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हिंदुस्तान जिंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 23 अरब लीटर पानी रीसायकल किया, रीसाईक्लिंग दर बढ़कर 49 प्रतिशत हुई

हिंदुस्तान जिंक ने 3.32 गुना वाटर पॉजिटिव स्थिति बनाएं रखी

जलसंकट वाले क्षेत्रों में 280 से अधिक जल संरक्षण परियोजनाएं लागू

16 जुलाई 2026 विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और चांदी के प्रमुख वैश्विक उत्पादकों में से एक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेडने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 23 अरब लीटर पानी रीसाइकल किया। इसके साथ कंपनी की वार्षिक रीसाइक्लिंग  दर बढ़कर 49 प्रतिशत हो गई है। वहींकंपनी ने कुल जल उपयोग में भी कमी आई है। इसके अलावा हिंदुस्तान जिंक ने अपनी 3.32 गुना वाटर पॉजिटिव स्थिति भी बनाए रखी हैजो जल उपयोग दक्षता बढ़ाने और ताजे पानी पर निर्भरता कम करने के उसके प्रयासों को दर्शाती है।

यह सुधार कंपनी की उस लंबी अवधि की रणनीति की वजह से आया हैजिसके तहत वह एडवांस्ड वॉटर रिकवरी टेक्नोलॉजीजीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम जिसमें एफ्लुएंट ट्रीटमेंट और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं और ट्रीटेड वॉटर के अधिक उपयोग के माध्यम से अपने कामकाज में पानी की बचत को शामिल कर रही है। इससे शुद्ध जल की खपत कम हुई है और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हुआ है।

इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि,  भविष्य का खनन केवल उत्पादन से नहींबल्कि प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग से तय होगा। भारत के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। हिंदुस्तान जिंक में हम अपनी सभी वर्तमान और भविष्य की परियोजनाओं में जल प्रबंधन को प्राथमिकता दे रहे हैंताकि विकास और शुद्ध जल पर निर्भरता को अलग किया जा सके। हमारा उद्देश्य संचालन में उत्कृष्टता के साथसाथ समुदायोंपर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण करना है।

हिंदुस्तान जिंक अपने विभिन्न संयंत्रों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टमएफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांटरिवर्स ऑस्मोसिस यूनिटमल्टीइफेक्ट इवैपोरेटर और मैकेनिकल वेपर रिकम्प्रेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर पानी के रीसाइकल को बढ़ावा दे रही है। कंपनी ने फिल्टर्ड टेलिंग्स तकनीक का भी विस्तार किया हैजिससे टेलिंग्स से 80 प्रतिशत से अधिक पानी को पुनः प्राप्त किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्थान के राजपुरादरीबा में दूसरे फिल्टर्ड टेलिंग्स प्लांट की शुरुआत से रीसाइकल क्षमता और मजबूत हुई है।

उदयपुर में राजस्थान सरकार के साथ पब्लिकप्राइवेट पार्टनरशिप के तहत विकसित कंपनी का 60 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी शहर के अपशिष्ट जल को औद्योगिक उपयोग योग्य पानी में बदल रहा है। इससे कंपनी की जल आवश्यकताओं की पूर्ति के साथसाथ शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन को भी मजबूती मिल रही है।

संचालन क्षेत्रों के अलावा हिंदुस्तान जिंक आसपास के समुदायों में भी जल सुरक्षा बढ़ाने के लिए लगातार कार्यरत है। पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने जलसंकट वाले क्षेत्रों में 280 से अधिक जल संरक्षण कार्य किए हैं। इनमें वर्षा जल संचयनतालाबों का पुनर्जीवनचेक डैम निर्माण और भूजल पुनर्भरण जैसी पहल शामिल हैं। इन प्रयासों से समुदायों के लिए 6.23 करोड़ क्यूबिक मीटर जल भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ हैजिससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा और उपलब्धता को बढ़ावा मिला है।

हिंदुस्तान जिंक की ये पहलें उसके ईएसजी लक्ष्यों के साथसाथ संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य6, स्वच्छ जल और स्वच्छता को भी समर्थन देती हैं। वेदांता समूह के सतत और समुदायकेंद्रित विकास के विजन के अनुरूप कंपनी पर्यावरण और समाज दोनों के लिए सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित कर रही

ग्रामीण राजस्थान से वैश्विक करियर तक कौशल प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हिंदुस्तान जिंक

‘जिंक कौशल’ ने अब तक 10 हजार से अधिक युवाओं को दिया रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर

45 प्रतिशत महिला भागीदारी, 8,000 से अधिक युवाओं को प्रतिष्ठित संस्थानों में रोजगार

राजस्थान और उत्तराखंड में 26 करोड़ की कौशल विकास पहल से हजारों परिवारों की आजीविका मजबूत

 

उदयपुर, 15 जुलाई 2026। उदयपुर के पास स्थित छोटे से गांव भामनिया खेत की रहने वाली दीपिका की सफलता की कहानी मेहनत, अवसर और बदलाव का उदाहरण है। सीमित संसाधनों और कम अवसरों के बीच दीपिका ने हिंदुस्तान जिंक के ‘जिंक कौशल’ कार्यक्रम के तहत फूड एंड बेवरेज सर्विसेज का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और आज वे स्पेन की मरेला क्रूजेस में कार्यरत हैं। इस अवसर ने उन्हें न केवल रोजगार दिया बल्कि बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास भी दिया।

दीपिका की कहानी अकेली नहीं है। यह उन हजारों युवाओं की कहानी है जिनके जीवन में हिंदुस्तान जिंक के प्रमुख कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रम ‘जिंक कौशल’ ने सकारात्मक बदलाव लाया है। वर्ष 2019 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक राजस्थान और उत्तराखंड के 10 हजार से अधिक ग्रामीण और जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 26 करोड़ के निवेश से संचालित इस पहल में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है और अब तक प्रशिक्षित युवाओं में 45 प्रतिशत महिलाएं हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में कार्यक्रम के तहत 2,600 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 420 युवाओं को नाबार्ड, जेके सीमेंट, यस फाउंडेशन और बजाज फिनसर्व जैसे संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। इस वर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि विशेष रूप से दिव्यांग युवाओं के लिए संचालित बैच रही, जिसमें मूक-बधिर प्रशिक्षुओं को 100 प्रतिशत रोजगार मिला। इन युवाओं को ताज फतेह प्रकाश, रेडिसन ब्लू और द फर्न रेजीडेंसी जैसे प्रतिष्ठित होटल समूहों में नियुक्ति मिली।

83 प्रतिशत प्लेसमेंट दर और प्रशिक्षण के बाद औसतन 16 प्रतिशत वेतन वृद्धि के साथ ‘जिंक कौशल’ केवल रोजगार उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहा है। कार्यक्रम के पूर्व प्रशिक्षु आज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, फॉक्सकॉन, होंडा, मरेला क्रूजेस और जीएमआर ग्रुप जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत हैं।

उदयपुर के वासिफ की कहानी भी प्रेरणादायक है। जन्म से मूक-बधिर वासिफ ने ‘जिंक कौशल’ के हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़कर अपने करियर की शुरुआत रामाडा होटल से की। आज वे ताज अरावली में गेस्ट सर्विस एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, वे अब अन्य श्रवण बाधित युवाओं का मार्गदर्शन भी करते हैं और उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

‘जिंक कौशल’ का दायरा केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। स्मार्ट पुलिसिंग पहल के तहत उदयपुर पुलिस विभाग के सहयोग से कार्यक्रम युवाओं को प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है। यह समुदाय के प्रति जिम्मेदारी और प्रभावी साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

अंबुजा फाउंडेशन और टाटा स्ट्राइव के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम राजस्थान के देबारी, दरीबा, जावर, चित्तौड़गढ़, आगूचा और कायड़ स्थित कौशल केंद्रों के माध्यम से चलाया जा रहा है। इससे पहले उत्तराखंड के पंतनगर में भी इसका संचालन किया गया। युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन में उत्कृष्ट योगदान के लिए इस कार्यक्रम को राजस्थान सरकार द्वारा चार जिला स्तरीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं।

‘जिंक कौशल’ हिंदुस्तान जिंक की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत शिक्षा, रोजगार और समान अवसरों के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाया जा रहा है। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर दीपिका और वासिफ जैसी सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि जब युवाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपना भविष्य बदलते हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हिंदुस्तान जिंक राजस्थान में पोटाश ब्लॉक के लिए सफल बोलीदाता घोषित, भारत की उर्वरक सुरक्षा होगी मजबूत

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सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद पोटाश और हैलाइट ब्लॉक के लिए सफल बोलीदाता घोषित।

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के झंडावाली-सतीपुरा ब्लॉक में स्थित है यह खदान।

इस कदम से भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र में हिंदुस्तान जिंक की स्थिति और मजबूत होगी।

उदयपुर, 13 अप्रैल’26।  विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच चांदी उत्पादकों में से एक कंपनी हिन्दुस्तान जिं़क को सभी वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, राजस्थान में संयुक्त पोटाश और हेलाइट खनिज ब्लॉक के लिए आधिकारिक तौर पर सफल बोलीदाता घोषित किया गया है। पिछले साल की शुरुआत में, कंपनी को केंद्र सरकार द्वारा आयोजित प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से पसंदीदा बोलीदाता घोषित किया गया था। अब सभी सरकारी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद इसे औपचारिक रूप से कंपनी को सौंप दिया गया है।

यह पोटाश ब्लॉक राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के झंडावाली-सतीपुरा सीएल ब्लॉक में स्थित है, जो 1,800 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, और इसे भारत सरकार की ई-नीलामी प्रक्रिया के ट्रेंच 5 के तहत आवंटित किया गया था। हाल ही में कंपनी ने आंध्र प्रदेश में टंगस्टन ब्लॉक और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में रेयर अर्थ एलीमेंटस  ब्लॉक के लिए भी सफलता हासिल की है।

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के सीईओ और पूर्णकालिक निदेशक, अरुण मिश्रा ने कहा कि पोटाश ब्लॉक के लिए सफल बोलीदाता बनना हमारी कार्यक्षमता और देश के लिए महत्वपूर्ण खनिज संसाधन जुटाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत संसाधन सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए है, यह उपलब्धि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में हमारी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करती है। हम अपनी खनन विशेषज्ञता का उपयोग कर इस संपत्ति का पूरा लाभ उठाएंगे और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे।

पोटाश उर्वरक उद्योग के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है। यह एनपीके उर्वरकों के उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है, जो भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं। वर्तमान में, भारत अपनी पोटाश की जरूरतों के लिए पूरी तरह से कनाडा, बेलारूस, जॉर्डन से आयात पर निर्भर है। इससे आयात पर निर्भरता कम होने की संभावना है, और साथ ही सस्ते उर्वरकों तक बेहतर पहुँच के जरिए कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक मजबूती भी बढ़ेगी।

अपनी दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप, हिंदुस्तान जिंक का लक्ष्य उच्च गुणवत्ता वाली खनिज संपत्तियों का एक मजबूत पोर्टफोलियो तैयार करना है, जिनमें विकास की जबरदस्त क्षमता हो। अन्वेषण, परियोजना विकास और सस्टेनेबल खनन प्रक्रियाओं में अपनी सिद्ध विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए, कंपनी इन संपत्तियों से मूल्य सृजित करने के लिए सक्षम है, और साथ ही भारत की संसाधन सुरक्षा में भी अपना योगदान दे रही है।

हिंदुस्तान जिंक द्वारा राजस्थान और उत्तराखंड में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में 1,100 से अधिक ग्रामीण लाभान्वित

हिंदुस्तान जिंक द्वारा सीएसआर के तहत स्वास्थ्य सेवा पहल के अंतर्गत ममता एचआइएमसी के संयुक्त प्रयास से राजस्थान और उत्तराखंड में संचालित इकाइयों के आसपास के क्षेत्र आगुचा, चंदेरिया, जावर, दरिबा और पंतनगर में स्वास्थ्य शिविरों का सफल आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से कुल 1,101 लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गईं, जिनमें 561 महिलाएं और 540 पुरुष शामिल थे।
लाभार्थियों की सुविधा और अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए डोर-टू-डोर परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले सकें। इन शिविरों में गायनेकोलॉजिस्ट, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ और जनरल फिजीशियन की अनुभवी टीम द्वारा लाभार्थियों को व्यक्तिगत एवं समग्र परामर्श प्रदान किया। साथ ही, हीमोग्लोबिन जांच, रक्तचाप की जांच और रैंडम ब्लड शुगर स्क्रीनिंग जैसी आवश्यक जांच सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। जरूरतमंदों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया।
यह पहल ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए एक सशक्त मॉडल के रूप में उभरी है। इस पहल से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में आने वाली कमियों को दूर कर जरूरतमंद लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में सहयोग मिला। हिन्दुस्तान जिं़क की सीएसआ पहल के अतंर्गत स्वास्थ्य परियोजना से प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक ग्रामीण लाभान्वित हो रहे है।

हिंदुस्तान जिंक और टाटा स्टील ने इकोजेन के साथ लो-कार्बन जिंक समाधान को बढ़ाने के लिए की पार्टनरशिप

यह सहयोग स्टील और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन में क्लाइमेट के अनुसार मेटल सोर्सिंग को मजबूत करता है
इकोजेन पारंपरिक जिंक की तुलना में 75 प्रतिशत कम कार्बन इंटेंसिटी देता है, जिससे वैल्यू-चेन एमिशन कम होता है

उदयपुर, 23 मार्च। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक और टॉप पांच सिल्वर उत्पादक में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने टाटा स्टील के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और मजबूत किया है ताकि इंटीग्रेशन को सस्टेनेबल स्टील मैन्युफैक्चरिंग में लो-कार्बन जिंक सॉल्यूशन इकोजेन, को बढ़ाया जा सके।
यह सहयोग दोनों कंपनियों की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वे जलवायु संबंधी विचारों को अपनी मुख्य औद्योगिक प्रक्रियाओं और खरीद रणनीतियों में शामिल करना चाहती हैं। एशिया का पहला कम कार्बन वाला जिंक इकोजेन नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके उत्पादित किया जाता है। इसका सत्यापित कार्बन फुटप्रिंट प्रति टन जिंक पर 1 टन कार्बन उत्सर्जन के समान से भी कम है, जो वैश्विक उद्योग औसत से लगभग 75 प्रतिशत कम है। कच्चे माल के चरण में ही उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर इकोजेन आगे की डाउनस्ट्रीम उद्योगों को अपनी वैल्यू-चेन उत्सर्जन को सार्थक रूप से कम करने और अपने डीकार्बोनाइजेशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाता है।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, इकोजेन वैश्विक विनिर्माण की बदलती जरूरतों का समर्थन सस्टेनेबल समाधान के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। टाटा स्टील के साथ हमारी साझेदारी कम कार्बन वाले जिंक को अपनाने के पैमाने को बढ़ाने और भारत के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में हरित आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
जंग से बचाने और उसकी सेवा-अवधि को बढ़ाने के लिए स्टील को गैल्वेनाइज करने में जिंक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि बुनियादी ढांचा, ऑटोमोटिव, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में यह आवश्यक है। चूंकि जिंक की कोटिंग गैल्वेनाइज्ड स्टील के अंतर्निहित कार्बन फुटप्रिंट में योगदान करती है, इसलिए कम कार्बन वाले जिंक का उपयोग करने से आगे की डाउनस्ट्रीम में मापने योग्य लाभ प्राप्त होते हैं। पारंपरिक जिंक की तुलना में, इकोजेन को अपनाने से प्रति टन गैल्वेनाइज्ड स्टील पर लगभग 400 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन को रोकने में मदद मिल सकती है। यह ग्राहकों को स्कोप 3 उत्सर्जन को कम करने का मार्ग प्रदान करता है, साथ ही उनकी समग्र सस्टेनेबल प्रदर्शन को भी मजबूत करता है।
इस सहयोग पर टाटा स्टील के चीफ प्रोक्योरमेंट ऑफिसर, रंजन सिन्हा ने टाटा स्टील साहिबाबाद प्लांट में इकोजेन की डिलीवरी के लिए बधाई देते हुए कहा कि, हिंदुस्तान जिंक से यह सहयोग हमारे आपूर्तिकर्ता इको-सिस्टम के बीच सस्टनेबल प्रथाओं और हरित प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धताओं को रेखांकित करता है।
हिंदुस्तान जिंक दो दशकों से भी अधिक समय से टाटा स्टील का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है। इकोजेन पहल के तहत इस विस्तारित जुड़ाव ने इस सहयोग में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाया है, जिसमें दशकों की परिचालन उत्कृष्टता को डीकार्बोनाइजेशन, सस्टेनेबल तरिकों और जिम्मेदार सोर्सिंग पर सक्रिय फोकस के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे दोनों कंपनियाँ एक अधिक मजबूत स्टील मूल्य श्रृंखला में सबसे आगे खड़ी हैं।
इस सहयोग के माध्यम से, हिंदुस्तान जिंक और टाटा स्टील का उद्देश्य स्कोप 3 उत्सर्जन में कमी से लेकर जलवायु-अनुकूल खरीद ढांचों तक, व्यापक स्थिरता और जलवायु प्रतिबद्धताओं का समर्थन करना है, साथ ही भारत के कम-कार्बन, लचीले औद्योगिक विकास की ओर संक्रमण को आगे बढ़ाना है। यह साझेदारी इस बात को पुष्ट करती है कि कैसे रणनीतिक धातु नवाचार और दीर्घकालिक सहयोग, स्टील और धातु इको-सिस्टम में बड़े पैमाने पर जलवायु प्रभाव डाल सकते हैं

वेदांता की हिंदुस्तान जिंक और केयर्न ऑयल एंड गैस ने 1 लाख करोड़ के निवेश से राजस्थान के विकास को दी गति

पिछले एक दशक में राष्ट्रीय और राज्य के खजाने में लगभग 3 लाख करोड़ का योगदान, नए निवेश विकास के अगले चरण को आगे बढ़ाएंगे

राजस्थान में सबसे बड़े औद्योगिक रोजगार देने वाली कंपनी में से एक, जो विभिन्न उद्योगों में हजारों लोगों की आजीविका में सहायक

पिछले एक दशक में हिंदुस्तान जिंक द्वारा सामुदायिक विकास की पहलों में लगभग 2,000 करोड़ का निवेश किया

राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य पर वेदांता समूह ने 1 लाख करोड़ के निवेश के साथ राज्य के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। यह निवेश धातुओं, तेल और गैस, तथा ऊर्जा क्षेत्रों में पहले से ही किए गए 1.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश के अतिरिक्त है। अपने प्रमुख व्यवसायो हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और केयर्न ऑयल एंड गैस के माध्यम से, यह समूह राजस्थान के आर्थिक विकास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले एक दशक में राष्ट्रीय और राज्य के खजाने में लगभग 3 लाख करोड़ का योगदान दिया है, साथ ही राजस्थान को औद्योगिक विस्तार के लिए प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरने में भी सहयोग किया है। वेदांता का योगदान संसाधन विकास और ऊर्जा सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में है, जिससे राजस्थान भारत के विकास के एक प्रमुख स्थान के रूप में स्थापित हुआ है। हिंदुस्तान जिंक राजस्थान की कुल खनन रॉयल्टी में लगभग एक-तिहाई का योगदान देता है, जबकि बाड़मेर-सांचोर बेसिन में केयर्न के परिचालन ने इस क्षेत्र को भारत की सबसे रणनीतिक ऑनशोर  ऊर्जा संपत्तियों में से एक के रूप में स्थापित किया है। केयर्न के निवेशों ने बाड़मेर में महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन हुआ हैं, जिसके परिणामस्वरूप जिले की जीडीपी में 650 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। ये सभी व्यवसाय मिलकर राजस्थान को धातुओं के लिए एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र और तेल तथा गैस उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र में परिवर्तित करने में सफल हुए हैं। वर्ष 2002 से हिंदुस्तान जिंक ने परिष्कृत धातु के उत्पादन को बढ़ाकर सालाना दस लाख टन से अधिक कर दिया है। इसी अवधि में चांदी का उत्पादन लगभग बीस गुना बढ़ गया है, जिससे भारत चांदी का शुद्ध उत्पादक बन गया है। आज यह कंपनी 40 से अधिक देशों को चांदी निर्यात करती है, जिससे राजस्थान वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती से अपना स्थान बना चुका है। केयर्न का प्रमुख बाड़मेर-सांचोर बेसिन लगातार उत्पादन जारी रखे हुए है। वित्त वर्ष 2025 में इसका उत्पादन 84,276 बीओईपीडी (प्रति दिन तेल के समतुल्य बैरल) तक पहुँच गया, और इसका संचयी उत्पादन 781एमएमबीओई रहा, जिससे भारत की घरेलू ऊर्जा क्षमताओं को और अधिक बल मिला है। वेदांता के ऑपरेशन्स ने पूरे राज्य में एक मजबूत और सबको साथ लेकर चलने वाला आर्थिक इकोसिस्टम बनाया है। कुल मिलाकर, ग्रुप ने अब तक 1 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान किये है, साथ ही अपने सप्लायर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज के नेटवर्क के जरिए हजारों लोगों की आजीविका को भी मजबूत बनाया है। यह नेटवर्क जिंक सिटी, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, अजमेर और बाड़मेर जिलों में संचालित है। इन जिलों में दुनिया की कुछ सबसे बड़ी संपत्तियाँ मौजूद हैं, जिनमें दुनिया का सबसे बड़ा अंडरग्राउंड जिंक माइनिंग ऑपरेशन, रामपुरा आगुचा, दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल स्मेल्टिंग सेंटर चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स, और बाड़मेर जिले में भारत का सबसे बड़ा ऑनशोर तेल उत्पादन क्षेत्र, मंगला शामिल हैं। हिंदुस्तान जिंक हाल ही में 2025 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स में शामिल होने वाली पहली भारतीय कंपनी भी बन गई है।

इस अवसर पर वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि “जब प्राकृतिक संसाधनों की बात आती है, तो राजस्थान भारत के लिए सबसे खास जगह रखता है। इसकी जमीन के नीचे जो कुछ भी मौजूद है, धातुएँ, खनिज, तेल और गैस ,उसमें न सिर्फ इस राज्य को, बल्कि पूरे देश को ऊर्जा देने की क्षमता है। हिंदुस्तान जिंक और केयर्न के जरिए, हमने राजस्थान में पहले ही 1.5 लाख करोड़ से अधिक  का निवेश किया है, जिससे जिंक, चाँदी और तेल व गैस के क्षेत्र में विश्व-स्तरीय क्षमताएँ विकसित हुई हैं, और साथ ही रोजगार व आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है। लेकिन मेरा मानना है कि यह तो अभी बस शुरुआत है। सही सोच और रफ्तार के साथ, राजस्थान प्राकृतिक संसाधनों और मैन्युफैक्चरिंग का एक ग्लोबल हब बन सकता है। हमारे निवेश का अगला चरण उत्पादन को दोगुना करने, बड़े औद्योगिक इकोसिस्टम बनाने और सैकड़ों डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज को यहाँ विकसित होने में मदद करने पर केंद्रित होगा। अगर हम इस क्षमता का पूरी तरह से इस्तेमाल कर पाए, तो राजस्थान न सिर्फ भारत की संसाधन सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि लाखों रोजगार भी प्रदान करेगा और भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा में एक निर्णायक शक्ति बनकर उभरेगा।”

भविष्य की ओर देखते हुए, वेदांता अलग-अलग सेक्टर में औद्योगिक विस्तार के अगले चरण को आगे बढ़ा रहा है। जिंक पार्क का विकास जो अपनी तरह का पहला डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम है, लगभग 200 उद्योगों को जगह देगा, जिससे एमएसएमई और वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक मजबूत आधार बनेगा। साथ ही, केर्न लंबे समय तक उत्पादन बनाए रखने और अतिरिक्त भंडार को निकालने के लिए एनहांस्ड ऑयल रिकवरी जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना जारी रखे हुए है।

उद्योग संचानल के साथ ही वेदांता राजस्थान में सामाजिक बदलाव लाने में भी अग्रणी है। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के जरिए, ग्रुप ने महिलाओं और बच्चों के पोषण और शिक्षा को मजबूत करने के लिए 25,000 से अधिक नंद घर बनाए हैं। हिंदुस्तान जिंक ने पिछले एक दशक में कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम में लगभग 2,000 करोड़ का निवेश किया है। वेदांता गर्ल्स पीजी कॉलेज, रिंगस जैसे संस्थान, जिन्होंने 50,000 से अधिक छात्राओं को शिक्षा दी है। गुरुकुल पब्लिक स्कूल व वेदांता स्कूल ने मिलकर 25,000 से अधिक बच्चों को सशक्त बनाया है। कंपनी अपने मुख्य कामों में भी समावेश को बढ़ावा दे रही है। अब महिलाएं भूमिगत खदानों में काम कर रही हैं और जरूरी कामों की कमान संभाल रही हैं, जबकि केर्न की सामाजिक पहल स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में लगभग 20 करोड़ लोग लाभान्वित हुए है।

राजस्थान का नीतिगत स्थिरता, तेजी से मंजूरी और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर लगातार ध्यान देना बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास को संभव बना रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मजबूत ढांचों और सक्रिय शासन के साथ, यह राज्य तेजी से प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

राजस्थान दिवस के इस अवसर पर वेदांता ग्रुप सस्टेनेबल संचालन को आगे बढ़ाने, स्थानीय इकोसिस्टम को मजबूत करने और समावेशी विकास को संभव बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है। साथ ही, यह राज्य के साथ मिलकर उसके औद्योगिक और सामाजिक-आर्थिक बदलाव के अगले चरण में सहयोग करने के लिए कार्य कर रहा है।

 

हिंदुस्तान जिंक की पहल से देबारी क्षेत्र के युवाओं को मिला सुनहरा अवसर

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पूर्व में संचालित निःशुल्क कोचिंग से सरकारी सेवा में चयनित विद्यार्थियों का किया सम्मान

हिंदुस्तान जिंक, वेदांता ग्रुप के तत्वावधान में देबारी क्षेत्र के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। इसके तहत विभिन्न सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराने की योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में युवाओं ने भागीदारी दिखाई।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि कुलदीप शर्मा, एडीजे उदयपुर, गिरीश भटनागर, संयुक्त निदेशक, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग, नरेश अग्रवाल, फाइनेंस हेड जिंक स्मेल्टर देबारी, रुचिका नरेश चावला, सी एस आर हेड जिंक स्मेल्टर देबारी तथा डॉ एस एस सुराणा, संस्थापक डॉ अनुष्का विधि महाविद्यालय, श्रीमती कमला सुराणा, अध्यक्षा डॉ अनुष्का मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी, अपर्णा व्यास, सीएसआर टीम, आरएएस, एसजेइ सूरज परमार द्वारा किया गया।

इस अवसर पर अतिथियों ने विद्यार्थियों को बैग एवं नोट्स वितरित किए ।

मुख्य अतिथि कुलदीप शर्मा ने अपने संबोधन में विद्यार्थी जीवन में अथक परिश्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि इस निःशुल्क कोचिंग के द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी दृढ़ संकल्प से जीवन में ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

कार्यक्रम में गिरीश भटनागर ने विद्यार्थियों को अपनी समाहार शक्ति का सही उपयोग करने की प्रेरणा दी और कहा कि यही सफलता की कुंजी है। वहीं फाइनेंस हेड जिंक स्मेल्टर देबारी, नरेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं दी एवं इस निःशुल्क कोचिंग का लाभ लेते हुए जीवन मे सफल होने का मार्गदर्शन प्रदान किया ।

सूरज परमार द्वारा अपने संसाधनहीन बचपन का उदाहरण देते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और मजबूत संकल्प व्यक्ति जीवन मे ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान हिन्दुस्तान जिंक द्वारा पूर्व में संचालित निःशुल्क कोचिंग के सरकारी सेवा में चयनित विद्यार्थियों गणेश लाल मेघवाल, भँवर लाल गायरी, मांगीलाल गमेती का सम्मान किया गया ।

कार्यक्रम के दौरान अनुष्का ग्रुप के निदेशक राजीव सुराणा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि यह 100 दिवसीय योजना देबारी क्षेत्र के युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अनुष्का ग्रुप पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ विद्यार्थियों को आगामी तीन माह तक गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के दौरान देबारी परिधि क्षेत्र के 110 से अधिक युवा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

चेन्नई में आयोजित आईआरसीई 2026 में हिंदुस्तान जिंक ने किया मजबूत रेल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में जिंक की भूमिका का प्रदर्शन

 

विश्व का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड जिंक और शीर्ष पाँच सिल्वर उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने 12 से 14 मार्च तक चेन्नई में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल रेल कोच एक्सपो 2026 में दर्शाया कि जिंक बेस्ड सॉल्यूशन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को किस प्रकार मजबूत कर सकते हैं और लाइफसाइकल मजबूती को बढ़ा सकते हैं।
भारत का रेलवे नेटवर्क एक लाख किलोमीटर से अधिक ट्रैक पर फैला है और हर साल अरबों यात्रियों द्वारा सफर किया जाता है। इस बड़े सिस्टम का अधिकततर हिस्सा स्टील के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करता है,जिसमें ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन मास्ट और पुल से लेकर सिग्नल पोस्ट और स्टेशन स्ट्रक्चर तक शामिल हैं। हालांकि, भारत की लंबी कोस्टलाइन, अधिक नमी, मानसून की स्थिति और इंडस्ट्रियल प्रदूषण स्टील को जंग लगने का खास तौर पर नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे स्ट्रक्चरल मजबूती पर असर पड़ सकता है और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ सकता है।
जिंक गैल्वनाइजेशन, जिसमें स्टील पर एक प्रोटेक्टिव जिंक लेयर की कोटिंग की जाती है इस चुनौती से निपटने के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल सॉल्यूशन के तौर पर सामने आया है। जिंक कोटिंग एक फिजिकल बैरियर और एक सैक्रिफिशियल लेयर दोनों का काम करती है, जिससे स्टील स्ट्रक्चर की उम्र काफी बढ़ जाती है और मेंटेनेंस की जरूरतें कम हो जाती हैं।
जापान और यूरोप के हाई.स्पीड सिस्टम सहित दुनिया भर के बड़े रेल नेटवर्क मेंए जिंक़ कोटेड स्टील का उपयोग जरूरी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, मजबूती और भरोसे को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं होल टाइम डायरेक्टर अरुण मिश्रा ने कहा इस बारे में कहा कि, भारत में रेलवे नेटवर्क अपने इतिहास में सबसे अधिक बदलाव लाने वाले नेटवर्क में से एक है। जैसे.जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा और मॉडर्न हुआ है मजबूती और लाइफसाइकल भी बहुत जरूरी हो गए हैं। जिंक.बेस्ड प्रोटेक्शन स्टील इंफ्रास्ट्रक्चर को जंग लगने से बचाने में मदद करता है ताकि सेफ्टी बनी रहे, नुकसान को रोका जा सके और रेल एसेट्स के लिए लंबे समय तक स्टेबिलिटी बनी रहे, जो भारत के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के पिलर्स बनाने के विजन के अनुरूप है।
आईआरसीई 2026 में हिंदुस्तान जिंक के पवेलियन में ट्रेन जैसा इंस्टॉलेशन है, जो विजिटर्स को एक ऐसा इमर्सिव अनुभव प्रदान करता है जिसमें दर्शाया गया है कि जिंक किस प्रकार से मॉडर्न रेलवे सिस्टम की रीढ़ को मजबूत करता है। पवेलियन गैल्वेनाइज्ड स्टीलए जंग से बचाने वाले सिस्टम और जरूरी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपोनेंट्स में जिंक के उपयोग को दिखाता है। खास आकर्षणों में से एक सेंसर.एक्टिवेटेड इंटरैक्टिव फ्लोर है, जहाँ आने वाले दर्शक तय जोन पर छोटी डिजिटल कहानियाँ सुन सकते हैं। ये कहानियाँ बताती हैं कि कैसे जिंक बेस्ड प्रोटेक्शन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में स्ट्रक्चरल सपोर्ट और इलेक्ट्रिफिकेशन सिस्टम से लेकर सेफ्टी बैरियर और स्टेशन स्ट्रक्चर तक मजबूती बढ़ाता है, जिससे आखिर में मेंटेनेंस की जरूरत कम होती है और ऑपरेशनल रिलायबिलिटी बेहतर होती है।
हिंदुस्तान जिंक के पोर्टफोलियो में लंदन मेटल एक्सचेंज रजिस्टर्ड प्रोडक्ट शामिल हैं, जैसे स्पेशल हाई.ग्रेड जिंक, हाई ग्रेड जिंक, इकोजेन, लोकार्बन ग्रीन जिंक, प्राइम वेस्टर्न जिंक कंटीन्यूअस गैल्वनाइजिंग ग्रेड जिंक, हाईग्रेड जंबो जिंक और डाई कास्टिंग एलॉय, एलॉय 3 और एलॉय 5, साथ ही स्पेशल हाईग्रेड लेड। पूरी तरह से इंटीग्रेटेड माइनटूमेटल उत्पादक कंपनी एक भरोसेमंद सप्लाई चेन और ग्लोबल मार्केट में बिना रुकावट डिलीवरी सुनिश्चित करती है।
40 से अधिक देशों में कस्टमर्स को सर्विस देते हुए हिंदुस्तान जिंक कस्टमर फोकस्ड इनोवेशन को सर्टिफाइड क्वालिटी के साथ जोड़ता है। यह भारत का पहला जिंक प्रोड्यूसर है जिसे यूरोप में एक्सपोर्ट के लिए एनवायर्नमेंटल प्रोडक्ट डिक्लेरेशन, वेरिफिकेशन बीआईएस सर्टिफिकेशन और आरईएसीएच कम्प्लायंस मिला है।
मटीरियल और करोजन प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी में लगातार इनोवेशन के माध्यम से हिंदुस्तान जिंक का उद्धेश्य अधिक सस्टेनेबल और भविष्य के लिए तैयार रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास मे सहायता करना है जो भारत के बढ़ते रेल नेटवर्क की लंबे समय तक चलने वाली मजबूती में योगदान दे।

हिंदुस्तान जिंक द्वारा चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में सभी शिफ्ट में कार्य के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाली ‘तेजस्विनी’ ऑल-वुमन शिफ्ट शुरू

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उदयपुर, । भारत की मेटल्स और माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक एवं शीर्ष पांच सिल्वर उत्पादक में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में सभी शिफ्ट में कार्य के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाली ‘तेजस्विनी’ ऑल-वुमन शिफ्ट की शुरूआत की है। यह विश्व की सबसे बड़ी और सबसे अधिक टेक्नोलॉजी वाली एडवांस्ड जिंक स्मेल्टिंग सुविधाओं में से एक है। यह पहल कंपनी की एक इनक्लूसिव वर्कफोर्स बनाने और हेवी इंडस्ट्री में मुख्य ऑपरेशनल भूमिकाओं में महिलाओं के लिए लीडरशिप के अवसर देने में महत्वपूर्ण कदम है।
चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में काम करने से महिला इंजीनियर और ऑपरेटर बड़े पैमाने पर मेटलर्जिकल ऑपरेशन के केंद्र में होती हैं, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी ट्रांजिशन एप्लीकेशन के लिए जिंक उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं। तेजस्विनी पहल के जरिए, हिंदुस्तान जिंक महिलाओं को ग्लोबल मेटल इंडस्ट्री में सबसे एडवांस्ड स्मेल्टिंग इकोसिस्टम में आवश्यक प्रोसेस को लीड करने में मदद कर रहा है।
ऐसे समय में जब माइनिंग और मेटल सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से सीमित रही है, हिंदुस्तान जिंक महिलाओं को जरूरी ऑपरेशनल कार्यो का प्रतिनिधित्व करने में महत्वपूर्ण कदम उठाकर इंडस्ट्री के नियमों को पुनःपरिभाषित कर रहा है। अब महिलाओं की संख्या इसके वर्कफोर्स का 26.3 प्रतिशत है, जो इस सेक्टर में सबसे अधिक है, कंपनी पारंपरिक रूप से पुरुषों के दबदबे वाली इंडस्ट्री में जेंडर डायवर्सिटी के लिए नए बेंचमार्क सेट कर रही है।

30 महिला प्रोफेशनल्स की समर्पित टीम इन यूनिट्स में कोर प्रोसेस ऑपरेशन, मेंटेनेंस और सेफ्टी कार्यो का जिम्मा उठाएगी जो कोर मैन्युफैक्चरिंग भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस पहल से लीचिंग और प्यूरिफिकेशन वन और टू और चंदेरिया स्मेल्टिंग काॅम्प्लेक्स में पूरी तरह से महिलाओं के नेतृत्व वाली ऑपरेशनल शिफ्ट की शुरुआत हुई है। यह कंपनी के हाइड्रोमेटलर्जी ऑपरेशन का एक जरूरी हिस्सा है जो सीधे जिंक प्रोडक्शन थु्रपुट और प्रोडक्ट क्वालिटी पर असर डालता है। इस पहल को हाइड्रो की प्लांट मैनेजर एलएण्डपी वन तान्या सिंह लीड कर रही हैं, जो हिंदुस्तान जिंक के सेफ्टी-फर्स्ट कल्चर को बनाए रखते हुए ऑपरेशनल एक्सीलेंस को मजबूत करने में टीम को गाइड करेंगी।
पिछले कुछ सालों में, कंपनी ने अंडरग्राउंड माइनिंग और स्मेल्टिंग से लेकर डिजिटल कंट्रोल रूम और लीडरशिप रोल तक, माइनिंग और मेटल ऑपरेशन में महिलाओं के लिए मौके बढ़ाए हैं। ये कोशिश वेदांता ग्रुप की अपनी वर्कफोर्स में 35 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी के अनुसार हैं, जिसमें हिंदुस्तान जिंक इस सेक्टर में इस विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं होल-टाइम डायरेक्टर, अरुण मिश्रा ने कहा कि, “ हमारा मानना है कि माइनिंग का भविष्य अलग-अलग टैलेंट, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सबको साथ लेकर चलने के कल्चर से आगे बढ़ेगा। तेजस्विनी का लॉन्च इंडस्ट्रियल परफॉर्मेंस को पावर देने वाले कोर ऑपरेशनल रोल में महिलाओं के लिए अच्छे अवसर देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारे स्मेल्टिंग ऑपरेशन में महिलाओं को जरूरी प्रोसेस का नेतृत्व करने में निर्पूण बनाकर, हम अपनी टैलेंट पाइपलाइन को मजबूत कर रहे हैं, साथ ही यह लीडरशिप और काबिलियत पारंपरिक इंडस्ट्री की सीमाओं से आगे हैं। जैसे-जैसे हम अपने लंबे समय के ग्रोथ के लक्ष्यों को पूरा कर रहे हैं, इस तरह के प्रयास अधिक प्रोग्रेसिव और भविष्य के लिए तैयार माइनिंग सेक्टर को बनाने में मदद करेंगी।”
जैसे-जैसे भारत इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ में अपने लक्ष्यों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, हिंदुस्तान जिंक यह दिखाना जारी रखे हुए है कि कैसे सबको साथ लेकर चलने वाले वर्कप्लेस ऑपरेशनल एक्सीलेंस और इनोवेशन को बढ़ावा दे सकते हैं। तेजस्विनी जैसी पहल और लोगों पर केंद्रित पॉलिसी में अपने लगातार निवेश के जरिए, कंपनी मेटल और माइनिंग इंडस्ट्री के लिए नए बेंचमार्क सेट कर रही है। कंपनी ने भारत की पहली अंडरग्राउंड ऑल-वुमन माइन रेस्क्यू टीम शुरू की है, महिला इंजीनियर्स को नाइट शिफ्ट, टेली-रिमोट माइनिंग ऑपरेशन और स्मेल्टिंग कंट्रोल रूम लीड करने में मदद की है, और वी सेफ ऐप इंटीग्रेशन, सीसीटीवी सर्विलांस, बायोमेट्रिक एक्सेस सिस्टम, महिला सुरक्षाकर्मी और नाइट ट्रांसपोर्टेशन सुविधाओं जैसी पहलों के जरिए वर्कप्लेस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कर्मचारी कॉन्फिडेंस, सेफ्टी और लीडरशिप के साथ काम कर सकें और साथ ही अधिक अलग-अलग तरह का और भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स तैयार हो सके।

हिंदुस्तान जिंक ने राजस्थान में स्थापित होने वाले जिंक पार्क में जिंक एलॉय बनाने के लिए सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ की पार्टनरशिप

उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक प्रोड्यूसर और शीर्ष पांच सिल्वर उत्पादक में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने राजस्थान में स्थापित होने वाले जिं़क पार्क में जिं़क एलाॅय बनाने के लिएउ सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये। सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग कंपनी है और विश्व में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। यह राजस्थान में जिंक पार्क के लिए दूसरी बड़ी पार्टनरशिप है, इससे पहले हिंदुस्तान जिंक ने त्रिपुरा ग्रुप के साथ एमओयू किया है, यह जिंक-बेस्ड इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन के लिए भारत के पहले इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम के तौर पर पार्क की स्थिति को और मजबूत करता है।
एमओयू के तहत, सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज जिंक पार्क में एक मैन्युफैक्चरिंग सुविधा बनाएगी जो हाई-क्वालिटी, कम-एमिशन वाले जिंक एलॉय बनाने पर फोकस करेगी। ये एलॉय ऑटोमोटिव, इंफ्रास्ट्रक्चर, डाई-कास्टिंग और कंज्यूमर गुड्स जैसी इंडस्ट्रीज के लिए बहुत जरूरी हैं। यह प्रोजेक्ट जिंक की डाउनस्ट्रीम वैल्यू एडिशन को संभव करेगा, साथ ही सस्टेनेबल मेटल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देगा और इंडस्ट्रियल मटीरियल में भारत की आत्मनिर्भरता में सहायक होगा।
जिंक पार्क की घोषणा सबसे पहले राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री, श्री भजन लाल शर्मा ने राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के दौरान की थी, जिसमें वेदांता ग्रुप के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने इसे भारत के डाउनस्ट्रीम मेटल्स इकोसिस्टम के लिए एक बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर बताया था। हिंदुस्तान जिंक और रीको द्वारा मिलकर विकसित किए गए इस पार्क का मकसद जिंक मैन्युफैक्चरिंग के लिए पूरी तरह से इंटीग्रेटेड, रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाला हब बनाना है। हिंदुस्तान जिंक के चंदेरिया, दरीबा और देबारी ऑपरेशन्स के पास होने से मजबूत लॉजिस्टिक्स और भरोसेमंद रॉ मटेरियल सप्लाई सुनिश्चित होती है।
जिंक पार्क का विकास इंडस्ट्रियल ग्रोथ और इनोवेशन के लिए राज्य के लगातार कमिटमेंट को दिखाता है। इस पार्क में एमएसएमई और गैल्वनाइजिंग, डाई-कास्टिंग, जिंक ऑक्साइड प्रोडक्शन और इससे जुड़े कामों में लगे बड़े एंटरप्राइज को स्थापित करने की योजना है। पक्का रॉ मटेरियल लिंकेज, लंबे समय के सप्लाई एग्रीमेंट, कमर्शियल इंसेंटिव और स्ट्रक्चर्ड परफॉर्मेंस फ्रेमवर्क देकर, जिंक पार्क राज्य में वैल्यू क्रिएशन, रोजगार पैदा करने और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक कैटलिस्ट बनने के लिए तैयार है। यह पहल न केवल राजस्थान के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मजबूत करती है, बल्कि मेटल-बेस्ड इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी के लिए ग्लोबल हब बनने के भारत के विजन से भी जुड़ी है।
जिंक एलॉय अपनी मजबूती, करोजन रेजिस्टेंस और रिसाइकिल होने की वजह से प्रचलित हो रहे हैं। इनका उपयोग ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर अप्लायंसेज, हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर एप्लीकेशन के लिए डाई-कास्टिंग कंपोनेंट्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिससे ये मॉडर्न इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन के लिए आवश्यक मेटल जाते हैं। जिंक पार्क की यह फैसिलिटी मेटल रिकवरी और रीयूज के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हुए बढ़ती घरेलू और इंटरनेशनल डिमांड को पूरा करेगी।

इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, “जिंक पार्क जिंक-बेस्ड एप्लिकेशन के जरिए इंडस्ट्रियल ग्रोथ, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने का एक स्ट्रेटेजिक विजन है। हमें इस सफर में सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज का पार्टनर के तौर पर शामिल कर प्रसन्नता है। नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग में उनकी लीडरशिप और एलॉय प्रोडक्शन में उनकी मजबूत क्षमताएँ भविष्य के लिए तैयार, इनोवेशन-ड्रिवन जिंक इकोसिस्टम बनाने में अहम भूमिका निभाएँगी।”

सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज की बड़ी ऑटोमोटिव कंपनियों और दूसरे मुख्य इंडस्ट्रियल प्लेयर्स के साथ पुरानी पार्टनरशिप है। इसका ऑपरेशन लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और मजबूत सस्टेनेबिलिटी की सोच से चलता है, जिसमें रीसायकल मेटल प्रोडक्शन से प्राइमरी मेटल की तुलना में 95 प्रतिशत तक कम एमिशन होता है। कंपनी सर्कुलर मेटल प्रोसेसिंग और एलॉय मैन्युफैक्चरिंग में गहरी एक्सपर्टीज रखती है, खासकर ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए, जो दुनिया भर में नॉन-फेरस एलॉय के सबसे बड़े कंज्यूमर्स में से एक है।
इस पार्टनरशिप के जरिए, हिंदुस्तान जिंक भारत के अपनी तरह के पहले डाउनस्ट्रीम जिंक इंडस्ट्रियल क्लस्टर को बनाने में तेजी ला रहा है, जिससे इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक वैल्यू को बढ़ावा मिल रहा है। यह घरेलू मूल्य संवर्धन को मजबूत करने, सर्कुलर अर्थव्यवस्था प्रथाओं को बढ़ावा देने और राजस्थान के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने में जिंक पार्क की भूमिका को और मजबूत करता है, साथ ही भारत के सस्टेनेबल मेटल और उन्नत विनिर्माण के लिए वैश्विक केंद्र बनने के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।