जन्नत नशीं हुए सैयदना

plainsmile1

उदयपुर। दाउदी बोहरा समाज के 52वे धर्मगुरू सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन का शुक्रवार को ह्रदयाघात से निधन हो गया। वे 102 साल के थे। दक्षिण मुम्बई के मालाबार स्थित सैफी महल में उनका निधन हुआ। शनिवार सुबह उन्हें मुंम्बई में सुपुर्दे ख़ाक किया जाएगा । सैयदना का जनाजा शुक्रवार को रात ११.३० बजे सैफी महल से रवाना होगा।
सैयदना की मौत कि खबर की पुष्टि सैफी महल के प्रवक्ता ने की उनकी मौत की खबर मिलते ही संभाग भर दाउदी बोहरा समाज के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। यहां बोहरवाड़ी में शोक की लहर छा गई। बोहरा समुदाय के सभी व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर मातम मनाने के लिए मस्जिदों में एकत्र होना शुरू कर दिया। अपने मौला के नहीं रहने की खबर सुनते ही दाऊदी बोहरा समाज के घर-घर में मातम शुरू हो गया। सैयदना के अंतिम दर्शनों के लिए सम्भाग से सैंकड़ों श्रद्धालु मुंबई रवाना हो गए हैं।
डॉ. सैयदना के अनुयायी दुनियांभर से मुंबई पुहंच रहे हैं। उनके जनाजे की अंतिम यात्रा शुक्रवार को रात ११.३० बजे मुंम्बई में मालाबार स्थित उनके निवास सैफी महल से रवाना होगी जो सुबह तक भिन्डी बाज़ार स्थित रोज़ा ताहेरा सैयदना के वालिद सैयदना ताश सैफुद्दीन की दरगाह पर पहुचेगी जहाँ उन्हें सुपुर्दे ख़ाक किया जायेगा । उनकी अंतिम यात्रा में देश विदेश की कई हस्तियों के आने कि खबर है ।
डॉ. सैयदना कुरान के हाफिज थे। उनका जन्म छह मार्च, 1912 को सूरत में हुआ था। वे ५२ वर्ष की उम्र में गद्दीनशीन हुए थे। डॉ. सैयदना ने जीवनभर अपने समुदाय की रहनुमाई की। दाउदी बोहरा समुदाय में उनका आदेश ही कानून था। उन्होंने सदैव प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। वे हिंदुस्तान से बहुत प्रेम करते थे और अपने अनुयायियों को भी मुल्क की खिदमत का संदेश देते थे।
डॉ. सैयदना को उनकी विद्वता के लिए दुनिया भर में सम्मान प्राप्त हुआ। वे जहां भी जाते उन्हें स्टेट गेस्ट का दर्जा प्राप्त होता था। मौला ने १९९८ में उदयपुर आकर दाउदी बोहरा समुदाय को अमन का पैगाम दिया था। उन्होंने पिछले साल गलियाकोट की यात्रा की थी। डॉ. सैयदना ने अपने जीवन काल में तीन इस्लामिक यूनिवरसिटी की स्थापना की। डॉ. सैयदना ने दुनिया भर में करीब 500 मस्जिदों का निर्माण करवाया।
अपने निधन से पहले ही सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने सैयदना मुफ्फदल सैफुद्दीन को अगला धर्मगुरू घोषित कर दिया था।

 
उदयपुर के बोहरा समुदाय की हर आँख से आंसू छलका …….. (PHOTO)

IMG_7030

IMG_7008

IMG_7028

IMG_7018

IMG_7016

IMG_7025

 

71 साल के अमिताभ ने 65 साल की जया बच्चन को किया ‘लिप किस’

amitabh-jaya-lip-kiss-s_650_011614085504

मेगास्टार अमिताभ बच्चन ‘ब्लैक’ फिल्म में रानी मुखर्जी को ‘लिप-किस’ करते नजर आए थे. लेकिन सार्वजनिक रूप से पहली बार उनकी ऐसी तस्वीरें सामने आई है.
71 साल के अमिताभ ने अपनी 65 साल की पत्नी जया बच्चन को किस किया. यह मौका था हाल ही में हुए स्क्रीन अवॉर्ड्स का, जहां अमिताभ को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया. जया बच्चन और रेखा की गलबहियों वाली तस्वीरें तो आपने खूब देखीं, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, वह हम आपको दिखाते हैं.

अमिताभ बच्चन जब अवॉर्ड लेकर मंच से लौटे तो सीधे आगे की सीटों पर बैठे अपने परिवार के पास गए. पत्नी जया ने अप्रत्याशित तौर पर उन्हें अपनी ओर खींचा और किस करके बधाई दी. इस दौरान उनके बेटे अभिषेक बच्चन दोनों के बीच में ही बैठे हुए थे.

सियासत के लिए शांत शहर में न करें सौहार्द तोडने का प्रयास

head

उदयपुर। प्रतापगढ जिले के एक छोटे से गांव में बीती 14 जनवरी को जो कुछ हुआ वह निंदनीय है। कोई भी सभ्य समाज ऐसे दंगों का समर्थक नहीं हो सकता। दंगे की परिणिती में दोनों ओर से चली गोलियों ने तीन घरों के चिराग बुझा दिए, लाखों रूपयों की सम्पत्ति को फूंका गया। जो कुछ भी हुआ उसकी भर्त्सना की जानी चाहिए लेकिन ऐसे संवेदनशील अवसरों पर वाणी और शब्दों पर संयम की नितांत आवश्यकता है। हिंसा का दौर मानसिक उबाल का परिणाम होता है, उसके लिए दोनों पक्ष जिम्मेदार होते है। घटना के जिम्मेदारों को चिन्हित कर उन्हें निश्चित रूप से दण्डित भी किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसे अवसरों का राजनीतिक लाभ हथियाने की चेष्टा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनकी यह कुचेष्टा माहौल को हवा देने में तात्कालिक रूप से सफल हो सकती है, लेकिन उसके परिणाम समाज एवं देश को वर्षों तक झेलने पडते है।
हाल ही की घटना पर उदयपुर शहर के जिम्मेदार भाजपा के प्रवक्ता ने भाजपा के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के हवाले से एक विज्ञप्ति जारी कर पुरे मुस्लिम समाज को कटघरे में खडे करते हुए कह दिया कि  “उदयपुर शहर सहित अन्य स्थानों पर समुदाय विशेष द्वारा त्यौहार के अवसर पर अराजकता का प्रदर्शन किया गया”

क्या ऐसा कह कर ये अन्य समाजों को जबर्दस्ती मुस्लिम समाज के विरोध में करने की राजनीति नहीं कर रहे है ?

क्या उन्हें उदयपुर शहर और अन्य शहरों की शांति अच्छी नहीं लग रही ?

क्या वे लोकसभा चुनाव के करीब आने से दंगों की राजनीति नहीं करना चाह रहे है ?
शहर के इन जिम्मेदार लोगों ने ही नहीं अन्य सभी ने देखा कि उदयपुर शहर में ईद मिलादुन्नबी के मोके पर निकले गए जुलूस में 70 से 80 हजार लोग आये थे और इतनी भारी तादाद में लोग जुलुस के रूप में खुशियां मनाते हुए निकले लेकिन कहीं से भी कोई अवांछित या अप्रिय घटना नहीं हुई । जहाँ इन जिम्मेदार वोटों की राजनीति करने वालों को शहर के लोगों की तारीफ करनी चाहिए कि अन्य जगह के तुलना में यहाँ इतनी भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग निकले लेकिन कही से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। जबकि जुलूस हर मौहल्ले से होकर गुजरता है। उसकी जगह यह और उकसाने का काम कर रहे है । ऐसे में ये अपने आपको जनप्रतिनिधि कहने वाले खुद के शहर के लोगों में ही भेद भाव की भावना पैदा कर रहे है ।
आराजकता किसको कहते है, शायद यह भी इन जिम्मेदारो को नहीं मालूम। जहाँ कोई कानून ना हो किसी को कानून की पडी ना हो । ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर मुस्लिम बाहुल्य खांजीपीर में भी साज सज्जा और रौशनी देखने के करीब 30 से 40 हजार लोग आये और सबसे बडी बात यह कि वहां एक भी पुलिस का जवान तैनात नहीं था फिर भी वहाँ के नौजवानो के पुख्ता इंतजाम के चलते बिना कोई अप्रिय घटना के सारा कार्यक्रम शांतिपूर्वक हो गया, तो क्या यह आराजकता होती है ? ईद मिलादुन्नबी का जुलूस ही नहीं कोई भी धार्मिक जुलूस को चाहे भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा हो, गुरु गोविन्द सिंह साहेब की शोभायात्रा हो, चेटीचंड पर निकाली जाने वाली यात्रा या शिवरात्रि पर निकाले जाने वाली यात्रा हो हर यात्रा अपने आप में एक शांति और धर्म पर चलने का पैगाम लिए होती है। जिसमे लोग भक्ति भाव और दिल से जुडते है। पिछले सौ साल का इतिहास उठा कर देख ले तो इक्का दुक्का घटना को छोड कर कभी किसी यात्रा में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई ।
धार्मिक जुलूस किसी भी धर्म का हो उसमे भाग लेने वाले लोग कभी आराजकता पैदा नहीं करते। हां खुशी के आलम में कुछ अनुशासनहीनता हो सकती है जो हर समाज के मोतबीर लोगों को ध्यान रखना चाहिए लेकिन आराजकता नहीं हो सकती। धार्मिक जुलूस कोई राजनैतिक पार्टियों की रैली या हडताल के जुलूस की तरह नहीं होते जहाँ लोगों को खरीदकर बुलाया जाता है। और आराजकता का माहोल बनाया जाता है ।
ऐसे माहोल में ऐसे जिम्मेदार लोग अपने वोट और सीट की चिंता करने वाले लोग जो खुद को जनप्रतिनिधि कहते है वे लोग इस तरह से समाजों में घृणा पैदा करके कुछ वक्त के लिए जरूर जीत जायेगे लेकिन ऐसे लोग ही इन दंगों की राजनीति और साप्रदायिकता के घोडे पर सवार होकर पहले इस शहर को और फिर देश को गर्त में ले जायेगें।

अमिताभ बनें देश के राष्ट्रपति: भाजपा नेता

140115112659_amitabh_bachchan_shatrughan_sinha_vidhu_vinod_chopra_shahrukh_khan_624x351_screen

शत्रुघ्न सिन्हा ने की अमिताभ बच्चन को राष्ट्रपति बनाने की वकालत, माधुरी दीक्षित के साथ दोबारा काम करने को लेकर जूही चावला डांवाडोल और सलीम ख़ान किस बात में अपने बेटे सलमान ख़ान को अपने जैसा मानते हैं.
अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की अमिताभ बच्चन से प्रतिद्वंद्विता किसी से छिपी नहीं है. वो समय-समय पर अमिताभ बच्चन की आलोचना करते रहे हैं. लेकिन बीती रात मुंबई में हुए क्लिक करें स्क्रीन पुरस्कार समारोह में उन्होंने अमिताभ बच्चन को राष्ट्रपति बनाने की वकालत तक कर डाली.

अमिताभ को इस समारोह में लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें स्टेज पर ये पुरस्कार शत्रुघ्न सिन्हा ने दिया.

अमिताभ की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा, “अमिताभ बच्चन फ़िल्म इंडस्ट्री और देश का गौरव हैं. उन्हें देश का राष्ट्रपति बनना चाहिए.”

कई फ़िल्मों में साथ काम कर चुके अमिताभ और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच लंबे समय से आत्मीय संबंध नहीं रहे. शत्रुघ्न सिन्हा ने तब खुलकर नाराज़गी भी ज़ाहिर की थी, जब अमिताभ ने उन्हें अपने बेटे अभिषेक की शादी में नहीं बुलाया था.

‘माधुरी संग दोबारा आने की उम्मीद नहीं’

जूही चावला फ़िल्म ‘गुलाब गैंग’ में पहली बार क्लिक करें माधुरी दीक्षित के साथ नज़र आएंगी. 90 के दशक की इन दोनों मशहूर अभिनेत्रियों ने अपने करियर के शीर्ष पर कभी एक दूसरे के साथ काम नहीं किया.

और जूही चावला को नहीं लगता कि वो दोबारा माधुरी के साथ काम कर पाएंगी. उन्होंने एक समारोह के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि ‘गुलाब गैंग’ के ज़रिए मुझे पहली और आख़िरी बार माधुरी के साथ काम करने का मौक़ा मिला है. मुझे नहीं लगता कि भविष्य में ऐसा मौक़ा फिर मिलेगा.”
‘गुलाब गैंग’ की कहानी बहुत सशक्त है और जूही को लगता है कि इस तरह की कहानियां बहुत कम होती हैं, इसलिए वह और माधुरी को साथ देखने को लेकर उतनी आशावादी नहीं हैं.

जूही ने आगे कहा, “यह कभी-कभी होता है जब हमें अच्छी कहानी मिलती है और हम समर्पण से काम कर सकते हैं. इसलिए, मुझे नहीं लगता कि हम दोबारा साथ काम करेंगे.”

सलमान बिलकुल मेरे जैसे: सलीम ख़ान

मशहूर लेखक सलीम ख़ान का मानना है कि उनके बेटे क्लिक करें सलमान ख़ान कई मायनो में उनके जैसे ही है. एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में सलीम ख़ान ने कहा, “सलमान की ज़िंदगी में जितनी भी महिला मित्र आईं बाद में उनसे भले ही सलमान का संबंध टूट गया हो वो उनके संपर्क में रहते हैं. एक या दो उदाहरण को छोड़ दिया जाए तो सलमान की दोस्ती अब भी उनकी पुरानी गर्लफ़्रेंड्स से है. उसी तरह से मैं भी अपनी पुरानी महिला मित्रों के संपर्क में रहता था.”

सलीम ख़ान कहते हैं कि यही वजह है कि संबंध टूट जाने के बावजूद उनकी अपनी पुरानी गर्लफ़्रेंड्स से रिश्तों में कड़वाहट नहीं आती.

मांझे से कटी मासूम की जिंदगी की डोर

0

child death6352014-01-2014-08-32-99N

जयपुर। महावीर नगर मोड़ (बजाज नगर) पर मंगलवार दोपहर मांझे से छह वर्षीय बच्ची की गर्दन कटकर लटक गई। बच्ची बाइक की टंकी पर बैठकर मां-बाप के साथ घर जा रही थी। बेटी की चीख पिता ने सुनी तो बाइक रोकी और मांझा को हाथ से रोकना चाहा तो वह भी जख्मी हो गया। बच्ची को एसएमएस अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

पतंग-डोर के चक्कर में मंगलवार को दो और लोगों की जान चली गई। पतंग लूटने के चक्कर में जगतपुरा में अज्ञात वाहन की टक्कर से दस वर्षीय बालक की मौत हो गई और आगरा रोड पर मांझे से घायल होने पर असंतुलित होकर गिरे बाइकसवार की मौत हो गई। हादसे में उसका साथी गम्भीर रूप से घायल हो गया, जो एसएमएस अस्पताल में भर्ती है।

मांझा से मौत का शिकार हुई छह वर्षीय चंचल एलबीएस नगर निवासी प्रमोद दाधीच की बेटी थी। प्रमोद दाधीच मूल रूप से गांव राजमहल बोटूंदा, टोंक के रहने वाले हैं। तीन साल से जेएलएन मार्ग एक निजी हॉस्पिटल के पास स्थित वेंकटेश्वर मंदिर में महंत हैं।

प्रमोद दाधीच की बेटियां राधा (8), चंचल (6) और एक बेटा खुशीराम (4) है। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे वह अपनी पत्नी सीता देवी, बेटी राधा और बेटा चंचल के साथ बाइक से महावीरनगर में एक यजमान के घर गए। पूजा पाठ कराकर दावत खाकर प्रमोद बाइक से घर आ रहे थे। बाइक की टंकी पर बेटी चंचल बैठी थी।

महावीर नगर मोड़ से आगे अचानक चंचल चीखी, उसकी गर्दन लटक गई। प्रमोद ने बाइक रोकी और चंचल की गर्दन में फंसे मांझे को हाथ से रोकना चाहा तो मांझा उसकी शर्ट, इनर को काटा और हाथ जख्मी कर दिया। प्रमोद लहूलुहान बेटी को जयपुरिया हॉस्पिटल लेकर पहुंचे तो चिकित्सकों ने उसे एसएमएस रेफर कर दिया। एसएमएस में चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोçष्ात कर दिया।

जिद करके बैठी बाइक की टंकी पर

प्रमोद दाधीच ने बताया कि बेटी चंचल यूकेजी में पढ़ती थी। मंगलवार दोपहर यजमान के घर जब बाइक से जाने लगे तो चंचल जिद कर बाइक पर आगे बैठी ताकि पतंगें देश सके। जब यजमान के यहां से चलने लगे तो फिर चंचल ने बाइक की टंकी पर बैठने की जिद की।

प्रतापगढ़ में गोलीबारी के चलते तीन की मौत, पथराव-आगजनी के बाद लगा कर्फ्यू

0

2206_44
उदयपुर। प्रतापगढ़ जिले के कोटड़ी व मोहेड़ा गांव में मंगलवार शाम को दो समुदायों के बीच गोलियां चलने से तीन लोगों की मौत हो गई और 7 जने घायल हो गए। राजा की मौत मौके पर ही हो गई थी, जबकि दिनेश गायरी और भंवर सिंह ने उदयपुर लाते समय रास्ते दम तोड़ दिया। क्षेत्र में दोनों पक्षों की ओर से पथराव व आगजनी की गई।

देर रात तक हालात काबू नहीं होने पर कोटड़ी व मोहेड़ा गांव में कफ्र्यू लगा दिया गया। इससे पहले पुलिस ने हालात को काबू करने के लिए लाठीचार्ज किया और धारा 144 भी लगाई। आसपास के गांवों व जिला मुख्यालय पर भी पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं। उदयपुर में घायलों के पहुंचने से पहले रात दो बजे भाजपा व संघ के कई कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे।

एहतियातन यहां भी प्रशासन अधिकारी व पुलिस जाप्ता तैनात किया गया। आईजी जीएन पुरोहित ने बताया कि रेंज मुख्यालय से भी फोर्स रवाना की गई है। पुराने विवाद को लेकर दोनों समुदायों के बीच विवाद हुआ। दोनों पक्षों में कुछ बातों को लेकर पहले से भी विवाद चल रहा था। एसपी उत्सवलाल छानवाल ने रात 1.17 बजे भास्कर को कोटड़ी व मोहेड़ा में कफ्र्यू लगाने की जानकारी दी।

“सारे आलम में छाया नूर” जश्ने ईद मिलादुन्नबी पर शहर में निकला भव्य जुलूसे मोहम्मदी (PHOTO)

रिपोर्ट – अब्दुल लतीफ़

सभी फोटो – ( वरिष्ठ फ़ोटोग्राफर) मोहम्मद सगीर

DSC_0061

 

उमडे हजारों अकीदतमंद, हर जगह हुआ गर्मजोशी से इस्तकबाल
सफ़ेद लिबास ने दिया शांति का संदेश
उदयपुर। मुस्लिम समुदाय ने मंगलवार को हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर निकले जुलूसे मोहम्म्दी में अकीदत के साथ शामिल हुए। इस दौरान जहां अधिकतर युवा सफेद लिबास पहने हुए थे वहीं जुलूस में बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक शामिल थे। जुलूस-ए-मोहम्मदी में सत्तर हजार से अधिक की संख्या में लोग शामिल थे वहीं हाथीपोल एवं मल्लातलाई में घरों के बाहर खडी महिलाओं एवं युवतियों ने जुलूस को इस्तकबाल किया। विभिन्न मुस्लिम मौहल्लों से शामिल हुए जुलूस में बैण्ड के साथ ’सहाबा-सहाबा हमारे सहाबा, नबी चांद है और सितारे सहाबा, सोणा आया ते सजदी गलियां बाजार, हम देश में गुंजेगा या रसूल’ सहित हुजूर की शान में कई नातियां कलाम पेश करते हुए चल रहे थे।
शहर की विभिन्न मुस्लिम बस्तियों ने जुलूसे मोहम्मदी प्रात: ११ बजे से निकलना आरंभ हो गए। शहर के सवीना एवं खांजीपीर से निकलने वाले जुलूस सीधे अंजुमन चौक से आरंभ होने वाले मुख्य जुलूस में शामिल हुए जबकि सुन्दरवास, पहाडा तथा आयड से निकलने वाले जुलूस सीधे हाथीपोल पहुंचकर मुख्य जुलूस में शामिल हुए। मुख्य जुलूस अपरान्ह एक बजे अंजुमन चौक से आरंभ हो बडा बाजार, घंटाघर, हरवेनजी की खुर्रा होते हुए हाथीपोल पहुंचा। जुलूस का मार्ग में जगह-जगह इस्तकबाल किया गया। हाथीपोल पर जुलूस पहुंचने पर जब आयड, पायडा एवं सुन्दरवास के जुलूस शामिल हुए तो जुलूस का मुस्लिम युवाओं द्वारा जोरदार अभिनन्दन किया गया। हाथीपोल से जुलूस सिलावटवाडी, जाटवाडी, नई पुलिया, अम्बावगढ कच्ची बस्ती, आयुर्वेद चौराहा होते हुए मल्ला तलाई पहुंचा। मल्लातलाई में भी जुलूस का जोश-खरोश से इस्तकबाल हुआ। यहां से जुलूस ब्रह्मपोल बाहर स्थित हजरत इमरत रसूल बाबा की दरगाह पहुंचा जहां बाबा के म$जार पर चादर पेश कर प*ातेहा के बाद मुल्क में अमन-चैन एवं खुशहाली की दुआ के बाद जुलूस खत्म हुआ।

DSC_0005
जुलूस में संख्या का अंदाज इस बात से लगाया कि उसका एक छोर नई पुलिया पर था तो अंतिम छोर इमरत रसूल बाबा की दरगाह तक पहुंच चुका था। जुलूस के स्वागत के लिए मार्ग के दोनों ओर हजारों की तादाद में स्त्री-पुरूष बच्चे नये लिबास पहनकर कतारबद्घ खडे थे। जुलूस में अधिकांश युवाओं ने सफेद इस्लामी पौशाक पहन कर शंति का संदेश दिया। जुलूस के स्वागत के लिए पूरे माठा में आकर्षक स्वागत द्वार सजाए गए तथा मिठाईयां एवं विभिन्न व्यंजन वितरित किए गए।
जुलूस में घोडे, ऊंट गा$डियां एवं दोपहिया एवं हल्के वाहन बच्चों एवं वृद्घों को बैठाए चल रहे थे, उसी के साथ म्युजिक सिस्टम पर कौमी नग्मों से जुलूस को धार्मिक रंगत मिल रही थी। दावत-ए- ईस्लामी से सम्बद्घ युवा सपे*द लिबास पर हरी पग$डी बांधे सुर-मधुर स्वर में नात-ए-कलाम से माहौल को धर्ममयी बनाए हुए थे। नातों की धून पर कुछ वृद्घ श्रद्घा से झूमते दिखाई दिए। जुलूस के दौरान रोक के बावजूद भी रह-रह कर आतिशबाजी हो रही थी।
इससे पूर्व सोमवार को देर रात तक अंजुमन के जलसे का आयोजन किया गया जहां भोर तक श्रद्घालु मुस्लिम औलेमाओं के धार्मिक तकरीरे सुनते रहे। जुलूस के दौरान पुलिस प्रशासन के पुख्ता प्रबंध के चलते किसी अप्रिय वारदात के समाचार नहीं है। जुलूस के शांतिपूर्वक सम्पन्न होने पर पुलिस प्रशासन एवं इंतजामिया कमेटी ने सभी का आभार व्यत्त* किया।

DSC_0004 DSC_0016 DSC_0018 DSC_0020 DSC_0037 DSC_0038 DSC_0042 DSC_0045 DSC_0050 DSC_0052 DSC_0061 DSC_0066 DSC_0070 DSC_0076 DSC_0077 DSC_0079 DSC_9931 DSC_9933 DSC_9934 DSC_9940 DSC_9945 DSC_9947 DSC_9951 DSC_9964 DSC_9968 DSC_9979

ईद -ए- मीलाद के जश्न पर खांजी पीर में उमड़े लाखों लोग ( PHOTO )

20140113_IMG_6330

उदयपुर । मुस्लिम बाहुल्य खांजीपीर में की गई भव्य विद्युत साज सजावट को देखने के लिए सोमवार रात मुस्लिम समुदाय उमड पडा। इसको लेकर खांजीपीर की मौहल्ला कमेटियों द्वारा विभिन्न इंतेजाम किए गए है वहीं लोगों के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजनों की सबीले भी लगाई गई है।
शहर भर के मुस्लिम खांजी पीर में की गयी रौशनी देखने उमड़ पड़े । जगह जगह खाने पीने की सबीलों पर महिलाऐं बच्चों और युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के लाखों लोगों की भीड़ का सिलसिला देर रात तक चलता रहा ।

 

 

khanji peer 4 20140113_IMG_6331 20140113_IMG_6335 20140113_IMG_6337 20140113_IMG_6341 20140113_IMG_6349 20140113_IMG_6351 20140113_IMG_6354 20140113_IMG_6357 20140113_IMG_6359 khanji peer khanji peer 1 khanji peer 3

ईद – ए- मीलाद पर लाखों की भीड़ का मेला लेकिन पुलिस का एक जवान भी तैनात नहीं

20140113_IMG_6335

उदयपुर। ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर खांजी पीर में शाम सात बजे से भीड़ जुटना शुरू हुई जो देर रात चलती रही । लेकिन हमारे पुलिस और प्रशासन की मुस्तेदी देखो कि इतने बड़े जन समुदाय के बिच सुरक्षा या किसी अनहोनी या घटना को रोकने की दृष्टि से एक पुलिस का जवान भी तैनात नहीं किया गया । जबकि महिलाऐं और बच्चे हज़ारों की तादाद में यहाँ एकत्र हुए थे। शहर में कही भी किसी भी हिस्से में कही अगर १० लोगों की सभा भी होती है तो १० पुलिस के जवान तैनात रहते है । लेकिन यहाँ मुस्लिम समुदाय के शहर भर के महिलाऐं बच्चे युवा इकठ्ठा हुए । लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने उनकी सुरक्षा को दरकिनार करते हुए कोई पुलिस का जवान तैनात नहीं किया । वाहनों को खड़ा रखने में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा । लेकिन वहाँ कोई ट्राफिक पुलिस का जवान दिखाई नहीं दिया । ऐसा नज़ारा हर मुस्लिम मोहल्ले का था खास कर धोली बावड़ी, मल्लाह तलाई में भी लोगों की भीड़ थी लेकिन वहाँ भी सुरक्षा के लिहाज से कोई पुलिस का जवान दिखाई नहीं दिया ।

“सरकार की आमद मरहबा” दुल्हन की तरह सजी लेकसिटी ( PHOTO )

0

anjuman
उदयपुर। शहर में पिछले कई दिनों से मुस्लिम बस्तियों में जश्रे ईदमिलादुन्नबी को लेकर भव्य तैयारियां की जा रही है। ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर लेकसिटी को रंग बिरंगी लाइटों से दुल्हन की तरह सजा दिया । शहर के हर मुस्लिम मोहल्लों की नोजवान कमेटियों ने रौशनी से महल्ले जगमग कर दिये । डी जे पर हर जगह “सरकार की आमद मरहबा ” “मिलादे मुस्तफा है” “सोना याला के सज गयी गलियां बाज़ार ” नातों से शहर गूंज गया। खांजी पीर में में मेले सा माहोल रहा जो रात देर तक मजमा चलता रहा । रौशनी और सजावट देखने हज़ारों की तादाद में लोग आये । ढोली बावड़ी में रंग बिरंगी रौशनी से मोहल्ले की सड़के और घरों को सजाया गया । सिलावट वाड़ी की सज्जा हाथीपोल से बड़े गेट लगा कर नयी पुलिया और अम्बावगढ बस्ती तक की गयी । मल्ला तलाई को रंग बिरंगे परदोंऔर लाइटों से सजाया गया । हर मोहल्ले में खाने पीने के पकवानों की सैकड़ों सबीले लगायी गयी ।

mallah talai

khanji peer

IMG_4730

 

IMG_4735

IMG_4711

IMG_4765