होली पर 100 से अधिक लोग दुर्घटनाओं में हुए घायल

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उदयपुर। शहर मेें होली के त्योहार पर अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क हादसों में लगभग सौ से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। घायलों में एमबी अस्पताल के ट्रोमा और वार्ड संख्या 16 में भर्ती कराया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार होली के तड़के से देर रात तक एमबी अस्पताल में लगभग १०६ घायलों का ईलाज किया गया।
यह है मुख्य हादसे
केस १ : एक अज्ञात व्यक्ति गुलाबबाग के पास बाइक पर सवार होकर जा रहा था। उसी दौरान अचानक बाइक फिसलने उसके सिर पर गंभीर चोट आई। अज्ञात की उम्र लगभग ३५ साल है। जिस वार्ड १६ में भर्ती कराया गया।
केस २ : सेक्टर १४ निवासी चार वर्षीय प्रथम सेन उसके पिता के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। इसी दौरान बाइक फिसलने से प्रथम के सिर में चोट आई।
केस ३ : शक्ति नगर में कुछ आरोपियों ने शराब के नेश के अस्थल मंदिर निवासी लोकेश जैन पर सिर पर बीयर की बोतल मारी दी। हादसे में लोकेश गंभीर रूप से घायल हो गया।
केस ४ : शहर के देहलीगेट चौराहे पर उदयपुर निवासी बल्कितसिंह बाइक पर सवार होकर होली मनाने जा रहा था। उसी दोरान देहलीगेट चौराहे पर पानी के कारण बाइक फिसल गई। हादसे में उसके सिर व हाथ पर चोटें आई।
केस ५ : जोशीवाड़ा निवासी नरेश राठौर होली खेलने के दौरान उसके घर में ही फिसल गया। इससे उसके सिर में चोट आईं।
केस ६ : हाथीपोल निवासी दिलीप खटीक उसके दोस्तों के साथ होली मनाने गया। उसी दौरान रास्ते में बाइक फिसलने से उसके सिर पर चोट आई। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
केस ७ : सवीना निवासी अनुराग उसके घर के बाहर खेल रहा था। उसी दौरान सामने से आ रही एक बाइक ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में दस वर्षीय अनुराग घायल हो गया।

होली के रंग चेहरों पर खिले ( PHOTO )

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उदयपुर । होली के रंग कुछ इस तरह चेहरों पर खिले कि हर चेहरा रंगीला होगया ।
होली की कहानी देखिये फ़ोटो की जुबानी ।

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होली पर चढ़ा आधुनिकता का रंग, फेसबुक पर तो कही फार्म हाउस पर मनाई होली

3उदयपुर। मस्ती और उमंग का त्योहार होली पर अब पहले जैसी परंपराएं नहीं दिखाई देती। फाल्गुन मास की दस्तक के साथ ही प्रकृति में अलग ही हलचल दिखाई देती है। प्रकृति ने अपना नियम तो नहीं बदला, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हमारी परंपराएं जरूर निढाल हो गई हैं। फाल्गुन माह में पहले शहर से लेकर गांवों तक में फाग गीतों की धूम मचती थी, जहां हर गली में मोहब्बतों के रंग में लिपटी रंगीली होली मनाई जाती थी अब इस होली ने अपना स्वरुप पूरी तरह बदल दिया है, बदलते इस दौर में, जहाँ लोगों के दिलों में दूरी आयी है, तो इस बार की होली भी अब दूर से ही फेसबुक, व्हाट्स अप और मेसेज के जरिये अधिक मनाई गयी और आधुनिकता ने इस को गली मोहल्लों और कॉलोनियों से दूर कर फ़ार्म हाउस और हॉटलों के पूल साइट बड़े बड़े घरों के गार्डन लोन में समेट कर रख दिया और परम्पराओं से दूर एक अलग ही स्वरुप में टुकड़ों टुकड़ों में बाँट दिया ।
उदयपुर में होली यूँ तो ख़ुशी और हर्षोलास के साथ मनाई गयी लेकिन पहले जैसी रंगत नहीं रही । ना तो गली चौराहों पर मस्तानों की टोली दिखी ना ही कॉलोनियों और मोहल्लों में महिलाओं के झुण्ड होली के रंगों में रंगी गीत गाती unnamedमस्ती करती हुई दिखी। अधिकतर परिवार अपनों में ही सिमट कर रह गए और घरों में ही तिलक होली का दस्तूर निभा लिया । तो किसी ने कॉल और मेसेज पर जरूर होली की बधाई देने में दिन बिता दिया। हां चुनावी माहोल में रंगे शहर के नेता जरूर दिन भर घूमते रहे ।
गली मोहल्लों से ज्यादा तो फेस बुक और व्हाट्सअप पर जरूर होली की रंगत दिखी जहाँ दिन भर मोबाइल में व्हाट्स अप पर होली के मेसेज और फ़ोटो लोग एक दूसरे को भेजते रहे तो फेसबुक की वाल होली के चित्रों से भरपूर रंगी हुई रही। इस व्हाट्स अप और फेसबुक ने लोगों को ख़ास कर युवाओं को अपने पीसी और मोबाइल तक ही सिमित रखा। हा कुछ परिवारों ने और दोस्तों ने फेसबुक पर बने अपने ग्रुप को ही लेकर अलग अलग जगह फार्म हाउस होटल और रिसोर्ट में होली पार्टी का आयोजन जरूर किया जिसमे एक नयी तरह की आधुनिक होली से मुलाकात हुई जहां बेशर्मी और बेहूदगी पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी।
5कई आधुनिक परिवारों और मॉर्डन युवाओं ने हवाला और बड़ी के फार्म हाउस पर डी जे साउंड और रैन डांस पार्टी के साथ होली मनायी। जानकारी के अनुसार जयपुर के कॉलेज की करीब 60 युवाओं की टोली हवाला स्थित एक फार्म हाउस पर होली मानाने पहुची। कुछ फार्म हाउस पर फेसबुक पर बने कॉलेज के लड़के लड़कियों के ग्रुप ने भी अपनी तरह की एक आधुनिक होली का आयोजन किया। और भी कई परिवारों ने एक साथ मिल कर डांस पार्टी के साथ एक अलग ही तरह की होली मनाई। और फार्म हाउस पर होने वाली इन पार्टियों में ख़ास ध्यान रखा गया कि कोई भी मोबाइल केमरा और वीडियो या फ़ोटो शूट नहीं हो सके। फेसबुक पर बने ग्रुप के युवा एडमिन ने पार्टी की पहली शर्त यही रखी थी कि मोबाईल केमरा अलाउड नहीं होगा।

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उदयपुर शहर में दिन दहाड़े फायरिंग, एक की मौत

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उदयपुर। आज होली के दिन शहर के बीच खून की होली खेली गयी जिसमे दिन दहाड़े शास्‍त्री सर्किल पर आपसी रंजिश और प्रोपर्टी विवाद के चलते फ़िल्मी स्टाइल फायरिंगकी गयी जिसमे एक युवक की मौत हो गयी और एक घायल हो गया ।
जानकारी के मुताबिक़ आज शाम को शाश्त्री सर्कल पर प्रवीण पालीवाल अपने परिवार और साथी विजेंद्र के साथ एक रेडिमेट कपड़ों के शो रूम पर खरीददारी कर रहा था, तब फोर्ड फीगो में सवार होकर चार पांच युवक आये और उन्होंने प्रवीण पालीवाल पर अंधाधुंध पांच फायर किये, और फरार हो गए फायरिंग में पालीवाल के पेट और पसली में गोली लगी और उसके साथ विजेन्द्र सिंह के हाथ में गोली लगी दोनों को तत्काल अमेरिकन हॉस्पिटल में भर्ती किया गया जहाँ इलाज़ के दौरान प्रवीण पालीवाल की मृत्यु हो गयी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक़ फायर करने वालों में नरेश हरिजन के भतीजे साहिल हरिजन और उसके साथियों का हाथ है, जो अभी तक फरार है।
बताया जा रहा है कि इनके बिच पुराना प्रोपर्टी विवाद चल रहा था जिसके लिए यह पहले भी आमने सामने हो चुके है ।

कैसी दिखती है इंटरनेट की ‘काली दुनिया’?

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इंटरनेट का एक स्वरूप हम देखते हैं जिसमें गूगल, याहू, फेसबुक, ट्विटर और अन्य अनगिनत वेबसाइटें होती है जिसे हर कोई खोल सकता है, लेकिन इंटरनेट में एक दुनिया और बसी है, जिसे ‘डीप वेब’ कहते हैं.

डीप वेब यानी इंटरनेट की इस काली दुनिया में कई ग़ैरकानूनी बाज़ार सजते हैं. कई ऐसी मादक, ख़तरनाक चीज़ें ख़रीदी-बेची जाती हैं, जिन्हें बेचना या ख़रीदना जुर्म माना जाता है.
पैसे की बजाय वर्चुअल मनी, बिटकॉइन से पेमेंट होता है.

ऐसी ही एक ऑनलाइन बाज़ार ‘सिल्क रोड’ को पिछले साल अमरीका की एफ़बीआई ने बंद करवाया था.

इन वेबसाइटों से खरीदारी करने पर पहचान छुपी रह जाती है, इसलिए आपराधिक गतिविधियों में इनका इस्तेमाल ज़्यादा होता रहा है.

‘डीप वेब’ कितना गहरा?

एंटीवायरस बनाने वाली कंपनी मैकअफ़े की सार्क देशों की इकाई के प्रबंध निदेशक जगदीश महापात्रा ने बीबीसी को बताया कि डीप या डार्क वेब g1359052878880586331हमें सार्वजनिक तौर पर दिखने वाले इंटरनेट से तीन गुना बड़ा हो सकता है.

उन्होंने कहा, “टॉर के ज़रिए डार्क वेब तक लोग पहुंचते हैं. इसे रक्षा सेवाओं के लिए प्रयोग किया जाता था, लेकिन जैसा ज़्यादातर तक़नीकों के साथ होता है, इसे वो लोग भी इस्तेमाल करने लगे जिन्हें यहां नहीं होना चाहिए था. साइबर अपराधी तमाम ग़ैरकानूनी गतिविधियों के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे.”

सरकारी या ग़ैरसरकारी जासूसी, ड्रग्स बेचने से लेकर पॉर्न का कारोबार और मानव तस्करी तक, सब कुछ इंटरनेट की इस काली दुनिया में खुलेआम होता है.

काफ़ी समय तक इंटरनेट पर एफ़बीआई और डीप वेब संचालकों के बीच चोर-पुलिस के खेल के बाद बीते साल बंद किए गए ‘सिल्क रोड’ ने इस दुनिया की जो तस्वीर पेश की, वो कई विशेषज्ञों की सोच से ज़्यादा खतरनाक थी.

अपराधियों का ‘आश्रय’

आमतौर पर सार्वजनिक इंटरनेट पर ग़ैरकानूनी काम करने वालों तक सुरक्षा एजेंसियां आसानी से पहुंच जाती हैं, लेकिन डीप वेब में साइबर अपराधी बड़े आराम से ग़ैरकानूनी गतिविधियां करते हैं, क्योंकि उनके पकड़े जाने का खतरा वहां कम होता है.

क्या है टॉर (TOR)?
टीओआर यानी द ऑनियन रूटर इंटरनेट का ही एक हिस्सा है, जहां पर आम ब्राउज़र से नहीं पहुंचा जा सकता. इसके लिए फ़ायरफॉक्स ब्राउज़र के एक खास किस्म के ज़रूरत होती है.
इसे अमरीकी नेवी रिसर्च लैब ने बनाया था ताकि इंटरनेट पर बिना ट्रैक हुए अनॉनिमस ब्राउज़ किया जा सके.
ये दो तरह से काम करता है. एक तो यह कि किसी साइट को खोलने पर जो डिजिटल चिह्न पीछे छूटते हैं, ये उन्हें समझ पाना इतना कठिन बना देता है ब्राउज़िंग लगभग अनॉनिमस हो जाती है.
दूसरा यह कि टॉर में कई साइट डॉट कॉम की जगह डॉट ऑनियन एक्सटेंशन में खुलता है. ये साइट छुपी होती हैं और सिर्फ टॉर पर ही दिखती हैं. गूगल और बिंग जैसे सर्च इंजन पर भी ये लिस्ट नहीं होतीं.
इसका प्रयोग पॉर्नोग्राफ़ी या आपराधिक गतिविधियों के लिए ही नहीं बल्कि पत्रकारिता और गोपनीय जानकारी भेजने के लिए भी किया जाता है.

रंग मत डाले रे सांवरिया…

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नाथद्वारा में गूंजा रसिया गान, दर्शन के दौरान टेसू के फूलों के रंग और अबीर से भीगे भक्त
नाथद्वारा। द्वितीय गृह पीठ श्रीविठ्ठलनाथजी मंदिर में शुक्रवार को ठाकुरजी निज बगीचे में पधारे। प्राचीन तिवारी में प्रभु को विराजमान किया गया। प्रभु को विशेष शृंगार धराया। द्वितीय पीठाधीश्वर कल्याणराज महाराज ने सपरिवार प्रभु को लाड़ लड़ा कर आरती उतारी।
पीठाधीश्वर ने फेट भर गुलाल, अबीर, केसरिया, पीला और नीला रंग उड़ाया। रंग मत डाले रे सांवरिया आया करो श्याम होली खेलने.. आदि रसिया गान ब्रजवासी रसिया मंडल ने किया। पुन: निज मंदिर में ठाकुरजी को पधराकर वहां भी होली खेली गई। जिसमें होली के ख्याल, स्वांग, सखी नृत्य आदि नृत्य किए गए। राग जैतश्री में ‘शोभा सकल शिरोमणि, झूलत डोल..Ó का कीर्तन गान किया गया। होली रंगी जाएगी ठाकुरजी की दाढ़ी युगल स्वरूप श्रीविठ्ठलनाथजी के मंदिर में होली के त्योहार पर दाढ़ी रंगने की परंपरा का निर्वाह किया जाएगा। होली के दिन रविवार को प्रभु को होली खेलाने के बाद गुलाल से ठाकुरजी की दाढ़ी रंगी जाएगी। इसके बाद मुखियाजी द्वारा महाराज द्वारा गोस्वामी बालकों व सेवादारों से गुलाल के साथ गुलाल खेलकर होली का उत्सव मनाया जाएगा।
ऐसा होता है यह मनोरथ
मंदिर के रतन चौक में चौरासी केले के पेड़ों से बगीचा बनाया। कई तरह के पुष्पों व पत्ते लगाए गए। मनोरथ के दर्शन राजभोग की झांकी से संध्या आरती की झांकी तक हुए। साल में एक ही बार यह मनोरथ होता है। राजभोग में श्री द्वारकाधीश प्रभु को सिंहासन पर विराजित कराकर गोस्वामी परिवार के सदस्यों ने फाग के खेल खेला कर श्री प्रभु की आरती उतारी। बगीचे के दर्शनों में स्थानीय व बाहर से आए दर्शनार्थियों ने श्री प्रभु के साथ रंग से भरी पिचकारियों व गुलाल के विभिन्न रंगों के साथ फाग खेला। मंदिर के कीर्तनकारों ने फाग में गाए जाने वाले पदों से व रसिया गान कर श्री प्रभु को सुनाते हुए वातावरण को संगीतमय बना दिया। सायं संध्या आरती के दर्शनों के बाद मंदिर के कमल चौक में नाथद्वारा से आए रसिया गायकों ने रसिया का गान कर व नृत्य कर दर्शनार्थियों का मनोरंजन किया।
फाल्गुन मेले की मस्ती खूब जमी
राजसमंद कांकरोली स्थित पवन वाटिका में शुक्रवार को जतन संस्थान के फाल्गुन मेले की मस्ती खूब जमी। महिलाएं जमकर थिरकी और खूब अबीर-गुलाल उड़ाई। जतन संस्थान की ओर से हर साल आयोजित होने वाले इस मेले में जिले भर की महिलाएं दिन भर खूब खेली और नाची। केवल महिलाओं के लिए आयोजित इस मेले में ग्रामीण हाट का भी था, तो महिलाएं बन्दूक हाथ में लेकर निशाना लगाते भी नजर आई। साथ ही साफा बांधो प्रतियोगिता में पुरुषों से भी खूबसूरत साफे बांधे। मेले में कई पकवानों की स्टॉल लगाई गई। इस दौरान रस्सा कस्सी, जलेबी रेस, मटकी फोड़, कुर्सी रेस, वन मिनट शो, कठपुतली के करतब हुए।
कांकरोली में 84 खंभ मनोरथ
चौरासी स्तंभ बगीचा मनोरथ की शुरुआत लीलास्थ गोस्वामी वि_लनाथ महाराज ने की थी। गोस्वामी महाराज के समय श्रीद्वारकाधीश प्रभु मंदिर से सवारी के साथ वि_ल विलास बाग में पधारते थे और चौरासी स्तम्भ मनोरथ वहीं होता था। उसी भाव को कायम रखते हुए इस मनोरथ को मंदिर के रतन चौक में बगीचा बनाकर मनाया जाता है।
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चित्तौडगढ़ से लड़ेंगे राजनाथ !

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काशी से मोदी, कानपुर से जोशी
नई दिल्ली। काशी और अवध के रहस्य से शनिवार को भाजपा परदा उठा देगी। सभी विवादों और कयासों को विराम देते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को वाराणसी से अपना उम्मीदवार घोषित कर देगी। उनके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के लखनऊ या चित्तौडग़ढ़ से चुनाव लडऩे की संभावना है। पार्टी के दो शीर्षस्थ नेताओं के नामों के साथ-साथ शनिवार को उत्तर प्रदेश के पहले दो चरणों में होने वाले चुनाव की सीटों के नाम भी भाजपा घोषित कर देगी।
उत्तर प्रदेश में वाराणसी, लखनऊ और कानपुर जैसी सीटों पर बमुश्किल सहमति बनाने के बीच बिहार का घमासान अभी भी पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बना हुआ है। शुक्रवार को बिहार की नाराजगी पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के आवास तक पहुंच गई। बिहार के बड़े नेताओं गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे ने टिकट वितरण में खुलेआम नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठा दिया है। जाहिर है कि चुनावी मैदान में असली कसरत से पहले ही पार्टी को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
लोकसभा चुनाव में जीत का दावा ठोक रही भाजपा को अंदरूनी खींचतान और कलह से उबारने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ खुद आगे आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, लगातार वाराणसी और लखनऊ सीटों पर बढ़ते विवाद का राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने दखल देकर पटाक्षेप किया। वाराणसी से भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी हटने से नाराज बताए जा रहे थे। इसी तरह लखनऊ में राजनाथ सिंह का नाम चलने से वहां के मौजूदा सांसद लालजी टंडन विचलित थे। दोनों ही बुजुर्ग नेताओं ने अपनी असहजता या नाराजगी का इजहार भी कर दिया था। मोदी भी इस बात के कतई पक्षधर नहीं थे कि जोशी जैसे वरिष्ठ नेता की नाराजगी मोल लेकर उनकी सीट के बारे में फैसला किया जाए। संघ नेतृत्व से इस विवाद के बाबत अमित शाह ने बात की। संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी उर्फ भैय्याजी ने इसके बाद जोशी और दूसरे बड़े नेताओं से बात की। डा. जोशी ने साफ कह दिया कि वह किसी सीट के लिए परेशान नहीं हैं, लेकिन हर बात तरीके से होनी चाहिए। संघ और भाजपा के प्रबंधकों ने इसे समझा और मोदी को वाराणसी से लड़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया। राजनाथ की इच्छा को देखते हुए उन्हें भी लखनऊ से उम्मीदवार घोषित करने पर सहमति बन गई। संभवत: डा. जोशी अब कानपुर से चुनाव लड़ सकते हैं। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लिए भाजपा अभी तक एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है। दरअसल कुछ रणनीतिक सीटों को लेकर डर इतना हावी है कि औपचारिक चर्चा से पहले ही सब कुछ दुरुस्त करने की कोशिश हो रही थी। वैसे भी बिहार की घटना से आशंका थोड़ी और बढ़ गई थी। गुरुवार को पार्टी ने बिहार की 25 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए। उसके साथ ही विवाद भी तूल पकड़ गया। मुखर विधायक गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे ने खुलेआम अपनी नाराजगी जता दी। गिरिराज तो बिना जानकारी दिए ही दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के घर पहुंच गए।
भाजपा अध्यक्ष के घर के बाहर थोड़ा ड्रामा भी हुआ और आखिरकार उनसे मुलाकात भी हुई। भागलपुर से अपना दावा ठोकते रहे स्थानीय विधायक चौबे कुछ ज्यादा हमलावर थे। उन्होंने सीधे तौर पर प्रदेश के नेताओं पर उंगली उठा दी। बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा की उम्मीदवारी की घोषणा न किया जाना भी विवाद भड़का सकता है। पार्टी उन्हें दिल्ली से उतारना चाहती है। अगर वह नहीं माने तो पटना साहिब से ही प्रत्याशी होंगे। सिन्हा के समर्थकों ने चेतावनी दे दी है कि अगर पटना साहिब से उन्हें नहीं उतारा गया तो पार्टी के लिए मुश्किल हो जाएगी। शनिवार को उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए प्रत्याशी तय होंगे।

‘ होली है, पर होली-डे नही!

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पुलिस वालों की मजबूरी है परिवार से दूर रहना त्योहार पर कैंसिल कर दी जाती है छुट्टी
हमारी होली हो या दिवाली अक्सर अपनों के साथ बीतती है, लेकिन कुछ लोग शायद इतने खुशनसीब नहीं होते। त्योहार पर वे हमेशा घर वालों से दूर ही रहते हैं। जाहिर सी बात है कि जब त्योहारों में घरवाले साथ नहीं होंगे, तो उनकी कमी खलेगी ही कौन है ये और ये कैसे मनाते हैं त्योहार, आइए जानते हैं –
उदयपुर। पुलिस डिपार्टमेंट में एक कांस्टेबल विनोद (बदला हुआ नाम) ऐसा भी है, जिसने १४ वर्ष पहले अपने परिवार के साथ होली मनाई थी। जयपुर जिले का रहने वाला कांस्टेबल विनोद इन दिनों उदयपुर शहर के एक थाने में परिवार से दूर रहकर देश व जनता की सेवा कर रहा है। पहले यह कांस्टेबल विनोद भारतीय सेना में था, जहां से सेवानिवत्त होकर पुलिस विभाग में सेवा दे रहे हैं। पुलिस विभाग हो या फौज, विनोद ने नौकरी के बाद एक ही बार अपने परिवार के साथ होली मनाई है। विनोद बताता है कि जब कभी भी ड्यूटी के दौरान दूसरों को फै मिली के साथ त्योहार मनाते देखता हूं, तो उन्हें भी घर की याद आ जाती है और आंखों में आसूं उमड़ आते हैं। ये कहानी सिर्फ पुलिस विभाग की ही नहीं है, बल्कि कई सरकारी ऑफिस में काम करने वाले लोगों की है, जिसमें त्योहारों पर स्टॉफ को छुट्टी नहीं दी जाती।
ड्यूटी पर रहते हैं जवान
पुलिस की नौकरी असेंशियल सर्विसेज में काउंट की जाती है। यही वजह है कि किसी भी पर्व या त्योहार पर इलेक्शन जैसे मौके पर इनकी छुट्टी कैंसिल कर दी जाती है। जब पूरी दुनिया होली के रंग में सरोबार होती है, तो ये पुलिस वाले किसी अनहोनी को रोकने के लिए ड्यूटी पर रहते है।
थानों में ही मनती है होली:
पुलिस वालों को छुट्टी नही मिलती है, फैमिली के साथ होली नहीं मना पाते, लेकिन इस फेस्टिवल को सेलिब्रेट करते जरूर है। इनका होली मनाने का अंदाज कुछ जुदा होता है। कई पुलिस के जवान ऐसे है, जिन्होंने लंबे समय से परिवार के साथ त्योहार नहीं मनाया है। उनकी होली थानों में ही बड़े धूमधाम से मनती है। ड्यूटी आवर के बाद बैरक में होली की ऐसी महफिल जमती है, जिसकी याद लंबे समय तक रहती है।
नहीं मना पाते कोई भी त्योहार
ऐसा नहीं है कि फेस्टिवल में अपनों के संग होली सिर्फ पुलिस सॢवस में भी नहीं है। साथ ही कई ऐसे विभाग है, जिनमें होली परिवार से दूर ही मनाई जाती है। जिसमें मुख्य रूप से एक रेलवे का भी जिक्र होता है। जिनके कर्मचारी होली फैमिली के साथ नहीं मना पाते हैं। रेलवे के लोको रनिंग स्टॉफ के कर्मचारी, इंजन ड्राइवर, गार्ड, टीटी आते हैं। इन्हीं में से एक ने बताया कि हमें तो बीमार होना भी मना है। त्योहार पर पुलिस, रेलवे व डाक्टरों के लिए क्रनो सीक लीवञ्ज का नोटिस लगा दिया जाता है। वे बताते हैं कि उनकी होली चलती ट्रेन में ही मनती है।
:आम जनता शांतिपूर्वक होली मना ले, यही पुलिस की भी होली है और यहीं पुलिस का परिवार भी है। त्योहारों पर शहर में शांति होना ही पुलिस का खास फोकस है।
-अजयपाल लांबा (एसपी, उदयपुर)

पेट्रोल एवं डीजल आरक्षित रखने जिले में १०६ पंपमालिक पाबंद

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उदयपुर । लोकसभा आमचुनाव के दौरान मतदान दलों, सरकारी, अद्र्घसरकारी एवं अधिग्रहीत वाहनों को ईधन उपलब्ध कराने के लिए जिले के सभी पेट्रोल डीजल पम्प को डेड स्टॉक के अतिरिक्त निर्धारित मात्रा में पेट्रोल/ डीजल आरक्षित रखना होगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी आशुतोष पेडणेकर ने बताया कि राजस्थान पेट्रोलियम उत्पाद आदेश के तहत उदयपुर शहर के २०, गिर्वा तहसील के १९, बडगॉव के ६, मावली के १५, वल्लभनगर के १३, गोगुन्दा के ३, सलुम्बर के ६, खेरवाडा के १., झाडोल के ४, सराडा के ६, कोटडा के ४ पेट्रोल और डीजल पम्प मालिक को ईंधन आरक्षित रखना होगा। उन्होंने बताया कि सभी पेट्रोल पम्प मालिक ४ हजार लीटर डीजल, एक हजार लीटर पेट्रोल एवं दो सौ लीटर मोबिल ऑयल आगामी १८ मई तक आवश्यक रूप से आरक्षित रहेंगे।

मनीषा का गायन, मालिनी की थिरकन खूब जमी

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उदयपुर। यहां सिटी पैलेस में आयोजित द्वितीय विश्व जीवंत विरासत महोत्सव – 2014 के तहत दूसरे दिन शुक्रवार शाम को जनाना महल में संगीतकारा मनीषा अग्रवाल, राजस्थानी एवं हिन्दी गाने प्रस्तुत किए। भारतीय लोक संगीत में माहिर मालिनी अवस्थी अपने साथ सात नृतकों एवं सात संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी।
शुक्रवार शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में संगीतकारा मनीषा अग्रवाल ने अपने राजस्थानी एवं हिन्दी गीतों की मधुर श्रृंखला पेश की। उन्होंने पग बांध में घुंघरू आज में नाचूंगी, मेरे श्याम तू मेरा घनश्याम तू, तू ही मेरा कृष्ण मनमोहना, प्रिया तोसे नैना लागे रे और आज ब्रिज में होरी रे रसिया जैसी मनमोहक प्रस्तुतियां पेश की। समारोह से पूर्व भारत में आस्ट्रिया के राजदूत हिज एक्सीलैंसी बनार्ड व्रेब्ज़ ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की।
इसके पश्चात लोक कला संगीत में माहिर मालिनी अवस्थी ने बनारस, अवध के पारंपरिक दादरा, सौहार्द, बन्ना, झोला, कजरी, होली, चेती, विवाह, दुभैया एवं निर्गुण संगीत के साथ अपने सात वाद्य यंत्रों कलाकारों के साथ सात नृतकों का अद्भुगत समागम पेश किया। उन्होंने बनारस घराने की ठुमरी पेश कर खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत में आस्ट्रिया के राजदूत हिज एक्सीलैंसी बनार्ड व्रेब्ज़ थे। कार्यक्रम में महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन उदयपुर के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी श्रीजी अरविन्द सिंह मेवाड़, ट्रस्टी लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ सहित आमंत्रित अतिथि उपस्थित थे। अंत में सभी कलाकारों को सरोपाव भेंट कर सम्मानित किया गया।