उदयपुर में भाजपा-कांग्रेस पर छाए बगावत के बादल, विरोध आया सड़कों पर

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उदयपुर। “संघर्ष नहीं अब रण होगा और रण बड़ा भीषण होगा ” टिकिट कि दौड़ में पिछड़े दावेदारों से भाजपा कांग्रेस को अब यह चुनौती मिल रही है। दोनों दल अपनी बगावत से आशंकित है। और सबसे अधिक बगावत के सुर भाजपा में हो रहे है। टिकिट बंटवारे में कटारिया कि भागीदारी के चलते कटारिया के खिलाफ गुस्सा अब सड़कों तक उतर आया है । जैन वाद को बढ़ावा देने का आरोप कटारिया पर लगाया जारहा है। वही जिले की आठ सीटों में से एक भी ब्राह्मण को टिकिट नहीं देना और वल्लभ नगर में रणधीर सिंह भिंडर के विरोध में खुलकर उतर राजपूतों की उपेक्षा करना कटारिया पर लगे इस आरोप को सिद्ध कर रहा है। शुक्रवार दिन को मावली विधानसभा से आये सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय के baahar जैम कर प्रदर्शन किया और मावली विधान सभा से उम्मेदवार पर पुनः विचार करने कि मांग रखी । इधर युवा छात्र नेता भी कटारिया के विरोध में उतर गए है। भाजपा के वरिष्ठ ब्राहम्ण नेता मांगीलाल जोशी ने बगावत का बिगुल बजते हुए अपने विधान सभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ने कि नियत से चुनावी दौरे और जनसम्पर्क करना भी शुरू कर दिया है।
मेवाड़ की आठ सीटों में से मावली, सलूम्बर, और गोगुन्दा में भाजपा कांग्रेस में सीधा मुकाबला तय है। बाकी बची सीटों में कांग्रेस ने उम्मीदवारों कि घोषणा के बाद तय होगा। और वल्लभ नगर सिट पर भाजपा फंसी हुई है। इसीलिए अभी तक उम्मेदवार कि घोषणा नहीं हुई है।

भाजपा कि मुसीबत :
भाजपा सात सीटों पर अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। मावली से मुख्य दावेदारों मांगीलाल जोशी, धर्म नारायण जोशी और शांति लाल चपलोत को छोड़कर पार्टी ने दलीचंद डांगी को टिकिट दिया। जिसका भाजपा को भारी विरोध सहना पढ़ रहा है। आज दिन में मावली से सैकड़ों कार्यकर्ता पटेल सर्कल स्थित भाजपा कार्यालय पहुचे और गुलाब चाँद कटारिया के विरोध में नारे बाजी कि तथा वसुंधरा राजे के नाम ज्ञापन जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट दिया जिसमे मावली से उम्मेदवार बदलने कि मांग कि है । उदयपुर ग्रामीण में फूल सिंह मीणा का भी विरोध सामने आ रहा है। और वल्लभ नगर सिट पर गुलाबचंद प्रमुख दावेदार रणधीर सिंह भिंडर कि खुल कर खिलाफत करचुके है। दिल्ली से टिकिट बंटवारे के बाद उदयपुर आये कटारिया मावली और उदयपुर ग्रामीण की सिट पर आम कार्यकर्ता को टिकिट देने कि दुहाई दे रहे है लेकिन उनकी इस दुहाई को सुनाने वाला कोई नहीं है । और मेवाड़ के लिए कटारिया को तानाशाह बताते हुए कई वरिष्ठ नेता विरोध में है।

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भाजपा के विरोध में ब्राह्मण एक जुट :
जिले कि आठ सीटों में से ब्राह्मण को एक भी सिट नहीं देने से ब्राह्मण गुस्से में है और उनका क्रोध अब सामने आरहा है । इसी के चलते घास गांव ब्राह्मणों कि आज बड़ी सभा हो रही है । सूत्रों के अनुसार भारी संख्या में वहाँ ब्राह्मण एकत्र हो कर कोई ठोस निर्णय ले सकते है । जो कटारिया और भाजपा के हित में बिलकुल नहीं होगा । वरिष्ठ नेता मांगीलाल जोशी ने बगावत के सुर बुलंद करते हुए मावली में निर्दलीय लड़ने कि मंशा से जन संपर्क शुरू कर दिया है ।

कटारिया का पुतला फूंका :
छात्र संघर्ष समिति ने भी कटारिया का विरोध करते हुए विवेकानंद चोराहे पर करारिया का पुतला फूंका इससे पूर्व सैकड़ों छात्रों ने नागदा रेस्टोरेंट से विवेकानंद चौराहे तक कटारिया कि शव यात्रा निकाली । छात्र संघर्ष समिति के रविशर्मा ने कहा कि कटारिया ने मेवाड़ में जैन वाद को बढ़ावा देते हुए ब्राह्मण और राजपूतों कि उपेक्षा की है। और मेवाड़ के लिए न ही उदयपुर शहर कि तरक्की के लिए कुछ किया । मोहन लाल सुखाडिया यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष अमित पालीवाल ने भी कटारिया का विरोध जताते हुए कहा कि उन्होंने संघर्ष समिति के युवाओं को पुलिस कि लाठियों से पिटवाया था। बरसों से जमे कटारिया शहर के विकास में रुकावट है । पालीवाल ने बताया कि आज छात्र संघर्ष समिति कि कोर कमिटी कि बैठक है जिसमे कटारिया के विरोध में रणनिती तैयार कि जायेगी ।

[quote_center]बरसों से रूठे विरोधियों को मानाने के लिए कटारिया अब उनकी चोखट तक पहुच गए है। गुलाबचंद कटारिया के घोर विरोधी कमल मित्र मंडल के मुखिया ताराचंद जैन को मानाने के लिए कटारिया उनके घर पहुच गए और उन्हें सारे मतभेद बुलाने के लिए पार्टी कि दुहाई देते हुए। साथ आकर काम करने का न्योता दे दिया। ताराचंद जैन ने अभी कटारिया को कोई स्पष्ट बात नहीं कही है अपने कमल मित्र मंडल के बाकी सदस्यों से पूछ कर फैसला लेने कि बात कही है।[/quote_center]

कटारिया पहुचे मानाने :
बरसों से रूठे विरोधियों को मानाने के लिए कटारिया अब उनकी चोखट तक पहुच गए है। सूत्रों के अनुसार गुलाबचंद कटारिया के घोर विरोधी कमल मित्र मंडल के मुखिया ताराचंद जैन को मानाने के लिए कटारिया उनके घर पहुच गए और उन्हें सारे मतभेद बुलाने के लिए पार्टी कि दुहाई देते हुए। साथ आकर काम करने का न्योता दे दिया। ताराचंद जैन ने अभी कटारिया को कोई स्पष्ट बात नहीं कही है अपने कमल मित्र मंडल के बाकी सदस्यों से पूछ कर फैसला लेने कि बात कही है।

कांग्रेस में भी विरोध के सुर तेज :
कांग्रेस में भी विरोध के सुर तेज होने लगे है । कांग्रेस देहात महिला जिलाध्यक्ष कामिनी गुर्जर ने मावली से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है उन्होंने बताया कि पार्टी ने उनके साथ विध्वस घात किया है उनका नाम पेनल में होने के बावजूद उन्हें नज़र अंदाज किया गया । इधर कांग्रेस में शहर और ग्रामीण के प्रत्याशियों को लेकर उत्सुकता बनी हुई है । सूरतों के अनुसार कांग्रेस उदयपुर शहर से अब किसी ब्राह्मण को टिकिट दे सकती है । चित्तोड़ सांसद गिरजा व्यास के भी शहर से उम्मेदवार होने के कयास लगाये जारहे है। उम्मीद jatayi जा rahi है कि यदि शहर से गिरजा व्यास को टिकिट मिलता है तो कटारिया के सामने चुनौती कड़ी हो जायेगी

विधानसभावार चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त

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उदयपुर, विधानसभा आमचुनाव के दौरान विभिन्न गतिविधियों पर नजर रखने, व्यय नियंत्रण आदि गतिविधियों के लिए जिले की आठों विधानसभा क्षेत्र के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।
जिला निर्वाचन अधिकारी आशुतोष पेडणेकर ने बताया कि गोगुन्दा विधानसभा क्षेत्र के लिए श्री बी.बी.शर्मा, उदयपुर शहर के लिए बिश्वनाथ सिन्हा, झाडोल के लिए बी.सुनजालंग, उदयपुर ग्रामीण के लिए एस.पी.दीक्षित, वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र के लिए पी.के.केसर, मावली के लिए श्री संदीप भटनागर , सलुम्बर के लिए श्री जोथनखुमा, खेरवाडा के लिए आर.जी.त्रिवेदी को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।
उन्होंने बताया कि उदयपुर शहर, मावली, वल्लभनगर एवं सलुम्बर विधानसभा क्षेत्र के लिए प्रसेनजीत सिंह एवं उदयपुर जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों के लिए श्रीमती बीना यादव को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया। ये सभी पर्यवेक्षक सर्किट हाउस में ठहरेंगे।

आदर्श आचार संहिता को प्रभावी बनाने के लिए निर्देश जारी

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उदयुपर, भारतीय संविधान की धारा 324 के तहत गठित निर्वाचन आयोग संसद व राज्य विधानसभाओं के स्वतंत्र निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव संचालन के लिए केन्द्र व राज्य में चुनाव ल$डने वाले प्रत्याशियों से अपनी कर्तव्य पालना सुनिश्चित करता है।
जिला निर्वाचन अधिकारी आशुतोष पेढणेकर ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह भी सुनिश्चित करता है कि चुनाव उदेश्यों के लिए सरकारी मशीनरी का कहीं भी दुरूपयोग नहीं हो एवं मतदाताओं को कहीं भी लालच न दिया जाये व धमकी तथा डर के बल पर मतदान प्रक्रिया न करवायी जाये। इसके लिए आदर्श आचार संहिता आगामी राज्य विधानसभा चुनाव के तहत लागू की गयी है। आचार संंहिता यह निर्धारित करती है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी, सत्ताधारी दल, सभा, जुलूस एवं चुनाव प्रचार आदि किस प्रकार करेंगे एवं मतदान के दिन उनकी गतिविधियों व पार्टी के कृत्य किस प्रकार नियंत्रित किये जा सकेंगे। इस सम्बंध में भी विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये गये है ।
उन्होंने बताया कि जिले में पेड न्यूज एवं प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया में प्रसारित होने वाले राजनैतिक विज्ञापन प्रमाणित होने के बाद ही प्रकाशित-प्रसारित किये जा सकते है । इसके लिये जिला स्तरीय एमसीएमसी कमेटी का गठन किया गया है
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संचालन के लिये आवश्यक निर्देश
आर. पी एक्ट 1951 की धारा 129 (1) के तहत कोई भी अधिकारी/ कार्मिक किसी मंत्री की निजी यात्रा पर निर्वाचन क्षेत्र में उनसे मिलता है तो वह दुराचार का दोषी होगा तथा उस पर दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकती है। निर्वाचन संचालन से जु$डे सभी अधिकारियों व कार्मिकों के स्थानान्तरण पर पूर्ण प्रतिबन्ध रहेगा। घोषणा तिथि से पूर्व स्थानान्तरण होने पर आचार संहिता प्रभावी होने से पूर्व यदि कार्यगृहण नहीं किया गया है तो आयोग की अनुमति के बिना उक्त आदेश प्रभावी नहीं माना जायेगा। जो भी अधिकारी 6 महीने में सेवानिवृत होने वाला हो वह आयोग के निर्देश की परिधि में नहीं आयेगा। जिन अधिकारियों की सेवा अवधि ब$ढायी गयी है वे सभी अधिकारी निर्वाचन संबंधी कार्य नहीं करेंगे।
मंत्रियों व आयोग के सदस्यों के लिए भी चुनाव निर्देश जारी किये जाते है। कोई भी मंत्री (केन्द्रीय या राज्य स्तरीय) किसी निर्वाचन क्षेत्र से राजकीय यात्रा नहीं कर सकते है। किसी भी राजकीय कार्यालय या गेस्ट हाउस में पार्टी संबंधी कार्य के विचार विमर्श करने पर भी प्रतिबन्ध लगाया गया है। चुनाव यात्रा के दौरान कोई भी मंत्री बत्ती सायरन/पायलट कारों का उपयोग नहीं कर सकते है। सभी मंत्री सदभावना समारोह में भाग ले सकते है परन्तु उनका उदेश्य राजनीतिक न होकर सामाजिक सौहार्द से प्रेरित ही होना चाहिए। किसी भी निजी यात्रा में मंत्रियों के राजकीय निजी स्टाफ को साथ रहने की अनुमति नहीं दी जाती हैं।

आकाशवाणी के स्टूडियो में महिला उद्घोषक से छेड़छाड़

कार्यस्थल पर महिला उत्पीडऩ के गंभीर मामले को दबाने की कोशिश

 

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उदयपुर। स्थानीय आकाशवाणी केंद्र के स्टूडियो में पिछले सप्ताह रात के समय एक अस्थाई महिला उद्घोषक के साथ तकनीकी प्रसारणकर्मी ने अश्लील हरकतें की। इस मामले को पिछले एक सप्ताह से दबाया जा रहा है। पीडि़ता ने इसकी मौखिक शिकायत उप महानिदेशक माणिक आर्य को भी की है, लेकिन अब तक जांच समिति गठित करने से आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई है ना ही पुलिस में प्रकरण दर्ज कराया गया है। सूत्रों के अनुसार पिछले सप्ताह रात के समय आकाशवाणी केंद्र के तकनीकी प्रसारण कर्मी दीपक कुरील स्टूडियो में लाइट चैक करने के बहाने एक अस्थाई महिला उद्घोषक को ले गया, जहां उसने लाइटें बंद करके महिला उद्घोषक को बाहों में भर लिया और चुम्मा लेते हुए कहा कि क्रमूड है क्या?ञ्ज, उस दौरान महिला उद्घोषक वहां से स्वयं को छुड़ाकर निकल गई। इसकी मौखिक शिकायत दूसरे ही दिन पीडि़ता ने आकाशवाणी के उप महानिदेशक से की, जिस पर एक कमेटी गठित की गई, जो मामले की जांच कर रही है। कार्यस्थल पर महिला उत्पीडऩ के इस गंभीर मामले में उप महानिदेशक आर्य ने जांच समिति गठित करने से ज्यादा कुछ नहीं किया है। हालांकि इस संबंध में पीडि़ता से बात की गई, तो उसने ऐसी किसी घटना के होने से इनकार किया है। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर आकाशवाणी में दबाव का माहौल बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी एक वरिष्ठ उद्घोषक ने कई दफा अस्थाई महिला उद्घोषकों के साथ अश्लील हरकतें की, जिसकी शिकायतें भी आला अधिकारियों से की गई, लेकिन उसमें भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इस मामले में एक अस्थाई महिला उद्घोषक ने मुझे मौखिक शिकायत की। इस पर मैंने जांच समिति गठित की है। समिति में आकाशवाणी केंद्र के सीनियर लोगों को शामिल किया गया है। पीडि़ता से इस संबंध में लिखित में शिकायत भी मांगी गई है।
-माणिक आर्य, उप महानिदेशक, आकाशवाणी केंद्र, उदयपुर

कटारिया ब्रह्महत्या के दोषी: जोशी

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उदयपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मांगीलाल जोशी ने गुलाबचंद कटारिया पर ब्रह्महत्या का आरोप लगाते हुए जोरदार हमला किया है। उन्होंने उदयपुर जिले की सभी आठ सीटों में से एक भी सीट ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं देने पर कड़ा रोष जाहिर किया है।
उन्होंने श्री कटारिया पर ब्राह्मणों और राजपूतों को आपस में लड़ाने की क्रसाजिशञ्ज रचने का भी आरोप लगाया है। श्री जोशी ने क्रमददगारञ्ज को दूरभाष पर बताया है कि वे वल्लभनगर क्षेत्र के जिलाप्रभारी है। उन्होंने कहा कि वल्लभनगर सीट पर रणधीरसिंह भींडर का दावा बनता है। ऐसे में उनका टिकट काट कर किसी ब्राह्मण को टिकट देने की रणनीति अपनाना राजपूतों और ब्राह्मणों को लड़वाने की साजिश है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। श्री जोशी ने बताया कि कटारिया ने उन्हें मावली का टिकट दिलाने का वादा करके क्षेत्र तैयार करने के लिए कहा था। लेकिन ऐनवक्त पर धोखा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही धर्मनारायण जोशी को टिकट दिया जाता लेकिन तीन ओपन सीटों में से एक भी सीट ब्राह्मण को नहीं देने से पूरा समुदाय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। श्री जोशी ने कहा कि कटारिया शुरू से ही ब्राह्मणों की जड़े काटने में लगे हुए हैं, जो सभी को पता है। इस बार तो क्रवे एक्सपोजञ्ज ही हो गए हैं। श्री जोशी ने कल प्रेस कांफ्रेंस करके कई कच्चे चिठ्ठे खोलने का इरादा भी जताया है।
इस बीच कटारिया ने मावली विधानसभा क्षेत्र में दिग्गजों की नाराजगी पर कहा कि सबको संतुष्ट कर पाना किसी के बूते की नहीं है, फिर भी असंतुष्टों को मनाया जाएगा तथा जो पार्टी के लिए समर्पित है वो पार्टी का फैसला स्वीकार करेगा।

पति नहीं तो पत्नी को टिकट, यह कांग्रेस की परंपरा है: कटारिया

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उदयपुर। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता गुलाबचंद कटारिया ने पटेल सर्कल स्थित पार्टी कार्यालय में भाजपा प्रत्याशियों की बैठक में वल्लभनगर सीट को लेकर चल रहे विवाद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि पति नहीं, तो पत्नी को टिकट यह कांग्रेस की परंपरा है। जैसा कि सलूंबर सीट पर कांग्रेस ने रघुवीर मीणा की पत्नी को टिकट देकर किया है। इससे पूर्व श्री कटारिया का आज सुबह मेवाड़ एक्सप्रेस से उदयपुर के सिटी रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर स्वागत किया गया। इस दौरान श्री कटारिया को फूल-मालाओं से लाद दिया।

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श्री कटारिया ने मेवाड़ के घोषित प्रत्याशियों की बैठक में कहा कि पार्टी ने एक आम कार्यकर्ता को टिकट दिया है, जिसका मान रखना है और चुनावी समर में जान लड़ा देनी है। उन्होंने कहा कि अब अगर चुनाव में जीत हासिल नहीं होती है, तो आगे कोई भी पार्टी आम कार्यकर्ता को टिकट देने की हिम्मत नहीं करेगी। इस बार मेवाड़ में पार्टी ने कार्यकर्ताओं का मान रखा है, तो कार्यकर्ताओं को चाहिए कि पार्टी का मान बढ़ाए और अपने-अपने क्षेत्र से प्रत्याशियों को जीत दिला कर लाएं। कटारिया ने बताया कि टिकट की लाइन में बड़े बड़े दिग्गज थे, लेकिन दलीचंद डांगी और फूलसिंह मीणा जैसे आम कार्यकर्ता को दिया गया है। वल्लभनगर पर टिकट देने के बारे में कटारिया ने कहा अब बाकी बचे टिकट देने का जिम्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष पर है, वे जिसको चाहे टिकिट दे सकते हैं। कटारिया ने कहा कि चुनाव प्रचार भी जल्दी हो शुरू कर दिया जाएगा और ज्योतिष से मुहूर्त निकालकर पर्चा भरने की तारीख भी कल तक घोषित कर देंगे।
भव्य स्वागत: श्री गुलाबचंद कटारिया को उदयपुर विधानसभा क्षेत्र से पुन: प्रत्याशी बनाये जाने के बाद आज सुबह पहली बार नगर में आने पर रेलवे स्टेशन पर पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। सुबह दिल्ली से आने वाली मेवाड़ एक्सप्रेस से पहुंचे कटारिया का पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने नारे लगते हुए फूल मालाओं से लाद दिया और स्टेशन से काफिला सूरजपोल स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर पहुंचा और माल्यार्पण किया गया। बाद में कटारिया ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चुनाव में जी जान से जुट जाने का आह्वान किया। कटारिया का स्वागत करने के लिए सिटी स्टेशन पहुंचने वालों में जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, पूर्व महामंत्री प्रमोद सामर, महापौर रजनी डांगी, युवा मोर्चा अध्यक्ष जिनेंद्र शास्त्री, उपाध्यक्ष लव देव बागड़ी आदि बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2013 के भाजपा प्रत्याशियों कि पहली लिस्ट घोषित

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उदयपुर। लिए राजस्थान विधान सभा चुनाव 2013 के लिए भाजपा ने अपने 176 प्रत्याशियों कि पहली सूचि जारी कि है। जिसमे उदयपुर शहर से प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया चुनाव लड़ेगे और ग्रामीण से फूल सिंह मीणा को टिकिट दिया है।

उदयपुर सम्भाग कि आठ सीटों में से वल्लभ नगर को छोड़ कर ७ सीटों पर प्रत्याशियों कि घोषणा कि गयी जहाँ यह प्रत्याशी भाजपा के लिए चुनाव लड़ेगे :

उदयपुर शहर – गुलाबचंद कटारिया

उदयपुर ग्रामीण – फूल सिंह मीणा

गोगुन्दा – प्रताप गमेती

झाड़ोल – बाबूलाल खराड़ी

खेरवाड़ा – नाना लाल अहारी

मावली – दलीचंद डांगी

सलूम्बर – अमृत लाल मीणा

 

: 176 घोषित  सूचि:

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आज से प्रत्याशी नामांकन पात्र दाखिल कर सकेगे

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अधिसूचना के साथ ही शुरू हो गया नाम निर्देशन पत्रा दाखिल करने की प्रक्रिया
उदयपुर, विधानसभा आमचुनाव के तहत 14 वीं विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना मंगलवार को जारी की गई। अभ्यर्थियों द्वारा 5 से 12 नवम्बर तक प्रातः11 बजे से अपराह्न 3 बजे तक (कार्य दिवसों में) संबंधित विधानसभा क्षेत्रा के रिटर्निंग अधिकारी को नाम निर्देशन पत्रा प्रस्तुत किये जा सकते है।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जारी कार्यक्रम के अनुसार 13 नवम्बर को प्रातः 11 बजे से नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा की जायेगी। अभ्यर्थी 16 नवम्बर को अपराह्न 3 बजे तक नाम वापस ले सकेंगे तथा इसी दिन अपरान्ह 3 बजे पश्चात उम्मीद्वारों को विधानसभा स्तर पर चुनाव चिन्हों का आंवटन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यदि आवश्यक हुआ तो मतदान 1 दिसम्बर (रविवार) को प्रातः 8 से सायं 5 बजे तक सम्पन्न होगा। मतगणना 8 दिसम्बर को जिला मुख्यालय पर प्रातः 8 बजे से शुरू होगी।उन्होंने बताया कि 10 नवम्बर को रविवार का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण अभयर्थियों द्वारा नामांकन पत्रा दाखिल नहीं किया जा सकेगे और ना ही रिटर्निंग अधिकारी द्वारा स्वीकार किये जा सकेगे।

आंखों के नीचे काले घेरे से छुटकारा पाने के उपाय – nicc beauty tips

NICC Director, Sweeti Chhabra
NICC Director, Sweeti Chhabra

सौंदर्य समस्याओं में आँखों के काले घेरों की समस्या भी एक प्रमुख और आम समस्या है । आँखों के काले घेरे देखने में बिलकुल भी अछे नहीं लगते तथा अच्छे – भले सौंदर्य को नष्ट कर देते है । यह काले घेरे खराब स्वास्थ्य को दर्शते है । यह प्रायः शरीर में कैल्शियम तथा लोह तत्वों की कमी के कारण तो कभी पुरी नींद न लेने के कारण होते है । इनके समाधान के लिए nicc कि डायरेक्टर स्वीटी छाबड़ा लेकर आयी है कुछ स्पेशल टिप्स —

 

 

 

 

 

 

 

काले घेरे होने के कारण

अपर्याप्त नींद आँखों के काले घेरों की समस्या का प्रमुख कारण है ।
खराब स्वास्थ्य के कारण भी आँखों के नीचे काले घेरे पद जाते है ।
विटामिन ‘ ए ‘ की कमी भी काले घेरे की समस्या को उत्पन्न करती है ।
आँखों को प्रति असावधानी रखना भी इस समस्या को उत्पन्न करती है ।
आँखों का नियमित रूप से व्यायाम न करना भी इस समस्या का कारण बनाता है ।
आनुवांशिक कारणों से भी यह समस्या उत्पन्न हो जाती है ।
अध्ययन करते समय पर्याप्त प्रकाश न होना भी काले घेरों की समस्या का प्रमुख कारण है ।
भावनात्मक दबाव , चिंता और तनाव भी इस समस्या का प्रमुख कारण है ।
अधिक और घटिया कालिती के सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग भी आँखों के काले घेरों की समस्या का प्रमुख कारण है ।

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क्या करें

.प्राप्ती नींद लें ।

.पानी का अधिक सेवन करें ।

.दूध और अंडे का सेवन करें ।

.लाल पके टमाटरों का नियमित सेवन करें ।

.आँखों का नियमित व्यायाम करें ।

.व्यर्थ की चिंता और तनाव से बचे ।

.गाजर के रस का नियमित सेवन करें ।

.शराब व धूमपान के सेवन से बचें ।

.ताजा गुलाब के फूलों से बने गुलकंद का सेवन करें ।

.बादाम और शहद को सामान मात्रा में मिलाएं और आँखों के चारों और इस मिश्रण को लगाकर हलके हाथों से मसाज करें और लगभग आधा घंटे बाद चहरे को धोले ।

.आँखों पर खीर का रस भे लगाएं ।

.आँखों के काले घेरों को साफ कने के लिए आलू के रस को आँखों के चारों ओर लागातार हलके हाथों से मसाज करें ।

क्या वनडे क्रिकेट में गेंदबाज़ ख़तरे में हैं?

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zaheerअंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट के शुरुआती दिनों में 50 ओवरों में 250 रनों को भी अच्छा स्कोर माना जाता था.irfan-pathan-2013

पीछा करते वक़्त जब जीत के लिए ज़रूरी रन रेट एक ओवर में छह रन से ऊपर चला जाता तो इसे हासिल करना असंभव मान लिया जाता.
आजकल अधिकतर मैदानों पर तीन सौ रन औसत स्कोर हैं, 350 के स्कोर को अच्छा माना जाता है और जब तक ज़रूरी रन रेट आठ रन प्रति ओवर के अंदर होता है तब तक जीत मुमकिन मानी जाती है.

तो क्या क्रिकेट ने तरक्की की है या फिर उसका उलटा हुआ है? क्या वनडे क्रिकेट में क्लिक करें बल्लेबाजी इतनी अच्छी होती जा रही है कि वनडे के लिए ही ख़तरा बन गई है? क्या खेल के नियम बनाने वालों ने इस फ़ॉर्मेट को ख़त्म करने के बीज बो दिए हैं?

टेस्ट और वनडे

यदि क्लिक करें ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच हुई सिरीज़ में तीन बार सात सौ से ज़्यादा रन बनाए गए तो सिर्फ़ खेल के नियमों पर ही आरोप मत मढ़िए.

हमें यह स्वीकारना होगा कि दो तरह के गेंदबाज़ निराशाजनक रूप से औसत दर्ज़े के हैं.

क्लिक करें भारत के मध्यक्रम को दो बार नेस्तनाबूद करने वाले मिशेल जॉनसन ने भी दो मौक़ों पर बेहद ख़राब गेंदबाज़ी की. कभी बहुत शॉर्ट और कभी बहुत ज़्यादा तेज़ या वाइड.

नागपुर में क्लिक करें ऑस्ट्रेलिया के 350 रनों का पीछे करके भारत के जीतने के एक दिन बाद ही शारज़ाह में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मैच की दोनों पारियों का स्कोर 365 रहा.

इस मैच में वनडे क्रिकेट के नियमों ने छक्कों और चौकों की बौछार नहीं होने दी क्योंकि गेंदबाज़ी जबरदस्त थी.
टेस्ट मैचों को गेंदबाज़ जिताते हैं जबकि वनडे मैचों को बल्लेबाज जिताते हैं. क्रिकेट के इन दो फॉर्मेट में यही बुनियादी फ़र्क है.

वनडे में शुरुआत से ही मौक़े गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ रहे हैं क्योंकि माना जाता रहा है कि दर्शक गेंद को विकेटकीपर के हाथों में जाते देखने के बजाए छक्के-चौकों की बरसात देखने आते हैं.

जब टी-20 क्रिकेट के फॉर्मेट विकसित हुआ तब टेस्ट और फटाफट क्रिकेट के बीच के इस फॉर्मेट के टी-ट्वेंटी जैसा होने की संभावना ज़्यादा थी.

खिलाड़ी फिट

सीमित ओवरों के मैच में टेस्ट क्रिकेट की लय और बहाव की उम्मीद रखना भी अवास्तविक ही है.

हाल ही में भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की गेंदबाज़ों के अप्रासंगिक होने की शिकायत करना न सिर्फ़ इसलिए चौंकाने वाला है कि यह एक बल्लेबाज़ ने की है बल्कि इसलिए भी क्योंकि वनडे क्रिकेट अपने समय की टी-ट्वेंटी थी. लंबे शॉट, तेज रन और अपनी खास तकनीक इसकी विशेषता थी.

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यह हमेशा से ऐसा ही था.

वनडे क्रिकेट के नए नियमों, जिनमें हर पारी में दो नई गेंदों का इस्तेमाल और घेरे से अधिकतम चार क्षेत्ररक्षकों का बाहर होने शामिल है, ने बड़े स्कोर संभव किए हैं. लेकिन न टीवी शिकायत कर रहा है, न दर्शक शिकायत कर रहे हैं और न ही किसी ने प्रायोजकों की ही कोई शिकायत सुनी है.

भारत और ऑस्ट्रेलिया जब बेंगलुरु में अंतिम वनडे मैच खेलने उतरीं तो दोनों ही टीमें दो-दो मैच जीतकर बराबरी पर थीं. किसी ने इससे ज़्यादा क्या माँगा होता?

वनडे क्रिकेट से न सिर्फ़ नतीज़े देने की उम्मीद की जाती है बल्कि यह भी उम्मीद की जाती है कि नतीज़ा जितना संभव हो उतनी देर से निकले.

पिछले कुछ दशकों में अच्छे स्कोर का भी सफलतापूर्वक पीछा करना इसलिए मुमकिन हुआ है क्योंकि बल्लेबाज़ी में गेंदबाज़ी के मुकाबले तकनीक का ज़्यादा विकास हुआ है.

ये बल्लों की गुणवत्ता में हुए सुधार की ही नतीज़ा है कि आज ख़राब खेले गए शॉट पर भी गेंद छह रन के लिए सीमा रेखा से बाहर चली जाती है. आज स्वीप स्पॉट का क्षेत्र पहले से बड़ा है और इस सब के ऊपर खिलाड़ी भी पहले से ज़्यादा फिट और ताक़तवर हैं.
चार दशक पहले वनडे क्रिकेट की शुरुआत से अब तक गेंदबाज़ी में सिर्फ़ दो ही खोजें हुई हैं, ‘रिवर्स स्विंग’ और ‘दूसरा’.

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नई तकनीक का तोड़

कई साल पहले जब दो गेंदों इस्तेमाल करने की शुरुआत हुई थी तब इसलिए कोई शिकायत नहीं की गई क्योंकि उस वक़्त रिवर्स स्विंग भी नहीं होती थी.

यह सच है कि नए नियम गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ हैं लेकिन उतने नहीं जितना कि कहा जा रहा है.

क्या सिर्फ़ एक क्षेत्ररक्षक से फ़र्क पड़ सकता है? हाँ, वे फ़र्क ला सकता है, जब आपके पास नौ ही क्षेत्ररक्षक हों और जिनमें से पाँच सिर्फ़ घेरे के अंदर हों.

गेंदबाज़ों को यह तय करना होगा कि वे अपनी ताक़त या बल्लेबाज़ की कमज़ोरी में से किस पर गेंदबाज़ी करते हैं और यह चुनाव दिलचस्प होगा.

हालांकि यह स्वीकार करना भी मुश्किल है कि इस विचार ने ही यॉर्कर को एक हथियार के रूप में ख़त्म कर दिया.

किसी भी खेल का विकास किसी एक पक्ष द्वारा नई तकनीक या नीति को विकसित करने और दूसरे पक्ष द्वारा उसकी काट खोजने और उसके आगे अपनी नई नीति जोड़ने से होता है.

डब्ल्यूजी ग्रेस के समय में गेंदबाज़ों को बैकफुट शॉट की काट खोजनी पड़ी तो सचिन के समय में अपर-कट की. बल्लेबाज़ों को पहले आउटस्विंग का तोड़ खोजना पड़ा तो बाद में ‘दूसरे’ का. यह खेल का प्राकृतिक विकास है.

कभी-कभी नियम बनाने वालों ने उस पक्ष की ओर हो गए जो खेल में हावी था.

यदि जल्द ही गेंदबाज़ों और कप्तानों ने बल्लेबाज़ों की नई तकनीकों का तोड़ नहीं खोजा तो फिर संभवतः तकनीकी समिति को ही कुछ करना पड़े. लेकिन हाथ खड़े करना अभी जल्दबाज़ी है. गेंदबाज़ों की रचनात्मक प्रतिक्रिया को भी एक मौका दिया जाना चाहिए.