आर एस एस एवं भा ज पा की विचारधारा महिला विरोधी

उदयपुर, संघ प्रमुख मोहन भागवत के पति-पत्नि के सम्बन्धों पर बयान ’’ यह विवाह न हो सौदा है कि तुम मेरा घर संभालों, मुझे सुख दो, मैं तुम्हारे पेट पानी की व्यवस्था करूंगा, तुम्हे सुरक्षित रखुगा।’’ पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पार्षद राजेश सिंघवी ने कहा कि आर एस एस एवं भाजपा मूल रूप से कभी भी महिलाओं, पिछडों, दलितों एवं आदिवासियों के पक्ष में नहीं रही है। उन्हें तो मजबूरीवश ही वोटों के खातिर कभी-कभी उनके पक्ष में बयानबाजी करनी पडती है।

सिंघवी ने कहा कि आर एस एस एवं उनके जैसी कट्टरपंथी ताकतों ने हमेशा धर्म संसकृति एवं परम्पराओं के नाम पर महिलाओं एवं कमजोर वर्ग का शोषण कर उन्हें गुलाम बना रखा है। यह संस्थाएं मलिाओं के शोषण को कायम रखने के लिए उनहें देवी का नाम तो देती है कि लेकिन उनहें इंसान मानने को तैयार नहीं है। सिंघवी ने कहा कि आर एस एस मनु स्मृति पर आधारित व्यवस्था की पक्षधर हे जिसमें महिलाओं को पशुओं के समान बता उनहें धिक्कार एवं नर्क का पात्र बताया गया है।

सिंघवी ने कहा कि मध्यप्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान कि ’’ महिलाओं को लक्ष्मण रेखा नहीं लांघनी चाहिए, लांघी तो बाहर रावण मिलेगा।’’ बयान पर प्रतिक्रिया व्यत्त* करते हुए कहा कि इस तरह की विचारधारा से स्पष्ट है कि भा ज पा समाज को दो भागों में बांटकर देखती हैं उनहोंने कहा कि भजपा अगर वास्तव में महिलाओं की पक्षधर है तो उनहें संसद एवं विधानसभाओं में ३३ प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को बहानेबाजी कर लटकाना नहीं चाहिए था।

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