उप चुनाव में हुई हार पचा नहीं पा रहे हैं जिलाध्यक्ष भट्ट, पूर्व सरपंच देवड़ा के निश्कासन को दिग्गजों ने ठहराया गलत

उदयपुर। हाल ही में उदयपुर में पंचायतों के उपचुनाव में भाजपा की की हार बाद मटून पंचायत के पूर्व सरपंच ओनार सिंह देवड़ा को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगा कर निष्काषित करना भाजपा में अन्त्र्काहल का कारण बनता जारहा है। जिलाध्यक्ष द्वारा आनन् फानन में ओनार सिंह देवड़ा को निष्काशन का विरोध अंदरूनी तौर पर उठने लगा है।भाजपा के कई नेता इसको तुगलकी फरमान बता निष्काशन को गलत बता रहे है। जबकि उनके हिसाब से भाजपा के हार की वजह ओनार सिंह नहीं और दिग्गजों की रणनीति रही जिसके चलते भाजपा की हार हुई .

पंचायत राज के उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद शहर जिलाध्यक्ष दिनेस्भ भट्ट द्वारा लिए गए फैसले की पार्टी के ही अन्दरूनी गु्रपों में निंदा हो रही है। वहीं निष्काषित औनार सिंह देवड़ा को भी समर्थन मिलता जा रहा है। स्वर्गीय भैरूसिंह जाग्रती मंच के समन्वयक मांगीलाल जोशी जो खुद पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके है, उनका भी कहना है कि किसी के भी निश्कासन का अधिकारी जिलाध्यक्ष के पास हो ही नहीं सकता। वह सिर्फ हाईकमान तक षिकायत पत्र भेज सकता है। दूसरी और जहां पार्टी के इतने दिग्गज लग गए और पार्टी को जीता कर नहीं ला पाए इससे लगता है कि सभी जनाधार विहीन नेता हो गए है।

गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न पंचायतराज के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी के मटून पंचायत के पूर्व सरपंच औनारसिंह देवड़ा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में सम्मिलित होने एवं वार्ड 29 की अधिकृत पार्टी प्रत्याशी को पराजित करने में अपनी अहम भूमिका निर्वहन करने पर भारतीय जनता पार्टी शहर जिला अध्यक्ष दिनेश भट्ट ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। जिलाध्यक्ष दिनेशभट्ट द्वारा आरोप लगाया गया था कि ओनार सिंह देवड़ा ने खुले आम पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को हराने का कार्य किया। कांग्रेस के एजेंट के तौर पर कार्य करते हुए विधायक द्वारा सतत अपनी विधानसभा में विकास के कार्य कराने उपरांत संघर्ष समिति बनाकर लोगो को सरकार के विरोध हेतु तैयार किया।
लेकिन भाजपा पार्टी में अब इस निष्काशन को लेकर विरोध के स्वर उभर रहे है। भाजपाई नेताओं का कहना है कि उप चुनावों में हुई हार पार्टी के दिग्गज पचा नहीं पा रहे है और इस स्थिति में पार्टी के जिम्मेदार पदों पर बैठे कर्ताधर्ता हार का ठीकरा जबरदस्ती बेकसूरों पर फोड़ते दिखाई दे रहे हैं। देश में जहां कहीं भी चुनाव जीते तो मोदी के जयकारे हो रहे है और हारने पर पार्टी में जनसंघ के समय से पीढी दर पीढ़ी जुडे कार्यकर्ताओं का निश्कासन कहां तक उचित है। भाजपाइयों का मानना है कि हार पर मंथन किए बिना आनन – फानन में शहर जिलाध्यक्ष ने बेकसूर का निश्कासन कर दिया। हार का कारण वह है ही नहीं जो जिलाध्यक्ष पार्टी हाईकमान और शहरवासियों को बताना चाह रहे है। असल में हार की मुख्यवजह और है। क्षेत्र के भाजपाईयों के अलावा मतदाताओं की माने तो झामेष्वर मण्डल के अध्यक्ष अमृतलाल मेनारिया का नेतृत्व रहा है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाताओं वाला धड़ा श्री मेनारिया से काफी नाराज है और उस नाराजगी की वजह पर भाजपा ओबीसी प्रकोश्ठ गिर्वा के पूर्वध्यक्ष षिवलाल डांगी ने कहा कि टिकिट देने से पहले पार्टी ने एक बार भी क्षेत्र के वरिश्ठों से चर्चा नहीं कि साथ ही झामेष्वर मण्डलध्यक्ष की गलती का खामियाजा पूरी पार्टी को भुगतना पड़ा है। अब हार में किसी न किसी को सजा देनी थी तो वह औनार सिंह देवड़ा को मिल गई। श्री देवड़ा तो एक बार भी खरबड़िया में नहीं आए थे और यहीं से पार्टी को सबसे ज्यादा हार मिली है। यहां 152 वोटों से कांगे्रस की प्रत्याषी आगे रही थी। औनार सिंह देवड़ा जो कि दस वर्षों तक इस क्षेत्र में सरपंच रह चुके हैं उनसे बात की तो उन्होंने पूरे मामले का पटाक्षेप करते हुए साफ किया कि झामेष्वर मण्डलध्यक्ष की वजह से ही पार्टी की हार हुई है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह जनसंघ के समय से ही पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता है। सरकार की ओर से झील प्राधिकरण में करीब 5000 बीघा जमीन पेटा कास्ट में सरकार एक्वायर्ड करने जा रही है। वहां के किसान कहां जाएंगे। किसानों को उन जमीनों पर कुछ भी करने नहीं दिया जाएगा। ऐसे में हक की लड़ाई तो लड़नी ही पड़ेगी और आगे भी लड़ते रहेंगे। निष्काशन के बाद जिस तरह से पार्टी में विरोध उभरा है इसका खामियाजा पार्टी को ही भुगतना पड़ रहा है जिसके दूरगामी परिणाम भी कुछ अच्छे नहीं दिख रहे है।

रिश्वतखोरी मानो अधिकार हो गया है – एक ही दिन में तीन मामले .

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पोस्ट न्यूज़ . रिश्वत लेना मानो आजकल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का हक बन गया हो हर छोटे मोटे काम के लिए रिश्वत और कमीशन तो इसे मांगते है जैसे सरकार ने इन्हें इसके लिए अधिकार दे रखे हों . शुक्रवार को राजस्थान में हनुमानगढ़, डूंगरपुर बांसवाड़ा में रिश्वत के तीन मामले सामने आये .

बांसवाड़ा : सब्जी के सप्लायर से रिश्वत लेते प्राचार्य गिरफ्तार
बांसवाड़ा | गढ़ीउपखंड के खोड़न गांव में भीमराव अंबेडकर बालिका आवासीय विद्यालय के प्राचार्य हीराचंद नायक को एसीबी ने 10 हजार रिश्वत लेते पकड़ा। प्राचार्य यह राशि छात्रावास में सब्जी सप्लायर को धमकाकर ऑनबिल बनवाकर पास करने के बाद ले रहा था।
डूंगरपुर में ऑडिट के बदले मांगी रिश्वत, 2 हजार में से 1500 लौटाए
डूंगरपुर | सर्वशिक्षा अभियान में ऑडिट कराने के बदले में रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। शुक्रवार को डीईओ कार्यालय में शिक्षक नेताओं ने रिश्वत लेने का विरोध करते हुए यह राशि लौटाने की मांग की। लेखाधिकारी अशोक जैन का रिश्वत लेने के बाद रुपए गिनते हुए एक फोटो वायरल हुआ था। डीईओ ने जांच के आदेश दिए हैं।

रावतसर (हनुमानगढ़र) | एसीबीबीकानेर ने शुक्रवार को एएसआई जगदीश सिंह को 60 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। यह राशि जमीन पर कब्जा दिलाकर बिजाई करवाने के एवज में ली जा रही थी। एएसपी रजनीश पूनिया ने बताया कि सरदारपुरा खालसा निवासी दिलीप मेघवाल ने एसीबी में 5 दिन पहले जमीन विवाद को लेकर शिकायत की थी। उसने एसडीएम के यहां इस्तगासा पेश किया था तो एसडीएम ने जांच रावतसर पुलिस को सौंप दी।
विपक्षियों ने भी उसके खिलाफ थाने में शिकायत की थी। दोनों मामलों की जांच एएसआई जगदीश सिंह कर रहे थे। दिलीप ने बताया कि एएसआई उसके खिलाफ कार्रवाई करने कब्जा दिलाने के नाम पर एक लाख रुपए रिश्वत मांग रहा था।

घर में बेटी की शादी की तैय्यारियाँ चल रही थी, प्राचार्य पिता आवासीय स्कूल में पढने वाली बेटियों के नाम रिश्वत डकार रहे थे .

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पोस्ट न्यूज़ . इधर तो घर में आने वाले दो माह में बेटी की शादी होनी है जिसकी तय्यरियाँ चल रही है दूसरी तरफ आवासीय स्कूल में प्राचार्य के पद पर विराजमान पिता स्कूल में रोज़ आने वाली सब्जियों के बिल के नाम पर रिश्वत डकार रहे थे जिनको एसीबी ने रेंज हाथों गिरफ्तार किया . मामला है बांसवाडा गढ़ीउ पखंड के खोड़न गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर बालिका आवासीय स्कूल का जहाँ प्राचार्य  हीराचंद नायक को शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दल ने 10 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा। प्राचार्य यह राशि छात्रावास में सब्जी सप्लायर को धमकाकर ऑनबिल बनवाकर पास करने के बाद ले रहा था।

जानकारी के मुताबिक़ इस प्राचार्य की बेटी की शादी फरवरी में होनी प्रस्तावित है। घर में शादी की तैयारी चल रही है, इस घटनाक्रम से परिजन भी सन्न रह गए। एसीबी ब्यूरो के डीएसपी गुलाब  सिंह ने बताया कि इस बारे में 2016-17 में हॉस्टल में सब्जी सप्लाई का ठेका लेने वाले मेतवाला गांव के अंबालाल भोई ने 13 दिसंबर को शिकायत की थी। इस पर ब्यूरो के दल ने 20 दिसंबर को सत्यापन करवाया, तो मामला सही पाया गया। इसके बाद शुक्रवार को अंबालाल को रंग लगे नोट देकर खोड़न के आवासीय स्कूल भेजा गया। वहां प्राचार्य हीराचंद नायक के अपने कार्यालय में 10 हजार रुपए लेने के संकेत पाकर पीछे से ब्यूरो की टीम ने आकर उसे धर लिया। बाद में गिरफ्तारी कर आगे कार्रवाई की गई।

आवासीय विद्यालय में बालिकाओं के लिए सुबह-शाम भोजन बनाने के लिए सब्जी की सप्लाई नियमित होती है। इसके लिए टेंडर लेने वाले सप्लायर पर दबाव बनाकर भेजी गई सब्जी की कीमत से ज्यादा का बिल बनवाकर प्राचार्य खुद पास कर रहे थे। फिर वह राशि सप्लायर के बैंक खाते में जमा होती थी। प्राचार्य नायक सप्लायर से मूल बिल का दस फीसदी कमीशन कहकर रिश्वत लेता था। ताज्जुब यह कि हॉस्टल में वार्डन वालम यादव नाम मात्र का ही है। पूछताछ से पता चला कि उसे लाई गई सब्जी, उसके बिल के बारे में जानकारी से दूर रखा जाता था और कमीशन समय पर नहीं मिलने पर सब्जियां तुलवाने और कम लावाना कहलवाकर महज सप्लायर पर दबाव बनाने के काम में लिया जाता रहा है।

फरियादी अंबालाल भोई की माने, तो प्राचार्य नायक के लालच के आगे वह परेशान हो गया था। भोई ने बताया कि रोज 50 किलो सब्जी की सप्लाई करता हूं। महीने का 80 से 90 हजार का बिल होता है, लेकिन उसमें भी हर महीने प्रिंसिपल साहब की बंधी देनी जरूरी थी, भले ही कमाई हो या हो। जब फल मंगवाए जाते थे, तो बाजार की आवक के मुताबिक सीजन का फल अमरुद भी लाता, तो वे दबाव बनाकर बिल महंगे सेब का बनवा रहे थे। बच्चियों के नाम पर इस कदर लूट तो क्या करता। शिकायत करना मजबूरी हो गई।

भीषण हादसा – राजस्थान के सवाई माधोपुर के पास बनास नदी में बस गिराने से 32 लोगों की हुई मौत

पोस्ट न्यूज़ . सवाई माधोपुर से 20 किलोमीटर दूर बनास नदी के पुल पर एक मिनी बस अनियंत्रित हो कर बनास नदी में जा गिरी जिससे 32 लोगों की मौत हो गयी और कई घायल हो गए . हादसा बस ड्राइवर की गलती की वजह से हुआ वह पुल पर अन्य वाहन को ओवर ट्रक कर रहा था और ओवार्त्रेक करते समय बस उसके कंट्रोल के बाहर हो गयी और नदी में जा गीति . प्रत्यक्ष दर्शियों की माने तो बस का मुख्य ड्राइवर अपने 16 वर्षीय नाबालिग कंडक्टर से बस चलवा रहा था.

जानकारी के मुताबिक़ हादसा सुबह 6:15 बजे हुआ। सवाई माधोपुर के पास दुब्बी इलाके में बनास नदी पर बने पुल पर हुआ। बस पुल से नदी में गिर गई। जिस जगह पर हादसा हुआ, वह सवाई माधोपुर से करीब 20 किमी दूर है .

दुब्बी के पुलिस अफसर सुभाष मिश्रा ने बताया कि करीब 32 बॉडी नदी से निकाली जा चुकी है। मरने वालों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार के हैं। अभी तक जिन लोगों की पहचान हुई उनमें 7 लोग सवाई माधोपुर के हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्राइवर ने अपने नाबालिग कंडक्टर को बस चलाने को दी थी। पुल पर बस कंट्रोल से बाहर हो गई और वह रेलिंग तोड़ते हुए नदी में जा गिरी। कंडक्टर की उम्र 16 साल बताई जा रही है। आई विटनेसेस के मुताबिक, यह मिनीबस बस यात्रियों से खचाखच भरी थी और काफी स्पीड से जा रही थी। बताया जा रहा है कि बस में करीब 40 लोग सवार थे यह सवाई माधोपुर से लालसोट की ओर जा रही थी।

सवाई माधोपुर के सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने बताया कि हादसा ड्राइवर की वजह से हुआ। वह पुल पर ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विक्टिम्स ज्यादातर मध्यप्रदेश के हैं।

 

पुरे दम ख़म एक्शन के साथ बॉक्स ऑफिस पर टाइगर की दहाड़ सुनाई दे रही है : रिव्यू “टाइगर जिंदा है”

उदयपुर। काफी आरसे के बाद “Tiger” Salman Khan अपने पुरे पावर पैक्ड एक्शन के साथ धमाके दार वापसी की है। उदयपुर जैसे शहर में Tiger Zinda Hai के 40 से अधिक शो हाउस फूल चल रहे है। आईनोक्स, पीवीआर और अशोका में फिल्म शहर के दर्शकों को काफी पसंद आरही है। जिस रूप में दर्शक अपने चेहते “भाईजान” सलमान खान को देखना चाहते है सलमान ने ठीक उसी दबंद अंदाज़ में अपना रोल खासा प्ले किया है। आईएसआई जैसे आतकवादी संगठन से अकेले भिड़ते हुए सलाम खान की फिल्म टाइगर ज़िंदा है ( Tiger Zinda Hai) देशभक्ति का खासा तडका लगा हुआ है जो दर्शकों को तालिया और सीटियाँ बजाने पर मजबूर कर देता है।
टाइगर ज़िंदा है फिल्म अपने पहले भाग एक था टाइगर की सिक्वल है जिसमे टाइगर अपने अंदाज़ में आतंकवादी संगठन आईएसआई (ISI) से 40 बंधक नर्सों की जान बचंता है और इस ओपरेशन में उनका साथ देती है पाकिस्तानी जासूस बनी केटरीना कैफ जोया। एक्शन के साथ सलमान और केटरीना का रोमांस भी फिल्म में देखने को मिलेगा। और इस जोड़ी को दर्शक खासा पसंद भी करते है। फिल्म का संगीत पहले ही अपने सारे रिकार्ड तोड़ चुका है।

फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है :
अविनाश सिंह राठौर ( salman khan ) अब करीब आठ साल के एक सुंदर से बेटे जूनियर टाइगर का पापा बन चुका है। अपनी खूबसूरत वाइफ जोया ( कटरीना कैफ) और बेटे के साथ टाइगर ऑस्ट्रिया की बर्फीली पहाड़ियों के बीच शांति से अपनी लाइफ गुजार रहा है, लेकिन एक पल भी टाइगर न तो अपने वतन और न ही रॉ को भूल पाया है।

यही वजह है कि टाइगर अपनी मौजूदगी का संकेत नई दिल्ली मै बैठे अपने बॉस शिवाय सर (गिरीश कर्नाड) को भेजता रहता है। इसी बीच सीरिया के कई कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन आईएस का मुखिया उस्मान (साजिद) एक के बाद एक कई शहरों पर अपना कब्जा करने और इन्हें बर्बाद करने में लगा है, जो अमेरिका को सबक सिखाने के लिए और यहां दहशत फैलाने व बेगुनाह नागरिकों की हत्याएं करने में लगा है। अमेरिकी जर्नलिस्ट को मौत के घाट उतारने के बाद भी उस्मान की कैद में कई अमेरिकी हैं। ऐसे में अमेरिका उस्मान के बेस कैम्प को तबाह करने और उस्मान सहित दूसरे आंतकियों को मारने के लिए सात दिन बाद अटैक करने का प्लान बनाता है। उस्मान के इसी अड्डे में भारत और पाकिस्तान की करीब 40 से ज्यादा नर्स भी हैं जो उस्मान और उसके साथी बगदादी के कब्जे में हैं। अब इन भारतीय नर्सों को भारत वापस लाने का मिशन रॉ प्रमुख शिनॉय टाइगर को सौंपते हैं। टाइगर अपनी टीम में अपने विश्वासपात्र साथियों के साथ जाता है तो वही कभी पाक खुफिया एजेंसी की खास एजेंट रही जोया खान भी आईएस और उस्मान की गिरफ्त से पाकिस्तानी नर्सों को बचाने के मिशन पर सीरिया पहुंचती है। टाइगर के साथ रॉ की टीम और जोया के साथ आईएसआई के दो लोग भी यहां इन सबकी मदद करने में लगा है । करीब 25 सालों से ऑयल रिफाइनरी के लिए मजदूरों का लाने का काम करता है, लेकिन असल मे वह भी रॉ का एजेंट है। जोया और टाइगर के इस मिशन का अंजाम क्या होता है यह देखने के लिए आपको टाइगर से मिलना होगा।
फिल्म में एक बहुत ही दिलचस्प बात है कहानी को सुनाने का ढंग. अली अब्बास ने इसका बेहतरीन डायरेक्शन किया है. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी बहुत उम्दा है. वो चाहे रेगिस्तान के सीक्वेंस हों या पहाड़ों के सीक्वेंस या फिर पीछा करने वाले सीक्वेंस. कभी सलमान घोड़े पर दिखाई देते हैं. कभी अपने ही अंदाज में दुश्मनों का पीछा करते दिखाई देते हैं. बड़े ही अच्छे अंदाज में इंटरनेशनल लेवल की ये कहानी है जिसका फिल्मांकन बहुत बढ़िया है. सलमान की एक्टिंग काबिलेतारीफ है. हालांकि ट्यूबलाइट में सलमान को ज्यादा पसंद नहीं किया गया था. लेकिन उसके बाद एक तरीके से कह सकते हैं कि सलमान ने बेहतरीन वापसी की है. उम्दा प्रदर्शन. जानदार एक्टिंग, इमोशन और एक्शन. उनके साथ कटरीना कैफ सब्जी में धनिया की तरह नहीं हैं. उनका भी बेहतरीन काम है. सज्जाद, अंगद बेदी, परेश और गिरीश कर्नाड ने भी बहुत बढ़िया रोल किया है. एक्टिंग के हिसाब से फिल्म काफी अच्छी बन पड़ी है. इसके गाने भी काफी बढ़िया हैं. फिल्म के गाने बहुत अच्छे से फिल्माए हैं अली अब्बास ने. ‘दिल दिया गल्ला’ और ‘स्वैग से करेंगे स्वागत’ लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बहुत बढ़िया है. स्पाई थ्रिलर में एक अच्छी साई फाई फिल्म बनाई गई है.
फिल्म में सलमान की एंट्री पर बहुत सारी तालियाँ बजती हैं. फिल्म के संवाद भी बहुत दिलचस्प हैं. कई लिहाज से ये फिल्म देखी जा सकती है.
फिल्म का बजट

जहां एक तरफ एक था टाइगर का बजट करीब 70 करोड़ के आसपास था वहीं फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 320 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी. टाइगर जिंदा है का बजट करीब 140-150 करोड़ में बनाया गया है. सलमान ने इसके लिए कोई फीस नहीं ली है. वो शायद प्रॉफिट शेयर कर रहे हैं. इसे 4 हजार से ज्यादा स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है. कोई बड़ी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं है. इसा लिहाज से पहले ही दिन फिल्म 40 करोड़ का कलेक्शन कर सकती है. वीकेंड में 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई हो सकती है. ये अब तक सलमान की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म भी बन सकती है. फिल्म का बिजनेस देखना दिलचस्प होगा.

A Marvel in Hot-dip Galvanization Bergen County Bridge- Fairlawn/Patterson, NJ, 2009

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Breaking through a lush grove of trees to connect the cities of Fairlawn and Patterson, New Jersey, the Bergen County bridge is one of several in the state to utilize hot-dip galvanized steel for corrosion protection.  A natural surface appearance was desired by both communities to help the gently arcing bridge complement and not supersede the surrounding vegetation.

 This goal was achieved by incorporating a new truss design to replace the previous view-obscuring plate design, so the public could continue to enjoy the scenic view of the creek flowing through the trees.  In keeping with this natural emphasis, the soft, grey appearance of the zinc coating blends seamlessly into the surrounding environment.

 Not only will the galvanized coating provide a pleasing aesthetic, it will also keep the appearance of the bridge unmarred by the unsightly effects of rust and corrosion.  The barrier and cathodic protection developed during the galvanizing process will keep the bridge both structurally sound and free of dripping or streaking rust stains.  All of the trusses, floor beams, flooring, diaphragms, supports, rail, and plates were hot-dip galvanized, ensuring the bridge will remain an attractive, functional addition to the two communities for generations to come. 

Pavan Kaushik

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

’अपनों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित रहिए’-पवन कौषिक

उदयपुर । हिन्दुस्तान ज़िंक की इकाई जिंक स्मेल्टर देबारी में सुरक्षा के प्रति जागरूकता के उद्देष्य से जिंक एवं संविदा कर्मचारियों के लिए ’’बिईंग सेफ’’ वर्कषाॅप का आयोजन किया गया। आयोजित बिईंग सेफ वर्कषाॅप में लगभग 200 से अधिक जिंक एवं संविदा कर्मचारियों ने सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संकल्प लिया। हिन्दुस्तान जिं़क के हेड कार्पोरेट कम्यूनिकेषन एवं बिईंग सेफ के फाउण्डर पवन कौषिक इन कर्मचारियों से इन्टरेक्षन के लिये जिंक स्मेल्टर देबारी में मिले।

वर्कषाॅप में पवन कौषिक ने कर्मचारियों से बातचीत के दौरान कहा कि आपके परिवार के लिए सुरक्षित रहना बहुत ज़रूरी है। सुरक्षा नियमों के प्रति लापरवाही जीवन के लिए खतरा हो सकता है। जीवन अमूल्य होता है सुरक्षा नियमों को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। परिवार एवं बच्चों के सपने आपके साथ जुड़े हुए हैं और उनके सपनों को साकार करने के लिए आपका सुरक्षित होना आवष्यक है। सुरक्षा के प्रति जागरूकता से खुद एवं परिवार सुरक्षित होगा। विषेष रूप से बच्चों को सडक सुरक्षा के लिये ट्राफिक नियमों की पालना, हेलमेट पहनना, बिना लाईसेंस वाहन नहीं चलाना, सुनिष्चित करना होगा। इस अवसर पर कर्मचारियों को सुरक्षा से संबंधित एक फिल्म भी दिखाई एवं प्रजेन्टेषन के माध्यम से सुरक्षित रहने की गहराई को समझाया साथ ही विचार-विमर्ष भी किया।

’’बिईंग सेफ’’ के फाउण्डर पवन कौषिक ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का उद्धेष्य सडक, घर या कार्यस्थल एवं हर स्थान पर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। सुरक्षा नियम सुरक्षा के लिए बनाये जाते हैं सभी को सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए जिससे परिजनों और बच्चों के स्वयं के मन में सुरक्षा के लिये प्रतिबद्धता उत्पन्न हो।

अवैध बंदूकबाजों को बाहर निकालने वाला झांसेबाज नटवर लाल अभी भी खाकी की पंहुच से दूर .

लोकेश आचार्य के सोशल मिडिया पर बड़े नेताओं के साथ लगाये फोटो .

पोस्ट न्यूज़। राजस्थान में जम्मू कष्मीर और नागालैण्ड से अवैध हथियार बनाकर सफेदपोश बंदूकबाजों के काले खेल के बारे में तो आपने सुना ही होगा। एटीएस और पुलिस की पड़ताल में इन दोनों ही राज्यों से करीब 1000 ऐसे बंदूकबाजों को चिन्हित किया गया था, जो अवैध हथियार रखकर राज्य भर में खौफ के कारोबार को बढ़ाने में लगे हुए थे। जैसे – जैसे वीवीआईपी की सूचि में शुमार सफेदपोश बंदूकबाजों के नाम सामने आने लगे तो जेल न जाने और अपने बहुप्रतिश्ठित हो चुके नाम की साख बचाने के लिए इन बंदूकबाजों ने साम दाम दण्ड भेद का सहारा लिया और जा पंहुचे एक ऐसे शख्स के पास जिसे “माण्डवली किंग” कहा जाए तो भी कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। जीहां सरकार में बैठे बड़े ओहदेदारों के साथ फोटो खींचवाकर और उनके नाम पर राजस्थान के कई विभागों में सेटलमेंट करने का दम्ब भरने वाले उस तथाकथित शख्स का नाम है, लोकेश आचार्य , जो इन दिनों खाकी की नजर में फरार घोषित है। यह वही लोकेष आचार्य हैं जिसने जयपुर सचिवालय के अधिकृत दूरभाष नम्बर से फोन करके उदयपुर के कई रसूखदारों को धमकाया था और यही वजह रही कि बीते दिनों सूरजपोल थाना पुलिस की गिरफ्त में भी आ गया था। उस समय तो खाकी ने उसे जेल भेज दिया। उस पर होटल नेचुरल के मालिक दिलीप शर्मा से पैसे लेेने का आरोप लगा था। जैसे ही इस बात का पर्दाफाश हुआ लोकेश आचार्य से सताए और भी सफेदपोशों के नाम सामने आने लगे। उस समय लोकेश आचार्य खुद को डूंगरपुर के चैरासी विधायक सुशील कटारा का निजी सचिव बताता था और उसके पास से उदयपुर प्रभारी सेवक कटारा के साईन किए हुए सरकारी पत्र भी मिले थे। हम यह सब आपको इसलिए बता रहे हैं कि इतनी कारगुजारियां करने के बाद भी इस नटवर लाल की रीति और नीति नहीं बदली और सींखचों से बाहर आते ही यह फिर राजधानी जयपुर चला गया और सचिवालय में उठ – बैठ शुरू कर दी। इस दरमियान उसको सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने जयपुर किसान मोर्चा का युवा उपाध्यक्ष भी बना लिया। फिर क्या था लोकेश आचार्य की बंद हुई गपलेबाजी की दुकान तो दौड़ने लगी। इस बीच खाकी और एटीएस से भागते छिपते दो ओझा बंधू किसी भी सूरत में अपने नाम को बचाने में लगे हुए थे और उसके लिए वह मुहंमांगी कीमत देने को भी तैयार हो गए। इन स्वजाति बंधुओं के नाम भंवरलाल और श्यामलाल ओझा के रूप में सामने आए थे। जिन्हें खाकी ने दबोच तो लिया, पर दोनो ही 2017 की दिवाली बाहर की देखना चाह रहे थे। इस बीच ओझा बंधुओं के परिजनों का सम्पर्क बीकानेर के शातिर शक्स सम्पत शारस्वत से हुआ। जो जयपुर में बैठे नटवर लाल लोकेश आचार्य का बहुत नजदीकी था। फिर किया था दोनो ही शातिरों ने मिलकर भंवरलाल ओझा को छुडवाने के नाम पर करीब 32 लाख रूपए परिजनों से उठा लिए। इस बीच यह बात उदयपुर की खाकी को पता चल गई और प्रतापनगर थाना पुलिस ने सम्पत सारस्वत सहित दो जनों को पकड़ लिया। जहां पूछताछ में उनसे 20 लाख रूपए की बरामदगी भी हो गई। लेकिन लोकेश आचार्य फरार होने में सफल रहा, जिसके पास माण्डवली के दौरान हुई डील की पहली किष्त 12 लाख रूपए भी थी। इस बीच भंवरलाल ओझा जिसके लिए माण्डवली की जा रही थी उसकी जमानत भी खारिज हो गई और फरार लोकेश आचार्य को भी अब तक हाईकोर्ट से बेल नहीं मिल पाई है। लेकिन इन सबके बीच प्रतापनगर थाना पुलिस ने इतने दिनों में लोकेश आचार्य की धरपकड़ के लिए क्या – क्या किया यह विचारणीय विषय हैं क्योंकि लोकेश आचार्य का इतने बड़े – बड़े ओहदेदारों से सम्पर्क हैं जो सत्ता में बैठे हुए हैं और शायद यही कारण रहा होगा कि पुलिस भी अब इस केस में ढिलाई बरत रही है, वरना जयपुर ज्यादा दूर भी नहीं है । आपको बता दे कि लोकेष आचार्य ने पूरी तरह से अपने प्रचार का माध्यम सोशल मीडिया को बना रखा था और वह अपनी फेसबुक आईडी पर कई प्रदेश सेवकों और भाजपा के बड़े पदाधिकारियों सहित विधानसभा और सचिवालय के बड़े – बड़े पदों पर बैठे ताकतवर अधिकारियों के साथ अपने फोटो शेयर करता आया है। इसी वजह से अब तक इसे पकड़ा नहीं जा सका।

उदयपुर : भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सरपंच औनारसिंह देवड़ा को पार्टी से निष्कासित किया

उदयपुर. हाल ही में संपन्न पंचायतराज के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी के मटून पंचायत के पूर्व सरपंच औनारसिंह देवड़ा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में सम्मिलित होने एवं वार्ड 29 की अधिकृत पार्टी प्रत्याशी को पराजित करने में अपनी अहम भूमिका निर्वहन करने पर भारतीय जनता पार्टी शहर जिला अध्यक्ष दिनेश भट्ट ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है। भाजपा मीडिया प्रभारी चंचल कुमार अग्रवाल ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि भाजपा के पूर्व सरपंच ने चुनाव में खुले आम पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को हराने का कार्य किया।कांग्रेस के एजेंट के तौर पर कार्य करते हुए  विधायक द्वारा सतत अपनी विधानसभा में विकास के कार्य कराने उपरांत संघर्ष समिति बनाकर लोगो को सरकार के विरोध हेतु तैयार किया।इन सब को देखते हुए गिर्वा के पदाधिकारियों, प्रधान आदि ने पूर्व सरपंच के खिलाफ कार्रवाई करने की जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट से मांग की, जिस पर कार्यवाही करते हुए जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट ने औनारसिंह देवड़ा को भाजपा से निष्कासित कर दिया।

हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए फतहसागर के किनारे हो रहा है निर्माण – यूआईटी सब कुछ जानते हुए नहीं कर रही कार्रवाई।

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उदयपुर। झील के पास निर्माण निषेध हाईकोर्ट के नियमों की सरे आम धज्जियाँ उड़ाते हुए भूमाफिया और रसूखदारों द्वारा फतहसागर के किनारे ही पहाड़ी काट कर निर्माण कार्य किया जारहा है। निकायों को कानूनी दाव पेच में उलझा ये माफिया अपना काम हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए कर रहे है। युआइटी के जिम्मेदार सबकुछ जानते हुए भी रोक नहीं पा रही है। यूआईटी के जिम्मेदार लोग कारवाई से पल्ला झाड़ते हुए नज़र आ रहे है।
फतह सागर के पीछे राजिव गांधी गार्डन के पास हवाला कला मार्ग पर एक पहाड़ी का पाटकर समतल किया जा रहा है। यह क्षेत्र बड़ी पंचायत समिति में आता है और रोजाना रात से तड़के तक यहां पर जेसीबी और अन्य यंत्रों के माध्यम से चट्टानों को तोड़ने का काम किया जा रहा है। मुख्य बात यह है कि जहाँ निर्माण होने जारहा है वह जमीन फतहसागर झील से 100 मीटर की दूरी पर भी नहीं है। ऐसा नहीं है कि जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं होगा। लेकिन वह अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए दिखाई दे रहे हैं। युआइटी के जिम्मेदारों का मानना है कि हवाला कला की इस पहाड़ी को काटा जा रहा है वह पूरी तरह से गलत है, लेकिन युआईटी के खाते में नहीं होने से वह असक्षम है। ये भूमाफिया और रसूखदार यूआईटी और पंचायत को कानूनी दांव पेच में उलझा कर एक तरह से हाईकोर्ट के नियमों की ही खिल्ली उड़ा रहे है। युआईटी के अधिकारी जो एक गरीब का झोपड़ा पल भर में धराशाही कर देते है, इन रसूखदारों की तरफ आँख उठा कर भी नहीं देख पा रहे है।
नगर विकास प्रन्यास के अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली का कहना हिया कि शिकायत आई थी और जब सक्षम अधिकारी काम रूकवाने गए तो कुछ लोग न्यायालय चले गए और कार्रवाई पर स्टे ले आए, यह जमीन नगर विकास प्रन्यास के खाते में दर्ज नहीं हुई है और इस जमीन को लेकर जो भी अतिक्रमण कर रहे हैं या उनके पास पट्टा है कि नहीं इस बात का खुलासा तो न्यायालय करेगा। लेकिन झील क्षेत्र के पास निर्माण करना ही सुप्रीम कोर्ट के आदेषों की अव्हेलना करना है। साथ ही श्रीमाली जी ने यह भी कहा है कि या तो यह जमीन वन विभाग को सौंपी जाए या नगर विकास प्रन्यास के खाते में आए। ताकी षहरवासियों और पर्यटकों के लिए एक और सुन्दर उद्यान का डवलपमेंट किया जा सके। युआईटी सचिव रामनिवास मेहता ने भी जिला कलेक्टर को पत्र भी लिखकर इस निर्माण पर संज्ञान लेने की बात पर जोर दिया है।
युआईटी अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली और तहसीलदार के बयानों को सुनने के बाद तो यह तय हो गया है कि इन दोनों ही जिम्मेदारों को पता है कि झील के पास चल रहा पहाड़ी को चीरने का काम पूरी तरह से अवैध है। लेकिन जमीनखोरों के बाहूबल और कानूनी दावपेच में उलझने के कारण वह पावरलैस ही है। दूसरी तरफ इस पूरे मामले में बड़ी पंचायत के सचिव नरेन्द्र सिंह झाला से खसरा संख्या 1183 से 1185 के बारे में जानकारी ली तो उन्होंने स्पश्ट किया कि यह जमीन आज भी पंचायत के खाते में है, जिसे 2004 में आबादी क्षेत्र में लेने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने तत्कालिन जिला कलेक्टर को दिया था लेकिन कागजों की बात कागजों में ही आई गई हो गई और यह पहाड़ी आबादी का रूप ले ही नहीं पाई। वर्तमान में नाई थाने में रिपोर्ट भी लिखवा चुके है इसके साथ ही युआईटी से लेकर जिला कलेक्टर तक लिखीत में रिपोर्ट दे चुके है। अब कार्रवाई बड़े साहबों के पास ही मौजूद है, क्योंकि अतिक्रमणों पर कार्रवाई करने वाले मजबूत हथोड़ों सहित सारी यंत्र बड़े विभाग के पास ही मिलते हैं ।