शर्मिंदा होकर हटाया अश्लील विज्ञापन

सुखाडिय़ा सर्कल पर कामसूत्र के विज्ञापन का विवाद
IMG_0030
उदयपुर। सुखाडिय़ा सॢकल पर लगे कामसूत्र ब्रांड के अश्लील विज्ञापन को आखिरकार नगर निगम के अधिकारियों ने शर्मिंदा होकर हटा दिया है।
udaipur post ने शनिवार के अंक में ये क्या खड़ा कर दिया चौराहे पर शीर्षक से udipur post किया था। इसके बाद सोमवार को एनएस पब्लिसिटी ने पूरे अश्लील विज्ञापन को हटाते हुए उसी विज्ञापन के नये पोस्टर वहां पर चस्पा कर दिए। इस संबंध में पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के विरोध और कल सुखाडिय़ा सर्किल पर सफाई अभियान के दौरान जब स्वयं महापौर रजनी डांगी तथा आयुक्त हिम्मतसिंह बारहठ ने इस विज्ञापन को देखा, तो वे शर्मिंदा हो गए और इसे तत्काल हटाने के निर्देश दिए। इस पर प्रचार करने वाली एनएस पब्लिसिटी फर्म ने आज सुबह इस विज्ञापन को हटा दिया।

नकली पुलिसवालों की गेंग ने तीन महिलाओं को ठगा

police-22
एक साथ दो जगह तीन महिलाओं के साथ ठगी
राजसमंद/भीम। शहर में नकली पुलिस वालों की गेंग ने कांकरोली और भीम में तीन महिलाओं के साथ ठगीकर हजारों रुपयों के गहनों की चपत लगाने का मामला सामने आया है। अब तक नकली पुलिस वाला बनकर ठगने की यह दूसरी घटना है। इसके पूर्व कांकरोली में नौ फरवरी को इसी तरह महिला के साथ ठगी कर बदमाश जेवरात उड़ा ले गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने जिलेभर में नाकाबंदी कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कांकरोली सूरजपोल निवासी कमलादेवी सिरवीं आज सुबह सात बजे द्बारकाधीश मंदिर मंगला के दर्शन करने जाते वक्त नकली पुलिस की वर्दी में अज्ञात बदमाश आकर बोला की माताजी आजकल का समय बहुत खराब चल रहा है। चोर-जेबकतरे बाजार में घूम रहे हैं। इसलिए इतनी सुबह आप ये सोने के जेवरात पहनकर कहां जा रही हैं? बदमाश ने कमला देवी को बातों में उलझाकर सोने की दो चूडिय़ां, एक चैन, उतारकर अखबार में लपेटकर रखवा दी। झांसा देकर बदमाश ने जेवर की जगह अखबार की दूसरी पुडिय़ा कमला देवी के हाथ में थमा दी। कमला देवी ने देखा, तो अखबार की पुडिय़ा में गहने नहीं थे। इस पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने तत्काल नाकाबंदी कराई, लेकिन बदमाश का कहीं पता नहीं चला। इसी तरह भीम कस्बे में आज सुबह दो महिलाओं के कांकरोली में हुई ठगी की तर्ज पर ठगी होने का समाचार मिला है।

EXPERIENCING THE JOY OF “KHUSHI”

0

2A766042
April 24, 2014 was not any other day. A team of 15 ‘Khushi’ volunteers was heading towards a small village in Zawar, from as far as 300 km, to meet the children of “Khushi” Centre. The children were excited too as the volunteers had planned a number of activities for them. We reached the Centre at 7.30 AM and with us we also had team of 4 doctors who had volunteered to do regular health check-up and also eye-check-up.

Good morning sir and good morning madam greeted us when we reached the Centre. These little angels of less than 6 years of age were all excited. The Joy of “Khushi” children was to be seen. Each one of them carrying a smile on his/her face. Hindustan Zinc’s CSR coordinator at Zawar, Ashok Soni with his team introduced us to the teacher, Yashodha, who was quite busy arranging the children for the morning prayer. With a small prayer and a little exercise, children were ready for some delicious breakfast, the groundnut-pooha. It was prepared in a quite neat kitchen and was to be served hot and fresh. You can ask mothers of each of these children, who must be struggling to make their children eat, but here, in discipline, these children were eating their bit without any of the hassles. It is true, children learn when they are with their siblings.

Vedanta Khushi Health Checkup

Once their breakfast done, it was time for activities. Our “Khushi” volunteers divided themselves in 4 teams. One team for each activity. The activities included – paper cutting lead by Maitreyee, play with clay lead by Anu Sharma, scare crow mask on mud-pot lead by Pranav and Pranjal, and paint the hands on the wall lead by Pradhuman and Prayag . The children were divided into groups and up they went with their hands in colours and clays and activities. Well my job was to ensure each child participates in the activities.

Meanwhile, our doctors couple, Dr. Prakash Bhandari & Dr. Karuna Bhandari and Dr. Upvan Pandya & Dr. Sharva Pandya started the health and eye check-up of these children, respectively. The children were fit and healthy. Their nutrition level has been good. Except for one child, Yamini, whose mother Manju Sharma had also come, complained for regular water in the eyes of her daughter Yamini. Dr. Sharva examined her and gave her eye-drops and few medicines. She would be fine. Dr. Prakash Bhandari also carried out throat check-ups as the weather was changing.

After play, it was time for the lunch and this time it was regular lunch – Chapattis, Dal, Vegetable and rice. After lunch they sleep for some time and take rest.

The “Khushi” team spent about 5 hours with these children, who cannot be more happy than we were.

We were happy with their “Khushi” and they were happy with our “Khushi”…… no wonder “Khushi” spreads.. widely….

जेल प्रशासन कर रहा है आसाराम की मदद, बीमारी तो सिर्फ बहाना है’

0

0915_1
जोधपुर. नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीडऩ के मामले में पीडि़ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि जेल प्राधिकारी व चिकित्सक आपस में मिलीभगत कर अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। आरोपी आसाराम स्वस्थ होने के बावजूद उसे बीमार बताकर अदालत में पेश नहीं किया जा रहा है। पीडि़ता अब तक करीब दस बार अदालत में हाजिर हो चुकी है उसके मुख्य परीक्षण के बयान हो चुके हैं लेकिन आसाराम को कोर्ट में पेश नहीं करने से पीडि़ता से जिरह शुरू नहीं हो पा रही है।

पीड़िता के वकील प्रमोद कुमार वर्मा ने अदालत से गुहार लगाई है कि इस संबंध में उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए क्योंकि जेल प्राधिकारियों व चिकित्सकों का ऐसा आचरण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। पीडि़ता के इस प्रार्थना पत्र पर गुरुवार को बहस होगी। सेशन न्यायाधीश, जिला मनोज कुमार व्यास की अदालत में मंगलवार को पीडि़ता से जिरह होनी थी लेकिन जेल प्राधिकारियों ने आसाराम को बीमार बताते हुए कोर्ट में पेश नहीं किया। इससे पहले भी कई पेशियों पर आसाराम को अस्वस्थ बताकर अदालत में हाजिर नहीं किया गया था। पीडि़ता के वकील ने इस पर एतराज जताते हुए कहा कि आसाराम की ओर से जानबूझ कर देरी की जा रही है। जिसमें जेल प्राधिकारी व चिकित्सक भी उसका सहयोग कर रहे है।

आसाराम की मौजूदगी में ही करना चाहते हैं जिरह

विशेष लोक अभियोजक राजूलाल मीणा व पीडि़ता के वकील का कहना है कि आसाराम जानबूझ कर कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहा है। दूसरी तरफ उनके वकील आसाराम की मौजूदगी में ही पीडि़ता से जिरह करना चाहते है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 317 के तहत अभियुक्त की गैर हाजरी के बावजूद गवाह से जिरह की जा सकती है। इसके वितरीत आसाराम के वकीलों का कहना है कि यह प्रावधान उन मामलों में लागू होता है। जिनमें अभियुक्त जमानत पर छोड़ा जा चुका है। इस मुद्दे को अदालत गुरुवार को तय करेगी।

जिन्होंने तुलसी को मारा ही नहीं वे हैं जेल में बंद!

1a
तुलसी को अवैध हिरासत में रखने वाली और उसके एनकाउंटर में शामिल थी दूसरी टीम, आजम को झूठे चोरी के केस में फंसाकर तुलसी को पेशी पर ले जाया गया, जहां कर दिया उसका एनकाउंटर
– नारीश्वर –
उदयपुर। सोहराब व तुलसी प्रजापति के फर्जी मुठभेड़ की असली कहानी दूसरी ही है, जो बताया गया वो सच नहीं है। सच पर पर्दा डाला गया। इन दोनों का एनकाउंटर महज इसलिए कर दिया गया, क्योंकि गुजरात और उदयपुर के पुलिस अधिकारी सरकार से अवार्ड चाहते थे। अवार्ड के लिए इन अधिकारियों की फाइलें होम मिनिस्ट्री को भी भेजी गई, लेकिन इसी बीच दोनों ही एनकाउंटर फर्जी होने की कहानी सामने गई, जिसमें ये सभी अधिकारी फंस गए और पिछले सात साल से जेल में बंद है।
अंडरवल्र्ड और पुलिस अधिकारियों से मिली अन्दनी जानकारी के अनुसार इन दोनों फर्जी एनकाउंटर की कहानी की शुरुआत ३१ दिसंबर, २००४ की सुबह साढ़े ११ बजे उदयपुर में हाथीपोल क्षेत्र से हुई थी। यहां तुलसी, आजम और सिल्वेस्टर ने हमीद लाला की गोली मार कर हत्या कर दी थी। इस दौरान दूसरी बाइक पर सोहराब भी था। हत्या के पीछे कारण था यहां के मार्बल उद्यमियों में खौफ पैदा करना, क्योंकि आजम और उसके साथियों ने मुणवास स्थित मरियम मार्बल के मालिक अली हुसैन से १८ लाख की फिरौती मांगी थी, लेकिन अली हुसैन और हमीद लाला दोस्त थे। इस कारण हमीद लाला बीच में आ गया, जिससे आजम और हमीद लाला के बीच वर्चस्व को लेकर खींचतान शुरू हो गई। इसीलिए आजम ने तुलसी और सोहराब के साथ मिलकर हमीद लाला की हत्या कर दी। हालांकि हमीद लाला की हत्या के वक्त उसका भाणजा मोहम्मद रफीक चश्मदीद गवाह था, जिसने इन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाकर जहीर, रईस खडख़ड़, हनीफ उर्फ छक्का, शकील कालिया सहित अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दी थी। बाद में पुलिस को पता चला कि उक्त मामले में जिन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दी थी, वे लोग शामिल नहीं है। इसका पता भी इसलिए चला, क्योंकि सोहराब, आजम के सज्जननगर निवासी रिश्तेदार के यहां पर किराये से रहता था और हमीद लाला की हत्या हुई, उसी शाम आजम का भाई सज्जननगर की तरफ जा रहा था, जिसे पुलिस ने पकड़कर पूछताछ की, तो उसने सारी कहानी उगल दी, लेकिन तब तक तुलसी, सोहराब, आजम सहित अन्य आरोपी फरार हो चुके थे। हालांकि इस हत्याकांड के सभी आरोपी बाद में न्यायालय से बरी हो चुके हैं। इस हत्याकांड के बाद तुलसी और सोहराब ने सूरत में कपड़ा व्यवसायियों से फिरौती मांगी थी, जिनकी पहुंच वहां के राजनेता से थी। इसी दौरान वहां के सीनियर आईपीएस अधिकारी डीजी बंजारा को पता चला कि सोहराब और तुलसी आंध्रा में हैं। इस पर आंध्रा पुलिस के जरिये सोहराब, तुलसी और सोहराब की पत्नी कौसर बी को नवंबर, २००५ के अंतिम सप्ताह में आंध्रा के सांगली बस स्टैंड से पकड़कर गुजरात पुलिस अहमदाबाद लाई। यह जानकारी डीजी बंजारा ने उदयपुर के तत्कालीन एसपी दिनेश एमएन को दी, जिस पर एमएन वहां गए। बाद में एक टीम बनाई गई, जिसमें तत्कालीन प्रतापनगर थानाधिकारी अब्दुल रहमान, सब इंस्पेक्टर हिमांशुसिंह और श्यामसिंह को गुजरात भेजा गया। इस टीम ने गुजरात पुलिस के साथ मिलकर अहमदाबाद में सोहराब का २६ नवंबर, २००५ को एनकाउंटर कर दिया। इसी बीच कौसर बी की हत्या भी कर दी गई और तुलसी प्रजापति को उदयपुर पुलिस के हवाले कर दिया गया।
तुलसी की गिरफ्तारी की सच्ची कहानी : सोहराब और कौसर बी की हत्या के बाद तुलसी को गुजरात पुलिस ने उदयपुर पुलिस को सौंप दिया था। यहां लाकर तुलसी को हाथीपोल थाने में अवैध हिरासत में रखा गया। एक झूठी कहानी बनाई गई, जिसमें बताया गया कि तत्कालीन डिप्टी सुधीर जोशी, अंबामाता थानाधिकारी रणविजयसिंह और हाथीपोल थानाधिकारी भंवरसिंह हाड़ा ने तुलसी को भीलवाड़ा से गिरफ्तार किया। बाद में तुलसी को जेल भेज दिया गया, तब तुलसी ने स्थानीय वकील सलीम खान के जरिये कोर्ट में रिपोर्ट दी कि उदयपुर और गुजरात पुलिस से उसको खतरा है और उसका भी एनकाउंटर हो सकता है। उसने उसे मारने के चार तरीकों का जिक्र भी अदालत के सामने किया था, जिसमें से एक तरीके से बाद में उसे भगाकर गोली मार दी गई।
तुलसी से डर गई थी उदयपुर पुलिस : तुलसी काफी डेयरिंग और शार्प शूटर था। यह बात दिनेश एमएन भी जानते थे। उसने १४ साल की उम्र में पहला मर्डर किया था और उसके एनकाउंटर से पहले २४ साल की उम्र तक उसने दस मर्डर कर दिए थेे।

सारी हत्याएं उसने भरे चौराहे पर भीड़ के बीच की थी। उसके सरगना सोहराब और कौसर बी की मौत से वह बुरी तरह टूट चुका था और पूछताछ में पुलिस अधिकारियों के सामने ही वह सोहराब व कौसर बी को मारने वालों को जान से मार देने का प्रण करता था। तुलसी ने एक अधिकारी से कहा भी था कि अगर वह छूट गया, तो अन्ना (दिनेश एमएन) को मार देगा। तब उदयपुर पुलिस ने तुलसी का एनकाउंटर करने की तैयार की। तुलसी और आजम को २८ दिसंबर, २००६ को अहमदाबाद पेशी पर ले जाना था, लेकिन अंबामाता पुलिस ने आजम को स्कूटर चोरी के फर्जी मामले में प्रोडक्शन वारंट से गिरफ्तार कर लिया। इधर, पुलिसकर्मी युद्धवीर, करतार, दलपत और नारायणसिंह के साथ ट्रेन से तुलसी के डमी को अहमदाबाद भेजा गया, जिसे रास्ते से भागना बताया गया। इधर, तुलसी को उदयपुर पुलिस की दूसरी टीम गुजरात के साबरकांठा ले गई, जहां उसे जीप से उतारकर गोली मार दी गई। इस फर्जी एनकाउंटर में गुजरात के पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। तुलसी के फर्जी एनकाउंटर के मामले में उदयपुर के पुलिसकर्मी युद्धवीर, करतार, दलपत और नारायणसिंह गुजरात की जेल में बंद हैं, जबकि ये लोग तुलसी के साथ थे ही नहीं।
दासोत को बचाने बन गए सरकारी गवाह : तुलसी के फर्जी एनकाउंटर मामले में खुद और सीनियर आईपीएस अधिकारी राजीव दासोत को बचाने के लिए तत्कालीन डिप्टी सुधीर जोशी, सीआई रणविजयसिंह और भंवरसिंह हाडा सीबीआई में सांठ-गांठ करके सरकारी गवाह बन गए। उन्होंने सीबीआई कोर्ट में हुए १६४ के बयान में बताया कि उन्होंने जो कुछ भी किया, वह सब दिनेश एमएन के कहने पर किया था। सीबीआई को तुलसी को अवैध हिरासत में रखने, आजम को झूठे मामले में फंसाकर तुलसी के एनकाउंटर के षडय़ंत्र में शामिल के लिए इन तीनों के खिलाफ भी कार्रवाई करनी थी, लेकिन मिलीभगत के कारण इन को सरकारी गवाह बना दिया गया। पता चला है कि काफी बड़ी धनराशि देने से ये लोग छूट पाए।
तुलसी के भतीजे को भी फंसा झूठा : सोहराब के एनकाउंटर के बाद जब तुलसी उदयपुर की जेल में था, तब उसका भतीजा कुंदन उसके एक दोस्त के साथ तुलसी से मिलने आया था। तुलसी ने कुंदन को सोहराब व कौसर बी के फर्जी एनकाउंटर की पूरी कहानी बता दी, जिससे यहां के पुलिस अधिकारियों को डर था कि बाद में कुंदन व उसका दोस्त उनके खिलाफ साक्ष्य न बन जाए। इसलिए वापस जाते समय सलूंबर पुलिस ने कुंदन और उसके साथी को फर्जी एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार कर लिया। हालांकि बाद में जब तुलसी का एनकाउंटर हो चुका, तो उसके बाद कुंदन और उसका दोस्त इस केस से बरी हो गए।
संदेश : दबाव में आकर न करे गैर कानूनी काम
कुख्यात अपराधी सोहराब और तुलसी को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराने के मामले में न तो सुपारी देने वाला सामने आया, न ही सुपारी खाने वाला। षड्यंत्र रचने वाले अफसर भी अब तक बाहर ही है। लेकिन वे लोग अंदर धकेल दिए गए, जिन्होंने ऊपर के आदेशों की पालना करना अपना कर्तव्य समझा। इस पूरे प्रकरण से पुलिस फोर्स के लिए यह संदेश निकलकर सामने आता है कि वह किसी भी दबाव में आकर गैर कानूनी काम न करें। इस सबक को सदैव याद रखें।
-संपादक

कामसूत्र का विज्ञापन हटाने की मांग ने जोर पकड़ा

20140427_172111
उदयपुर। नगर निगम की शह पर एनएस पब्लिसिटी द्वारा सुखाडिय़ा सर्किल पर लगाए गए कामसूत्र के विज्ञापन का विरोध नगर निगम के विपक्ष के पार्षदों ने ही नहीं पक्ष के पार्षदों ने भी शुरू कर दिया है। पक्ष-विपक्ष के अधिकतर पार्षदों का कहना है कि अश्लीलता और सेक्स से जुडी कंपनी के किसी भी प्रोडक्ट का विज्ञापन सार्वजनिक जगह पर नहीं होना चाहिए, जबकि सुखाडिय़ा सर्कल एक ट्यूरिस्ट प्लेस है, जहां से झीलों की नगरी क ी छवि पूरे देश में बनती है। उल्लेखनीय है कि क्रकामसूत्रञ्ज जैसी कंपनी के किसी भी प्रोडक्ट के विज्ञापन पर डीडी जैसे राष्ट्रीय चैनल पर भी रोक है। ऐसे में भारतीय संस्कृति की बात करने वाली पार्टी के राज में में अश्लीलता भरे स्लोगल वाला क्रकामसूत्रञ्ज का विज्ञापन उनकी दोहरी सोच को दर्शाता है।

विरोध में पक्ष-विपक्ष के पार्षद
:जब नगर निगम की मेयर एक महिला है, इसके बावजूद ऐसे विज्ञापन शहर के बीच में लगते हंै, तो यह एक शर्मनाक और महिलाओं के लिए अपमान जनक स्थिति है। ऐसे विज्ञापन को तुरंत हटाना चाहिए और विज्ञापन लगाने वाले पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
-दिनेश श्रीमाली, नेता प्रतिपक्ष
: ऐसे अश्लीलता फैलाने वाली कंपनी के विज्ञापन पर्यटन स्थलों पर लगाना गलत है। इससे देश में उदयपुर शहर के लिए संदेश गलत जाता है। शहर की छवि खराब होती है। ऐसे विज्ञापन को तुरंत हटाना चाहिए।
-मनोहरसिंह पंवार, भाजपा पार्षद
:जिस कंपनी के विज्ञापन को राष्ट्रीय चैनल ने बेन कर रखा है, तो उसे हमारे यहां शहर में भी नहीं लगना चाहिए और जो कंपनी अश्लीलता के लिए जानी जाती है। जिससे अश्लीलता को बढ़ावा मिलता है उन विज्ञापनों को नगर निगम को तुरंत हटाना चाहिए।
-विजय आहूजा, भाजपा पार्षद
:जो राजनैतिक पार्टी भारतीय संस्कृति की दुहाई देती है। अगर उसके कार्यकाल में क्रकामसूत्रञ्ज जैसे विज्ञापन सरेआम लगाए जाए, तो उस पार्टी की दोहरी सोच को दर्शाता है। ऐसे विज्ञापन के जरिये अश्लीलता फैलाकर आखिर समाज को क्या संदेश देना चाहते है?
-राजेश सिंघवी, माकपा पार्षद
:महिला महापौर होने के बावजूद अगर शहर में ऐसे विज्ञापन लगते हैं, तो इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है? सस्कृति को बचाने वाले ही भारतीय संस्कृति की धज्जियां उड़ा रहे हंै। सुखाडिय़ा सर्किल एक पर्यटक स्थल है, जहां से शहर की छवि बनती है। क्रकामसूत्रञ्ज का विज्ञापन तुरंत हटना चाहिए।
-शिप्रा उपाध्याय, कांग्रेसी पार्षद
:अगर कोई विज्ञापन अश्लीलता फैलता है और जिस कंपनी के विज्ञापनों पर राष्ट्रीय चैनल पर भी रोक है, तो हमारे शहर में भी वह विज्ञापन नहीं लगने चाहिए।
-प्रेमसिंह शक्तावत, निर्माण समिति अध्यक्ष,

दिनेश एमएन की जमानत

10003889_607610322663292_7707653898702360254_n
सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में सात साल से बंद थे, दस दिन में एक बार सीबीआई कोर्ट में देनी होगी हाजिरी, दो और साथी आईपीएस की भी जमानत
उदयपुर। मुंबई की सीबीआई कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ प्रकरण में निलंबित आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन और गुजरात के दो आईपीएस अधिकारियों की जमानत अर्जी आज मंजूर कर ली है। इनमें अभय चूड़ासमा और एमएल परमार शामिल है। कोर्ट ने जमानत अवधि के दौरान दस दिन में एक बार, यानी महीने में तीन बार कोर्ट में स्वयं हाजरी देने का आदेश भी दिया है। इससे पूर्व इस मामले में गुजरात के आईपीएस राजकुमार पांडियन की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पांडियन की जमानत सात साल में इस केस की ट्रायल तक शुरू नहीं होने के आधार पर स्वीकृत की थी। इसको आधार मानते हुए दिनेश एमएन सहित तीन आईपीएस अधिकारियों की जमानत मुंबई की सीबीआई कोर्ट ने मंजूर की है।
उल्लेखनीय है सोहराबुद्दीन शेख का २००५ में अहमदाबाद क्षेत्र में फर्जी एनकाउंटर किया गया था। उसके साथ उसकी पत्नी कौसर बी भी थी, जिसकी भी हत्या कर दी गई। सोहराबुद्दीन, कौसर बी और तुलसी प्रजापति को पुलिस ने सांगली स्टेशन से गिरफ्तार किया था,
तब य लोग वीडिया कोच में सवार थे। बाद में तीनों को गुजरात पुलिस के हवाले कर दिया गया। गुजरात पुलिस ने उदयपुर पुलिस को सूचना दी। सोहराब और तुलसी यहां पर हमीद लाला केस में वांटेड थे। बाद में एक फर्जी कहानी रचकर सोहराब का अहमदाबाद में एनकाउंटर कर दिया गया। इसी दौरान कौसर बी की भी नृशंस हत्या कर दी गई। इस फर्जी एनकाउंटर के बाद तुलसी को भीलवाड़ा से गिरफ्तार करने की झूठी कहानी बनाई गई। तुलसी की गिरफ्तारी के एक साल बाद उसकी भी फर्जी मुठभेड़ में गुजरात के साबरकांठा में हत्या कर दी गई। तुलसी की गिरफ्तारी में तत्कालीन डिप्टी सुधीर जोशी, सीआई रणविजयसिंह और भंवरसिंह हाड़ा शामिल थे। ये लोग बाद में एक सीनियर आईपीएस को बचाने के लिए सरकारी गवाह बन गए और दिनेश एमएन के खिलाफ ही गवाही दे दी। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व दिनेश एमएन की एक बार पहले भी जमानत हो चुकी है, तब वे साबरमती जेल में थे।
जेल में है उदयपुर के तीन अधिकारी: दिनेश एमएन के साथ तत्कालीन सीआई अब्दुल रहमान, सब इंस्पेक्टर श्यामसिंह और हिमांशुसिंह मुंबई की जेल में अभी भी बंद है। एमएन की जमानत होने के बाद अब इनको भी जमानत का रास्ता साफ होता दिखाई पड़ रहा है।

नगर निगम के अधिकारियों की निर्लज्जता उजागर

20140426_175541
कामसूत्र का एक विज्ञापन हटाकर तीन लगाए
उदयपुर। नगर निगम के अधिकारियों ने सुखाडिय़ा सर्किल के ३० फुट 20140426_170910
ऊंचे कैप्सूल ढांचे पर तीनों तरफ कामसूत्र डियोडरेंट स्प्रे का विज्ञापन लगा दिया है। पहले यह विज्ञापन ढांचे के एक ही तरफ लगा हुआ था।
क्रमददगारञ्ज ने शनिवार को प्रकाशित अंक में बताया था कि किस प्रकार एनएस पब्लिसिटी ने अमर्यादित भाषा वाली इबारत का इस्तेमाल करते हुए सार्वजनिक स्थान पर अश्लील विज्ञापन लगाया हुआ है। जैसे ही यह जानकारी प्रकाश में आई, तो एनएस पब्लिसिटी के कर्मचारी वहां पहुंचे और कामसूत्र के विज्ञापन को हटा दिया। बताया गया है कि यह सूचना नगर निगम के कमिश्नर हिम्मतसिंह बारहठ को मिली तो उन्होंने एक की जगह कैप्सूल के तीनों तरफ वही विज्ञापन लगाने की छूट दे दी। पता चला है कि श्री बारहठ खुद क्रसेवन इंच इमेज बूस्टरञ्ज वाले इस स्पे्र को कारगर मानते हैं। साथ ही इसके स्लोगन क्रक्रमेन कांट मिस एंड वुमेन कांट रेसिस्टञ्जञ्ज को पसंद करते हैं। इसलिए यह कोई ताज्जुब की बात नहीं है कि नगर निगम के अधिकारी और एनएस पब्लिसिटी के क्षेत्रीय प्रबंधक को इसमें कोई अश्लीलता नजर नहीं आती। इसीलिए उन्होंने बजाय इस विज्ञापन को हटाने के एक की जगह तीन पोस्टर लगवा दिए। यह भी पता चला है कि उक्त विज्ञापन को साया करने के लिए नगर निगम के अधिकारियों को एनएस पब्लिसिटी द्वारा अलग से लेन-देन भी किया है।

॥ डियोडरेंट का विज्ञापन है, जिसमें कोई अश्लीलता नहीं झलकती है। अब कामसूत्र कंपनी का नाम है, उसको कैसे बदल सकते हैं।
-हिम्मतसिंह बारहठ, आयुक्त, नगर निगम
॥ सुखाडिय़ा सर्कल पर लगा विज्ञापन एक डियोडरेंट का है जिसमें हमें कोई अश्लीलता नजर नहीं आती है। कंपनी का काम है विज्ञापन करना। अगर नगर निगम से निर्देश मिलते हैं, तो हम हटाने के बारे में सोचते, लेकिन हमे कोई आदेश नहीं मिले हैं।
-विनय कुमार, क्षेत्रीय मैनेजर एनएस पब्लिसिटी

हाईकोर्ट के आदेशों को धत्ता बता बढ़ा रहे हैं फीस

निजी स्कूलों की मनमानी जारी
APEX_1246718f
उदयपुर। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर मनमानी नहीं रूक पा रही है, जहां सरकार सस्ती और मुफ्त शिक्षा की बात कर रही है, वहीं निजी स्कूल फीस में दिन दुनी रात चौगुनी वृद्धि कर अभिभावकों की जेब काट रहे हैं। हालात यह हैं कि शिक्षा के नाम पर अलग-अलग मदों में फीस वसूली, तो हो ही रही है, महंगी किताबें भी अभिभावकों की कमर तोडऩे में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक उदयपुर जिले में शिक्षा उद्योग करोड़ों का आंकड़ा पार कर लिया है।
यह है स्कूलों की स्थिति
जिलेभर में बड़ी और छोटी करीब 800 से अधिक निजी स्कूल हैं। इनमें कुछ स्कूलों में दो से तीन हजार तक बच्चे पढ़ रहे हैं। कुछ में संख्या 500 से एक हजार तक है। कुछ तो ऐसे हैं जिनमें संख्या 100 से 500 तक है। औसतन एक स्कूल में 500 विद्यार्थी और जिले के 800 निजी स्कूलों में चार लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। एक अभिभावक को अपने बच्चे पर न्यूनतम 10 से 13 हज़ार तक रुपए की राशि खर्च करनी पड़ रही है।
नहीं माने आदेश, बढ़ा दी फीस
सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा मनमर्जी से बढ़ाई जाने वाली फीस पर लगाम कसने के लिए द राजस्थान स्कूल रेग्यूलेशन ऑफ कलेक्शन फीस बिल 2013 बनाया। इस बिल के तहत स्कूल फीस रेग्यूलेटरी कमेटी बनाई गई। कमेटी के अध्यक्ष राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस शिव कुमार शर्मा हैं। शर्मा ने निजी स्कूलों पर किसी भी तरह की फीस वृद्धि करने पर रोक लगाई। कमेटी ने फीस स्ट्रक्चर बनाने के लिए स्कूलों से शपथ पत्र के साथ सुझाव भी मांगें हैं। तब तक कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकते, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। निजी स्कूलों ने नया सत्र शुरू होते ही फीस बढ़ा दी।

किस तरह बढ़ी फीस
किस तरह बढ़ी फीस

कक्षा वर्ष 2013 वर्ष 2014 बढ़ोतरी प्रतिशत में
पहली से पांचवीं 1000 1300 300 30
छठी से आठवीं 1200 1500 300 25
नवीं व दसवीं 1400 2000 600 48.85
११वीं एवं १२वीं
ऑट्र्स 1800 2200 400 22.23
कॉमर्स 1900 2400 500 26.31
विज्ञान 2000 2500 500 25
॥ जिन स्कूलों की शिकायत हमारे पास आती है, हम कार्रवाई करते हैं। कुछ स्कूलों के फीस बढऩे की शिकायत पर उन्हें नोटिस जारी किया है। निर्देशों के अनुसार कोई स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकता, बढऩे पर नियमानुसार करवाई होगी। -भूपेंद्र जैन, डीईओ

इस बार के ऑस्कर विजेता ये राजनेता, आइटम डांसर ये जनता

aaaaa

उदयपुर पोस्ट का पंच : चलिए बात करते है नौटंकी की अरे हां नौटंकी से याद आया इस बार के जितने फ़िल्मी अवार्ड है, चाहे ऑस्कर हो, फिल्म फेयर हो या आइफा अवार्ड हो ये सारे के सारे अवार्ड हमारे इन बड़े बड़े राजनेताओं को मिलने चाहिए, देखा नहीं आपने रोज कितनी धमाकेदार परफॉर्मेंस देते है, फुल्ली नौटंकी ओह्ह्ह सॉरी नौटंकी नहीं फुल्ली अदाकारी और अदाकारी भी कैसी एक सौ पच्चीस करोड़ जनता के सामने बिना किसी रीटेक के धमाकेदार परफॉर्मेंस, इनकी अदाकारी में हर रंग मौजूद है, कभी एक्शन तो कभी इमोशन और कभी फेमली ड्रामा चलता है, और जब इमोशन की अदाकारी पर अपनी परफॉर्मेंस देते है तो जो राजनेता अबकी बार …… आने का दावा कर रहे है, वे चाहे दंसवी फेल ही सही चाहे अंग्रेजी की चार लाइने सही नहीं बोल पाये या कुछ चार वर्ड रटे रटाये टीवी पर बोल ले लेकिन, …….अंग्रेजी ………अरे हाँ भाई अंग्रेजी में कविताओं का संग्रह निकाल देते है, और वो भी पुरे इमोशन के साथ, और इमोशन भी किसके लिए जिसकी उन्होंने पूरी ज़िन्दगी परवाह नहीं की जिसके साथ उन्हें कामयाबी की हर सीडी तय करनी थी, जिसका हर कदम पर साथ देना और लेना चाहिए था, लेकिन उसको गुमनामी के अँधेरे में धकेले रखा, अब जरूरत पड़ी तो उसके लिए इमोशन निकले और निकले भी तो कैसे इंग्लिश में, वाह ………. अब आप ये मत समझ लेना के ये अंग्रेजी की कविताओं का संग्रह किसी भाड़े के बड़े लेखक से लिखवाया गया है, भाई अदाकारी है, स्क्रिप्ट या डाइरेक्शन किसी का भी हो परदे पर तो हमारे सुपर स्टार ही है। और जो दिखता है वाही बिकता है, इमोशन के साथ फैमली ड्रामा भी गजब का है एंग्री मेन की भूमिका निभाते निभाते अचानक दर्द का अहसास करदेते है और दादी, पापा के नाम पे आंसूं तक ला देते है, तो राजनीति को कड़वा ज़हर और माँ की ममता का मिला जुला रूप देकर कमाल का अभिनय करते है । चलिए ये तो बात हुई फेमली ड्रामा की ये लोग एक्शन सीन में भी कम नहीं है। कभी बाहें चढ़ाते है तो कभी ५६ इंच के सीने से टकरा कर सारे दुश्मनों को मार गिराने का दावा करते है। और हर एक स्टेज परफॉर्मेंस में सिर्फ मै। …… मैं। …… और मै ही रहते है लाइक अमिताब बच्चन , सलमान खान जैसे फ़िल्मी स्टार पुरे परदे पर छाए रहते है ना अपनी अदाकारी से वैसे ही यह भी है छाए हुए रहते है। फ़िल्मी दुनिया में अभिनय की बारीकियां और अदाकारी के ढंग एक डायरेक्टर अभिनेताओं को सिखाता है, लेकिन हमारे ये राजनेता रुपी अभिनेता डायरेक्टर और कैमरा मेन को बताते है के उन्हें किसतरह डायरेक्ट करना है और कैमरा चलन है ( यहाँ डायरेक्टर और कैमरा मेन से मेरा मतलब मीडिया से बिलकुल भी नहीं है ) ।
भाई लोगों …… इस रियल मूवी में अब आप आइटम नंबर की बात मत करना क्यों कि आइटम नंबर तो ये लोग बाकी के पुरे पांच साल हमसे करवाने वाले है । जिससे की इनकी मूवी हिट होगी यानी की……… मूवी ब्लॉक बस्टर होगी हमारे आइटम डांस से और बेस्ट एक्टर और बाकी सारे खिताब इनकी झोली में ,………. \ चलो हम है भी इसी काबिल पुरे पांच साल नाच नाच के इनको हिट करवायेगे ,…. अपना तो काम ही ये है ।