अक्षरधाम: ‘मेरा नाम सुरेश, रमेश या … होता तो ये नहीं होता’

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सो. – बीबीसी हिंदी140529021943_salim_hanif_sheikh_624x351_ankurjain

मुमताज़ बानो अब कभी नहीं मुस्कराती हैं. घरवालों ने उनको पिछले 11 सालों में कभी हँसते हुए नहीं देखा और उन्हें मुमताज़ का एक ही भाव समझ आता है. वो रो रही हैं ये बात घरवालों को उनके आंसू से ही पता लगती है क्योंकि उन्हें लकवा मार गया है.

अहमदाबाद के दरियापुर इलाक़े में कभी वह अपने बड़े बेटे सलीम शेख की प्रशंसा करते नहीं थकती थीं. आख़िर उसने सऊदी अरब जाकर दर्ज़ी का काम करके पैसा कमाया और अपनी दो बहनों की शादी करवाई, अहमदाबाद में मकान ख़रीदा, अपने बच्चे ज़ैद को इंग्लिश स्कूल में डाला और फिर वह हर महीने घर पैसा भी भेजते थे.
लेकिन उस दिन, क़रीब 11 साल पहले, मुमताज़ ने बेटे के लिए खीर बनाई थी. सलीम छुटियां ख़त्म कर सऊदी अरब वापस जाने की तैयारियां कर रहे थे. तभी घर के दरवाज़े पर दस्तक हुई और सलीम को कोई बुलाने आया.
लेकिन सलीम जब गए तो वापस लगभग 11 सालों बाद लौटे. वो 17 मई को घर वापस लौटे हैं.

इतने दिनों में बहुत कुछ बदल चुका है. अब घर फिर से किराये का है, ज़ैद अब उर्दू स्कूल में जाता है. मुमताज़ नहीं जानती कि यह सब उनके साथ क्यों हुआ, लेकिन सलीम कहते हैं कि शायद इस देश में मुसलमान होकर जन्म लेना कभी-कभी गुनाह हो जाता है.

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प्रताड़ना

वो कहते हैं, “मेरा नाम अगर सुरेश, रमेश या महेश होता तो मेरे साथ यह कभी होता?” सलीम को अक्षरधाम मंदिर हमले मामले में गुजरात पुलिस ने पकड़ा था और उन्हें लश्कर-ए-तैयबा और जैशे मोहम्मद का सदस्य बताया गया था.
24 सितंबर, 2002 को दो हमलावरों ने अक्षरधाम मंदिर के भीतर एके-56 राइफ़ल से गोलियां बरसाकर 30 से अधिक लोगों की हत्या कर दी थी और क़रीब 80 को घायल कर दिया था. इस मामले में आठ लोगों को गिरफ़्तार किया गया था, जिनमें से छह को आरोप मुक्त कर दिया गया है जबकि दो पर अभी मुकदमा चल रहा है.

सलीम शेख सऊदी अरब के रियाद शहर में एक शोरूम में दर्ज़ी का काम किया करते थे. उन्होंने कहा, “पुलिस ने मुझे 29 दिन अवैध तरीक़े से हिरासत में रखा और इस दौरान इतना पीटा कि आज भी मेरे पाँव कांपते हैं. जैसे कोई धूप में चलकर आया हो उस तरह की जलन होती है. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में 400-500 डंडे एक साथ मेरे पाँव के तलवे पर मरते थे. उस वक़्त मेरी पाँव की इन उंगली फ्रैक्चर भी हो गयी.”

सलीम को इस मामले में पोटा कोर्ट ने आजीवन कारवास की सज़ा सुनाई थी जिससे गुजरात उच्च न्यायालय ने बरक़रार रखा.

उन्होंने कहा, “मेरे कूल्हे पर आज भी 11 साल पुरानी मार के निशान मौजूद है. वह मंज़र याद आता है तो दिल दहल जाता है कि वापसी में भी हमारे साथ ऐसा न हो.”

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‘कौन से केस में जेल जाएगा’

सलीम ने कहा, “मुझे क्राइम ब्रांच ले जाने के बाद पुलिस ने मेरे बारे से पूछा कि मैं सऊदी अरब में क्या करता हूँ और मेरे दोस्त कौन है? मुझे कहा गया की यह जाँच मेरे पासपोर्ट की कोई ख़राबी की वजह से है. पर फिर मुझे मारना शुरू किया. मुझे कोई इल्म ही नहीं था कि वे मुझे क्यों मार रहे हैं.”
वो आगे बताते हैं, “फिर एक सीनियर अफ़सर ने मुझे बुलाया और पूछा सलीम कौन से केस में जेल जाएगा, हरेन पंड्या, अक्षरधाम या 2002 दंगे. मुझे तो इन तीन के बारे में कुछ ज़्यादा पता भी नहीं था. मैं 1990 से सऊदी में था और जब घर आता तब बस इनके बारे कभी बात होती. मेरे पास मार खाने की बिलकुल ताक़त नहीं बची थी और मैं जैसा वह कहते वैसा करता था.”

उन्होंने कहा, “मैंने तो बाक़ी अभियुक्तों को भी पहली बार जेल में देखा.”

सलीम पर आरोप लगा था कि वह सऊदी में भारतीय मुसलमानों को इकट्ठा करके उन्हें 2002 गोधरा दंगे और अन्य भारत विरोधी वीडियो दिखाते थे और फिर उनसे पैसा लेकर भारत में आंतकवादी गतिविधियों के तहत अक्षरधाम हमले को फाइनेंस करते थे.

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‘पुलिस की मनगढंत स्टोरी’

वो कहते हैं, “मैं पुलिस की मनगढंत स्टोरी में फिट बैठ रहा था. सऊदी में रहने वाला था और अहमदाबाद पैसे भेजा करता था. मैंने 2002 दंगों के बाद एक रिलीफ कैंप में अनाज और पानी की मदद करने के लिए 13,000 रूपए ज़कात के तौर पर दिए थे. बस उसी से शायद में पुलिस की नज़र में आया. वर्ना मैंने जो कभी सिग्नल तोड़ने का भी गुनाह नहीं किया तो फिर इतने सारे लोगों को मारने का आरोप. पिछले 11 साल इस कलंक के साथ मैंने हर पल दिल पर पत्थर रखकर बिताए.”

अपने परिवार की तकलीफ़ों के बारे में सलीम कहते हैं, “हमारा मकान बिक गया, छोटे भाई को परिवार चलाने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी, मेरे बच्चे अंग्रेजी स्कूल से उर्दू स्कूल में आ गए. अब गुजरात में उर्दू का कोई उपयोग नहीं. मेरी बेटी जो उस वक़्त चार महीने की थी आज छठी कक्षा में है और मुझसे अभी थोड़ा डरती है और अब अम्मी बिस्तर पर है.”
वो बताते हैं, “यह सब इसलिए कि मैं मुसलमान हूँ. कुछ लोग हमारी कौम में ख़राब होंगे और कुछ लोग किसी और कौम में. मैं तो ख़ुद टेररिज़्म के ख़िलाफ़ हूँ और इस देश पर उतना ही गर्व करता हूँ जितना कोई और. मैं मानता हूँ कि भारत देश का ही क़ानून ऐसा है कि देर से सही आपको इंसाफ़ ज़रूर मिलता है. हाँ पर मैंने इसकी बड़ी क़ीमत चुकाई है.”

सलीम के छोटे भाई इरफ़ान कहते हैं, “भाई को हिरासत में लेने के कुछ ही महीनों के बाद माँ को हार्ट अटैक आया और उन्हें लकवा मार गया. फिर वह जब भी भाई की तस्वीर देखती या अख़बार में उसके नाम के साथ आंतकवादी शब्द देखती तो पूरे दिन रोती रहती. उसने कई दिनों तक तो खाना छोड़ दिया था और रोजे रखती थीं.”

इरफ़ान उस वक़्त 18 साल के थे.

‘कोई है जो हमें आगे नहीं आने दे रहा’

जेल से निकलने के बाद सलीम इन दिनों अपने लिए एक दुकान ढूंढ रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास वक़्त बहुत कम है कि मैं अपनी बिखरी हुई ज़िंदगी भी समेट सकूं. अहमदाबाद में अब एक छोटी सी दुकान किराये पर लेकर वापस सिलाई का काम शुरू करूँगा. दुनिया बहुत आगे बढ़ गई है. मैं और मेरे बच्चे बहुत पीछे रह गए.”

सलीम अब अहमदाबाद के जूहापुरा इलाक़े में रहते हैं.

वो कहते हैं, “भारत को अब बदलना चाहिए. मैंने एक मुसलमान परिवार में जन्म अपनी पसंद से नहीं लिया था. तो फिर भेदभाव क्यों. अब हमें भी मुख्यधारा में शामिल करना चाहिए. भारत आगे बढ़े उसकी ख़ुशी हमें भी उतनी ही होती है. पर कोई है जो हमें नज़र नहीं आ रहा और वह हमें पीछे रखना चाहता है.”
सलीम कहते हैं, “जैसे मेरे पिछले साल गए, ऐसे और किसी के न जाए. हमें जेल में शाम को छह बजे कोठरी में बंद कर दिया जाता था इसलिए मैंने आकाश में तारे पिछले 11 साल से नहीं देखे थे. अब खुले आकाश के नीचे दिल की धड़कन फिर सुनाई दे रही है और मैं आंतकवादी नहीं हूँ इस बात का सुकून है वरना इतनी मार और जेल की कोठरी के भीतर खुद पर से यकीन उठ गया था.”

सलीम के वकील खालिद शेख कहते हैं, “सलीम को 29 दिन तक ग़ैरक़ानूनी हिरासत में रखा था और उनके शरीर पर आज भी मार के निशान मौजूद हैं. उसे मारकर और धमकाकर उसका कबूलनामा लिया गया था और यह बात सुप्रीम कोर्ट ने मानी.”

‘देश के क़ानून के भरोसे रहा जेल में ज़िंदा’

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सो. – बीबीसी हिंदी140527133608_aadam_ajmeri_and_wife_624x351_ankurjain

 

शबाना आदम अजमेरी अहमदाबाद के दरियापुर इलाक़े की एक म्युनिसिपल स्कूल में छठी क्लास की छात्रा हैं. जहां देश और उसकी क्लास के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, उद्यमी या सीए बनने के सपने देखते हैं, वहीं शबाना वकील बनना चाहती है.

यह पूछने पर क्यों…. वह चुप हो जाती है. कुछ पल बाद अपने पिता की ओर देखती हैं और फिर रोने लगती हैं.
उसकी मां नसीम बानो कहती हैं, “इसका बचपन क़ानून, पुलिस और वकीलों के क़िस्से सुनकर बीता है. बस तभी से यह कहती है कि यह वकील बनेगी और हम सबको बचाएगी.”

शबाना के पिता आदम सुलेमान अजमेरी 11 साल जेल में रहने के बाद 17 मई, 2014 को बाहर आए हैं. उन पर अक्षरधाम मंदिर हमले में शामिल चरमपंथियों का साथ देने का आरोप था और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी. लेकिन एक दशक तक जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन पर लगे सभी आरोप ख़ारिज कर दिए और उन्हें बाइज़्ज़त रिहा कर दिया.

24 सितंबर, 2002 को दो हमलावरों ने अक्षरधाम मंदिर के भीतर एके-56 राइफल से गोलियां बरसाकर 30 लोगों की हत्या कर दी थी और क़रीब 80 को घायल कर दिया था.

इस मामले में आठ लोगों को गिरफ़्तार किया गया था जिनमें से छह को आरोपमुक्त कर दिया गया है जबकि दो पर अभी मुकदमा चल रहा है.

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‘ग़ैरक़ानूनी हिरासत और प्रताड़ना’

8 अगस्त, 2003 को रात के क़रीब डेढ़ बजे आदम अजमेरी अपने भाई के ऑटो गैराज के नज़दीक दोस्तों के साथ बातचीत कर रहे थे तभी एक मारुति ज़ेन कार, जिसमें चार लोग सवार थे, उनके सामने आकर रुकी.

गाड़ी में से एक आदमी बाहर आया और पूछा, “तुम से आदम कौन है? तुम्हें बड़े साहब ने बुलाया है.”

मैं समझा नहीं कि कौन साहब. फिर वह बोला बड़े साहब ने क्राइम ब्रांच बुलाया है.

अजमेरी कहते हैं, “पुलिस से डर लगता है इसलिए थोड़ा घबराते हुए में उनके साथ चला गया. बस उस दिन के बाद ज़िन्दगी मानो नरक से बदतर हो गई.”
रात को ले जाकर मुझे एक अफ़सर के सामने बिठा दिया. अफ़सर ने पूछा क्या तुम मुझे जानते हो? मैंने कहा नहीं, तो बोले मेरा नाम डीजी वंज़ारा है. बोले तुम हरेन पंड्या के बारे में क्या जानते हो. मैंने कहा कि मैंने उनके क़त्ल के बारे में अख़बार में पढ़ा है. उन्होंने फिर पूछा कि तुम टिफ़िन बम ब्लास्ट के बारे में क्या जानते हो. मैंने कहा कुछ नहीं, तो बोले अक्षरधाम मंदिर हमले से तुम्हारा क्या ताल्लुक है? मैंने तो कभी अक्षरधाम मंदिर देखा भी नहीं था, तो मैंने कहा कुछ नहीं,”

अगस्त 8 को गिरफ़्तार हुए अजमेरी का दावा है कि अहमदाबाद पुलिस ने उन्हें क़रीबन 22 दिन बाद कोर्ट में पेश किया.

उन्होंने कोर्ट में दिए अपने बयान में दावा किया, “जब मैंने कहा कि मेरा किसी केस से कोई ताल्लुक नहीं है तो वरिष्ठ अधिकारी ने कहा डंडा पार्टी को बुलाओ और फिर उन्होंने मुझे हैवानियत की हद तक पीटा. क़रीब 20 दिन तक रोज़ वह मुझे दिन-रात, जब तक मैं बेहोश न हो जाऊं, तब तक मारते थे.”

वह कहते हैं जब उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था तब अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के कमरों 100 से 150 और लोग अलग-अलग कमरों में क़ैद थे.

अजमेरी के वकील ख़ालिद शेख कहते हैं, “सुनवाई के दौरान हमने अहमदाबाद क्राइम ब्रांच द्वारा अजमेरी की ग़ैरक़ानूनी हिरासत के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों की तस्वीरें पेश की थीं. हमने अदालत में गवाह भी पेश किए जिन्होंने कहा कि अजमेरी आठ अगस्त, 2003 से लापता था.”

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बदल गई दुनिया

अजमेरी कहते हैं, “एक आदमी पीछे पीठ पर बैठता था, दूसरा पाँव पकड़ता था और तीसरा एक बार में तलवे पर दो-तीन सौ डंडे मारता था.”

शेख बताते हैं, “अजमेरी ने कोर्ट में दाखिल किए गए अपने बयान में बताया कि ग़ैरक़ानूनी हिरासत के दौरान उन्हें कितने अमानवीय ढंग से प्रताड़ित किया गया था.”
अजमेरी के अनुसार, “कोर्ट ले जाने के दिन पहले मुझे धमकाया गया कि मैंने अगर कोर्ट में मुंह खोला या वकील करने की कोशिश की तो मेरे परिवार को मार देंगे. फिर मेरी बीवी और बच्चों को सीसीटीवी कैमरे में क्राइम ब्रांच में बैठे हुए दिखाया गया. मुझे कहा गया कि जहां कहा जाए हस्ताक्षर कर देना वरना कोर्ट से लौटते वक़्त रास्ते में कहीं भी गोली मार देंगे.”

वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने सुप्रीम कोर्ट में अजमेरी का पक्ष रखा था. वह कहते हैं, “अजमेरी को रिहा करने वाली दो सदस्यीय पीठ ने माना कि उनका अपराध की स्वीकारोक्ति वाला बयान स्वेच्छा से नहीं दिया गया था और पुलिस ने बदमाशी की है.”

दस बाई दस के एक कमरे में अपनी बीवी और पांच बच्चों के साथ रह रहे आदमभाई अब खुश हैं, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान हैं.

कहते हैं, “11 साल जेल में आतंकवादी बनकर जिस कोठरी में रहा, वह इस घर से बड़ी थी लेकिन वहां मैं एक ज़िंदा लाश था और सिर्फ़ इस उम्मीद पर ज़िंदा था कि जिस देश का मैं नागरिक हूं, उसका क़ानून पूरी तरह अंधा नहीं है और मुझे इन्साफ मिलेगा.”

अजमेरी बताते हैं, “इस केस ने मेरे और मेरी बीवी से ज़्यादा मेरे बच्चों का जीवन बर्बाद कर दिया. पुलिस के मुझे पकड़कर ले जाने के बाद मेरी बीवी के तो पांव तले ज़मीन ख़िसक गई. छह बच्चे (एक बेटी की अब शादी हो चुकी है), एक कमाने वाला और वह भी जेल में. मेरी बीवी और बच्चों ने ये 11 साल रो-रो कर निकाले हैं.”

“बच्चों का स्कूल छूट गया. अखबारों में बड़े-बड़े फ़ोटो छपे थे मेरे, जिसके बाद बच्चों ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया, क्योंकि वे लोगों से नज़रें नहीं मिला पाते थे और आख़िर कितनों को कहते कि अब्बू बेकसूर हैं.”

उन्होंने कहा, “मैं इनसे कहता था कि मैं नहीं पढ़ पाया क्योंकि हमारे अब्बू के पास पैसे नहीं थे और यह अब अपने बच्चों से कहेंगे कि हम नहीं पढ़ पाए, क्योंकि इनके अब्बू आंतकवाद के झूठे केस में जेल में थे. अब में खुले आसमान के नीचे हूं लेकिन जेल की ज़िन्दगी और 11 साल पहले पड़ी मार नहीं भूल पाता,”

“मुझे हर पल लगता है कि मेरी आँखों के सामने अब भी सलाखें और जाली हैं. और इधर बाहर दुनिया इतनी बदल गई है कि मानो मैं 11 साल नहीं, 1100 साल बाद बाहर आया हूं.”

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बददुआ
अजमेरी अपने से मिलने आए लोगों को अब भी अपना पूरा नाम बताने से पहले अपना कैदी नंबर बोल जाते हैं. कहते हैं, “मैं ही जानता हूं कि जेल के अंदर ज़िंदगी कैसे बसर हुई. क्या था मेरा कसूर? मैं भी इस मुल्क का एक नागरिक हूँ, जितना हर हिंदुस्तानी को होता है, उतना ही गर्व है मुझे इस पर.”

यह पूछे जाने पर कि उन्हें क्या लगता है कि उन पर ही मामला क्यों दर्ज किया गया?

अजमेरी कहते हैं कि उन्होंने 1998 में क्लिक करें बीजेपी पर चुनाव के दौरान धांधली का आरोप लगाया था और कोर्ट में याचिका भी दायर की थी शायद इसका संबंध उसी से है.

वह कहते हैं, “कांग्रेस जीते या बीजेपी इससे मुझे कोई मतलब नहीं था, लेकिन जब मैंने अपने इलाक़े में बैलेट पेपर की धांधली होते देखी तो रिटर्निंग अफ़सर को शिकायत की और कोर्ट में एप्लीकेशन भी लगाई, लेकिन उस मामले में कुछ हुआ नहीं. मुझे लगता है तबसे मैं पुलिस के नज़र में था. बहरहाल कुछ भी हो मेरी ज़िन्दगी तबाह करने वालों को मेरे बच्चों और बीवी की आह ज़रूर लगेगी.”

अजमेरी और अन्य कई आरोपियों को पोटा में अंदर करने वाले और फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में सज़ा काट रहे वंजारा भी उसी जेल में थे, जहां अजमेरी को रखा गया था.

वह कहते हैं आज भी जब उनका या घर के किसी भी सदस्य का दुआ के लिए हाथ उठता है तो वे क्लिक करें वंजारा के जेल में रहने की दुआ करते हैं.

अपने आंसू पोंछते हुए अजमेरी कहते हैं, “बददुआ तो वंज़ारा को लगी है और हम दुआ कर रहे हैं कि वह कभी बाहर न आएं. मेरी बूढ़ी माँ मेरे इंतज़ार में अल्लाह को प्यारी हो गई. खून के आंसू रोए हैं हम सब.”

16 तोला सोना और एक लाख नकद चोरी

-शक्तिनगर में हुई चोरी की वारदात, शादी में गया था परिवार

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उदयपुर। शक्तिनगर में बीती रात एक सूने मकान का ताला तोड़ कर चोर १६ तोला सोने के जेवरात व एक लाख नकद चुरा ले गए। इस दौरान मकान मालिक सहित पूरा परिवार सौ Èीट रोड पर एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। रात दो बजे जब पूरा परिवार लौटा तो चोरी का पता चला।
पुलिस के अनुसार शक्तिनगर निवासी गिरधारी पुत्र मूरलीधर डोडेजा सौ Èीट रोड पर एक शादी समारोह में भाग लेने के लिए रात दस बजे गया था। पीछे से चोरों ने मकान के मेनगेट का ताला तोड़ दिया और अंदर घुसे चोरों ने अलमारी से १६ तोले सोने के जेवरात व एक लाख की नकदी चुरा ले गए। जब रात दो बजे गिरधारी डोडेजा परिवार के साथ लौटे, तो देखा कि मेनगेट का ताला टूटा हुआ है और मकान के अंदर का दरवाजा अंदर से बंद है। इस पर सभी लोग पिछले दरवाजे से अंदर घुसे और अंदर जाकर देखा, तो सारा सामान बिखरा था और अलमारी का ताला टूटा था। सूचना मिलने पर आज सुबह सूरजपोल पुलिस जाब्ते के साथ पहुंची। मौका मुआयना किया और गिरधारी की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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बारी घाट को कराया अतिक्रमण मुक्त

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IMG_0369-पूर्व में अतिक्रमण हटाते समय हुआ था पथराव, इसलिए तैनात किया गया पुलिस जाब्ता।
उदयपुर। नगर निगम ने आज अतिक्रमण निरोधी कार्रवाई करते हुए चांदपोल में बारी घाट पर बरसों पुराने अतिक्रमण को हटा दिया। कुछ दिन पहले यहां पर अतिक्रमण कार्रवाई करने गए नगर निगम के अधिकारियों पर अतिक्रमियों ने पथराव किया था, जिसकी वजह से आज भारी पुलिस जाब्ते के साथ यह कार्रवाई की गई।
चांदपोल दरवाजे के पास मनोहर कुमावत द्वारा शहर कोट और सड़क पर अतिक्रमण कर वहां घोड़ों का अस्तबल बनवा दिया गया था। दो महीने पूर्व जब नगर निगम के अधिकारी अतिक्रमण हटाने गए, तब स्थानीय वार्ड पार्षद गंगा राम ने मनोहर कुमावत से शपथ पत्र दिलवा दिया था कि 15 दिन में वह खुद ही अपना अस्तबल और अतिक्रमण हटा देगा, लेकिन दो महीने बाद भी स्थिति वैसी ही रही। कुछ दिन पूर्व जब नगर निगम के अधिकारी अतिक्रमण हटाने पहुंचे, तो मनोहर कुमावत और घर की और महिलाओं ने नगर निगम अधिकारियों पर पथराव किया और वहां से बैरंग लौटा दिया। आज सुबह आठ बजे नगर निगम की राजस्व अधिकारी अनिता मित्तल, निरीक्षक नितेश भटनागर, नगर निगम डिप्टी जीवनसिंह, घंटाघर, हाथीपोल और अंबामाता के थानाधिकारी सहित 100 से अधिक पुलिसकर्मियों का जाब्ता चांदपोल पहुंचा और कार्रवाई शुरू की तथा अतिक्रमण की हुई जगह से घोड़ो को हटाकर निर्माण और टिन-तप्पड़ हटाने की कार्रवाई शुरू की। वहां रखा सारा सामान जब्त किया गया। अतिक्रमण करने वालों ने भारी पुलिस जाब्ते को देख कोई विरोध नहीं किया।
तीसरी मंजिल का निर्माण भी हटाया: मनोहर कुमावत ने पास ही बने अपने मकान की तीसरी मंजिल का काम भी शुरू कर दिया था तथा छत डालने की तैयारी कर ली थी। शंटिंग कर छत भरने के पटिये लगा दिए गए थे, जिसको आज नगर निगम ने हटा दिया। सारे पटिये और बल्लियां जब्त कर ली। साथ ही दीवारों को भी हटाने दिया गया।
बारी घाट जो पाट दिया गया: स्थानीय लोग बताते हैं कि जहां नगर निगम ने अतिक्रमण हटाया, वहां कभी खूबसूरत घाट हुआ करता था, जो बारी घाट के नाम से जाना जाता है। कई सालों से यहां अतिक्रमण कर इस घाट पर जाने वाले सारे दरवाजे पाट दिए गए हैं। नगर के निकायों ने और जिला प्रशासन ने कभी इन घाटों को मुक्त करवाने के लिए ध्यान ही नहीं दिया और धीरे-धीरे पूरे घाट पर अतिक्रमण होता गया।

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गर्मी का पारा ४३ पार

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पिघलने लगा सड़कों का डमर
उदयपुर। गर्मी अपने पूरे शबाब पर है। दिन और रात के बढ़ते तापमान ने जन जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। दिन में तो तापमान 43 डिग्री तक पहुंच गया। धूप इतनी तेज है कि थोड़ी ही देर में त्वचा झुलसने लग जाती है। रात के तापमान में भी बढ़ोतरी होने से अब रातों को भी गर्मी ने बेहाल कर रखा है। इधर, अस्पतालों में लू लगने से बीमार रोगियों की संख्या दिन ब दिन बढ़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार आज का अधिकतम तापमान 43 डिग्री के ऊपर रहने की संभावना है। कल का अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री था, जबकि न्यूनतम पिछले दिनों की अपेक्षा चार डिग्री बढ़कर 28 डिग्री पर पहुंच गया। रातें इस वजह से अधिक गर्म रहने लगी है। चेतक चौराहे पर हिन्दुस्तान जिंक की तरÈ से लगाए गए तापमान मीटर का पैमाना मानें, तो कल दिन का तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया था। आज का तापमान भी अधिकतम अभी तक 43 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है। हालांकि गर्मी का प्रकोप देखते हुए माना जा सकता है कि दिन में अधिकतम तापमान जरूर 44 के आसपास रहता होगा। धूप की तेजी ने दिन में तो घर-ऑÈिस से बाहर निकालना दुर्भर कर रखा है।

अपनी गाड़ी सेफ़ रहनी चाहिए !

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उदयपुर। चित्र देखकर लग रहा होगा कि ये किसी पार्किंग स्थल का नजारा है, लेकिन ऐसा नहीं है। ये है संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल चिकित्सालय के कार्डियोलोजी अस्पताल का नजारा। जहां हॉल में रात्रि के समय पुलिस वालें ने अपने वाहन खड़े कर देते है ताकि कम से कम उनकी गाडिय़ा तो सेÈ रहे, बाकी जाए भाड़ में। (लाल गोले में वाहनों पर लगे पुलिस चिह्न)। इस हॉल का उपयोग अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन रात्रि विश्राम के लिए करते है। कमोबेश इसी तरह के हालात पूरे अस्पताल परिसर के है, जहां रात्रि के समय अंदर गाडियां पार्क कर दी जाती है।
Èोटो : भावेश जाट

कोर्ट और तहसील पर भी है दलालों का समा्ज्य

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-कलेक्ट्रेट, कोर्ट और तहसील में खुलेआम लोगों से हो रही है लूट, तीनों कार्यालय में Èैला है दलालों का जाल
उदयपुर। जिला कलेक्ट्रेट, तहसील और कोर्ट जिले के बड़े और अनुशाषित कार्यालय माने जाते हैं, मगर यहा मंजर ही उलटा है। जिला कलेक्टर के आस-पास ही छोटे-मोटे कार्यों के लिए दलालों का जमावड़ा लगा रहता है। कमीशनबाजी के चलते दलालों का इन कार्यालयों में हस्तक्षेप इतना बढ़ गया है कि बिना दलालों के यहां कोई काम नहीं हो सकता। साथ ही कमीशनखोरी के चक्कर में यह दलाल कई दÈा उलझते हुए भी नजर आ जाते हैं। कोर्ट, जिला कलेक्ट्री और तहसील में इन दलालों का जाल भी दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।
गिरोह के रूप में एजेंट कर रहे हैं काम: इन प्रशासनिक अमलों में एजेंट गिरोह के रूप में भी काम करते हंै, जिसमें नेताओं से सांठ-गांठ रखने वाले छुट भैय्या नेता और असमाजिक तत्व शामिल है। इन कार्यालयों के परिसर के आस-पास चाय की थडिय़ों, केबिनों, नाश्ते की दुकानों, टाइपिंग की दुकानों पर जमा रहते हैं और हर आने वाले पर नजऱ और उनकी बातों को सुनकर उनके काम में अपनी दलाली जोड़कर हस्तक्षेप करते हंै। अधिकतर शहर से बाहर से आए लोगों को ये अपना शिकार बनाते हंै। इन सब की जानकारी कई आला अधिकारियों
भी है, लेकिन वे इस बात पर मौन धारण किए रहते हंै।

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प्रमाण पत्र बनवाने में होड़: इन कार्यालयों में निगरानी रखने वाले दलाल ख़ास तौर पर मूल निवास, आय प्रमाण-पत्र आदि जैसे प्रमाणपत्र बनवाने आये लोगों की निगरानी रखते हैं और उन्हें अपने जाल में Èांसकर उनसे मोटी राशि वसूलते हैं। कई बार एक ही ग्राहक को लेकर ये एजेंट आपस में भी उलझ जाते हैं।
तीन से चार गुना कीमत: जब क्रमददगारञ्ज दलाली के खेल की तह में गया और इन कार्यालयों में घूमने वाले दलालों से मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र बनाने की बात की, तो दलालों ने २०० से ३०० रुपए तक की मांग की, जबकि यह प्रमाण पत्रों प्रशासनिक स्तर पर निशुल्क है। कोई सरकारी Èीस नहीं है और नोटेरी तथा शपथपत्र के 30 से 50 रुपए तक का शुल्क लगता है। वैसे तो कलेक्ट्रेट में सभी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत एक समय सीमा तय की गई है, जिसके तहत सात दिन में मूल निवास, तीन दिन में आय प्रमाण पत्र और 15 दिन में जाति प्रमाण पत्र बनाकर देना तय है। इसके बाद भी यदि कोई व्यक्ति किसी खास वजह से एक दिन में प्रमाण पत्र चाहता है, तो तहसीलदार की विशेष अनुमति से प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है। ये एजेंट लोग ऐसे जरूरत मंद लोगों से अधिक कीमत वसूलते हैं। अपनी सेटिंग से काम करवा देते हैं। कई बार ये एजेंट लोगों की मजबूरी और हाव-भाव देखकर अपनी रेट भी बढ़ाते रहते हैं और इनके चंगुल में अक्सर ग्रामीण और महिलाएं अधिक आती है।

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टाइपिंग की दुकानों पर भूमाÈियाओं का जमावड़ा
कोर्ट और तहसील कार्यालय के बाहर स्थित टाइपिंग की अधिकतर दुकानों पर भूमाÈियाओं का जमावड़ा रहता है। यही नहीं कई बार रजिस्ट्री के लिए आए ग्रामीणों के कागजातों पर भी इनकी नजऱ रहती है। यदि कोई ग्रामीण इनके चंगुल में Èंस जाए, तो ये लोग उसकी जमीन हड़पने से भी नहीं चुकते। इन मामलों में टाइपिंग और Èोटो स्टेट की दुकान मालिक की भी मिलीभगत रहती है। ये दुकानों के मालिक इन भूमाÈियाओं के लिए मुखबिरी का काम करते हैं और इसके बदले भूमाÈियाओं से रकम वसूलते हैं।

रॉयल मोटर्स के कर्मचारी हड़ताल पर

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-कंपनी मालिक के खिलाÈ कलेक्टर और संभागीय आयुक्त से शिकायत
उदयपुर। हीरो मोटरसाइकल की एजेंसी रॉयल मोटर्स के वर्कशॉप के कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी, पीएÈ व ईएसआई जमा कराने को लेकर पिछले 16 दिनों से हड़ताल कर रॉयल मोटर्स के सामने ही धरने पर बैठे हैं। इस संबन्ध में जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त को भी ज्ञापन दिया गया है।
धरने पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन बढ़ाने और ईएसआई की बात करने पर कंपनी के मालिक शब्बीर के. मुस्तÈा ने कर्मचारियों को कंपनी से बाहर निकाल दिया। 14 मई से कंपनी के वर्कशॉप में काम करने वाले सभी 19 कर्मचारी शोरूम के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने बताया कि कई लोग पिछले पांच-साल सालों से कंपनी में कार्य कर रहे हंै, लेकिन अभी तक उनकी ना तो उचित वेतन वृद्धि की गई है और ना ही कंपनी उनका पीएÈ और ईएसआई का पैसा संबंधित विभाग को जमा करवाती है। कंपनी के मालिक शब्बीर के मुस्तÈा अपना तानाशाही रवैया रखे हुए हंै। अभी तक कोई सकारात्मक वार्ता भी नहीं हुई है। कर्मचारियों ने अपना 15 सूत्रीय मांग पात्र दे रखा है, जिसमें वेतन बढ़ोतरी, पीएÈ और ईएसआई मुख्य है। बाकि नियम के अनुसार सवैतनिक छुट्टियां आदि की मांग रखी गई है।
श्रम विभाग के अधिकारियों को किया गुमराह
श्रम कानून के तहत रॉयल मोटर्स में कई घपले बाजियां हैं। धरने पर बैठे कर्मचारियों की शिकायत पर दो दिन पूर्व जब श्रम विभाग के कर्मचारी रॉयल मोटर्स में पहुंचे, तो उसके पहले कंपनी मालिक ने कई कर्मचारियों को यह कहकर घर भेज दिया कि आज तुम्हारी छुट्टी है। श्रम अधिकारियों को गुमराह करते हुए उन्हें कंपनी में कार्य करने वालों के कोई भी कागज़ या रजिस्टर उपलब्ध नहीं करवाए। श्रम विभाग ने रॉयल मोटर्स को नोटिस देते हुए कर्मचारियों से संबंधित सभी दस्तावेज मंगवाए है। अन्यथा कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा है।
वर्जन….
वेतन बढ़ोतरी व अन्य मांगों को लेकर कंपनी के कुछ कर्मचारी हड़ताल पर है। हमने वार्ता के सारे रास्ते खुले रखे हैं। उनकी मांगे भी हम मानने के लिए तैयार है, लेकिन कंपनी हमारे घर जैसी है और कंपनी में यूनियनबाजी नहीं चलेगी। बिना यूनियन के आए और वार्ता कर समाधान निकाल ले। इसके लिए मैं तैयार हूं। अगर उन्हें बाद में कंपनी से निकाले जाने का डर है, तो मैं सभी कर्मचारियों को 10 साल तक काम पर ही रहने के लिए वचन देता हूं
-शब्बीर के. मुस्तÈा, मालिक रॉयल मोटर्स

क्षेत्रीय रेलवे अधिकारी जमानत पर रिहा

उदयपुर। तीन दिन पहले सिटी रेलवे स्टेशन पर सूरजपोल थाने के हेड कांस्टेबल और उसकी पत्नी के साथ रेलवे क्षेत्रीय अधिकारी हरÈूल सिंह द्वारा मारपीट करने के मामले में हरÈूलसिंह की गिरफ्तारी के बाद रेलवे पुलिस अब हेड कांस्टेबल राजेश मेहता के खिलाÈ मिली रिपोर्ट की जांच कर रही है। जिसमें दोषी पाए जाने पर उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
गौरतलब है की तीन दिन पहले सिटी रेलवे स्टेशन पर हेडकांस्टेबल राजेश मेहता और उनकी पत्नी मैना मेहता के पास प्लेटÈार्म टिकट नहीं होने पर रेलवे क्षेत्रीय अधिकारी हरÈूलसिंह चौधरी से कहासुनी हो गई थी। राजेश मेहता ने आरोप लगाया था कि हरÈूलसिंह ने उनके और उनकी पत्नी के साथ मारपीट की है व राणा प्रतापनगर रेलवे पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए सोमवार देर रात को अजमेर रेलवे पुलिस उदयपुर से हरÈूलसिंह चौधरी को गिरफ्तार करके अजमेर ले गई, जहां मंगलवार सुबह उनकी जमानत हो गई थी। अब रेलवे पुलिस हेड कांस्टेबल और उनकी पत्नी पर लगाए आरोपों की जांच कर रही है। रेलवे पुलिस के उप निरीक्षक गोपालदास ने कहा कि अगर आरोप सही पाए गए, तो उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सकता है। रेलवे पुलिस ने सिटी रेलवे ऑÈिस से रिकॉर्ड मांगा है।

शनिदेव की जयंती पर मंदिरों में भक्तों की भीड़

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उदयपुर। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर आज शनिदेव की जयंती मनाई गई। शहर के लोहा बाजार, सेक्टर 14 चुंंगीनाका व खेमपुरा रेलवे Èाटक के पास स्थित शनि मंदिरों में शनिदेव जयंती पर कई आयोजन हुए। लोहा बाजार स्थित शनि मंदिर के पुजारी भवानी शंकर जोशी ने बताया कि शनि जयंती पर शनि प्रतिमा को स्वर्ण आंगी व अन्नकूट की झांकी धराई गई। शनि जयंती पर सुबह से ही सभी मंदिरों में भक्तों के भड़ी लग गई है। जयंती के उपलक्ष्य में मंदिर पर विद्युत रोशनी की सजावट की गई। शाम सात बजे महाआरती की जाएगी। रात को शनिदेव कथा व भजन संध्या होगी। सेक्टर 14 चुंगीनाका स्थित शनि मंदिर के दिनेश गर्ग ने बताया कि जयंती के मौके पर कई आयोजन होंगे। इसी को लेकर मंदिर समिति की ओर से तैयारी बैठक महंत नारायण गिरी के सान्निध्य में हुई। सुबह साढ़े सात बजे शनि प्रतिमा को स्वर्ण आंगी धराई गई। स्वर्ण आंगी के बाद भगवान शनि देव का अभिषेक किया गया। साथ ही

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शनि जयंती पर शनि के योगों का असर
शनि जयंती पर शनि के साथ ही राहु की युति बनी हुई है। आने वाले कई वर्षों में शनि और राहु का ऐसा योग पुन: नहीं बनेगा। शनि और राहु की इस युति में शनि ने कई रूप दिखाए हैं। इस वर्ष शनि जयंती कृत्तिका नक्षत्र में आ रही है। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। शनि सूर्य देव के पुत्र हैं। इसके बावजूद शनि और सूर्य, एक-दूसरे से शत्रु भाव रखते हैं। इस नक्षत्र में शनि जयंती आने से गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा।

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