Be Polite to the Children of Street, says “Khushi”

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I was travelling from Bangalore to Delhi in Karnataka Express. With fatigue of travelling almost 40 hours in train, with tons of baggage, it was quite an irritating and hectic journey. The time I got down on Delhi Station with all my baggage, a child not more than 6-7 years started pulling my shirt and started asking for money. As my hands were full of luggage and had a bag on my shoulder, I was getting terribly irritated. In all this push and pull my bag fell down and it opened. Everything inside the bag was on road. This was enough to push my patience and my hands did the rest.

Everyone who passed looked at me with anger and disgust. No one helped me. Rather everyone sympathised with the little child.

Though I left the Railway Station, that guilt of letting lose my hand stayed with me. From that day whenever I see a child begging I experience that guilt. Today, after almost 24 years, when I am attached with Vedanta’s “Khushi” campaign – for the underprivileged children in India, for their education, nutrition and health, I feel I am doing a bit for myself and for my country. My guilt has been now converted into energy.

The very first line that “Khushi” wrote to its members was ‘be polite to the children of street – they are not on street by choice but by force’.

With largest child population in the world and almost 1/3rd of world’s malnourished children living in India, our country has to find a future for these crores of children.

”Khushi” encourages individual efforts are what the country needs today. Government, NGOs and Corporates cannot do it alone.

With about 50,000 members in the “Khushi” group on facebook from across the world, many want to donate money. But “Khushi” is not about donating money, but for donating time. Donations are not encouraged or accepted.

I am sure, many of you must be carrying some feeling for the underprivileged children in India. Here it is a chance to put value to life.. Join “Khushi” – www.facebook.com/groups/vedantakhushi.

असरार अहमद खान अजमेर दरगाह कमेटी के दोबारा सदर बने

Asrar ahmad khan 1उदयपुर । अजमेर ( ख्वाजा गरीब नवाज़ ) दरगाह कमेटी के सोमवार को हुए कमेटी के चुनाव में असरार अहमद खान को दोबारा सर्व सम्मति से सदर चुना गया। असरार अहमद खान के पिछले वर्ष के उत्कृष्ट कार्यों और अच्छे प्रशासन के बुते पर दोबारा सदर के पद के लिए मनोनीत किया गया और दरगाह कमेटी के सभी सदस्यों की एक राय से उन्हें सदर चुना गया। खान के पैतृक निवास डूंगरपुर और उदयपुर सहित सभाग और राज्य भर के कई संगठनों और कई कमिटी के अध्यक्षों अंजुमन के सदर आदि ने मुबारक बाद देते हुए यह मेवाड़ और राजस्थान के लिए गौरव की बात बताई की पहली बार मेवाड़ का कोई सदस्य दूसरी बार हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी दरगाह कमिटी का सदर बने है।
असरार अहमद खान ने पिछले वर्ष भी निवर्तमान सदर के पद पर रहते हुए दरगाह में कई विकास के कामों को अंजाम दिया। खान ने देश और दुनिया से आने वाले जायरीनों की सुविधा के लिए कई विशेष इंतज़ाम किये। असरार अहमद खान अपने पिछले कार्यकाल में पूरी तरह सक्रीय रहे और प्रशासन और अन्य सभी से अपना तालमेल बैठाते हुए विकास के कामों में अग्रणी रहे। असरार अहमद खान को दोबारा सदर चुने जाने में उनकी काबिलियत और उनके द्वारा किये कार्य और अपनी प्रशासनिक कुशलता मुख्य माध्यम रही। श्री खान को सभी मेम्बरों ने सोमवार को हुए चुनाव में एक राय होकर सदर के लिए चुना और अपने द्वारा करवाये जा रहे विकास के कार्यों को निरंतर रखने में पूरा सहयोग का वादा किया ।
असरार अहमद खान ने इस मोके पर कहा कि ये मेरे लिए सौभाग्य और बहुत खुशकिस्मती की बात है, कि मुझे गरीब नवाज़ की दरगाह में खिदमत का अवसर दोबारा मिला है । श्री खान ने कहा कि सभी सदस्य साल भर गरीब नवाज़ की बारगाह में आने वाले जायरीनों की सुविधा के लिए प्रयासरत रहते है। दरगाह के विकास के कामों में हमेशा तत्पर रहते है, आगे भी हमारी यही कोशिश रहेगी कि गरीब नवाज़ की सेवा कार्यों को हर संभव जल्दी और पूरा किया जाय। काफी काम शुरू किये गए है जिनको पूरा करने की कोशिश रहेगी और कई नए कार्यों को अंजाम दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सदर असरार अहमद खान और पुलिस प्रशासन के प्रयासों से गरीब नवाज़ का हाल ही संम्पन्न हुआ 803 वां उर्स पूरी सुरक्षा और सफलता के साथ संम्पन्न हुआ। साढ़े तीन लाख से अधिक ज़ायरियों के एक साथ जियारत के दौरान भी किसी अनहोनी घटना के समाचार नहीं आये। पुरे दरगाह परिसर में शानदार इंतजामात किये गए थे दरगाह परिसर में जायरीनों को धुप से बचाने तक के पुरे इंतज़ाम किये थे।
असरार अहमद खान का पैतृक निवास मुख्यतः डूंगरपुर है और उदयपुर में खान परिवार सहित रहते है। उदयपुर संभाग और मेवाड़ के कई संगठनों ने असरार अहमद को बधाई देते हुए कहा की मेवाड़ और वागड़ के लिए ये एक गौरव का विषय है कि हमारे क्षेत्र के निवासी, हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी दरगाह हिन्दू मुस्लिम की एकता का प्रतिक ख्वाज़ा गरीब नवाज़ दरगाह कमेटी का सदर है ।

“Wraps N Rolls” at The Lalit Laxmi Vilas Palace Udaipur

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Udaipur, April 24, 2015 – The LaLiT Laxmi Vilas Palace would endeavour to introduce a new flavour and a different concept through this food festival.
Wraps N Rolls are known all around the world and are popular amongst the young and old alike everywhere. They are always a favorite and preferred snack across all age groups.
Prepared by Chef Virendra Singh with 7 Options for each to choose from Vegetarian and Non-Vegetarian Wraps N Rolls to be served with assortment of dips. Come and witness the Wraps N Rolls at its best!

Details of the Wraps and Roll:
Date: – April 24, 2015 – May 03, 2015
Venue: – Aangan & Padmini Restaurant at The LaLiT Laxmi Vilas Palace Udaipur
Timings: – Lunch 12.30pm till 03.00pm & Dinner 07.00pm till 10.30pm
Price: Vegetarian @ INR 599 + taxes / Non-Vegetarian @ INR 699 + taxes

पुलिस थाने पर अटैक

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उदयपुर/धरियावद। वीरपुरा गांव के काली मगरी जंगल में आज सुबह पेड़ से लटकी मिली लाश बिना परिजनों की मौजूदगी में उतारने से नाराज ग्रामीण धरियावद थाने और एसडीएम कार्यालय में घुस गए। एसडीएम कार्यालय में पार्किंग स्थल पर पड़ी गाडिय़ों व कार्यालय के भीतर ग्रामीणों ने तोडफ़ोड़ कर दी। ग्रामीणों को काबू करने के लिए पुलिस द्वारा हलका बल प्रयोग भी किया गया। यह उत्पात मचाने के बाद ग्रामीण तो भाग गए, लेकिन अस्पताल में मुर्दाघर के बाहर मृतक के परिजन विलाप कर रहे हैं, जिन्हें डिप्टी दिनेश मीणा समझाइश कर रहे हैं। धरियावद कस्बे में अतिरिक्त जाब्ता तैनात कर दिया गया है। एसपी प्रतापगढ़ कालूराम रावत भी धरियावद के लिए रवाना हो गए हैं।
आज सुबह नौ बजे धरियावद पुलिस को सूचना मिली कि वीरपुरा गांव के जंगल काली मगरी में पेड़ पर एक युवक की लाश लटकी हुई है। इस पर एएसआई लालसिंह मौके पर पहुंचे, जिन्होंने शिनाख्तगी के अभाव में आत्महत्या का मामला मानते हुए शव को पेड़ से नीचे उतरवाया और धरियावद अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया। अस्पताल में पहुंचने के बाद शव की शिनाख्त चंदाणा निवासी धूलिया (२५) पुत्र कानाजी मीणा के रूप में हुई। सूचना पर परिजन और चंदाणा के करीब दो सौ लोग धरियावद अस्पताल पहुंचे, जहां परिजनों का कहना था कि धूलिया की हत्या करके शव को पेड़ से लटकाया गया है। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह हत्या का मामला है और पुलिस इसे दबाना चाहती है, इसलिए शव उतारने से पहले परिजनों को घटनास्थल पर नहीं बुलाया गया। इस दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने धरियावद थाने में घुसने का प्रयास किया, जिन्हें पुलिस ने हलका बल प्रयोग करके रोका। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीण कोर्ट परिसर होते हुए एसडीएम कार्यालय में पहुंचे, जहां भी ग्रामीणों ने पार्किंग में खड़ी गाडिय़ों और कार्यालय में घुसकर तोडफ़ोड़ की। इसके बाद उत्पाती लोग भाग गए। सूचना पर डिप्टी दिनेश मीणा मौके पर पहुंचे, जिन्होंने अस्पताल में मृतक के परिजनों और ग्रामीणों से समझाइश की। उस दौरान ग्रामीणों ने मृतक धूलिया की हत्या करके शव पेड़ पर लटकाने का आरोप लगाया और एसपी को मौके पर बुलाने की मांग की। इस पर प्रतापगढ़ एसपी कालूराम रावत धरियावद के लिए रवाना हो गए। समाचार लिखे जाने तक शव का पोस्टमार्टम नहीं शुरू हुआ था। धरियावद अस्पताल में भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद है।

> मौके पर शांति है। अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। डिप्टी दिनेश मीणा मौके पर व्यवस्था संभाले हुए हैं। मैं धरियावद के लिए रवाना हो गया हूं।
-कालूराम रावत, एसपी प्रतापगढ़

पत्नी पीडि़त पति ने जहर खाया

A man drinking a beerउदयपुर। बेदला के तलाई क्षेत्र में बीती रात पत्नी से पीडि़त युवक ने जहर खा लिया, जिसको एमबी हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। युवक के भाई ने ससुराल वालों के खिलाफ आए दिन मारपीट करने तथा परेशान करने का आरोप लगाया है।
पुलिस के अनुसार भवानीसिंह कच्छावा (३४) ने बीती रात जहर खा लिया। परिजनों ने उसे एमबी हॉस्पीटल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। भवानीसिंह के भाई दिनेश ने बताया कि भवानीसिंह की शादी १५ बरस पहले चित्तौड़ में गांधीनगर निवासी आशा से हुई थी। भवानीसिंह के एक छह साल और छह माह के दो बेटे थे। इसके बाद भवानीसिंह ने नसबंदी करवा ली, लेकिन पिछले कुछ माह में दोनों बेटों की मौत हो गई। इससे वह परेशान रहता था। इधर, पत्नी से भी उसका झगड़ा होना शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि चार अप्रैल को आशा की दो बहनें, भाई और अन्य परिजन भवानीसिंह के घर पर आए, जहां उसे नपुसंक कहते हुए मारपीट की। इस संबंध में सुखेर थाने में शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस ने आशा के परिजनों के खिलाफ कार्रवाई करने के भवानीसिंह को ही १५१ में बंद कर दिया। पांच अप्रैल को पुलिस ने उसे छोड़ा। इसके बाद आशा अपने पीहर चली गई, जहां चित्तौड़ महिला थाने में भवानीसिंह के खिलाफ प्रताडऩा का मामला दर्ज करवा दिया। इन सभी कारणों से परेशान होकर भवानीसिंह ने बीती रात जहर खा लिया। डॉक्टरों ने भवानीसिंह की हालत चिंताजनक बताई है।

अजमेर शरीफ: दूर-दूर से आते हैं लोग, हिंदू परिवार करता है उर्स की शुरुआत

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Udaipur. राजस्थान के अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की मजार पर 803वें सालाना उर्स की शुरुआत हो चुकी है।आज पढिए- दरगाह के इतिहास के बारे में।
अजमेर की दरगाह का भारत में ही नहीं विदेशों में भी बड़ा महत्व है। कहा जाता है कि ख्वाजा मोईनुद्‍दीन चिश्ती के दरबार में लोग चींटी की तरह खिंचे चले आते हैं। ऐसा नहीं है कि यहां आने वाले सिर्फ मुस्लिम ही हो। यहां आने वालों की संख्या मुस्लिम से ज्यादा दूसरे धर्म को मानने वाले लोगों की है। अजमेर के गरीब नवाज का आकर्षण ही कुछ ऐसा है कि लोग यहां खिंचे चले आते हैं। यहां का मुख्य पर्व उर्स है। ये इस्लाम कैलेंडर के रजब माह की पहली से छठवीं तारीख तक मनाया जाता है। उर्स की शुरुआत बाबा की मजार पर हिन्दू परिवार द्वारा चादर चढ़ाने के बाद ही होती है।
इस्लाम के साथ सूफी मत की शुरुआत
हमारे देश में जब इस्लाम धर्म को मानने वाले आए उन्हीं के साथ सूफी मत को मानने वाले भी आए। इसी के साथ दोनों की शुरुआत भारत मैं हुई। सूफी संत एक ईश्वरवाद पर विश्वास रखते थे। इन्हीं में से एक थे हजरत ख्वाजा मोईनुद्‍दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह। बताया जाता है कि ख्वाजा साहब का जन्म ईरान में हुआ था। फिर ख्वाजा हिन्दुस्तान आ गए। एक बार बादशाह अकबर ने इनकी दरगाह पर पुत्र प्राप्ति के लिए मन्नत मांगी थी। ख्वाजा साहब की दुआ से बादशाह अकबर को बेटा हुआ। ख्वाजाजी का शुक्रिया अदा करने अकबर बादशाह ने आमेर से अजमेर शरीफ तक पैदल आकर शीश नवाया था।

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वास्तुकला की बेजोड़ मिसाल
तारागढ़ पहाड़ी की तलहटी में स्थित दरगाह शरीफ को वास्तुकला की बेजोड़ मिसाल कही जा सकती है। यहां ईरानी और हिन्दुस्तानी वास्तुकला दोनों ही देखने को मिलती है। दरगाह के प्रवेश द्वार कुछ भाग अकबर ने तो कुछ जहांगीर ने पूरा करवाया था। माना जाता है कि दरगाह को पक्का करवाने का काम माण्डू के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने करवाया था। दरगाह के अंदर नक्काशीदार चांदी का कटघरा है। इस कटघरे के अंदर ख्वाजा साहब की मजार है। यह कटघरा जयपुर के महाराजा राजा जयसिंह ने बनवाया था। दरगाह में एक खूबसूरत महफिल खाना भी है, जहां कव्वालियां होती हैं।
मन्नत मांगने के लिए बांधते हैं धागा
यहां ऐसी मान्यता है कि धागा बांधने से यहां सच्चे मन से मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर खोलने का नहीं। उर्स इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रजब माह में पहली से छठी तारीख तक मनाया जाता है। छठी तारीख को ख्वाजा साहब की पुण्यतिथि मनाई जाती है। उर्स के दिनों में महफिलखाने में देश भर से आए कव्वाल अपनी कव्वालियां गाते हैं। मान्यता है कि यदि जायरीन यहां आने से पहले हजरत निज़ामुद्दीन औलिया, दिल्ली के दरबार में हाजरी लगाता है तो उसकी मुराद यहां सौ फीसदी पूरी होती है। उर्स के मौके पर लाखों की संख्या में लोग चादर चढ़ाने अजमेर आते हैं।

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महक उठता है पूरा बाजार
उर्स के समय बाजारों की सजावट देखने लायक होती है। दरगाह और उसके आसपास फूल, इत्र और अगरबत्ती आदि की सुगंध महक उठती है। वास्तव में दरगाह शरीफ एक ऐसी पाक जगह है, जहां मनुष्य को खुद को जानने और समझने की शक्ति मिलती है तथा कुछ समय के लिए वह अपने सारे दुखों को भूल जाता है। मोईनुद्दीन चिश्ती ने कभी भी अपने उपदेश किसी किताब में नहीं लिखे न ही उनके किसी शिष्य ने उन शिक्षाओं को संकलित किया। चिश्ती ने हमेशा राजशाही, लोभ, मोह का विरोध किया। उन्होंने सभी को मानव सेवा का पाठ पढाया। अकबर के शासन के समय अजमेर में चिश्ती की स्थापना हुई व ख्याति फैली।

राष्ट्रपति ओबामा की ओर से गरीब नवाज़ को चादर पेश

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राजस्थान के अजमेर में विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 803वें सालाना उर्स में पहली बार अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से सोमवार को चादर पेश की गई।
ओबामा की ओर से खादिम सलमान चिश्ती ने मजार पर मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश किए। इस अवसर पर अमरीका के हावर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टीफन मार्क और कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे।
इस अवसर पर प्रो स्टीफन ने मीडिया से कहा कि ओबामा की ओर से मजार पर चादर पेश कर उन्हें बड़ी खुशी महसूस हुई है। दरगाह के उर्स में आने का उन्हें सौभाग्य मिला है और इससे पूरे दल को प्रसन्नता हुई है।
ख्वाजा साहब की मजार पर भारत सहित अन्य कई मुल्कों की ओर से चादर पेश की जाती रही हैं, लेकिन पहली बार अमरीकी राष्ट्रपति की ओर से उर्स में चादर पेश करने से यह माना जा रहा है कि वह भी ख्वाजा साहब के मुरीद हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि अमरीकी प्रशासन ने भारत के जिन तीन शहरों को स्मार्ट सिटी में चयनित किया है उनमें अजमेर भी शामिल है और अमरिकी प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके तहत कई दौरे भी किए हैं।

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शुरू हुआ ख्वाजा गरीब नवाज़ का 803वां उर्स

khwja-s-803rd-urs-started-553529ba3b94a_lअजमेर माहे रजब के चांद की घोषणा के साथ ही ख्वाजा साहब के 803वें उर्स का आगाज हो गया। गरीब नवाज की दरगाह में सोमवार शाम झांझ व शादियाने बजाए गए, बड़े पीर की पहाड़ी से पांच तोपों की सलामी देकर चांद की घोषणा की गई। लोगों ने एक-दूसरे को गले लग कर उर्स की मुबारकबाद दी। महफिलखाने में आज रात 11 बजे से उर्स की पहली महफिल सजेगी और मजार शरीफ पर पहले गुस्ल की रस्म अदा की जाएगी। मंगलवार को उर्स की पहली तारीख है। उर्स कुल की रस्म के साथ 26 अप्रेल को सम्पन्न होगा।
जायरीन की आवक तेज
उर्स शुरू होने के साथ ही देश-विदेश से जायरीन की आवक तेज हो गई है। इसके चलते दरगाह क्षेत्र और दरगाह परिसर में उर्स की रौनक बनी हुई है। दरगाह परिसर सहित आस-पास स्थित गंज, देहलीगेट, धानमंडी, दरगाह बाजार, नला बाजार, लंगरखाना गली, फूल गली, अंदरकोट आदि क्षेत्रों में भीड़ नजर आने लगी है। लोग चादर सिर पर फैलाए और गरीब नवाज की शान में नारे लगाते हुए जत्थे के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।
दरगाह परिसर में अहाता-ए-नूर, पायंती दरवाजा, जन्नती दरवाजा, महफिलखाना आदि स्थानों पर लोग दुआओं में डूबे नजर आए। दरगाह परिसर में चारों तरफ गूंजती कव्वालियां और शहनाई की धुन उन्हेंं बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित कर रही है। जन्नती दरवाजे से गुजर कर जियारत करने वालों की भी दिनभर होड़ मची रही। हालांकि धूप तेज होने के कारण फिलहाल उम्मीद के मुताबिक जायरीन नहीं पहुंचे हैं। कायड़ विश्राम स्थली पर सोमवार शाम तक 51 बसें जायरीन की पहुंची।

हिन्दुस्तान जिंक के चौथी तिमाही एवं वार्षिक वित्तीय परिणामों की घोषणा

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वर्ष के दौरान 887,000 टन रिकॉर्ड खनित धातु उत्पादन

HZL SK Mine
उदयपुर । हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने 31 मार्च, 2015 को समाप्त वित्तीय वर्ष तथा इसी वर्ष की चौथी तिमाही के परिणामों की घोषणा की।
कंपनी की प्रमुख उपलब्धियां:-
वर्ष के दौरान 887,000 टन रिकॉर्ड खनित धातु उत्पादन ।
कंपनी के निदेशक मण्डल ने १२५% लाभांश की सिफारिष की है जो वित्तीय वर्ष में कुल २२०% है।
‘‘हिन्दुस्तान जिंक के चेयरमैन श्री अग्निवेष अग्रवाल जी ने बताया कि हम स्वर्ण जयन्ती वर्ष के दौरान, कंपनी के बेहतर निष्पादन के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले वर्षों में जिंक की कीमते बढ़ने की संभावना है जो खनित उत्पादन के साथ अनुकूल जस्ता बाजार की गतिषीलता को बनाये रखेगा। वर्ष के दौरान नया एमएमडीआर अधिनियम 2015 लागू हुआ जिससे खनित धातुओं के वितरण में पारदर्षिता आएगी।’’

कंपनी का वित्तीय वर्ष 2015 में रिकार्ड खनित धातु उत्पादन 887,000 टन रहा जो वर्ष के दौरान उत्कृष्ट निष्पादन कंपनी की खदान परियोजनाओं के सफलतापूर्वक संचालन से हुआ है।

कंपनी का वित्तीय वर्ष 2015 की चौथी तिमाही के दौरान खनित धातु का उत्पादन 269,000 टन रहा जो पिछली तिमाही में 242,000 टन था।

वर्ष 2014-15 के दौरान एकीकृत जस्ता, सीसा तथा चांदी का उत्पादन क्रमषः ३% ५% तथा ११% कम रहा है। पहली छःमाही के दौरान खनित धातु के उत्पादन तथा सिन्देसर खुर्द खदान में सिल्वर की मात्रा में कमी के परिणास्वरूप उत्पादन कम हुआ है।

कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान 14,589 करोड़ रु. का राजस्व अर्जित किया जो गतवर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में ८% अधिक है परन्तु चौथी तिमाही में गतवर्ष की तुलना में राजस्व 13 अधिक रहा है (4073 करोड़ रुपये)।

कंपनी ने वित्तीय वर्ष में (विभिन्न करों से पहले) 7,420 करोड़ रु. का लाभ अर्जित किया है जो गतवर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में ७% की वृद्धि दर्शाता है। परन्तु चौथी तिमाही में उत्पादन लागत में कमी होन के परिणामरूप (विभिन्न करों से पहले) 1,978 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है जो गतवर्ष की तुलना में १४% की वृद्धि दर्षाता है।

कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2015 की चौथी तिमाही के दौरान 1,997 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। कंपनी ने वर्ष 2015 के दौरान 8,178 करोड़ रु. का शुद्ध लाभ अर्जित किया है जो गतवर्ष की तुलना में १८% अधिक है।

कम्पनी के निदेशक मण्डल ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए १२५% लाभांश घोषित किया है जो 2 रूपये के प्रति इक्विटी शेयर पर 2.50 पैसे होगा। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2015 में कुल लाभांष २२०% हो गया है जो 4.40 पैसे प्रति शेयर है तथा कंपनी के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक लाभांष है ।

कंपनी की सिन्देसर खुर्द का शाफ्ट सिंकिंग परियोजना का कार्य मेन शाफ्ट सिंकिंग के साथ लगभग पूर्ण हो गया है। विस्तारपरक आधारभूत परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर है तथा उत्पादन निर्धारित समय 2018 के मध्य में प्रारंभ हो जाएगा।

कंपनी की रामपुरा-आगुचा भूमिगत खदान में शाफ्ट परियोजना से 650 मीटर गहराई से 950 मीटर गहराई तक पहुंचाने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है तथा कंपनी की ऑपन कास्ट भूमिगत खदान के विस्तार के साथ समग्र उत्पादन योजना सुचारू रूप से चल रही है।

कंपनी के लगातार चल रहे समन्वेषण कार्यकलापों के फलस्वरूप अयस्क भण्डारों एवं संसाधनों में वृद्धि हुई है। 31 मार्च, 2015 को कुल संसाधन एवं आरक्षित अयस्क भण्डार 375.1 मिलियन टन है, जिसमें 35.3 मिलियन टन जस्ता-सीसा धातु एवं 970 मिलियन ओन्स चाँदी विद्यमान है। खदानों की आयु 25 वर्ष है तथा खदानों में लगातार उत्पादन जारी है।

अब विवाह में आठवां वचन भी होगा

(विप्र फाउण्डेशन का राष्ट्रव्यापी बेटी बचाओ अभियान)
परशुराम प्रतिमा का अभिषेक, पूजा व हवन

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उदयपुर। अब विवाह में वर-वधु को विवाह में सात वचन के साथ बेटी बचाने के आठवे वचन का संकल्प भी कराया जायेगा। उक्त शपथ सोमवार को श्रीमद् वल्लभाचार्य पार्क में भगवान श्रभ् परशुराम सर्व ब्रह्म समाज समिति व विप्र फाउण्डेशन द्वारा भगवान श्री परशुराम जयन्ती आयोजन के तहत् पूजा व हवन की पूर्णाहूति के साथ ली गई।
विप्र फाउण्डेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धर्मनारायण जोशी, प्रदेश उपाध्यक्ष संभाग प्रभारी के.के. शर्मा ने बताया कि विप्र फाउण्डेशन की गत दिनों रायपुर (छत्तीसगढ़) में हुई राष्ट्रीय बैठक में बेटी बचाओ के तहत् ‘‘आठवा वचन’’ को राष्ट्रीय अभियान बनाने का निर्णय लिया।
सोमवार प्रातः भगवान की परशुराम की प्रतिमा की पूजार्चना, आरती व हवन किया गया। मुख्य यजमान मोड चतुर्वेदी समाज के अध्यक्ष श्यामसुन्दर मोड़ थे।
इस अवसर पर कोषाध्यक्ष भंवरलाल शर्मा, चाणक्य परिवार के नटवरलाल शर्मा, जिलाध्यक्ष हिम्मतलाल नागदा, महासचिव लक्ष्मीकांत जोशी, सत्यनारायण पालीवाल, गोविन्द पालीवाल, डॉ. अंशुमाली जोशी, हरीश शर्मा, चन्द्रशेखर पर साई, अशोक चौबीसा, मोतीलाल शर्मा, शैलेन्द्र व्यास, खूबशंकर पालीवाल, विजय प्रकाश विप्लवी, महिला शाखा की चन्द्रकांता मेनारिया, संगीता व्यास, वर्षा पुरोहित, चित्रा मेनारिया, उपस्थित थे।