हैप्पी किस डे: जुम्मा चुम्मा दे दे

उदयपुर ,आज प्यार के इस सफ्ताह यानी कि वैलेंनटाइन वीक का छठां दिन है। ‘रोज डे’, ‘प्रपोज डे’ , ‘चॉकलेट डे’, ‘टेडी बियर डे ‘, ‘प्रॉमिस डे’ के बाद आज बारी है ‘किस डे’ की।

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आज के दिन का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है, हो भी क्यों ना क्योंकि आज उन्हें अपने प्यार के चलते प्यारा सा तोहफा ‘किस’ जो मिलता है। प्रेम को जताने का सबसे अच्छा माध्यम है ‘किस’ यानी ‘चुंबन’। कहते हैं कोई भी लड़की अपना पहला ‘किस’ अपने पति या प्रेमी को देती हैं।

1249819064_1_9किस करना है, इस बात को सिर्फ सोचने मात्र से ही इंसान उत्तेजित हो जाता है। इसलिए पहला चुंबन अक्सर लोगों को ता-उम्र याद रहता है। बीबीसी में छपी खबर के मुताबिक तो शोध बताते हैं कि चुंबन करने से केवल आप प्यार का इज़हार नहीं करते हैं बल्कि ये रिश्ते की गहराई और आपके प्रेम को भी दर्शता है।

 

अमेरिकन रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि लिपलॉक के समय इंद्रियों की रफ्तार बहुत तेज हो जाती है जो रिश्ते को और करीब ले आती हैं। इसलिए पहला ‘किस’ काफी सावधानी पूर्वक होना चाहिए। वैलेंटाइन डे स्पेशल प्यार में सुखद अनुभव दिलाता है ‘किस’ इसलिए दोस्तों अपने इस एहसास को अपने साथी के साथ शेयर कीजिये और उसकी सहमती से ही अपना कदम उठाइये। जब समर्पण और प्रेम की भावना से ‘किस’ किया जाता है तो यकीन मानिये मन को जो शांति मिलती है उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती है। प्रेम एक मधुर भावना है जिसकी कल्पना मात्र से ही मन खुश हो जाता है लेकिन इसका आनंद आप तभी उठा सकते हैं जब निश्छल भाव से आप अपने साथी के साथ प्रेम को बांटेंगे। इस भावना के साथ अगर आप आज के दिन को मनायेंगे तो यकीन मानिये आज का दिन आपकी जिंदगी के सबसे हसीन पलों में शुमार हो जायेगा। हैप्पी किस डे…

 

1500 रुपये में सबको टैबलेट और सस्ते में घर देने की तैयारी

1864_1देश में खुदरा महंगाई दर एक बार फिर से बढ़ गई है। जनवरी में यह आंकड़ा बढ़कर 10.79 फीसदी तक पहुंच गया, जबकि दिसंबर में महंगाई दर 10.56 फीसदी थी। वहीं, इस दौरान देश की औद्योगिक उत्पादन दर में गिरावट दर्ज की गई है। दर में हुई इस कमी का सीधा मतलब है कि देश में उत्पादन घट रहा है और उत्पादन घटने का सीधा असर जरूरी चीजों के दाम पर पड़ेगा। चीजें महंगी हो जाएंगी और आपकी जेब पर बोझ बढ़ जाएगा। लेकिन इस बीच आपके फायदे की भी कई खबरें निकल कर आ रही हैं।

आम आदमी को सस्ता घर मिलने का रास्ता साफ होता लग रहा है। सरकार सस्ते घर पर मिलने वाली रियायत को बढ़ाने की तैयारी में है। होम लोन के ब्याज पर ज्यादा टैक्स छूट, सस्ते घरों पर ज्यादा लोन और डीटीएच-फोन-केबबल सर्विसेस से जुड़े कई फायदे आम आदमी को जल्द ही मिल सकते हैं। वहीं, सरकार अब हर आदमी को सिर्फ 1500 रुपये में टैबलेट देने पर भी विचार कर रही है।

बजट 2013-14 में अफोर्डेबल हाउसिंग को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जा सकता है। एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि सरकार छोटे और सस्ते घर बनाने और खरीदने वालों को रियायत देने की तैयारी में है। अफोर्डेबल हाउसिंग को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलने से बिल्डर के लिए कर्ज जुटाना आसान हो जाएगा साथ ही खरीदारों को सस्ते घरों के लिए ज्यादा लोन मिलेगा।

 

1234_21शहरी आवास मंत्रालय ने अफोर्डेबल हाउसिंग को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा है। अभी देश में 1.87 करोड़ घरों की कमी है। वहीं, एचआईजी और एमआईजी सेग्मेंट में11 फीसदी घर खाली पड़े हैं। शहरी विकास मंत्री अजय माकन ने भी इस बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिए जाने की मांग की है। अजय माकन ने सेक्शन 80आईबी के तहत बिल्डरों को छोटे मकान बनाने के लिए दी जाने वाली टैक्स रियायत को फिर से लागू करने की मांग वित्त मंत्रालय से की है।

 

केंद्रीय दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार 1,500 रुपये में आकाश टैबलेट लोगों तक पहुंचाना चाहती है।

 

सेंटर फार डेवलपमेंट आफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडैक) के टेक्नोलाजी सम्मेलन का 1235_32उद्घाटन करने के बाद सिब्बल ने कहा कि मैंने रजत मूना (महानिदेशक, सीडैक) से आकाश के मामले में मदद करने को कहा है ताकि इसे लोगों तक 1,500 रुपये में उपलब्ध कराया जा सके। हर विद्यार्थी के पास एक आकाश होना जरूरी है जिससे वह इसके जरिए दुनिया देख सके।’ इस समय, सरकार डाटाविंड से 2,263 रुपये प्रति टैबलेट के दाम में आकाश खरीदती है। सरकार इसे 1,130 रुपये के रियायती मूल्य पर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएगी।

 

सिब्बल ने कहा कि हाल ही में दिल्ली में एक बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई और मैंने रजत को बुलाया और उनसे कहा कि मैं हमारे देश में लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक प्रौद्योगिकी समाधान चाहता हूं। मैं एक कलाई घड़ी चाहता हूं जो वीडियोग्राफ तैयार कर सके, जो अलार्म सेट करे। आइये हम एक जीपीएस प्रणाली लगाएं और इसे 1,000 रुपये से कम कीमत में अपने नागरिकों को उपलब्ध कराएं।

 

होम लोन के ब्याज पर बढ़ेगी टैक्स छूट!

 

1985_imagesदेश की आर्थिक राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) समेत देश के सभी बड़े शहरों में मकान की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए अगले वित्तवर्ष के बजट में होम लोन पर कुछ और रियायतों की घोषणा हो सकती है। इस तरह के लोन पर चुकाए जा रहे ब्याज के मद में मिलने वाली सालाना कर छूट की सीमा को मौजूदा डेढ़ लाख से बढ़ाकर दो या ढाई लाख रुपए किए जाने की संभावना है।

 

 

 

बजट पर नजर रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष होम लोन लेने वालों को डेढ़ लाख से ज्यादा की ब्याज रकम पर कर छूट की सौगात मिल सकती है। उनका कहना है कि एक दशक से पहले जब होम लोन के ब्याज पर आयकर कानून की धारा 24बी के अनुसार छूट देने की शुरुआत की गई थी तो उस समय डेढ़ लाख रुपए भले ही बड़ी रकम हो लेकिन अभी जितने में मकान आ रहा है, उसके मुकाबले यह रियायत कुछ भी नहीं है। जब यह सुविधा शुरू की गई थी तब मकान कीमत तीन लाख से शुरू होती थी और 15 से 20 लाख रुपए में बढिय़ा मकान मिल जाता था। अब तो एलआईजी में मकानों की कीमतें 30 लाख रुपए से ऊपर चली गई हैं। एमआईजी में अगर थोड़ा ज्यादा स्पेस वाला मकान देखें तो वह 50 लाख रुपए के आसपास मिल रहा है।

1253_7आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जब यह सुविधा शुरू हुई थी तब होम लोन का औसत आकार पांच लाख रुपए का था। वर्ष 2009-10 में यह बढ़कर 17 लाख रुपए पर पहुंच गया और आज तो यह 22 लाख रुपए है। राष्ट्रीय आवास बैंक के मुताबिक इस समय 68,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा रकम होम लोन के रूप में दी गई है। इसमें से सबसे ज्यादा लोन (43 फीसदी से भी अधिक) 25 लाख रुपए से ऊपर के लोन अकाउंट में है। 15 से 25 लाख रुपए तक के लोन 25 फीसदी अकाउंट में है, जबकि दो लाख रुपए तक के लोन एक फीसदी भी नहीं हैं। यदि किसी व्यक्ति ने 25 लाख रुपए का लोन 20 वर्ष के लिए लिया है तो उसे साल में तकरीबन ढाई लाख रुपए का ब्याज चुकाना पड़ता है जबकि टैक्स में छूट मात्र डेढ़ लाख रुपए तक की ही है।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इस सीमा को बढ़ाने की मांग काफी पहले से हो रही है। पिछले वर्ष भी इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने इसे बढ़ाकर तीन लाख रुपए करने की मांग की थी, लेकिन यह नहीं हो पाया था। इस वर्ष तो जो मांग की सूची आई है उसमें चार लाख रुपए तक की छूट देने की गुजारिश की गई है।

मंदी की मार झेल रहे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छी खबर है। ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विस ग्रुप जेपी मॉर्गन के मुताबिक 2013 में घरों की बिक्री में अच्छा उछाल देखने को मिल सकता है और आने वाले 2 सालों में नए घरों की बिक्री में सालाना 7 फीसदी की बढ़ोतरी आ सकती है। ये बढ़ोतरी देश के 6 बड़े शहरों मुंबई, दिल्ली- एनसीआर, बंगलुरू, चेन्नई, पुणे, और हैदराबाद में आएगी। रिपोर्ट के मुताबिक नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने और ब्याज दरों में गिरावट का असर घरों की बिक्री पर देखने को मिलेगा। आरबीआई की कटौती के बाद बैंकों ने होम लोन की ब्याज दरें घटानी शुरू कर दी हैं। उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में ब्याज दरों में और गिरावट आएगी, जिसका सीधा फायदा हाउसिंग सेक्टर को मिलेगा। हालांकि इस वजह से घरों की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी भी देखने को मिल सकती है।

 

फोन, केबल और डीटीएच सेवाओं के लिए होगा एक बिल

 

1257_81दूरसंचार विभाग की समिति ने टेलीकॉम और ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं के लिए नए एकीकृत लाइसेंस की सिफारिश की है. निकट भविष्य में आपको टेलीकॉम और ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

दूरसंचार विभाग (डॉट) के एक पैनल की सिफारिश को अगर मान लिया गया, तभी यह बदलाव संभव हो पाएगा। इस समिति ने टेलीकॉम और ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं के लिए नए एकीकृत लाइसेंस की सिफारिश की है। यह लाइसेंस पाने वाली कंपनी अपने ग्राहकों को मोबाइल एवं लैंडलाइन फोन सेवाओं के साथ-साथ डीटीएच और केबल टीवी वगैरह सर्विसेज की भी पेशकश कर सकेगी। दूसरे शब्दों में, ग्राहक एक ही कंपनी से मोबाइल, लैंडलाइन फोन, केबल टीवी और डीटीएच जैसी सेवाएं पा सकेंगे। यही नहीं, ये तमाम सेवाएं अपने ग्राहकों को मुहैया कराने के लिए संबंधित कंपनी के पास समूचा इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचागत सुविधा) रहना भी जरूरी नहीं होगा।

 

उपर्युक्त समिति ने राष्ट्रीय टेलीकॉम नीति 2012 के तहत एकीकृत लाइसेंसिंग व्यवस्था पर पेश अपनी रिपोर्ट में एक नए तरह के लाइसेंस का प्रस्ताव किया है। यह है- यूनिफाइड लाइसेंस (सर्विस डिलीवरी)। यह लाइसेंस पाने वाला ऑपरेटर अपने ग्राहकों को तमाम संचार (कम्युनिकेशन) सेवाएं मुहैया कराने के लिए अन्य कंपनियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी इस्तेमाल कर सकेगा।

दस परिवारों को पट्टे वितरित

_DSC0638उदयपुर, प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत मंगलवार को नगर परिषद सभागार में पांच कच्ची बस्तियों के पुस्तैनी भूखण्डधारियों को ४२ तथा स्टेट ग्रान्ट एक्ट के तहत शहर कोट अन्दर रहने वाले दस परिवारों को अपने पुस्तैनी मकान के पट्टे शहर विधायक गुलाबचन्द कटारिया, सभापति श्रीमती रजनी डांगी , उपसभापति महेन्द्र सिंह शेखावत व आयुक्त सत्यनारायण आचार्य तथा संबंधित पार्षदों ने वितरित किये ।

इस अवसर पर कटारिया ने कहा कि आम आदमी को जो बरसों से अपने पुस्तैनी मकान में रह रहा है लेकिन उसके पास पट्टा न होने से कई दिक्कतों का सामना करना प$डता था, अब पट्टा मिलने के बाद उसकी ये समस्त समस्याएं समाप्त हो जायेगी और वह अपने भूखण्ड अथवा मकान का निर्माण और विस्तार तो करवा ही सकेगा साथ ही उसके लिये वह बैकों से ऋण भी प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने कहा कि कच्ची बस्तीवासी पट्टा प्राप्त करने के बाद उसे किसी अन्य के नाम हस्तांतरण नहीं कर सकते और न ही भूखण्ड को बेच सकेगें । यदि कहीं ऐसी स्थिति सामने आयी तो नियमानुसार उनके विरूद्घ कानुनी कार्यवाही की जा सकेगी ।

सभापति श्रीमती रजनी डांगी ने बताया कि जो ५२ पट्टे वितरित किये गये उनमें मठ माद$डी के २३, शांतिनगर के १४, कृष्णा कालोनी व आवरी माता बस्ती के दो-दो तथा सुखा$िडया नगर का एक पट्टा शामिल है । शहर कोट अन्दर के दस रहवासियों को भी पट्टे दिये गये । उन्होंने बताया कि अब तक जो भी आवेदन आए है उनमें जिनके भी वांछित दस्तावेज लगे हुए है उन पर पट्टे बनाने की प्रक्रिया निरन्तर जारी है । उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने आवेदन के समय पूरे दस्तावेज नहीं दिये है तो उनके पास अब भी मौका है की वे दस्तावेज प्रेषित कर दे । क्योंकि प्रशासन शहरों के संग अभियान शिविर की अवधि आगामी १५ फरवरी को समाप्त होने जा रही है ।

’मुकाम तभी संभव हो जब चुनौतियों से लडने का जज्बा हो’

14वां उम्मेदमल लोढा पर्यावरण पुरस्कार वितरण समारोह

उदयपुर, आदमी में किसी भी चुनौती पर फतह पाने के लिए विश्वास और जज्बे का समावेश हो तो मुकाम पर सहजता से पहुंचा जा सकता है। यही कार्य स्वयं के बजाय सामूहिक रूप से संपादित किया जाए तो सफलता की अनुभूति का अहसास कुछ और ही तरह का होता है। कुछ इस तरह का सार मंगलवार को सेवा मन्दिर एवं उम्मेदमल लोढा मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 14 वें उम्मेदमल लोढा पर्यावरण पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान वक्ताओं के संबोधन में उभर कर सामने आये। समारोह में पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं, व्यक्तियों, समूहों को विभिन्न श्रेणी के पुरस्कारों से नवाजा गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता भारतीय सांख्यिकीय संस्थान नई दिल्ली के प्रो. ईश्वरन सोमनाथन् ने कहा कि वे पिछले दो वर्ष से सेवा मंदिर की और से वन सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे कार्यक्रम से जुडे हुए है। अभी उदयपुर जिले की झाडोल तहसील क्षेत्र में २००६ वनाधिकार कानून के प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। अध्ययन के दौरान इस बात की जानकारी ली जा रही है कि जहां की भूमि पर खेती नहीं होती है वहां के इर्दगिर्द के जंगलों की स्थिति क्या है और जहां खेती की जाती है और उसके आसपास जंगल है तो क्या परिस्थितियां बन रही है। अभी अध्ययन शुरू हुआ है। इसके निष्कर्ष के संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

प्रो. सोमनाथन ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से नेपाल एवं उत्तराखंड के कुमायूं मण्डल में पर्यावरण एवं वनों से जुडे हुए मुद्दों पर उनके द्वारा किए गए गहन अध्ययन की जानकारी दी और कहा कि नेपाल में वर्ष १९५० में राष्ट्रीयकरण किया गया था तभी से वनों की कटाई ज्यादा होने लगी। हालांकि वर्ष १९८८ में इस देश में नई वन नीति को लागू किया गया। इसके पीछे इस देश की सरकार का यही मानना था कि इस कदम से वनों को सुरक्षित रखने में यह नीति कारगर साबित होगी। भारत की अपेक्षा नेपाल में वनों के प्रति सामुदायिक स्वायत्तता ज्यादा है। ऐसा अध्ययन के निष्कर्ष में सामने आया है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए सेवा मन्दिर संस्था अध्यक्ष अजयसिंह मेहता ने कहा कि अभ्यास और अनुभव के माध्यम से हर क्षेत्र में अपेक्षा से ज्यादा कार्य की क्रियान्विति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से देश में जहां विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ तो कई प्रकार की विकृतियों का भी जन्म हुआ है।

दीप प्रज्जवलन के साथ शुरू हुए इस समारोह के प्रारंभ में सेवा मन्दिर की मुख्य संचालक प्रियंका सिंह ने आगन्तुक अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि गांव के साधारण लोगों ने अपने प्राकृतिक संसाधनों का अहिंसात्मक तरीके से संरक्षण किया है। अनेकों कठिनाइयों एवं गरीबी के बावजूद निजी लालच को त्याग सार्वजनिक हित में काम करने का प्रयास किया है। अब समाज को उनके सहयोग में आने की आवश्यकता है।

प्रियंकासिंह ने बताया कि समारोह में ग्राम समूह बेड तथा गिर्वा प्रखण्ड को १०-१० हजार रूपये नगद, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर समूह श्रेणी पुरस्कार दिया गया। साथ ही वन सुरक्षा एवं प्रबन्ध समिति- पीपलवास, प्रखण्ड गिर्वा तथा व्यक्तिगत श्रेणी के पुरस्कार में प्रखण्ड कोटडा के मणिशंकर तराल, प्रखण्ड गिर्वा की शान्तादेवी झाबला, प्रखण्ड झाडोल के सोनीराम गरासिया, प्रखण्ड गिर्वा के मावाराम को प्रदान किया गया। सभी को २००० रूपये नगद, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। सायर कंवर लोढा छात्रवृत्ति के रूप में १२ हजार रूपए की राशि प्रखण्ड झाडोल के जामुन गांव की अलका कुमारी को प्रदान की गई। इसी तरह द्वितीय छात्रवृति पलेसर कोटडा की इंद्राकुमारी को दी गई।

शांति मार्च निकाल सौंपा ज्ञापन : सेवा मन्दिर एवं वन उत्थान संघ झाडोल के संयुक्त तत्वावधान में अपरान्ह ३ बजे शान्ति मार्च किया गया। इसका उद्देश्य वन अधिकार कानून २००६ के तहत् सामुदायिक वन अधिकार पर सरकार एवं समाज का ध्यान आकर्षित करना था। यह शान्ति मार्च विद्याभवन आडिटोरियम डॉ मोहन सिंह मेहता मार्ग से आरंभ होकर, खारोल कॉलोनी, फतेहपुरा पुलिस चौकी, सहेली मार्ग होते हुए जनजाति आयुक्त कार्यालय पहुंचा जहां आयुक्त को ज्ञापन दिया गया। इस शान्ति मार्च में लगभग ३०० ग्रामीणों सहित स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

 

काले सोने की फसल लह-लहांयी

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फूल खिल चुके व अब डोडे आने वाले

नारकोटिक्स विभाग इस बार आरी के बजाए प्रति वर्गमीटर के हिसाब से तौल करेगा

images (2)चित्तौडगढ, जिले एवं आसपास के क्षैत्रो में काले सोने की फसल यौवन पर है। सर्दी अच्छी पडने से इस बार बम्पर फसल होने की संभावना है। वही नारकोटिक्स विभाग भी इस बार वर्गमीटर करने की तैयारी कर रहा है।

जिले के निम्बाहेडा, चितौडगढ, बडीसादडी सहित निकटवर्ती प्रतापगढ आदि स्थानो पर नारकोटिक्स विभाग द्वारा दिए गए अफीम पट्टो के बाद किसानो द्वारा अफीम फसल की बुवाई की गई थी। यह फसल अब यौवन पर है। इस बार मौसम सही रहने से खेतो में अफीम की फसल लह-लहरा रही है। फूल खिल चुके है व अब डोडे आने वाले है। किसानो का कहना है कि मौसम सही रहा तो इस बार बम्पर फसल होगी। काले सोने के लिए चितौडगढ सहित प्रतापगढ जिला देश में जाना जाता है। वही नारकोटिक्स विभाग भी इस बार आरी के बजाए प्रति वर्गमीटर के हिसाब से तौल करेगा।

 

उदयपुर में लगेगा चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कृषि मेला

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देश की कई कंपनियां करेंगी नवीन कृषि संयंत्रों की प्रदर्शनी

किसानों को उन्नत एवं नई तकनीक के बारे में बताया जाएगा

सांसद रघुवीर मीणा करेंगे 14को उद्घाटन

300x300 Pxउदयपुर, श्री बोहरा गणेश संस्थान द्वारा किसानों को नई तकनीकी एवं कृषि के नये संयंत्रों से अवगत कराने चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय एग्रीटेक एस्पो मेले का आयोजन 14 फरवरी से बी.एन. कॉलेज ग्राउण्ड पर किया जाएगा।

श्री बोहरा गणेश संस्थान के निदेशक अभिजीत शर्मा एवं अध्यक्ष लोकेश जोशी ने आयोजित पत्रकार वार्ता को संबेाधित करते हुए बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय मेले का उदघाटन 14 फरवरी को सांसद रघुवीर मीणा द्वारा किया जाएगा। मेले के अंतर्गत करीब 1550 से अधिक सरपंच, उप सरपंच एवं कई गांवों से किसान भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल से हम इस प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही है। खेतीहर विकास हमारा लक्ष्य है। इस मेले के माध्यम से हम अधिकाधिक कृषकों को जोडना चाहते है ताकि कृषि से संंबंधित नवीन तकनीकों एवं नवीन संयंत्रों की जानकारी किसानों को मिले और वे अपनी उत्पादन एवं गुणवत्ता को बढाकर अपने जीवन स्तर को सुधार सकें।

अध्यक्ष लोकेश जोशी ने बताया कि इससे पहले इसे मेले का आयोजन कोटा, श्रीगंगानगर, भीलवा$डा, जोधपुर आदि स्थानों पर भी किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि हमारे ग्रामीण क्षेत्रा में खाद्य उत्पादन एवं डेयरी के क्षेत्र में काफी अवसर है। मेले में कृषि के शोधकर्ताओं द्वारा कांफ्रेंस, सेमीनार एवं वर्कशॉप के माध्यम से किसानों को जानकारी दी जायेगी।

इसके अलावा किसानों की सहायता के लिए भारत में उपलब्ध संसाधनों जैसे- खाद्य, बीज, कृषि यंत्र, पम्प, बोरवेल, ट्रेक्टर, कीटनाकश आदि की जानी मानी कंपनियों अपने उत्पादों के साथ मेले में भाग लेगी। मेले में देश के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों को भी आमंत्रित किया गया है। जो किसानों की संगोष्ठी एवं कृषि वार्ताओं द्वारा समस्याओं का समाधान करेंगे।

लोकेश जोशी ने बताया कि ऐसे कृषि मेले का आयोजन में तभी सार्थकता है जब हम किसानों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इससे अधिकाधिक जोडे और मेले के माध्यम से कृषि तकनीकों एवं नये आयामों को उन तक पहुंचाएं जो कि उनके निम्न जीवन स्तर को ऊपर उठाने में कारगर सिद्घ होंगे।

शांतिराज हॉस्पिटल में मोटापे का एक और सफल ऑपरेशन

images (1)उदयपुर, श्रीमती मानबाई मुर्डिया एवं शांतिराज हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड उदयपुर ने सफल बेरियाट्रिक सर्जरी की श्रंखला में एक और नया अध्याय जोडा है। प्रबंधक राकेश चौधरी के अनुसार बेरियाट्रिक एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. सपन जैन ने गत 9 फरवरी को जावरा निवासी विनोद जिनका वजन १३४ किलो था, का सफल ऑपरेशन किया है।

डॉ. सपन जैन ने बताया कि यह मरीज मोटापे के अलावा हर्निया से भी पीडित था। डॉ. सपन जैन ने बेरियाट्रिक सर्जरी एवं हर्निया रिपेयर दोनों ही ऑपरेशन का एक साथ सफलतापूर्वक निश्पादन किया। डॉ. सपन जैन के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज पूर्णत: स्वस्थ है। चार-पांच दिन बाद मरीज अपने नियमित कामकाज पर जा सकता है। डॉ. सपन जैन के अनुसार पूर्व में की गई बेरियाट्रिक सर्जरी के सभी मरीज पूर्णत: स्वस्थ है एवं उनका वजन भी आशानुकूल कम हुआ है। शांतिराज हॉस्पिटल में सभी प्रकार की दूरबीन द्वारा शल्य चिकित्सा की जाती है।

 

पर्यावरण मित्र खनन से ही खनिज विकास संभव : वर्डिया

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आंरभ

उदयपुर, ’’ खनिज विकास की गति को बताए रखना तभी संभव होगा जब प्रत्येक खनन व्यवसायी पर्यावरण मित्र खनन के प्रावधानों को अपनाएं तथा गंभीरतापूर्वक पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाएं।’’

यह विचार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति सदस्य एवं पूर्व खान निदेशक पी.के.वर्डिया ने यहां सुखाडिया विश्वविद्यालय से भू विज्ञान विभाग में ’’पर्यावरण – मित्र खनिज विकास एवं भूतल प्रबंधन विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्यत्त* किए।

संगोष्ठी के उदघाटन सत्र मे मुख्य अतिथि सुविवि के कुलपति प्रो.आई.वी.त्रिवेदी ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में खनिजों का महत्वपूर्ण योगदान है। बढती भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खनिजों का दोहन आवश्यक है पर साथ ही यह भी जरूरी है कि हम पर्यावरण एवं परिस्थितिक तंत्र को बनाए रखें नहीं तो इसके परिणाम भयावह हो सकते है।

इससे पूर्व भू विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.विनोद अग्रवाल ने कहा कि सेमिनार दो महत्वपूर्ण विषयों पर केन्द्रीत है एक और जहां खनन क्षेत्रों में पर्यावरणीय समस्याएं बढ रही है वहीं बढती जनसंख्या की मांग की पूर्ति के लिए भूजल संसाधनों का भी तेजी से दोहन हो रहा है। आज सतत विकास तथा दीर्घ कालिन विकास की अवधारणा को समाहित करने के लिए जरूरी है कि उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण व पर्यावरण मित्र तरीके से दोहन हो।

इस अवसर पर पी.के.वर्डिया को विशेषज्ञ समिति के सदस्य बनाने व खनन क्षेत्र मे पर्यावरण संरक्षण के कार्य करने पर तथा हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के महाप्रबंधक एन.के.कावडिया को राष्ट्रीय खनिज पुरस्कार मिलने पर भू विज्ञान विभाग तथा पूर्व छात्र परिषद द्वारा सम्मानित किया गया।

संगोष्ठी समन्वयक प्रो.हर्ष भू ने बताया कि इस दो दिवसीय संगोष्ठी के १५० भू वैज्ञानिक एवं खनन व्यवसायी भाग ले रहे है। तथा ३ तकनीकी सत्रों में ३५ शोध पत्रों का वाचन किया जाएगा।

ओढ समाज के सेकडो लोगों ने कलेक्ट्री पर प्रदर्शन किया

उदयपुर, नगर परिषद एवं पुलिस वालों के तुच्छ व्यवहार के विरोध में ओढ समाज की सेकडो महिला पुरूष ने गधो के कलेक्ट्री पर प्रदर्शन किया।

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ओढ समाज के लोगों का कहना है कि वर्षो से शहर के संकरे रास्ते और गलियों से भराव मिट्टी गधों पर लाद कर अंदरूनी शहर के बाहर, गुलाबबाग के पास ब्रम्हपोल के बाहर, शास्त्री सर्कल ओर नयी पुलिया पर डाल रहे है। जहां पर नगर परिषद कर्मचारियों द्वारा अब तक नहीं डालने दिया जाता है और गाली गलोच व दुव्यर्वहार किया जाता है और यदि ट्राफीक के बीच निकलते वक्त किसी वाहन से गधे को टक्कर लग जाए और उस पर लदा भराव सडक पर गिर जाता है तो पुलिसकर्मी व नगर परिषद कर्मियों द्वारा दुव्यर्वहार किया जाता है।

समाजजनों ने मांग की कि उक्त चार जगह भराव डालने दिया जाए तथा नगर परिषद व पुलिसकर्मियों को दुव्र्यवहार नहीं करने के लिए पाबंद किया जाए।

 

नर्सिंगकर्मियों ने दिया धरना

कडा कदम उठाने की दी चेतावनी

उदयपुर, ’’राज्य नर्सेज अपनी मागो को लेकर कडा कदम उठायेगा’’ यह बात राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन संघर्ष समिति के संयोजक श्यामसिंह चौधरी ने सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन समय समय पर नर्सेज की समस्याएं सरकार एवं विभाग को अवगत करवाती रही है , वाजिब मांगे अभी भी लंबित पडी हुई है।पूर्व सरकार द्वारा गठित भटनागर समिति को केन्द्र के समान राज्य नर्सेज के वेतन भत्तों की विसंगती समाप्त करने के लिए प्रतिवेदन देने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ है। छठे वेतन आयोग में सभी संर्गो की ग्रेड पे केन्द्र के समान नही करने से नर्सेज में असंतोष व्याप्त है।चुनाव से पहले युपी ए चेयन पर्सन सोनिया गांधी में राज्य में कांग्रेस सरकार बनने पर समस्या समाधान का अश्वासन दिया लेकिन ४ वर्ष से समस्या ज्यों की त्यो बनी हुई है। इसके लिए प्रशासन तंत्र को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि नर्सेज यहीं नहीं कार्य क्षेत्र में चिकित्सक से ज्यादा रोगी की सेवा में रहता है वहां चिकित्सक के अभाव में अथवा छुट्टी पर चले जाने के बाद रोगी को दवा देने पर किसी प्रकार की घटना के लिए दोषी नर्सीग कर्मी को ठहरा दिया जाता है।दवा नहीं देने पर जनता के आक्रोष का शिकार होते है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए ऐसासिएशन सरकार से कानूनन दवा लिखने का अधिकार देने की मांग करता है।

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श्याम सिंह ने कहा कि 4 वर्ष में राज्य सरकार द्वारा नर्सेज की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिये जाने से पनपे असंतोष से एसोसिएशन से 15 दिसंबर को बैठक कर वेतन विसंगती समाप्त करने, केन्द्र के समान नर्स श्रेणी नई नियुक्ति ग्रेड पे देने, भत्ते, वर्दी, धुलाई, पदोन्नतियां, नर्सिग निदेशालय स्थापित करने, भारतीय नर्सिंग परिषद के मापदण्डों के अनुरूप रोगियो एवं बिस्तरों के अनुपात में स्टाफ लगाने, संविदा को स्थाई करने, प्रदेश में खोले गये नर्सिंग महाविद्यालयों को स्वपोषित कोटे से हटा कर राजकीय कोटे से करने जैसी ग्यारह सूत्रों मांगों को लेकर 27 फरवरी को प्रदेश के 20 हजार से अधिक नर्सेज कर्मी जयपुर में रामबाग से स्टेच्यू सर्कल तक रैली निकाल कर सरकार का ध्यान आकर्षित करेगे। इसके बावजूद सरकार संवाद नहीं करती है तो एसोसिएशन कडा कदम उठाने पर मजबूर होगा।

इससे पूर्व नर्सेज समस्याओं को लेकर दिसंबर में हुई बैठक की घोषणा के अनुरूप अपनी मांगों को लेकर प्रदेश एसोसिएशन के निर्देश पर सोमवार को नर्सेज एसोसिएशन उदयपुर के बैनर तले आर एन टी मेडिकल कॉले के बाहर नर्सेज कर्मीयों ने धरना देकर नारे बाजी की। वहां से सभी कलक्ट्री पहुचे जहां एसोसिएशन शहर जिलाध्यक्ष हेमंत आमेटा ग्रामीण जिलाध्यक्ष शांता चौहान के नेतृत्व में प्रतिनिधी मण्डल ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौपा।