पैंथर आया तो क्या करेगा वन विभाग?

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उदयपुर। वन विभाग के पास टे्रंक्वलाइजर्स का स्टॉक खत्म हो गया है। ऎसी स्थिति में अगर पैंथर या कोई बड़ा जानवर आबादी वाले इलाके में आ जाए तो विभाग कुछ नहीं कर पाएगा। नीमच और रानी रोड के आस-पास आए दिन पैंथर देखे जाने की सूचना आती रहती है।

यही नहीं, गत दिनों नाथद्वारा में पैंथर ने एक युवक को घायल कर दिया था। ऎसी स्थिति उदयपुर में आने पर विभाग की दिक्कतें दुगुनी हो जाएंगी। बडे जानवरों को काबू करने के लिए वन विभाग इंदौर से टे्रंक्वलाइजर मंगवाता है, लेकिन वहां भी टे्रंक्वलाइजर उपलब्ध नहीं है। उप वन संरक्षक सतीश शर्मा ने बताया कि छोटे जानवरों के लिए लो कंसन्टे्रट टे्रंक्वलाइजर का इस्तेमाल किया जाता है जो किसी भी सामान्य मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध है, लेकिन बडे जानवरों को काबू करने के लिए हाई कंसन्टे्रट टे्रंक्वलाइजर की जरूरत होती है जो उदयपुर में उपलब्ध नहीं है। लेकिन हाल-फिलहाल इंदौर में भी हाई कंसन्टे्रट वाला टे्रंक्वलाइजर उपलब्ध नहीं है।

नहीं पकड़ा गया उत्पाती बंदर

डबोक एयरपोर्ट पर एक बंदर ने उत्पात मचा रखा है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम शनिवार को बंदर को पकड़नेे के लिए एयरपोर्ट पहुंची, लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी बंदर पर काबू नहीं पाया जा सका। बताया गया कि बंदर को टे्रंक्वलाइजर चलाकर पकड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वह कूद कर किसी कोने में जा छिपा और बच कर निकल गया। विभाग की ओर से रविवार को फिर से कोशिश की जाएगी। इसके लिए एयरपोर्ट पर पिंजरा भी लगाया जाएगा।

अब लेकसिटी को “फॉल्ट फ्री” करने की तैयारी

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उदयपुर। शहरवासियों को शीघ्र बिजली ट्रिपिंग की समस्या से निजात मिल सकती है। अजमेर विद्युत वितरण निगम ने फॉल्ट फ्री सिटी बनाने के लिए लेकसिटी में प्रयोग शुरू किया है। फिलहाल, ग्रिड गोद देकर सहायक अभियंताओं की जिम्मेदारी तय की जा रही है। प्रयोग सफल रहने पर प्रदेश में इसे मॉडल के तौर पर अपनाया जाएगा। पहले चरण में शहर के 33/11 केवी ग्रिड स्टेशनों में से चार ग्रिड पर प्रयोगात्मक दौर चलेगा।

इसके लिए शहर के सभी सहायक अभियंता अपने-अपने जीएसएस का सर्वे करवा रहे हैं। देखा जाएगा कि, किस स्टेशन पर सबसे कम दिक्कतें आ रही हैं। सर्वे 24 मार्च तक पूरा होने के बाद पहले चरण में चार ग्रिड का चयन किया जाएगा। इसके बाद अभियंताओं से ग्रिड को फॉल्ट फ्री रखने के लिए होने वाले खर्च का एस्टीमेट बनना शुरू होगा। एस्टीमेट व रोड मेप आदि काम अपे्रल मध्य तक पूरा करने के लिए पाबंद किया गया है। जुलाई तक चार ग्रिड के फाल्ट फ्री होने की संभावना है। इसके बाद अन्य ग्रिड हाथ में लिए जाएंगे।

एईएन को गोद
योजना को प्रभावी बनाने के लिए सम्बन्घित सहायक अभियंताओं को ग्रिड गोद दिए जाकर उनकी देखरेख में सारा काम काज होगा। इसके बाद भी ग्रिड पर उनकी नजर रहेगी।

यह होगा फायदा
बार बार ट्रिपिंग के चलते मरम्मत के लिए लाइन से जुड़े अन्य उपभोक्ताओं को भी शटडाउन का सामना करना पड़ता है। चूंकि दुनिया की प्रमुख पर्यटन नगरी है अत: विदेशी पर्यटक भी शहर की अच्छी छवि लेकर लौटेंगे।

यूं होगा ट्रिपिंग लेस
अमूमन ट्रिपिंग की समस्या का कारण ग्रिड स्टेशन व विद्युत लाइन को लेकर है। फेस टू अर्थिग के चलते लाइन फाल्ट की समस्या आम है। इस योजना में ग्रिड पर तकनीकी समस्याओं को दिखवाकर उन्हें आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा। साथ ही फेस टू अर्थिग समस्या के निपटारे के लिए लाइनों को मेंटेन करवाया जाएगा। पतले तारों के स्थान पर जरूरी होने पर मोटे तार वाली लाइन डाली जाएगी। इंसूलेटर सिस्टम को भी बेहतर करवाने का प्रावधान किया है।

“जवान बेटी की लोगों ने लगाई बोली”

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main news photo635008-03-2014-01-41-99Hजयपुर। “इस शहर ने हमें बहुत कुछ दिया, पेट भरने को खाना और तन ढंकने को कपड़ा, लेकिन साथ ही हमें मिली हवस से भरी नजरें। कभी कोई राह चलता रूक कर गंदे-गंदे इशारे करता है, तो कभी हमें खरीदने की कोशिश। कई लोगों ने मेरी जवान होती बेटी की बोली तक लगाई। हम फुटपाथ पर भले ही रहते हैं, पर हमारी इज्जत किसी महल वाले से कम नहीं है, मैंने साफ मना कर दिया। कह दिया फटा पहन लेंगे, भूखे रह लेंगे पर बेटी नहीं बेचेंगे।”

womens day265308-03-2014-01-34-99Wडबडबाई आंखों से कही जाती यह दास्तान है गवर्नमेंट हॉस्टल के पास फुटपाथ पर आशियाना बसाए बैठी देवली (बदला हुआ नाम) की। सालों से फुटपाथ पर जिंदगी गुजार रही देवली को पेट पालने से ज्यादा चिंता अपनी दो बेटियों की इज्जत बचाने की रही। आज उसकी बड़ी बेटी पूजा (बदला हुआ नाम) की भी शादी हो चुकी है और वह भी तीन बच्चों की मां बन गई है। पर चिंता बदस्तूर कायम है।

अब पूजा को यह डर है कि कहीं बड़ी बड़ी कारों में घूमते, फुटपाथ पर अपनी भूखी नजरें टिकाए हवस के भेडियों की निगाहें उसकी बेटियों पर न पड़ जाएं। उनको हर वक्त किसी अनहोनी का डर सताता है। जब उनसे कहा कि क्यों डर काहे का, पुलिस है तो सही। तो जाने उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया हो। कहने लगी, दीदी, कोई स्थायी ठिकाना हो तो पुलिस वाले भी सुनें। हम तो बेघर लोग हैं और यही हमारी इज्जत का सर्टीफिकेट भी। कुछ भी कहते ही दुत्कार ही मिलती है। एक ही बात सुनने को मिलती है कि, फुटपाथ पर रहोगे तो ये सब तो चलता ही रहेगा।

लड़कियों को समझते हैं बिकाऊ
देवली ने बताया कि वे आमेट के गोसुंडी के रहने वाले हैं, पति की कई सालों पहले मौत हो चुकी है। कमाई के लिए जयपुर आए और फुटपाथ पर रहना शुरू कर दिया। सजावटी सामान बेचकर जिंदगी बसर कर रहे हैं, लेकिन फुटपाथ पर बैठी लड़कियाें को भी लोग बिकाऊ समझ बैठते हैं। मेरी बेटी पूजा की इज्जत की कई बार बोली लगाई गई, लेकिन मैं बेटी नहीं बेचती। चिंता ऎसी हुई कि मैंने कम उम्र में ही बेटी की शादी कर दी। आज पूजा भी सामान बेचकर अपना परिवार पाल रही है। बाइस साल की उम्र की पूजा के तीन बच्चे हैं, जिसमें सबसे बड़े की उम्र सात साल है। लेकिन मां को पता है उसकी रक्षा के लिए अब पति है।

रैनबसेरों में हुआ आबरू पर हमला
बड़ी-बड़ी चमकती आंखों में कुछ कर गुजरने की चाह, जबान पर चढ़े अंग्रेजी के शब्द, सलीके से बंधे बाल, गोरे-साफ सुथरे चेहरे वाली पूजा भी शहर की घूरती निगाहों से परेशान है। कहा, पहले सोचा फुटपाथ पर पड़े हैं, इसलिए लोग खरीदने की कोशिश करते हैं। रैनबसेरों में आसरा लेने की सोची, लेकिन वहां तो स्थिति और भी खराब रही। रात होते ही छेड़छाड़ होना शुरू हो गया। गरीब हूं, लेकिन इज्जत पर हुआ यह हमला न सह सकी, इसलिए फिर से फुुटपाथ को घर बना लिया। सामान बेचने के दौरान कई बार लोग हाथ लगाने की, छूने की कोशिश करते हैं, लेकिन मैं क्या बोल सकती हूं, पेट तो पालना ही है। लोगों की सोच अब भी पुरानी ही है। चुनाव के समय सब हमारी मदद करने का वादा करते हैं, लेकिन जीतने के बाद न नेता आते हैं ना ही मदद। आज तक कोई स्वयंसेवी संस्था भी हमारी मदद को आगे नहीं आई।

मैं पढ़ाऊंगी बेटियों को ताकि न रहना पड़े फुटपाथ पर
पूजा कहती है, मेरी जिंदगी जैसे गुजर रही है, मुझे चिंता नहीं, लेकिन बçच्चयों को भूखी आंखों का सामना नहीं करने दूंगी। एक-एक रूपया जोड़ रही हूं। बच्ची को स्कूल में भर्ती करवाऊंगी। गांव में भाई भी सरकारी स्कूल में पढ़ता है, अगले साल बेटी को भी स्कूल भेजूंगी। बस चाह यह है कि वो फुटपाथ पर जिंदगी ना काटे।

देह व्यपार के लिए नाबालिगों को लगाए जा रहे इंजेक्शन

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Udaipur. देशभर में चल रहे देह व्यपार की तस्वीर पेश करते हुए एक गैर सरकारी संगठन ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आपराधिक गिरोह नाबालिग लड़कियो को बहला-फुसलाकर या फिर उनका अपहरण कर उन्हें जबरन हार्मोन इंजेक्शन लगा देते हैं ताकि उनका शारीरिक विकास जल्दी हो सके। इसके बाद उन्हें देह व्यपार में ढकेल दिया जाता है।

Prostitution265309-03-2014-12-53-99Wउत्तर प्रदेश के रेड लाइट एरिया में पिछले 24 साल से काम कर रहे “गुरिया स्वयं सेवी संस्थान” ने केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि देशभर में 30 लाख महिलाएं देह व्यपार से जुड़ी हुई हैं जिनमें से 40 प्रतिशत नाबालिग लड़कियां हैं। इसका मतलब 12 लाख नाबालिग लड़कियों को जबरन इस व्यपार में ढकेला गया।

एक अंग्रेजी अखबार में छपी के अनुसार, संगठन ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का भी उदहारण देते हुए कोर्ट को अपनी याचिका में बताया कि वर्ष 2008 से 2010 के बीच 28 हजार बच्चों का अपहरण किया गया था, जबकि एक लाख 84 हजार 605 गायब हो गए थे।

संगठन की अधिवक्ता अपर्ना भट्ट ने कहा कि ज्यादातर अपहरण आपराधिक गिरोह देशभर में फैले अपने चकला घरों मे इन लड़कियों को रखकर इनसे जबरन देह व्यपार करवाकर अपनी जेब भरते हैं।

जस्टिस एच एल दत्तू और जस्टिस एस ए बोबड़े की खड़पीठ ने एनजीओ की याचिका पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि देह व्यपार में फंसी नाबालिग लड़कियों को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

संगठन ने कहा, आपराधिक गिरोह नाबालिग लड़कियों को जबरन हार्मोन इंजेक्शन या दवाईयां देते हैं ताकि उनका शारीरिक विकास जल्दी हो। चकलाघर चलाने वाले लोग 10 से 13 साल की लड़कियों को तब तक ऎसी दवाएं देते रहते हैं जबतक वे “व्यपार” के लिए तैयार नहीं हो जातीं।

संगठन ने कहा कि रेड लाइट एरिया में लड़कियो का पहला कदम पड़ते ही इन्हें हार्मोनल इंजेक्शन और दवाईयां दी जाती हैं ताकि इनका शारीरिक विकास जल्दी हो सके। ऎसे में अगर इन लड़कियों को बचा भी लिया जाता है तो इनकी उम्र पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

संगठन ने कोर्ट को बताया कि 2005 से लेकर 2012 के बची उसने राजस्थान, असम, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से 153 नाबालिग लड़कियों को ऎसे गिरोह के चंगुल से बचाया जा चुका

सातवीं बार लोकसभा चुनाव लड़ेंगी केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास

3120_2उदयपुर. केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास सातवीं बार लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। चित्तौडग़ढ़ लोकसभा सीट से इस बार वे लगातार दूसरी बार चुनाव लडऩे जा रही हैं। इससे पहले उदयपुर संसदीय सीट पर पांच बार चुनाव लड़ीं, जिसमें तीन बार जीत दर्ज की। टिकट मिलने के बाद डॉ. गिरिजा व्यास ने भास्कर को बताया कि जनता के बीच पांच साल में किए गए कार्यों को लेकर जाएंगी। चित्तौडग़ढ़ के ऐतिहासिक किले को वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल करवाया गया।

मावली-बड़ी सादड़ी रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज को स्वीकृति दिलवाई और शिलान्यास किया गया। जल्दी ही वे आमान परिवर्तन के काम शुरू करवाने का प्रयास कर रही हैं।

गिरिजा के लिए 2009 के मुकाबले इस बार बदली हुई है तस्वीर

वर्ष 2009: चित्तौडग़ढ़ की पांचों विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस विधायक थे। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। चित्तौडग़ढ़ से यह उनका पहला चुनाव था। इस क्षेत्र में दो विधानसभा क्षेत्र मावली व वल्लभनगर उदयपुर जिले के हैं, जहां से पहले कांग्रेस के विधायक हैं। भाजपा के पक्ष में कोई लहर नहीं थी।

वर्ष 2014: राज्य के चुनावों में कांग्रेस की हार के कारण कार्यकर्ताओं का आत्म विश्वास कमजोर है। इस बार चित्तौड़ लोकसभा सीट की किसी भी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का विधायक नहीं है। इस सीट से वे दूसरी बार चुनाव लड़ रहीं हैं। भाजपा इस बार प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लहर बता रही है।

महिला दिवस : महिलाओं संग थिरकीं राजसमंद एसपी

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Udaipur.अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर शनिवार को ओड़ा मेंं आयोजित महिला शक्ति सम्मेलन में एसपी श्वेता धनखड़ महिलाओं संग थिरकने से खुद को रोक नहीं पाईं। महिला आईपीएस ने जब बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर इस तरह हौसला अफजाई की तो महिलाओं ने भी गौरवान्वित महसूस किया।

मलेशिया का विमान क्रेश

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पांच भारतीयों सहित 239 लापता
कुआलालंपुर। मलेशिया एयरलाइंस का एमएच 370 यात्री विमान शनिवार सुबह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में 227 यात्रियों समेत 12 क्रू मेंबर्स सवार थे। इस विमान में पांच भारतीयों समेत 152 चीनी, 38 मलेशियाई, 7 इंडोनेशियाई, 6 आस्ट्रेलियन, 3 फ्रेंच, 2 केनेडाई, 2 न्यूजीलैंड, 2 यूक्रेनी, 1 रूसी, इटली, ताइवान, नीदरलैंड और आस्ट्रिया के यात्री सवार थे। इसके अलावा इस विमान में दो नवजात भी सवार थे। इससे पहले एयरलाइंस ने कहा था कि इसमें कोई भारतीय यात्री सवार नहीं है। वियतनाम के नेवी अधिकारी के मुताबिक यह विमान साउथ चाइना सी के ऊपर क्रेश हुआ है। अधिकारी के मुताबिक यहां पर कोई भी नेवी की बोट नहीं है, लिहाजा राहत कार्यों के लिए नेवी की बोट मंगाई गई हैं। इस विमान से आखिरी बार संपर्क उस वक्त हुआ था जब यह साउथ चाइना सी पर उड़ान भर रहा था। इस विमान का उड़ान भरने के दो घंटे बाद ही एयर ट्रेफिक कंट्रोल [एटीसी] से संपर्क टूट गया था। जिसके बाद इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना जताई जा रही थी। यह विमान कुआलालंपुर से बीजिंग की उड़ान पर था। विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर के बाद से बीजिंग एयरपोर्ट पर अपनों की खैरियत लेने वालों का तांता लगा हुआ है। यहां पर काफी संख्या में लोग अपने लोगों की खबर लेने आ रहे हैं। एटीसी से संपर्क टूटने के बाद इस विमान का पता लगाने के लिए प्रशासन जुट गया। बोइंग 777-200 के इस विमान ने कुआलालंपुर से मलेशिया के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 12:41 पर उड़ान भरी थी। इसको 6:30 बजे बीजिंग एयरपोर्ट पर उतरना था। लेकिन उड़ान के दो घंटे बाद ही इसका संपर्क एटीसी से टूट गया। इस विमान में सवार यात्रियों में से 160 चीन के थे।
मेहता का जगत से महाप्रयाण

मेहता का जगत से महाप्रयाण

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उदयपुर। पूर्व विदेश सचिव पदम भूषण प्रो. जगत मेहता का आज अशोक नगर स्थित मोक्ष धाम पर अंतिम संस्कार किया गया। स्व. जगत मेहता की अंतिम यात्रा सुबह 11 बजे उनके निवास से शुरू हुई, जिसमें शहर के गणमान्य लोगों ने उनकी पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए। स्व. मेहता की अंतिम यात्रा में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से पीपी सरकार शामिल हुए। राज्य सरकार की तरफ से पंचायती राज मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने पुष्प अर्पित किए। इनके अलावा सांसद रघुवीर मीणा भी उनके निवास पर अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे। महापौर रजनी डांगी, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, खेरवाड़ा के विधायक नानालाल अहारी, वल्लभ नगर विधायक रणधीरसिंह भींडर भी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। संभागीय आयुक्त वैभव गालरिया, जिला कलेक्टर आशुतोष पेढऩेकर आदि कई प्रशानिक अधिकारी भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अंतिम यात्रा में अर्थी के आगे अग्नि लेकर उनकी दोनों पौत्रियां आराध्या और अनन्या चल रही थी। अशोकनगर स्थित मोक्ष धाम पर विद्युत शवदाह ग्रह में मेहता का अंतिम संस्कार किया गया। शाम को उनके निवास पर उठावना रखा गया है।
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अवैध रूप से काटे जा रहे हैं पहाड़

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उदयपुर। सरकार के नियम, कई आदेश और जिला प्रशासन की सख्ती के बाद भी चित्रकूटनगर में खेल गांव के आस-पास की पहाडिय़ों पर अवैध कब्जे और पहाडिय़ों को काटना का सिलसिला जारी है। वहां जेसीबी चलना बंद नहीं हो रही है। रसूखदार और अवैध कब्जा करने वाले असामाजिक लोग अपनी मनमर्जी चला रहे हंै। पहाडिय़ां काट कर कॉलोनियां बसाई जा रही है। अवैध निर्माणों के लिए बिजली कनेक्शन तक हो रहे हैं। लोगों ने प्लाट काट कर बिजली के पोल तक गड़वा दिए है, लेकिन जिला प्रशासन फौरी कारवाई करके निर्माण की छूट दे रहा है।
शहर के भूमाफिया इस क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रिय : शहर के सभी छोटे-बड़े भूमाफिया इस क्षेत्र में सक्रिय हो गए हंै। सबसे अधिक जमीनों के दाम पिछले सालों में इसी क्षेत्र के बढ़े है। यहीं से निकलने वाले बाइपास पर फोर लेन हाइवे भी स्वीकृत है। इससे इस क्षेत्र के जमीनों की कीमतें आसमान पर है। यहीं वजह है कि अफसरों की मिलीभगत से भू-माफिया पहाडिय़ों पर कब्जे करवा रहे हैं। कई बार पुलिस व यूआईटी ने उन्हें वहां से हटाया, लेकिन कुछ समय बीतने के बाद फिर पहाड़ काटने का काम शुरू हो जाता है।
आचार संहिता लगी और काम शुरू : आचार संहिता लगते ही अवैध निर्माणों ने जोर पकड़ लिया हैं, क्योंकि सभी प्रशासनिक अधिकारी चुनाव कार्यक्रम में व्यस्त है। ऐसे में कोई रोकने वाला नहीं। चित्रकूट नगर पर ही मुख्य सड़क के किनारे पहाड़ों पर आज एक साथ चार बड़ी जेसीबी लगी हुई थी और जब तक आचार संहिता हटेगी तब तक पहाड़ी का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। कई कब्जे धारी इन पहाडिय़ों पर कब्जा कर छोटा मोटा निर्माण करवा कर बिजली कनेक्शन ले रहे हंै।
नियम की पालना भी नहीं : उदयपुर की पहाडिय़ां उसके सौंदर्य का प्रतीक है। पहाडिय़ां काटने से उदयपुर की सुंदरता पर भी फर्क पड़ेगा। चित्रकूटनगर में हो रहे पहाड़ी काटने का काम नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। पहाड़ी पर अगर निर्माण की स्वीकृति भी मिलती है, तो उसका नियम है कि उसको एक निश्चित ऊंचाई तक ही काट कर निर्माण किया जा सकता है तथा 80 प्रतिशत क्षेत्र में हरियाली विकसित होनी चाहिए।

॥मुझे भी चित्रकूट नगर की पहाडिय़ों पर कब्जे और कटाने की जानकारी मिली है में अपने अधिकारियों को भिजवाकर कार्रवाई करवाता हूं।
-एस. मेहता,
सचिव, यूआईटी

नये पूजा स्थलों का धड़ल्ले से निर्माण

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उदयपुर। इन दिनों शहर में कई स्थानों पर नये पूजा स्थलों का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है, लेकिन जिलाधिकारी इन्हें रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट ने नये पूजा स्थालों के निर्माण पर रोक लगाते हुए इसकी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक पर डाली है। पिछले दिनों रामदेवरा जाने वाले पद यात्रियों के विश्राम और भोजन के लिए राम रसोड़े स्थापित किए गए थे। ऐसा ही एक विश्राम स्थल नये आरटीओ के पिछवाड़े बनाया गया था। इसी दौरान वहां एक देवरा भी बना दिया गया, जिसे अब विस्तार दिया जा रहा है। चित्रकूटनगर की पहाड़ी पर भी ऐसे ही दो पूजास्थल विकसित किए जा रहे हैं। इनमें अवैध रूप से बिजली की चोरी भी की जा रही है। सौ फीट रोड पर भीलों के देवरों को हटवाकर उसे अन्यत्र जगह दी गई, लेकिन वहां सड़क के किनारे फिर से चबूतरा बनाकर पूजा-पाठ शुरू कर दिया गया है।