फर्जी आईएएस के बड़े कारनामें

fake-ias-udaipur-उदयपुर.  फर्जी आईएएस अधिकारी खुशबू की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके पिता को फोन किया तो उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी औलाद किस काम की। यह मर जाए, तब फोन कर देना।

जयपुर के नीलकंठ अपार्टमेंट में छह वर्ष से पिता से अलग अकेली रहने वाले खुशबू उर्फ स्मृति उर्फ पूजा उर्फ प्रिया पुत्री ओमप्रकाश शर्मा फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुकी है।

अम्बामाता थाना पुलिस बीती रात उसे जयपुर से प्रोडक्शन वारंट से गिरफ्तार कर यहां लाई। उसके खिलाफ थानाक्षेत्र  में होटल रामप्रताप के मालिक ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था। जयपुर में भी वह धोखाधड़ी के छह मामले में गिरफ्तार हो चुकी है।

पुलिस ने बताया कि एमकॉम तक पढ़ी खुशबू की मां का देहांत हो चुका है। उसके पिता रेलवे में कपासन स्टेशन पर तैनात है। पिता से अनबन के बाद खुशबू जयपुर में अलग रहने लगी।

पिता दूसरी पत्नी के साथ अलग रहते हैं। उसने एक बार जयपुर में ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या का प्रयास तक किया। उसके दोनों पैरों में स्टील की रॉड लगी है व एक हाथ नहीं है।

जयपुर में कई कारनामे

जयपुर में खुशबू ने पेट्रोल पम्प पर कार में पेट्रोल भरवाने के बाद पर्स घर पर भूलने का बहाना किया। मोबाइल नम्बर व गाड़ी नम्बर लिखवाकर पैसा बाद में देने का कहकर गई और वापस नहीं लौटी।

कार के नम्बर जांचने पर वह फर्जी निकले तथा मोबाइल सिम बंद मिली। इसी तरह एक व्यक्ति से 70 हजार रुपए लेकर वापस नहीं चुकाए। इस मामले में राजीनामा हुआ। खुशबू जयपुर में सोड़ाला, आदर्शनगर व मालवीय नगर थाना क्षेत्र में गिरफ्तार हो चुकी है।

बिना बिल चुकाए भागी

छह वर्ष पहले खुशबू उदयपुर में रामप्रताप होटल में ठहरी थी। उसने स्वयं को आईएएस अधिकारी बता कमरा लिया। तीन हजार रुपए एडंवास दिए।

होटल में खाना खाया, अंदर ही स्थित दुकान से कपडे़ खरीदे। बाजार जाने के बहाने टैक्सी मंगवाई। बापूबाजार में दुकान में खरीदारी के बहाने वहां से रफूचक्कर हो गई।

कार चालक ने फोन किया तो बताया कि वह वापस कार के पास पहुंची थी, लेकिन उसके नहीं मिलने पर वह होटल उदयविलास आ गई।

कार चालक उदयविलास पहुंचा तो वह वहां भी नहीं मिली। खुशबू इस बीच ट्रेन में बैठकर जयपुर भाग गई। होटल के कमरे की चाबी भी साथ ले गई।

होटल मालिक ने बिल के बकाया 10 हजार रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया।

कोटा की कोचिंग क्लास में आत्महत्या करते छात्र

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kota_coaching_एक ग़रीब पिता ने ग़रीबी में भी अपनी बच्ची को डॉक्टर बनाने की उम्मीद से कोटा पढ़ने के लिए भेजा था लेकिन वह दुनिया से ही चली गई.

उनकी बेटी निभा ने इसी महीने हॉस्टल के अपने कमरे में खुदकुशी कर ली. वह कोटा के एक कोचिंग में पढ़ रही थी.

झारखंड के गोविंद का आरोप है, “कोटा में कोचिंग के नाम पर गोरखधंधा चल रहा है. यहां शिक्षा, व्यवस्था और सुरक्षा नाम की कोई चीज़ नहीं है. यहां पढ़ रहे बच्चों की मॉनिटरिंग की व्यवस्था किसी भी स्तर पर नहीं है.”

लिहाजा अपने घर से सैंकड़ों मील दूर रह रहे बच्चे अवसाद का शिकार हो रहे हैं.

आत्महत्या

निभा की तरह ही बिहार के अश्विनी कुमार भी कोटा के कोचिंग संस्थान में पढ़ने वाले ऐसे छात्र थे जिन्होंने आत्महत्या का रास्ता चुना.

अश्विनी के चाचा अरुण कुमार कहते हैं कि कोटा में पढ़ रहे बच्चों की पढ़ाई के फॉलोअप की कोई व्यवस्था नहीं है.

अरुण कुमार कहते हैं, “जिन बच्चों की पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जाता है उसकी भी किसी तरह की जानकारी अभिभावकों को नहीं दी जाती. ऐसे में बच्चा अकेले में अवसादग्रस्त होकर खुदकुशी जैसा कदम तक उठा लेता है.”

कोचिंग में होने वाले साप्ताहिक टेस्ट में अश्विनी की रैंक शुरुआती 323 से घटकर 1073 तक जा पहुंची थी. अपने सुसाइड नोट में भी उसने आत्महत्या का कारण पढ़ाई में पिछड़ना बताया था.

कोटा सिटी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शांतनु सिंह के मुताबिक़ 2015 में अब तक कोटा के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले 11 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं. सिर्फ जून महीने में ही अब तक चार छात्र आत्महत्या कर चुके हैं.

उनके मुताबिक़ 2014 में 14 और 2013 में 26 छात्रों ने आत्महत्या की थी.

अवसाद

कोटा के प्रमुख मनोचिकित्सक डॉक्टर एमएल अग्रवाल बताते हैं कि यहां के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चे अन्य बच्चों के मुकाबले 25 फ़ीसदी ज्यादा अवसाद के शिकार पाए जाते हैं. इसके कई कारण हैं. डर, तनाव, परेशानियों के साथ कुछ हद तक पारिवारिक पृष्ठभूमि भी.

कोटा में कोचिंग के जनक कहे जाने वाले वीके बंसल कहते हैं कि बहुत भावुक बच्चे ही आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं. इसमें कोचिंग संस्थानों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है.

वे यह बात स्वीकार करते हैं कि बच्चों पर डॉक्टर या इंजीनियर बनने का परिजनों का दबाव एक बड़ी वजह है. इसके चलते अब यहां कोचिंगों में बोर्ड में 40 प्रतिशत अंक लाने वाले बच्चों को भी लिया जा रहा है. जिससे कोटा में शिक्षा का स्तर और माहौल दोनों ही प्रभावित हुए हैं.

मनोचिकित्सक डॉक्टर अग्रवाल बताते हैं कि कुछ समय पहले बिहार से यहां पढ़ने आए एक छात्र ने अपनी परेशानी बताई कि मेरे माता पिता चाहते हैं कि मैं डॉक्टर बनूं, लेकिन मैं तो लालू प्रसाद यादव बनना चाहता हूं.

रमज़ान या रमदान!

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सोमवार से भारत में मुसलमानों ने रोज़े रखने शुरू कर दिए हैं लेकिन सोशल मीडिया में एक बार फिर इस बात पर बहस छिड़ गई है कि इस पवित्र महीने को रमज़ान कहा जाए या रमदान.

भारत में पहले तो इसे रमज़ान कहा जाता था, लेकिन पिछले कुछ साल से कुछ लोग इसे रमदान कहने लगे हैं. आख़िर इसकी वजह क्या है?

इंडियन काउंसिल फ़ॉर वर्ल्ड अफ़ेयर्स में सीनियर रिसर्च फ़ेलो डॉक्टर फ़ज़्ज़ुर्रहमान कहते हैं कि यह केवल उच्चारण का फ़र्क़ है.

उनके अनुसार, ”अरबी भाषा में ‘ज़्वाद’ अक्षर का स्वर अंग्रेज़ी के ‘ज़ेड’ के बजाए ‘डीएच’ की संयुक्त ध्वनि होता है. इसीलिए अरबी में इसे रमदान कहते हैं जबकि उर्दू में आमतौर पर इसे रमज़ान कहते हैं.”

सवाल यह है कि आख़िर पिछले कुछ सालों से ही यह फ़र्क़ क्यों दिख रहा है.

डॉक्टर रहमान कहते हैं कि यह भारत और सऊदी अरब से बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों का नतीजा है.

सऊदी अरब का असर

उनके अनुसार भारत से अब ज़्यादा से ज़्यादा लोग अरब जा रहे हैं और वहां से लौटने के बाद वहां की बोलचाल, वेशभूषा और वहां का रहन-सहन भारत में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं.

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अजमेर शरीफ़ स्थित ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह के गद्दीनशीन सैय्यद सरवर चिश्ती भी कहते हैं कि यह केवल अरबी और उर्दू भाषा के कुछ अक्षरों के उच्चारण का फ़र्क़ है.

उनके अनुसार भारत उपमहाद्वीप में तो रमज़ान ही कहा जाता रहा है. लेकिन उन्होंने भी माना कि पिछले कुछ वर्षों में रमदान शब्द के इस्तेमाल में बढ़ोत्तरी हुई है.

सरवर चिश्ती कहते हैं, ”भारत और सऊदी अरब के बढ़ते रिश्ते और भारत में मदरसों के ज़रिए सऊदी अरब के बढ़ते प्रभाव के कारण ऐसा हो रहा है.”

ये बहस न केवल भारत में बल्कि पाकिस्तान में भी छिड़ी हुई है.

पाकिस्तान के जाने माने कार्टूनिस्ट साबिर नज़र ने एक कार्टून बनाया है, जिसमें अरबी वेशभूषा में एक आदमी तोते को सिखा रहा है कि ये रमदान है, रमज़ान नहीं.

तीनों खान को अफोर्ड कर पाना प्रोड्यूसर के लिए आसान नहींः सलमान

khansमुंबई पिछले दिनों यह खबर आई थी कि सलमान खान, आमिर खान और शाहरूख खान एक फिल्म में साथ आ रहे हैं। इस बात पर जब हाल ही फिल्म “बजरंगी भाईजान” के ट्रेलर लॉन्च पर सलमान से पूछा गया, तो उनका कहना था, “इंडस्ट्री में प्रोड्यूसर्स को एक ही खान को अफोर्ड करने में प्रॉब्लम होती है।

ऎसे में तीनों खान को अफोर्ड कर पाना किसी भी प्रोड्यूसर के लिए पॉसिबल नहीं है। मैं चाहता हूं कि हम तीनों साथ काम करें, लेकिन मुझे नहीं लगता यह संभव है।” मुम्बई में ट्रेलर लॉन्च में सलमान के साथ लीड एक्ट्रेस करीना कपूर खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और डायरेक्टर कबीर खान भी मौजूद थे।

इस मौके पर सलमान काफी कूल नजर आए और प्रेस के सवालों का अपने अंदाज में जवाब दिया।भाई हैं मेरे आमिर-शाहरूखसोशल साइट्स पर आमिर और शाहरूख को लेकर उड़ाए गए मजाक को लेकर एक बार फिर सलमान ने इवेंट के दौरान आपत्ति जताई।

उनका कहना था, “आमिर-शाहरूख मेरे भाई जैसे हैं और मैं उनके खिलाफ कुछ भी सुन नहीं सकता। यदि कोई मेरा फैन है, तो उसे कोई हक नहीं है कि वह मेरे दोस्तों का मजाक बनाए।”असल में आए आंसूफिल्म पर बात करते हुए सलमान ने बताया कि कहानी इतनी अच्छी और इमोशनल है कि फिल्म के दौरान उन्हें ग्लिसरीन का यूज नहीं करना पड़ा। इमोशनल सीन के दौरान उनके आंसू खुद-ब-खुद आ गए।

अपने प्रोडक्शन हाउस के बारे में उनका कहना था, “अरबाज और सौहेल के बच्चे हैं, ऎसे में मैंने भी अपना प्रोडक्शन शुरू कर लिया, जो मेरे बच्चे जैसा है

हर्षाली मलहोत्रा तो दिखा सकती है नखरेफिल्म में पाकिस्तानी गर्ल का रोल प्ले कर रही हर्षाली मलहोत्रा  के नखरों के बारे में सलमान का कहना था, “वह बहुत ही क्यूट है।

सैट पर कई बार वह नखरे दिखाती थी, लेकिन वह बहुत छोटी है, इसलिए नखरे तो दिखा सकती है। मैं तो इस उम्र में भी नखरे दिखाता हूं। हर्षाली मलहोत्रा के साथ काम करने का एक्सपीरियंस काफी खास रहा। वह फिल्म की जान है।

जुमे से शुरू रमजान जुमे पर ही खत्म होगा

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ramzan

उदयपुर। माहे रमजान यूं तो बरकत लेकर आता है, लेकिन इस बार रमजान खास संयोग लेकर रहा है। रमजान का पावन माह आज जुमे से शुरू हो रहा है और जुमे पर ही खत्म होगा। जुमे से शुरू हो रहे रमजान में इबादत का कई गुना सबाब बढ़ जाएगा। सादिक से लेकर सूर्यास्त तक चलने वाले रोजे में रोजेदार पांच वक्त की नमाज के साथ इबादत में समय बिताएंगे। विशेष महत्व रखने वाले रमजान के जुमे में मुख्य नमाज भी अदा करेंगे। यूं तो रमजान का जुमे से शुरू होना और खत्म होना खास मुकाम रखता है। लेकिन इस बार भी रमजान में पांच जुमे की नमाज अदा की जाएगी।
17 जुलाई को देखेंगे ईद का चांद
ईद का चांद 17 जुलाई को देखा जाएगा। पं. बंशीधर पंचांग निर्माता पं. दामोदर प्रसाद शर्मा बताते हैं कि प्रतिपदा का मान 17 जुलाई को सुबह 7.41 बजे तक रहेगा। इस कारण इस दिन चंद्र दर्शन होंगे।
70 गुना बढ़ जाएगा सवाब
पलटन मस्जिद के इमाम बताते हैं कि रमजान में जुमे में इबादत का 70 गुना सवाब मिलता है। जुमा बढऩे से अल्लाह की इबादत के लिए एक दिन और बढ़ जाएगा। जुमे की इबादत को लैलतुल कद्र से भी अफजल माना जाता है।

रमजान महीने के खास दिन
रमजान महीने के हैं तीन हिस्से रमजान इस्लामी महीने का 9वां महीना है। रमजान के महीने को और तीन हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में दस-दस दिन आते हैं। हर दस दिन के हिस्से को ‘अशराÓ कहते हैं जिसका मतलब अरबी मैं 10 है। रमजान को पूरा महीना ही वैसे तो मुबारक बरकतों वाला है। लेकिन इस महीने में कुछ खास दिनों का अलग महत्व है। इसी महीने में पवित्र पुस्तक कुरान आसमान से नाजिल हुई। तीसरे रोजे को बीबी फातिमा को याद किया जाता है, जिस दिन उनका इंतकाल हुआ था। बीबी फातिमा हजरत मोहम्मद साहब की सबसे लाड़ली बिटिया थी। 17 रमजान को इस्लाम के लिए लड़ी गई पहली जंग हुई, जिसको कई जगह जश्‍ने जंगे बद्र मनाया जाता है। इस महीने की सत्ताईसवीं शब को पूरी रात जागकर इबादत की जाती है।

रोजे का मायने : रोजे को अरबी में सोम कहते हैं, जिसका मतलब होता है रुकना या पाबंदी। बुराइयों से दूरी बनाना। रोजे में दिनभर सूर्योदय में पौ फटने से लेकर सूर्यास्त होने तक भूखा-प्यासा रहा जाता है। दुनिया की हर बुराइयों से दूरी बनी रहे इसके लिए, हर इच्छाओं पर नियंत्रित करना जरूरी है। यहां तक की किसी को गुस्से से चिल्लाना या मुंह से अपशब्द कहना के लिए सख्त मनाही है

हिन्दुस्तान जिंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स मिले ‘सखी’ से

हिन्दुस्तान जिंक कर रहा है ‘सखियों’ के लिए नये प्रषिक्षण कर्ताओं की खोज

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हिन्दुस्तान जिंक के निदेषक मण्डल में निदेषक ए.आर. नारायणस्वामी, अरूण टोडरवाल एवं आर.कानन ने आज मटून माइन्स में ‘सखी’ ग्रामीण उद्यमी महिलाओं के द्वारा उत्पादित उत्पादों को देखा। निदेषकों ने ग्रामीण महिलाओं के द्वारा बनाये गये मसाले, पेपर से बने सामान आदि को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की और हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर निदेषकों ने पौधारोण भी किया।

मटून में ‘सखी’ महिलाएं मसाले बनाना, अखबार के कागजों से बेहतरीन टोकरियों व अन्य साज-सज्जा का सामान बना रही है जो कि अपने आप में अनोखी कला है। कम लागत से बनने वाला यह सामान लोगों को बहुत प्रभावित कर रहा है।

हिन्दुस्तान ज़िक के हेड-कार्पोरेट रिलेषन्स श्री सी.एस.आर. मेहता एवं हेड-कार्पोरेट. कम्यूनिकेषन पवन कौषिक ने बताया कि हिन्दुस्तान जिं़क के ‘सखी’ अभियान, के अन्तर्गत हिन्दुस्तान जिं़क ग्रामीण व आदिवासी महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक सषक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा है।

पवन कौषिक ने बताया कि हिन्दुस्तान जिं़क इन ग्रामीण महिलाओं को नये प्रषिक्षण प्राप्त कराने की और कार्य कर रहा हैं तथा इससे संबंधित विषेषज्ञों की खोज भी कर रहा है।

‘सखी’ स्वयं सहायता समूह में अनेकों महिलाएं सिलाई कढ़ाई से जुड़कर वस्त्र बनाने का कार्य भी कर रही है। मटून की और भी महिलाएं ‘सखी’ सहायता समूह से जुड़ने को तत्पर है तथा हिन्दुस्तान जिंक ने नये समूहों को बनाने का कार्य भी प्रारंभ कर दिया है।

हिन्दुस्तान जिंक अपने ‘सखी’ अभियान द्वारा ग्रामीण महिलाओं को सामाजिक व आर्थिक रूप से सषक्त करने के लिए व्यवसायिक प्रषिक्षण द्वारा इन ग्रामीण महिलाओं को एक उद्यमी के रूप में परिवरतित कर रहा है, यह बहुत ही सराहनीय कार्य है तथा ग्रामीण परिवारों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए बेहद सफल साबित होगा।

शक ने किया एक प्रेम कहानी का अंत – प्रेमिका का गला काट की ह्त्या

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उदयपुर । राणा प्रतापनगर स्टेशन स्थित रेलवे के पुराने गैराज में डूंगरपुर की नर्सिंग छात्रा की हत्या उसकी के प्रेमी ने की थी। पुलिस ने प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। हत्याकाण्ड के पीछे मृतका का गैर युवकों से बातचीत करना मुख्य कारण रहा। जिस प्रेमिका के लिए साल भर से जान देने की कसमे खा रहा था उस प्रेमिका पर शक कर उसका गला काट कर जान लेली। शक की वजह यह कि प्रेमिका का मोबाइल व्यस्त आता था, जिससे प्रेमी ने मन ही मन यह मान लिया कि वह मेरे प्रति ईमानदार नहीं है ।

घटना :
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश भारद्वाज ने बताया कि सोमावार को सायं 4 बजे पुलिस को यह सूचना मिली कि राणा प्रताप नगर रेल्वे स्टेशन के खण्डहर पडे लोको शेड में एक अज्ञात महिला की गला रेती हुई लाश पडी हैं । जिस पर पुलिस टीम ने मौके पर जाकर अत्यन्त बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा तुरन्त ही लाश की पहचान टिंकल परमार पुत्री पवन परमार के रूप मे कर ली ।
कैसे पकड़ा हत्यारे को :
भारद्वाज ने बताया कि लाश का निरीक्षण करने पर पुलिस टीम के मध्य यह सहगति बनी कि मृतका को इस सूनसान खण्डहर में उसकी सहमति से ही उसका कोई परिचित लेकर आया है परन्तु मृतका टिंकल के परिजनो के पूछताछ पर यह तथ्य सामने आया कि मृतका के पास विगत 15 दिवस से कोई मोबाईल नही है । साथ ही मृतका टिंकल के परिजनो से की गई पूछताछ में यह भी तथ्य उजागर हुआ कि टिंकल रविवार को करीब 12 बजे दोपहर अपने घर डूंगरपुर से उदयपुर जाने को love storyकहकर बस स्टेण्ड के लिये निकली,परन्तु कल वह न तो उदयपुर पहुंची, ना ही उससे कोई सम्पर्क नहीं हो पाया ।
इस पर थानाधिकारी प्रताप नगर चन्द्र पुरोहित के नेतृत्व मे एक विशेष टीम जिसमे हैड कांस्टेबल जगदीश वैष्णव कांस्टेबल नाहर सिंह, कांस्टेबल विक्रम सिह, कांस्टेबल उम्मेद सिह,कांस्टेबल खुमाण सिह व कांस्टेबल प्रमोद कुमार ने डूंगरपुर बस स्टेण्ड से ही अपना अनुसंधान आरम्भ किया । जिसके अन्तर्गत डुगरपुर से उदयपुर आने वाली प्रत्येक ब समे मालुमात की गई तो जानकारी मिली कि मृतका की उम्र व हुलिए की कोई एक अकेली लडकी रविवार को डूंगरपुर से उदयपुर नहीं आई। इस पर उपरोक्त टीम ने ओर अधिक छानबीन की तो यह तथ्य जानकारी मे आया की मृतका टिंकल के हुलिए की लडकी को एक 20 वर्ष उम्र के करीब का लडका जिसके हल्की दाढी है, डूंगरपुर बस स्टेण्ड से मोटर साईकिल पर बिठा कर करीब 4 पीएम के आस-पास निकला है ।
इस सूचना पर अधिक जानकारी हासिल की गई तो पुलिस टीम को पता चला कि मृतका टिंकल के पडौस मे रहने वाले कल्पेश उसकी दोस्ती थी तथा उसकी उम्र भी करीब 20 वर्ष के आस पास हैं एंव उसके हल्की दाढी भी हैं तथा वह रविवार को डूंगरपुर में ही था ।
कल्पेश मीणा से पूछताछ करने जैसे ही पुलिस टीम उदयपुर से डुगरपुर के लिये रवाना हुई उसी समय पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कल्पेश डुगरपुर से उदयपुुर आने की बस मे बैठ गया है । इस पर थानाधिकारी प्रताप नगर के नेतृत्व में कल्पेश के उदयपुर के आने व उसकी अपनी बहिन वृदां के सैक्टर न.5 हिरण मगरी स्थित किराये के मकान में जाने तक पीछा किया तथा वहां से उसको दबोच के थाने लाकर उससे मनोवैज्ञानिक पूछताछ की गई तो वह टुट गया और टिंकल की हत्या करना स्वीकार कर लिया ।

इस तरह हुआ एक प्रेम कहानी का अंत :
कल्पेश अपनी बडी बहिन अरूणा के साथ विगत वर्ष जुलाई माह डूंगरपुर के हॉउसिग बोर्ड मे मुकेश सुथार के हॉउसिग बोर्ड के मकान मे किराये पर रहने गया था । उसके एक माह बाद ही मृतका टिंकल भी हॉउसिग बोर्ड के एक मकान में अपने माता-पिता के साथ रहने आई थी । आस-पास के मकान मे रहते हुए टिंकल और कल्पेश मीणा से दोस्ती हो गई । तथा दोनो एक-दुसरे से डूंगरपुर मे चोरी छिपे मिलने लग गये थे । यह बात ज्यादा दिनो तक दोनो के घर वालो से छिपी नही रह सकीतो । दोनों के घर वालो ने अपने-अपने बच्चो को समझाया परन्तु कल्पेश को टिंकपाने की जिद के आगे उसके घर वालो ने झुकते हुए कल्पेश के संबंध की बात कराने के लिये कल्पेश की बुआ और फूफा ओर बडी बहिन दक्षा को टिंकल के घर भी भेजा था । इस पर टिंकल के घर वालो ने दोनो की पढाई समाप्त हो जाने की बात कर का टाल दिया था ।
इसके बावजुद कल्पेश व टिंकल का मिलना- जुलना व फ ोन पर बाते करना जारी रहा । इससे तंग होकर कल्पेश के घर वालो ने कल्पेश को बी.एड करने के लिये सीकर में दाखिला करा दिया । और टिंकल नर्सिग की पढाई करने अपने नाना के यहां उदयपुर आ गई । दोनो अलग-अलग शहरों मे रहने के बावजूद भी टिंकल और कल्पेश की आपस मे फ ोन पर बात होती रहती थी और दोनो के मध्य पूर्व के भाति दोस्ती कायमी थी ।
इसी दोस्ती दरिम्यान जब कल्पेश कई बार टिंकल को फ ोन करता तो उसका फ ोन लम्बे समय तक व्यस्त बताता। कई बार देर रात्रि मे भी जब टिंकल का फ ोन व्यवस्त आता तो कल्पेश उससे व्यस्तता का कारण पूछता तो टिंकल अपने परिचित व घर वालो का फ ोन आना बताती थी परन्तु कल्पेश, टिंकल के इस जवाब से संतुष्ट नही हुआ और उसके मन में शक का कीडा घर कर गया और वह सीकर से बीच बीच में टिंकल से मिलने व उसे चैक करने डूंगरपुर आता-जाता था । मिलने के बहाने कल्पेश ने टिंकल को फोन चैक कराना शुरू कर दिया और उसकी कॉल लिस्ट से कुछ नम्बर निकाल कर उसकी अपने स्तर पर तहकीकात की तो वह नम्बर कुछ लड़कों के निकले, जिनके बारे मे कल्पेश ने टिंकल से पूछा तो उसने उनको अपना दोस्त होना बताया ।
कल्पेश को यह बात मन ही मन सहन नही हो रही थी उसके रहते टिंकल किसी और लडके से दोस्ती करे और वह म नहीं मन टिंकल के प्रति अत्यन्त क्रोधित रहने लगा ।
अप्रैल माह में कल्पेश सीकर से अपनी परीक्षा देकर वापस डूगंरपुर आ गया तथा टिंकल के साथ मिलने के अलावा टिंकल का फोन लेकर उसमे आये और गये फ ोन नम्बर लेकर टिंकल की जासूसी करने लग गया । तथा उसके मन मे यह भावना बना ली थी कि टिंकल उसके प्रति वफादार नही है ।
दो दिन पूर्व तैयारी कर ली थी: वृताधिकार माधुरी वर्मा वृत नगर पूर्व ने बताया कि कल्पेश के मन मे जब से यह बात घर कर गई थी कि टिंकल उसके प्रति वफादार नहीं रही तो उसने मन ही मन यह तय किया कि यदि टिंकल उसकी नहीं हुई तो वह किसी और की भी नहीं होने देगा ।
इसी भावना के चलते उसके डूगंरपुर मे टिंकल से बात कर यह तय किया कि वह वापस पढने के लिए उदयपुर कब जा रही हैं, टिंकल ने उससे कहां कि रविवार को दोपहर डूगंरपुर से वापस उदयपुर पढने जा रही हूं । इस पर कल्पेश अपनी बाईक लेकर डूंगरपुर बस स्टेण्ड पहुंच गया, जैसे ही वहां टिंकल आई तो उसने टिंकल के आगे यह प्रस्ताव रखा कि वह भी उदयपुर जा रहा है तथा उसे अपनी बाईक पर उदयपुर छोड़ देगा । टिंकल तैयार हो गई तथा दोनों रविवार को सायं करीब 8 पीएम पर उदयपुर पहुंच गये । उदयपुर पहुंचने पर टिंकल ने कल्पेश से कहां कि वह उसे ठोकर चौराहे से मादडी रोड वाले रेल्वे क्रोसिग पर छोड दे जहां से वह अपने मामा के साथ कानपुर अपने घर चली जाए ।
रेल्वे क्रोसिग पहुंचते ही कल्पेश ने कहां कि उसे जोधपुर जाना है इसलिए हम राणा प्रताप नगर रेल्वे स्टेशन के अंदर चल कर गाडी का पता करके आते है। कल्पेश बहाना बनाकर टिंकल को अपने साथ लेकर राणा प्रताप नगर स्टेशन के प्लेटफ ार्म पर चला गया प्लेटफ ार्म पर पहुंचते ही कल्पेश ने लघुशंका का बहाना किया और राणा प्रताप रेल्वे स्टेशन के पास पुराना लोको शेड के खण्डहर मे लघु शंका हेतु चला गया । लोकोशेड के अंदर जाते ही कल्पेश ने जोर से चिल्ला कर टिंकल को आवाज दी कि टिंकल मेरे पास जल्दी आओ यहा कुछ है इस पर जैसे ही टिंकल कल्पेश की मदद के लिए पुराने लोकोशेड के खण्डहर मे गई तो पहले से तैयार कल्पेश ने अचानक टिंकल का गला अपने हाथ से दबा कर उसे नीचे गिरा दिया और जेब मे पडे अपने चाकू से टिंकल का गला रेत दिया ।
टिंकल को मारने के बाद कल्पेश मनात राणा प्रताप नगर स्टेशन से चुपचाप निकल कर रात को ही अपनी बाईक से वापस डूंगरपुर चला गया । वहां जाकर अपनी बुआ के घर सो गया तथा सोमवार को दुबारा बस मे बैठ कर जैसे ही उदयपुर पहुंचा तो पुलिस ने पीछा कर उसे दबोच लिया ।

जान देने की कसम खाते-खाते जान ले ली: थानाधिकारी चन्द्र पुरोहित ने बताया कि पूछताछ के दौरान कल्पेश ने भावुक होकर कहां कि वह टिंकल से बेतहाशा मोहब्बत करता था,तथा उसके आगे रोज जान देने की कसमे खाता था,परन्तु टिंकल के लिए उसके मन मे ऐसा शक पैदा हो गया कि मैने उसके लिए जान देने की जगह उसकी जान ही ले ली ।

शातिर ठग के खिलाफ पुलिस का शिकंजा तैयार

भटेवर व सवीना में जमीनों के फर्जी एग्रीमेंट दिखाकर करीब ८० से ज्यादा लोगों से की लाखों की ठगी, चार थानों में दर्ज आधा दर्जन से ज्यादा धोखाधड़ी के मामले

thagउदयपुर। भविष्य क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी की तरह संयोग लेकसिटी फेज टू नामक प्लानिंग के जरिये ८० से ज्यादा लोगों के साथ धोखाधड़ी का खुलासा गोवर्धनविलास पुलिस ने किया है। पुलिस ने आरोपी ठग को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आरोपी उदयपुर और अहमदाबाद के लोगों को जमीनों का एग्रीमेंट दिखाकर प्लानिंग काटने का झांसा देता था। आरोपी ने इन लोगों से लाखों रुपए हड़प लिए हैं। आरोपी उसकी पत्नी और भाई के साथ मिलकर धोखाधड़ी का ये कारोबार कर रहा था। इसके लिए सेक्टर 11 में अपेक्षा कॉम्पलैक्स में संयोग इंटरप्राइजेज नाम से प्रोपर्टी का ऑफिस खोलकर रखा है। आरोपी ने सेशन जज के समक्ष गोवर्धनविलास पुलिस द्वारा उसे परेशान करने का परिवाद पेश कर रखा था, जिसको लेकर आज सुबह सेशन जज स्वयं गोवर्धनविलास थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने सेशन जज को आरोपी के खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों की फाइल दिखाई, जिसमें आरोपी के खिलाफ अपराध बनना पाया गया। सीआई अब्दुल रहमान ने बताया कि गोवर्धनविलास निवासी विशाल भाटिया, उसका भाई राज भाटिया और पत्नी के खिलाफ आरोप है कि ये लोग गिरोह बनाकर लोगों झांसे में लेते थे और अपेक्षा कॉम्पलैक्स स्थित ऑफिस में बुलाकर सिंघानिया यूनिवरसिटी, भटेवर और सवीना क्षेत्र में दूसरों की जमीनों के झूठे एग्रीमेंट दिखाकर प्लॉट बेचने के नाम पर ठगी करते थे। वास्तव में मौके पर इन लोगों की जमीन होती ही नहीं थी।
ये हुए ठगी के शिकार : डॉ. गोवर्धनराम चंदानी ने परिवादकर आरोपी विशाल भाटिया, उसके भाई और पत्नी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया था। इनके अलावा सेक्टर 11 निवासी मैजर उदयप्रकाश पालीवाल, श्रीमती रूचि पालीवाल, हितैष भट्ट, साबरमती, गुजरात निवासी विशाल पुरोहित, हितेंद्र पुरोहित, मधुबन निवासी डॉ. श्याम सुंदर सहित करीब ८० लोगों के साथ धोखाधड़ी करके लाखों रुपए हड़प लिए। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी से संबंधित सूरजपोल, हाथीपोल, भूपालपुरा और गोवर्धनविलास में कई मामले दर्ज है।

उदयपुर में एक और रोपवे – फतहसागर से नीमच माता तक का होगा सफर

ropewayउदयपुर. फतहसागर किनारे देवाली छोर से नीमच माता मंदिर तक रोप-वे शुरू करने की तैयारी है। यह शहर का दूसरा रोप-वे होगा। इसके लिए जयपुर की उसी फर्म ने प्रशासन को प्रपोजल दिया है, जो 8 साल से दूधतलाई के पास दीनदयाल पार्क से मंशापूर्ण करणी माता मंदिर (माछला मगरा) तक रोप-वे चला रही है।
शहरी विकास को लेकर कलेक्टर चैंबर में शनिवार को बैठक में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने भी नीमच माता मंदिर तक रोप-वे की जरूरत बताई। मीटिंग में कलेक्टर रोहित गुप्ता, मेयर चंद्रसिंह कोठारी, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, यूआईटी सचिव रामनिवास मेहता व सीनियर टाउन प्लानर सतीश श्रीमाली ने भी अपने आइडिया शेयर किए।
450 मीटर लंबा होगा रूट, बढ़ेगी सुविधा
प्रस्तावित रोप-वे देवाली छोर पर फतहसागर किनारे नीमच माता मंदिर पहाड़ी की तलहटी से मंदिर तक बनेगा। प्रपोजल देने वाली ओंकारेश्वर ट्रेड लिंक कंपनी के कैलाश खंडेलवाल ने बताया कि इसकी लंबाई 450 मीटर होगी । मंशापूर्ण करणी माता रोप-वे की लंबाई 400 मीटर है।
ये होंगे दो बड़े फायदे
बुजुर्ग भी कर सकेंगे नीमच माता के दर्शन- नीमच माता मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां साल की दोनों नवरात्रि में दर्शन करने वालों की विशेष भीड़ रहती है। कई बुजुर्ग सीढ़ियां और चढ़ाई ज्यादा होने के कारण मंदिर नहीं जा पाते।
दूधतलाई की तरह बढ़ेगा पर्यटन- करणीमाता रोप-वे 2007 में शुरू हुआ था, जिससे दूधतलाई स्पेशल अट्रेक्शन बना और यहां पर्यटक बढ़े। यही सुविधा मिलने पर फतहसागर पर भी पर्यटक बढ़ेंगे। इस पहाड़ी से पूरे शहर का विहंगम नजारा होता है।
बड़ा मकसद पर्यटकों का ठहराव बढ़ाना
प्रशासन ने हाल ही बोटिंग सर्किट का ट्रायल भी किया है। इसके तहत पीछोला से फतहसागर तक ढाई किमी लंबे उस जल मार्ग पर बोटिंग की संभावनाएं देखी गईं, जिस पर नाव चलाकर जल संसाधन विभाग झीलों की सफाई करता आया है। प्रशासन को भेजी जाने वाली इस रिपोर्ट का काम अंतिम चरण मे हैं। इसके साथ नीमच माता के लिए रोप-वे शुरू करने की तैयारी भी हो रही है। ये सुविधाएं विकसित करने का बड़ा मकसद पर्यटकों को फतहसागर की ओर डायवर्ट करना और शहर में उनका ठहराव बढ़ाना है।
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अंजुमन का बड़ा फैसला – अब उदयपुर संभाग में नहीं मनेगी अलग अलग ईद

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anjumanउदयपुर. इबादत का महीना रमजान आ रहा है और इस बार अच्छी खबर यह है कि पूरे संभाग में ईद एक साथ मनाई जाएगी। किसी भी शहर या कस्बे से चांद दिखने पर इसकी शहादत अंजुमन तालीमुल इस्लाम तक पहुंचाई जाएगी और यहां से एलान होगा। पहली बार यह अहम फैसला हुआ है। रूयते हिलाल कमेटी की मेजबानी में रविवार को अंजुमन में हुई कॉन्फ्रेंस में शरीक संभाग भर के ओलमाओं ने कहा कि त्योहारों और 12 महीनों के खास दिनों को लेकर अंजुमन को मरकज (हेड क्वार्टर) मानते हुए इसके एलानों को ही अधिकृत मानेंगे।
इमाम पहुंचाएंगे चांद दिखने की खबर
अंजुमन सदर मोहम्मद खलील ने बताया कि संभाग में किसी भी जगह पर चांद दिखने पर वहां के इमाम अंजुमन से संपर्क कर शहादत पहुंचाएंगे। इसके लिए दो प्रतिनिधि भेजे जाएंगे। इस शहादत पर अंजुमन से पूरे संभाग में एलान कर चांद दिखने की इत्तला की जाएगी और रमजान, ईदुल-फितर, ईदुल-अजहा आदि मनाए जाएंगे। कॉन्फ्रेंस में अंजुमन सेक्रेट्री मोहम्मद रिजवान खान, काबीना मेंबर जहीरुद्दीन सक्का बतौर मेहमान शामिल हुए। अध्यक्षता मौलाना जुलकर नैन ने की।
ये प्रतिनिधि हुए शरीक
मौलाना आस मोहम्मद दरखानवाड़ी, मौलाना अयूब रजा फतहनगर, मौलाना मोहम्मद सईद काजी कपासन, मौलाना फिरोज भींडर, मौलाना मेराज अहमद खेरवाड़ा, हाफिजा मेहबूब आलम हिरणमगरी, मौलाना रईसुल कादरी कहारवाड़ी, मौलाना जुल्फिकार सरदारगढ़, मौलाना आबिद हुसैन निम्बाहेड़ा, हाफिज अब्दुल मन्नान रूपनगर, मुफ्ती बद्रे आलम अलीपुरा, इमाम कमरुददीन चिल्ले की मस्जिद, मोहम्मद शोएब सवीना, खालिद रजा, हाफिज आफताब आलम सराड़ा पलटन मस्जिद, मौलाना वसीम अख्तर सराड़ा रिसाला मस्जिद, मौलाना मोहम्मद नाजिर गलियाकोट, मोहम्मद कमाल कादिरी आलू फैक्ट्री, मौलाना बदरुद्दीन दीवानशाह कॉलोनी आदि।