिक्स, रिमोट ब्लास्टिंग और ऑटोमेटेड सिस्टम जैसी अत्याधुनिक क्षमता से लैस हैं। इन इनोवेशन ने क्षमतावर्धन किया है और अधिक महिला प्रोफेशनल्स को माइनिंग में मीनिंगफुल, फ्यूचर-रेडी करियर बनाने के लिए बढ़ावा दिया है।

इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरूण मिश्राने कहा कि, माइनिंग में महिलाओं को सशक्त बनाना केवल समानता की बात नहीं है, यह हमारे भविष्य के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य है कि हर प्रतिभाशाली महिला को बढ़ने का मौका मिले। हमारा लक्ष्य 2030 तक 30 प्रतिशत जेंडर डाइवर्सिटी हासिल करना है, और हम एक ऐसा कार्यस्थल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ लैंगिक समानता ही नवाचार का आधार हो। हिन्दुस्तान जिं़क में, हमने एक ऐसी संस्कृति बनायी है जहाँ महिलाएँ आगे रहकर लीड कर सकती हैं, चाहे वह अंडरग्राउंड माइंस की गहराई में काम करना हो, रोबोटिक ऑटोमेशन चलाना हो, या मेटलर्जी में सस्टेनेबिलिटी को आगे बढ़ाना हो। हमारा ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ कैंपेन हमारे विजन को दर्शाता है – पुराने नॉर्म्स को चैलेंज करना, पोटेंशियल को बढ़ावा देना, और यह सुनिश्चित करना कि हर प्रतिभावान महिला के पास आगे बढ़ने और कामयाब होने के लिए एक मंच हो।

हिन्दुस्तान जिं़क सपोर्टिव वर्कप्लेस पॉलिसी को एक बड़ा आधार देता है, जिसमें स्पाउस हायरिंग पॉलिसी, चाइल्डकेयर के लिए एक साल का सब्बाटिकल और मेंटल और फिजिकल हेल्थ को प्रायोरिटी देने वाली ‘नो-क्वेश्चन आस्क्ड’ फ्लेक्सीबिलिटी पॉलिसी शामिल है। पॉलिसी के अलावा, एम्प्लॉई वर्ल्ड-क्लास टाउनशिप में रहते हैं, जहाँ प्लांट के पास सभी मॉडर्न सुविधाएँ मिलती हैं। इनमें स्कूल, हॉस्पिटल, डेकेयर सेंटर, क्रेच,, स्पोर्ट्स और रिक्रिएशनल सुविधाएँ जैसे स्विमिंग पूल, गोल्फ कोर्स और मूवी थिएटर शामिल हैं, जो वाइब्रेंट सोशल लाइफ को बढ़ावा

हिन्दुस्तान जिंक ने भारत मोबिलिटी एक्सपो 2025 में ऑटोमोटिव इनोवेशन को बढ़ावा देने वाले लार्ज मेटल पोर्टफोलियो का किया प्रदर्शन

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– हिन्दुस्तान जिंक ने प्रगति मैदान में भारत मोबिलिटी एक्सपो 2025 में स्टाल 6 – हॉल 11 में स्पेशल हाई ग्रेड जिंक, इकोजेन, जिंक एलॉय सहित नवीन उत्पादों को प्रदर्शित किया

– कंपनी ग्लोबल ऑटोमोटिव रिवोल्यूशन को आगे बढ़ाने, उद्योग के लिए इनोवेटिव और सस्टेनेबल समाधान प्रस्तुत करने पर केंद्रित है

नई दिल्ली, 21 जनवरी 2025। भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में अपनी नवीन और अभिनव जिंक डाई कास्टिंग एलाॅय उत्पाद रेंज एचजेडडीए 3 और एचजेडडीए 5 के साथ-साथ ऑटो सेगमेंट के लिए उच्च गुणवत्ता वाले जिंक उत्पादों की अपनी पूरी रेंज प्रदर्शित की। ऑटोमोटिव एवं मोबिलिटी उद्योग के लिए आयोजित इस विश्वस्तरीय कार्यक्रम में कंपनी ने दुनिया के सबसे बड़े जिंक उत्पाद पोर्टफोलियो के साथ-साथ लेड, चांदी और मूल्यवर्धित उत्पादों को भी प्रस्तुत किया, जो ऑटोमोटिव उद्योग के लिए तैयार किए गए हैं।

ऑटोमोटिव क्षेत्र में गैल्वनाइज्ड स्टील के माध्यम से जिंक का उपयोग, हल्के स्टील बॉडी बीआईडब्लयू या बाॅडी इन व्हाइट को उच्च स्तर का जंग प्रतिरोधी क्षमता प्रदान कर ईंधन और उत्सर्जन में महत्वपूर्ण बचत प्रदान करता है, जिससे जंग से लंबे समय तक एंटी-पर्फोरेशन वारंटी के साथ लंबे समय तक चलने वाले वाहन सुनिश्चित होते हैं। कंपनी के जिंक डाई कास्टिंग एलाॅय विशेष रूप से हॉट चैंबर डाई कास्टिंग प्रक्रिया के लिए विकसित किए गए हैं, जो ऑटोमोटिव क्षेत्र की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए निर्मित हैं। बाजार में आमतौर पर जा़मक के रूप में उपलब्ध जिसे देश में आयात किया जाता है, इन मिश्र धातओं का हिन्दुस्तान जिं़क  प्राथमिक उत्पादक है। हिन्दुस्तान जिं़क के डाई कास्टिंग एलाॅय असाधारण कास्टिंग, दीर्घकालिक आयामी स्थिरता, तेज मशीनिंग और प्लेटिंग, पेंटिंग और क्रोमेट उपचार के लिए बेहतर फिनिशिंग प्रदान करते हैं। एचजेडडीए 3 और एचजेडडीए 5 दोनों ही ऑटोमोबाइल को उच्च शक्ति, विद्युत चालकता, जंग से प्रतिरोध और आयामी सहनशीलता प्रदान करते हैं। बेहतर डाई-कास्टिंग एलॉय  के क्षेत्र में कंपनी के प्रवेश से ऑटो ओईएम और घटक निर्माताओं के लिए अन्य देशों से आयात कम करने और देश में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मूल्य श्रृंखला बनाने का अवसर मिलता है।

इस कार्यक्रम का अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण हिन्दुस्तान जिंक का कम कार्बन वाला ग्रीन जिंक ब्रांड इकोजेन था, जिसमें पारंपरिक रूप से उत्पादित जिंक की तुलना में 75 प्रतिशत कम कार्बन फुटप्रिंट है, जिसके परिणामस्वरूप इकोजेन के साथ एक टन स्टील को गैल्वनाइज करने में लगभग 400 किलोग्राम का कुल कार्बन उत्सर्जन रोका जा सकता है। कंपनी की उत्पाद श्रृंखला में लेड भी शामिल है, जो ऑटोमोटिव बैटरी, कंपोनेन्ट्स और रेडियेशन शिल्डिंग के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि चांदी स्विच और रिले सहित ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स में चालकता और दक्षता को बढ़ाती है। जैसे-जैसे ऑटो उद्योग स्थानीयकरण, विद्युतीकरण और उत्सर्जन नियमों के साथ बदलता है, घरेलू स्तर पर उत्पादित , जिं़क, लेड और सिल्वर भविष्य के लिए सस्टेनेबल, उच्च प्रदर्शन वाले समाधान प्रस्तुत करते हैं।

हिन्दुस्तान जिं़क लिमिटेड के सीईओ और पूर्णकालिक निदेशक अरुण मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सस्टेनेबल भविष्य को आकार देने में सबसे आगे है, और हिंदुस्तान जिंक को इस यात्रा में भागीदार होने पर गर्व है। हम अभिनव, उच्च गुणवत्ता वाले समाधान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो न केवल उद्योग की अपेक्षाओं को पूरा कर रहे है बल्कि हमारा प्रयास उससे भी आगे है। हमारा विशाल उत्पाद पोर्टफोलियो ऑटोमोटिव विनिर्माण में दक्षता, स्थिरता और डिजाइन उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हम भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में अपनी विविध धातुओं का प्रदर्शन कर उत्साहित हैं, यह एक ऐसा मंच है जो सीमाओं से परे भविष्य के सह-निर्माण के हमारे दृष्टिकोण को दर्शाता है।”

हाल के रुझान भारतीय कार खरीदारों की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हैं जो सक्रिय रूप से ऑटो निर्माताओं से जंग रोधी या छिद्रण-रोधी वारंटी, विशेष रूप से कॉस्मेटिक पेंट के फीके पड़ने और छिलने से सुरक्षा के अलावा जंग से सुरक्षा की की मांग कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर, कॉस्मेटिक वारंटी आम तौर पर पांच साल तक चलती है, और छिद्रण-रोधी वारंटी दस साल तक बढ़ जाती है, जिससे कार बॉडी में गैल्वेनाइज्ड (जिंक-कोटेड) स्टील का उपयोग करना जरूरी हो जाता है। यह बदलाव खरीद के पहले कुछ महीनों से लेकर 2 वर्षो में वाहनों पर दिखाई देने वाले जंग के कारण होता है, खासकर भारत की कठोर मौसम स्थितियों में जहां कारें बाहर खड़ी होती है एवं तत्वों के संपर्क में होती हैं। ऑटो बॉडी के लिए जिंक-कोटेड स्टील (बॉडी-इन-व्हाइट या बीआईडब्ल्यू) का उपयोग तेजी से होने वाले जंग को रोकता है इसलिए, उपभोक्ताओं की बदलती अपेक्षाओं और अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए वाहनों में पर्याप्त जंग से सुरक्षा आवश्यक हो रही है। गैल्वेनाइज्ड कार बॉडी की बिक्री मूल्य में हिस्सेदारी 0.1 प्रतिशत से भी कम है, जो कि ओईएम द्वारा अनुकूलित विनिर्माण प्रक्रियाओं, ग्राहकों द्वारा कम रखरखाव खर्च और बेहतर वाहन सुरक्षा और प्रदर्शन के कारण बढ़ी हुई ब्रांड प्रतिष्ठा के द्वारा तुरंत ऑफसेट हो जाती है। अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के कारण निर्यात के लिए निर्मित लगभग 70 प्रतिशत भारतीय कार जिंक कोटेड स्टील (गैल्वेनाइज्ड या गैल्वेनील्ड स्टील) का उपयोग करती हैं। हालांकि, भारतीय उपभोग के लिए केवल 25 प्रतिशत कारों में जिं़क कोटेड स्टील का उपयोग किया जाता है। इनमें भी, इस्तेमाल की जाने वाली कोटेड स्टील की मात्रा लगभग 3 प्रतिशत से 50 प्रतिशत हो सकती है, जबकि निर्यात मॉडल के लिए बॉडी 70 से 80 प्रतिशत  जिंक से सुरक्षित हो सकती है।

हिन्दुस्तान जिं़क लंबे समय से ऑटो उद्योग का अपस्ट्रीम पार्टनर रहा है, जो कार बॉडी से लेकर बैटरी, चिप्स, एक्सेसरीज और सबसे महत्वपूर्ण जंग-रोधी घटकों तक विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए विविध धातु पोर्टफोलियो प्रदान करता है। कंपनी के मूल्यवर्धित जिंक उत्पादों का व्यापक पोर्टफोलियो भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है, जो प्रदर्शन, गुणवत्ता और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने वाले लागत प्रभावी समाधान प्रदान करता है। हिन्दुस्तान जिं़क उत्पाद नवाचार के लिए ग्राहक-प्रथम दृष्टिकोण पर केंद्रित है। कंपनी की ग्राहक तकनीकी सेवा टीम ग्राहकों के साथ मिलकर कार्य करती है ताकि उन्हें सहज अनुभव प्रदान किया जा सके। सर्वोच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध, कंपनी के जिंक और लेड उत्पाद देश में पहले ऐसे हैं जिन्हें पर्यावरण उत्पाद घोषणा (ईपीडी) के साथ-साथ गुणवत्ता के लिए आईएसओ और बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) प्रमाणपत्रों द्वारा सत्यापित किया गया है।

हिन्दुस्तान जिंक के स्वास्थ्य अभियान के तहत विश्व स्तनपान सप्ताह आयोजित

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हिंदुस्तान जिंक, द्वारा स्वास्थ्य अभियान के तहत् विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान अपनी विभिन्न इकाईयों में जागरूकता सत्र आयोजि दीपक फाउंडेशन के सहयोग से हिंदुस्तान जिंक द्वारा मोबाइल स्वास्थ्य सेवा के अंतर्गत जावर, चंदेरिया और आगुचा आयोजित किये गये। यह अभियान हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड द्वारा देश भर में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के भीतर स्तनपान की सुरक्षा, प्रचार और समर्थन पर मुख्य ध्यान देने के उद्धेश्य से आयोजित किया गया।

1992 में शुरू किए गए, विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य महिलाओं, स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों, सामुदायिक सहायता, पारिस्थितिकी और मानवाधिकारों के बीच स्तनपान को बढ़ावा देना है। हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा वर्ष 2016 से पहल कर धात्री महिलाओं को पहले छह महीनों के लिए विशेष रूप से स्तनपान है और इसके बाद 2 साल और उससे अधिक उम्र तक उचित पोषण वाले भोजन के साथ स्तनपान जारी रखने े प्रति कारी प्रदान कर रहा है। सप्ताह के दौरान महिलाओं को कुपोषण कम करने में मां के दूध की महत्वपूर्ण भूमिका, नवजात जिसे जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध पिलाया जाता है, वह स्वतः ही पुरानी और संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित होने, स्तनपान मां और शिशु के बीच साझा किए गए बंधन को मजबूत करने जैसी जानकारियां दी गयी। जागरूकता सत्र में 550 माताएं लाभान्वित हुई।

हिन्दुस्तान जिंक के सहयोग से ग्रामीण सखी महिलाएं बनी सशक्तिकरण की मिसाल

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अजमेर जिले के कायड गांव की रहने वाली गुड़िया कंवर महिला सशक्तिकरण की मिसाल हैं। वह ढाई साल पहले हिन्दुस्तान जिं़क की सखी परियो तहत् संचालित उड़ान स्वयं सहायता समूह में शामिल हुई थी, जिसके बाद से वह अचार की यूनिट से जुड़कर कार्य कर रही है।गुडिया कंवर अपने परिवार के सहयोग से स्वयं सहायता समूह में शामिल हुईं जिसने उसे  कार्य करने का अवसर देने और प्रभावी ढंग से बातचीत करने का अवसर प्रदान किया, जिससे समुदाय में उनकी पहचान और व्यक्तित्व विकास हुआ। वह अपने परिवार की आर्थिक और सामाजिक सशक्तिरण का आधार है। गुडियां कंवर की र ह कायड की अनिशा बानू भी हिन्दुस्तान जिंक के सखी परियोजना से जुड़कर अचार यूनिट में कार्यरत है जिसने उसे आत्मविश्वास देकर आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया है अनिशा अब आगे पढ़ाई कर अपने परिवार और समाज में सशक्तिरण की मिसाल बनना चाहती है जिसमें अब उसका परिवार भी उसके साथ है।

परिवार और समुदाय के सर्वागिंण विकास सुनिश्चित करने का दृष्टिकोण महिला सशक्तिकरण को प्रोतसहत कना है।स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामुदायिक विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित करना हिंदुस्तान जिंक की प्रतिबद्धताओं में से एक है।

सखी कार्यक्रम के तहत् वर्ष 2020 में कायड में अचार इकाई के रूप में लघु उद्यम स्थापित किया गया, जो स्थानीय महिलाओं को आय और आजीविका बनाने का अवसर ्रान रत है।वर्तमान में 12 से 15 सखी महिलाएं कच्चे माल के प्रसंस्करण से लेकर तैयार उत्पादों की पैकेजिंग तक व्यवसाय के सभी क्षेत्रों में जुडी हैं। अचार इकाई में प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण सुविधा और तैयार उत्पाद हेतु स्थान है। अपने उत्पाद को बाजार से जोड़ने के अधिक से अधिक अवसरों ने महिलाओं को अधिक स्वतंत्र और समाज में अधिक मान्यता के लिए प्रेरित किया है।

कायड में स्थित अचा यूनट में आम ा अचार, लिसोडा अचार, लेमन स्वीट, लेमन सॉर, हल्दी अचार, लहसुन का अचार, सिंघाडा अचार, मिक्स अचार और हरी मिर्च अचार सहित दस अलग-अलग प्रकार के अचार वर्तमान में बनाएं जाते हैं।12 सखी इन अचारों के विक्रय और विपणन से जुडी हैं।  ये सखी अचार इकाई में कार्य कर 4,500 से 6,000 रुपये प्रति माह अर्जित कर रही हैं। अब तक कुल 20,710 किलोग्राम अचार का उत्पादन किया जा चुका है। इसके अलावा, उनके पास एक मार्केटिग टीम है ज अजमेर, दि्ली, य, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और राजस्थान के अन्य स्थानों में अचार बेचने के लिए थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के साथ संबंध स्थापित करने के लिए कार्यरत है।

अचार की इकाई पूर्व में महिलाआंे द्वारा घर में ही द्वारा चलाई जाती थी, जिसने उनके सशक्तिकरण और उत्पादता को सीमित कर दिा।हिदुस्तन जिंक और मंजरी फाउंडेशन की दृढ़ पहल से ग्रामीण महिलाएं प्रेरित हुईं और परिणामस्वरूप, उन्हें व्यवसाय चलाने में विश्वास हुआ।

अचार इकाई में सखियों ने इस व्यवसाय में महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए अन्य महिलाओं के जीवन और कल्याण में सुधार करने की अपनी उल्लेखनीय क्षमता साबित की है।इ महिला वयवसा उद्यमियों े सहयोगत्म सामाजिक और सामुदायिक पहल को प्रोत्साहित किया है।

हिन्दुस्तान जिंक ग्रामीण महिलाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड कर उन्हें उद्यमी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।हिन्दुस्तान जिंक अपने सामाजिक सरोकार के तहत महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए विगत 14 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का स्वंय सहायता समूह बनाकर उनक रचि एवं आवश्यकता आधारि प्रशि्षण देकर समा मे अपनी अलग ही पहचान दिलाने का अनुठा प्रयास कर रहा है। फलस्वरूप इस अभियान से जुडी महिलाओं में अदम्य विश्वास मुखरित हुआ है।

हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा अपने संचालन में ना सिर्फ अपने सयंत्रों और खानों के विभिन्न विभागों में महिलाओं को पुरूषों के बराबर दर्जा है बल्कि आस पास के गांवों में संचालित की जा रही सखी परियोजना से जुडी मिलाएं समाज ें कंधे से कंा मिला र परिवार के उतथान े लिए कार्यरत है।अजमेंर जिलें में सखी परियोजना आज न सिर्फ स्वयं आत्मनिर्भर बन महिला सशक्तिकरण की मिसाल है बल्कि अपने आस पास की महिलाओं को समूहों से जोड़ कर उन्हें स्वावलंबन हेतु प्रोत्साहन देकर प्रेरित भी कर रही है।

अजमेंर जिलें में सखी प्रयास समिति में 5 ग्राम पंचायतों के  6 गावों से 144 स्वयं सहायता समूह संचालित है जससे 1708 महिलाएं जुडी ुई है। नकी कुल बचत 1 करोड 23 जार ह, इन्ोंन 3 करोड 87 लाख 66 हजार का ऋण प्रदान किया जिसमें से 2 करोड 63 लाख 93 हजार पुर्नभुगतान कर दिया गया है।सखी प्रयास समिति से 392 सदस्यों को आजिविका संवर्धन से जोड़ा गया। वित्तिय सहयोग से 78 सखी माट विकसित किये गये। महिलाओं को आवश्यकतानुसार सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया।

हिंदुस्तान जिंक द्वारा खनन कार्यों में आंतरिक प्रतिभा के कौशल एवं अवसर वृद्धि हेतु जावर में ‘हिंदुस्तान जिंक माइनिंग अकादमी’ का शुभारंभ

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इस अनूठी पहल से भूमिगत खदानों में जंबो हेल्पर्स प्रमाणित ऑपरेटर बन सकेंगे

– पांच महीने तक चलनेवाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 16 सप्ताह का क्लासरूम इंस्ट्रक्शन शामिल होगा

उदयपुर, 30 जुलाई, 2022: देश की एकमात्र और विश्व की अग्रणी एकीकृत जस्ता-सीसा-चांदी उत्पादक, कंपनी हिंदुस्तान ज़िंक द्वारा खनन कार्यों में व्यापारिक भागीदारों के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के उद्येश्य से अनूठी पहल कर जावर में  ‘हिंदुस्तान जिंक माईनिंग अकादमी’ की स्थापना की है।  देश मे  खनन क ं कुशल कर्मचारियों की महती आवश्यकता है, इस समस्या को हल करने के उद्देश्य से इस हेतु सहायता के लिए, कंपनी ने अनुसंधान किया जिसने जंबो ड्रिल ऑपरेटरों की पहचान करने में मदद की। इस क्षेत्र में अक्सर एक्सपैट्स द्वारा रूचि ली जाती है। खनन  व्यवसाय में आंतरिक प्रतिभाएं अधिक और बेहतर कुशल कर्मचारी विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकते है। उदघाटन समारोह में हिन्दुस्तान जिं़क के मुख्य करयाी अधिकारी अरूण मिश्रा, सीएचआरओ अजय सिंगरोहा, जावर के आईबीयू सीईओ विनोद कुमार एवं जावर मजदूर संघ के जनरल सेक्रेट्री लल्लू राम मीणा उपस्थित थे।

खनन अकादमी को जीएचएच इंडिया माइनिंग एंड टनलिंग इक्विपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से विकसित किया या ै।िसा उ्दशय जंबो ड्रिल संचालन के लिए विशेषज्ञ कौशल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कंपनी में कार्यरत प्रतिभा विकसित करना है। हिंदुस्तान जिंक ने इस कार्यक्रम को 3डी सिम्युलेटर जैसे विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से मजबूत किया है, जो एक वर्चुअल रियलिटी हाई-टेक डिवाइस है जिसका उपयोग ऑपरेटरों को भारी मशीनरी में प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है। सिमुलेटर नियंत्रण परिचित, प्रक्रिया अनुपालन दि सित अवधारणाओं के साथ-साथ कौशल के बारे में आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए एक लागत प्रभावी, सुरक्षित और कुशल तरीका साबित हुआ है। इसके अलावा, इस तरह के सिमुलेशन प्रशिक्षण उत्पादकता को अनुकूलित करने और दक्षता बढ़ाने में भी मदद करता है। कार्यक्रम कक्षा तथा सिम्युलेटर प्रशिक्षण और जाॅब पर प्रशिक्षण का एक एकीकरण है जो आॅन द जाॅब प्रशिक्षण के प्रमुख तत्वों में से एक आॅपरेटर शडोइंग ह जिसें उम्मीदवार रतमान जंबो आॅपरेटरों को बारीकी से शैडोइंग करेंगे जो उन्हें प्रशिक्षको के रूप में दायित्व सौंपे गए हैं और वे इस प्रकार व्यापक व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।

इस अवसर पर, हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी,  अरुण मिश्रा ने कहा, कि”जावर में ‘हिंदुस्तान जिंक माइनिंग अकादमी’ की स्थापना का उद्देश्य देश के युवाओं के लिए नन उदयोगमें ौशल को बढ़नाहै य अकादमी जंबो ड्रिल ऑपरेटरों, लोड हॉल डम्पर (एलएचडी) ऑपरेटरों और लो-प्रोफाइल डम्पर ट्रक (एलपीडीटी) ऑपरेटरों को प्रशिक्षित करने में मदद करेगी और उन्हें भारतीय खनन उद्योग में कौशल बढ़ाने और प्रवासियों पर निर्भरता को कम करने में सक्षम बनाएगी। हम 20 खनन अनुभवी जंबो हेल्पर्स के साथ जावर मं माइनंग एकेडमी का पहल बैच शुरू करेंगे और अन्य खनन स्थानों से बैचों को आमंत्रित करना जारी रखेंगे।

यहअनूठी पहल जंबो हेल्पर्स और संबद्ध क्रू सदस्यों को प्रमाणित जंबो ड्रिल ऑपरेटरों में महत्वपूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करती है।कार्यक्रम पांच महीने की अवधि में होगा जिसमें 16 सप्ताह का कक्षा निर्देश, अनुकरण प्रशिक्षण और सात सप्ताह का ऑन-द-जॉब निर्देश शामिल होगा। इस ्यापक प्रशिक्षण का्यक्रम में जबो डरिल ऑपेशन के सभी पहलुओं के साथ-साथ रखरखाव की कुछ बुनियादी बातें शामिल होंगी।

हिन्दुस्तान जिंक की आरडी माइन को स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु सिल्वर अवार्ड

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हिन्दुस्तान जिंक के दरीबा स्मेल्टिंग काॅम्प्लेक्स के राजपुरा दरीबा माइन के प्रोजेक्ट आरडी पेस्ट फिल एंड ड्राई टेलिंग प्रोजेक्ट को स्वास्थ्य और ्रदर्शन के लिए राॅयल सोसायटी फोर द प्रिवेन्शन आफ एक्सीडेन्ट्स द्वारा सिल्वर अवार्ड- 2022 से पुरस्कृत किया गया है। आरडी माइन में प्रोजेक्ट के दौरान 2 मिलियन सुरक्षित कार्य कर शून्य रिकॉर्ड करने योग्य दूर्घटना दर्ज की गयी। कामगारों की प्रेरणा के लिए पुरस्कार और मान्यता कार्यक्रम चलाया गया। साइट पर असुरक्षित परिस्थितियों से बचाव के लिये कार्यबल  को सकारात्मक व्यवहार हेतु  सेफ्टी ्ाा व नुक्कड़ नाटक के आयोजन किये गये।  सजीव प्रदर्शन विशेषज्ञ और प्रमाणित तृतीय पक्ष द्वारा शुरू और संचालित सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए विशेष जागरूकता प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया गया। सुरक्षा जानकर जैसी पहल द्वारा असुरक्षित कार्य की पहचान में कामगारों की भागीदारी। आंतरिक सीएससी ऑडिट, श्रमिकों की जागरूकता में सुधार के लिए हिन्दुस्तान जिं़क प्रशिक्षकों द्वार आयजि प्रशिक्षण और निरीक्षण। आठ कर्मियों के साथ समर्पित बचाव दल को सक्षम तृतीय पक्ष द्वारा प्रशिक्षित और प्रमाणित किया गया है जो कि आपातकालीन स्थितियों को संभालने के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं।

ज़िंक द्वारा स्वास्थ्य सेवा के तहतविश्व हेपेटाइटिस दिवस पर ग्रामीणों को किया जागरूक

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विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर हिन्दुस्तान जिंक द्वारा दीपक फाउंडेशन के सहयोग से संचालित मोबाइल स्वास्थ्य ईकाई के माध्यम से हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए प्रयासरत है। इस सम्बन्ध में उदयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिले के जावर माइंस, अगुचा माइंस और चंदेरिया के समीपस्थ गणेशपुरा, बोधियाना, आनंदीपुरा, लक्ष्मीपुरा, नेवतलाई और भलदिया गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये। 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ बारूक ब्लमबर्ग का जन्मदिन है, जिन्होंने स बी वायरस की खोज की और वायरस का परीक्षण कर टीका विकसित किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित दुनिया भर के संगठन वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाते हैं, जो दुनिया भर में 354 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करता है।