लूटी पतंगें बेचकर खाई गजक और रेवड़ी

0

kiteलूटी हुई पतंगें बेचकर सौ रूपए कमाए हैं… अब रेवड़ी और गजक खाऊंगा… मोनू और लाला को भी खिलाऊंगा… यह बताते हुए
फूला नहीं समा रहा था ज्योति नगर कच्ची बस्ती में रहने वाला आठ साल का राजेश।

मकर संक्रांति पर राजेश की सुबह आम दिनों से काफी जल्दी पांच बजे ही शुरू हो गई थी। राजेश ने बताया कि वह अंधेरे ही एक झाड़ लेकर पतंग लूटने निकल गया।

दिनभर में 80 पतंगें लूटीं और शाम को उन्हें बेच दिया। राजेश की तरह ऎसे कितने ही बच्चे सड़कों पर झाड़ लिए पतंग लूटते फिर रहे थे। लोग छतों पर पेच लड़ा रहे थे तो नीचे ये बच्चे पतंग कटने के इंतजार में थे।

जैसे ही कोई पतंग कटती, सारे बच्चे लूटने के लिए दौड़ पड़ते। बड़ी बात यह थी कि ये बच्चे पतंगें उड़ाने के लिए नहीं लूट रहे थे, बल्कि इसलिए लूट रहे थे उन्हें बेचकर अपनी मनपसंद चीज खा सकें।

एक बच्चे की पैदाइश के दो माह बाद ही दूसरा बच्चा!

0

babyबांसवाड़ा। एक बच्चे की पैदाइश के दो माह बाद ही दूसरा बच्चा! कुदरत ने तो ऎसा कोई करिश्मा नहीं किया, लेकिन दस्तावेज में दो भाइयों की जन्म तिथि के विवरण में ऎसा गड़बड़झाला हो गया है।

अब यह वार्ड पंच का चुनाव लड़ने के इच्छुक उनके पिता के लिए परेशानी का सबब बन गया है। दावेदार को दस्तावेज में सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

मामला गढ़ी पंचायत समिति क्षेत्र का है। वार्ड पंच की दावेदारी कर रहे एक जने ने नामांकन की तैयारी के लिए जब दस्तावेज खंगाले तो बच्चों की जन्मतिथि में गड़बड़ी पकड़ में आई।

जानकारी के अनुसार बडे बेटे के विद्यालय स्थानान्तरण प्रमाण पत्र में जन्म तिथि 25 जून 1996 अंकित है, जबकि इससे एक साल छोटे बेटे के जन्म तिथि प्रमाण पत्र में 23 अगस्त 1996 अंकित की हुई। बताया गया कि नामांकन में संतान की जन्म तिथि का विवरण भी देना होता है, इस आधार पर कि कहीं नामांकन खारिज न हो जाए।

प्रधानमंत्री ने भक्ति शर्मा के विश्व कीर्तिमान बनाने पर दी शुभकामनाएं

bhkti sharmaउदयपुर | बर्फीले तापमान में 1.4 मील की 52 मिनट में तैर कर विष्व चैम्पियन का एक नया कीर्तिमान स्थापित करने वाली उदयपुर की भक्ति शर्मा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्व जताते हुए विश्व कीर्तिमान की शुभकामनाएं दी है |
जलपरी के नाम से ख्याति प्राप्त करने वाली उदयपुर की भक्ति शर्मा द्वारा अंटार्कटिका महासागर में एक डिग्री तापमान में 1.4 मील की दूरी 52 मिनट में पूर्ण करने का कीर्तिमान स्थापित करने पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि “हमें भक्ति शर्मा की इस महान उपलब्धि पर हमे गर्व है, और मै उसकी इस उपलब्धि बहुत शुभकामनाएं देता हु” |
गौरतलब है कि भक्ति शर्मा ने १० जनवरी को अंटार्कटिका महासागर में एक डिग्री तापमान में 1.4 मील की दूरी 52 मिनट में पूर्ण करने वाली सबसे कम उम्र की विष्व में पहली और एशिया की पहली लड़की होने का गौरव हासिल हो गया है। इसी खिताब के साथ भक्ति शर्मा दुनिया के सभी 5 महासागरों की विजेता घोषित हो गयी है। हिन्दुस्तान जिंक ने भक्ति शर्मा को इस विष्व रिकॉर्ड को बनाने के लिए प्रायोजित किया था तथा साथ ही सालभर के लिए अनुबंधित भी किया हैं | भक्ति शर्मा विश्व कीर्तिमान बनाने के बाद २२ जनवरी को उदयपुर लौटेगी |

4  Twitter

नेता, ब्यूरोक्रेट् और सक्षम लोग देशहित में भी नहीं छोड़ रहे गैस सब्सिडी

लेकसिटी में एक भी सक्षम गैस उपभोक्ता नहीं : केबिनेट सेवक, सांसद, विधायक, ब्यूरोक्रेट और धनाढ्यों ने नहीं किया सब्सिडी लौटाने का आवेदन
udaipurpost2
उदयपुर। देश के विकास को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष सक्षम गैस उपभोक्ताओं को सब्सिडी छोडऩे का अनुरोध किया था लेकिन उदयपुर में एक भी सक्षम उपभोक्ता नहीं है। यहां पर किसी ने भी गैस सब्सिडी छोडऩे के लिए आवेदन नहीं किया है, जबकि मेवाड़ के केबिनेट सेवक, राज्य सेवक, विधायक, सांसद, ब्यूरोक्रेट और कई धनाढ्य ऐसे हैं, जो सब्सिडी छोड़कर देश के विकास में सहयोग कर सकते हैं, लेकिन सब्सिडी पर टपकती लार को चाटने के लिए ये लोग सब्सिडाइज्ड सिलेंडर ले रहे हैं। केंद्र सरकार को प्रत्येक सिलेंडर पर सब्सिडी के रूप में 275 रुपए खर्च करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं कई वर्तमान और भूतपूर्व जन सेवक यह राशि प्राप्त कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने पिछले साल एलपीजी सब्सिडी पर 40 हजार करोड़ रुपए खर्च किए थे। इस राशि को बचाने के लिए देशभर में संपन्न राजनेताओं और लोगों से इस सब्सिडी को छोडऩे का आह्वान किया था, लेकिन मेवाड़ में एक भी ऐसा नेता नहीं है, जिसने सब्सिडी छोड़ी हो। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा की गई अपील में यह भी बताया गया है कि संपन्न राजनेता और उद्योगपति अगर इस राशि को छोड़ते हैं, तो वह विकास में काम आएगी, लेकिन सब्सिडी छोडऩे के लिए एक भी आवेदन नहीं आने से अंदाजा लगाया जा रहा है कि यहां के नेताओं को राष्ट्र के विकास में कोई रूचि नहीं है!
किसी ने नहीं छोड़ी सब्सिडी
उदयपुर जिले में ढाई लाख से अधिक गैस के उपभोक्ता है। इन उपभोक्ताओं में राज्य के गृह सेवक, सांसद, विधायक, ब्यूरोक्रेट्स और जाने कितने धनाढ्य लोग शामिल है लेकिन किसी एक ने भी सब्सिडी छोडऩे का आवेदन नहीं किया है। जिले में करीब 16 गैस एजेंसियां है। अधिकतर गैस एजेंसियों पर जब पूछा तो कही से भी इस तरह की बात सामने नहीं आई कि किसी ने देशहित में सब्सिडी छोडऩे का आवेदन किया हो। पता चला है कि यह हाल उदयपुर के ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के हैं। पेट्रोलियम कंपनियों के ट्रांसपेरेंसी पोर्टल के अनुसार पूरे प्रदेश में एक हजार 089 उपभोक्ताओं ने एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी। इन लोगों में अधिकांश आम उपभोक्ता हैं।
यह है पेट्रोलियम मंत्रालय का आह्वान
पिछले दिनों केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सक्षम उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित करने का अभियान छेड़ा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह सभी राज्यों के मुख्य सेवकों से सब्सिडी छोडऩे के आवेदन पर तुरंत हस्ताक्षर कराएं। देश में गत एक साल में नौ हजार उपभोक्ताओं के सब्सिडी छोडऩे से सरकार को साढ़े 13 करोड़ रुपए की बचत हुई है।

मायानगरी में पंचायत चुनाव की नाइट पार्टियां!

0

मतदाताओं को रिझाने के लिए मुंबई-सूरत में हो रहे है जलसे, पार्टियों में शामिल हो रहे हैं जनप्रतिनिधि, लग्जरी वाहनों से लाया जाएगा मतदाताओं को

electionRPJHONL004211220148Z42Z16 AMउदयपुर। चुनाव आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता का कितना भी दंभ भरा जाए, लेकिन पंचायत राज चुनाव की अखाड़ेबाजी सिर्फ गांवों में ही नहीं, बल्कि मुंबई और सूरत जैसे महानगरों तक चल रही है। गांवों की सरकार के लिए महानगरों में रणनीतियां तय की जा रही है। इन गांवों में पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य को लेकर महानगरों में क्रगोटियांञ्ज बिठाई जा रही है। पता चला है कि दोनों ही प्रमुख पार्टियों के वे समर्थक (महानगरों में रहने वाले धन्नासेठ) गांवों की सरकार में जमकर क्रक्रमनीञ्जञ्ज और क्रक्रपॉवरञ्जञ्ज का खेल खेल रहे हैं। जो अपने अपने गांवों की राजनीति में वर्चस्व चाहते हैं। इसको लेकर यहां के जनप्रतिनिधि महानगरों की दौड़ लगा रहे हैं। महानगरों में रहने वाले मतदाताओं के लिए भी पार्टियों का दौर शुरू हो गया है। इनमें दोनों ही प्रमुख पार्टियों के जनप्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं।
गोगुंदा, सायरा और बडग़ांव क्षेत्र के कई गांव ऐसे हंै, जिनके अधिकतर लोग मुंबई-सूरत सहित अन्य महानगरों में रहते हैं, जिनके वहां पर बड़े-बड़े उद्योग हैं। ये लोग गांवों में सिर्फ शादी-ब्याह और त्योहारों पर ही आते हैं, लेकिन इन लोगों की यहां के चुनावों में भी गहरी रूचि रहती है। ये धन्ना सेठ इन चुनावों में खुलकर चन्दा देेते हैं। साथ ही अपने समर्थकों को विजयी बनाने के लिए क्रएड़ी-चोटीञ्ज का जोर लगा देते हैं। हालांकि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदाताओं को किसी भी प्रकार से प्रभावित करना गैरकानूनी है, लेकिन यहां के जनप्रतिनिधि धन्ना सेठों की मदद से खुले आम लग्जरी वाहनों में महानगरों से मतदाताओं को लेकर यहां पहुंचते हैं, जहां मतदान करवाया जाता है। इन मतदाताओं के क्रखाने-पीनेञ्ज का पूरा बंदोबस्त संबंधित पार्टी और जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है, लेकिन आज तक प्रशासन ने इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, जो दर्शाता है कि चुनाव में लगे अधिकारी भी इन धन्ना सेठों के कितने प्रभाव में हैं?
65 प्रतिशत आबादी बाहर : गोगुंदा, सायरा और बडग़ांव के आसपास के कई गांव मदार,खलिया कला, रावलिया खुर्द, घोड़ों का गुड़ा, गाडिय़ों का गुड़ा, ढोल चाली, भूताला, कडिय़ा, लोसिंग, मोरी पानेर, पटियामा सेमारी आदि कई ऐसे गांव है, जिनमें 30 से 65 प्रतिशत की आबादी मुंबई और सूरत में रहती है। इसमें कई लोग परिवार सहित वहीं रहते हैं। इन लोगों का सोना-चांदी, दूध, भंगार आदि का व्यवसाय है। कई ग्रामीण वहां की होटलों में वेटर और रसोइये का काम भी करते हैं। ये लोग अक्सर छुट्टियों में या फिर शादी-ब्याह में यहां आते हैं।
लक्जरी बसों से लाया जाएगा : सूत्रों के अनुसार दोनों पार्टियों के प्रत्याशियों ने मुंबई-सूरत से मतदाताओं को गांव तक लाने के लिए लक्जरी बसों का इंतज़ाम किया है। यह लक्जऱी बसें वॉल्वो और स्लीपर है, जो वोटिंग के लिए मतदाताओं को लाएगी तथा वापस मुंबई और सूरत छोडऩे जाएगी।
मुंबई-सूरत में पार्टियां : जानकारी के अनुसार मुंबई-सूरत में रहने वाले इन ग्रामीणों को लुभाने के लिए मुंबई-सूरत में आए दिन यहां के प्रत्याशियों द्वारा वहां पार्टियां आयोजित की जा रही है।
गांव के सरपंच प्रत्याशी के कार्यकर्ता मुंबई और सूरत में यह सारी बागडोर संभाले हुए हंै। सूत्रों की माने तो इन सरपंच प्रत्याशियों का यह सारा चुनावी खर्चा उठाने वाले भी मुंबई में व्यवसाय करने वाले ये धनाढ्य लोग हैं। मुंबई में पिछले कुछ दिनों में कई पार्टियां आयोजित हो गई है, जिसमें संबंधित गांवों

जानलेवा डेंगू अब आंखलेवा भी हो सकता है !

0

डेंगू के मरीजों की जा सकती है आंखों की रोशनी, मुंंबई में डेंगू रोगियों के अंधे होने की मिली शिकायत, चिकित्सा विभाग सतर्क

Original Title: Aa_FC3_58a.jpg
उदयपुर। डेंगू को अब तक जान का दुश्मन माना जाता रहा है, लेकिन कुछ मामले ऐसे आए हैं, जिनमें डेंगू रोगियों की आंखों की रोशनी चली गई है। ऐसे मामले अभी मुंबई में सामने आए हैं, जिन पर रिसर्च शुरू हो गई है। इधर, २०१४ में जिले में चार और संभाग में २० से अधिक डेंगू रोगी पाए गए थे। डेंगू के कारण आंखों की रोशनी चले जाने के मामले ने चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में मुंबई के विभिन्न अस्पतालों के रिकार्ड के अनुसार डेंगू से पांच लोगों की आंखों की रोशनी छिन गई है। डेंगू को अब तक जानलेवा माना जाता था, लेकिन मरीजों के आंखों की रोशनी जाने से इस रोग को लेकर नई रिसर्च शुरू हो गई है। इस रोग से आने वाले अंधेपन के रहस्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
मुंबई के आदित्य ज्योति आई स्पेशलिस्ट अस्पताल में डेंगू से अंधे होने के तीन मामले सामने आ चुके हैं। इसमें से दो मरीजों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है। 20 वर्षीय मरीज विशाल नवाले की आंखों की रोशनी वापस लाने में डॉक्टरों ने सफलता हासिल की है। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. राधिका कृष्णन का कहना है कि उनके कॅरियर में आज तक उन्होंने डेंगू से किसी मरीज की आंखों की रोशनी जाते हुए नहीं देखा और ना ही सुना। इस केस के बाद मुंबई के डॉक्टर सकते में है। विशाल के पहले आए दो मरीजों की आंखों की रोशनी नहीं बच सकी।
वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू से आंखों की रोशनी चले जाना सिर्फ किताबों में ही पढ़ा था, लेकिन ऐसे मामले पहली बार ही सामने आए हैं। पिछले 20 साल से प्रेक्टिस कर रही आई स्पेशलिस्ट डॉ. रेणु दोषी का कहना है कि आंखों का और डेंगू का कनेक्शन दिमाग से है और डेंगू से आंखों की रोशनी जाने का हवाला किताबों में दिया हुआ है। इस तरह के केस बहुत काम होते हैं। समझने की जरूरत इस बात कि है कि किन कारणों की वजह से डेंगू से अंधापन होता है।
राजस्थान में भी अलर्ट की जरूरत : डेंगू से राजस्थान भी अछूता नहीं है। हर वर्ष उदयपुर संभाग सहित राजस्थान में ही डेंगू से कई लोगों की जाने जाती है। उदयपुर जिले में 2014 में चार मरीज थे, जबकि संभागभर में इनकी संख्या 20 से अधिक थी। राजस्थान में यह आंकड़ा कही ज्यादा है। इस रोग को लेकर राजस्थान में अलर्ट होना आवश्यक है, क्योंकि राजस्थान में मार्च से सितंबर तक का मौसम मुंबई की तरह होता है और यहां पर इसी वातावरण में डेंगू मच्छर पनपता है। राजस्थान मेडिकल हेल्थ विभाग के डॉक्टरों की माने तो उनके अनुसार इस समय उदयपुर या राजस्थान में डेंगू का मच्छर नहीं पनपता, लेकिन ऐहतियात रखने की जरूरत है।
ऐसे पनपता है डेंगू : डिप्टी सीएमएचओ राघवेंद्र रॉय के अनुसार राजस्थान में डेंगू रोग मार्च के बाद बढ़ता है, जो सितंबर तक रहता है। डॉक्टरों के अनुसार डेंगू मच्छर हमेशा स्वच्छ पानी में पैदा होता है और इसके पनपने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान पीने के पानी के परांडे और कूलर में भरा हुआ पानी सबसे अनुकूल होता है, क्योंकि यहां पर स्वच्छ पानी भरा रहता है। बारिश का पानी भी किसी बर्तन या कहीं स्वच्छ जगह या पात्र में भर जाए, तो डेंगू मच्छर पनपता है। रॉय ने बताया कि उदयपुर में हेल्थ विभाग द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हंै।
गांव-गांव स्तर पर भी डेंगू से बचाव के तरीके और उसके इलाज के लिए कैंप आयोजित किए जाते हैं।
॥मुंबई में अभी मौसम में नमी की वजह से वहां डेंगू मच्छर हो सकते हंै। यहां पर उनके पनपने का समय मार्च से सितंबर तक होता है। हेल्थ विभाग डेंगू को लेकर पूरी तरह सतर्कता बरते हुए हैं। 2014 में पिछले सालों की अपेक्षा चार मरीज थे। डेंगू से अंधेपन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसको लेकर भी सतर्कता बरती जाएगी।
-डॉ. राघवेंद्र रॉय, डिप्टी सीएमएचओ उदयपुर

शराब से कहीं यहां न मच जाए मौत का तांडव

> उत्तरप्रदेश में जहरीली शराब पीने से 45 जनों की मौत
> हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब की खपत ज्यादा
> चुनाव में बढ़ जाती है अवैध शराब की तस्करी

Samogonउदयपुर। उत्तरप्रदेश में जहरीली शराब पीने से मचे मौत के तांडव में जहां 45 जने काल के शिकार बन चुके हैं। आदिवासी बहुल उदयपुर संभाग के अंदरुनी ग्रामीण इलाकों में कई बार नकली शराब की फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं। यहां भी नकली शराब बनाने और हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब का कारोबार चरम पर है। विशेष तौर से पंचायत चुनाव में कारोबार ने और जोर पकड़ लिया है। जानकारों का मानना है कि जिले में ऐसी कोई जगह नहीं होगी जहां हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब न बिक रही हो। ठीक इसी प्रकार नकली शराब बनाने का काम भी चलता ही रहता है। हाल ही में राजसमंद के देवगढ़ थाना क्षेत्र में नकली शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई थी। पुलिस के लाख प्रयासों के बावजूद इन पर रोक लग पाना संभव नहीं हो पाता। कार्रवाई में पकड़े जाते हैं लेकिन कुछ समय बाद जमानत हो जाती है और वापस वे उसी काम में लग जाते हैं। हरियाणा की शराब आने से जिले में जंगल में बनाई जा रही नकली शराब के कारोबार पर हालांकि असर हुआ है, फिर भी झाड़ोल, फलासिया, मांडपिया के घने जंगलों में आज भी लोग शराब बनाते हैं। अभी कुछ समय पूर्व ही पुलिस ने कार्रवाई कर पांच से अधिक स्थानों पर दबिश देकर नकली शराब बनाने वालों का गिरोह पकड़ा है।
चुनाव आते ही बढ़ जाता है कारोबार : चुनाव आते ही शराब की खपत बढ़ जाती है। शराब तस्करी भी तेज हो जाती है। हरियाणा निर्मित शराब सस्ती होने के कारण चुनाव में बांटने में अधिक उपयोग में लाई जाती है। शराब माफिया रात के अधेंरे में उक्त शराब लोगों तक पहुंचाते हैं हालांकि पुलिस इस बार चुनाव में शराब तस्करी को लेकर काफी सख्त है।
टैक्स का है चक्कर : राजस्थान में शराब पर ज्यादा टैक्स है। हरियाणा में टैक्स कम होने से वहां की शराब सस्ती पड़ती है। यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब को गोरखधंधा बढ़ा है। हरियाणा के तस्कर अपने बॉर्डर के गांव में अंगे्रजी शराब रखते हैं। सस्ती के चक्कर में वहां से अवैध रूप से शराब मंगाते हैं जिसका फायदा उठाते हुए वहां के तस्कर नकली शराब बनाकर उन्हें परोस देते हैं।
तीन माह बाद ही हो जाती है खराब : हरियाणा निर्मित शराब करीब तीन माह बाद खराब हो जाती है। शराब में मिला कैमिकल बोतल के पैंदे में जमा होने से बोतल में दो रंग की शराब नजर आती है। आबकारी अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान में बिकने वाली शराब सालों तक खराब नहीं होती।
यहां हुई कार्रवाई : सुखेर पुलिस ने कुछ समय पूर्व दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने वहां से अग्रेजी शराब, शराब बनाने के उपकरण, खाली बोतलें, शराब के नाम के स्टीकर भी बरामत किए थे। इस प्रकार डबोक पुलिस ने लगभग छह माह पूर्व भटेवर के पास क्षेत्र में दबिश देकर कच्चे मकान पर दबिश दी थी। जहां कार्रवाई की भनक लगने से किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई पर पुलिस ने वहां से कच्ची शराब बनाने के सामान जब्त किए थे।
हल्की शराब पर बं्राडेड लेबल : शराब के ठेकेदारों द्वारा चुनाव के चलते हरियाणा से तस्करी कर लाई जा रही शराब की बोतलों पर लगने वाला लेबल तो ब्रांडेड शराब कंपनी का होता है मगर बोतल में शराब घटिया होती है।

> पंचायत चुनाव को देखते हुए पुलिस की ओर से सख्ती बरती जा रही है। जिले के सभी क्षेत्रों में पुलिस अवैध शराब पर नजर रखे हुए हैं। अवैध शराब को लेकर कार्रवाई की जा रही है।
-हनुमान प्रसाद मीणा, एएसपी मुख्यालय
> राजस्थान के हर जिले में कार्रवाई की जा रही है। उदयपुर में एक माह से धरपकड़ की जा रही है। जिले के अलग-अलग क्षेत्र में अब तक लगभग ५० से अधिक जगहों पर कार्रवाई की जा चुकी है। चुनाव को देखते हुए पूरे राज्य में अवैध शराब के मामले पर सख्ती बरती जा रही है।
ओपी यादव, आबकारी आयुक्त, राजस्थान

राजस्थान : स्वाइन फ्लू से 7 मौत, 19 जांच सकारात्मक

0

swine fluराजस्थान में स्वाइन फ्लू से इस साल अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है और 19 लोगों की जांच के नतीजे सकारात्मक आए हैं।

एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि यह आंकड़े सामने आने के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है।

एक अधिकारी ने बताया कि मौत के मामले बांसवाड़ा, डूंगरपुर बाड़मेर, टोंक, कोटा और जयपुर इलाके से सामने आए हैं। वहीं, जयपुर, सीकर, टोंक, कोटा और अन्य जिलों में स्वाइन फ्लू की जांच के नतीजे सकारात्मक मिले हैं।

चिकित्सा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जहां स्वाइन फ्लू की जांच के नतीजे सकारात्म आए हैं, हमने वहां आसपास के करीब 50 घरों में सर्वेक्षण कराने का फैसला लिया है।

उन्होंने कहा कि हम जुकाम, बुखार, खांसी और नाक से पानी बहने की शिकायत से दो-चार हो रहे सभी मरीजों से अस्पताल आकर चेकअप कराने का अनुरोध कर रहे हैं। हम कोई जोखिम नहीं लेना चाहते।

अधिकारी ने कहा कि इस साल की शुरूआत के बाद से स्वाइन फ्लू के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए कमर कस ली है।

स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने सभी जिला अस्पतालों को स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के नमूने एकत्र करने और उन्हें जांच के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भेजने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों को एच1एन1 इन्फुएंजा के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं का संग्रह रखने के लिए कहा गया है।

MPUAT खेलकूद प्रतियोगिताओं का दूसरा दिन

DSC07500
उदयपुर । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की अन्तर महाविद्यालय खेलकूद प्रतियोगिताओं के दूसरे दिन फुटबॉल स्पर्द्धा में डेयरी विज्ञान महाविद्यालय ने कृषि महाविद्यालय, भीलवाड़ा को 3-0 से शिकस्त दी। दूसरा मुकाबला वॉलीबॉल स्पर्द्धा में हुआ जिसमें डेयरी विज्ञान महाविद्यालय ने मात्स्यिकी महाविद्यालय को सीधे सेटों में 25-15 व 25-17 से पराजित किया। एक अन्य मुकाबले में राजस्थान कृषि महाविद्यालय ने अपने मैदान पर कृषि महाविद्यालय, भीलवाड़ा को सीधे सेटों में 25-9 व 25-17 से पराजित किया। प्रतियोगिता के कबड्डी मैच में मात्स्यिकी महाविद्यालय ने प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय को बेहद रोमांचक मुकाबले में 8 अंकों से मात दी। इस रोमांचक मैच के दौरान मात्स्यिकी महाविद्यालय के लखन लाल व रोहिताश यादव ने अपने से भारी खिलाडियों को पटखनी दी एवं विगत चैम्पियन टीम को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। वॉलीबॉल में छात्राओं के वर्ग में प्रौद्योगिकी महाविद्यालय ने संघर्षपूर्ण मुकाबले में गृह विज्ञान महाविद्यालय को सीधे सेटों में 25-13, 27-25 से पराजित किया।
क्रिकेट के पहले सेमीफाईनल में मात्स्यिकी महाविद्यालय ने टॉस जीतकर प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय को पहले बल्लेबाजी का न्यौता दिया, जिसमें प्रौद्योगिकी महाविद्यालय ने 23.4 ओवर में 157 रनों का लक्ष्य दिया, प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की ओर से बल्लेबाजी करते हुए शोएब खान ने 39 रनों एवं चन्द्रमोहन ने 46 रनों का योगदान दिया। मात्स्यिकी महाविद्यालय की ओर से गेंदबाजी करते हुए सुनील चौधरी ने 5 एवं कुशांक ने 2 विकेट चटकाये। जवाब में मात्स्यिकी महाविद्यालय की टीम बल्लेबाजी करते हुए 57 रनों पर ढह गयी। प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की ओर से गेंदबाजी करते हुए नरेन्द्र रावत ने 3 विकेट, शुभम् ने 3 विकेट और चन्दन ने 2 विकेट चटकाये। इस तरह प्रौद्योगिकी महाविद्यालय ने 100 रनों से जीत दर्ज कर क्रिकेट के फाईनल में जगह बनायी।
अपराह्न में छात्राओं की एथेलेटिक्स स्पर्द्धा की शुरूआत हुई, जिसमें विश्वविद्यालय क्रीड़ा मण्डल के अध्यक्ष डॉ. वाई.सी. भट्ट ने छात्राओं से परिचय प्राप्त किया एवं छात्राओं को उद्बोधन दिया

विद्यापीठ की मेजबानी में इंटर जोन महिला खो खो प्रतियोगिता का हुआ आगाज

IMG_0298
उदयपुर | खो खो का खेल लड़कियों का प्रिय खेल है। इस खेल को एकाग्रता के साथ लेखा जाता है। खेलकूद से जीवन में अनुशासन की प्रवृति आती हैं। जीवन में कड़ी मेहनत, लगन तथा संघर्ष के साथ कार्य करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। यह विचार जलसंसाधन मंत्री किरण माहेश्वरी ने बुधवार को जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय की मेजबानी में इंटर जोन महिला खो खो प्रतियोगिता के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कही। उन्होंने कहा कि आज खेले के प्रति रूजान कम होता जा रहा है वह चिंता का विषय है। जितना हम खेल खेलेंगे उतना ही हमारे जीवन का विकास होगा। युवाओं का आव्हान किया कि खेल वही है जहॉ खिलाड़ियों का अनुशासन। आप अनुशासन में रहे खेल खेले आप उंचाईयों पर अवश्य पहुंचेगे। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने युवा खिलाड़ियों का आव्हान करते हुए कहा कि खेलों से हमारा शारीरिक, मानसिक, अध्यात्मिक एवं चारित्रिक व्यक्तित्व का निर्माण होता है। खेलों के बिना शिक्षा लेने वाली शिक्षा अधूरी शिक्षा मानी जाती है। खेल के बिना हमारा जीवन गोण हो जाता है। गति रूक जाती है। सारंगदेवोत ने महिला खिलाड़ियों का अव्हान किया कि यह मेवाड़ की धरती है यहां स्वाभिमान का पाठ सिखाया जाता है और आप स्वाभिमान के साथ इस खेल को खेले। समारोह में विशिष्ठ अतिथि एमडीएस विवि अजमेर के कुलपति प्रो. कैलास सोडानी, भारतीय विश्वविद्यालय संघ के ऑबजर्वर – डॉ. सी.एस. ग्रेवाल – चण्डीगढ़, कुल प्रमुख भंवरलाल गुर्जर, खेलप्रेमी कर्णसिंह चुण्डावत, सचिव भवानीपाल सिंह, डॉ. दिलिप सिंह चौहान ने भी अपने विचार व्यक्त कर युवाओं को सम्बोधित किया। समारोह का संचालन डॉ. धीरज जोशी ने किया तथा धन्यवाद डॉ. दिलिप सिंह चौहान दिया। प्रारंभ में मुख्य अतिथि किरण माहेश्वरी तथा कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने मार्च पास्ट की सलामी ली। विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स बोर्ड के सचिव भवानीपाल सिंह ने बताया कि चार दिवसीय इंटर जोन प्रतियोगिता में देश भर की 16 टीमें भाग ले रही है।
IMG_0083
इनके बीच हुआ मुकाबला:-
विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स बोर्ड के निदेशक प्रो. सीपी अग्रवाल ने बताया कि विद्यापीठ की मेजबानी में इंटर जोन महिला खो खो प्रतियोगिता के अन्तर्गत बुधवार को कुल 16 मेच खेले गये। गुरूनानक देवे विवि अमृतसर, विवि पूना एवं विवि इलाहाबाद, पंजाब विवि पटियाला, शिवाजी विवि कोल्हापुर, सरदार पटेल विवि विद्यानगर की टीम को वॉक ओवर मिलने से ये टीमे अगले दौर में पहुंच गयी। विवि कालीकट ने विवि इलाहाबाद को 18 अंको से, मैंगलोर विवि ने मुम्बई विवि को 1 अंक से, विवि पूना ने विवि मैसूर को 9 अंको से एमडी विवि रोहतक ने वीबीएस विवि जोनपुर को 17 अंको से, गुरूनानक देव विवि अमृतसर ने अन्ना विवि चैन्नई को 2 अंको से शिकस्त दे विजयी रही।