अजमेर मुगल बादशाह अकबर के वंशज प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने मंगलवार को ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में हाजिरी दी। उन्होंने गरीब नवाज के मजार पर मखमली चादर और फूल पेश कर दुआ मांगी। प्रिंस तूसी याकूब दोपहर करीब 12.15 बजे दरगाह पहुंचे।
उन्होंने गरीब की मजार पर मखमली चादर और गुलाब के फूल पेश किए। याकूब ने जन्नती दरवाजे पर मन्नत का धागा बांधा। उन्होंने बादशहा अकबर द्वारा दरगाह में दी गई बड़ी देग के अलावा शाहजहांनी मस्जिद को देखा। अपने वंशजों द्वारा बनाई इमारतों और दरगाह की व्यवस्थाओं को देखकर वे बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने करीब 1.25 लाख रुपए का नजराना भी दिया।
याद आए बादशाह अकबर
देग और दरगाह की व्यवस्थाओं को देककर याकूब को बादशाह अकबर याद आए। अकबर ने दरगाह में इंतजामात के लिए 22 गांव गोद दिए थे। इन गांवों से मिलने वाली राशि का उपयोग दरगाह में आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए होता था। 1947 में इन गांवों को केंद्र सरकार ने वापस ले लिया। इसकी एवज में दरगाह को सालाना 60 हजार रुपए दिए जाते हैं।

















