वाह रे वीर जवानों, हज़ारों शहीदों को भूल गए – बाज़ारू होगये अब हम भी।

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उदयपुर। मेरा बेटा मिनहाज खान 12th में पढ़ता है, सुबह से वह बड़ा उलझन में था, आर्ट्स का विद्यार्थी है, हिस्ट्री में उसकी ख़ास रूचि भी है। सुबह से में उसको देख रहा था दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, टाइम्स ऑफ़ इंडिया न्यूज़ पेपरों को उसने बीसियों बार पलट पलट कर देखा। दिन भर सभी न्यूज़ चैनल बदल बदल कर देखता रहा। शाम को चहरे पर कन्फूजन के भाव लिए मेरे से सवाल किया ,… पापा आज 13 अप्रेल है, आज के दिन ही जालियां वाला बाग़ ह्त्या काण्ड हुआ था, और यहीं से हिन्दुस्तान में आज़ादी की चिंगारी ने एक ज्वाला का रूप लिया था। इस ह्त्या काण्ड में हज़ारों लोग शहीद हुए थे। …. फिर भी आज ना तो किसी अखबार में ना ही किसी न्यूज़ चैनल पे कोई इस बारे में न्यूज़ आई ना ही किसी ने उन शहीदों को याद किया। और तो और शोशल मीडिया पर भी कोई हलचल नहीं जब कि वहां पे तो बड़े बड़े ज्ञानी बुद्धिजीवी और बड़े बड़े देश भक्त बैठे है उन्होंने भी कोई ऐसी पोस्ट नहीं की।

उसकी इस बात का कुछ जवाब दे पाता उससे पहले उसने धड़ाधड़ तीन चार और दहकते हुआ सवाल दाग दिए,..

तो क्या मेने जो किताबों पढ़ा वो सिर्फ ऐसे ही कहानी बनाने के लिए कोर्स पूरा करने के लिए ही लिखा था क्या ?

जालियां वालां बाग़ का हम हिन्दुस्तानियों की आज़ादी से कोई लेना देना नहीं है क्या ?

जब इसका महत्त्व ही नहीं तो क्यों इसको इतिहास में इतना बढ़ा चढ़ा कर बता रखा है ?

क्या आज़ादी हमको ऐसे ही मुफ्त में मिल गयी ?

बात उस 16 साला युवा की सही है, जिसके बाद में भी सोचा में पढ़ गया, ये सवाल सिर्फ उसी के नहीं देश के हर उस युवा के होंगे जिसने अपने कोर्स में जलियाँ वाला बाग़ पढ़ा होगा उसने इतनी बात इसलिए भी की क्यों की वो एक आर्ट्स का छात्र है, और उसने जलियाँ वाला बाग़ ह्त्या काण्ड को पढ़ रखा है, लेकिन, जिन्होंने नहीं पढ़ा उनका क्या, उनको तो ये बताने वाले “हम” भी तो सो गए है, कि उनको ये बताएं कि देखो ये आज़ादी मुफ्त में नहीं मिली है, हज़ारों शहीदों का खून बहा है, अब तो ये याद दिलाने वाले भी इतने बाज़ारू हो गए है जिनके लिए कॉन्डम, जापानी तेल, और ना जाने कैसे कैसे वाहियात विज्ञापन ज्यादा जरूरी है, बजाय इसके कि ये बताएं की आज कोनसा और कितना बढ़ा दिन है।
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( उदयपुर के दैनिक अखबार मददगार ने जरूर लीड पर एक बड़ा सा फोटो लगा कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी उसके लिए मददगार का आभार )

 

 

 

बात ये इतनी छोटी नहीं है ,……. बात ये है कि आज ९६ साल के बाद हम अपनी जमीं अपना वतन खुद को भूले जा रहे है, आने वाली पीढ़ी को देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं है ,। क्यों कि हमे कुछ याद ही नहीं तो क्या आने वाली पीढ़ी को बतायेगें । हम भारतीय बड़े बड़े देश भक्ति की बाते करने वाले, शोशल साइट फेसबुक और वॉट्सएप्प पर गालियां दे कर अपनी देशभक्ति जताने वाले महान देश भक्त उन हज़ारों लोगों की कुर्बानी को भुला बैठे है।

बात सिर्फ फेसबुक, वॉट्सएप्प की ही नहीं है । इस घटना को तो दुनिया का विकसित माना जाने वाला मिडिया तक भुला चुका है। सनी लीओन या किसी पोर्न स्टार तक की ज़रा सी हरकत पर आधा आधा घंटा प्राइम टाइम में खबरे चलाने वाला, बाज़ारू नेताओं की बेबुनियाद बातों पर घंटों तक बकवास करने वाला इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी पुरे दिन किसी चैनल पर एक मिनट के लिए जालियां वालां बाग़ पर कोई प्रोग्राम नहीं चलाया ।

यहाँ में नेताओं और संगठनों की बात तो क्या करू क्यों कि जलियाँ वाला बाग़ को जब हम लोग ही भुला चुके है तो ये तो मौका परस्त लोग है ये फिर क्यों याद करेंगे इसमे इनका कोई लाभ नहीं है। बात तो यहां आज सिर्फ आपकी और छाती ठोकने वाले हम मिडिया की है ।
इस शहादत पर कैसे और क्यों हमको मिडिया और देश भक्ति का बिगुल बजा कर माहोल गरमाने वालों को शर्म आने लग गई। जहाँ तक मुझे याद है मेने पढ़ा है, तो इस शहादत की चिंगारी ही ब्रिटिश शाशन को भारी पड़ी और इस चिंगारी ने ही ऐसा रूप लिया था जिसकी वजह से आज हम खुद को आज़ाद समझते है। लेकिन हमे इसके लिए ना तो समय है ना ही हमे पता है । कल ऐसा भी दिन आएगा जब देश का युवा ये कहेगा ,… कोण था जलियाँ वाला बाग़ क्या हुआ था ,…. क्या कोई रेव पार्टी हुई थी या,… फिर किसी फिल्म की शूटिंग थी या कोई और मजेदार बात हुई थी ,…। बिलकुल ऐसा ही होगा ,…. धन्यवाद आपका भी और हमारा भी ।

जाते जाते बता दू जलियाँ वाला बाग़ क्या था :
भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में १३ अप्रैल १९१९ (बैसाखी के दिन) हुआ था। रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें १००० से अधिक व्यक्ति मरे और २००० से अधिक घायल हुए ।यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी। ……।

भारतीय रेलवे के निजीकरण का ख़ाका तैयार ?

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भारत रेल कंपनियों का स्वर्ग है.
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भारतीय रेल नेटवर्क के पास 9,000 इंजन हैं जिनमें 43 अभी भी भाप से चलने वाले हैं. इंजनों का यह विशाल बेड़ा क़रीब पांच लाख माल ढोने वाले डिब्बों और 60,000 से अधिक यात्री कोचों को 1 लाख 15 हज़ार किलोमीटर लंबे ट्रैक पर खींचते हैं.
रेलवे 12,000 से अधिक ट्रेनों का संचालन करता है, जिसमें 2 करोड़ 30 लाख यात्री रोज़ यात्रा करते हैं.

एक ‘ऑस्ट्रेलिया’ को रोज़ ढोती है भारतीय रेल
यह विशाल सरकारी कंपनी ‘राज्य के अंदर एक राज्य जैसा’ है. रेलवे के अपने स्कूल, अस्पताल और पुलिस बल है. इसमें कुल 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं और इस लिहाज से यह दुनिया की सातवां सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाली कंपनी है.
लेकिन इतना बड़ा उपक्रम ज़ल्द ही टूट सकता है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल जब अपना कार्यकाल संभाला तभी से वो कड़े सुधारों की कमी के लिए झिड़की देते रहे हैं.
पिछले सप्ताह भारतीय रेलवे के पुनर्गठन को लेकर एक विवादास्पद प्रस्ताव आया. लेकिन काफ़ी चर्चा पैदा करने की संभावना होने के बावजूद इसने बहुत कम ही हलचल पैदा की.
यह प्रस्ताव एक ऐसी कमिटी की ओर से आया है जो भारतीय रेलवे में सुधार के लिए विकल्प तलाश रही है. इसमें रेलवे के निजीकरण के ब्रितानी नुस्खे पर ज़्यादा भरोसा किया गया है.
कमिटी की अंतरिम रिपोर्ट बिल्कुल साफ़ है: रेलवे को ‘प्रतियोगिता की एक ख़ुराक’ दिए जाने की ज़रूरत है.
इसमें कहा गया है कि रेलवे नेटवर्क को निज़ी कंपनियों के लिए खोल देना चाहिए ताकि ये कंपनियां यात्री और माल ढुलाई जैसी सेवाओं में राज्य के साथ मुक़ाबला कर सकें.

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ब्रिटेन की राह पर
कमिटी की सिफ़िरिशों में तर्क दिया गया है कि ब्रिटेन की तरह ट्रेन संचालन के काम को पटरियों से अलग कर देना चाहिए.
ब्रिटेन की तरह, पूरी प्रक्रिया को ऐसे एक स्वतंत्र नियामक की निगरानी पर छोड़ देना चाहिए, जिसकी ज़िम्मेदारी यह तय करना हो कि नए निजी ऑपरेटरों को समान रूप से रेल पटरियों को इस्तेमाल करने का मौका मिले.
कमिटी ने रेलवे से जुड़े उद्योगों में भी निजी हिस्सेदारी की सिफ़ारिश की है. निजी कंपनियां पहले ही रेलवे के लिए बोगियां बनाती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें यात्री डिब्बों और इंजन बनाने की भी इजाज़त देनी चाहिए.
कमिटी के सदस्यों को डर है कि प्रतियोगिता में भारतीय रेलवे का निर्माण विभाग पिछड़ जाएगा इसलिए उन्होंने इनकी जगह एक नई और स्वतंत्र कंपनी बनाने का सुझाव दिया है.
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यह सब सार्वजनिक मालिकाने के तहत ही रहेगा, लेकिन सरकार की निररानी में होगा. इसे तनख़्वाह तय करने और कर्ज़ लेने की आज़ादी होगी.
इस दरम्यान, पूरे नेटवर्क का प्रबधंन और लेखातंत्र को पूरी तरह पुनर्गठित करने की ज़रूरत है.
कमिटी के चीफ़ अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का कहना है कि कोई प्रकल्प फ़ायदे में रहेगी या नुक़सान में यह तय करना असंभव है.

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मोदी वादा तोड़ेंगे?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रेलवे को अपने असंख्य अस्पताल, स्कूल, पुलिस बल और अन्य अतिरिक्त गतिविधियों से हाथ खींच लेना चाहिए.
भारत की सबसे बड़ी रेलवे यूनियन नें इस रिपोर्ट की आलोचना की है और दावा किया है कि यह रेलवे के निजीकरण की कोशिश है.
हालांकि नरेंद्र मोदी इस बात से साफ़ इनकार किया था.
मोदी ने वाराणसी में रेलवे के एक कार्यक्रम में ट्रेड यूनियनों को भरोसा दिलाया था, “हम रेलवे का निजीकरण नहीं करने जा रहे हैं. ऐसा करने की ना तो हमारी इच्छा है और ना ही हम इस ओर सोच रहे हैं.”
हालांकि यूनियनों से किए गए अपने वादे को बिना तोड़े मोदी कमिटी की सभी सिफ़ारिशों को स्वीकार कर सकते हैं.
निजी कंपनियों की चांदी?
कमिटी के सदस्य और प्रॉक्टर एंड गैंबल (इंडिया) इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे गुरुचरन दास कहते हैं, “निजीकरण और प्रतियोगिता में अंतर होता
वे तर्क देते हैं, “हम रेलवे को बेचना नहीं चाहते. हम इस क्षेत्र में प्रतियोगिता लाना चाहते हैं. ऐसा होने से अधिक विकल्प होंगे, क़ीमतें कम होंगी और स्टैंडर्ड ऊंचा होगा.”
लेकिन निजीकरण को लेकर यूनियनों की बेचैनी को आप बेजा क़रार नहीं दे सकते. हो सकता है कि इसे बेचने की अभी कोई मंशा न हो, लेकिन ये सारे नए उद्योग भविष्य में बेचे जाने के लिए तैयार हो चुके होंगे.
इस बात से ट्रेन कंपनियों को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है. नई ट्रेन कंपनियों के लिए यह एक सुनहरा मौका है.

so- BBC – hindi

शराब माफियाओं के सिंडीकेट ने सब कर रखा है “सेट”

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आबकारी और पुलिस विभाग की बंदियां फिक्स, पिछले छह माह में एक भी शराब से भरा ट्रक नहीं पकड़ा ।

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उदयपुर। पिछले छह माह से जिले में शराब तस्करी कर ले जाई जा रही एक भी ट्रक या कोई बड़ी खेप नहीं पकड़ी गर्ई। ऐसी किसी कार्रवाई को न तो पुलिस ने अंजाम दिया है और ना ही आबकारी विभाग ने कोई रूचि दिखाई है। पता चला है कि जिले में शराब तस्कर, पुलिस और आबकारी के बीच एक सिंडीकेट काम कर रहा है, जिसके तहत सबको सेट कर लिया गया है। पिछले छह माह से ऐसा लगा रहा है, जैसे उदयपुर-अहमदाबाद हाइवे से शराब तस्करी बंद हो गई है, लेकिन ऐसा नहीं है तस्करों द्वारा बनाए गए सिंडीकेट ने ऐसा तालमेल बिठाया है कि सबकुछ आराम से चल रहा है। बस अवैध शराब की उन्हीं गाडिय़ों को पकड़ा जा रहा है, जो इस सिंडीकेट में शामिल नहीं है।
महाराष्ट्र, गुजरात जाने का मुख्य हाइवे नंबर आठ उदयपुर से गुजरता है, जिससे सर्वाधिक शराब की तस्करी होती है। इसीलिए कुछ समय पहले महीने में पांच से दस ट्रकें शराब की पकड़ी जा रही थी। एसपी दिनेश एमएन के समय में शराब तस्कारों की अधिकतर गाडिय़ां पकड़ी गई। सर्वाधिक कार्रवाई गोवर्धनविलास और प्रतापनगर पुलिस ने की, लेकिन पिछले छह माह से एक भी तस्करी की गाड़ी को पुलिस या आबकारी विभाग के अधिकारियों ने नहीं पकड़ा।
आबकारी और पुलिस के अधिकारी अधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन जब शराब तस्करी को लेकर सवाल किया जाता है, तो उनका सिर्फ एक ही जवाब होता है कि तस्करों ने रूट बदल दिय है। इन दिनों सिरोही, पिंडवाड़ा सहित अन्य मार्गों से हरियाणा निर्मित शराब गुजरात पहुंचाई जा रही है। जब कि शराब से जुड़े ही कुछ व्यवसाइयों का कहना है कि शराब माफियाओं का बनाया हुआ सिंडिकेट अब इतना मजबूत हो गया है कि इसके तहत तस्करी होने वाली शराब को कोई नहीं पकड़ता और अगर कोई नया तस्कर इससे अलग हट कर सीधा मुनाफ़ा कमाने के लालच में काम शुरू करता है तो उसको आबकारी विभाग या पुलिस द्वारा कहीं न कहीं दबोच लिया जाता है।
क्या है सिंडिकेट : शराब कारोबारियों की अंधी कमाई के बारे में हर कोई जानता है, लेकिन इस कमाई में कुछ दिक्कतें भी आती है, जिसे देखते हुए शराब कारोबारियों ने सफेद पोश बड़े कारोबारियों के साथ मिलकर सिंडीकेट बना लिया है। इसमें सभी को हिस्सेदारी के हिसाब से शेयर मिलता है। इसमें शराब के कारोबारी धंधे को संभालते है और सिंडीकेट के सफेदपोश पुलिस, प्रशासन और राजनीति से जुड़े लोगों को अपने साथ मिलाने का काम करता है। इस अवैध कारोबार में सबसे ज्यदा दिक्कत वसूली और कमीशन को लेकर होती थी, लेकिन सिंडीकेट के बनने के बाद यह धंधा पुरी ईमानदारी के साथ किया जा रहा है।
मुखबिर भी सेट : शराब तस्करी से जुड़े कई पुराने ट्रक ड्राइवर और खलासियों को पुलिस ने ही अपना मुखबिरा बना लिया था, जो अवैध शराब की गाडिय़ों को उड़वाने में लग गए थे। पहले पुलिस मुखबिरों को ५० से सौ पेटी तक मुखबिरों को दी थी, लेकिन बाद में शराब तस्करों ने मुखबिरों का भी कमिशन बांध दिया। अब मुखबिरों को भी मंथली दी जाती है। मुखबिर भी सिंडीकेट के प्रभाव के आगे किसी के साथ धोखा नहीं करते हैं।

अभियांत्रिकी छात्रों का देश निर्माण में योगदान- टॉम अलबानिस

DSC_3858उदयपुर । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय में हिन्दुस्तान जिंक (वेदान्ता) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टॉम अलबानिस ने अभियांत्रिक छात्रों को देश निर्माण में अपने योगदान देने का आव्हान किया। उन्होनें अपने उद्बोधन में हिन्दुस्तान जिंक का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थियों को अपनी इन्नोवेटिव सोच को प्रधानता देनी चाहिये जिससे वे भविष्य में न केवल अपने लिए अपितु समाज के अन्य व्यक्तियों के लिए भी रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकेगें।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आने वाले 10 वर्षो में प्राकृतिक संसाधनों का चार गुना खपत बढ़ जायेगी अतः उनके खनन के लिए पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए जैव विविधता बनाए रखना आवश्यक होगा। निम्न स्तर के खनिजों का दोहन के लिए आर्थिक रूप से सक्षम तकनीक का विकास आवश्यक होगा । सुरक्षित खनन के लिए विभिन्न संकायों के अभियन्ताओ का योगदान महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर श्री अखिलेष जोषी, हिन्दुस्तान के जिंक मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि सीटीएई के सभी आठ ब्रान्चों के तृतीय वर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को 50 हजार की स्कॉलरषिप प्रदान की जायेगी।

उन्होनें कहा कि सीटीएई के उच्च शैक्षणिक स्तर को देखते हुए प्लेसमेंट में खनन अभियांत्रिकी के साथ ही बाकी सभी ब्रान्चों के लिए भी सीटीएई के विद्यार्थियों को वरीयता प्रदान की जायेगी।

कार्यक्रम के आरम्भ में वेदान्ता द्वारा निर्मीत एक डॉक्यूमेन्ट्री फिल्म का भी प्रर्दषन किया गया। छात्रों द्वारा पुछे गये विभिन्न रोजगार संबंधी प्रष्नों का श्री टॉम अलबानिस ने उचित जबाव देकर विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान किया व सन्तुष्ट किया। कार्यक्रम की शुरूआत में महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ0 बी.पी. नन्दवाना ने महाविद्यालय की विभिन्न गतिविधिओं की जानकारी देते हुए कहा कि गत वर्ष इस महाविद्यालय द्वारा अपनी स्थापना की स्वर्ण जयन्ती मनाई गयी है। उन्होनें यह भी जानकारी दी कि महाविद्यालय को एन.आई.टी.टी.टी.आर द्वारा सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय का खिताब भी प्रदान किया गया है। इस महाविद्यालय के छात्रों ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय संगठनों में उल्लेखनीय कार्य करके देष का नाम रोषन किया है। कार्यक्रम के अंत में सीटीएई प्रषासनिक अधिकारी डॉ0 दीपक शर्मा ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।

टोम अल्बनीज ने जावर में किया HZL की प्रदर्शनी का उद्घाटन

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उदयपुर । उदयपुर के 40 कि.मी. दक्षिण में स्थित जावर की पहाड़ियों में आज से 2500 वर्ष पूर्व जस्ता एवं सीसा धातु का खनन एवं प्रद्रावण किया जाता था। पूरे क्षेत्र में फैले हुए प्राचीन खनन एवं प्रद्रावण अवशेष इस तथ्य के मूक प्रमाण है। आम जन में इसकी महत्ता प्रसारित करने के उद्देश्य से हिन्दुस्तान जिंक ने पहल करते हुये प्राचीन रामानाथ मन्दिर के पूर्व में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन आज 10 अप्रेल 2015 को वेदान्ता रिसोर्सेस पी.एल.सी. के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी टोम अल्बनीज द्वारा किया गया। समारोह में हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अखिलेश जोशी एवं उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल उपस्थित थे।
संग्राहलय में प्राचीन खनन एवं प्रद्रावण पद्धति का चित्रों द्वारा प्रदर्शन किया गया। अवलोकन के पश्चात श्री अलबनीज ने इस क्षेत्र को संग्राहलय के रूप विकसित करने की आवश्यकता जताई जिससे आम जन विशेषकर विद्यार्थियों को हमारी विरासत से अवगत कराया जा सके।

दिवार ढहने से तीन बच्चों की मौत

AmcgksJ9GD860UZY6e0Vo3wPbMki21SQJM2xkhse8PKPउदयपुर शहर में आज बेमौसम बरसी बारिश दो परिवारो पर काल का ग्रास बनकर टूटी । शहर के अम्बेरी इलाके के दौ सौ फीट रोड पर बनी वाटिका की कच्ची दिवार ढहने के बडा हादसा हो गया। इस हादसे में दो परिवारो के तीन बच्चो की मौत हो गयी, एक बच्चा गम्भीर रूप से घायल हो गया । घायल बच्चे का शहर के एम बी चिकित्सालय में इलाज जारी है। घटना की सुचना मिलते ही गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया,जिला कलेक्टर आशुतोष,एसपी अजयपाल लाम्बा सहित प्रशासन के कई अधिकारी मोर्चरी पहुंचे । इस हृदयविदारक घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए कटारिया ने सरकार के आपदा प्रबंधन राहत कोष से मृतकों के परिवार को तीन तीन लाख रूपये देने की घोषणा की।
दरअसल आज दोपहर में शहर ओर आस पास इलाकों में तेज बारिश के साथ तेज हवा चलने लगी । सुहाने मौसम का मजा लेते गमेती परिवार के बच्चे खेलते खेलते वाटिका की दिवार के पास जा पहुंचे कुछ ही समय बाद तेज हवा से कच्ची दिवार ढह गयी ओर यह हादसा घटित हो गया। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद सुखेर थाना पुलिस ने मौके पर पंहुच कर ढही दिवार के नीचे से चारों बच्चों को निकालकर एम बी चिकित्सालय में पंहुचाया ! इलाज के दौरान एमबी चिकित्सालय के डाक्टर्स ने तीन बच्चों को मृत घोषित कर दिया। इस दौरान गृहमंत्री कटारिया सीधे घायल बच्ची से मिलने वार्ड में पहुचे जंहा पर कटारिया ने बच्ची की कुशलक्षेम पूछी। कटारिया ने घायल बच्ची के परिजनो को सरकार की और से से होने वाली हर तरह की मदद का आश्वासन दिया। इस दौरान कटारिया ने कहा कि सरकार की ओर से आपदा प्रबंधन राहत कोष से दी जाने वाली राशि इनको तुरंत दी जाएगी वही सुखेर थाना पुलिस ने अब मामला दर्ज ।

बलीचा में २०० फिट रोड के लिए यूआईटी ने कार्रवाई

AsjL3ktuQCN4G2r9vP6umjjf3Dh-kOsO667sPZV_Qv0L - Copyउदयपुर । मास्टर प्लान के तहत आज यूआईटी ने बिना नोटिस और पूर्व सूचना के पुरे झखीरे लवाजमे के साथ कार्रवाई करते हुए बलीचा नेशनल हाइवे से सलूम्बर नेशनल हाइवे के बीच २०० फिट रोड के कब्जे हटा कर लेवल करने का काम शुरू किया। कार्रवाई के दौरान पुलिस जाब्ते सहीत मशीनरी का पूरा लवाजमा मौजूद रहा। इतने बड़े लवाजमे को देख कोई विरोध भी नहीं करपाया और चुपचाप कार्रवाई होते हुए देख रहे है।
जानकारी के अनुसार आज सुबह सात बजे यूआईटी अधिकारी पुरे जाब्ते लवाजमे के साथ बलीचा पहुंच गए और बलीचा पेट्रोल पंप के पास से नेशनल हाइवे ८ से स्टेट हाइवे ३२ को जोड़ने वाली २०० फिट रोड को समतल बनाने का कार्य शुरू किया। इस रोड के बीच आने वाले तेजराम गमेती रामा गुर्जर व् प्रभुलाल गुर्जर आदि लोगों के कब्जों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान जिन लोगों की जमीन आवप्त की जारही थी और जिनके कब्जे हटाये गए उन्होंने विरोध करते हुए यु आईटी की कार्रवाई को गलत बताया। रामा गुर्जर और प्रभुलाल गुर्जर का कहना है कि कार्रवाई की कोई पूर्व सूचना नहीं मिली जा ही हमे कोई नोटिस दिया गया। आदिवासी नेता मेघराज तावड़ ने इसका विरोध जताते हुए कहा की बिना कोई पूर्व सूचना के इस तरह हमला करने वाली नीति से यूआईटी ने कार्रवाई की है। यूआईटी के भारी लवाजमे को देख कर जिन लोगों की जमीनों से कच्चे निर्माण तोड़े जा रहे है वे अधिक विरोध भी नहीं कर पारहे है। बलीचा के सरपंच चेन राम गमेती ने मोके पर यूआईटी सेक्रेटरी को आपत्ति जताई। यूआईटी सेक्रेटरी ने कहा कि जिन लोगों की जमीन इस रोड के लिए आवप्त की जारही है, उनको यूआईटी विकसित कॉलोनी में प्लाट आवंटित किये जायेगें।
पुरे जाब्ते के साथ कार्रवाई :
२०० फिट रोड के लिए रास्ता बनाने के लिए आज यूआईटी सेक्रेटरी रामनिवास मेहता, भूमि अवाप्ति अधिकारी कीर्ति राठोड, तहसीलदार बाबुराम सहित पटवारी और कर्मचारी मौजूद थे इसके आलावा आठ जेसीबी और दो पोरलेण्ड कार्रवाई के लिए लगाईं गयी थी, पुलिस अधिकारियों सहित जाब्ता भी पूरी तरह मौजूद था। रोड पूरी तरह बन जाने तक काम लगातार चलेगा।
दक्षिण विस्तार योजना के तहत कार्रवाई :
यूआईटी सेक्रेटरी रामनिवास मेहता ने बताया की यह कार्रवाई दक्षिण विस्तार योजना के तहत की जा रही है । जिसमे नेशनल हाइवे ८ से सलूम्बर स्टेट हाइवे ३२ तक ५ किलोमीटर २०० फिट रोड बनाई जायेगी। मेहता ने बताया की इस योजना में छह हज़ार भूखंड काटने की यूआईटी की योजना है, जिसके अंतर्गत करीब ३५००० लोगों को आवासीय सुविधा का लाभ मिल सकेगा। पांच किलोमीटर २०० फिट रोड का आधा काम होगया है, बलीचा वाले हिस्से का काम आज से शुरू होगया है।

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इनका कहना ……….
बिना नोटिस के कार्रवाई की गयी है । जिनकी जमीन थी उनको युआटी द्वारा नोटिस और पूर्व सूचना देनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया । जिनकी जमीन को आवप्त किया है, उसके लिए यूआईटीई अधिकारियों ने आश्वस्त किया है की यूआईटी विकसित कॉलोनी में भूखंड दिए जायेगे उचित मुआवजा मिलेगा । बलीचा सरपंच चेन राम गमेती ।

यह एक हमला करने वाली नीति के अनुसार बिना सूचना के कार्रवाई की गयी है । जो सरासर गलत है। मेघराज तावड़, आदिवासी नेता

बलीचा नेशनल हाइवे से सलिमबर स्टेट हाइवे के बीच पांच किलोमीटर की २०० फिट की रोड बनाई जारही है । दक्षिण विस्तार योजना के तहत यह काम को अंजाम दिया जारहा है। – कीर्ति राठोड , भूमि अवाप्ति अधिकारी , यूआईओटी

चूहों ने किया शेर का शिकार

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उदयपुर। जहां जंगल में एक शेर अपनी बादशाहत के चलते सदियों से शिकार करता हुआ आरहा है वही बायलॉजिकल पार्क में उद्घाटन के ठीक पहले चूहों ने मिल कर एक शेर का शिकार कर लिया । पिछले कई दिनों से किडनी और लंग्स में इन्फेक्शन से पीड़ित टाइगर मोनू की कल दिन में मौत हो गयी। एक तरफ जहां इन्फेक्शन की वजह पार्क में चूहों का मूत्र बताया जारहा है , वहीं वन अधिकारी इस तथ्य को लीपापोती करने में लगे हुए है और उनका कहना है कि इन्फेक्शन की सही वजह अभी सामने नहीं आई है। मतलब जब वजह ही सामने नहीं है तो पार्क के दूसरे जानवरों पर भी खतरा मंडरा रहा है ।
डॉक्टरों के अनुसार टाइगर मोनू की मौत लेप्टो स्पाइरोसिस नाम इन्फेक्शन से हुई हे। और यह इन्फेक्शन चूहों की वजह से हो सकता है| पार्क में जानवरों के पिंजरों में मौजूद चूहों के मूत्र को टाइगर द्वारा चाट लिया गया होगा जिसकी वजह से टाइगर की किडनी और लंग्स में इन्फेक्शन होगया और यही इन्फेक्शन मौत की वजह बना ।
बड़ी बात यह हे की प्रदेश के इस पहले बायोलॉजिकल पार्क का 12 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के हाथो उद्गाटन होना था लेकिन उससे पहले ही टाइगर मोनू की दहाड़ बायोलॉजिकल पार्क में ही दफ़न हो गयी। 5 मार्च को बेंगलोर से लाये गए इस टाइगर की दहाड़ बायोलॉजिकल पार्क में एक रोमांच पैदा कर रही थी वही उद्गाटन के बाद मोनू पर्यटको के लिए भी आकर्षण का केंद्र होता। मोनू का गंभीर बीमारी से आमना सामना हो गया 10 अप्रैल को उसके फेंफड़ो में इंफेक्शन होने से उसने अपना डैम तोड़ दिया और इसी के मोनू की दहाड़ भी शांत हो गयी। करीब बीस दिन पहले मोनू बीमारी की जकड में आया उसके बाद प्रदेश के कई हिस्सों से चिकित्सको की टीम ने मोनू का इलाज़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हलाकि सभी प्रयास विफल हुए और उद्गाटन से पहले ही मोनू ने बायोलॉजिकल पार्क के अपने अन्य साथियो और केयर टेकर को अंतिम सलाम कर दिया। मोनू की मौत के बाद अब वन विभाग के अधिकारियो ने पोस्ट मार्टम करा मोनू का अंतिम संस्कार कर दिया साथ ही अब मोनू की मौत का असली कारन जान्ने के लिए उसके सेम्पल इंडियन वेटेनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट बरेली भेजे जाएंगे। खेर अब मोनू तो इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन बायोलोजिकल पार्क में फ़ैल रहे ये चूहे पार्क के करीब 50 से ज्यादा प्रजातियों के जानवरो की जान के लिए भी खतरा बन सकते हे।

गृहमंत्री मंत्री की उपेक्षा से फुट फुट कर रो पड़े छात्र

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IMG_0070उदयपुर। आरएनटी के नर्सिंग छात्रों बड़ी उम्मीद लेकर अपनी पीड़ा गृह मंत्री और विधायक गुलाबचंद कटारिया को बताने के लिए टाउनहॉल पहुंचे थे। उम्मीद थी कि अपने नेता है, जो पीड़ा भी सुनेंगे और समाधान भी करेंगे।
लेकिन गृह मंत्री जब कार्यक्रम स्थल से बाहर निकले, तो नर्सिंग छात्रों के प्रतिनिधि मंडल से दो मिनट बात भी नहीं सुनी और निकल गए सभी छात्र-छात्राएं जबर्दस्त निराश हो दहाड़े मार-मार कर रोने लगे। छाती पिटने लगे। इस बीच कुछ लोग भाजपा शहर जिलाध्यक्ष को इन रोते-बिलखते छात्रों के पास ले गए, तो इन छात्रों ने कहा जिसे सुनाना था, उन्होंने ही नहीं सुनी तो अब ये क्या सुनेंगे।
शुक्रवार सुबह गृह मंत्री और नगर विधायक गुलाबचंद कटारिया से मिलने के लिए आरएनटी मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग छात्र बड़ी उम्मीद लेकर रैली के रूप में टाउनहॉल पहुंचे थे, जहां सिटी बसों के संचालन को लेकर कार्यक्रम चल रहा था। रैली आती देखकर पुलिस अधिकारी पहुंचे, जिन्होंंने नर्सिंग छात्रों को नारेबाजी नहीं करने की हिदायत दी और कहा कि अपने नेता है, तुम्हारी बात कार्यक्रम के बाद में सुन लेंगे। छात्रों ने पुलिस की बात मानी और वहीं कडक़ धूप में बैठकर नगर सेवक के बाहर आने का इंतजार किया, जब गृह मंत्री आए, तो छात्रों का प्रतिनिधि मंडल उनके पास पहुंचा, तो गृह मंत्री ने दो मिनट तक उनकी बात सुनने के लिए देने से इनकार कर दिया। और यह कहकर चल दिए कि ज्ञापन दे दो। बाद में देखेंगे। बड़ी उम्मीद लेकर पहुंचे नर्सिंग छात्रों के कानों में जब गृह सेवक के ये शब्द पड़े, तो मातम छा गया। रूलाई फूट पड़ी। छाती पिटते हुए ये छात्र बोले जिनसे उम्मीद थी, उन्होंने ही नाउम्मीद कर दिया। अब किसके पास जाए।
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नर्सिंग ट्रेनिंग की तृतीय वर्ष की परीक्षा में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के ९८ प्रतिशत छात्रों को फेल कर दिया गया। इनमें वे छात्र भी शामिल है, जिनको फस्र्ट ईयर और सैंकड ईयर में ८० से ९० प्रतिशत अंक मिले थे। आरोप है कि राजस्थान नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार जोगेंद्र शर्मा ने कॉपियों की जांच में मनमानी बरती है। विशेष विशेषज्ञों से कॉपियां नहीं जंचवाई गई। इस कारण फस्र्ट ईयर और सैंकड ईयर में ८० से ९० प्रतिशत अंक अर्जित करने वाले छात्रों को भी फेल कर दिया गया। इस संबंध में छात्रों का एक प्रतिनिधि मंडल जयपुर जाकर मुख्य मंत्री वसुंधरा से भी मिला, लेकिन वहां भी उनकी नहीं सुनी गई। इस कारण ये नर्सिंग छात्र रैली के रूप में टाउनहॉल पहुंचे। इनको उम्मीद थी कि नगर विधायक गुलाबचंद कटारिया जो सरकार में गृह मंत्री है, वो तो उनकी पीड़ा सुनेंगे, लेकिन जब श्री कटारिया ने भी उनकी पीड़ा नहीं सुनी, तो नाउम्मीद छात्रों का रूंदन फूट पड़ा। श्री कटारिया टाउनहॉल से वाहन में बैठकर रवाना हो गए और ये छात्र देखते रह गए। इस बीच कुछ लोग भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट को लेकर इन छात्रों के पास पहुंचे। इस दौरान नर्सिंग छात्रों के अध्यक्ष दीपक वैष्णव, उपाध्यक्ष प्रतीभा जोशी, राजाराम व अन्य छात्रों ने कहा कि जिनको सुनाना था, उन्होंने ही नहीं सुनी, तो अब किसको सुनाए।
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उदयपुर सिटी में दौड़ी आठ सिटी बसें

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उदयपुर । नगर निगम द्वारा नगरीय बस सेवा के लिए दो रूटों की आठ बसों का शुभारम्भ शुक्रवार को टाउन हाल से ग्रह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने हरी झंडी बता कर किया। गृह मंत्री ने आठ बसें और शुरू करने की घोषणा भी की।
काफी लम्बे समय से उदघाटन के इंतज़ार में खड़ी नगरीय बस सेवा का शुभारम्भ आज ग्रह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने नगर निगम परिसर से हरी झण्डी बता कर किया। नगरीय बस सेवा के शुभारम्भ में आयोजित समारोह के दौरान गृह मंत्री और शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने कहा की मेरी वजह से सिटी बसें चलने में देरी हुई उसका खामियाजा में चार और बसें दे कर कर रहा हूं। कटारिया ने निगम महापौर को कहा कि शहर में एक कोने से दूसरे कोने तक के लिए हर पांच पांच मिनट में बसें होनी चाहिए उसके लिए बंसों की संख्या बढ़ानी चाहिए, इसी क्रम में चार और बसों का मद में अपनी तरफ से निगम को देता हु चार बसें निगम लगा कर बसों की संख्या १६ कर दे। कटारिया ने स्टूडेंट और सीनियर सिटीजन के लिए पास सिस्टम चालु करने के लिए भी कहा। नगर निगम महापौर चन्द्र सिंह कोठारी ने बताया कि शहर में दो रूटों के लिए आठ बसों का सञ्चालन शुरू किया गया है। यह दो रुट में एक तो शिक्षा भवन चौराहा से चेतक सर्कल, हाथीपोल, देहलीगेट, टाउन हाल रोड, सूरजपोल, उदियापोल से सिटी रेलवे स्टेशन होते हुए पारस तिराहा। एवं दूसरा रुट पंचवटी स्थित आबकारी ऑफिस से बंशी पान, कोर्ट चौराहा, शास्त्री सर्कल, अशोक नगर मेन रोड, बेकनी पुलिया आयड़, यूनिवर्सिटी मेन गेट, बोहरा गणेश जी चौराहा, धूलकोट चौराहा, ठाेकर चौराहा, सेवाश्रम, कुम्हारों का भट्टा से सूरजपोल। रहेगें ।
कोठारी ने कहा कि सिटी बसें सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक चलेंगी और किराया 5 से 20 रुपए तक रहेगा। स्टूडेंट, विकलांग सीनियर सिटीजन को किराए में आधी छूट दी जाएगी। समारोह में उदयपुर सांसद अर्जुन मीणा, भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, देहात जिलाध्यक्ष तखत सिंह शक्तावत, उप महापौर लोकेश द्विवेदी, निर्माण समिति अध्यक्ष पारस सिंघवी, जिला प्रमुख शांतिलाल मेघवाल, उप जिला प्रमुख सुन्दरलाल भाणावत, उदयपुर डेयरी के अध्यक्ष डॉ.गीता पटेल, गिर्वा प्रधान तख्त सिंह शक्तावत, पूर्व सभापति युधिष्ठिर कुमावत, समाजसेवी प्रमोद सामर, दिनेश भट्ट, कुंतीलाल जैन, प्रेमसिंह शक्तावत, श्रीमती किरण जैन, निगम आयुक्त हिम्मत सिंह बारहठ, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी भंवरलाल सहित बड़ी संख्या में पार्षद, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग मौजूद थे।
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