वेदांता की हिंदुस्तान जिंक और केयर्न ऑयल एंड गैस ने 1 लाख करोड़ के निवेश से राजस्थान के विकास को दी गति

पिछले एक दशक में राष्ट्रीय और राज्य के खजाने में लगभग 3 लाख करोड़ का योगदान, नए निवेश विकास के अगले चरण को आगे बढ़ाएंगे

राजस्थान में सबसे बड़े औद्योगिक रोजगार देने वाली कंपनी में से एक, जो विभिन्न उद्योगों में हजारों लोगों की आजीविका में सहायक

पिछले एक दशक में हिंदुस्तान जिंक द्वारा सामुदायिक विकास की पहलों में लगभग 2,000 करोड़ का निवेश किया

राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य पर वेदांता समूह ने 1 लाख करोड़ के निवेश के साथ राज्य के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। यह निवेश धातुओं, तेल और गैस, तथा ऊर्जा क्षेत्रों में पहले से ही किए गए 1.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश के अतिरिक्त है। अपने प्रमुख व्यवसायो हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और केयर्न ऑयल एंड गैस के माध्यम से, यह समूह राजस्थान के आर्थिक विकास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले एक दशक में राष्ट्रीय और राज्य के खजाने में लगभग 3 लाख करोड़ का योगदान दिया है, साथ ही राजस्थान को औद्योगिक विस्तार के लिए प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरने में भी सहयोग किया है। वेदांता का योगदान संसाधन विकास और ऊर्जा सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में है, जिससे राजस्थान भारत के विकास के एक प्रमुख स्थान के रूप में स्थापित हुआ है। हिंदुस्तान जिंक राजस्थान की कुल खनन रॉयल्टी में लगभग एक-तिहाई का योगदान देता है, जबकि बाड़मेर-सांचोर बेसिन में केयर्न के परिचालन ने इस क्षेत्र को भारत की सबसे रणनीतिक ऑनशोर  ऊर्जा संपत्तियों में से एक के रूप में स्थापित किया है। केयर्न के निवेशों ने बाड़मेर में महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन हुआ हैं, जिसके परिणामस्वरूप जिले की जीडीपी में 650 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। ये सभी व्यवसाय मिलकर राजस्थान को धातुओं के लिए एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र और तेल तथा गैस उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र में परिवर्तित करने में सफल हुए हैं। वर्ष 2002 से हिंदुस्तान जिंक ने परिष्कृत धातु के उत्पादन को बढ़ाकर सालाना दस लाख टन से अधिक कर दिया है। इसी अवधि में चांदी का उत्पादन लगभग बीस गुना बढ़ गया है, जिससे भारत चांदी का शुद्ध उत्पादक बन गया है। आज यह कंपनी 40 से अधिक देशों को चांदी निर्यात करती है, जिससे राजस्थान वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती से अपना स्थान बना चुका है। केयर्न का प्रमुख बाड़मेर-सांचोर बेसिन लगातार उत्पादन जारी रखे हुए है। वित्त वर्ष 2025 में इसका उत्पादन 84,276 बीओईपीडी (प्रति दिन तेल के समतुल्य बैरल) तक पहुँच गया, और इसका संचयी उत्पादन 781एमएमबीओई रहा, जिससे भारत की घरेलू ऊर्जा क्षमताओं को और अधिक बल मिला है। वेदांता के ऑपरेशन्स ने पूरे राज्य में एक मजबूत और सबको साथ लेकर चलने वाला आर्थिक इकोसिस्टम बनाया है। कुल मिलाकर, ग्रुप ने अब तक 1 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान किये है, साथ ही अपने सप्लायर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज के नेटवर्क के जरिए हजारों लोगों की आजीविका को भी मजबूत बनाया है। यह नेटवर्क जिंक सिटी, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, अजमेर और बाड़मेर जिलों में संचालित है। इन जिलों में दुनिया की कुछ सबसे बड़ी संपत्तियाँ मौजूद हैं, जिनमें दुनिया का सबसे बड़ा अंडरग्राउंड जिंक माइनिंग ऑपरेशन, रामपुरा आगुचा, दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल स्मेल्टिंग सेंटर चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स, और बाड़मेर जिले में भारत का सबसे बड़ा ऑनशोर तेल उत्पादन क्षेत्र, मंगला शामिल हैं। हिंदुस्तान जिंक हाल ही में 2025 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स में शामिल होने वाली पहली भारतीय कंपनी भी बन गई है।

इस अवसर पर वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि “जब प्राकृतिक संसाधनों की बात आती है, तो राजस्थान भारत के लिए सबसे खास जगह रखता है। इसकी जमीन के नीचे जो कुछ भी मौजूद है, धातुएँ, खनिज, तेल और गैस ,उसमें न सिर्फ इस राज्य को, बल्कि पूरे देश को ऊर्जा देने की क्षमता है। हिंदुस्तान जिंक और केयर्न के जरिए, हमने राजस्थान में पहले ही 1.5 लाख करोड़ से अधिक  का निवेश किया है, जिससे जिंक, चाँदी और तेल व गैस के क्षेत्र में विश्व-स्तरीय क्षमताएँ विकसित हुई हैं, और साथ ही रोजगार व आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है। लेकिन मेरा मानना है कि यह तो अभी बस शुरुआत है। सही सोच और रफ्तार के साथ, राजस्थान प्राकृतिक संसाधनों और मैन्युफैक्चरिंग का एक ग्लोबल हब बन सकता है। हमारे निवेश का अगला चरण उत्पादन को दोगुना करने, बड़े औद्योगिक इकोसिस्टम बनाने और सैकड़ों डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज को यहाँ विकसित होने में मदद करने पर केंद्रित होगा। अगर हम इस क्षमता का पूरी तरह से इस्तेमाल कर पाए, तो राजस्थान न सिर्फ भारत की संसाधन सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि लाखों रोजगार भी प्रदान करेगा और भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा में एक निर्णायक शक्ति बनकर उभरेगा।”

भविष्य की ओर देखते हुए, वेदांता अलग-अलग सेक्टर में औद्योगिक विस्तार के अगले चरण को आगे बढ़ा रहा है। जिंक पार्क का विकास जो अपनी तरह का पहला डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम है, लगभग 200 उद्योगों को जगह देगा, जिससे एमएसएमई और वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक मजबूत आधार बनेगा। साथ ही, केर्न लंबे समय तक उत्पादन बनाए रखने और अतिरिक्त भंडार को निकालने के लिए एनहांस्ड ऑयल रिकवरी जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना जारी रखे हुए है।

उद्योग संचानल के साथ ही वेदांता राजस्थान में सामाजिक बदलाव लाने में भी अग्रणी है। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के जरिए, ग्रुप ने महिलाओं और बच्चों के पोषण और शिक्षा को मजबूत करने के लिए 25,000 से अधिक नंद घर बनाए हैं। हिंदुस्तान जिंक ने पिछले एक दशक में कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम में लगभग 2,000 करोड़ का निवेश किया है। वेदांता गर्ल्स पीजी कॉलेज, रिंगस जैसे संस्थान, जिन्होंने 50,000 से अधिक छात्राओं को शिक्षा दी है। गुरुकुल पब्लिक स्कूल व वेदांता स्कूल ने मिलकर 25,000 से अधिक बच्चों को सशक्त बनाया है। कंपनी अपने मुख्य कामों में भी समावेश को बढ़ावा दे रही है। अब महिलाएं भूमिगत खदानों में काम कर रही हैं और जरूरी कामों की कमान संभाल रही हैं, जबकि केर्न की सामाजिक पहल स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में लगभग 20 करोड़ लोग लाभान्वित हुए है।

राजस्थान का नीतिगत स्थिरता, तेजी से मंजूरी और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर लगातार ध्यान देना बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास को संभव बना रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मजबूत ढांचों और सक्रिय शासन के साथ, यह राज्य तेजी से प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

राजस्थान दिवस के इस अवसर पर वेदांता ग्रुप सस्टेनेबल संचालन को आगे बढ़ाने, स्थानीय इकोसिस्टम को मजबूत करने और समावेशी विकास को संभव बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है। साथ ही, यह राज्य के साथ मिलकर उसके औद्योगिक और सामाजिक-आर्थिक बदलाव के अगले चरण में सहयोग करने के लिए कार्य कर रहा है।

 

हिंदुस्तान जिंक की पहल से देबारी क्षेत्र के युवाओं को मिला सुनहरा अवसर

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पूर्व में संचालित निःशुल्क कोचिंग से सरकारी सेवा में चयनित विद्यार्थियों का किया सम्मान

हिंदुस्तान जिंक, वेदांता ग्रुप के तत्वावधान में देबारी क्षेत्र के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। इसके तहत विभिन्न सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराने की योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में युवाओं ने भागीदारी दिखाई।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि कुलदीप शर्मा, एडीजे उदयपुर, गिरीश भटनागर, संयुक्त निदेशक, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग, नरेश अग्रवाल, फाइनेंस हेड जिंक स्मेल्टर देबारी, रुचिका नरेश चावला, सी एस आर हेड जिंक स्मेल्टर देबारी तथा डॉ एस एस सुराणा, संस्थापक डॉ अनुष्का विधि महाविद्यालय, श्रीमती कमला सुराणा, अध्यक्षा डॉ अनुष्का मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी, अपर्णा व्यास, सीएसआर टीम, आरएएस, एसजेइ सूरज परमार द्वारा किया गया।

इस अवसर पर अतिथियों ने विद्यार्थियों को बैग एवं नोट्स वितरित किए ।

मुख्य अतिथि कुलदीप शर्मा ने अपने संबोधन में विद्यार्थी जीवन में अथक परिश्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि इस निःशुल्क कोचिंग के द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी दृढ़ संकल्प से जीवन में ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

कार्यक्रम में गिरीश भटनागर ने विद्यार्थियों को अपनी समाहार शक्ति का सही उपयोग करने की प्रेरणा दी और कहा कि यही सफलता की कुंजी है। वहीं फाइनेंस हेड जिंक स्मेल्टर देबारी, नरेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं दी एवं इस निःशुल्क कोचिंग का लाभ लेते हुए जीवन मे सफल होने का मार्गदर्शन प्रदान किया ।

सूरज परमार द्वारा अपने संसाधनहीन बचपन का उदाहरण देते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और मजबूत संकल्प व्यक्ति जीवन मे ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान हिन्दुस्तान जिंक द्वारा पूर्व में संचालित निःशुल्क कोचिंग के सरकारी सेवा में चयनित विद्यार्थियों गणेश लाल मेघवाल, भँवर लाल गायरी, मांगीलाल गमेती का सम्मान किया गया ।

कार्यक्रम के दौरान अनुष्का ग्रुप के निदेशक राजीव सुराणा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि यह 100 दिवसीय योजना देबारी क्षेत्र के युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अनुष्का ग्रुप पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ विद्यार्थियों को आगामी तीन माह तक गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के दौरान देबारी परिधि क्षेत्र के 110 से अधिक युवा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

चेन्नई में आयोजित आईआरसीई 2026 में हिंदुस्तान जिंक ने किया मजबूत रेल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में जिंक की भूमिका का प्रदर्शन

 

विश्व का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड जिंक और शीर्ष पाँच सिल्वर उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने 12 से 14 मार्च तक चेन्नई में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल रेल कोच एक्सपो 2026 में दर्शाया कि जिंक बेस्ड सॉल्यूशन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को किस प्रकार मजबूत कर सकते हैं और लाइफसाइकल मजबूती को बढ़ा सकते हैं।
भारत का रेलवे नेटवर्क एक लाख किलोमीटर से अधिक ट्रैक पर फैला है और हर साल अरबों यात्रियों द्वारा सफर किया जाता है। इस बड़े सिस्टम का अधिकततर हिस्सा स्टील के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करता है,जिसमें ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन मास्ट और पुल से लेकर सिग्नल पोस्ट और स्टेशन स्ट्रक्चर तक शामिल हैं। हालांकि, भारत की लंबी कोस्टलाइन, अधिक नमी, मानसून की स्थिति और इंडस्ट्रियल प्रदूषण स्टील को जंग लगने का खास तौर पर नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे स्ट्रक्चरल मजबूती पर असर पड़ सकता है और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ सकता है।
जिंक गैल्वनाइजेशन, जिसमें स्टील पर एक प्रोटेक्टिव जिंक लेयर की कोटिंग की जाती है इस चुनौती से निपटने के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल सॉल्यूशन के तौर पर सामने आया है। जिंक कोटिंग एक फिजिकल बैरियर और एक सैक्रिफिशियल लेयर दोनों का काम करती है, जिससे स्टील स्ट्रक्चर की उम्र काफी बढ़ जाती है और मेंटेनेंस की जरूरतें कम हो जाती हैं।
जापान और यूरोप के हाई.स्पीड सिस्टम सहित दुनिया भर के बड़े रेल नेटवर्क मेंए जिंक़ कोटेड स्टील का उपयोग जरूरी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, मजबूती और भरोसे को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं होल टाइम डायरेक्टर अरुण मिश्रा ने कहा इस बारे में कहा कि, भारत में रेलवे नेटवर्क अपने इतिहास में सबसे अधिक बदलाव लाने वाले नेटवर्क में से एक है। जैसे.जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा और मॉडर्न हुआ है मजबूती और लाइफसाइकल भी बहुत जरूरी हो गए हैं। जिंक.बेस्ड प्रोटेक्शन स्टील इंफ्रास्ट्रक्चर को जंग लगने से बचाने में मदद करता है ताकि सेफ्टी बनी रहे, नुकसान को रोका जा सके और रेल एसेट्स के लिए लंबे समय तक स्टेबिलिटी बनी रहे, जो भारत के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के पिलर्स बनाने के विजन के अनुरूप है।
आईआरसीई 2026 में हिंदुस्तान जिंक के पवेलियन में ट्रेन जैसा इंस्टॉलेशन है, जो विजिटर्स को एक ऐसा इमर्सिव अनुभव प्रदान करता है जिसमें दर्शाया गया है कि जिंक किस प्रकार से मॉडर्न रेलवे सिस्टम की रीढ़ को मजबूत करता है। पवेलियन गैल्वेनाइज्ड स्टीलए जंग से बचाने वाले सिस्टम और जरूरी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपोनेंट्स में जिंक के उपयोग को दिखाता है। खास आकर्षणों में से एक सेंसर.एक्टिवेटेड इंटरैक्टिव फ्लोर है, जहाँ आने वाले दर्शक तय जोन पर छोटी डिजिटल कहानियाँ सुन सकते हैं। ये कहानियाँ बताती हैं कि कैसे जिंक बेस्ड प्रोटेक्शन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में स्ट्रक्चरल सपोर्ट और इलेक्ट्रिफिकेशन सिस्टम से लेकर सेफ्टी बैरियर और स्टेशन स्ट्रक्चर तक मजबूती बढ़ाता है, जिससे आखिर में मेंटेनेंस की जरूरत कम होती है और ऑपरेशनल रिलायबिलिटी बेहतर होती है।
हिंदुस्तान जिंक के पोर्टफोलियो में लंदन मेटल एक्सचेंज रजिस्टर्ड प्रोडक्ट शामिल हैं, जैसे स्पेशल हाई.ग्रेड जिंक, हाई ग्रेड जिंक, इकोजेन, लोकार्बन ग्रीन जिंक, प्राइम वेस्टर्न जिंक कंटीन्यूअस गैल्वनाइजिंग ग्रेड जिंक, हाईग्रेड जंबो जिंक और डाई कास्टिंग एलॉय, एलॉय 3 और एलॉय 5, साथ ही स्पेशल हाईग्रेड लेड। पूरी तरह से इंटीग्रेटेड माइनटूमेटल उत्पादक कंपनी एक भरोसेमंद सप्लाई चेन और ग्लोबल मार्केट में बिना रुकावट डिलीवरी सुनिश्चित करती है।
40 से अधिक देशों में कस्टमर्स को सर्विस देते हुए हिंदुस्तान जिंक कस्टमर फोकस्ड इनोवेशन को सर्टिफाइड क्वालिटी के साथ जोड़ता है। यह भारत का पहला जिंक प्रोड्यूसर है जिसे यूरोप में एक्सपोर्ट के लिए एनवायर्नमेंटल प्रोडक्ट डिक्लेरेशन, वेरिफिकेशन बीआईएस सर्टिफिकेशन और आरईएसीएच कम्प्लायंस मिला है।
मटीरियल और करोजन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी में लगातार इनोवेशन के माध्यम से हिंदुस्तान जिंक का उद्धेश्य अधिक सस्टेनेबल और भविष्य के लिए तैयार रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास मे सहायता करना है जो भारत के बढ़ते रेल नेटवर्क की लंबे समय तक चलने वाली मजबूती में योगदान दे।

हिंदुस्तान जिंक द्वारा चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में सभी शिफ्ट में कार्य के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाली ‘तेजस्विनी’ ऑल-वुमन शिफ्ट शुरू

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उदयपुर, । भारत की मेटल्स और माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक एवं शीर्ष पांच सिल्वर उत्पादक में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में सभी शिफ्ट में कार्य के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाली ‘तेजस्विनी’ ऑल-वुमन शिफ्ट की शुरूआत की है। यह विश्व की सबसे बड़ी और सबसे अधिक टेक्नोलॉजी वाली एडवांस्ड जिंक स्मेल्टिंग सुविधाओं में से एक है। यह पहल कंपनी की एक इनक्लूसिव वर्कफोर्स बनाने और हेवी इंडस्ट्री में मुख्य ऑपरेशनल भूमिकाओं में महिलाओं के लिए लीडरशिप के अवसर देने में महत्वपूर्ण कदम है।
चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में काम करने से महिला इंजीनियर और ऑपरेटर बड़े पैमाने पर मेटलर्जिकल ऑपरेशन के केंद्र में होती हैं, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी ट्रांजिशन एप्लीकेशन के लिए जिंक उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं। तेजस्विनी पहल के जरिए, हिंदुस्तान जिंक महिलाओं को ग्लोबल मेटल इंडस्ट्री में सबसे एडवांस्ड स्मेल्टिंग इकोसिस्टम में आवश्यक प्रोसेस को लीड करने में मदद कर रहा है।
ऐसे समय में जब माइनिंग और मेटल सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से सीमित रही है, हिंदुस्तान जिंक महिलाओं को जरूरी ऑपरेशनल कार्यो का प्रतिनिधित्व करने में महत्वपूर्ण कदम उठाकर इंडस्ट्री के नियमों को पुनःपरिभाषित कर रहा है। अब महिलाओं की संख्या इसके वर्कफोर्स का 26.3 प्रतिशत है, जो इस सेक्टर में सबसे अधिक है, कंपनी पारंपरिक रूप से पुरुषों के दबदबे वाली इंडस्ट्री में जेंडर डायवर्सिटी के लिए नए बेंचमार्क सेट कर रही है।

30 महिला प्रोफेशनल्स की समर्पित टीम इन यूनिट्स में कोर प्रोसेस ऑपरेशन, मेंटेनेंस और सेफ्टी कार्यो का जिम्मा उठाएगी जो कोर मैन्युफैक्चरिंग भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस पहल से लीचिंग और प्यूरिफिकेशन वन और टू और चंदेरिया स्मेल्टिंग काॅम्प्लेक्स में पूरी तरह से महिलाओं के नेतृत्व वाली ऑपरेशनल शिफ्ट की शुरुआत हुई है। यह कंपनी के हाइड्रोमेटलर्जी ऑपरेशन का एक जरूरी हिस्सा है जो सीधे जिंक प्रोडक्शन थु्रपुट और प्रोडक्ट क्वालिटी पर असर डालता है। इस पहल को हाइड्रो की प्लांट मैनेजर एलएण्डपी वन तान्या सिंह लीड कर रही हैं, जो हिंदुस्तान जिंक के सेफ्टी-फर्स्ट कल्चर को बनाए रखते हुए ऑपरेशनल एक्सीलेंस को मजबूत करने में टीम को गाइड करेंगी।
पिछले कुछ सालों में, कंपनी ने अंडरग्राउंड माइनिंग और स्मेल्टिंग से लेकर डिजिटल कंट्रोल रूम और लीडरशिप रोल तक, माइनिंग और मेटल ऑपरेशन में महिलाओं के लिए मौके बढ़ाए हैं। ये कोशिश वेदांता ग्रुप की अपनी वर्कफोर्स में 35 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी के अनुसार हैं, जिसमें हिंदुस्तान जिंक इस सेक्टर में इस विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं होल-टाइम डायरेक्टर, अरुण मिश्रा ने कहा कि, “ हमारा मानना है कि माइनिंग का भविष्य अलग-अलग टैलेंट, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सबको साथ लेकर चलने के कल्चर से आगे बढ़ेगा। तेजस्विनी का लॉन्च इंडस्ट्रियल परफॉर्मेंस को पावर देने वाले कोर ऑपरेशनल रोल में महिलाओं के लिए अच्छे अवसर देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारे स्मेल्टिंग ऑपरेशन में महिलाओं को जरूरी प्रोसेस का नेतृत्व करने में निर्पूण बनाकर, हम अपनी टैलेंट पाइपलाइन को मजबूत कर रहे हैं, साथ ही यह लीडरशिप और काबिलियत पारंपरिक इंडस्ट्री की सीमाओं से आगे हैं। जैसे-जैसे हम अपने लंबे समय के ग्रोथ के लक्ष्यों को पूरा कर रहे हैं, इस तरह के प्रयास अधिक प्रोग्रेसिव और भविष्य के लिए तैयार माइनिंग सेक्टर को बनाने में मदद करेंगी।”
जैसे-जैसे भारत इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ में अपने लक्ष्यों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, हिंदुस्तान जिंक यह दिखाना जारी रखे हुए है कि कैसे सबको साथ लेकर चलने वाले वर्कप्लेस ऑपरेशनल एक्सीलेंस और इनोवेशन को बढ़ावा दे सकते हैं। तेजस्विनी जैसी पहल और लोगों पर केंद्रित पॉलिसी में अपने लगातार निवेश के जरिए, कंपनी मेटल और माइनिंग इंडस्ट्री के लिए नए बेंचमार्क सेट कर रही है। कंपनी ने भारत की पहली अंडरग्राउंड ऑल-वुमन माइन रेस्क्यू टीम शुरू की है, महिला इंजीनियर्स को नाइट शिफ्ट, टेली-रिमोट माइनिंग ऑपरेशन और स्मेल्टिंग कंट्रोल रूम लीड करने में मदद की है, और वी सेफ ऐप इंटीग्रेशन, सीसीटीवी सर्विलांस, बायोमेट्रिक एक्सेस सिस्टम, महिला सुरक्षाकर्मी और नाइट ट्रांसपोर्टेशन सुविधाओं जैसी पहलों के जरिए वर्कप्लेस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कर्मचारी कॉन्फिडेंस, सेफ्टी और लीडरशिप के साथ काम कर सकें और साथ ही अधिक अलग-अलग तरह का और भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स तैयार हो सके।

हिंदुस्तान जिंक ने राजस्थान में स्थापित होने वाले जिंक पार्क में जिंक एलॉय बनाने के लिए सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ की पार्टनरशिप

उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक प्रोड्यूसर और शीर्ष पांच सिल्वर उत्पादक में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने राजस्थान में स्थापित होने वाले जिं़क पार्क में जिं़क एलाॅय बनाने के लिएउ सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये। सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग कंपनी है और विश्व में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। यह राजस्थान में जिंक पार्क के लिए दूसरी बड़ी पार्टनरशिप है, इससे पहले हिंदुस्तान जिंक ने त्रिपुरा ग्रुप के साथ एमओयू किया है, यह जिंक-बेस्ड इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन के लिए भारत के पहले इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम के तौर पर पार्क की स्थिति को और मजबूत करता है।
एमओयू के तहत, सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज जिंक पार्क में एक मैन्युफैक्चरिंग सुविधा बनाएगी जो हाई-क्वालिटी, कम-एमिशन वाले जिंक एलॉय बनाने पर फोकस करेगी। ये एलॉय ऑटोमोटिव, इंफ्रास्ट्रक्चर, डाई-कास्टिंग और कंज्यूमर गुड्स जैसी इंडस्ट्रीज के लिए बहुत जरूरी हैं। यह प्रोजेक्ट जिंक की डाउनस्ट्रीम वैल्यू एडिशन को संभव करेगा, साथ ही सस्टेनेबल मेटल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देगा और इंडस्ट्रियल मटीरियल में भारत की आत्मनिर्भरता में सहायक होगा।
जिंक पार्क की घोषणा सबसे पहले राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री, श्री भजन लाल शर्मा ने राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के दौरान की थी, जिसमें वेदांता ग्रुप के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने इसे भारत के डाउनस्ट्रीम मेटल्स इकोसिस्टम के लिए एक बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर बताया था। हिंदुस्तान जिंक और रीको द्वारा मिलकर विकसित किए गए इस पार्क का मकसद जिंक मैन्युफैक्चरिंग के लिए पूरी तरह से इंटीग्रेटेड, रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाला हब बनाना है। हिंदुस्तान जिंक के चंदेरिया, दरीबा और देबारी ऑपरेशन्स के पास होने से मजबूत लॉजिस्टिक्स और भरोसेमंद रॉ मटेरियल सप्लाई सुनिश्चित होती है।
जिंक पार्क का विकास इंडस्ट्रियल ग्रोथ और इनोवेशन के लिए राज्य के लगातार कमिटमेंट को दिखाता है। इस पार्क में एमएसएमई और गैल्वनाइजिंग, डाई-कास्टिंग, जिंक ऑक्साइड प्रोडक्शन और इससे जुड़े कामों में लगे बड़े एंटरप्राइज को स्थापित करने की योजना है। पक्का रॉ मटेरियल लिंकेज, लंबे समय के सप्लाई एग्रीमेंट, कमर्शियल इंसेंटिव और स्ट्रक्चर्ड परफॉर्मेंस फ्रेमवर्क देकर, जिंक पार्क राज्य में वैल्यू क्रिएशन, रोजगार पैदा करने और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक कैटलिस्ट बनने के लिए तैयार है। यह पहल न केवल राजस्थान के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मजबूत करती है, बल्कि मेटल-बेस्ड इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी के लिए ग्लोबल हब बनने के भारत के विजन से भी जुड़ी है।
जिंक एलॉय अपनी मजबूती, करोजन रेजिस्टेंस और रिसाइकिल होने की वजह से प्रचलित हो रहे हैं। इनका उपयोग ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर अप्लायंसेज, हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर एप्लीकेशन के लिए डाई-कास्टिंग कंपोनेंट्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिससे ये मॉडर्न इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन के लिए आवश्यक मेटल जाते हैं। जिंक पार्क की यह फैसिलिटी मेटल रिकवरी और रीयूज के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हुए बढ़ती घरेलू और इंटरनेशनल डिमांड को पूरा करेगी।

इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, “जिंक पार्क जिंक-बेस्ड एप्लिकेशन के जरिए इंडस्ट्रियल ग्रोथ, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने का एक स्ट्रेटेजिक विजन है। हमें इस सफर में सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज का पार्टनर के तौर पर शामिल कर प्रसन्नता है। नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग में उनकी लीडरशिप और एलॉय प्रोडक्शन में उनकी मजबूत क्षमताएँ भविष्य के लिए तैयार, इनोवेशन-ड्रिवन जिंक इकोसिस्टम बनाने में अहम भूमिका निभाएँगी।”

सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज की बड़ी ऑटोमोटिव कंपनियों और दूसरे मुख्य इंडस्ट्रियल प्लेयर्स के साथ पुरानी पार्टनरशिप है। इसका ऑपरेशन लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और मजबूत सस्टेनेबिलिटी की सोच से चलता है, जिसमें रीसायकल मेटल प्रोडक्शन से प्राइमरी मेटल की तुलना में 95 प्रतिशत तक कम एमिशन होता है। कंपनी सर्कुलर मेटल प्रोसेसिंग और एलॉय मैन्युफैक्चरिंग में गहरी एक्सपर्टीज रखती है, खासकर ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए, जो दुनिया भर में नॉन-फेरस एलॉय के सबसे बड़े कंज्यूमर्स में से एक है।
इस पार्टनरशिप के जरिए, हिंदुस्तान जिंक भारत के अपनी तरह के पहले डाउनस्ट्रीम जिंक इंडस्ट्रियल क्लस्टर को बनाने में तेजी ला रहा है, जिससे इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक वैल्यू को बढ़ावा मिल रहा है। यह घरेलू मूल्य संवर्धन को मजबूत करने, सर्कुलर अर्थव्यवस्था प्रथाओं को बढ़ावा देने और राजस्थान के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने में जिंक पार्क की भूमिका को और मजबूत करता है, साथ ही भारत के सस्टेनेबल मेटल और उन्नत विनिर्माण के लिए वैश्विक केंद्र बनने के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।

चंदेरिया में प्रस्तावित फर्टीलाइजर प्लांट की जनसुनवाई सम्पन्न

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उच्च तकनीक के खाद संयंत्र से क्षेत्र को मिलेगी विकास की नई रफ्तार

ग्रामीणों ने रखीं अपेक्षाएं, कंपनी ने रोजगार, पर्यावरण संरक्षण का दिलाया भरोसा

चित्तौड़गढ़ 10 मार्च। हिंदुस्तान जिंक के चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में प्रस्तावित अत्याधुनिक खाद संयंत्र को लेकर आयोजित जनसुनवाई में पर्यावरण संरक्षण, क्षेत्रीय विकास, रोजगार और किसान हित को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। करीब 2700 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित होने वाले इस संयंत्र से जहां खाद उत्पादन बढ़ेगा, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार और सामाजिक विकास के नए अवसर बनने की उम्मीद जताई गई। सगरा माता मेला परिसर में आयोजित जनसुनवाई का संचालन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से किया गया। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामचंद्र खटीक, क्षेत्रीय अधिकारी आशीष बोरासी तथा गंगरार उपखंड अधिकारी पुनित कुमार गेलरा ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के विचार दर्ज किए।

चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर के लोकेशन हेड आलोक रंजन ने बताया कि प्रस्तावित संयंत्र दो चरणों में स्थापित होगा, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता 10 लाख टन प्रतिवर्ष रहेगी। इसमें डाई अमोनियम फॉस्फेट (DAP),एनपीके और अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट जैसे उर्वरकों का उत्पादन किया जाएगा। इससे राजस्थान सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध हो सकेगी और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना बनेगी। कंपनी के अनुसार संयंत्र में विश्वस्तरीय एचडीएच और पीएन प्लस तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे खाद के प्रत्येक दाने में पोषक तत्वों की समानता बनी रहेगी। धूल रहित और मजबूत दानों के कारण किसानों के लिए इसका उपयोग और भंडारण आसान होगा।

पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार, कौशल विकास पर फोकस

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। संयंत्र में सुरक्षा और पर्यावरण मानकों के लिए करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। साथ ही स्मेल्टर में उत्पादित सल्फ्यूरिक एसिड का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। कंपनी के अनुसार संयंत्र के निर्माण और संचालन के दौरान लगभग 5000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि रोजगार में 80 प्रतिशत तक स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जाएगा, जिसमें महिलाओं को भी विशेष अवसर दिए जाएंगे।

जनसुनवाई में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय युवाओं को जिंक कौशल विकास केंद्र से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराने, सीएसआर योजनाओं का दायरा बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता देने की मांग रखी। कंपनी ने बताया कि कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ पेयजल, पशुधन सहायता और आधुनिक कृषि प्रशिक्षण जैसी योजनाओं के माध्यम से आसपास के गांवों में सामाजिक विकास के प्रयास जारी रहेंगे।

जन सुनवाईमें में आजोलिया का खेड़ा सरपंच जगदीश जाट, सुभाष शर्मा, पुठोली प्रशासक महिपाल सिंह, उपसरपंच चंद्रभान सिंह, कंथारिया सरपंच कालूराम जाट, देवकिशन जाट, पूर्व सरपंच चोगावड़ी रवीन्द्र सिंह, परमेश्वर जाट, सतपुड़ा से राजू सिंह, रमेश जाट, ज्योति जोशी, प्रियंका जांगीड़, शीतल मेनारिया, गोटिया चुंडावत, मिठ्ठूलाल, श्यामलाल मेनारिया, हरीश बैरवा, नगरी से रिंकू मेघवाल, दुर्गेश तिवारी, नितेश जाट, हेमंतराज तेली सहित अन्य जनप्रतिनिधि, ग्रामीण, युवा व महिलाएं उपस्थित रहे। इसके साथ ही हिन्दुस्तान जिंक की सीएसआर परियोजनाओं, सखी, समाधान, खुशी, शिक्षा संबल, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लाभार्थी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

वेदांता ने महिलाओं की भागीदारी का लक्ष्य बढ़ाकर 35% किया।

#HerAtTheCore अभियान की शुरुआत, प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में महिलाओं को आमंत्रण

नई दिल्ली, 6 मार्च | अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वेदांता ग्रुप ने संगठन के सभी स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी 35% तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही #HerAtTheCore नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान और लिंक्डइन के माध्यम से एक हायरिंग ड्राइव शुरू की है, जिसमें महिलाओं को खनन, धातु, तेल एवं गैस, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है।

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब उद्योग का परिदृश्य काफी चुनौतीपूर्ण है। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण के अनुसार 2023–24 में विभिन्न उद्योगों में प्रत्यक्ष रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 18% थी, जबकि खनन और धातु जैसे मुख्य क्षेत्रों में उनकी भागीदारी अभी भी केवल लगभग 6% ही है।

#HerAtTheCore अभियान इस बात को उजागर करने का प्रयास करता है कि भारत औद्योगिक विकास के एक निर्णायक दशक में प्रवेश कर रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को गति दे रहा है, ईवी सप्लाई चेन का निर्माण कर रहा है और उन्नत विनिर्माण तथा प्रौद्योगिकी में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है। धातु, खनिज, तेल एवं गैस और ऊर्जा जैसे क्षेत्र इन उद्योगों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। फिर भी, इन प्रमुख क्षेत्रों में काम करने वाली कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल लगभग 6% ही है, जो भविष्य का निर्माण करेंगे। भारत की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए, उन्हें आगे बढ़ाने वाले उद्योगों में देश की प्रतिभा के पूरे सामर्थ्य का प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है।

वेदांता ग्रुप में आज महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्यबल का 23% है, जो उद्योग के औसत से काफी अधिक है। “6% पर्याप्त नहीं है और 23% तो बस शुरुआत है” संदेश पर आधारित #HerAtTheCore अभियान उद्योग में मौजूद इस अंतर को उजागर करता है और साथ ही मुख्य उद्योगों के भविष्य की कार्यबल को नया रूप देने के अवसर को भी सामने लाता है।

इस पहल पर टिप्पणी करते हुए प्रिया अग्रवाल हेब्बर, नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, वेदांता लिमिटेड और चेयरपर्सन, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने कहा, “भारत की विकास संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उसकी प्रतिभा का पूरा सहयोग आवश्यक है। वेदांता में आज महिलाएं हमारे कुल कार्यबल का 23% हैं, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। हमारा लक्ष्य इसे 35% तक बढ़ाने और अंततः 50% तक पहुंचाने का है। हम केवल प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ा रहे हैं, हम प्रणालियों को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं, उन्नत तकनीकों को लागू कर रहे हैं और जीवन के विभिन्न चरणों के अनुरूप सहायता ढांचे बना रहे हैं, ताकि महिलाएं मुख्य उद्योगों में आगे बढ़ सकें। #HerAtTheCore एक उत्सव भी है और कार्रवाई के लिए आह्वान भी। हम विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाशाली महिलाओं को हमारे साथ जुड़ने और उन क्षेत्रों को आकार देने में योगदान देने के लिए आमंत्रित करते हैं जो दुनिया को ऊर्जा देते हैं।”

समान अवसर प्रदान करने वाली तकनीक

वेदांता ग्रुप की समावेशन रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ उन्नत तकनीक का उपयोग है, जिसके माध्यम से ऐसे सुरक्षित और कौशल-आधारित कार्यस्थल बनाए जा रहे हैं जहां प्रदर्शन को क्षमता के आधार पर आंका जाता है, न कि लिंग के आधार पर। आज खनन और धातु क्षेत्र के संचालन तेजी से बौद्धिक रूप से संचालित होते जा रहे हैं, जहां इंजीनियर डिजिटल सिस्टम और रियल-टाइम एनालिटिक्स के माध्यम से जटिल प्रक्रियाओं का प्रबंधन करते हैं, जबकि भारी कार्य उन्नत मशीनरी और मशीनीकृत उपकरणों द्वारा किए जाते हैं। ऑटोमेशन, डिजिटल ऑपरेशंस सेंटर और रिमोट मॉनिटरिंग ने पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अधिक समान अवसर वाला कार्य वातावरण तैयार किया है।

मुख्य संचालन में बाधाओं को तोड़ना

वेदांता ग्रुप ने महिलाओं के लिए अग्रिम पंक्ति के औद्योगिक कार्यों के अवसर खोलने में अग्रणी भूमिका निभाई है:

· वेदांता एल्युमिनियम के ओडिशा के झारसुगुड़ा संचालन में, जो दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम स्मेल्टर है, पूरी तरह महिलाओं की एक टीम पूरी एल्युमिनियम उत्पादन लाइन (पॉटलाइन) संचालित करती है और उच्च-स्तरीय सटीक स्मेल्टिंग संचालन का प्रबंधन करती है।

· महिलाएं अब बिजली उत्पादन से जुड़े विशेष तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। कई जगह महिलाओं के नेतृत्व वाली टीमें पूरी लोकोमोटिव और सुरक्षा संचालन संभाल रही हैं, जो महत्वपूर्ण प्लांट संचालन को सहयोग देती हैं।

· हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, जो दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी है — में 2019 में भारत सरकार के सुधारों के बाद कंपनी ने भूमिगत खनन में महिला इंजीनियरों की नियुक्ति की। यह भारत के पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान खनन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव माना गया।

· मजबूत सुरक्षा व्यवस्थाओं और सुरक्षित परिवहन के साथ महिलाएं विभिन्न संचालन क्षेत्रों में नाइट शिफ्ट में भी काम कर रही हैं। केर्न ऑयल एंड गैस के मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल में 2019 से महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं और जटिल 24×7 हाइड्रोकार्बन प्रोसेसिंग सिस्टम का प्रबंधन कर रही हैं।

· हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चार पूरी तरह महिलाओं की भूमिगत माइन रेस्क्यू टीमें, जो भारत में अपनी तरह की पहली हैं, ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है। वहीं कोंकोला तांबा खदानें (जाम्बिया) में नचांगा लेडीज माइन रेस्क्यू टीम को प्रशिक्षित किया गया है, जो कंपनी और देश की पहली महिला-नेतृत्व वाली रेस्क्यू यूनिट है।

· वेदांता जिंक इंटरनेशनल (दक्षिण अफ्रीका) में महिलाओं की भागीदारी कुल कार्यबल का 23% है — जो राष्ट्रीय खनन उद्योग के औसत से 3.2% अधिक है। इसे ब्लैक माउंटेन में समर्पित लैक्टेशन रूम, एकल माताओं के लिए आवास आवंटन और गाम्सबर्ग खदान में मातृत्व पीपीई जैसे प्रयासों से समर्थन मिला है।

जीवन के विभिन्न चरणों में महिलाओं का समर्थन

भर्ती से आगे बढ़ते हुए, वेदांता ग्रुप दीर्घकालिक बनाए रखने और विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जिसके लिए:

· मातृत्व अवकाश के बाद संरचित रिटर्नशिप कार्यक्रम

· लचीली कार्य व्यवस्थाएँ और समावेशी शिफ्ट संरचनाएँ

· दूरस्थ स्थानों पर पति/पत्नी के लिए भर्ती नीतियाँ

· उच्च क्षमता वाली महिलाओं के लिए नेतृत्व तेज़ी से विकसित करने वाले कार्यक्रम

· गुणवत्तापूर्ण आवास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बाल देखभाल, खेल अवसंरचना और जीवंत सामुदायिक जीवन प्रदान करने वाली विश्वस्तरीय एकीकृत टाउनशिप तक पहुँच

अभियान से करियर तक

सोशल मीडिया पर तेजी से गति पकड़ रहा #HerAtTheCore अभियान महिला इंजीनियरों, भूवैज्ञानिकों, डेटा वैज्ञानिकों, ऑपरेटरों और नेताओं को वेदांता लिमिटेड के विभिन्न व्यवसायों में भूमिकाओं के लिए आवेदन करने के लिए आमंत्रित करता है।

दिखने वाले रोल मॉडल्स को सक्रिय भर्ती के साथ जोड़ते हुए, वेदांता लिमिटेड यह संदेश देना चाहती है कि मुख्य औद्योगिक क्षेत्र बदल रहे हैं और भारत के औद्योगिक भविष्य में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका है।

हिंदुस्तान जिंक ने सिल्वर रिकवरी पर एडवांस्ड रिसर्च के लिए वर्जीनिया टेक के साथ किया एमओयू

कंपनी का यूएस स्थित, मनोनित आर1 इंस्टीट्यूशन, वर्जीनिया टेक के साथ सहयोग

साइंटिफिक रिसर्च और ग्लोबल एकेडमिक पार्टनरशिप के जरिए मेटलर्जिकल कैपेबिलिटी को मजबूत करना उद्धेश्य

उदयपुर, 3 मार्च 2026। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक एवं टॉप पाँच सिल्वर उत्पादक कंपनी हिन्दुस्तान जिं़क ने वर्जीनिया टेक के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए है जिसके तहत्  स्पेशल प्रोसेसिंग प्लांट जहाँ माइन किए गए ओर को फ्लोटेशन के जरिए ट्रीट कर लेड, जिंक और सिल्वर जैसे कीमती मेटल को अलग और कंसंट्रेट किया जाता है, लेड-जिंक कंसंट्रेटर में सिल्वर रिकवरी को बेहतर बनाने पर फोकस्ड रिसर्च को आगे बढ़ाया जा सके। इसके हिस्से के तौर पर, प्रोसेसिंग के दौरान मेटल को अलग और कंसंट्रेट करने में मदद करने के लिए मिलाए जाने वाले स्पेशल केमिकल, फ्लोटेशन मेथड को बेहतर बनाने और रिएजेंट के इस्तेमाल को ऑप्टिमाइज करने के लिए फोकस्ड साइंटिफिक अध्ययन किया जाएगा, जिससे बेहतर कंसंट्रेट क्वालिटी और अधिक एफिशिएंट प्लांट ऑपरेशन में सहायता मिलेगी। वर्जीनिया टेक, ब्लैक्सबर्ग, वर्जीनिया में मौजूद एक जानी-मानी पब्लिक लैंड-ग्रांट रिसर्च यूनिवर्सिटी है। यह माइनिंग इंजीनियरिंग, मिनरल प्रोसेसिंग और एप्लाइड मेटलर्जिकल रिसर्च में अपनी एक्सपर्टीज के लिए जानी जाती है। इस पार्टनरशिप के जरिए, हिन्दुस्तान जिं़क ग्लोबल रिसर्च नजरिए और टेक्निकल जानकारी के उपयोग के लिए यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम करेगी, जिससे प्रोसेस की बेहतर समझ और इसके कंसंट्रेटर ऑपरेशन में लगातार सुधार में मदद मिलेगी।

यह कोलेबोरेशन हिंदुस्तान जिंक के लेड जिं़क कंसंट्रेटर में सिल्वर रिकवरी को बढ़ाने के लिए एक गहरी साइंटिफिक समझ बनाने पर प्रमुख ध्यान देगा, जिसमें मौजूदा प्लांट कॉन्फिगरेशन के साथ-साथ भविष्य के ओर टाइप में होने वाले बदलावों पर भी विचार किया जाएगा। यह स्टडी फ्लोटेशन सेलेक्टिविटी और ओवरऑल मेटल रिकवरी पर असर डालने वाले मुख्य मेटलर्जिकल फैक्टर की जांच करेगी, जिसमें खास तौर पर रिएजेंट-मिनरल-वॉटर इंटरैक्शन पर जोर दिया जाएगा जो प्रोसेस स्टेबिलिटी और कंसंट्रेट क्वालिटी में अहम भूमिका निभाते हैं।

इस उपलब्धि पर हिन्दुस्तान जिं़क के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि “ हमारा मानना है कि मेटल और माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ का अगला फेज साइंस, इनोवेशन और कोलेबोरेशन से चलेगा। वर्जीनिया टेक के साथ हमारी पार्टनरशिप हमारे नॉलेज इकोसिस्टम को मजबूत करने और भविष्य के लिए हमारे ऑपरेशन्स को तैयार करने में आवश्यक कदम है। विश्व के बड़े संस्थानों के साथ काम करके, हम ऐसी क्षमता बनाना जारी रखेंगे जो माइनिंग एक्सीलेंस की आने वाली पीढ़ी को परिभाषित करेंगी।

वर्जीनिया टेक में माइनिंग और मिनरल्स इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के हेड, एरॉन नोबल ने कहा कि, “हिन्दुस्तान जिं़क के साथ यह पार्टनरशिप ऐसे कोलेबोरेशन को दिखाती है जो मीनिंगफुल इम्पैक्ट डालता है।” “इंडस्ट्री के साथ सीधे जुडकर हम मिनरल रिकवरी पर अपनी कटिंग-एज रिसर्च को ऑपरेशनल चैलेंज एवं अवसरों पर लागू कर सकते हैं। इससे यह सुनिश्चत होगा कि हमारी खोज और जानकारी को आगे बढ़ाने से हम और भी आगे जाएं। हम इस रिसर्च को अधिक प्रभावी रिसोर्स उपयोग, मजबूत सप्लाई चेन और बड़े माइनिंग सेक्टर के लिए टैंजिबल बेनिफिट्स में परिवर्तित कर रहे हैं।”

यह प्रोजेक्ट अधिक प्रोसेस स्टेबिलिटी, बेहतर कंसंट्रेट क्वालिटी और एक जैसे ऑपरेटिंग नतीजों को सहयोग करने के लिए ऑप्टिमाइज्ड ऑपरेटिंग अप्रोच और रिएजेंट सिस्टम को डिफाइन करने की दिशा में भी काम करेगा। परिणामस्वरूप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह की स्ट्रेटेजी बनाने में मदद करेंगे, जिन्हें डायग्नोस्टिक्स, लैबोरेटरी इवैल्यूएशन और टेक्निकल असेसमेंट से सपोर्ट मिलेगा, जिन्हें ऑपरेशन्स में प्रैक्टिकल इम्प्लीमेंटेशन के लिए डिजाइन किया गया है।

इस पार्टनरशिप का एक मुख्य हिस्सा हिन्दुस्तान जिं़क की टीम के लिए नॉलेज ट्रांसफर और टेक्निकल कैपेसिटी बिल्डिंग होगा, जिसमें प्लांट ऑप्टिमाइजेशन, रिएजेंट स्ट्रेटेजी और प्रोसेस इम्प्रूवमेंट पर फोकस करने वाले स्ट्रक्चर्ड वर्कशॉप, ट्रेनिंग सेशन और टेक्निकल एक्सचेंज होंगे।

यह कोलेबोरेशन ग्लोबल पार्टनरशिप के जरिए अपनी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कैपेबिलिटी को मजबूत करने पर हिन्दुस्तान जिं़क के रणनितिक फोकस को और मजबूत करता है। पिछले कुछ वर्षो में, कंपनी ने मिनरल प्रोसेसिंग, क्रिटिकल मेटल्स रिसर्च, जिंक-बेस्ड बैटरी टेक्नोलॉजी और प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन से जुड़े इनिशिएटिव पर आईआईटी सीएसआईआर लैबोरेटरीज और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च जैसे बड़े एकेडमिक और रिसर्च इंस्टीट्यूशन के साथ कार्य किया है। इन कोलेबोरेशन ने इन-हाउस टेक्निकल कैपेबिलिटी बनाने,इनोवेशन को तेज करने और टेक्नोलॉजी-फर्स्ट, फ्यूचर-रेडी मेटल्स कंपनी हिन्दुस्तान जिं़क के लॉन्ग-टर्म विजन को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाई है।

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Hello world!!!

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हिन्दुस्तान जिंक के कर्मचारियों में अब 26.3 प्रतिशत महिलाएं, यह भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में सबसे अधिक और एकमात्र उपलब्धि

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मेटल और माइनिंग में महिलाओं को स्पॉटलाइट करने के लिए 25 दिन का

 ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ कैंपेन लॉन्च

हिन्दुस्तान जिंक के कर्मचारियों में अब 26.3 प्रतिशत महिलाएं,

उदयपुर, 2 मार्च 2026। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक और चांदी के वैश्विक शीर्ष पांच उत्पादकों में से एक, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने जेंडर इंक्लूजन (लैंगिक समानता) की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। कंपनी की वर्कफोर्स में अब 26.3 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में सबसे अधिक है यह एक ऐसा क्षेत्र जिसे पारंपरिक रूप से पुरुषों का काम माना जाता रहा है। कंपनी में अब 745 से अधिक महिलाएं कार्यरत है, जिनमें 314 से अधिक महिला इंजीनियर शामिल हैं। ये महिलाएं अंडरग्राउंड माइंस, स्मेल्टर और तकनीकी कार्यों जैसी प्रमुख भूमिकाओं में कार्य कर रही हैं। हिन्दुस्तान जिं़क ने महिलाओं को फ्रंटलाइन जिम्मेदारियों में शामिल कर एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने पहली बार महिलाओं को खदानों के भीतर, नाइट शिफ्ट में और अंडरग्राउंड माइन रेस्क्यू टीम में शामिल करने जैसी अनूठी पहल की है। रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 के उपयोग ने माइनिंग को और अधिक सुरक्षित बनाया है, जिससे महिलाएं इन तकनीकी क्षेत्रों में बढ़-चढ़कर अपना करियर बना रही हैं।

कंपनी ने महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ावा देने के लिए 25 दिनों का एक खास कैंपेन शुरू किया है, जिसका नाम है “शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन” इस कैंपेन के जरिए कंपनी उन महिलाओं की कहानियों को सामने ला रही है जो माइनिंग और मेटल इंडस्ट्री में अपनी विशेषज्ञता और साहस से बदलाव ला रही हैं। इसमें विज्ञान की छात्राओं को भी माइनिंग ऑपरेशंस का अनुभव कराया गया है। इन ऑपरेशन्स को आत्मविश्वास और अनुभव के साथ लीड करने वाली असाधारण महिलाओं से मिला जा रहा है। यह ऑपरेशन्स में साइंस से कहीं अधिक है, यह साइंस में महिलाएँ हैं जो एक बदलाव की लहर जगा रही हैं, जो स्टेम स्टूडेंट्स को प्रेरित करने की नींव से बनी है। कैंपेन के मुख्य हिस्से में, कंपनी ने भारत के सबसे उत्कृष्ट साइंस कॉलेज से 15 से अधिक डाइनैमिक महिलाओं को एक इमर्सिव सोशल एक्सपेरिमेंट के लिए आमंत्रित किया गया।  उन्होंने हिन्दुस्तान जिं़क के माइनिंग ऑपरेशन्स में काम किया, लोगों की सोच को हकीकत से जोड़ा और मेटल्स और माइनिंग में आगे बढ़ने के लिए अपनी क्षमता को जगाया। इससे पहले, अलग-अलग स्टेम महिलाओं को अपने क्षेत्र में आत्मविश्वास से आगे बढ़ कर कार्य करते हुए अवगत कराया गया, साथ ही काम पर जिंक महिलाओं की जीवंत डे इन द लाइफ झलकियों को भी दिखाया,  इंडस्ट्री के अनुभवों के साथ टेस्टिमोनियल्स भी दिखाए गये है। यह दिखाता है कि मेटल्स का भविष्य साइंस में महिलाओं पर क्यों निर्भर करता है, सिर्फ हिस्सा लेने के लिए नहीं, बल्कि इनोवेट करने, लीड करने और फील्ड को फिर से डिफाइन करने के लिए और इसका मकसद हैवी इंडस्ट्री और स्टेम करियर में महिलाएं क्या हासिल कर सकती हैं, इस बारे में सोच को फिर से परिभाषित करना है।

इस बदलाव को हिन्दुस्तान जिं़क की डिजिटल माइंस लीड कर रही हैं, जो टेली-रिमोट अंडरग्राउंड ऑपरेशन, ड्रोन-बेस्ड सर्विलांस, रियल-टाइम एनालिटिक्स, रिमोट ब्लास्टिंग और ऑटोमेटेड सिस्टम जैसी अत्याधुनिक क्षमता से लैस हैं। इन इनोवेशन ने क्षमतावर्धन किया है और अधिक महिला प्रोफेशनल्स को माइनिंग में मीनिंगफुल, फ्यूचर-रेडी करियर बनाने के लिए बढ़ावा दिया है।

इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरूण मिश्राने कहा कि, माइनिंग में महिलाओं को सशक्त बनाना केवल समानता की बात नहीं है, यह हमारे भविष्य के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य है कि हर प्रतिभाशाली महिला को बढ़ने का मौका मिले। हमारा लक्ष्य 2030 तक 30 प्रतिशत जेंडर डाइवर्सिटी हासिल करना है, और हम एक ऐसा कार्यस्थल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ लैंगिक समानता ही नवाचार का आधार हो। हिन्दुस्तान जिं़क में, हमने एक ऐसी संस्कृति बनायी है जहाँ महिलाएँ आगे रहकर लीड कर सकती हैं, चाहे वह अंडरग्राउंड माइंस की गहराई में काम करना हो, रोबोटिक ऑटोमेशन चलाना हो, या मेटलर्जी में सस्टेनेबिलिटी को आगे बढ़ाना हो। हमारा ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ कैंपेन हमारे विजन को दर्शाता है – पुराने नॉर्म्स को चैलेंज करना, पोटेंशियल को बढ़ावा देना, और यह सुनिश्चित करना कि हर प्रतिभावान महिला के पास आगे बढ़ने और कामयाब होने के लिए एक मंच हो।

हिन्दुस्तान जिं़क सपोर्टिव वर्कप्लेस पॉलिसी को एक बड़ा आधार देता है, जिसमें स्पाउस हायरिंग पॉलिसी, चाइल्डकेयर के लिए एक साल का सब्बाटिकल और मेंटल और फिजिकल हेल्थ को प्रायोरिटी देने वाली ‘नो-क्वेश्चन आस्क्ड’ फ्लेक्सीबिलिटी पॉलिसी शामिल है। पॉलिसी के अलावा, एम्प्लॉई वर्ल्ड-क्लास टाउनशिप में रहते हैं, जहाँ प्लांट के पास सभी मॉडर्न सुविधाएँ मिलती हैं। इनमें स्कूल, हॉस्पिटल, डेकेयर सेंटर, क्रेच,, स्पोर्ट्स और रिक्रिएशनल सुविधाएँ जैसे स्विमिंग पूल, गोल्फ कोर्स और मूवी थिएटर शामिल हैं, जो वाइब्रेंट सोशल लाइफ को बढ़ावा