अमित शाह का रोड शो – क्या गुलाबचंद कटारिया अपनी सीट पर असुरक्षित है ?

उदयपुर। उदयपुर जिले की आठ विधानसभा के समर्थन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का रंगारंग रोड शो करवाया गया। रोड शो में युवाओं के लुभाने के सारे ताम मौजूद थे। टाउन हॉल से शुरू हुए इस रोड शो में जगह जगह जगह भाजपा की अलग अलग इकाइयों द्वारा स्वागत किया गया। जिले की आठों विधान सभा के प्रत्याशी अपने साथ अपने समर्थक भी लेकर आये थे जिन्होंने रोड शो में भीड़ बढ़ाने का खासा काम किया। इधर विरोधियॉं का कहना है कि शहर में भाईसाहब की स्थिति कमजोर हो गयी है इसलिए अमितशाह का रोड शो करवाया गया है। एंडिंग पॉइंट से पहले ही अमित शाह का रोड शो से उतर कर चले जाना भी काफी चर्चाओं में बना रहा। हालाँकि माना जा रहा है कि समय या आचार संहिता की वजह से अमित शाह को रोड शो छोड़ कर जाना पडा।
मंगलवार शाम चार बजे टाउन हॉल प्रांगण ग्रामीण कार्यकर्ताओं से भरा हुआ था। युवा मोर्चा और केसरिया साफा बंधे महिला मोर्चा की कार्यकर्ता अलग ही दिखाई पढ़ रही थी। मौका था अमित शाह के रोड शो का जिसमे अमित शाह उदयपुर जिले की आठ विधानसभा उदयपुर शहर, उदयपुर ग्रामीण, सलूम्बर, झाड़ोल, गोगुन्दा, खेरवाड़ा, वल्लभनगर और मावली के प्रत्याशियों का मनोबल बढ़ाने और भाजपा के पक्ष में वोट की अपील करने के लिए आये थे। अमित शाह को आना था ४.३० बजे लेकिन समय से करीब सवा घंटा देरी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। रोड शो के लिए बनाये गए स्पेशल रथ जो फूल मालाओं और बैनर पोस्टर से सजा रखा था उस पर सवार हो गए। उनके साथ उदयपुर शहर प्रत्याषी गुलाबचंद कटारिया, ग्रामीण प्रत्याशी फूलसिंह मीणा, मावली प्रत्याषी धर्मनारायण जोशी, देहात जिलाध्यक्ष गुणवंत सिंह झाला, शहर अध्यक्ष दिनेश भट्ट आदि मौजुद थे। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को देखने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं में खासा जोश खरोश देखा गया। करीब छह बजे अमित शाह टाउन हॉल से निकल कर रथ पर सवार बापू बाजार में आये वहां से सूरजपोल अस्थल मंदिर, मुखर्जी चैक, बड़ा बाजार, घंटाघर, हाथीपोल अश्विनी बाजार होते हुए देहलीगेट और पुनः टाउन हॉल पहुंचे जहाँ सबका अभिवादन कर समापन किया।

रोड शो के दौरान भाजपा के कार्यकर्ता और भाजपा की ही अलग अलग इकाइयों द्वारा रास्ते भर स्वागत किया गया पुष्प वर्षा की गयी। रोड शो में युवाओं को लुभाने के लिए करीब पांच छह डीजे का इंतजाम भी किया था जिस पर डांस करते हुए युवा चल रहे थे। जगह – जगह पुष्प वर्षा का स्वागत को देखकर पार्टी के नम्बर वन नेता भी काफी अभिभूत हुए। वहीं गुलाबचंद कटारिया माईक से लोगों का अभिवादन भी स्वीकार कर रहे थे और रथ से साईड में रहने की हिदायत भी दे रहे थे। रास्ते भर अमित शाह जनता का अभिवादन करते रहे।
भाईसाब की गिरती साख को बचाने बुलाया अमितशाह को :
अमितशाह के रोड शो के साथ में चर्चा है कि शहर में भाईसाब की स्थिति गिरजा व्यास के सामने कमजोर हो रही है और इसी को बचाने के लिए अमित शाह को बुलाया गया है। विपक्ष और विरोधियों का कहना है इसी वजह से ही योगी आदित्यनाथ की सभा का आयोजन भी रातों रात किया गया।
लाये गए लोगों को नहीं पता क्यों आये है :
उदयपुर जिले की आठों विधानसभा के सभी भाजपा प्रत्याशी उदयपुर आये और अपने साथ समर्थक भी लेकर आये। जब साथ आये समर्थकों से पूछा गया कि वे यहाँ पर क्यों आये है तो उनका कहना है की यहाँ पर कोई मीटिंग होने वाली है इसीलिए हमे यहाँ लाया गया। किसी ने बताया कि मोदी जी आने वाले है इसलिए आये है हमे मोदी के लिए कह कर लाया गया है।

राम मंदिर निर्माण के लिए भाजपा नहीं लाएगी अध्यादेश: अमित शाह

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अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी इस मामले में अदालत की सुनवाई का इंतज़ार करेगी. शाह ने कहा है कि उनकी पार्टी शीतकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए कोई बिल या अध्यादेश नहीं लाएगी बल्कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही जनवरी के सुनवाई का इंतज़ार करेगी.

नवभारत टाइम्स के अनुसार, शाह ने भरोसा जताया है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के पक्ष में होगा और उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि ये मामला नौ सालों से क्यों लंबित पड़ा था.

अमित शाह ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण उनकी पार्टी की प्रतिबद्धता है. वो आगे कहते हैं, ‘यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और हमें इसकी सुनवाई के लिए जनवरी तक इंतजार करना चाहिए. हालांकि यह भी समझना चाहिए कि यह मामला 9 सालों से लंबित है और अभी भी कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने मांग की थी कि सुनवाई 2019 के चुनावों के बाद होनी चाहिए.’

इंडिया टुडे के अनुसार कांग्रेस पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा, ‘क्या कपिल सिब्बल बिना राहुल गांधी के इजाज़त के सुनवाई को टालने के लिए याचिका दायर कर रहे हैं.’

शाह ने कहा कि भाजपा आगे सुनवाई का इंतज़ार करेगी, जो 22 जनवरी को होनी है. उन्होंने यह भी कहा, ‘ये अदालत का मामला है, हमारे हाथ में कुछ नहीं है. हमारे हाथ में होता तो मंदिर पहले ही बन गया होता.’

रविवार को अयोध्या में धर्मसभा कर हिंदू संगठनों और संतों ने सरकार को मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग की है.

मालूम हो कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या पहुंचे. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने मंदिर निर्माण का वादा किया था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया.

अयोध्या में लगे शिवसेना के पोस्टर बैनर में कहा गया है, ‘पहले मंदिर फिर सरकार.’

साढ़े 4 घंटे में खत्म हो गईं 4 जिंदगियां, पहले पत्नी की मौत, फिर चंद घंटे पहले पैदा हुए जुडवां बच्चों ने तोड़ा दम, आखिर में पति की भी थम गईं सांसे

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खबर मध्यप्रदेश भोपाल की है,. हॉस्पिटल में पति की हालत बिगड़ने का पता चलने के बाद सोमवार को प्रेग्नेंट महिला ने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। खून से लथपथ हालत में उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया और खुद दम तोड़ दिया। तीन घंटे बाद दोनों मासूम दुनिया से चले गए। कुछ देर बाद वेंटिलेटर पर चल रहे पति की भी मौत हो गई। महिला के भाई का कहना है कि उसे लगा कि पति की सांसें थम चुकी हैं।
महिला ने कहा था- प्रेग्नेंसी की बात किसी को न बताना, बच्चों के जन्म के बाद बड़ा सेलिब्रेशन करेंगे…

सालभर पहले भी गायत्री गर्भवती हुई थी। इससे बेहद खुश हुए बड़े भाई नरेश ने नाते-रिश्तेदारों को इसके बारे में बता दिया। कुछ महीने बाद ही गायत्री को मिसकैरेज हो गया। इस बार वह नहीं चाहती थी कि गर्भ में पल रहे दोनों बच्चों के बारे में किसी को बताया जाए। उसने नरेश से कहा था कि भैया दोनों बच्चों के जन्म के बाद सारे नाते-रिश्तेदारों को बुलाकर एक बड़ा सेलिब्रेशन करेंगे। अभी किसी को मत बताना। लेकिन निमोनिया से पीड़ित पति की हालत बिगड़ने का पता चलने के बाद सोमवार को 7 महीने की प्रेग्नेंट गायत्री ने एक निर्माणाधीन बिल्डिंग की चौथी मंजिल से छलांग लगा दी।

भाई बोला- शादी उसकी पसंद के लड़के से करवाई थी, घर में खुशियां आने वाली थीं, लेकिन ये क्या हो गया

महिला के प्रेग्नेंट होने के बारे में केवल गायत्री और मनोज के परिवार को पता थी। नरेश ने बताया कि 1996 में मम्मी की डेथ हो गई। उस वक्त गायत्री 17 साल की थी। 2002 में पापा ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हम दो भाइयों की गायत्री इकलौती बहन थी। उसे कोई अफसोस न रहे इसलिए शादी उसकी पसंद के लड़के से करवाई थी। घर में खुशियां आने वाली थीं, इसलिए मनोज ही गायत्री की पूरी देखरेख करते थे। लेकिन भगवान ने ये क्या कर दिया।

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हंसों के जोड़े के बारे में सुना था.

रविवार को गायत्री का जन्मदिन था। दोस्त और परिजन फोन और फेसबुक पर बधाई देते रहे। सोमवार रात जैसे ही दोस्तों को गायत्री की मौत की जानकारी मिली, वैसे ही एक दोस्त ने लिखा हंसो के जोड़े के बारे में सुना था, आप दोनों को उनके रूप में देख लिया…।

10 साल बाद घर में किलकारी का इंतजार था

गायत्री के बड़े भाई नरेश ने बताया कि शादी के 10 साल बाद भी गायत्री को कोई संतान नहीं थी। शहर और उसके बाहर शायद ही कोई ऐसा स्पेशलिस्ट डॉक्टर बचा हो, जहां मनोज और गायत्री न गए हों। किसी रिश्तेदार ने जानकार बाबा की सलाह दी तो बच्चे की चाह में दोनों उससे भी मिलने पहुंच गए। घर में बेहद खुशियों का माहौल था। गायत्री को सात महीने का गर्भ था, वो भी जुड़वां। दोनों के परिवारों को इस खुशी का बेसब्री से इंतजार था।

एक्यूट डिप्रेशन के कारण महिला ने दी जान

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में हमेशा बच्चे को लेकर डर बना रहता है। इस बीच अगर किसी महिला का पति अस्पताल में भर्ती हो और वह उसकी देखभाल भी नहीं कर पाती तो वह वैसे ही परेशान रहती है। ऐसे में जब महिला को अचानक अस्पताल पहुंचने का संदेश मिलता है तो एक्यूट डिप्रेशन में जाने की आशंका रहती है। शायद इन्हीं परिस्थितयों के कारण यह घटना हुई।

– डॉ. आरएन साहू, एचओडी साइकेट्री डिपार्टमेंट, जीएमसी

उदयपुर शहर के 33 हज़ार युवा करेगें फैसला – कौन होगा अगला विधायक ?

उदयपुर। उदयपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में सभी प्रत्याशी अपने चुनाव अभियान में लगे हुए है। कांग्रेस और भाजपा के प्रचारक रोज़ दौरे पर आरहे है और वोटरों को अपने तरीकों से लुभाने की कोशिश कर रहे है। लेकिन इस बार शहर का विधायक चुनने में शहर का युवा निर्णायक भूमिका में है। इस युवा वोटर की तादाद पिछले चुनाव की तुलना में पांच गुना बढ़ कर ३३ हज़ार हो गयी है। राजनीति के जानकार कहते है जिसने युवाओं को अपना बना लिया जीत उसी की होगी।
उदयपुर शहरी विधानसभा क्षेत्र में कुल वोटरों की  २.37 लाख  है। इनमे से 33 हज़ार मतदाता सिर्फ युवा है। राजनीति विशेषग्य मानते है कि जिस दल ने युवाओं के 80 फीसदी वोट हासिल कर लिए उसकी जीत की संभावनाएं रहेंगी। भाजपा व कांग्रेस दोनों की निगाहें इन वोटरों पर हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि कुल वोटरों में सर्वाधिक वोट युवा वर्ग के होते हैं। यदि युवा अधिकाधिक मतदान करते हैं तो मत प्रतिशत भी अधिक होता है। पिछली बार जिले की विभिन्न सीटों पर 60 से 65 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार युवा मत अधिक होने से यह प्रतिशत 70 तक पहुंचने के आसार हैं।

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ज्यादा मतदान विपक्ष को लाभ… माना जाता है कि ज्यादा मत प्रतिशत हमेशा सत्ता के विरोध में यानी विपक्ष के लिए लाभकारी रहता हैं। सत्ता से आक्रोशित हो कर ही अधिक मतदान किया जाता है और इसमें युवाओं की संख्या ज्यादा होती है। भाजपा और कांग्रेस युवाओं को साधने की कोई कसार नहीं छोड़ रहे। भाजपा युवाओं को बूथ से जोड़ने का अभियान भी बड़े पैमाने पर चला रही है। तो कांग्रेस ने भी युवाओं को जोड़ने के लिए मेरा बूथ मेरा गौरव अभियान चलाया था, लेकिन भाजपा ने कॉलेजों व मोहल्ले में टेबलें लगाकर मतदाताओं को जोड़ने की कोशिशें की थी जिसका भाजपा को लाभ मिल सकता है।
राजनीतिक जानकार लालकुमार चुग का मानना है कि उदयपुर-शहर में जो उम्मीदवार 80 हजार से अधिक वोट लाएगा जीत का सेहरा उसी के सिर बंधेगा। पिछले चुनाव में मतदान प्रतिशत 60 से 65 प्रतिशत रहा। इस बार युवा मतदाता बढ़े हैं तो अनुमान है कि मतदान प्रतिशत 70 तक जाएगा। उदयपुर-शहर विधानसभा क्षेत्र में 2.37 लाख मतदाता हैं। इस बार भाजपाकांग्रेस के आलावा 4.5 प्रतिशत वोट अन्य  प्रत्याशियों को व 0.5 प्रतिशत मत नोटा में जा सकते हैं।
युवाओं को शहर में अपनी प्रचार अभियान के दौरान भाजपा प्रत्याशी गुलाबचंद कटारिया व कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. गिरिजा व्यास दोनों ही युवाओं को रिझाने में लगे हैं। विशेष तरीकों
से उनसे संपर्क किया जा रहा है। भाजपा  जहां एबीवीपी व युवा मोर्चा तो कांग्रेस एनएसयूआई व युवा कांग्रेस के माध्यम से युवाओं को अपने पक्ष में करने में लगे हैं।
युवाओं के लिए सोशल मिडिया पर जम कर विशेष केम्पेन चलाया जा रहा है।  तरह तरह की विसेह्श पोस्ट के जरिये युवाओं को साधा जारहा है।

सत्ता से नाराज़ राजपूत का आक्रोश चुनाव में क्या भूमिका निभाएगा – तनवीर सिंह कृष्णावत

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राजस्थान में राहुल का दावा! सरकार बनी तो 10 दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ करेगी कांग्रेस

राजस्थान के चुनावी utsav (Rajasthan Election 2018) में सोमवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Rahul Gandhiने राजस्थान के दौरे के दौरान जालोर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार पर जमकर प्रहार किया। राहुल ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान में सरकार बनने के बाद 10 दिन के अंदर कांग्रेस किसानों का कर्जा माफ कर देगी। दुनिया की कोई भी शक्ति इस बात को नहीं बदल सकती है। हमने मुफ्त में राजस्थान के सब लोगों को दवाई दिलवाई थी, हम वो योजना फिर से चालू करेंगे।
राहुल ने वसुंधरा राजे से लेकर प्रधानमंत्री पर जमकर दावा बोला। उन्होंने कहा कि पहले मोदी जी जहां भी जाते थे 2 करोड़ नौकरियां, किसानों को सही दाम और भ्रष्टाचार की बात करते थे। लेकिन अब उनके भाषण में न रोजगार, न किसानों को सही दाम, न ही भ्रष्टाचार की बात होती है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान के युवाओं ने इस देश को यहां तक पहुंचाया है, लेकिन प्रधानमंत्री आपके माता-पिता का अपमान करते हैं, क्योंकि वो कहते हैं कि उनके आने से पहले हिंदुस्तान की जनता ने कुछ नहीं किया। मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा। मैं आपसे खोखले वादे नहीं करना चाहता, क्योंकि मैं आपका आदर करता हूं। सच्चाई से बहुत काम किया जा सकता है।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के राजस्थान दौरे की शुरुआत अजमेर से हुई जहां उन्होंने ख्वाजा गरीब नवाज़ के दर पर माथा टेका। इसके बाद वे पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में गए। पुश्तैनी पुरोहित नंदलाल कौल के पुत्र पं राजनाथ कौल ने उन्हें विधिवत पूजा कराई। इसके बाद उन्होंने ब्रह्मा मंदिर के दर्शन किए। इस अवसर पर उनको यादगार तस्वीरों का एलबम भी भेंट किया गया।

राहुल ने अजमेर में चादर चढ़ाई और फिर पुष्कर के मंदिर में बताया अपना गोत्र।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान में अपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान अजमेर में सूफ़ी संत ख़्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती की दरग़ाह और पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर पहुंचे.

अजमेर में राहुल गांधी ने सचिन पायलट और अशोक गहलोत के साथ चादर चढ़ाई और चुनावों में कांग्रेस की जीत के लिए दुआ मांगी.

वहीं पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में राहुल गांधी ने पूजा की. इस दौरान उन्होंने अपना गोत्र भी बताया. राहुल ने अपना गोत्र कौल दत्तात्रेय बताया है. यानी उन्होंने अपने आप को कश्मीरी पंडित बताया है.
राहुल गांधी के अपना गोत्र बताने पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, “बेल लेकर पर जेल के बाहर रहने वाले संबित भैया, अब मुद्दा हीन हो गए! अब 2019 किस बात पर प्रेस कांफ्रेंस करेंगे? भक्तों बजाओ ताली!”
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस वार्ता में राहुल गांधी का गोत्र पूछा था.

वहीं माकवान नाम के एक यूज़र ने ट्विटर पर लिखा, “ये क्या हो रहा है? शिक्षा, काबिलियत बताने की बजाय आज गोत्र बताना पड़ रहा है. इस मानसिकता से देश की तरक्की नही होने वाली.”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार करते हुए राहुल गांधी के मंदिरों में जाने को पाखंड कहा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा था, “राहुल मीडिया को बता रहे हैं कि वह जनेऊ पहनते हैं. लेकिन हमारे धर्म में मंदिर जाने के लिए जनेऊ पहनना कोई अनिवार्य शर्त नहीं है और कोई भी हिंदू मंदिर जा सकता है. राहुल जनेऊ धारण करें या न करें, यह उनकी इच्छा. लेकिन उनका जनेऊ दिखाना हमारी वैचारिक विजय है.”

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का नाम लिए बिना आदित्यनाथ ने कहा था, “राहुल के परनाना कहते थे कि वह हिंदू परिवार में दुर्घटनावश पैदा हो गए. ऐसे में राहुल ने कम से कम स्वीकार तो किया कि वह जनेऊ धारण करते हैं. हालांकि, जनता को ऐसे छद्मभेषी लोगों से सावधान रहने की जरूरत है.”

वहीं नीतेश सिन्हा नाम के एक यूज़र ने लिखा, “जय हो मोदी जी. कम से कम राहुल गांधी जी को अपना गोत्र पता चल गया. अच्छे दिन आ चुके हैं.”
स्थानीय संवाददाता नारायण बारेठ के मुताबिक, “पुष्कर के तीर्थ पुरोहित अपने जजमानों का लेखा जोखा रखते हैं जिसमें वंशावली का उल्लेख भी होता है. और उसी में राहुल के तीर्थ पुरोहित ने उनका गोत्र बताया और राहुल ने इस गोत्र को बोलकर बताया.”

राहुल गांधी की जाति को लेकर राजनीतिक सवाल उठते रहे हैं. उन्होंने अपने गोत्र में अपने आप को कश्मीरी ब्राह्मण बताकर समाज को इन्हीं सवालों का जबाव देने की कोशिश की है.

बारेठ कहते हैं, “राजस्थान में ब्राह्मण राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं. राहुल ने अपने ब्राह्मण होने का ज़िक्र करके इन मतों को प्रभावित करने की कोशिश भी की है जिसका उनकी पार्टी को राजनीतिक फ़ायदा हो सकता है.”
राहुल गांधी ने धर्मस्थलों के अपने दौरों को राजनीति से जोड़कर न देखने की बात की है. लेकिन विश्लेषक उनके इन दौरों के राजनीतिक मतलब तलाश रहे हैं.

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधराराजे को बम से उड़ाने की धमकी, हरकत में आई एटीएस व पुलिस, युवक गिरफ्तार .

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Rajasthan Assembly Elections 2018 विधानसभा चुनाव के प्रचार प्रसार के लिए जोधपुर दौरे पर आने के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को बम से उड़ाने की धमकी भरा कॉल मिलने से शनिवार को हड़कम्प मच गया। जयपुर स्थित स्टेट कन्ट्रोल रूम में आए कॉल के आधार पर हरकत में आई पुलिस व एटीएस ने अपराह्न में डाबड़ी गांव से एक युवक को हिरासत में ले लिया।
ओसियां थाना प्रभारी जयकिशन सोनी ने बताया कि स्टेट कन्ट्रोल रूम में सुबह एक व्यक्ति ने फोन करके कहा कि वो मुख्यमंत्री को बम से उड़ा देगा। यह कॉल आते ही पुलिस में हड़कम्प मच गया। धमकी भरा कॉल आने के दौरान मुख्यमंत्री जोधपुर जिले के दौरे पर थीं। एेसे में जोधपुर में पुलिस के साथ ही एटीएस को अलर्ट कर दिया गया। मोबाइल नम्बर के आधार पर धमकी देने वाले युवक की तलाश शुरू की गई। मोबाइल धारक व उसकी लोकेशन जोधपुर में ओसियां के आसपास मिली। मुख्यमंत्री भी ओसियां में चुनावी सभा को संबोधित करने वाली थी। तब हरकत में आई पुलिस ने डाबड़ी गांव निवासी महेन्द्र सिंह पुत्र खेत सिंह राजपूत को हिरासत में ले लिया, जिससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी महेन्द्र सिंह धमकी भरा कॉल 100 नम्बर से जोधपुर पुलिस कन्ट्रोल रूम में करने वाला था, लेकिन कॉल जयपुर स्थित स्टेट कन्ट्रोल रूम में चला गया था।
उधर, झालरापाटन शहर थाना पुलिस ने शनिवार को पांच आरोपी तो को गिरफ्तार कर इनके पास से 11 पिस्टल मैं रिवाल्वर व कट्टा दस जिंदा कारतूस बरामद किए हैं जिला पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने बताया कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिले में अवैध कार्यों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत गठित टीम ने यह अवैध हथियार बरामद किए हैं

अंधविश्वास की बली चड़ा 4 माह का मासूम -निमोनिया हुआ तो नाना ने तीन जगह लगाया डांव, 12 दिन बाद भर्ती, हुई मौत

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Udaipur . विज्ञान कितना भी तरक्की कर ले लेकिन अंधविश्वास की बेड़ियों ने आज भी हमें ऐसे ही जकड़ा हुआ है . यह अंधविश्वास कई बार मासूमों की मौत का कारण बन जाता है . यह अंधविश्वास सिर्फ गावों में ही नहीं शहरों में भी आज तक अपने पैर पसारे हुए है . एसी ही एक घटना राजस्थान के राजस्थान के भीलवाडा जिले में हुई जिसमे सिर्फ इस अंधविश्वास के चलते एक मासूम कि जान चली गयी .
भीलवाड़ा जिले में दिवाली पर पीहर आई बेटी के चार माह के नवजात बेटे बादल को निमोनिया व सांस लेने में तकलीफ होने पर अस्पताल ले जाने के बजाय नाना नंदा भील ने ही तार गरम कर मासूम के कलेजे पर तीन जगह डांव लगा दिया।

करीब 12 दिन पहले लगाए डांव से गत रात बादल की हालत बिगड़ी तो उसे काछोला अस्पताल ले जाया गया। तबीयत में सुधार नहीं होने पर शनिवार सुबह उसे भीलवाड़ा रैफर किया गया, जहां करीब सात घंटे उपचार के बाद बालक ने दम तोड़ दिया।

बाल कल्याण समिति अध्यक्ष के साथ ही शक्करगढ़ पुलिस ने भी अस्पताल पहुंच घटना की जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि जिले में अंधविश्वास के चलते ढाई साल में करीब 20 बच्चों को डांव लगाया गया, जिनमें से चार की मौत हो चुकी है।

घर में मासूम भाई बहन जिंदा जले – माता पिता गए थे बाहर .

Udaipur. सायरा थाना क्षेत्र के पहाड़ियों के बीच स्थित तला गांव के मोटीबोर फला में शनिवार दोपहर नींद में सोए दो छोटे बच्चे अपने ही घर में जिंदा जल गए। माता-पिता बाहर गए हुए थे।

थानाधिकारी यशवंत सोलंकी ने बताया कि हीरा राम पुत्र अणदा राम गरासिया और उसकी पत्नी ने दोपहर को खाना बनाया था। इसके बाद पत्नी चारा लेने चली गई और पति बकरी चराने के लिए पहाड़ों में चला गया, लेकिन साढ़े तीन साल का बच्चा शंभू और डेढ़ साल की बच्ची कविता घर पर ही थी।

हीरा और उसकी पत्नी करीब पौन घंटे बाद घर लौटे तो आस-पास के लोग इकट्ठा थे और धुआं निकल रहा था। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस पहुंची तब तक सब खाक हो चुका था। पुलिस ने शव निकाले और पोस्टमार्टम कराया।

बताया जाता है कि पहाड़ी पर अकेला घर हीरा का ही बना हुआ था। छत पर तिरपाल डाल रखा था और दीवार के रूप में लकड़ियों से बांध रखा था। घर के बाहर चूल्हा लगा हुआ था। चूल्हे पर दाल बाटी बनाई और माता-पिता घर से निकले। संभावना जताई जा रही है कि चूल्हा पूरी तरह से बुझा नहीं था। चूल्हे के अंगारों से घर पर रखी घास ने आग पकड़ ली। इस कारण अंदर सोए दोनों भाई-बहन जिंदा जल गई।