मिलीभगत का खेल

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चेटक सर्किल पर भू-डाके में संदेह के घेरे में नेता और अफसर, जांच के नाम पर खानापूर्ति
उदयपुर। शहर के सबसे महत्वपूर्ण चौराहे चेटक सर्किल की आम सड़क पर बनाए जा रहे कॉमर्सियल काम्पलैक्स में भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की भागीदारी होने का संदेह पुख्ता हो रहा है। समझा जाता है कि इसी वजह से सरेआम हो रहे इस अवैध निर्माण को नहीं रोका जा रहा है। यह भी पता चला है कि कुछ अफसरों ने भी इस क्रप्रोजेक्टञ्ज में बेनानी निवेश किया है।
उल्लेखनीय है कि udaipurpost चेटक सर्किल पर सरेआम भू-डाकाञ्ज शीर्षक से समाचार प्रकाशित करके करोड़ों रुपए के इस भ्रष्टाचार को उजागर किया था, लेकिन उस पर प्रशासन द्वारा फौरी जांच करके लीपापोती कर दी।
पता चला है कि इस गैर कानूनी काम्पलैक्स की एक-एक दुकान एक-एक करोड़ रुपए में जा रही है और अब तक कई मंजिले बेच दी गई है। फिलहाल कुल १४ मंजिलों के निर्माण की योजना है, जो इस शहर में अब तक बनी इमारतों में सबसे ऊंची होगी। वैसे इस संपूर्ण प्रकरण की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में चल रही है, लेकिन निर्माण नहीं रोके जाने से सरकार में बैठे क्रबड़े लोगोंञ्ज पर क्रशक की सुईञ्ज घूम रही है।
इस सारे घपले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह रहा कि सिनेमा मालिक सैफुद्दीन बोहरा ने नगर निगम से स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही निर्माण शुरू करवा दिया। जब अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई, तो स्वीकृति के लिए लगी फाइल पर धड़ाधड़ फैसले करवाए गए। बाद में प्रशासन शहरों की ओर शिविर में महापौर रजनी डांगी, तत्कालीन कमिश्नर सत्यनारायण आचार्य आदि अफसरों ने इसे हाथों हाथ स्वीकृति प्रदान कर दी।
इस मामले में सबसे आश्चर्यजनक तो यह रहा कि स्वीकृति के लिए मूल दस्तावेज ही पेश नहीं किए गए। आम सड़क को हड़पने के लिए आवेदन में बताया गया कि क्रक्रमूल नक्शा खो गया है; बहुत ढूंढने पर भी नहीं मिल रहा है। इसलिए नया नक्शा पेश किया जा रहा है।ञ्जञ्ज इस नये नक्शे में बाउंड्रीवॉल को आगे बढ़ाकर आम सड़क को चेटक सिनेमा की जमीन बता दिया गया और इसी जाली दस्तावेज को आधार मानते हुए निर्माण स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
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