Meeting Kaisi Bai at Gudwa (Village Karget), Udaipur

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Vedanta Sakhi - Kaisi Bai at her house
12 km away from main highway on muddy tracks
It was the morning of 15th April and we decided to visit Kaisi Bai, one of the beneficiary of Goatery Project. About 11 km on the main highway towards Debari, Udaipur, from the busy city and then turning right into the villages..muddy roads, dry trees, stray dogs, agriculture land that has been used and generally used only once in a year, that also during rains..

We were discussing about how deep the tribal population is situated and how much time will it take to reach them.. The dusty roads never allowed us to drive at normal speed, we were just moving at a slow speed.

Moving about 12 km in the deep rural areas, we were informed that Gudwa, under village Karget is about to come and we would need to park our vehicle and walk up to the house of Kaisi Bai. Our CSR in-charge (Debari) advised us to park the vehicle and we could walk now.. Kaisi Bai’s house was visible now..

Kaisi was sitting with her goats and giving them water. She was surprised by our visit, may be she was not expecting. Her husband, son and his wife were also present. His son’s wife has 2 daughters, both of them go to “Khushi” centre nearby in Gudwa itself.

Kaisi Bai arranged for our sitting and asked her daughter-in-law to spread a bed-sheet on the floor. We were comfortable.

A muddy house which has a gate charted out of dry bushes. There is a water storage place and a small covered place, again prepared from the dry bushes, for the goats. The house has electricity.

Kaisi Bai informed us that she is part of self-help-group organized by Vedanta-Hindustan Zinc. From there she came to know about the Goatery Project of the company. She informed that under the Project Goatery, Hindustan Zinc has provided her a unit of 6 Sirohi Breed goats, which include one male and 5 females. As per the project, she was required to pay about Rs. 15,000/- which is 50% of the cost of buying 6 Sirohi Breed goats and the rest 50% was born by Hindustan Zinc. The total cost of the project is Rs. 29,000/- for 6 Sirohi Goats.

The Sirohi Breed goats are special for their fast growth and cases have been seen where more than 70% goats have delivered twins. Each goat gives about a litre of milk which is used for children or selling. These goats have bright spots on their skin and this is how they are identified as of Sirohi Breed.

The Goatery Project has become backbone of giving a dignified life for Kaisi Bai. Her economic condition has become stable now. We could see a television in her house. The people were neatly dressed and her house was hygienic. Kaisi Bai also informed that her family has been able to earn about Rs. 30,000/- in just about 2 years by selling goats.

The Project is being executed in consultation with Rajasthan University of Veterinary and Animal Sciences (RUVAS)- for technical support, and Hanuman Van Vikas Samiti (HVVS) for their expertise in selection of goats.

Hindustan Zinc has benefited 30 tribal families and shall be covering about 15 families more under their Goatery Project in Debari.

The success of Project Goatery have given a stability to the economic condition of the tribals like Kaisi Bai who have extremely limited means for their livelihood.

360 सीटों के नतीजे प्रभावित कर सकते हैं मुस्लिम, जानें कहां कितने हैं मुसलमान वोटर्स

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भारतीय राजनीति और आम चुनावों के मद्देनजर देश में 10 राज्‍य ऐसे हैं, जहां मुसलमान इस बार निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में दिख रहे हैं। ये दस राज्‍य हैं, यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार, जम्‍मू-कश्‍मीर, असम, केरल, महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और मध्‍य प्रदेश। इन राज्‍यों की 360 सीटों पर 12 करोड़ 50 लाख से अधिक मुसलमान वोटर कैंडिडेट्स की किस्‍मत का फैसला करेंगे। इन 10 राज्‍यों में से 3 (यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार) में तो देश के कुल मुसलमानों (15 करोड़ 25 लाख) की करीब पचास फीसदी आबादी बसती है। मुस्लिम आबादी के मद्देनजर क्‍या है इन राज्‍यों में आंकड़ों का गणित, डालते हैं एक नजर। सभी आंकड़े 2009-10 के नैशनल सैंपल सर्वे और 2011 की जनगणना पर आधारित हैं।
राजनीतिक दल यह जानते हैं कि मुसलमानों के वोटों के बगैर भारतीय राजनीत‍ि में दबदबा कायम रखना मुमकिन नहीं है। ऐसे में पार्टियों द्वारा हमेशा से इस समुदाय को वोट बैंक की नजर से देखना कोई राज की बात नहीं रही है। आम तौर पर यह माना जाता है कि मुसलमान किसी पार्टी या प्रत्‍याशी के लिए एकमुश्‍त वोटिंग करते हैं। भारतीय राजनीति में गेमचेंजर की भूमिका निभाने वाले इस समुदाय से जुड़े कुछ दिलचस्‍प आंकड़ों पर डालते हैं नजर :

15 करोड़ 25 लाख है मुसलमानों की कुल तादाद भारत में
12.6 प्रतिशत हिस्‍सेदारी है इस समुदाय की देश की कुल आबादी में
50 पर्सेंट मुसलमान रहते हैं सिर्फ तीन राज्‍यों (यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार) में

उत्‍तर प्रदेश
मुसलमानों की तादाद : 3 करोड़ 37 लाख
राज्‍य की आबादी में : 17%
लोकसभा सीट : 80

पश्चिम बंगाल
मुसलमानों की तादाद : 2 करोड़ 49 लाख
राज्‍य की आबादी में : 27%
लोकसभा सीट : 42

बिहार
मुसलमानों की तादाद : 1 करोड़ 56 लाख
राज्‍य की आबादी में : 15%
लोकसभा सीट : 40

जम्‍मू-कश्‍मीर
मुसलमानों की तादाद : 70 लाख
राज्‍य की आबादी में : 56%
कुल लोकसभा सीट : 6

असम
मुसलमानों की तादाद : 1 करोड़
राज्‍य की आबादी में : 32%
कुल लोकसभा सीट : 1 4

पश्चिम बंगाल
मुसलमानों की तादाद : 2 करोड़ 49 लाख
राज्‍य की आबादी में : 27%
कुल लोकसभा सीट : 42

केरल
मुसलमानों की तादाद : 76 लाख
राज्‍य की आबादी में : 23%
कुल लोकसभा सीट : 20

यूपी
मुसलमानों की तादाद : 3 करोड़ 37 लाख
राज्‍य की आबादी में : 17%
कुल लोकसभा सीट : 80

महाराष्‍ट्र
मुसलमानों की तादाद : 1 करोड़ 6 लाख
राज्‍य की आबादी में : 9%
लोकसभा सीट : 48

तमिलनाडु
मुसलमानों की तादाद : 38 लाख
राज्‍य की आबादी में : 5%
लोकसभा सीट : 39

आंध्र प्रदेश
मुसलमानों की तादाद : 76 लाख
राज्‍य की आबादी में : 9%
लोकसभा सीट : 42

मध्‍य प्रदेश
मुसलमानों की तादाद : 43 लाख
राज्‍य की आबादी में : 6%
लोकसभा सीट : 29

इनके रुख से बदलती है ‘हवा’

मुसलमान समुदाय पर उनके धार्मिक संगठनों और धर्मगुरुओं का भी खासा प्रभाव रहा है। देश में बहुत सारे प्रभावशाली मुस्लिम धर्मगुरू, नेता और संगठन हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही खुले तौर पर राजनीतिक पार्टियों के पक्ष में बोलते हैं या राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होते हैं।

केरल
यहां इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का समुदाय के वोटों पर खासा प्रभाव है। यह संगठन राज्‍य में यूडीएफ के अगुआई वाली सरकार में भी शामिल है।

बिहार
किसी एक संगठन का वर्चस्‍व नहीं। इमारत शरिया जैसे ग्रुप आधिकारिक तौर पर किसी दल के पक्ष में नजर नहीं आते, लेकिन जेडीयू और आरजेडी, दोनों ही इन्‍हें लुभाने की कोशिश में लगे रहते हैं।

असम
यहां की राजनीत‍ि में एआईयूडीएफ की खासी दखल है। इत्र के कारोबार से जुड़े बदरुद्दीन अजमल ने इस संगठन की स्‍थापना की। ये संगठन अपनी पहुंच का विस्‍तार अब पश्चिम बंगाल तक करने की योजना बना रहा है।

हैदराबाद
ऑल इंडिया मजलिस ए इत्‍तेहादुल मुसलिमीन (एआईएमआईएम) के एकमात्र एमपी असउद्दीन ओवैसी यहीं से आते हैं। ओवैसी यहां की घनी बसी मुसलमान आबादी में अच्‍छी पहुंच रखते हैं।

उत्‍तर प्रदेश
आधिकारिक तौर पर गैर राजनीतिक माने जाने वाले इस्‍लामिक तालीम देने वाले संस्‍थान देवबंद को पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में कई पार्टियां लुभाने में लगी रहती हैं। इसके अलावा, लखनऊ स्थित नदवातुल इस्‍लाम भी ऐसा ही संस्‍थान है। वहीं, बरेली में सुब्‍हानी मियां एक प्रभावशाली धर्मगुरु के तौर पर जाने जाते हैं। लखनऊ में शिया धर्मगुरु कल्‍बे सादिक भी काफी प्रभावशाली माने जाते हैं।

दिल्‍ली
जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी हाल ही में उस वक्‍त खबरों में थे, जब उन्‍होंने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया। यहां के जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद संगठन का भी पूरे देश में प्रभाव है। हालांक‍ि, यह संगठन दो धड़ों में बंट गया है।

365 में से 64 दिन तक गूंजेंगी शहनाई

Wedding (1)उदयपुर। भारतीय नव वर्ष में विवाह मुहूर्त आज (15 अप्रैल) से शुरू हो गए हैं, जो सात जुलाई तक चलेगा। इसके बाद अक्टूबर तक चातुर्मास काल में मुहूर्त नहीं रहेंगे। पंडितों के मुताबिक तीन नवंबर को देवउठनी ग्यारस पर भी शुक्र ग्रह के अस्त रहने के कारण विवाह नहीं होंगे। मुहूर्त &0 नवंबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक रहेंगे।
इस वर्ष दिसंबर तक 64 दिन विवाह मुहूर्त है। जिस पर विवाह की शहनाई गुंजेगी। इसमें अप्रैल से जुलाई तक 54 दिन और नवंबर व दिसंबर में केवल दस दिन ही शादी का मुहूर्त है। सर्वाधिक मुहूर्त मई में 19 दिन रहेंगे। विवाह मुहूर्त आज से शुरु हो गए हैं। शादियां शुरू होने का लोग को लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। जिन घरों में विवाह होना है, उनकी तैयारियों में तेजी आ गई है। सात जुलाई तक विवाहों की संख्या भी अधिक रहेगी, जबकि नवंबर व दिसंबर में विवाह कम संख्या में होंगे। इसके बाद अगले साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के बाद विवाह मुहूर्त शुरू होंगे, जो मार्च में होलाष्टक प्रारंभ होने तक रहेंगे। सर्वाधिक विवाह दो मई को अक्षय तृतीया पर होंगे। इसके बाद आठ जून को गंगा दशहरा और छह जुलाई को भड़ली नवमी पर बड़ी संख्या में विवाह होंगे।
इस साल के मुहूर्त
अप्रैल में 15 से 22, 26, 27, मई में एक से तीन, सात से 11, 1&, 15, 17 से 19, 2& से 25, 28 से &0, जून में चार से 15, 19 से 21, 24 से &0, जुलाई एक से सात, नवंबर &0, दिसंबर में एक, दो, पांच से सात, 12 से 15 दिसंबर तक शादी के मुहूर्त हैं।
चार माह रहेंगे 54 मुहूर्त
15 अप्रैल से सात जुलाई तक 54 दिन।
&0 नवंबर से 15 दिसंबर तक 10 दिन।

नाथद्वारा में तीन युवकों पर तेजाब Èेंका

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उदयपुर/नाथद्वारा। नाथद्वारा के बड़े बाजार में दूध व्यवसायी सहित तीन युवकों पर तेजाब Èेंक दिया। इससे तीनों झुलस गई। इस दौरान हुई मारपीट में तेजाब Èेंकने वाले युवक के सिर में भी चोट आई। तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस के अनुसार नाथद्वारा निवासी जसराज पालीवाल की बड़े बाजार में एक दूध की दुकान है, जहां आज सुबह नौ बजे वह पहुंचा। इसी दौरान उसकी पड़ोसी रघु सोनी से कहासुनी हो गई। दोनों के बीच मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान रघु का बड़ा भाई प्रकाश भी वहां पहुंच गया। प्रकाश ने जसराज पर तेजाब की बोतल Èेंक मारी। इससे जसराज सहित तीन जने झुलस गए। इस दौरान दौरान एक व्यक्ति ने रघु सोनी के सिर पर भी हथियार से वार किया, जिससे वह भी गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कर दोनों को ईलाज के लिए अस्पताल भेजा, जहां से दोनों ने एक-दूसरे के खिलाÈ मारपीट का मामला दर्ज कराया।

गोपालसिंह ने बाल मजदूर से कराई जूतों की पॉलिश

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उदयपुर। लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान जनता के हितैषी बने ये जनप्रतिनिधि देश का विकास, युवाओं को रोजगार, भ्रष्टाचार को जड़ से ख़त्म करना और बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा देने की बात चिल्ला-चिल्ला कर करते हैं, लेकिन इनके दावों और वादों की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कहते कुछ है और करते कुछ है। इसका जीता जागता उदहारण राजसमंद में देखा गया, जब राजसमंद लोकसभा सीट के कांग्रेसी प्रत्याशी गोपालसिंह शक्तावत चुनावी दौरे के दौरान नकार खाना में एक पेंटिंग की दुकान में बैठकर चाय की चुस्की का मजा ले रहे थे, तभी उन्होंने अपने गंदे जूतों को पॉलिश करने के लिए 11 साल के बच्चे को बुला लिया और बड़ी शान से वो ऊपर बैठे रहे। बच्चा जमीं पर बैठकर अपनी दिहाड़ी की आस में उनके जूतों पर पॉलिस करता रहा, जबकि बाल मजदूरी एक अपराध है, लेकिन जनता के ये प्रतिनिधि बेपरवाह इस अपराध के भागीदार बन गए। अपने सारे वादों और बड़ी-बड़ी बातों को भूलकर गोपाल सिंह बाल मजदूरी को रोकने के बजाय उसको बढ़ावा देते हुए दिखाई दिए। पॉलिश खत्म हुई, तो समर्थकों ने बच्चे को पैसे दिए और गोपालसिंह बिना कुछ सोचे आमसभा को संबोधित करने चल पड़े।

‘हम होंगे कामयाब एक दिन…

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उदयपुर। उदयपुर लोकसभा सीट से जहां भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज मैदान में है, वही बुलंद हौंसलों से जीत-हार की फि़क्र से दूर अन्य पार्टियों के छह प्रत्याशी भी मैदान में डटे हुए हैं। जिन्हें चाहे इस बार उनकी जीत नजर नहीं आ रही हो, लेकिन हौंसले इतने बुलंद है कि अभी नहीं तो कोई बात नहीं, लेकिन भविष्य में उनकी पार्टी का परचम जरूर लहराएगा। ऐसे ही जोश से भरे हुए ये प्रत्याशी अपने गिने चुने कार्यकर्ताओं के साथ एकल वाहन में उदयपुर लोकसभा सीट के हर क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं।
क्रमददगारञ्ज ने जब इन छह प्रत्याशियों से बात की, तो किसी ने कहा कि हमे भरोसा है हमारी जीत पर, तो किसी ने कहा इस बार भले हार हो, लेकिन एक दिन जरूर आएगा, जब हमारी पार्टी देश को इन दो भ्रष्टाचारी पार्टियों के चंगुल से बचाएगी। किसी ने अपनी तुलना हाथी के सामने चींटी से कर यह बता दिया कि हाथी को परास्त भी एक चींटी ही करती है। इन सभी प्रत्याशियों की दिनचर्या भी वैसी ही है, जैसे भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की होती है। दिनभर अपने एक वाहन में गांव-गांव के दौरे, खुद पर्चें बांटना, तो खुद डोर-टू-डोर जाकर अपने पक्ष में वोट मांगना।
छह प्रत्याशी : उदयपुर लोकसभा सीट से भाजपा के अर्जुन मीणा और कांग्रेस के रघुवीर मीणा के अलावा छह और प्रत्याशी है, जिसमे आप पार्टी के डॉ. वेला राम, सीपीआई (माले) के गौतम मीणा, बीएसपी के लक्ष्मण भील, एसपी के लक्ष्मीलाल गमेती, सीपीआई के मेघराज तावड़ और बहुजन मुक्ति के प्रभुलाल मीणा है।
हाथी को चींटी परास्त करती है : डॉ. वेलाराम
आम आदमी पार्टी (आप) के डॉ. वेलाराम कहते हैं कि मेरा मानना है कि मेरे सामने कांग्रेस और भाजपा जैसे दो हाथी है और में उनके सामने एक चींटी के सामान हूं, लेकिन एक हाथी को चींटी ही परास्त कर सकती है। वेलाराम का कहना है कि मुझे दोनों पार्टी के प्रत्याशियों के सामने सवाल-जवाब के लिए खड़ा कर दो। मैं उन्हें लाजवाब कर दूंगा। पिछले 65 सालों में इन दोनों पार्टियों के नेताओं ने शहर पर अपना राज जमाया है और शहर को गर्त में धकेल दिया है। क्रआपञ्ज जनता की उम्मीद बन कर उभरी है और मुझे अपनी जीत पर पूरा भरोसा है।
धुंआधार चल रहा है प्रचार : गौतम लाल
सीपीआई (माले) के प्रत्याशी गौतमलाल मीणा का कहना है कि हमारा प्रचार गांव-गांव में धुंआधार चल रहा है। जनता का अच्छा समर्थन भी मिल रहा है। माना कि हम बड़ी पार्टियों की तरह पैसा नहीं बांट सकते, लेकिन हम इनको बड़ी टक्कर देंगे। इनकी जीत इतनी आसान नहीं होगी। 20 लोगों की टीम लगी हुई है, जो प्रचार कार्य में जुटी हुई है। ग्रामीण इलाकों में मुझे अच्छा समर्थन मिल रहा है।
भविष्य हमारा है : गमेती
सपा प्रत्याशी लक्ष्मीलाल गमेती का कहना है कि अभी हमारी जीत संभव नहीं है, लेकिन भविष्य हमारा है। चाहे मैं जीत हासिल नहीं कर सकूं, लेकिन साठ हज़ार से एक लाख तक वोट जरूर लाऊंगा और एक दिन ऐसा आएगा जब मेवाड़ में सपा का प्रत्याशी जीतेगा।
जीत-हार से नहीं पड़ता फर्क : भील
बीएसपी प्रत्याशी लक्ष्मण भील अपनी चुनावी भाग-दौड़ के बीच रूककर बात करते हुए बताते हंै कि जीत-हार से कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारी मेहनत में कोई कमी नहीं है। हम जीत के इरादे से ही मैदान में उतरे हैं, हो सकता है इस बार नाकामी मिले, लेकिन यह नाकामी एक दिन कामयाबी में बदलेगी। सुबह से शाम तक हर क्षेत्र का दौरा करते हैं, जहां भी गए सामने आया कि जनता कांग्रेस और भाजपा से त्रस्त है और एक दिन ऐसा आएगा जब जनता हमें चुनेंगी।
हम होंगे कामयाब : तावड़
सीपीआई के प्रत्याशी मेघराज तावड़ के मोबाइल की रिंग टोन ही है क्रक्र हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन…ञ्जञ्ज, जब उनसे बात की तो जीत के विश्वास के साथ वे कहते हैं कि चाहे हमारे पास कार्यकर्ता और संसाधन की कमी है, लेकिन देश के लिए लडऩा हमारा फर्ज है। बड़ी राजनैतिक पार्टियों के लिए तो बड़े-बड़े अफसर अपनी नौकरी बजा रहे हैं, लेकिन हम भी हार नहीं मानेंगे। आज नहीं, तो कल कम्युनिस्टों का सूरज उगेगा। हम आज जीतने के लिए नहीं लड़ रहे। हम तो उन आने वाले दिनों की तैयारी कर रहे हैं, जब देश में जनता का राज होगा। मजदूर का राज होगा।
हमारा घोषणा पत्र सबसे बेहतर : प्रभुलाल
बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रत्याशी प्रभुलाल को अपने घोषणा पत्र पर इतना भरोसा है कि यदि कोई एक बार उसको पढ़ ले, तो कभी भी भाजपा कांग्रेस को वोट नहीं दे। यही नहीं उनका दावा है कि हमारी पार्टी का घोषणा पत्र भाजपा और कांग्रेस के घोषणा पत्र से बेहतर हैं। जिस दिन हमारी सरकार आई, उस दिन देश की दशा बदल जाएगी। भ्रष्टाचारियों से देश को मुक्ति मिल जाएगी। प्रभुलाल कहते हैं इस देश का भविष्य है बहुजन शक्ति पार्टी। अभी भी लोग समर्थन दे रहे हंै, माना कि अभी मेरी जीत नहीं होगी, लेकिन हमेशा हार भी नहीं होगी। हमने अपना संदेश घर-घर तक पहुंचाया है। जनता जागेगी एक न एक दिन।

पुलिस विभाग के पास नहीं जवान !

जेल में मारपीट के सात आरोपियों को चुनाव के बाद किया जाएगा गिरफ्तार, जेल प्रहरी के साथ मारपीट का मामला
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उदयपुर। उदयपुर केंद्रीय कारागृह में रविवार को गश्त के दौरान एक जेल प्रहरी की विचाराधीन कैदियों द्वारा की गई पिटाई के मामले में पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है, जबकि वह न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्टॉफ की कमी के चलते आरोपियों की गिरफ्तार अब चुनाव बाद की जाएगी। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है, लेकिन पुलिस विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य में लोकसभा के चुनाव के चलते विभाग के पास जवानों की कमी है। इस कारण अभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। पुलिस की इस कार्यशैली से जेल में पीडि़त प्रहरी की जान को खतरा भी हो सकता है, क्योंकि इस वारदात के बाद पीडि़त प्रहरी और हमलावर विचाराधीन कैदी जेल में ही है।
गौरतलब है कि रविवार को केेंद्रीय कारागृह में प्रहरी महावीरसिंह गुर्जर गश्त कर रहा था। इसी दौरान बैरिक संख्या 18 में विचाराधीन बंदी दिलीपनाथ, प्रवेश उर्फ रिंक्कु, अब्दुल जोसफ सहित अन्य कैदी जेल की मुख्य दीवार के पास घूम रहे थे, तभी प्रहरी महावीर ने उनको आशंका के चलते बैरिक में जाने के लिए कहा। बंदी बैरिक में चले गए, जहां प्रहरी भी गया। वहां पर प्रहरी पर कंबल डालकर बंदियों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी है। प्रहरी की आवाज सुनकर अन्य प्रहरी आए, जिन्होंने महावीर को बचाया। इस संबंध में सूरजपोल पुलिस थाने में जेल प्रहरी महावीर की रिपोर्ट पर सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन स्टॉफ की कमी के चलते अभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है।

ट्टा-कट्टा बकरा देता है रोजाना 1 किलो दूध,

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Udaipur.गुजरात अमरेली जिले का एक छोटा सा गांव बाबरा इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में हैं। वह भी एक बकरे की वजह से। दरअसल इस गांव में एक बकरा है, जो रोजाना एक किलोग्राम दूध देता है। यह बकरा गांव में स्थित मंदिर के एक महंत के पास है। यह घटना पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। महंत के बताए अनुसार इस हैरतअंगेज घटना को देखने अब दूर-दराज के गांव वाले भी यहां आने लगे हैं।

इस बारे में मंदिर के महंत सीमारामबापू का कहना है कि कुछ महीनों पहले तक यह साधारण बकरा ही था। लेकिन अचानक उसके थन निकल आए और जब उन्होंने उसे दुहना शुरू किया तो यह बिल्कुल बकरी के दूध जैसा ही था।

इसमें भी आश्चर्य की बात यह है कि बकरे के थन को किसी भी समय दुहा जाए, उसमें से दूध आने लगता है। महंत के बताए अनुसार दिन भर में यह बकरा अब लगभग एक किलोग्राम दूध देने लगा है।

बूथ पर मोबाइल ले जाने पर होगी कार्रवाई

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने पर हो सकती है परेशानी
उदयपुर। मतदान के दौरान मोबाइल लेकर बूथ पर पहुंचना भारी पड़ सकता है। इलेक्शन में बूथ पर मोबाइल लेकर जाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। सौ मीटर के दायरे में मोबाइल की घंटी बजी, तो खैर नहीं। यह निर्देश इलेक्शन कमीशन ने जारी किया है। इलेक्शन कमीशन से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे बूथ की गोपनीयता बनी रहेगी।
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इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बढ़ा सकते हैं प्रॉब्लम
वोटिंग के दौरान किसी तरह का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर जाने पर आप मुसीबत में पड़ सकते हैं। चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा किसी भी तरह का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लैपटॉप, टैबलेट और कैमरा लेकर बूथ पर जाने पर भी दिक्कत हो सकती है।
नहीं खा पाएंगे गुटखा, घर रखकर आए थैला
वोट डालने के लिए लाइन में लगकर गुटखा खाने, तंबाकु का सेवन करने, पान खाने पर भी आफत आ सकती है। इस बार पोलिंग बूथ पर पान, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट, माचिस लेकर जाने पर रोक रहेगी। गर्मी होने के बावजूद कोई भी वोटर पानी लेकर बूथ के भीतर नहीं जा सकेगा। बोतल बंद पानी साथ होने पर उसे बाहर रखना होगा। किसी तरह का थैला लेकर भी बूथ के भीतर नहीं जा सकेंगे।

प्रचार में टॉकटाइम का ऑफर!

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व्हाट्सअप पर दोनों ही पार्टियों के नाम से मिथ्या मैसेज
उदयपुर। लोकसभा चुनाव को लेकर देश की दोनों ही बड़ी पार्टियां इन दिनों जहां प्रचार-प्रसार में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। वहीं इन के प्रचार अभियान के तहत इस बार लोकसभा चुनाव में नये-नये तरीके भी अपनाए गए हैं। आजकल व्हॉटसअप पर एक मिथ्या मैसेज, जो कि दोनों ही पार्टियों के नाम से भेजा जा रहा है, जिसमें इस मैसेज को 10 लोगों को भेजने पर 551 रुपए टॉकटाइम की बात की जा रही है।
क्रमददगारञ्ज रिपोर्टर के मोबाइल पर आज एक ऐसा ही मैसेज आया, जिसमें लिखा हुआ है- क्रवोट फॉर कांग्रेस-सेंड दिस टू 15 फैंड्स एण्ड गेट 551.49 बेलेंस फ्रीÓ। निर्वाचन आयोग की सख्ती के चलते, जहां इन दिनों शहर में होर्डिंग्स, बैनरों एवं अखबारों में छपने वाले विज्ञापनों पर तो काफी हद तक रोक लगी है क्योंंकि इस समस्त खर्चों को प्रत्याशी के व्यय में जोड़ा जाता है। ऐसे में प्रत्याशी Óयादा प्रचार प्रसार के व्यय से बच रहे हैं। परन्तु सोश्यल साइट्स पर विज्ञापन बनाकर डालना एवं पार्टी का प्रचार जोर-शोर से चल रहा है। ऐसे प्रचार पर हो रहे खर्चें पर भी चुनाव आयोग को ध्यान देने की जरूरत है।