बांसवाडा, बीच सडक पर यदि घंटों तक महिला निर्वस्त्र पडी रहे और उससे दस कदम की दूरी पर पुलिस नियंत्रण कक्ष और ठीक सामने किसी राजनैतिक दल का कार्यालय हो उस पर भी यदि किसी का हृदय नहीं पसीजे तो यहीं लगता कि व्यवस्थाओं के साथ मानवीय संवेदनाएं निर्वस्त्र हो चुकी है। शुक्रवार को शहर के हृदय स्थल माने जाने वाले कुशलबाग मैदान के सामने ही ऐसा ही शर्मनाक वाकया देखने को मिला। लगभग दो घंटे तक विक्षिप्त समझी जाने वाली महिला इसी हाल में पडी रही जब वहां से अधिवक्ता शिवप्रसाद जोशी निकले तो उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता मनोजसिंह राठौड को इसकी जानकारी दी। जिस पर राठौड ने महिला को वस्त्र ओढाए, इसी दौरान वहां सामाजिक कार्यकर्ता अनुराग जैन पहुंचे तो उन्होंने भी वस्त्र मंगवाए। जब औरत को हाथ लगाकर उठाया गया तब पता चला कि वह बीमार है, तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए ऑटो रूकवाने की कोशिशें की गई लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। बाद में जैसे-तैसे एक ऑटो चालक को तैयारकर इस महिला को महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया। बांसवाडा में ऐसी घटनाएं आम हो चुकी है। पिछली बार जिला कलक्टर कुंज बिहारी गुप्ता की पहल पर एक महिला को उदयपुर पहुंचवाया गया लेकिन दुर्भाग्य से वहां भी उसे भर्ती नहीं किया गया, जिस पर गुप्ता ने एक स्वयं सेवी संस्था से सम्पर्क कर वहां भर्ती करवाया। शुक्रवार को भी जब जिला कलक्टर को इसकी जानकारी दी गई तब दस मिनट में ढूंढते व्यवस्थाएं चिकित्सालय तक पहुंची। इस क्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक प्रफूल्ल चौबीसा ने बताया कि माह भर पूर्व बैठक हुई थी जिसमें स्वयं सेवी संस्था को सर्वे का आग्रह किया गया लेकिन संस्था ने कोई रिपोर्ट नहीं दी है। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए नियमनुसार पुलिस का दायित्व है कि पुलिस को ऐसे लोगों को चिह्नित कर एसडीओ को रिपोर्ट देनी होती है लेकिन ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है, यह समझ से परे है। इधर स्वयंसेवी संस्था के मनोज सिंह राठौड ने बताया कि बैठक के बाद उन्हें फ ॉर्म दिया गया लेकिन फॉर्म में इतनी ज्यादा पेचिदगिया है कि उसे कोई भी आसानी से पूर्ण नहीं कर सकता। शहर के अंदर नगर परिषद और अन्य विभागों के कई भवन धूल खा रहे है लेकिन व्यवस्थाओं का मक्कडजाल इसी तरह निर्वस्त्र होनी की विवशताएं जता रहा है।
आधार का उपयोग ’अधर’ में
कोटडा और ऋषभदेव तहसीले फिसड्डी
गिर्वा में भी अब तक २४ प्रतिशत पहुंचा आंकडा
उदयपुर, आधार कार्ड बनने की प्रक्रिया में शीथिलता को देखते हुए इस कार्ड की उपयोगिता की शीघ्र क्रियान्विति पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।
सरकार द्वारा आधार कार्ड को ही सब कुछ मान लेने की घोषणा से आमजन चिंतित है। चिंता इसलिए कि जिस गति से कार्ड बनने का कार्य चल रहा है उसे देखते हुए आगामी छह माह तक इस कार्य की समाप्ति संभव नहीं है। दूसरी ओर सरकार द्वारा सभी कल्याणकारी योजनाओं के साथ रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तु को भी इस दायरे में लेने से आमजन के चेहरे पर चिंता की लकीरे खिंची हुई है।
यदि हम उदयपुर जिले की दस तहसील क्षेत्रों की जानकारी ले तो चौंकाने वाले आंकडे दर्शाते है कि आधार का उपयोग भी दूरी की कौडी है। एक फरवरी 2013 तक पंजीकृत आधार कार्ड दाताओं की संख्या यह दर्शाता है कि यह कार्य आगामी छह माहों तक और जारी रहेगा।
उदयपुर जिले की गिर्वा तहसील की जनसंख्या सात लाख 40 हजार 963 है इसकी तुलना में अब तक एक लाख 84 हजार 1171 नागरिकों का ही आधार के लिए पंजीयन हुआ है। इस प्रकार यहां अभी तक 24 प्रतिशत लोग ही आधार कार्ड का पंजियन करवा पाए है।
वल्लभनगर तहसील में यह आंकडा 39 प्रतिशत पहुंचा जहां दो लाख 30 हजार 818 की आबादी के मुकाबले नब्बे हजार 712 नागरिक ही अपना पंजीयन करवा पाए है। गोगुन्दा में यह प्रतिशत 34 है जहां एक लाख 51 हजार 575 जनसंख्या की तुलना में 52 हजार 476 पंजीयन हुए है।
इसी प्रकार खेरवाडा में 34 प्रतिशत आधार का पंजियन हुआ है। इस तहसील क्षेत्र की 2 लाख 68 हजार 976 जनसंख्या के मुकाबले केवल 92 हजार 849 ग्रामीण ही इस कार्ड तक पहुंच पाए है। मावली तहसील में 33 प्रतिशत पंजियन हुआ है यहां की कुल आबादी 2 लाख 13 हजार 796 है जबकि आधार पंजीयन केवल 72 हजार 443 लोग ही करवा पाए है। सराडा तहसील में 29 प्रतिशत कार्य हुआ है यहां कुल 2 लाख 23 हजार 380 जनसंख्या की तुलना में 65 हजार 365 नागरिक आधार मशीनों तक पहुंचे है।
सलूम्बर तहसील में 2 लाख 12 हजार 492 आबादी के मुकाबले 58 हजार 901 लोग ही आधार को छू पाए है और यहां आंकडा अभी 27 प्रतिशत है। झाडोल तहसील में 14 प्रतिशत कार्ड बने है। यहां की आबादी एक लाख 93 हजार 810 के मुकाबलजे 27 हजार 14 लोग ही आधार का पंजीयन करवा पाए है। विकास से अछूता रही कोटडा तहसील के हालात और भी गंभीर है यहां अब तक केवल 6 प्रतिशत ही पंजियन हुआ है। यहां की कुल आबादी एक लाख 83 हजार 504 के मुकाबले 11 हजार 147 लोग ही पंजियन करवा पाए है।
सबसे कम जहां इस कार्य में शीथिलता दिखी वह है ऋषभदेव तहसील यहां अब तक मात्र 4 प्रतिशत कार्य ही सम्पादित हुआ है। यहां की आबादी 2 लाख 63 हजार 312 के मुकाबले अभी तक मात्र 10 हजार 532 लोग ही आधार कार्ड बनवा पाए है।
उपरोक्त आंकडों को देखते हुए यह दावा है कि आधार कार्ड का सामान्य उपयोग होने में अभी एक अर्सा लगेगा। सरकार को इसे यदि अनिवार्य बनाना है तो इस कार्य को गति देनी होगी तभी सार्थक अंजाम तक पहुंचा जा सकेगा।
स्तनपान से परहेज महिलाओं में कैंसर का सबसे बडा कारण
तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू
नई तकनीक, कौशल सहित कई मुद्दों पर होगी विस्तृत चर्चा
उदयपुर, लाइफ स्टाइल में आए बदलाव के कारण इस साल करीब एक लाख लोग कैंसर से ग्रसित होते है इनमें करीब 59 फीसदी लोग इस बीमारी के साथ दम तोड देते है। कारण होता है जागरूकता की कमी तथा इलाज के समूचित साधनों को अभाव। ऐसे में जरूरी कैंसर जैसी बीमारी के उन्मूलन के लिए जरूरी है कि सस्ती तथा सुलभ चिकित्सा हर व्यक्ति तक पहुंचे। यह विचार जीबीएच अमेरिकन हॉस्पीटल के बेनर तले शुक्रवार से शुरू हुई ब्रेस्ट कैंसर विषयक कार्यशाला के पहले दिन सामने आए। तीन दिवसीय इस कार्यशाला के पहले दिन जीबीएच अमेरिकन हॉस्पीटल में प्री-कॉन्प्रें*स आयोजित की गई। कैंसर हॉस्पीटल के सीईओ आनंद झा ने बताया कि कार्यशाला की शुरूआत में वरिष्ठ ब्रेस्ट कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ गरीमा मेहता ने अपने स्वागत में बताया कि कैंसर के अगर शुरूआती लक्षणों को पहचान कर उपचार शुरू कर दिया जाए तो यह करीब करीब पूरी तरह से मिटाया जा सकता है। कार्यशाला के पहले दिन टेक्नीकल सेशन में सोनोग्राफि द्वारा लक्षणों की पहचान तथा कीमोपोर्ट के दर्द रहित उपचार बनाने की दिशा में व्याख्यान दिया।
कार्यशाला की आयोजन सचिव डॉ. गरीमा मेहता ने बताया कि कैंसर के परीक्षण तथा उसके इलाज में कई कडिया शामिल है। एक व्यक्ति सोनोग्राफी करता है एक बायोप्सी करता है तथा तीसरा व्यक्ति उसका इलाज करता है। ऐसे में परिणामों को प्रभावित होने की पूरी संभावनाएं रहती है। अगर ही डॉक्टर यह सभी काम करें तो इस दिशा में विशेष कदम उठाए जा सकेगें। इस विषय पर चैन्नई ब्रेस्ट सेंटर से आई डॉ. साल्वे राधा कृष्णन ने अपने व्याख्यान दिया। साथ डॉ.कृष्णन ने इस पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया।
कार्यशाला में संजयगांधी पी.जी. इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. गौरव अग्रवाल ने कैंसर निवारण कीमोपोर्ट के इंप्लांट के संबंध में जानकारी दी। इसके इंप्लांट का लाइव डेमोस्टेशन दिया।
डॉ. कृष्णन ने बताया कि कैंसर लाइफ स्टाइ से जुडी बीमारी बनाता जा रहा है। खान-पान तथा रहन-सहन में आए परिवर्तन तथा फास्ट फुड कल्चर कैंसर का एक बडा कारण है। साथ ही महिलाओं में स्तनपान न कराने कैंसर का सबसे बडा कारण है। महिला में होने वाला कैंसर का पचास प्रतिशत अंश ब्रेस्ट कैंसर तथा सरवाइकल कैंसर से पीडित हैै। जबकि पुरूषों में होने वाला स्तन कैंसर महिलाओं के अनुपात में सौ गुणा कम है। यानी कि हर सौ महिलाओं में एक पुरूष स्तन कैंसर का शिकार होता है।
कार्यशाला में एस.जी.पी.जी. आई.,लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. गौरव अग्रवाल ने बताया कि कैंसर इलाज की तकनीक को छोटा सुगम तथा दर्द रहीत बनाने के दिशा में सफलता मिली है। इस तकनीक के जरीए अब हर बार अलग-अलग धमनियों से होने वाली चिकित्सा से निजात मिली है। अब एक कीमोपोर्ट के इप्लांट कैंसर के चिकित्सा संबंधी सभी प्रक्रियाएं शुरू की जा सकती है। इससे दर्द भी कम होता है तथा परिणाम भी अच्छे आते है।
साथ ही इस दिशा में हुए सकारात्मक परिवर्तन जरिए अब ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में पूरे स्तन को निकालने के बजाए केवल कैंसर संक्रमण उत्तकों को ही निकाल कर पूरे स्तन को बचाया जा सकता है।
यह कार्यशाला मेवाड के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्यों गरीब आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कैंसर जैसी भयावह बीमारी के निदान हेतु प्राथमिक उपचार की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कैंसर को लेकर यहां ना तो कोई विशेष जागरूकता तथा ना ही इससे निबटने के लिए समुचित प्रबंध। ऐसे इस प्रकार की कार्यशाला उदयपुर सहित मेवाड संभाग के लिए कैंसर उन्मूलन की दिशा में लाभप्रद साबित होगी।
आखिर हो ही गया अग्निशमन वाहनों का लोकापर्ण
उदयपुर , तैयार खड़ी अग्निशमन किसी विआईपी के लोकार्पण के इंतजार में आखिर शुक्रवार को शहर विधयक की हरी झंडी के बाद चल पड़ी ।
अब अगर भगवन न करे कही आग लगी तो यह नहीं होगा के आखिर इस फायर ब्रिगेड गाड़ियों को केसे निकले अभी तक लोकार्पण तो हुआ नहीं । दो दिन पहले एक दुकान में आग लग गयी और सारा सामान जल कर राख हो गया पुरानी फायर की गाड़ियाँ डेड घंटे में पहुची और नयी गाड़ियाँ लोकार्पण के इंतजार में गैराज में ही खड़ी रही ।
आखिरकार शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने नयी फायर ब्रिगेड वाहनों का लोकार्पण कर जनता के लिए हरी झंडी देदी ।
सभापति ने अग्निशमन वाहनों की चर्चा करते हुए बताया इन दो वाहनों के साथ ही परिषद के पास अब कुल १२ अग्निशमन वाहन हो गए है । उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग से बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने के लिए ५५० लाख रू. की लागत से एक हाईड्रोलिक लेडर प्लेटफार्म (स्नोरकल लेडर) खरीद की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है । जिसे क्रय करने की कार्यवाही की जा रही है ।
गैराज समिति अध्यक्ष मनोहर सिंह पंवार ने बताया कि इन दोनों अग्निशमन वाहनों की अनुमानित लागत क्रमशं २५ व २७ लाख रू. है । परिषद ने १३वें वित्त आयोग की स्वीकृत राशि से एक मल्टीपरपज फायर टेण्डर के लिए भी निविदाएं आमंत्रित की हैं ।
पूर्व विधान सभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत ने कहा कि पट्टा वितरण कार्यक्रम को सफलता पूर्वक सम्पादित करने के लिए नगर परिषद और उसकी मुखिया बधाई की पात्र है । उन्होंने आय$ड नदी की सफाई का काम हाथ में लेने का सुझाव दिया ।
आयुक्त सत्यनारायण आचार्य ने बताया कि अब तक पट्टे बनवाने के लिए करीब १७०० आवेदन प्राप्त हुए है । मठ माद$डी में १४१ पट्टों सहित विभिन्न क्षेत्रों में नियमानुसार ७०० पट्टे दिए जा चुके हैं और सौ हाल ही तैयार किए गए है, जिन्हें शीघ्र ही वितरित किया जाएगा । समारोह का संचालन विधि समिति अध्यक्ष के.के.कुमावत ने किया ।
कटारिया दिल्ली जाएंगे
प्रतिपक्ष नेता पर फैसला आलाकमान के साथ बैठक मे होगा
उदयपुर। मेवाड के नेता एवं पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया शनिवार को दिल्ली में आलकमान के साथ होने वाली बैठक में भाग लेने के लिए शनिवार प्रात: विमान द्वारा दिल्ली जाएंगे। ज्ञातव्य है कि इस बैठक में राज्य के प्रतिपक्ष नेता के नाम पर चर्चा कर उसके नाम पर फैसला होगा। वसुंधरा राजे के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद प्रतिपक्ष नेता के पद पर गुलाबचंद कटारिया की ताजपोशी हो सकती है।
मेवाड के कद्दावर नेता एवं राज्य के पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, अरूण चतुर्वेदी एवं घनश्याम तिवाडी को आलाकमान ने दिल्ली बुलाया है। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कटारिया शनिवार प्रात: वायु मार्ग से दिल्ली जाएंगे जहां वे आलाकमान के साथ होने वाली बैठक में भाग लेंगे। कटारिया प्रतिपक्ष नेता के पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे है।
आलाकमान द्वारा दिल्ली में होने वाली इस बैठक में पिछले कुछ समय से राज्य के पार्टी नेताओं के बीच अंदरूनी कलह को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। ज्ञातव्य है कि गुलाबचंद कटारिया वसुंधरा विरोधी खेमे के माने जाते है। आलाकमान का ये प्रयास रहेगा कि पार्टी में चल रहे मनमुटाव को दूर करने एवं आपसी सामंजस्य बैठाने के लिए इस पद पर कटारिया को नियुक्त किया जाए ताकि आगामी चुनावों में पार्टी एकजुट होकर चुनावी अभियान में जुटे।
फेसबुक पर आया अब ‘सेक्स प्रपोजल’ का ऐप्स!
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। फेसबुक पर जॉब एप्लीकेशन, वीडियो चैट एप्लीकेशन इत्यादि जैसे ऐप्स तो आपने सुने ही होंगे मगर दुनिया भर में मशहूर इस सोशल नेटवर्किंग साइट पर अब एक अनोखा एप्लीकेशन आ गया है। इस एप्लीकेशन के माध्यम से लड़के-लड़कियां एक दूसरे को खास पल गुजारने के का प्रस्ताव भेज सकते हैं। एप्लीकेशन यह भी बतायेगा कि यूजर के फ्रेंड्स लिस्ट में कौन सी लड़की उसमें दिलचस्पी रखती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह एप्लीकेशन तीन अंजान कॉलेज दोस्तों की करामात है। आपको बताते चलें कि एप्लीकेशन लिस्ट में ‘बैंग विथ फ्रेंड्स’ नाम का एप्लीकेशन होने पर ही किसी दोस्त को इस तरहा का प्रस्ताव भेजा जा सकता है। यह ऐप्स सिर्फ लड़कों के लिये नहीं बल्कि लड़कियां भी अपने मनपंसद और चहेते लड़के को ऐसा ही प्रस्ताव भेज सकती हैं। इस एप्लीकेशन के 4 दिनों के भीतर 20 हजार यूजर हो गये हैं। यह एप्लीकेशन खास प्रस्ताव की नामंजूरी की जानकारी नहीं देता है। लेकिन अगर प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है तो दोनों को ही एक मेल के जरिए इसकी सूचना दे दी जाती है। बस यूजर को एप्प इन्सटॉल करते वक्त ‘ओनली मी’ टैब पर क्लिक करने की जरूरत पड़ती है। फिर यूजर अपने फ्रेंड्स लिस्ट में से मनपसंद पार्टनर को अपना प्रस्ताव भेज सकता है। इस एप्लीकेशन को बनाने वाले छात्र का कहना है कि फेसबुक पर ऐसे लाखों लोग हैं जो अपने किसी फेसबुक फ्रेंड से संबंध बनाने की लालसा रखते हैं। हम बस ऐसे लोगों को एक जरिया दे रहे हैं, ताकि वह अपना प्रस्ताव दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सके। यूजर पहले फेसबुक से साइन इन कर अपने फ्रेंड्स लिस्ट पर पहुंच जाता है। एक बार साइन इन होने के बाद दोस्तों की लिस्ट सामने आ जाती है। इसके बाद पसंद के दोस्त पर क्लिक करना होता है। अगर प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो दोनों यूजर को एक मेल के जरिए इसकी सूचना दे दी जाती है।
बुजुर्ग प्रिंसिपल को हुआ प्यार, किया छात्रा से विवाह
गोपालगंज। सदियो से एक कहावत चली आ रही है कि प्यार अंधा होता है। प्यार के चलते इंसान अच्छा-बुरा भूल जाता है। हाल ही में एक ऎसा ही प्रेम कहानी का मामला सामने आया है।
खबर है कि महेन्द्र दास कॉलेज के प्राचार्य संत रामदुलार दास ने अपने ही कॉलेज की छात्रा से प्रोफेसर बनी निभा के साथ विवाह किया। उनके इस कारनामे से छात्र संगठनों में खासा बवाल मच गया है। छात्र संगठनों ने प्राचार्य का पुतला दहन कर उनको सस्पेंड करने की मांग की है।
दरअसल दास को कॉलेज की छात्रा निभा से प्यार हो गया, उन्होंने उसे मनमाने तरीके से डिग्रियां देकर प्रोफेसर बनाया। इसके बाद 16 जनवरी 2013 को मंदिर में शादी कर दोनों गायब हो गए। 21 जनवरी को अचानक दोनों कॉलेज पहुंचे तो यह बात सब तरफ धुएं की तरह फैल गई। हालांकि 65 वर्षीय रामदुलार दास उम्र के इस पडाव को शादी के उपयुक्त नहीं मानते और खुद को संत ही मानते हैं। लेकिन छात्र संगठन उनकी शादी के विराध में अनशन करने की बात कर रहे हैं।
ट्रोले ने बाइक को चपेट में लिया, दो युवक की मौत
उदयपुर। प्रतापनगर चौराहे पर पुराने आरटीओ कार्यालय के समीप स्थित पेट्रोलपंप के पास एक ट्रोले ने मोटरसाइकिल सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। घटना में दो युवकों की मौके पर मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया।
जानकारी के अनुसार प्रतापनगर चौराहे पर नागदा पेट्रोलपंप के समीप एक अनियंत्रित ट्रोले ने मोटरसाइकिल पर अपने गांव रेबारियों की घाटी जा रहे हरीश (20) पुत्र बालूदास वैष्णव, जितेन्द्र (26) पुत्र रामचरण निवासी केशवपुरा कोटा व नरेश (18) पुत्र बालूदास वैष्णव को चपेट में ले लिया। घटना में हरीश व जितेन्द्र की मौके पर ही मौत हो गई जबकि नरेश घायल हो गया। घटना के बाद ट्रोला चालक ट्रोले को मौके पर ही छो$ड भाग गया। पुलिस ्रने ट्रोला जब्त कर मृतक के शवों और घायल को चिकित्सालय पहुंचाया।
आखिर हैवान कब इंसान कहलायेगा ????
पोस्टर बना आकर्षण का केन्द्र
उदयपुर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर राजकीय गुरू गोविन्द सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा बनाया गया आखिर हैवान कब तक ईंसान कहलायेगा ङ्ग सूचना केन्द्र पर आकर्षण का केन्द्र बना।
राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी संजय बडाला ने बताया कि आज देश में महिला अत्याचार व दुष्कर्म की घटनाएं चिन्ता का विषय बन चुकी है। इन घटनाओं को रोकने के लिए व महिलाओं के प्रति स मान की भावना पैदा करने के लिए पोस्टर में गांधीजी के तीन बंदरों के साथ चौथे बंदर की भी कल्पना की गई हैं।
बडाला ने बताया कि गांधीजी के सिद्घान्त आज भी प्रासंगिक है जहां पहला बंदर मुंह पर हाथ रखकर बुरा मत बोलों की बात करते हुए आज यह संदेश दे रहा है आप महिलाओं को बुरा मत बोलो, दूसरा बंदर कान पर हाथ रखकर कह रहा है कि बुरा मत सुना और आज महिलाओं को संदेश दे रहा है कोई बुरा कहता है तो कान पर हाथ न रखकर प्रतिरोध करे।
तीसरा बंदर कह रहा कि बुरा मत कहों आज यह संदेश सभी लोगों को दे रहा है कि आपके आसपास महिला उत्पीडन व अत्याचार हो रहा है तो आप आंखे बंद मत करों और महिला अत्याचार को रोकों।
इस पोस्टर में चौथे बंदर की भी कल्पना की है जो दोनो हाथ को समेटे हुए बैठा है आपको यह संदेश दे रहा है कि बुरा मत करो यानि दुष्कर्म से बचे।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों ने राम धुन रघुपति राघव राजा राम देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान, इंसान का इंसान से हो भाईचारा यही पैगाम हमारा इत्यादि गीत गाकर नारी के प्रति श्रद्घा को प्रकट किया।
बाप के वहशीपन से डरी हुई मासूम अब नहीं जाना चाहती घर
उदयपुर.सौतेले पिता के वहशीपन से भयभीत दस वर्षीय बालिका को सगी मां के साये पर भी यकीन नहीं रहा। बालिका कोर्ट के इजलास में उस वक्त फफक पड़ी, जब उससे पूछा गया कि ‘क्या वह अपनी मां के साथ घर जाना चाहती है?’ इस पर रोते हुए बालिका ने कहा कि ‘मैं मां के साथ तो जाना चाहती हूं, लेकिन सौतेले पिता के घर हर्गिज नहीं।’ चौथी कक्षा में पढ़ने वाली यह बालिका पूरी तरह डरी और सहमी हुई थी।
सौतेले पिता रमेश सालवी ने उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था, तब से वह चित्रकूट नगर स्थित राजकीय बालिका गृह में रह रही थी। बालिका की मां मीरा मेघवाल ने अपनी बेटी को लेने के लिए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2 मीनाक्ष जैन की कोर्ट में अर्जी लगाई थी। बालिका के बयानों के बाद उसकी मां की अर्जी खारिज कर दी गई। अदालत ने बालिका की मनोदशा सही न मानते हुए वापस बालिका गृह भेजने के आदेश दिए।
यह थी घटना
रमेश ने 8 जनवरी को बालिका के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया था। बाल कल्याण समिति के अनुरोध पर बालिका की सुरक्षा के मद्देनजर अदालत ने उसे चित्रकूट नगर स्थित राजकीय बालिका गृह भिजवा दिया था।
बाल कल्याण समिति के सदस्य भगवत सिंह राजपूत ने बालिका के सौतेले पिता रमेश सालवी के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास की रिपोर्ट अंबामाता थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस में शिकायत धारा 376/511 एससी एसटी एक्ट 3 (1)(11) एवं धारा 7-8 प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल आफेंस एक्ट के अंतर्गत दर्ज किया ग


