अब बैंक में खाता न होने पर भी निकाल सकेंगे ATM से पैसे

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udaipur मुंबई. एटीएम से रुपए निकालने के लिए अब बैंक में अकाउंट या एटीएम कार्ड होना जरूरी नहीं होगा। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने नई योजना शुरू की है। बुधवार को रिजर्व बैंक के गनर्वर रघुराम राजन ने एक समारोह में बताया कि अब ऐसे लोग भी एटीएम जाकर पैसे निकाल पाएंगे जिनका किसी भी बैंक में अकाउंट नहीं है।

राजन ने बताया कि रिजर्व बैंक ने इस योजना को हाल ही में मंजूरी दे दी है। फिलहाल एटीएम से पैसे सिर्फ उस बैंक खाते से ही निकाले जा सकते हैं। जिसका एटीएम कार्ड है। राजन ने बताया कि नई योजना में ग्राहक की पहचान और जरूरी सुरक्षा मानकों का पूरा ख्याल रखा गया है।

युवराज सिंह ने IPL-7 ऑक्शन के पहले दिन रचा इतिहास, 14 करोड़ में हुए नीलाम

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udaipurबेंगलुरु. आईटीसी गार्डनिया होटल में हुई आईपीएल-7 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी का पहला दिन युवराज सिंह के नाम रहा। बेंगलुरु द्वारा 14 करोड़ रुपए में खरीदे जाने के बाद वे आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बने। वहीं दिनेश कार्तिक को दिल्ली डेयरडेविल्स ने 12.5 करोड़ रुपए में खरीदकर दूसरा सबसे महंगा खिलाड़ी बनाया।
इन दोनों धुरंधरों ने गौतम गंभीर द्वारा 2011 में बनाए 11.04 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड तोड़ दिया। गंभीर को केकेआर ने 2.4 मिलियन डॉलर (11.04 करोड़ रु) में खरीदा था।
13 फरवरी को अनकैप्ड खिलाड़ियों की नीलामी होगी। आखिरी दिन फ्रेंचाइजियों के पास कुल 34 खिलाड़ियों को खरीदने की गुंजाइश है।
दिवालिया हुए माल्या!
सबसे कम रकम बेंगलुरु की टीम के पास बची है। बेंगलुरु ने तीन खिलाड़ियों को रिटेन किया था। नीलामी में माल्या 30.5 करोड़ रुपए के बजट के साथ उतरे थे। मुथैया मुरलीधरन, पार्थिव पटेल, एल्बी मॉर्केल, रवि रामपॉल, अशोक डिंडा, मिचेल स्टार्क, निक मैडिन्सन, वरुण आरोन और युवराज सिंह के बाद उनके पास कुल 1.8 करोड़ रुपए की राशि बची। उनकी टीम में फिलहाल 4 खिलाड़ी कम हैं और कुल 1.8 करोड़ रुपए उनके बजट में हैं।
फाइनल सेशन में सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के मैट हेनरी को खरीददार मिला। उन्हें चेन्नई की टीम ने 30 लाख रुपए के बेस प्राइज पर खरीदा।
किसके पास बचा है कितना पैसा और कितने खिलाड़ियों का है कोटा?

कोलकाता – 6 खिलाड़ी – 9.00 करोड़ रु.

दिल्ली – 3 खिलाड़ी – 8.6 करोड़ रु

पंजाब – 4 खिलाड़ी -14.20 करोड़ रु.

चेन्नई – 3 खिलाड़ी – 2.9 करोड़ रु.

मुंबई – 6 खिलाड़ी – 5.15 करोड़ रु.

बेंगलुरु – 4 खिलाड़ी – 1.8 करोड़ रु.

हैदराबाद – 3 खिलाड़ी – 8.4 करोड़ रु.

राजस्थान – 5 खिलाड़ी – 12.10 करोड़ रु.

111 खिलाड़ियों को नहीं मिला खरीददार-
महेला जयवर्धने, रॉस टेलर, नमन ओझा, मैथ्यू वेड, क्रेग कीस्वेटर, कुशल परेरा, डेविड हसी, एंजलो मैथ्यूज, तिलकरत्ने दिलशान, अजहर महमूद, रॉबिन पीटरसन, मुरली कार्तिक, नाथन मैक्कुलम और प्रवीण कुमार। इन धुरंधरों को मिलाकर कुल 111 खिलाड़ी नीलाम नहीं हुए।
टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार 500 प्लस खिलाड़ी नीलामी में उतरे हैं। इसमें कैप्ड के साथ अनकैप्ड प्लेयर्स भी शामिल हैं। एक बात और जो आईपीएल नीलामी में पहली बार है वह यह कि इस बार खिलाड़ी डॉलर में नहीं, रुपए में बिकेंगे।

वेलेंटाइन डे का इतिहास

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प्यार का दिन, प्यार के इजहार का दिन। अपने जज्बातों को शब्दों में बयां करने के लिए इस दिन का हर धड़कते हुए दिल को बेसब्री से इंतजार होता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं, प्यार के परवानों के दिन की, वेलेंटाइन-डे की…। प्यार भरा यह दिन खुशियों का प्रतीक माना जाता है और हर प्यार करने वाले शख्स के लिए अलग ही अहमियत रखता है।
4 फरवरी को मनाया जाने वाला यह दिन विभिन्न देशों में अलग-अलग तरह से और अलग-अलग विश्वास के साथ मनाया जाता है। पश्चिमी देशों में तो इस दिन की रौनक अपने शबाब पर ही होती है, मगर पूर्वी देशों में भी इस दिन को मनाने का अपना-अपना अंदाज होता है।

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जहां चीन में यह दिन ‘नाइट्स ऑफ सेवेन्स’ प्यार में डूबे दिलों के लिए खास होता है, वहीं जापान व कोरिया में इस पर्व को ‘वाइट डे’ का नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं, इन देशों में इस दिन से पूरे एक महीने तक लोग अपने प्यार का इजहार करते हैं और एक-दूसरे को तोहफे व फूल देकर अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं।
इस पर्व पर पश्चिमी देशों में पारंपरिक रूप से इस पर्व को मनाने के लिए ‘वेलेंटाइन-डे’ नाम से प्रेम-पत्रों का आदान प्रदान तो किया जाता है ही, साथ में दिल, क्यूपिड, फूलों आदि प्रेम के चिन्हों को उपहार स्वरूप देकर अपनी भावनाओं को भी इजहार किया जाता है। 19वीं सदीं में अमेरिका ने इस दिन पर अधिकारिक तौर पर अवकाश घोषित कर दिया था।
यू.एस ग्रीटिंग कार्ड के अनुमान के अनुसार पूरे विश्व में प्रति वर्ष करीब एक बिलियन वेलेंटाइन्स एक-दूसरे को कार्ड भेजते हैं, जो क्रिसमस के बाद दूसरे स्थान सबसे अधिक कार्ड के विक्रय वाला पर्व माना जाता है।

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ऐसा माना जाता है कि वेलेंटाइन-डे मूल रूप से संत वेलेंटाइन के नाम पर रखा गया है। परंतु सैंट वेलेंटाइन के विषय में ऐतिहासिक तौर पर विभिन्न मत हैं और कुछ भी सटीक जानकारी नहीं है। 1969 में कैथोलिक चर्च ने कुल ग्यारह सेंट वेलेंटाइन के होने की पुष्टि की और 14 फरवरी को उनके सम्मान में पर्व मनाने की घोषणा की। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वेलेंटाइन रोम के सेंट वेलेंटाइन माने जाते हैं।
1260 में संकलित की गई ‘ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन’ नामक पुस्तक में सेंट वेलेंटाइन का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। उसके अनुसार विवाह करने से पुरुषों की शक्ति और बुद्धि कम होती है। उसने आज्ञा जारी की कि उसका कोई सैनिक या अधिकारी विवाह नहीं करेगा। संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया।

उन्हीं के आह्वान पर अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए। आखिर क्लॉडियस ने 14 फरवरी सन् 269 को संत वेलेंटाइन को फांसी पर चढ़वा दिया। तब से उनकी स्मृति में प्रेम दिवस मनाया जाता है।

कहा जाता है कि सेंट वेलेंटाइन ने अपनी मृत्यु के समय जेलर की नेत्रहीन बेटी जैकोबस को नेत्रदान किया व जेकोबस को एक पत्र लिखा, जिसमें अंत में उन्होंने लिखा था ‘तुम्हारा वेलेंटाइन’। यह दिन था 14 फरवरी, जिसे बाद में इस संत के नाम से मनाया जाने लगा और वेलेंटाइन-डे के बहाने पूरे विश्व में निःस्वार्थ प्रेम का संदेश फैलाया जाता है।

मंज़िल तक पहुंचेगी मोदी की ‘पंखों वाली रेलगाड़ी’?

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पंख वाली रेलगाड़ियां अभी ईजाद नहीं हुई हैं. फ़िलहाल उन्हें ज़मीन पर बिछी पटरियों पर ही दौड़ना होता है. उड़ना उनके बूते की बात नहीं है. पर हो सकता है, एक दिन ऐसा हो ही जाए.

डैने वाली रेलगाड़ियां आएं और उड़कर एक से दूसरी जगह पहुंच जाएं. बीच के सारे मुक़ाम बीच में ही रह जाएं.
कल्पनाओं को पंख लगाने वाले पहले भी हुए हैं. दुर्भाग्य से बेचारे कवि-कथाकार मानकर निपटा दिए गए. जार्ज ऑर्वेल हों कि आर्थर सी. क्लार्क. ‘1984’ और ‘मूनडस्ट’ की कल्पनाएं बेचते रहे.

पीटर आसिमोव भी हाल-फ़िलहाल के ठहरे. लेकिन ये चल बहुत पहले से रहा था.

सवा दो हज़ार साल पहले इसकी शुरुआत भारत में हुई. तिरुवल्लुवर के कुरल के साथ. तमिलनाडु के कवि सुब्रमण्यम भारती भी पीछे नहीं थे.

पिछली सदी के आरंभ में लिख गए थे, “ऐसे यंत्र बनेंगे कि कांचीपुरम् बैठकर, काशी के विद्वत्जन का संवाद सुनेंगे.”

ये उस दौर की बात है जब रेडियो को रेंगना भी नहीं आता था.

पंख वाली रेलगाड़ियां

अफ़सोस की बात ये है कि इन सबकी कल्पनाओं को ठीक-ठाक ठेकेदार नहीं मिले. मिले होते तो पता नहीं क्या हुआ होता. या फिर क्या से क्या हो गया होता.

2000 साल से ऊपर की परंपरा में अब लगता है, सही ठेकेदार सामने आया है और उसकी कल्पना हाथों हाथ लेने वाले ख़रीदार भी घरों के बाहर निकल रहे हैं.

अब जाकर पता चला है कि पंख वाली रेलगाड़ियां दरअसल बन चुकी हैं. उन्होंने उड़ना भी शुरू कर दिया है.

गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी डैने वाली रेलगाड़ियों का क़िस्सा अक्सर सुनाते हैं.

पता नहीं क्यों वे इसका ज़िक्र तब ज़्यादा करते हैं, जब उत्तर प्रदेश में हों. बक़ौल उनके, ये रेलगाड़ी उत्तर प्रदेश से उड़ती है तो सीधे गुजरात में उतरती है. ठीक-ठीक वजह तो नहीं मालूम, लेकिन संभव है उन्हें एक पुरानी रेलगाड़ी की याद आ जाती हो जो फ़ैज़ाबाद से चली थी और गोधरा जाकर रुकी थी.
उसके बाद जो हुआ, वह राजधर्म के दायरे से बाहर का मामला था. दंगे फ़साद और मारकाट में ये तथ्य कैसे भुलाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश का गुजरात से रेलगाड़ी वाला रिश्ता भी है.

मोदी का क़िस्सा

मोदी शायद इसीलिए बार-बार रेलगाड़ी का क़िस्सा सुनाते हैं. उनके क़िस्से में एक मां का ज़िक्र है, जिसका बेटा काम की तलाश में गुजरात जाने वाली रेलगाड़ी में सवार होता है.

मोबाइल फ़ोन का ज़माना है, सो मां अपने बेटे को घड़ी-घड़ी फ़ोन करती रहती है. हिदायतें देती है. संभल कर रहना. किसी का दिया कुछ मत खाना. ये भी पूछती है कि अब कहां पहुंचे.

देर रात फ़ोन आया तो बेटे ने कहा,”मां, अब सो जाओ, बहुत रात हो गई है. निश्चिंत रहो, मैं वहां पहुंच कर फ़ोन कर दूंगा.”

मां को चैन नहीं आया. वो सोई नहीं. कुछ देर बाद दोबारा फ़ोन किया तो बेटे ने कहा, “मां! गाड़ी गुजरात में दाख़िल हो गई है. कुछ देर में अहमदाबाद पहुंच जाएगी.”

मां आश्वस्त हो गई. बोली, “अब मैं निश्चिंत हूं.” यानी गुजरात पहुंचने का मतलब है कि अब तुम सुरक्षित हो और वो सो गई.

इस क़िस्से पर ख़ूब तालियां बजती हैं. लोगों ने क़िस्सा सुना और समझ लिया कि यही उड़ने वाली रेलगाड़ी होगी. उत्तर प्रदेश से सीधे गुजरात के नभक्षेत्र में.

ज़मीन के रास्ते पटरियों से जाती तो रास्ते में बीना और रतलाम भी पड़ते. मध्य प्रदेश का बड़ा इलाक़ा आता. कुछ गाड़ियां राजस्थान होकर गुज़रतीं.

लोगों ने उड़ंतू रेलगाड़ी की बात इसलिए भी मान ली कि और चाहे जो हो, नरेन्द्र मोदी मध्य प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति की आलोचना क्यों करेंगे.

मोदी और राजनीति
वहां तो भाजपा की ही सरकार है. शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री हैं और वो भी ऐसे-वैसे नहीं. तीसरी बार चुनाव जीत कर आए हैं. पिछली बार के मुक़ाबले ज़्यादा सीटों के साथ. ये करिश्मा तो मोदी और रमन सिंह भी नहीं कर पाए.

कुछ विघ्नसंतोषी जीव इसमें भी राजनीति ढूंढ़ने लगे. कहने लगे कि शिवराज ने चुनाव जीतने पर धन्यवाद ज्ञापन किया तो मोदी का नाम चौथे नंबर पर लिया.

पहले राज्य की जनता, फिर लाल कृष्ण आडवाणी, तब पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और उसके बाद नरेन्द्र मोदी.

ये भी बोले कि मोदी शायद आम चुनाव के बाद की स्थितियों को लेकर चिंतित हैं और चौहान उनके लिए ख़तरे की घंटी हैं.

ये वही लोग हैं जो कल्पनाओं के पंख कतरने की फ़िराक़ में रहते हैं.

नरेन्द्र मोदी ने इतनी दूर तक सोचा कि नहीं सोचा, ये तो वही जानें. फ़िलहाल लोग जो मान बैठे हैं, वही शायद ठीक होगा. मतदाता तो वही हैं. वे अगर मानते हैं कि पंख वाली रेलगाड़ियां बन चुकी हैं तो हो सकता है कि सचमुच बन गईं हों.

 

मधुकर उपाध्याय

वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

बाइक-कार भिड़ंत में छात्र की मौत

उदयपुर सुखेर थाना क्षेत्र में सौ फीट रोड पर मंगलवार रात बाइक और कार की भिड़ंत में सीटीएई के छात्र की मौत हो गई और दो घायल हो गए। रोड पर जहां हादसा हुआ, वहीं पास एक गड्ढा था। आशंका जताई जा रही है कि हादसा गड्ढे के कारण हुआ, क्योंकि इस जगह पर करीब आधा घंटे पहले एक और एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें दो लोग घायल हुए थे।
थाना इंचार्ज अशोक नाथ ने बताया कि हादसे में बाइक सवार आकोदा (कुचामन सिटी) निवासी नरेन्द्र खिलेरी (22) की मौत हुई है। इसके साथी झुंझुनूं निवासी प्रवीण चौधरी और छात्रा अंशुल चौधरी घायल हैं। प्रवीण की हालत गंभीर होने पर कॉलेज प्रबंधन ने देर रात उसे एमबी अस्पताल से अमेरिकन हॉस्पिटल में भर्ती कराया। नरेन्द्र सीटीएई कॉलेज में बीई फाइनल ईयर का स्टूडेंट था। बताया गया कि नरेन्द्र की हेड इंजरी के कारण मौत हुई है। अगर उसने हेलमेट पहना होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। पुलिस ने बताया कि नरेन्द्र, प्रवीण और अंशुल बाइक पर सौ फीट रोड से गुजर रहे थे।
सामने से तेज रफ्तार कार ने बाइक को चपेट में ले लिया। हादसे में तीनों गंभीर घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर काफी भीड़ लग गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां नरेन्द्र को डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर घायल प्रवीण को भर्ती किया गया। अंशुल प्राथमिक इलाज के बाद घर चली गई।
सड़क पर खोदा गड्ढा, नहीं लगाया कोई बोर्ड
मौके पर किसी विभाग द्वारा केबल लगाने के लिए सड़क किनारे गड्ढा खोदा गया है। इसकी मिट्टी रोड के बीच तक पड़ी हुई है। गड्ढे के बाद विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों ने यहां कोई बोर्ड नहीं लगाया। इससे अंधेरे में किसी को गड्ढा नजर नहीं आ रहा था। अचानक गड्ढे के दिखाई देने से कई वाहन चालक यहां गिरते-गिरते बचे।

पहली कक्षा की छात्रा बनी मां, पेट में दर्द से हुआ खुलासा

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udaipurसुकमा. जिले के कोंटा ब्लॉक के पोलमपल्ली आवासीय विद्यालय में पढऩे वाली 14 साल की छात्रा ने रविवार सुबह दोरनापाल के अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। पहली कक्षा में पढऩे वाली छात्रा रतनी (काल्पनिक नाम) को पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। जांच में पता चला कि वजह प्रसव पीड़ा है। सुबह 9 बजे उसने बालक को जन्म दिया।
पूरा स्कूल प्रशासन आश्रम शाला में रहकर पढऩे वाली नाबालिग बच्ची के मां बनने के इस मामले को दबाने में जुटा हुआ है। रेसीडेंशियल स्कूल की अधीक्षिका कुंती टेकाम के मुताबिक ब्लॉक के ही गांव में रहने वाली रतनी विद्यालय में ही रहती थी। उन्हें इस बात का बिल्कुल पता नहीं चला कि बच्ची गर्भवती है। बीईओ एसके दीप बताते हैं कि लड़की के माता-पिता ने गांव के ही किसी युवक से बेटी के अवैध संबंध होने की बात स्वीकार की है। बच्ची को अस्पताल से घर भेज दिया गया है।
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में राजीव गांधी शिक्षा मिशन अंतर्गत संचालित आवासीय विद्यालयों में हर महीने बच्चियों के मेडिकल टेस्ट का नियम है। छात्रा के प्रेगनेंट होने और बच्चे को जन्म देने की घटना से साफ है कि मेडिकल टेस्ट शायद नहीं हो रहे थे। विद्यालय की अधीक्षिका को बच्ची के पेट में 9 महीने के गर्भ का पता नहीं चला। पेट दर्द के बाद जब छात्रा को दोरनापाल अस्पताल में भर्ती कराया गया तब जाकर अधीक्षिका कुंती टेकाम को इसका पता चला।

ऐश्वर्य महाविद्यालय का एक दिवसीय शैक्षिक सेमीनार

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उदयपुर, विद्या भवन साधना केन्द्र पर ऐश्वर्य महाविद्यालय उदयपुर के एसटीसी के 46 छात्र-छात्राओं ने एक दिवसीय सेमीनार में भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा वनों का विनाश को रोकने के सम्बन्ध में चर्चा हुई। इस सेमीनार में डॉ. मनोज राजगुरू, मुख्य अतिथि, ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नागरिकों के अधिकार, पंचायती राज व्यवस्था एवं उनके कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी विद्यार्थियों को प्रदान की। कार्यक्रम की अध्यक्षा डॉ. अर्चना जैन ने राष्ट्रकी सेवा के लिये राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा किये कार्यों पर प्रकाश डाला तथा छात्र-छात्राओं को राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच रखने को कहा। महाविद्यालय की प्रभारी शरण काला ने प्रकृति की रक्षा के लिये हमें संसाधनों की रक्षा करनी चाहिये तथा वनों को सुरक्षित रखा जाए। संचालन डॉ. आर.एल. श्रीमाल ने किया।

एमपीयूएटी को मिलेगा ’’कृषि शिक्षा सम्मान’’

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उदयपुर, महिंद्रा एण्ड महिंद्रा लि. कम्पनी की महिंद्रा समृद्घि योजना के अन्तर्गत वर्ष 2014 का ’’कृषि शिक्षा सम्मान’’ महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर को प्रदान करने की घोषणा का गई है। 24 फरवरी को नई दिल्ली के होटल अशोका मे आयोजित किये जा रहे एक सम्मान समारोह मे माननीय कृषि मंत्री शरद पंवार यह पुरस्कार महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलपति प्रो. ओ. पी. गिल को प्रदान करेंगे। प्रो. गिल ने इस पुरस्कार को विश्वविद्यालय के लिये ब$डा सम्मान बताते हुए विश्वविद्यालय के सभी अनुसंधान, शिक्षा व प्रसार कर्मचारियों को बधाई दी।

निगम स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में उदयपुर का द्वितीय स्थान

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उदयपुर। अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में डिस्कॉम स्तर पर सीकर वृत्त मुख्यालय पर 05 से 08 फरवरी तक आयोजित निगम स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में उदयपुर वृत्त के कर्मचारियों ने बॉस्केट बॉल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर खिलाडियों को शील्ड तथा प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

अजमेर डिस्कॉम के चार अधिकारी सम्मानित

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उदयपुर, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस राष्ट्रीय सेवा समिति द्वारा राज्य के विविध जिलों में आयोजित नेताजी जयन्ति समारोह में विविध सेवा प्रकल्प एवं उल्लेखनीय गतिविधियों के लिए उदयपुर जिले के विद्युत विभाग के चार अभियन्ताओं का सम्मान किया गया।
नेताजी जयन्ति समारोह के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कार्यक्रम प्रभारी लुम्बाराम मेघवाल ने बताया कि बिजली बचाओ, चोरी रोको अभियान के तहत सराहनीय योगदान के लिए एवीवीएनएल उदयपुर डिस्कॉम के अधीषाशी अभियंता पुरूषोत्तम पालीवाल, अशोक कुमार झा (सतर्कता) गिरीश कुमार जोशी एवं सहायक अभियंता एस.एस.बडाला को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है कि गत 17 से 23 जनवरी तक नेताजी जयन्ति समारोह के तहत उदयपुर सहित अन्य स्थानों पर आयोजित इस सप्ताह के तहत विविध सेवा प्रकल्प की विविध गतिविधियां आयोजित की गई जिसमें कई जनकल्याणकारी रचनात्मक राष्ट्रीय कार्यक्रमों को शामिल किया गया। इस दौरान ब$डी संख्या में समाज सेवी प्रबुद्घ नागरिकों, अधिकारियों एवं संगठनों ने रचनात्मक भूमिका निभाई।
अजमेर डिस्कॉम के सदस्य के रूप में श्री मेघवाल नेताजी को आदर्श के रूप में अपनाकर देश के शहीदों के नाम प्रतिमाह के वेतन भत्तों का 22 फीसदी प्रधानमंत्री राहत कोष में समर्पित करते रहे हैं तथा राज्य मेे बिजली बचाओ अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।