उदयपुर। प्रदेश में शराब तस्करी और अवैध शराब के बेचान पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग ने तस्करों की हिस्ट्रीशीट खोलने का निर्णय किया है। आबकारी विभाग ने गुंडा एक्ट में यह कार्रवाई करने के निर्देश पुलिस विभाग को दिए हैं। अब दूसरी बार पकड़े जाने वाले तस्कर की हिस्ट्रीशीट खोलकर उसे जिलाबदर या गुंडा एक्ट में सख्त कार्रवाई की जाएगी। आबकारी विभाग द्वारा प्रदेश में शराब तस्करी और अवैध शराब के बेचान पर रोक लगाने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हंै, जिसमें कोई व्यक्ति शराब तस्करी में दूसरी बार गिरफ्तार होता है, तो उसकी हिस्ट्रीशीट खोलकर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उस व्यक्ति को गुंडा एक्ट में लेकर जिलाबदर तक किया जा सकता है। आबकारी आयुक्त ओपी यादव ने बताया कि तस्करों पर कार्रवाई करना पुलिस का काम है, जिसके लिए आबकारी विभाग द्वारा पुलिस को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं।
तस्करों का गढ़ है उदयपुर : हरियाणा से गुजरात तस्करी होने वाली शराब उदयपुर होकर ही जाती है। यहां के अधिकांश बदमाश शराब तस्करी से जुड़े हैं, जिसमे चित्तौडग़ढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, खेरवाड़ा आदि के कई तस्कर शामिल है। यह तस्कर राजस्थान-गुजरात बॉर्डर पास करवाकर शराब की तस्करी करते है। शराब के अवैध ट्रक प्रदेश में सबसे अधिक उदयपुर जिले में चित्तौड़, अहमदाबाद हाइवे या नाथद्वारा-अहमदाबाद हाइवे से गुजरते हैं।
अब तकअधिकतर मामलों में शराब लेकर जा रहे ड्राइवर और खलासी पर ही कार्रवाई होती है जबकि तस्करों पर कभी शिकंजा नहीं कसा गया। लेकिन आबकारी विभाग के इस आदेश के बाद संभाग के कई तस्करों की हिस्ट्रीशीट खुल जाएगी और पुलिस इन पर कड़ी कार्रवाई कर सकेगी। जानकारी के मुताबिक एक बार हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद तस्करी के मामले में पुलिस उन पर जिलाबदर, तड़ीपार जैसे कार्रवाई भी कर सकती है।
अवैध शराब बनाने और बेचने वालों पर भी कसेगा शिकंजा : आबकारी विभाग के इन आदेशों के बाद गांवों में जो लोग नियमित रूप से अवैध शराब बनाने का काम करते हैं, उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा। कोटड़ा, खेरवाड़ा, डूंगरपुर के कई गांवों में अवैध शराब बनाने का काम होता है। साथ ही लाइसेंस के अतिरिक्त अवैध शराब बेचने वालों पर भी इसी आदेश के तहत गुंडा एक्ट में कार्रवाई होगी।
शराब तस्करों की खुलेगी हिस्ट्रीशीट
यातायात पुलिस अधिकारी ने दिखाई दादागिरी

उदयपुर । शिल्पग्राम का दौरा करना एक परिवार को महंगा पड़ गया। यातायात पुलिस अधिकारी नरपतसिंह की दादागिरी के कारण कड़कड़ाती सर्दी में बच्चों सहित परिजन ठिठुरते रहे। सेक्टर चार स्थित पेट्रोल पम्प के मालिक हेमेन्द्र सिंह ने बताया कि कल शाम को वह सपरिवार शिल्पग्राम गए।
वहां उन्होंने अपना चार पहिया वाहन पार्क किया और मेले में चले गए। वहां न तो नो पार्किंग थी और न ही कोई वीआईपी पार्किंग। इसके बावजूद यातायात पुलिस ने गाड़ी में व्हील लॉक लगा दिया। वापस लौटने पर काफी देर तक कोई पुलिसकर्मी नहीं था। जब पुलिस अधिकारियों से बात की तो उन्होंने ट्रैफिक अधिकारी नरपत सिंह से बात करने को कहा | हेमेन्द्र सिंह ने जब ट्रैफिक अधिकारी नरपत सिंह को कॉल पर गाड़ी का व्हील लोक खुलवाने के लिए कहा तो नरपत सिंह ने गैर जिम्मेदाराना बात कहते हुए कहा की लोक मेने नहीं लगाया हे उदिया जा कर रसीद कटवाओ फिर खुलेगा लोक खुलेगा | हेमेन्द्र सिंह ने कहा की रसिन की कोई बात नहीं है लेकिन इतनी रात में उदियापोल तक जाना और साथ में परिवार है, बच्चे है, फिर भी नरपत सिंह बिना कोई बात सुने अपनी बात पर अड़े रहे और रसीद कटवाने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया। फिर हेमेन्द्र ने अपने कर्मचारी को उदियापोल चौकी भेजा तो वहां रसीद काटने वाला कोई नहीं मिला। हेमेन्द्र सिंह ने अन्य पुलिस अधिकारियों से बात की और अपनी समस्या बताई तब वहां पर रात के करीब १२ बजे कोई पुलिस कर्मी आया उन्होंने वहीं रसीद काटी और व्हील लॉक खोला। हेमेन्द्र का आरोप है कि नरपतसिंह ने जान-बूझकर व्यक्तिगत द्वेषता के कारण न सिर्फ उन्हें बल्कि बच्चों व परिजनों को भी परेशान किया |
ये हैं इस्लाम की 9 अनमोल बातें

उदयपुर | मुहम्मद साहब का पूरा जीवन सच, साहस, दया, करूणा, भाईचारे और ईश्वर के प्रति अटूट भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने इंसानों की भलाई के लिए इतनी बातें बताई, अगर उन पर अमल किया जाए तो दुनिया से नफरत, लड़ाई, बुराई और तमाम नकारात्मक चीजें खत्म हो जाएं।
जिस व्यक्ति ने बाजार में कृत्रिम अभाव पैदा करने की नीयत से चालीस दिन अनाज को भाव चढ़ाने के लिए रोके रखा यानी जमाखोरी की तो ईश्वर का उससे कोई संबंध नहीं है। फिर अगर वह उस अनाज को दान भी कर दे तो ईश्वर उसे माफ नहीं करेगा। उसकी चालीस साल की नमाजें भी ईश्वर के पास स्वीकार नहीं होंगी।
किस बात को पुण्य में गिना जाएगा:
मुहम्मद साहब ने फरमाया है कि जो व्यक्ति कोई पौधा लगाता है या खेती करता है, उसमें से कोई पक्षी, मनुष्य या कोई भी प्राणी खाता है तो यह सब उस मनुष्य (जो पौधा लगाता है या खेती करता है) के पुण्य में गिना जाएगा।
खजूर का पेड़ लगाने के बारे मे क्या कहा गया है:
मुहम्मद साहब ने फरमाया है कि जो भी मनुष्य खजूर का पेड़ लगाएगा, तो पेड़ से जितने फल निकलेंगे, अल्लाह उसे उतनी ही नेकी देगा।
दूसरों के घर में किस तरह दाखिल नहीं होना चाहिए:
दूसरों के घर में बिना इजाजत न दाखिल नहीं होना चाहिए, न ताक-झांक करनी चाहिए, न उनकी गोपनीयता को भंग करना चाहिए।
दुशमनी अच्छे कामों पर पानी फेर देती है :
आगे कहा गया है कि लोगों में बिगाड़, विद्वेष, वैमनस्य, दुश्मनी पैदा करना वह काम है, जो ऎसा करने वाले व्यक्ति की सारी नेकियों, अच्छाइयों, अच्छे गुणों पर पानी फेर देता है।
किस व्यक्ति पर फरिश्ते लानत भेजते हैं:
जिस व्यक्ति ने कोई त्रुटिपूर्ण चीज इस तरह बेच दी कि ग्राहक को उस त्रुटि से अवगत नहीं कराया, उस पर अल्लाह क्रुद्ध होता है और अल्लाह के फरिश्ते उस पर लानत करते हैं।
किसी को किस तरह नहीं देखना चाहिए:
पराई स्त्रियों को दुर्भावना की नजर से मत देखो। आंखों का भी व्यभिचार होता है और ऎसी दुर्भावनापूर्ण दृष्टि डालना आंखों का व्यभिचार है। इसी से कई बुराइयों की शुरूआत होती है।
दान दो तो किस तरह दो:
जिसे दान दो उस पर एहसान मत जताओ। दान दो तो इस तरह दो कि तुम्हारा दायां हाथ दे तो बाएं हाथ को मालूम न हो। दिखावा न करो।
खाने के दौरान किस बात का रखें ध्यान:
भोजन के बर्तन में कुछ भी मत छोड़ो यानी अन्न को बर्बाद मत करो। एक-एक दाने में बरकत है। बर्तन को पूरी तरह साफ कर लिया करो। भोजन का अपव्यय कभी मत करो।
पानी के इस्तेमाल में किस बात का ध्यान रखें :
पानी का इस्तेमाल सावधानी से करो, चाहे जलाशय से ही पानी क्यों न लिया हो और उसके किनारे बैठे पानी इस्तेमाल कर रहे हो। जरूरत से ज्यादा पानी का उपयोग मत करो।
रोक सको तो रोक लो – आंतकियों का गुलाबचंद कटारिया सहित दस केबिनेट और छह राज्य मंत्रियों को धमकी भरा ई-मेल
ई-मेल की जांच के लिए राजस्थान पुलिस ले रही है गूगल और इंटरपोल की मदद
उदयपुर। गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया सहित दस केबिनेट और छह राज्य सेवकों को सरकारी ई-मेल आईडी पर इंडियन मुजाहिदीन ने २६ जनवरी को हमले की धमकी दी है। लियोनाजर्दा नाम के आईएम आतंकी के अकाउंट से भेजे गए इस ई-मेल में कहा गया है कि २६ जनवरी को धमाके करेंगे, रोक सको तो रोक लो। यह ई-मेल २२ दिसंबर की शाम ५.५४ को मिले हैं। पुलिस विभाग इन ई-मेल की विश्वसनीयता की जांच कर रहा है।
राज्य के पुलिस के आला अधिकारियों के अनुसार इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। यह ई-मेल जीमेल से आया है। इसकी जांच के लिए इंटरपोल से मदद मांगी है। गूगल से भी सहयोग लिया जा रहा है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय द्वारा सभी रेंज आईजी को निर्देश दिए गए हैं कि इस मामले में पूरी गंभीरता बरती जाए। साथ ही पुलिस एकदम सड़कों पर नहीं उतरे, बल्कि गोपनीय तरीके से सतर्कता बढ़ाई जाए, जिससे भय का माहौल पैदा न हो।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों आतंकी संगठनों की तरफ से राज्य के पर्यटन स्थलों को टारगेट पर लेने की धमकी दी गई थी। उस दौरान यह भी सामने आया था कि आतंकवादी उदयपुर में पर्यटन स्थलों की रैकी करके गए थे। इसके बाद एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) ने होटल लेकपैलेस, उदयविलास, सिटी पैलेस, यूनिवरसिटी, डबोक एयरपोर्ट सहित अन्य स्थानों पर गोपनीय तरीके से मॉक ड्रील की गई थी।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट : आईएम के धमकी भरे ई-मेल मिलने के बाद आईबी, एसओजी और एटीएस को राज्य में सतर्क कर दिया गया है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। तलाशी अभियान भी चलाए जा रहे हैं और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
आतंकियों द्वारा धमकी भरे ई-मेल भेजकर हमले की चेतावनी देने की जानकारी मिली है। हालांकि उक्त ई-मेल अभी मैंने नहीं देखा है। इस मामले में डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं। डीजी के स्तर पर ही इस मामले को देखा जा रहा है। इस मामले को लेकर राज्य पुलिस पूरी तरह से गंभीर है।
-गुलाबचंद कटारिया, गृह मंत्री, राजस्थान
इस संबंध में मुख्यालय से मिले निर्देशों के अनुसार सतर्कता बरती जा रही है। सभी जगह सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए हैं। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। २६ जनवरी को लेकर भी विशेष सुरक्षा बंदोबस्त किए जाएंगे।
-आनंद श्रीवास्तव, आईजी, उदयपुर रेंज
मंदिर में फेंकता है गोमांस, मस्जिद में कुत्ते का मांस
नाम देश राज है। उम्र 35 साल। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस शख्स को दो मंदिरों में गाय का मांस फेंकने के आरोप में सोमवार को अरेस्ट किया है। उसने मंदिर की दीवार पर नफरत फैलाने वाला मेसेज भी लिखा था। देश राज ने पुलिस से कहा कि वह केवल मंदिर देखना चाहता है। उसने कहा कि मैं कोई मस्जिद नहीं देखना चाहता, इसलिए ऐसा कर रहा हूं। पुलिस से पूछताछ के दौरान उसने यह भी कबूल किया कि पिछले हफ्ते उसने एक मस्जिद में कुत्ते का शव सांप्रदायिक तनाव फैलान के लिए फेंका था।
पुलिस ने बताया कि राज बेरोजगार है। वह ज्यादातर वक्त पूजा और ज्योतिषी की किताबें पढ़ने में गुजारता है। मुजफ्फरनगर के एएसपी आलोक प्रियदर्शी ने बताया, ‘हमने इसे अरेस्ट किया है। देश राज से पूछताछ जारी है। पुलिस ने इसे परसौली गांव से अरेस्ट किया है। पुलिस को सूचना मिली थी मंदिर में मांस फेंकने की वारदात में राज शामिल था। इसके परिवार वालों का दावा है कि वह मानसिक रूप से कमजोर है। हम इसकी मानसिक स्थिति की भी जांच करेंगे।’
15 दिसंबर को परसौली गांव के एक मंदिर में गाय के शव का एक हिस्सा बरामद किया गया था। इसके साथ ही मंदिर की दीवार पर इस्लामिक स्टेट के हवाले से नफरत फैलाने वाला संदेश लिखा हुआ था। 20 दिंसबर को इसी इलाके के दूसरे मंदिर में गाय के शव का एक हिस्सा बरामद हुआ। इसके साथ ही मंदिर से नंदी की मूर्ति गायब थी। जैसे ही मंदिर में मांस की बात फैली लोगों की भीड़ जमा हो गई। सुरक्षाबलों ने मंदिर से शव के हिस्से को हटवाया।
इस वारदात के बाद सुरक्षाबल चौकस हो गए थे। परसौली में हिन्दुओं और मुस्लिमों की बराबर आबादी है। एक सीनियर पुलिस ऑफिसर ने बताया कि दूसरे गांव झोला में ज्यादातर मुजफ्फरनगर दंगों के बाद विस्थापित हुए मुस्लिमों की आबादी है। इन्हें सरकार ने यहां बसने के लिए जमीन मुहैया कराई थी।
सूत्रों का कहना है कि इन गांवों की आबादी में आई तब्दीली से देश राज परेशान है। एक पुलिस ऑफिसर ने बताया कि हमलोग को उसके पास से कई मैप मिले हैं इन पर मस्जिदों को चिन्हित किया गया है। उसने कहा था कि वह मंदिरों में मांस फेंक नफरत फैलाना चाहता है। पुलिस से पूछताछ में राज ने कबूल किया कि उसने गांव की मस्जिद में कुत्ते का मांस फेंका था।
मस्जिदों पर हुई परचम कुशाई, जुलूसे मोहम्मदी 4 को
उदयपुर । मुस्लिम माह के रब्बीउल अव्वल का चांद दिखाई देन पर मस्जिदों पर परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। वहीं विभिन्न मुस्लिम मौहल्लों में युवाओं ने जुलूस भी निकाले।
’’दुनिया की हर फ़िज़ा है उजाला रसूल का,
ये सारी कायनात है सदका रसूल का,
खुशबू गुलाब की है पसीना रसूल का,
आपको हो मुबारक महीना रसूल का।।’’
इस्लाम की शान पैगम्बर हजरत मोहम्मद (स.अ.) का माहे मुबारक रब्बीउल अव्वल का चांद दिखाई देने पर शहर की अंजुमन तालिमुल इस्लाम , आयड स्थित छीपा मस्जिद, मदीना मस्जिद, रहमान कॉलोनी, सवीना, पहाडा, ठोकर चौराहा सहित शहर की सभी मस्जिदों पर परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। बाद नमाज मगरीब रबीउल अव्वल का चांद दिखाई देने के पर मुस्लिम बस्तियों में लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। कई घरों पर भी परचम कुशाई भी की गई। परचम कुशाई की रस्म के बाद ’सरकार की आमद-मरहबा, आका की आमद-मरहबा’ ’देखो मेरे नबी की शान-बच्चा-बच्चा है कुरबान’ के नारे बुलंद करते हुए मुस्लिम मौहल्लों में जुलूस निकाले गए। इस माह की (१२वीं तारीख) हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर 4 जनवरी को शहर में बडी शानों शौकत के साथ जुलूसे मोहम्मदी निकाला जाएगा। कई मस्जिदों में हजरत मोहम्मद (स.अ.) की शान में सलातो-सलाम पढा गया। इसके बाद फातेहा ख्वानी हुई जिसमें इस्लाम की अहकाम पर चलने एवं मुल्क में अमनो-चैन की दुआएं मांगी गई एवं तबर्रूक बांटा गया। दुआ के दौरान पेशावर की हुई आतंकी हमले में मारे गए मासूम बच्चों के लिए दुआएं मगफिरत की गई।
अन्जुमन तालीमुल इस्लाम के सैक्रेट्री मोहम्मद रिज़वान खान ने बताया है कि आज मगलवार को चान्द दिखाई देने के साथ ही अन्जुमन बिल्डिंग पर झण्डे की रस्म अदा कीे गई। इस मौके पर सभी मुस्लिम मुहल्लों के मोतबिर एवं अन्जुमन मेम्बर ,औलमाऐ किराम,ने झण्डा चढ़ाने के बाद सलातो सलाम पढ़कर कौम व देश में अमन चेन की दुआऐं मांगी। मिठाई बांटकर गले मिलकर मुबारकबाद दी।इस मौके पर सदर मोहम्मद खलील,नायबसदर मुनव्वर अशरफ,जोईन्ट सैेक्रेट्री वकार अहमद शैख,काबिना मेम्बर हाजी जंगदाद खान,ज़हीरूददीन सक्का नज़र मोहम्मद अकीलुददीन,मुस्तफा,डा नूर अहमद, जाकिर घाटी वाला फिरोज मेवाफरोष,रियाज राही,मौलाना जुलकरनैन,मोलाना शरफददीन,मौलाना आस मोहम्मद मोलाना मुतीउर्रहमान आदि समाजजन मोजूद थे।
सदर मोहम्मद खलील ने बताया कि 2 व 3 जनवरी को जश्ने मीलादुन्नबी व 4 जनवरी एतवार को जुलुसे मुहम्मदी निकाला जायेगा।
कद्दावर कटारिया के हाथ में पंचायत चुनाव की कमान
उदयपुर |भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता गुलाबचंद कटारिया को निकाय चुनाव में मिली अपार सफलता के बाद आज दूसरी बड़ी जिम्मेदारी (प्रदेश में पंचायत चुनाव की कमान) सौंपी गई है। बैठक क ही दौरान राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की तबियत बिगड़ गयी और उनका बैठक के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ गया, जिस कारण उन्हें एसएमएस अस्पताल में पार्टी कार्यालय से एम्बुलेंस में लेजाया गया, जहां डॉक्टरी चेकअप कर उपचार किया गया।
पंचायती राज चुनाव को लेकर आज सुबह पार्टी कार्यालय में बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया जिसमें प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया को पंचायतराज चुनाव की कमान सौंपी। अब होने वाले पंचायती राज चुनाव पूरी तरह से कटारिया के नेतृत्व मेंं लड़ा जाएगा और उन्हीं नेताओं को टिकट दिया जाएगा, जो पार्टी में सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं।
बैठक दौरान कटारिया का ब्लड प्रेशर बढ़ गया। इस पर एसएमएस हॉस्पीटल के अधीक्षक डॉ. मान प्रकाश और डॉ. दीपक माहेश्वरी भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां कटारिया का चेकअप किया गया। डॉ. मान प्रकाश ने बताया कि श्री कटारिया को आज सुबह से ही हल्का बुखार था और ब्लड पे्रशर भी बढ़ गया था। कटारिया का ब्लड प्रेशर १७७ बताया गया। प्रवक्ता चंचल अग्रवाल ने बताया कि एसएमएस के डॉक्टरों ने चेकअप करने के बाद छुट्टी देदी थी लेकिन भाईसाहब को आराम करने की सलाह दी गयी थी, लेकिन भाई साबह चेकअप के बाद स्वास्थ ठीक होते ही फिर पार्टी कार्यालय जा कर बैठक में हिस्सा लेने पहुंच गए थे |
गर नेताओं का झूठ पकड़ने वाला ऐप होता तो?

भारत मीडिया में पिछले दिनों में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के विभिन्न नेताओं के बयान छाए रहे हैं.
लेकिन कई बार अपने बयानों के कारण विवादों में आ जाने वाले नेता अपने ही किसी पुराने बायन के उलट बात कर रहे होते हैं.
क्या यह संभव है कि ऐसा कोई ऐप बनाया जाए जो ख़ुद ब ख़ुद किसी नेता के नए बयान और पुराने बयान को आमने-सामने रख कर जनता के सामने पेश कर दे?
अगर राजनेताओं के बयान न हों तो अखबारों के पन्ने, न्यूज़ चैनलों की स्क्रीन, वेबसाइटों के पेज, सोशल मीडिया के स्टेटस की खाली जगहें और टॉक शो की खाली कुर्सियां कैसे भरी जाएंगी !
कोई नेता अगर एक हफ्ते में छह जगहों पर वही बयान देता है तो उसका हर बार एक ही बात रटना ऊब पैदा करता है.
यही बात उन वरिष्ठ पत्रकारों में सघन रूप में पाई जाती है जिन्हें इन नेताओं के कार्यक्रमों को कवर करना पड़ता है. ऐसे पत्रकार अक्सर कहते पाए जाते हैं कि इस धंधे में ‘उन्होंने कहा, उन्होंने आगे कहा, उन्होंने जोर देकर कहा’ के सिवा और कुछ ज्यादा बचा नहीं है.
हर पार्टी और राजनेता का आपस में घुलामिला एजेंडा है जिसे वह मीडिया के जरिए ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहता है.

मीडिया प्रबंधकों की वर्कशॉप :
नरेंद्र मोदी, भाजपा, भारत, प्रधानमंत्री
चुनावों से पहले हर बड़ी पार्टी के मीडिया प्रबंधकों की वर्कशॉप में विशेषज्ञ यही बताते हैं कि वे कैसे तकनीकी, मीडिया हाउसों की आपसी स्पर्धा, राजनीतिक आग्रहों और सीमाओं का अपने पक्ष में इस्तेमाल करें.
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी मीडिया के परंपरागत इस्तेमाल से संतुष्ट नहीं थे. उनके लिए काम करने वाले आईटी पेशेवरों और कॉरपोरेट के छवि प्रबंधकों ने ‘चाय पर चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए एक समांतर मीडिया खड़ा कर विकास पुरुष और भारत के उद्धारक की छवि आम लोगों तक पहुंचाने का सफल प्रयोग किया.
इस ऊब के बीच अचानक कोई विवाद खड़ा करने की क्षमता वाला बयान आ जाता है तो पत्रकारों को अचानक अपने पेशे की सार्थकता नज़र आने लगती है. इसके सबूत के रूप में न्यूज़ चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज़ की चिप्पी नज़र आने लगती है.
ज़्यादातर पत्रकार अपने होने का अर्थ उस मौके का साक्षी होने और विवाद को लोगों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका के बोध में तलाशते हैं.
विवादों का मौसम:
भारतीय राजनीति में फिर ऐसे ही विवादित बयानों का मौसम आ गया है जिसका असर चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक में दिखाई दे रहा है.
भाजपा सांसद साक्षी महाराज गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त होने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं, भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ और यूपी भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ताजमहल को शिवमंदिर बता रहे हैं, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की वकालत कर रही हैं, एक मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति अपने ‘रामज़ादे…..’ वाले बयान से समाज को दो फिरकों में बांट कर देख रही हैं.
बयान के उलट बयान :
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) धर्मांतरण के प्रायोजित अभियानों को ‘घर वापसी’ बता रहा है, संघ के प्रमुख मोहन भागवत कह रहे हैं कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है, भाजपा के सांसद गिरिराज सिंह मोदी विरोधियों को देश छोड़ देने का फतवा जारी कर चुके हैं और यूपी के राज्यपाल रामनाइक अब अयोध्या में राममंदिर बनवाना चाहते हैं. सबसे ऊपर यह कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनमें से ज़्यादातर बयानों से नाराज़ हैं, कुछ के लिए माफी मांग और मंगवा चुके हैं.
आप याद्दाश्त पर ज़ोर डालेंगे तो पाएंगे कि इन बयानों के पीछे न कोई वैचारिक प्रतिबद्धता है और न व्यक्तिगत आग्रह, ये अवसरवादिता के बेहतरीन नमूने हैं क्योंकि यही नेता ठीक इसके उलट बयान पहले दे चुके हैं.

हिन्दुत्व की व्याख्याएँ :
साक्षी महाराज ने किसी और पार्टी में रहते हुए फर्रूख़ाबाद की एक सभा में भाजपा को गोडसे जैसे हत्यारों की पार्टी कहा था, भाजपा कई बार राममंदिर को अपने एजेंडे से बाहर कर चुकी है और आरएसएस के पास हिंदुत्व की कई व्याख्याएं हैं.
भाजपा और आरएसएस लगातार गोडसे से अपने संबंधों को छिपाते रहे हैं. लेकिन नाथूराम के भाई गोपाल गोडसे ने नाराज़गी जताते हुए 1994 में एक इंटरव्यू में कहा था कि नाथूराम ने आरएसएस के नेताओं को सज़ा से बचाने के लिए अपना संबंध उजागर नहीं किया था.
चेतना का स्तर:
ऐसे में इन बयानों पर विवाद का क्या मतलब है. नेता जानते हैं कि अभी जनता की चेतना का स्तर उतना नहीं है कि वह उनके अवसरवाद पर तंज से मुस्करा कर आगे बढ़ जाए. होता यह है कि ये मुद्दे लोगों के व्यक्तिगत आग्रहों और कुंठाओं के साथ मिलकर बहुत जल्दी बहसों और झड़पों में बदल जाते हैं और मक़सद पूरा हो जाता है.
यहां गौरतलब है कि ये बयान सरकार और अपने लेफ्टिनेंट अमित शाह के ज़रिए पार्टी और संगठन दोनों को अपनी मुट्ठी में रखने वाले आरएसएस के दुलारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाराज़गी के बावजूद धड़ाधड़ एक के बाद एक आ रहे हैं जिन्होंने विकास के मुद्दे पर चुनाव जीता था.
विकास का मुद्दा ?
हवा का रूख देखकर राजनीति करने वाले अवसरवादी नेताओं के लिए नेतृत्व की मर्ज़ी ही कुतुबनुमा की डिबिया होती है, वे जानते हैं कि पार्टी लाइन के खिलाफ कुछ बोले तो तुरंत पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा.
जाहिर है पूर्ण बहुमत की सरकार बना लेने के छह महीनों में ही विकास के मुद्दे को कोने में सरकाया जा रहा है, अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए हर मुद्दे में राष्ट्रवाद की छौंक के साथ धार्मिक ध्रुवीकरण की संभावनाओं को टटोला जा रहा है.
अगर इनमें से कोई मुद्दा लोगों द्वारा लपक लिया जाता है तो चुनाव में किए गए लगभग असंभव किस्म के वादों को लोग भूल जाएंगे और पांच साल सरकार चलाना आसान हो जाएगा.
एक दिलचस्प प्रयोग
अमरीका में 2012 के चुनाव के समय दो राजनीति विज्ञानियों, डार्टमाउथ के ब्रैंडन नेहान और एक्सेटर यूनिवर्सिटी के रीफलर ने यह जानने के लिए एक प्रयोग किया कि क्या राजनेता वाकई झूठ बोलने और बयानों से पलटी मारने की कोई चिंता करते हैं.
उन्होंने नेताओं की कथनी-करनी की पड़ताल करने वाली एक वेबसाइट पॉलिटीफैक्ट से सक्रिय रूप से जुड़े राज्यों के 1200 विधायकों में से एक तिहाई को चिट्ठियां भेजीं कि उनके बयानों और आचरण की निगरानी की जा रही है जिसका असर उनके करियर पर पड़ सकता है.
रैंडम आधार पर चुने गए एक तिहाई विधायकों को चिट्ठियां भेज कर कहा गया कि वे राजनीति विज्ञान के एक प्रयोग का हिस्सा हैं जिसके तहत उनके बयानों की सच्चाई का अध्ययन किया जा रहा है.
लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि इसका मक़सद क्या है और क्या नतीजे होंगे. बाकी एक तिहाई को कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई.
चुनाव के अंत में नतीजा यह रहा कि जिन्हें कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई उन्होंने खूब झूठ बोला, जिन्हें सिर्फ प्रयोग की सूचना दी गई थी उनमें से 2.7 प्रतिशत ने और जिन्हें नतीजों की चेतावनी दी गई थी उनमें से सिर्फ एक प्रतिशत ने झूठ बोला. इस प्रकार निगरानी और पकड़े जाने के डर से झूठ बोलने की दर में पहले की तुलना में कमी पाई गई.
भारत का मुद्दा :
भारत में कहा जाता है कि यहां चुनाव मुद्दों पर नहीं जाति, धर्म और व्यक्तित्वों से जुड़ी भावनाओं के आधार पर लड़े जाते हैं, ऐसे में नेताओं का अवसरवाद भुला दिया जाता है.
यह बात पूरी तौर पर सही नहीं है क्योंकि दूसरे मसले भी प्रतिनिधियों के चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं. अब चुनाव प्रचार और सरकार की उपलब्धियों के बारे में सूचना देने का काम अधिकांश आबादी के हाथ में पहुंच चुके मोबाइल फोनों के ज़रिए किया जाना लगा है.
यदि कोई ऐसी ऐसा मोबाइल ऐप लोगों को सुलभ करा दिया जाए जिसके ज़रिए वे जान सकें कि किसी विवादित मुद्दे पर किसी नेता का पहले क्या रुख रहा है और वह उसके प्रति कितना गंभीर है तो लोग अधिक जागरूक होंगे, बहसें और झड़पें भावनात्मक के बजाय तथ्यात्मक और परिणामदायक हो सकती हैं.
मासूमों पर आतंकियों के कायराना हमले इस्लाम के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है – असरार अहमद खान
उदयपुर। हिन्दुस्तान में मुसलमानों के सबसे बड़े धर्म स्थल सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के अध्यक्ष असरार अहमद खान ने तहरीक – ए- तालिबान जैसे आतंकी संगठनों के प्रति गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि ऐसे आतंकी संगठनों का इस्लाम ही नहीं किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं | असरार अहमद ने कहा इस्लाम में ऐसे घिनोने कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है | इस्लाम मुहब्बत का पैगाम देता है, आतंकियों के लिए हर मुसलमान के दिल में सिर्फ नफरत है, और भारतीय मुसलमान ऐसे किसी शख्श को इस्लाम धर्म का मानाने वाला कुबूल नहीं करेगा | असरार अहमद ने पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी सेना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन्ही तालिबानियों को एक समय में पाकिस्तानी सेना और सरकार का सहयोग मिला हुआ था |
असरार अहमद खान ने पाकिस्तान के पेशावर में आर्मी स्कूल पर हुए तालिबानी आतंकी हमले की घोर निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ घिनौना अपराध बताया है उन्होने साफ शब्दों में कहा कि जिहाद और इस्लाम के नाम पर इस प्रकार की आतंकी घटनाओं को अंजाम देना गैर शरई होते हुऐ इस्लाम के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होने कहा कि स्कूली छात्रों के साथ मंगलवार को आतंकियों ने खून की जो होली खेली है उसे दुनिया कभी नहीं भुला पाऐगी।
उन्होने एक ब्यान जारी कर पेशावर हमले को कायराना बताते हुए कहा कि आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान का यह घर्णात्मक एवं कायरतापूर्ण कृत इस्लाम विरोधी होते हूऐ ईन्सानियत के खिलाफ हैं ऐसे गैर इस्लामी काम को अंजाम देने के लिये आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान को इस्लाम से खारिज कर दुनिया के मुसलमानो को अपने दामन से आतंकवाद के दाग को साफ करने के लिये साकारात्मता से एक जुट होना होगा।
स्कूल में छात्रों और अन्य निर्दोष लोगों की जान लेने वाला यह एक ऐसा विवेकहीन बर्बरतापूर्ण कृत्य है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। इस हमले में ना केवल मासूम बच्चों का कत्ल.ए.आम किया गया है बल्कि मानवीयता की मूल धारणा को ही मारा गया है। दुख की इस घड़ी में हमारी प्रार्थनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपनों को खोया है। आतंकवाद ना कभी सही था ना कभी इसे सही ठहराया जा सकता है। उन्होने कहा कि तालिबान आतंकियों ने दिल दहला देने वाली यह घटना एक ऐसे समय अंजाम दी है जब शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद मलाला युसुफजई बच्चों की शिक्षा के लिए कहीं जोरदारी से अलख जगा रही थी।
ये बच्चे पाकिस्तान ही नहीं इंसानियत की अमानत थे। इनकी हिफाजत करना पाकिस्तानी फौजों की जिम्मेदारी थी मगर पाकिस्तानी फौज से इस जिम्मेदारी को निभाने में भारी चूक हुई है। पाकिस्तान के शासक और वहां के सैन्य अधिकारी यह समझें कि आतंकियों को पालने पोसने के कितने भयावह दुष्परिणाम होते हैं। वर्तमान में जो तालिबान आतंकी पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा संकट बन गए हैं उन्हें एक समय पाकिस्तान सरकार का भी सहयोग मिला और सेना का भी। पाकिस्तान को आतंकी संगठनों के मामले में अपनी रीति.नीति के साथ सोच विचार में भी व्यापक परिवर्तन लाने की जरूरत है।
कमजर्फ़ों ने खुद को इस्लाम से जोडक़र मुसलमानों को किया बदनाम – आतंकवादियों के खिलाफ मुस्लिम धर्म गुरुओं में गुस्सा

उदयपुर। देश और दुनिया में होने वाली आतंकी घटनाओं पर उदयपुर के ओलेमाओं-मौलानाओं ने आक्रोश जताते हुए इसको इस्लाम के खिलाफ बताया है। इस्लाम को मोहब्बत और भाईचारे का धर्म बताते हुए कहा कि इस्लाम में दहशतगर्दी और खौफ फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। मासूमों का क़त्ल करने वाले इस्लाम तो दूर वो इंसान कहलाने के लायक नहीं है। पाकिस्तान के पेशावर में मासूम बच्चों के कत्ले-आम पर दु:ख जाहिर करते हुए सभी ओलेमाओं ने तहरीके-ए-तालिबान जैसे आतंकी संगठनों को इस्लाम मानने वाला ही नहीं बताया। ओलेमाओं ने कहा कि ये लोग इस्लाम तो क्या किसी धर्म के नहीं हो सकते, क्योंकि आतंक जैसे कृत्य के लिए किसी धर्म में कोई जगह नहीं है।
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह कमिटी के सदर असरार अहमद खान ने कहा ……..
आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान का यह घर्णात्मक एवं कायरतापूर्ण कृत इस्लाम विरोधी होते हुए इंसानियत के खिलाफ हैं। ऐसे गैर इस्लामी काम को अंजाम देने के लिए आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान को इस्लाम से खारिज कर दुनिया के मुसलमानों को अपने दामन से आतंकवाद के दाग को साफ करने के लिये साकारात्मता से एक जुट होना होगा। आतंकी घटनाओं को अंजाम देना गैर शरई होते हुऐ इस्लाम के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है। आतंकवाद जैसे कोई घटना के लिए इस्लाम में कोई जगह नहीं है।
-असरार अहमद खान, सदर ख्वाजा मोइनीद्दीन चिश्ती दरगाह कमेटी, अजमेर
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बोला
कुरआन में फरमाया गया है कि जमीन पर फसाद मत करो। अपनी बोली भी ऐसी रखो जिससे किसी को दु:ख नहीं पहुंचे और जिस तरह से ये आतंकी मासूम लोगों का क़त्ल करते हैं, वो न तो इस्लाम में है और ना ही कुरआन में है, न ही किसी हदीस में और ना ही अल्लाह इसकी इजाजत देता है। हुजूर मोहम्मद साहब ने फरमाया है कि परिंदों के घोसलों को भी मत तोड़ो और ये कमजर्फ़ लोग तो मासूम बच्चों और बेगुनाह लोगों को मारते हैं, जाने किस इस्लाम की बात कर रहे हैं ये लोग। अल्लाह को मानने वाले नहीं है ये शैतानी लोग। इनको इनके किए कि कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
-मौलाना मुर्तज़ा, पल्टन मस्जिद
मासूमों और बेगुनाहों को कत्ल करना शैतानी काम है, जिसकी इस्लाम में कोई गुंजाइश नहीं। ऐसे कत्लों गारत की इस्लाम में कोई जगह नहीं, जिस मजहब में बच्चों, बूढ़ों और औरतों चाहे जिस भी मजहब की हो, उनके लिए ख़ास हक़ दे रखे हैं। उन पर जुल्म तो दूर जऱा सी तकलीफ भी इस्लाम के खिलाफ हो जाती है, तो फिर बेगुनाहों के क़त्ल की तो कही बात ही नहीं है। हुजूर का फरमान है मजलूमों, बच्चों, औरतों की हिफाज़त करना हर मुसलमान का फज़ऱ् है। किसी भी इंसान पर जुल्म करना हराम करार दिया है। कुरआन ने हर जगह मोहब्बत का पैगाम दिया है। इस्लाम में नफरत के लिए कोई जगह नहीं। मासूमों का क़त्ल करने वाले इस्लाम को मानने वाले हो ही नहीं सकते।
-मौलाना शकीरूल कादरी, धोलीबावड़ी मस्जिद
ज़ालिम है वो लोग, गुनाहे अज़ीम के हक़दार है, जिनकी जगह दोजख में है और जिन पर खुदा की लानत है। ऐसे लोगों को सूली पर चढ़ा देना चाहिए। मजहबे इस्लाम में ऐसे लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे लोग अपने आप को इस्लाम का मानने वाला कहते है। ये लोग तो इंसान कहलाने के लायक नहीं। फिर इस्लाम के लायक कैसे हो सकते हैं। हुज़ूर ने फरमाया है कि अगर तुम्हारा पडोसी चाहे जिस मज़हब को मानने वाला हो अगर वो भूखा सो गया तो तुम से खुदा भी नाराज़ हो जाएगा। इस्लाम में मसलमानों के लिए फरमान है कि जितनी खैर और इज़्ज़त तुम अपनी बेटी की करते हो उतनी ही खैर और इज़्ज़त एक ब्राह्मण की बेटी या दूसरे धर्म की बेटी की भी करो। फिर ये कायर और घटिया लोग कैसे इस्लाम को मानने वाले हो सकते हैं। ऐसे आतंकियों का कोई मजहब नहीं है। ये लोग तो खंजिर (सूअर) की जात के है। ऐसे कमजर्फ़ लोगों ने खुद को इस्लाम के साथ जोडक़र पूरी दुनिया में मुसलामानों और इस्लाम को बदनाम कर रखा है। आज हम इन पिल्लों की वजह से बदनामी झेल रहे हंै। जिस तरह से मासूम बच्चों को इन्होंने मारा खुदा इन्हें जन्नत तो दूर दोजख में भी जगह नहीं देगा। इस्लाम का पहला कलमा पहला पाठ मुहब्बत का है। फिर ये कैसे इस्लाम की बात करते हंै, जिसमें बंदूकों और मासूमों के क़त्ल की बात करते हैं। इनको इस जमीन पर कहीं नहीं रहने देना चाहिए।
-कारी अब्दुल क़ाज़ी अजमेरी



