चावंड में दो समुदायों के लोग भिड़े, माहौल बिगड़ा

-आईजी, एसपी मौके पर पहुंचे, भारी पुलिस जाब्ता तैनात, दो गिरफ्तार
उदयपुर। चावंड में आज सुबह एक दुकान पर पान मसाले को लेकर पहले दुकानदार और एक युवक में झगड़ा हुआ, जिसने बाद में सांप्रदायिक रंग ले लिया। दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने हो गए। तनावपूर्ण हालात को देखते हुए भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। दोपहर में आईजी जीएन पुरोहित और कार्यवाहक एसपी हनुमान प्रसाद भी मौके पर जायजा लेने गए। कार्यवाहक एसपी हनुमान प्रसाद ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में हैं और निगरानी रखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार चावंड में मातेश्वरी डेयरी हैं, जहां आज सुबह समुदाय विशेष का एक युवक गया, जिसने डेयरी मालिक नारायण तेली से पान मसाला मांगा। रुपए के लेन-देन को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया। इससे समुदाय विशेष के लोग वहां पहुंच गए, जिन्होंने दुकान में घुसकर तोडफ़ोड़ कर दी। काफी माहौल गरमा गया और दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाइश करके दोनों समुदाय के लोगों को शांत किया। उदयपुर और आसपास के थानों से भारी जाब्ता चावंड भेजा गया है, जो निगरानी रखे हुए हैं। आईजी जीएन पुरोहित, कार्यवाहक एसपी हनुमान प्रसाद ने भी वहां पर हालात का जायजा लिया। अभी हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। पुलिस ने शांतिभंग के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
वर्जन…
पान मसाले को लेकर दो पक्षों में झगड़ा हो गया था। मामले की जांच की जा रही है। हालत नियंत्रण में हैं। भारी जाब्ता तैनात कर दिया गया है, जो नजर रखे हुए हैं।
-हनुमान प्रसाद, कार्यवाहक एसपी

टेंशन देती है, नगर निगम

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-परिजनों के सौभाग्य से बच गए बाबेल, पहले भी एक कर्मचारी को आया अटैक, दूसरे ने छत से कूदकर किया आत्महत्या का प्रयास

उदयपुर। नगर निगम के एक्सईएन समरथसिंह बाबेल महाराणा भूपाल चिकित्सालय के आईसीयू मेें अब खतरे से बाहर है। श्री बाबेल ने कथित रूप से आत्महत्या के लिए दोनों हाथों की कलाइयां काट ली थी, लेकिन परिवार वालों के सौभाग्य से बच गए।
बताया गया है कि श्री बाबेल पर गलत काम करने के लिए लगातार दबाव डाला जा रहा था, जिससे परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया। इससे पहले बाबेल ने एक सुसाइड नोट में सारा वृतांत लिखकर आत्महत्या करने की मजबूरी बताई। यह पत्र पुलिस ने बरामद किया लेकिन उसे रिकार्ड पर लेने से पहले ही कुछ लोगों ने इसे लेकर फाड़ दिया। इसके बाद इस नोट के स्थान पर दूसरा कागज रखवा दिया गया। अब सारे मामले को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की जा रही है।
पता चला है कि श्री बाबेल के बयान भी अब बदलवा दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इसी तरह गलत काम करने का दबाव डालने से पिछले वर्षों में उमेश दांत्या को तनाव के कारण ऑफिस में ही हार्ट अटैक हुआ और महेश गोयर ने छत से कूदकर जान देने का प्रयास किया था। बताया गया है कि निगम में प्रतिनिधि गिरोहबद्ध होकर काम कर रहे हैं, जिनसे अधिकारियों और कर्मचारियों में खौफ का माहौल बना हुआ है। समरथ सिंह बाबेल के मामले को अब सत्ता पक्ष के पार्षद, महापौर और पुलिस साथ मिलकर एक्सीडेंट का रूप दे रहे है। घटना कल दिन की है, दूध तलाई क्षेत्र में नगर निगम के एक्सईएन समरथ सिंह बाबेल घायल व लहूलुहान अवस्था में पड़े मिले। उनकी हाथ की दोनों कलाइयां कटी हुई थी, जिनको बाद में महाराणा भूपाल चिकित्सालय पहुंचाया गया। डॉक्टरों का कहना है की हाथ की कलाइयां देख कर लगता है कि आत्महत्या की कोशिश की गई है।
सुसाइड नोट दो लाइन में बदला : सूत्रों के अनुसार समरथ सिंह बाबेल ने जब आत्महत्या की कोशिश की तब उनके जेब में सुसाइड नोट भी था, जिसमें उन्होंने कोलपोल में बन रहे अवैध नाले का जिक्र किया था। अब पुलिस बता रही है कि उनकी डायरी में सिर्फ दो लाइनें लिखी थी, जिसमें आत्महत्या खुद करना कुबूला तथा इसमें किसी का हाथ नहीं होना लिखा है।
नाले को लेकर थे परेशान : कोलपोल में बनने वाला नाला तकनीकी रूप से सही नहीं था, जिसको समरथसिंह बाबेल ने अपनी देख-रेख में बनाने से मना कर दिया था, उनका कहना था कि नाला बनाने के बाद अगर कोई बात हुई, तो मैं ही फंसूंगा। इस बात को लेकर उन्हें काफी प्रताडि़त कर रखा था। इससे पूर्व भी उनके साथ दुव्यवहार किया जाता रहा। लेकिन बाद में कुछ अधिक हो गया। बताया जा रहा है कि उनसे निगम द्वारा दिया गया वाहन और सारे अधिकार भी छीन लिए गए। एक्सईएन होते हुए भी उनसे व्यवहार एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जैसा हो रहा था। बाबेल चार महीनों बाद सेवा निवृत होने वाले थे और उनके व्यवहार को लेकर निगम का हर कर्मचारी उनकी तारीफ करता है।
वर्जन…
:निगम में ऐसा कोई कारण नहीं है कि वह आत्महत्या करें। यहां उनका व्यवहार अच्छा था। सत्ता पक्ष की तरफ से उन्हें कभी प्रताडि़त नहीं किया गया। छोटे-मोटे कामों की वजह से कुछ टेंशन हो सकती है, जो रूटीन है। लेकिन ऐसा कोई बड़ा कारण नजर नहीं आता।
– रजनी डांगी, महापौर
: नगर निगम में अफसरों पर दबाव बनाकर अवैध काम करवाए जा रहे हैं, जो अफसर अवैध काम से इनकार कर देता है, उसको प्रताडि़त किया जाता है। समरथसिंह बाबेल से मिलकर सभी विपक्ष के पार्षद इस तरह के कृत्य के खिलाफ आवाज उठाएंगे।
-दिनेश श्रीमाली, नेता प्रतिपक्ष
: समरथसिंह बाबेल एक भला आदमी है, जिससे सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि अवैध काम करवाना चाहते थे। मना करने पर उन्हें अपमानित किया गया। और यह परिपाटी काफी समय से चली आ रही है। पूर्व में भी कई अफसरों और कर्मचारियों को प्रताडि़त किया जा चुका है, जिन्होंने आत्महत्या की कोशिश की और इस्तीफा भी दे दिया।
– अजय पोरवाल, कांग्रेसी पार्षद
:मुझे नहीं लगता की नाले की बात को लेकर वह कोई दबाव में थे। उनके साथ कोई दुर्घटना हुई होगी, जिसकी पुलिस जांच चल रही है। निगम में उनसे कभी दुव्र्यव्हार नहीं हुआ।
– प्रेमसिंह शक्तावत, अध्यक्ष, निर्माण समिति
: समरथसिंह बाबेल को घायल अवस्था में अस्पताल लाया गया, उन्होंने अपने साथ दुर्घटना होने का बयान दिया है। जेब में दो लाइन का सुसाइट नोट मिला है, मामले की जांच की जा रही है।
-दुर्गाराम, थानाधिकारी घंटाघर

ट्रेन लूट पर पर्दा डालने की गंदी कोशिश

स्वीकार क्यों नहीं कर लेते की लूट हुई थी?, पीडि़तों ने जब लूट की वारदात बताई, तो चोरी में क्यों रिपोर्ट दर्ज की गई?

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उदयपुर। देबारी के पास रतलाम-उदयपुर एक्सप्रेस ट्रेन में रविवार रात को हुई लूट की वारदात पर रेलवे और पुलिस, दोनों ही पर्दा डालने की गंदी कोशिश की जा रही है। सच को स्वीकार करने की हिम्मत दोनों ही महकमों में नहीं दिखाई पड़ रही है। रात एक बजे यहां राणा प्रतापनगर पर सैकड़ों यात्रियों ने हंगामा करते हुए लूट की वारदात की तस्दीक की, जिसे जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है, जबकि रेलवे और शहर पुलिस को चाहिए कि वे शहर के इतना करीब लूट की वारदात को अंजाम देकर गए बदमाशों को सींखचों के पीछे धकेले, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है, क्योंकि अगर लूट की वारदात को स्वीकार कर लिया जाता है, तो दोनों ही महकमों की भद्द पीट जाती है।
इस वारदात के बाद रेलवे और पुलिस के सभी अधिकारियों के अलग-अलग बयान आ रहे हैं। कोई लूट की वारदात से इनकार नहीं कर रहा है, तो कोई इस वारदात को महज चोरी की घटना बताकर पर्दा डाल रहा है, जबकि दूसरी तरफ
ट्रेन में मौजूद पीडि़त यात्री इस घटना को लूट की वारदात बता रहे हैं। वे ये भी बता रहे हैं कि लुटेरे कच्छा-बनियान गिरोह के थे और शरीर पर ग्रीस चौपड़ रखा था। पहली बार सुनियोजित ढंग से हुई रेल लूट की घटना ने पुलिस विभाग और रेल सुरक्षा की पोल खोल कर रख दी है। अभी तक कोई लुटेरा पुलिस के गिरफ्त में नहीं आया है। एक तरफ पुलिस मान रही है कि ऑउटर सिग्नल पर टेम्परिंग (सिग्नल में छेड़छाड़) या चैन पुलिंग कर टे्रन रोकी गई है, लेकिन दूसरी तरफ फरियादी महिला यात्री को प्रतापनगर जीआरपी थाने से डबोक थाने के चक्कर लगवाते हुए मामूली चोरी की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है, जिसमें लूट की धारा बाद में जोडऩे का आश्वासन दिया जा रहा है
वर्जन…
रतलाम-उदयपुर एक्सप्रेस टे्रन में हुई वारदात को फरियादी महिला के बयानों के आधार पर चोरी का मामला दर्ज किया गया है, लेकिन घटना हालात को देखते हुए लूट से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। मामले की जांच चल रही है, अगर मामला लूट का प्रकट होता है, तो लूट की धारा भी जोड़ दी जाएगी। ऐसी घटना दोबारा नहीं हो। इसके लिए रात में चलने वाली ट्रेनों में सुरक्षा बंदोबस्त बढ़ा जाएंगे।
-किशन सहाय, एसपी, जीआरपी
घटना को जितना बड़ा बताया जा रहा है, उतनी बड़ी घटना नहीं है। सिर्फ एक महिला का पर्स एक उचक्का लेकर भाग रहा था, जिसको देखकर वह चिल्लाई और उसकी चीख सुनकर ट्रेन के बाहर खड़े यात्री भी उसके पीछे भागे। हालांकि जांच में सामने आया है कि ट्रेन को सिग्नल में टेम्परिंग करके रोक गया था, लेकिन इसमें किसी गिरोह का हाथ नहीं है। फिर भी यदि लूट का मामला सामने आया, तो लूट की धारा भी जोड़ दी जाएगी।
-हनुमान प्रसाद, एएसपी (हेड क्र्वाटर)
मामले की जांच चल रही है। लुटेरे कितने थे? अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है। जांच में अभी तक यही पता चला है कि तीन लोगों को ट्रेन में स उतरकर भागते हुए देखा था। चेन पुलिंग करके रोकी या सिग्नल में गड़बड़ी करके रोकी। यह रेलवे की रिपोर्ट आने पर ही पता चल पाएगा।
-राशि डोगरा, डबोक थानाधिकारी (प्रशिक्षु आईपीएस)

राजस्थान में अगले दो दिनों में बरसेंगे मेघ

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राजस्थान में लू का असर कम होने के बाद अब उमस पसीने छुड़ा रही है लेकिन अगले 48 घंटे में प्रदेश के दक्षिण पूर्वी हिस्सों से शुरू होने वाला मानसून पूर्व बारिश का दौर मौसम के तीखे तेवरों से राहत दिलाएगा। दक्षिण पश्चिमी मानसून गुजरात के दक्षिणी हिस्सों में दस्तक दे चुका है। हवाओं के बदले रूख और कम दबाव का क्षेत्र बनने पर प्रदेश के दक्षिण पूर्वी हिस्सों से मानसून पूर्व बारिश का दौर शुरू होने की अनुकूल परिस्थितियां बनने लगी हैं।

फिर भी तीखे रहेंगे तेवर
सोमवार को छितराए बादलों की आवाजाही शुरू होने पर सुबह धूप की तपिश से राहत मिली, वहीं करीब 18 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवाओं से उमस से थोड़ी राहत मिली। हालांकि बादलों के कारण सुबह पारा चढ़ा और सुबह नौ बजे दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

वहीं रात का तापमान 1.2 डिग्री बढ़कर 32.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार शहर में आज दिन में पश्चिमी हवाएं चलने पर दिन में गर्मी के तेवर तीखे रहेंगे। वहीं दोपहर बाद धूलभरी हवाएं चलने व बौछारें पड़ने से गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।

दो टोलियों में थे लुटेरे ट्रेन के अन्दर भी थे लुटेरे

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-देबारी के निकट रेल लूट का मामला, ट्रेन में भी सवार थी लूटेरों की एक टोली, दूसरी टोली ने देबारी के पास सिग्नल के तार काटे और दिया लूट की वारदात को अंजाम।
उदयपुर। देबारी के निकट देर रात रतलाम-उदयपुर एक्सप्रेस में हुई लूट के मामले में पुलिस को नई जानकारी हाथ लगी है। पता चला है कि कच्छा-बनियान गिरोह के बदमाश दो टोलियों में थे। इनमें से एक टोली ट्रेन में सवार थी, जिसने ट्रेन की चेन खींचकर ट्रेन को रूकवाया, वहीं दूसरी टोली ने देबारी आउटर के बाहर सिग्नल के तार कार दिए। ट्रेन रूकने के बाद लुटेरे ट्रेन के डिब्बों में चढ़े, जिन्होंने जमकर लूटपाट की। शहर के इतना करीब ट्रेन लूट की इस वारदात ने शहर पुलिस के साथ ही रेलवे पुलिस की मुस्तैदी की पोल खोल दी है। मामले की जांच की जा रही है, लेकिन लुटेरों का कोई सुराग अब तक हाथ नहीं लगा है।
घटना देर रात एक बजे की है। देबारी आउटर के बाहर ट्रेन में मौजूद लुटेरों ने
ने चेन खींच ली, वहीं बाहर मौजूद लुटेरों की दूसरी टोली ने सिग्नल के तार कार दिए। ट्रेन के रूकने के बाद लुटेरे ट्रेन में चढ़े, जिन्होंने जमकर लूटपाट की। यात्रियों के साथ मारपीट करके उनके मोबाइल छीन लिए, सोने की चेन और अन्य आभूषण उतरवाए। लुटेरों ने चेहरे व हाथ-पैरों पर ग्रीस लगा रखा था। यह लूटपाट जनरल कोच 14407 और 14407 की गई। बाद में यात्रियों से मारपीट और पथराव करते हुए लुटेरे भाग गए, जिनका कोई सुराग न तो रेलवे और ना ही शहर पुलिस के हाथ लगा है।
ट्रेन लेट होने की परवाह नहीं: अगर रेलवे विभाग मुस्तैद होता, तो शायद लुटेरे पकड़े जाते। जब ट्रेन आउटर पर रूकी, तो सिग्नल पर मौजूद गार्ड या रेलवे के कर्मचारी को जानकारी लेनी चाहिए थी। आधा घंटा लूट चलती रही लेकिन ट्रेन क्यों रूकी हुई है? इसकी किसी ने सुध नहीं ली, जबकि ट्रेन के जीपीएस से जुड़े होने के कारण हर जगह की इंफोर्मेशन होती है, जिससे पता चलता है कि ट्रेन कहां पर है?
असुरक्षित रेलवे : रेलवे पुलिस चाहे ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा का दम भरती हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। खुद रेलवे अधिकारी और कर्मचारी ही यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उदयपुर-जयपुर के बीच दिन में दो ट्रेने चलती है। उनमें एक भी सुरक्षा गार्ड नहीं होता। यही हाल बाकी ट्रेनों का भी है। यही नहीं साधारण डिब्बे के यात्रियों की कभी आईडी तक चैक नहीं की जाती।
सुरक्षागार्ड की कमी : उदयपुर से रोज करीब 16 ट्रेन जाती है और इतनी ही ट्रेनें आती है। इनमें कई ट्रेनें लंबी दूरी की है, जो रातभर सफर के बाद अपने गंतव्य पर पंहुचती है। कुछ ट्रेनों को छोड़ दे, तो रेलवे पुलिस यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बिलकुल भी गंभीर नहीं है। लंबी दूरी की ट्रेनों के हर डिब्बे में एक बंदूकधारी गार्ड तैनात होना चाहिए, जबकि इन ट्रेनों में इक्का-दुक्का ही मिलते हंै। डेली चलने वाली इंटरसिटी और जयपुर स्पेशल एक्सप्रेस में तो वो भी नजऱ नहीं आते। ऐसे में कई बार यात्रियों में आपस में मारपीट भी हो जाए, तो बीच बचाव के लिए कोई नहीं आता।
टीसी खुद करते हैं सुरक्षा में छेद : नियमानुसार टीसी द्वारा हर यात्री की फोटो आईडी को चैक किया जाता है, लेकिन यहां टीसी खुद ही इन नियमों की धज्जियां उड़ाते देखे जा सकते हैं, जो लोग पहले से टिकट लेकर बैठते हैं, उनके तो आईडी चैक की जाती है, लेकिन अगर कोई छोटे या बीच में किसी स्टेशन से बैठे, तो उनको टीसी पैसे लेकर ना केवल सीट उपलब्ध करवाता है, बल्कि उनकी आईडी भी चैक नहीं की जाती।

हत्या के विरोध में कलेक्ट्री पर प्रदर्शन अजय पूर्बिया हत्याकांड के दो आरोपी रिमांड पर

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-अन्य आरोपियों की तलाश,
उदयपुर। गोवर्धनविलास क्षेत्र में हिस्ट्रीशीटर नरेश हरिजन के राइट हैंड अजय पूर्बिया की गोली मार कर हत्या में शामिल घाणेराव की घाटी (घंटाघर) निवासी जगत पुत्र बिहारीलाल पालीवाल और चमनपुरा (हाथीपोल) निवासी पुष्करलाल पुत्र वेणीराम यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर आज न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। बताया जा रहा है कि इन दोनों आरोपियों ने अजय की हत्या से पूर्व उसकी रैकी की थी।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि प्रवीण पालीवाल की हत्या का बदला लेने के लिए अजय पूर्बिया की हत्या की योजना बनाई थी। योजना के तहत प्रवीण पालीवाल के दोस्त प्रवीण वसीटा ने यह योजना बनाई और अजय पर नजर रखी जा रही थी। नौ जून को सूचना मिली कि अजय व उसका एक साथी विनोद जैन टेक्नोय मोटर्स पर कार सर्विस कराने जाएगा और उसी दिन शाम को परिवार सहित शहर से कहीं बाहर चला जाएगा। प्रवीण ने लगभग सात बाइक व पांच कारों में गैंग के सदस्यों को अजय के पीछे लगा दिया। प्रवीण को जैसे ही सूचना मिली कि अजय कार को सर्विस पर देकर बाहर निकल रहा है, तो बलीचा बाइपास पर प्रवीण वसीटा और उसके साथी ने अजय पूर्बिया की गोली मार कर हत्या कर दी। इस हत्याकांड में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे, जिनकी तलाश की जा रही है। इधर, अजय पूर्बिया की हत्या के विरोध में आज कलाल समाज की तरफ से कलेक्ट्री पर प्रदर्शन किया गया। समाज के लोगों ने अजय के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग की।

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अनियंत्रित बस दुकान में घुसी

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-चालक सहित एक दर्जन घायल, तीन गंभीर
उदयपुर। प्रतापनगर चौराहे के पास आज तड़के एक बस अनियंत्रित होकर एक दुकान में घुस गई। हादसे बस ड्राइवर सहित एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार के आज तड़के बस उदयपुर से अहमदाबाद जा रही बस प्रतापनगर चौराहे के पास अनियंत्रित होकर आदिनाथ ऑटो मोबाइल्स नामक दुकान में घुस गई। बस इंद्रगढ़ निवासी गोविंद (३३) चला रहा था। इस हादसे में बस ड्राइवर गोङ्क्षवद सहित लगभग एक दर्जन यात्री घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने १०८ एम्बुलेंस की मदद से सभी घायलों को एमबी हॉस्पीटल पहुंचाया, जहां तीन यात्रियों की हालत गंभीर बजाई जा रही है। पुलिस ने घायलों के परिजनों व बस मालिक को सूचना दे दी है। बताया जा रहा है कि बस में मध्यप्रदेश के लगभग ३० मजदूर सवार थे, जो अहमदाबाद मजदूरी के लिए जा रहे थे।
ये हुए हादसे में घायल: इस हादसे में बस चालक गोविंद, खलासी परमेश्वर, नंदू, अशरफ, जहांगीर, गुल्ली, निर्मल, पारखचंद, राहुल सहित लगभग एक दर्जन लोग हादसे में घायल हो गए।
आए दिन हादसे: शहर के प्रतापनगर क्षेत्र में खस्ताहाल सड़क के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। यहां पर ट्रैफिक का दबाव भी ज्यादा है, जो भी हादसों का एक कारण है। पुलिस रिकार्ड पर गौर किए जाए, तो साल २०१४ में अब तक ५० से अधिक हादसे हो चुके हंै और १९ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ६५ से अधिक लोग घायल हो गए।
युवक की मौत: डबोक क्षेत्र के नांदवेल रोड पर रविवार को दो बाइक आमने -सामने टकरा गई। हादसे में एक युवक की मौत हो गई। पुलिस ने अनुसार करणपुर निवासी मांगीलाल (35) पुत्र रत्ता गमेती बाइक लेकर काम से जा रहा था। उसी दौरान डाग मोड़ पर सामने के आ रही एक अन्य बाइक ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए। गांव के लोगों ने तत्काल ही १०८ की मदद से दोनों को एमबी हॉस्पीटल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान मांगीलाल की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

एमडब्ल्यूएल को नकारना एक साजिश

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-वेटलैंड संरक्षण कानून के तहत हो झीलों-तालाबों का संरक्षण
उदयपुर। सभी झीलें व तालाब वेटलैंड की श्रेणी में आते है। वेटलैंड संरक्षण क़ानून के तहत झीलों-तालाबों का अधिकतम भराव तल (एमडब्लूएल) तक सुरक्षित रखना आवश्यक है। ऐसे में मदार, बड़ी, पीछोला, फतहसागर, उदयसागर सहित राजस्थान के सभी छोटे-बड़े तालाबों के अधिकतम भराव तल तक के सबमर्जेन्स को सुरक्षित व यथावत रखा जाए। उक्त विचार डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल, झील संरक्षण समिति एवं चांदपोल नागरिक समिति द्वारा आयोजित पीछोला तालाब पर रविवारीय श्रमदान पश्चात हुए संवाद में व्यक्त किए गए।
झील संरक्षण समिति के सहसचिव एवं वेटलैंड टास्क फोर्स के सदस्य रहे अनिल मेहता ने कहा कि १२ वर्ष पूर्व झील संरक्षण समिति ने उदयपुर की झीलों को वेटलैंड सिद्धांतों के तहत संरक्षित करने की राय दी थी। इस पर प्रशासन ने वेटलैंड टास्क फोर्स का गठन भी किया, लेकिन टास्क फोर्स में कुछ ऐसे सदस्य थे, जो वेटलैंड सिद्धांतों का विरोध रखने वाले थे। ऐसे सदस्यों ने एक मुहीम के तहत वेटलैंड विचार का विरोध किया। यह एक षड्यंत्र था, ताकि झीलों के सबमर्जेन्स की भूमि को भू-माफियाओं के हवाले किया जा सके।
चांदपोल नागरिक समिति के तेजशंकर पालीवाल ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के वेटलैंड संरक्षण निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यह अफसोस का विषय है कि उदयसागर को वेटलैंड सिद्धांतों व कानूनों के तहत सुरक्षित करने के निर्णय के साथ ही उसके एमडब्ल्यूएल को घटाने की कोशिशें भी प्रारंभ हो गई है। उदयसागर के ओवरफ्लो को चौड़ा कर पानी निकासी करने के पीछे उस टापू को बहार करना है, जिस पर होटल का निर्माण हो रहा है।
मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि उदयपुर की झीले न्यायालय के निर्देशों से एमडब्ल्यूएल पर नोटिफाइड है, लेकिन भू माफियाओं के लालच व दबाव में न्यायालय की सीधी अवमानना हो रही है। एक तरफ जल भराव बढ़ाने के मकसद से नर्वदा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय केंद्र सरकार ले रही है, वही उदयसागर सहित राजस्थान की झीलों के जलभराव को छोटा करने के हुए प्रयासों पर राज्य सरकार को विराम लगाना चाहिए ।
संवाद से पूर्व पीछोला के अमरकुंड क्षेत्र में रविवारीय श्रमदान के तहत झील से शराब की बोतलें, खाद्य अखाद्य वस्तुए, पोलिथिन, फाटे पुराने कपड़े, जलीय घास, पूजन हवन सामग्री निकली गई। श्रमदान में कुल दीपक पालीवाल, तेज शंकर पालीवाल, इंदूशेखर व्यास, नितिन सोनी, अनिल मेहता, मोहनसिंह चौहान, रामलाल गहलोत, नंदकिशोर शर्मा, प्रतापसिंह राठौड़, स्वामी सागरानंद, कैलाश कुमावत, दुर्गाशंकर पुरोहित, भंवरलाल शर्मा, पुरुषोत्तम पालीवाल सहित कई नागरिकों ने भाग लिया।

37 साल में राजस्थान से सिर्फ एक मुस्लिम आईएएस

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जयपुर। राजस्थान में मुस्लिमों की करीब 12 प्रतिशत आबादी (70-80 लाख) है, लेकिन पिछले करीब 37 साल में सिर्फ एक मुस्लिम युवा आईएएस बन पाया है। हाल ही सिविल सेवा-2014 के तहत आईएएस का नतीजा जारी हुआ है और संभवत: इस बार भी किसी मुस्लिम अभ्यर्थी का चयन होना सामने नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि आईएएस बनने में किसी धर्म-समुदाय से होने-न होने का महत्व नहीं है, लेकिन देश की शीर्ष सेवा में इतने बड़े समुदाय में से बीते 38 वर्षो में सिर्फ एक का ही चयन होना इसकी शैक्षणिक और सामाजिक स्थिति के बेहद चिंताजनक होने का सबब तो है ही।

वर्ष 2013 में जाफर मलिक (सवाई माधोपुर) का आईएएस में चयन हो सका है, जो फिलहाल मसूरी में ट्रेनिंग ले रहे हैं। राजस्थान में मौजूदा आईएएस काडर में अभी करीब 221 अधिकारी हैं, इनमें भी कोई मुस्लिम आईएएस नहीं है। न तो राजस्थान मूल से, न बाहरी राज्यों से और न ही आरएएस या अन्य सेवाओं से पदोन्नत होकर आईएएस बनने वालों में कोई मुस्लिम शामिल हैं।

प्रदेश में सीधे चयन वाले आखिरी मुस्लिम आईएएस अधिकारी वर्ष 1975 बैच के सलाउद्दीन अहमद (मूलत: उत्तरप्रदेश से) थे, जो फरवरी-2012 में राज्य के मुख्य सचिव पद से रिटायर हो गए। वे फिलहाल आंध्रप्रदेश के राजभवन में राज्यपाल के सलाहकार पद पर कार्यरत हैं। गौरतलब है कि राज्य में जैन, सिख, ईसाई जैसे अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से भी आईएएस बन चुके हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के युवाओं का भी बड़ी संख्या में चयन होता रहा है।

अन्य राज्यों से लगातार हो रहा चयन
उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तमिलनाडू, जम्मू और कश्मीर, आंध्रप्रदेश, केरल, कर्नाटक, असम आदि प्रदेशों से लगभग हर वर्ष मुस्लिम युवाओं का चयन आईएएस में होता रहा है। यहां तक कि पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, पूर्वोत्तर से भी दो से पांच साल के बीच मुस्लिम अभ्यर्थियों का चयन होता रहा है।

आरएएस से मुख्यमंत्री तक
राज्य में यूं तो आरएएस, इंजीनियर, डॉक्टर, कुलपति, मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री जैसे पदों पर मुस्लिम रह चुके हैं, लेकिन आईएएस का ख्वाब अब भी बेहद मुश्किल है। (1975-76 से 2013 तक के आंकड़े केन्द्र-राज्य कार्मिक विभाग की वेबसाइट व सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार)

क्या कहते हैं जानकार
आईएएस कॉम्पीटिशन का मामला है। कॉम्पीट करेंगे तो ही चयन संभव है। युवाओं को पढ़ने-लिखने पर ध्यान देना चाहिए। प्रतियोगिता को फोकस कर तैयारी करनी चाहिए। चयन का यही एक रास्ता है।
एस. अहमद, पूर्व मुख्य सचिव राजस्थान

मुस्लिम युवाओं को घरों में आम तौर पर पढ़ने का माहौल नहीं मिल पाता है। समाज में कई स्तरों पर हो रहे भेदभाव से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सरकारों और समाज को मिलकर इस विषय में कुछ करना चाहिए।
डॉ. इकबाल सिद्दिकी व इंजीनियर मोहम्मद सलीम, जमाते इस्लामी हिन्द

मेल ने किया बेमेल

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रिसर्च: सोशल मीडिया के कारण पोस्टकार्ड और अंतरदेशी पत्र को भूले युवा
उदयपुर। लेकसिटी के युवाओं पर जयपुर में पढऩे वाले तीन युवकों के गु्रप ने जब सर्वे किया, तो पता चला कि केवल तीन प्रतिशत युवा ही जानते है पोस्टकार्ड का सही मूल्य क्या है? ९७ प्रतिशत युवाओं ने आज तक पोस्टकार्ड का उपयोग नहीं किया और कुछ टीन एजर्स को तो पता ही नहीं हैं कि पोस्टकार्ड क्या है? उन्हें ये भी जानकारी नहीं कि पोस्टकार्ड आखिर मिलता कहां है? 98 प्रतिशत युवाओं को अंतरदेशी पत्र क्या होता है? इसकी जानकारी भी नहीं और इसका उपयोग करने वाले तो महज एक प्रतिशत भी नहीं है।
जयपुर के कॉलेज में पढऩे वाले शहर के तीन युवा आशीष शर्मा, विक्रम दुबे और महावीर कोटिया ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट के लिए उदयपुर शहर का सर्वे किया, जिसमें यह तथ्य सामने आया वॉट्सएप्प और फेसबुक आदि सोशल साइट पर धड़ाधड़ मैसेज करने वाले युवा को डाकघर में मिलने वाले मैसेंजर पत्रों के बारे में कुछ जानकारी नहीं है।
एक समय था जब डाकघर में मिलाने वाले पोस्ट कार्ड, अंतरदेशी पत्र, पोस्ट लिफाफा आदि संदेश और अभिव्यक्ति के लिए बेहरत विकल्प थे, लेकिन बदलते दौर के साथ माध्यम में बदलाव आया और इनकी जगह वॉट्सएप्प ई -मेल, यहां तक की विशेष दिनों में भेजे जाने वाले ग्रीटिंग की जगह अब ई-ग्रीटिंग ने ले ली है। युवाओं को लगता है कि व्हाट्सप्प और फेसबुक बेहतर विकल्प है। सर्वे में यह बात सामने आई कि डाकघर का उपयोग युवा अब सिर्फ रक्षा बंधन में भेजी जाने वाली राखी, सरकारी नौकरी में काटे जाने वाले चालान के लिए ही करते हैं।
अब ई-राखी का दौर : अब तो राखी भी ई-राखी हो गई है। कुछ वर्ष पहले बहनें अपने भाई को राखी भेजने के लिए कई दिन पहले डाकघर के चक्कर लगाती थी, लेकिन अब तो कई वेब साइट ऐसी हो गई है, जहां पसंदीदा राखी चुन लो, वो लोग वो ही राखी भाई तक पहुंचा देंगे। पेमेंट ऑनलाइन हो जाएगा।

प्रेम पत्र के जमाने भी लद गए : कुछ समय पहले तक युवा प्रेम में लव लेटर लिखा करते थे, लेकिन सर्वे में सामने आया की 25 वर्ष तक के युवाओं ने अपनी प्रेमिकाओं को कभी लव लेटर लिखा ही नहीं। अभी सिर्फ व्हाट्सप्प पर मैसेज या चैट कर लेते हैं, बात हो जाती है। लव लेटर की जरूरत ही नहीं पड़ती। हालांकि कुछ युवा मानते हैं कि जो भावनाएं कागज पर उतारी जा सकती है, वह व्हाट्सप्प पर बयां नहीं हो सकती।
टेलीग्राम बंद अब टेलीग्राम एप्प : कुछ समय पूर्व ही टेलीग्राम सेवा को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया, लेकिन टेलीग्राम एप्प अब बाजार में हैं, जो व्हाट्सप्प की तरह ही काम करती है। सभी फीचर ज्यादा सुरक्षित है। इसको दो भाई निकोलाई और पावेल दुरोव ने मिलकर 2013 में लांच किया था।
व्हाट्सप्प और फेसबुक से परेशान : सर्वे में यह बात भी सामने आई कि कई समझदार युवा कहते हैं कि यह सिर्फ वेस्ट ऑफ टाइम है। व्हाट्सप्प और फेसबुक पर चैट के चक्कर में बहुत सारा टाइम खर्च होता है और अति हर चीज की बुरी होती है। कई युवाओं को यह भी पसंद नहीं क्योंकि यदि दिनभर इसमें लगे रहे तो कोई भी रचनात्मक कार्य नहीं कर पाते।