उदयपुर वासियों अफवाहों पर ध्यान ना दें

उदयपुर। शहर में पिछले तीन दिनों से बिगडे हालातों के बाद शनिवार को शांति हुए शहर के माहौल के बाद कलेक्टर ने व्हाट्सअप पर एक ऑडियों वायरल कर शहरवासियों से शांति बनाए रखने एवं अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
कलेक्टर ने जारी ऑडियो वायरल में कहा कि- नमस्कार.. मैं जिला कलक्टर निवेदन कर रहा हूं। उदयपुर जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा इंटरनेट पर जो पाबंदी लगाई थी तथा धारा १४४ लागू की गई थी उसे आज हटा लिया गया है। उदयपुर जिले में अब पूर्ण शांति है। सोश्यल मीडिया पर उदयपुर जिले में शांति भंग करने तथा दोनों समुदायों का साम्प्रदायिक सौहार्द  बिगाडने के उद्देश्य से आपत्तिजनक कमेंट एवं तथ्य प्रसारित किया जा रहा है। सोश्यल मीडिया पर १४ दिसम्बर में उदयपुर की एक मस्जिद को नुकसान पहुंचाने की अफवाह फैलाई जा रही है जबकि उदयपुर में किसी भी मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। सभी लोगों से अपील है कि शांति व्यवस्था भंग करने वाले किसी भी अफवाह पर ध्यान ना दें। सोश्यल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों पर आगे कार्रवाई ना करें क्योंकि ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अफवाहों की सूचना तुरंत पुलिस और प्रशासन को दें।
धन्यवाद एवं जय हिन्द…

चार घंटे चला सरकार की सफलता के चार साल का जश्न – कटारिया के भाषण में पंडाल हुआ खाली .

कटारिया के भाषण को सुनने से पहले ही चल पडी ग्रामीण क्षेत्रों से आई भीड
शहरी कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह नहीं देखा गया
उदयपुर। शनिवार को उदयपुर के गांधी ग्राउण्ड में आयोजित सरकार की सफलता के चार साल का जश्न चार घंटे तक चलता रहा। जिलेभर के जनप्रतिनिधियों के एक के बाद एक हुए भाषणों ने जनता को बोर कर दिया। अंत में भाषण देने आए कटारिया के भाषण के दौरान ही भीड धीरे-धीरे छंटने लगी और पीछे लगी काफी कुर्सियां खाली हो गई।
सरकार के जश्न में शामिल होने शहरवासियों की संख्या कम ही रही। ग्रामीण क्षेत्रों से लाई गई भीड ने ही समारोह की शोभा बढाई। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से बसों द्वारा ग्रामीणों को इस जश्न में शामिल करने के लिए लाया गया जो प्रात: १० बजे ही आयोजन स्थल पर पहुंचना प्रारंभ हो गए। कार्यक्रम की शुरूआत निर्धारित समय से एक घंटा देरी से शुरू हुई। मुख्य अतिथि कटारिया ने पहले गांधी ग्राउण्ड में लगी  सुराज प्रदर्शनी एवं अमृत हाट का शुभारंभ व अवलोकन किया। इसके पश्चात ग्राउंड में बनाए गए पांडाल में आयोजित सभा व संबोधन के लिए पहुंचे। दोपहर करीब १ बजे शुरू हुई इस कार्यक्रम में विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों का गुणगान करते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एवं गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का आभार जताया। विधायकों को कटारिया कम समय बोलने के लिए निर्देश देते रहे। इस बात को ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने अपने उदबोधन के दौरान चुटकी लेते हुए कहा कि मेरे पास मेरे विधानसभा क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों की लम्बी फहरिस्त है लेकिन कटारियाजी ने मुझे अपने भाषण और विकास योजनाओं को केवल पांच मिनट में ही बताने को कहा है। ऐसे में मैं आपके सामने सारे कार्यों को नहीं बता रहा हूं लेकिन जनता सब जानती है।
दूसरी ओर कटारिया द्वारा सभी संबोधनकर्ताओं को संक्षिप्त भाषण के निर्देश के बाद भी सलूम्बर विधायक अमृतलाल मीणा १२ मिनट तक निर्बाध रूप से बोलते रहे। जिस पर मंच पर बैठे विधायक आपस में चर्चा करते देखे गए। लंबे हुए कार्यक्रम को देखते हुए धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों से आई जनता भी जाने लगी। अंत में कटारिया के भाषण के दौरान तो पाण्डाल में एकत्रित भी$ड आधी ही रह गई। पांडाल में आखिर में लगी अधिकांश कुर्सियां खाली हो गई।
मंच संचालक एवं आयोजकों के आपसी तालमेल के अभाव में मंच पर लाभार्थियों को दिए जाने वाले विभिन्न योजनाओं के स्वीकृत चैक एवं उपकरण  एक-दूसरे के पास चले गए तथा मंच पर अव्यवस्था छा गई। जिस पर कटारिया ने निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारू करवाया।
इस जश्न को लेकर शहरी कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह नहीं देखा गया। कार्यक्रम के दौरान भाजपा के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मंच के सामने मौजूद रहे लेकिन एक के बाद एक हुए भाषणों के दौरान कई कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी भी पांडाल से निकलकर बाहर मैदान में आपस में बतियात दिखाई दिए।

If Eiffel Tower was Galvanized…

15 months rigorous job by 25 painters – 60,000 KGs of Paint – 1500 brushes – 5000 sanding disks – 1500 set of work clothes and USD 20 million each time – this is what it takes to keep the world’s most sought after Tower standing.

 The Eiffel Tower is built of riveted wrought-iron, a material that only lasts if it is painted periodically. From the date Eiffel Tower was built, in 1889, the tower has been painted 18 times, once every 7 years. Painting the entire Tower takes 15 months to complete and a mammoth 60,000 kilograms of paint is used for the first coat that cost around $20 million each time – Rs. 130 Crore..

 Amazed at the cost and complexity of the work involved in repainting the tower, where the painters must use hooks, ropes, safety nets and cannot begin painting each day until the morning dew has evaporated; a Dutch corrosion expert recently made a hypothetical calculation of cost savings had the Eiffel Tower been built on galvanized steel. If Eiffel Tower had been hot-dip galvanized and then painted, which is known as a duplex system, any damage to the paint coating will not lead to corrosion as the steel would continue to be protected by the Zinc, which underlies the paint.

 Had the steel used to build the Eiffel Tower been galvanized before painting, only 7 maintenance operations would have been required since 1889, compared to the 18 that have taken place.. The first large-scale maintenance of a duplex system normally takes place after about 25 years.

 What does all this mean in terms of cost?

 Based on today’s wage and price levels, the duplex system – would have  further saved at least $10 million in maintenance costs, which is again 50% savings on maintenance.

 Obvious question would be that did hot-dip galvanization exist when the Eiffel Tower was made. The answer is YES.

 About 50 years before the Eiffel Tower was made, in 1836, Sorel in France took out the first of numerous patents for a process of coating steel by dipping it in molten zinc after first cleaning it. He provided the process with its name ‘galvanizing’. 1742 is the first recorded history of galvanizing which dates back to when P.J. Malouin, a French chemist, presented to the Royal Academy of Sciences several experiments involving coating iron with molten zinc.

 Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

Pavan Kaushik

BURJ KHALIFA stands tall with ZINC protection…

At an incredible 828 metres (2,716.5 feet) and more than 160 storeys, Dubai’s Burj Khalifa is the world’s tallest building.

 Engineers, designers, architects and skilled workers from more than 100 countries were involved in the making of the building. The construction took 22 million man-hours, where more than 12,000 dedicated personnel ensured the seamless progress of the building.

 Burj Khalifa’s primary structure is made of reinforced concrete. The  construction used 330,000 m3 of concrete and 55,000 tonnes of galvanized steel rebar. A cathodic protection system is in place under the concrete to neutralize the groundwater and prevent corrosion.Due to the hot and humid outside conditions, an additional protective coating to the structure was required. Thus, the steel pipes used in the inner skeleton of the building were hot-dip galvanized along with the steel construction around the entrance to maximise protection.

 The world’s tallest building is another testimony of the strength of Zinc … We all have Zinc in our lives…

 Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

Pavan Kaushik

राजस्थान में उदयपुर की कोर्ट पर फहरा दिया भगवा झंडा – देश में हुआ ऐसा पहली बार

उदयपुर। राजसमंद में हुए ह्त्या काण्ड के बाद उदयपुर में सोशल मीडिया पर भड़काऊ मेसेज हत्यारे शम्भू लाल के समर्थन में रैली निकालने के आव्हान को देखते पुलिस प्रशासन ने 14 दिसंबर से 16 दिसंबर तक 144 धरा लगा इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी।
लेकिन 14 दिसंबर को कई हिन्दू संगठनों के युवाओं ने दिन भर शहर में प्रदर्शन किया इस दौरान जो सबसे चोंकाने वाली बात प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बिच हुई जंग के बिच कुछ युवा उदयपुर के न्यायालय के मुख्य द्वार स्वर्ण जयंती द्वार पर चढ़ गए और वहां पर भगवा झंडा फहरा दिया। काफी देर तक झंडा फहराकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ उत्पातियों ने छत से पुलिस पर पत्थर फेंके। बाद में पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें निचे उतारा। कोर्ट में कुछ वकीलों का साथ पा कर प्रदर्शन कारियों को छूट मिल गयी और पुलिस पर जम कर पथराव भी किया। पुलिस ने लाठीचार्ज करके हालात काबू करने की कोशिश की लेकिन माहौल और बिगड़ गया। प्रदर्शनकारी कोर्ट के अंदर तक चले गए। इसके बाद कोर्ट परिसर में ही प्रदर्शनकारियों के साथ वकीलों और पुलिस के बीच भी झड़प हुई।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों में 15 मिनट तक पत्थरबाजी हुई, जिसमें 10 पुलिस अफसरों सहित 31 जवान घायल हो गए। इनमें से 4 सिपाही गंभीर रूप से घायल हैं जबकि 3 पुलिस इंस्पेक्टर और एक डिप्टी गोपाल सिंह को भी चोटें अाई हैं।

राजस्थान के सबसे खुबसूरत शहर में धारा 144 के दौरान खूब हुआ उपद्रव – गृहमंत्री के गृह जिले में पुलिस उत्त्पातियों के हाथों पिटी

उदयपुर. राजसमन्द में मुस्लिम श्रमिक अफ्राजुल की ह्त्या के बाद हत्यारे शम्भूलाल के समर्थन में गुरुवार को हिंदूवादी संगठनों के प्रदर्शनकारियों ने जम कर उत्पात मचाया. खूबसूरती के लिए जाना जाने वाली झीलों की नगरी का शहर दहशत नगर में तब्दील हो गया. प्रदर्शनकारियों ने सारी सीमाएं लांघते हुए न्याय के मंदिर न्यायालय के स्वर्ण जयंती द्वार पर भी अपने संगठन का झंडा फहरा दिया. कोर्ट सर्कल पर हुए उपद्रव में उपद्रवियों ने कोर्ट परिसर के अन्दर एडिशनल एसपी सुधीर जोशी से भी घेर पर मारपीट कर दी जिसमे सुधीर जोशी को काफी चोटें आई . उपद्रवियों द्वारा किये गए पथराव में १० अधिकारियों को चोटें आये कई पुलिसकर्मी घायल हुए. दिन भर शहर में दहशत का माहोल रहा प्रदर्शनकारी धारा 144 की धज्जियां उड़ाते हुए दिन भर शहर में घूमते रहे. पुलिस ने भी चेतक सर्कल, टाउनहाल, आवरीमाता, से लाठी चार्ज कर खदेड़ा . पुलिस ने करीब 207 उपद्रवियों को हिरासत में ले रखा है.
14 दिसंबर को यूँ तो पुलिस प्रशासन ने शहर को शांत रखने के लिए नेट बंद कर धारा 144 लगा दी थी लेकिन इसके बावजूद पुलिस प्रशासन की नाकामी ही कही जाय कि 14 दिसंबर को ही धारा 144 को आँखे दिखाते हुए उपद्रवी दिन भर शहर में उत्पात मचाते रहे. हालाँकि पुलिस प्रशासन सुबह ८ बजे से चुस्त दिखाई दे रहा था और शहर के हर मुख्य चोराहों पर पुलिस बल तैनात था लेकिन अलग अलग झुण्ड में युवा चेटक मोहता पार्क और टाउनहाल जुटते रहे . पहले टाउन हाल से 200 युवा इकट्ठा हो कर नारे बाजी करने लगे जिसके बाद पुलिस बल ने उन्हें वहां से लाठी चार्ज कर खदेड़ा . बाद में यही युवक घूम फिर कर चेटक आगये वहां से भी उन्हें भगाया . शाम को ४ बजे भीड़ के रूप में प्रदर्शनकारी चेटक चौराहे पर पहुचे और चोराहे के बिच लगे घोड़े पर चढ़ कर ध्वज फहराते हुए नारेबाजी करते रहे . समझाने पर नहीं माने तो पुलिस ने इसके बाद उन्हें वहां से लाठीचार्ज कर खदेड़ा . लेकिन कोर्ट सर्कल पर कुछ अधिवक्ताओं शाह पाकर ये उत्पाती कोर्ट परिसर में शरण पा गए और वहां से नारे बाजी करने लगे पुलिस जब कोर्ट परिसर में जाने लगी तो समर्थन में आये आगे अधिवक्ताओं ने पुलिस को रोक दिया काफी जद्दो जहद के बाद जब पथराव हो गया १० पुलिस अधिकारियों जिसमे एएसपी सुधीर जोशी और हर्ष रतनु भी शामिल है चोटिल हो गए ३३ पुलिस कर्मी घायल हो गए उसके बाद पुलिस ने बल का प्रयोग करते हुए कईयों को गिरफ्तार किया और लाठीचार्ज कर माहोल को सम्भाला.

आखिर शांत शहर को क्या हुआ और क्यूँ :
सात दिसंबर को राजसमन्द में हत्यारे शम्भूलाल रैगर ने गैती से बंगाली श्रमिक अफ्राजुल की निर्मम तरीके से ह्त्या कर दे उसको जला दिया और ह्त्या का वीडियों बना कर वायरल कर दिया. हत्यारे शम्भूलाल ने इसके अलावा दो तीन वीडियो वायरल किये जिसमे उसने लव जिहाद, देशभक्ति, महाराणा प्रताप का नाम लेकर भाषण देता नज़र आया. वीडियो वायरल होने के बाद जहाँ एक तरफ हर आम नागरिक ने ह्त्या की कड़ी भर्त्सना करते हुए हत्यारे के लिए फांसी की मांग की वहीँ. मुस्लिम समुदाय में भयंकर आक्रोश उत्पन्न हो गया मुस्लिम समुदाय ने ८ दिसंबर को नफरत फैलाने वाले संगठनों की पाबंदी और शम्भूलाल की फांसी की मांग को लेकर विशाल जुलुस निकाला . जुलुस में एकत्र १२ हज़ार लोग ३ बजे से ४.३० बजे के बिच ज्ञापन देकर वापस अपने अपने घर चले गए . लेकिन जुलुस के दौरान चेटक सर्कल पर कुछ नारों को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति जताई .
इधर दूसरी तरफ कई विकृत मानसिकता के लोगों ने शम्भूलाल को महिमा मंडित करने का खेल चालु कर दिया और इन सब का फायदा उठाते हुए बाहरी कुछ लोगों ने नफरत फैलाने वाले वीडियो और मेसेज सोशल मिडिया पर मेसेज वायरल कर माहोल खराब करने में लग गए. यही नहीं मुस्लिम समुदाय के जुलुस पर आपत्तिजनक नारों को लेकर भी तरह तरह के वीडियो मेसेज वायरल होने लग गए. इन सब का फायदा उठाने वाले लोग भी जाग्रत हो गए उन्हें भी नफरत पर रोटियाँ सेंकने का एक अच्छा ख़ासा मोका मिल गया शिवसेना हिन्दुस्तान के महासचिव लखन सिंह पंवार ने पूरी भड़ास निकालते हुए समुदाय विशेष के खिलाफ सोशल मिडिया पर नफरत फैलाने का काम किया साथ ही कोई उपदेश राणा नामक शख्स जो किसी हिंदूवादी संगठन से जुड़ा होना बताया जारहा है उसने इस आग में घी डालने का कार्य किया और उसने १४ दिसंबर को उदयपुर आकर रैली निकालने का आव्हान किया. महोल खराब होने के अंदेशे से १३ दिसंबर की शाम से ही प्रशासन ने नेट बंद कर निषेधाज्ञा लागू कर दी थी. १४ दिसंबर को निषेधाज्ञा के बावजूद भी हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों ने शहर में उत्पात मचाया और शांत शहर की फिजां खराब हो गयी .

उदयपुर में धारा 144 – रात 12 बजे से इंटरनेट बंद – साम्प्रदायिक सोहार्द बिगाड़ने की आशंका को देखते लिया फैसला।

उदयपुर। जिला मजिस्ट्रेट बिष्णुचरण मल्लिक ने एक आदेश जारी कर बुधवार रात्रि 8 बजे से अगले आदेश तक जिले में भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा साम्प्रदायिक सौहार्द्र की बिगाड़ने की आशंका को देखते हुए यह आदेश जारी किए गए है।
जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि निषेधाज्ञा के दौरान धरना प्रदर्शन, रैली एवं भडकाऊ भाषण आदि सामुहिक आयोजनों करने एवं योजना बनाने पर प्रतिबंध रहेगा। कोई भी व्यक्ति धारदार हथियार या लाठी लेकर नहीं घूम सकेगा। उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर भडकाऊ एवं साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाले मैसेज पोस्ट करने, चित्र या वीडियो भेजने वाले व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

राणा के उदयपुर प्रवेश पर पाबंदी

जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि उपदेश राणा नामक शख्स ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके गुरुवार को उदयपुर आने की बात कही है। उसके उदयपुर आने से माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए राणा के उदयपुर सीमा में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है।

स्पेशल सेल रख रही निगरानी

जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विशेष सेल का गठन किया गया है जिसके द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित किये जा रहे पोस्ट, चित्र एवं वीडियो पर कड़ी निगरानी रखते हुए जांच की जा रही है। किसी व्यक्ति द्वारा घृणा एवं विद्वेष फैलाने वाले संदेश, टिप्पणी, चित्र या वीडियो प्रसारित किया जाएगा तो उसके विरूद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित

उदयपुर,संभागीय आयुक्त भवानी सिंह देथा ने एक आदेश जारी कर उदयपुर जिले की सम्पूर्ण सीमा क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित कर दी है। इस दौरान विभिन्न मोबाइल सेवा प्रदाताओं द्वारा दी जा रही 2जी, 3जी व 4जी डाटा, इंटरनेट सर्विस, बल्क एसएसएस, एमएमएस, वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया सेवाएं निलंबित रहेगी। यह निलंबन बुधवार रात्रि 8 बजे से प्रभावी है।

सोशल मिडिया पर भड़काऊ पोस्ट डाल सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त – अबतक 3 गिरफ्तार 6 के खिलाफ मामला दर्ज।

पोस्ट नयूज़। राजसमंद में श्रमिक की ह्त्या के बाद हत्यारे शम्भू लाल के समर्थन में सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त हो गयी है। सोमवार को दो गिरफ्तार किये थे जबकि मंगलवार एक आरोपी को और गिरफ्तार कर छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया हैं। जिनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है उनकी गिरफ्तारी के प्रयास भी तेज किये जारहे है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर शंभुलाल के समर्थन में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले पोस्ट करने वालों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करेगी।
राजसमंद थानाधिकारी रामसुमेर मीणा ने बताया कि सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने के मामले में बड़ा चारभुजा मंदिर राजनगर निवासी संतोष (32) पुत्र जगदीश वैष्णव को गिरफ्तार किया है। देवथड़ी निवासी देवेंद्र पालीवाल पुत्र सोहनलाल पालीवाल, सुंदरचा निवासी आशीष पुत्र नंदकिशोर, माहेश्वरी मोहल्ला राजनगर निवासी राकेश पुत्र रोडीलाल लड्ढा, चिराग कुमावत पुनिश के खिलाफ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने पर मामला दर्ज किया है। पुलिस सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले कमेंट सोशल मीडिया पर चलाने वालों की पहचान कर रही है। ऐसा करने वालों को पुलिस आईटी एक्ट में गिरफ्तार करेगी।
इन धाराओं में मामला दर्ज
पुलिसने अफराजुल हत्याकांड के मामले में सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने वाले और आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ 295 और 153 धारा 84 आईटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इसमें दो समुदाय के बीच में सौहार्द बिगाड़ने के लिए उकसाना धार्मिक भावनाओं को आहत करना शामिल है।

जीत की चमक – हार की हताशा

0
पोस्ट न्यूज़. कहावत है कि जीतने वाले जीत की बात करते हैं और हारने वाले जीतने वालों की बात करते हैं। ऐसा ही कुछ राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी के साथ है। दोनों ही गुजरात विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के स्टार प्रचारक हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उत्तरोत्तर एक विजेता का आत्मविश्वास प्रोजैक्ट कर रहे हैं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री हताशा के लक्षण दिखा रहे हैं, कांग्रेस पर हमले कर रहे हैं, स्वयं को पीड़ित बताकर सहानुभूति जीतने का प्रयास कर रहे हैं और विदेशी ताकतों के लिप्त होने की आधारहीन थ्योरी दे रहे हैं।
सोमवार को मोदी द्वारा लगाया गया यह आरोप बुरी तरह उल्टा पड गया कि, मणिशंकर अय्यर के निवास पर एक तथाकथित गुप्त मीटिंग हुई, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व राज्यसभा चेयरमैन हामिद अंसारी और भारत के कई लब्धप्रतिष्ठ सेवानिवृत्त राजनयिकों का पाकिस्तान के उच्चायुत्त* एवं पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री के साथ एक कुटिल समझौता हुआ।
सामान्य रुप से कम बोलने वाले मनमोहन सिंह ने एक कडा वक्तव्य जारी किया है, जिसमें ना केवल, किसी षडयंत्र की बात को झूठा बताया गया है बल्कि प्रधानमंत्री मोदी को स्पष्ट शब्दों में झिडकी दी गई है और माफी की मांग की गई है।
तथापि, एक प्रधानमंत्री द्वारा अपने पूर्ववर्ती के विरुद्घ खतरनाक असत्य बातें बोलने के परिणामों के अतिरिक्त, मोदी के आरोप यह दर्शाते हैं कि देश में राजनीति की हवा का जो रुख बदल रहा है उसे लेकर उनकी निराशा कितनी बढती जा रही है और वो कितने विचलित हो रहे हैं। अपनी सत्ता के चौथे वर्ष में अचानक मोदी को असफल नीतियों तथा अपने गृह राज्य गुजरात में आसन्न हार का दबाव महसूस हो रहा है।
हारने वाले अपने दिल की गहराइयों में पहले से जान जाते हैं कि अंत निकट है और असफलता सामने है। लेकिन नरेन्द्र मोदी को बहुत गहराई में जाने की जरुरत नहीं है। सारे लक्षण सामने स्पष्ट नजर आ रहे हैं। स्थिति पलट गई है, उनका ’’पावर गेम’’ अब काम नहीं कर रहा।
बात सिर्फ गुजरात की ही नहीं है। अगर वे विधानसभा चुनावों में किसी तरह पार पा भी लेते हैं जिसकी संभावना प्रतीत नहीं हो रही है,  तो भी जो अन्य महत्वपूर्ण चीजें वे गँवा चुके हैं, उनको ध्यान में रखते हुये यह जीत बहुत ही मामूली सी सान्त्वना का काम कर पायेगी। वे अपराजेय होने की आश्वस्त छवि को खो चुके हैं। आम जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता तेजी से खत्म होती जा रही है। कुछ लोग तो यहाँ तक कह रहे हैं कि वे अपने पार्टीजनों तथा आर एस एस के अपने मूल परामर्शदाताओं का विश्वास भी खोते जा रहे हैं।
अपने सलाहकारों की बात पर कान न देने वाले नेताओं के सामने असली समस्या यह होती है कि अन्ततोगत्वा वो ऐसे लोगों से घिर जाते हैं जिनके पास कहने के लिये कुछ होता ही नहीं है। जैसा हदीस कहती है, अपना सब कुछ ही बुरी तरह से खो देने वाले नेताओं के साथ असली समस्या यह होती है कि वे समाप्त होते-होते, अपने किये गये अच्छे कार्यों को भी चौपट कर जाते हैं, ठीक वैसे ही, जैसे आग लकडी को जला डालती है। बुरी तरह से पराजित व्यक्ति से ज्यादा खराब चीज केवल एक ही होती है, और वह है -क्रोधी प्रवृत्ति असभ्य का पराजित व्यक्ति, जो अपनी खामियों का दोष दूसरों के माथे मढ देता है।
नरेन्द्र मोदी का कांग्रेस-मुक्त भारत का सपना नष्ट हो गया है। बहुत कुछ ऐसा लगता है कि पुनर्जीवित कांग्रेस एक बडी वापसी कर रही है। केवल गुजरात में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी।
जब दिल्ली में उनके कांग्रेस अध्यक्ष बनने की औपचारिक घोषणा की जा रही थी, राहुल गांधी चुनाव अभियान में जुटे हुये थे। गुजरात में उनके चुनावी भाषण प्रभाव छोडते लग रहे हैं। वे भारी भीड आकॢषत कर रहे हैं। उनके शब्दों और लहजे में परिपक्वता नजर आ रही है।
दूसरी ओर, नरेन्द्र मोदी ने विकास के बारे में अपने वादों और अतिशियोक्तियों पर केन्द्रित होना छोड सा दिया है, जो उनका मुख्य चुनावी आधार माना जाता था। अब तो, भाजपा के सबसे अंध-समर्थक भी यह जान गये हैं कि गुजरात के मतदाताओं का आॢथक रूप से कमजोर वर्ग-दलित, पाटीदार, मुस्लिम और ओ.बी.सी., अब विनम्रता से यह दर्शाने को तैयार नहीं है कि विकास के लाभ टपकते धीरे-धीरे हुए उन तक पहुँचे हैं।
मोदी, जैसा कि राहुल गांधी वाक-चातुर्य से इंगित करते हैं, वैकल्पिक चुनावी मुद्दों को तलाश रहे हैं, ताकि विकास के मोर्चे पर विफलता पर से ध्यान हटाया जा सके। पहले उन्होंने ’नर्मदा का पानी’  गरीबों व शोषितों के दरवाजे तक ले जाने का दावा किया-पर उन्होंने उस समय यह धारणा त्याग दी जब उनके विरोधियों ने इंगित किया कि नर्मदा का पानी बडी फैक्ट्रियाँ चलाने के लिये मोडा जा रहा है, ना कि हरिजन बस्तियों तथा खेतों में जाने के लिये।
मोदी ने फोकस को बदलते हुए एक बार फिर विकास और वृद्घि की बात करने का प्रयास किया। उन्होंने विकास के प्रतीक के रूप में नैनो कार फैक्ट्री का उल्लेख किया। पर यह पासा उलटा पडा। टाटा समूह को 33000 करोड रूपये कम ब्याज पर ऋण तथा मामूली दरों पर भूमि दी गयी थी, पर यह छोटी कार सडकों पर कहीं नजर नहीं आती और साथ ही  गुजरात के बेरोजगार युवाओं को वादा की गयी नौकरियाँ भी नहीं मिलीं। राहुल गांधी द्वारा जोर से कही गयी इस साधारण बात पर स्थानीय जनता की इतनी सकारात्मक प्रतिक्रिया आयी कि हाॢदक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश यादव ने भी इसे अपनी रैलियों के भाषण में शामिल कर लिया।
मोदी ने नैनो को छोडा और कांग्रेस नेता के मंदिरों में जाने पर आक्रमण करना शुरू किया। इरादा संभवत: कांग्रेस की धर्म-निरपेक्ष छवि पर चोट करना था, पर परिणाम जो भाजपा के स्टार चुनाव प्रचारक चाहते थे, उससे बहुत अलग हुआ-मीडिया राहुल के पूजा-स्थलों पर जाने को अधिक कवरेज देने लगा, जिससे एक धर्म-परायण युवा, जिसके माथे पर तिलक और चेहरे पर देवदूत जैसी की मुस्कान है, की छवि और निखरी।
मीडिया ने भी पहले से कहीं अधिक इस बात को कवरेज देना शुरू कर दिया कि, राहुल गांधी वास्तव में अपनी रैलियों में क्या कह रहे हैं। उदाहरण के तौर पर-’’हमारे पी.एम. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, जम्मू और कश्मीर की बात कर रहे हैं। मैं कुछ आश्चर्यचकित हूँ। आज उन्होंने 60-70 प्रतिशत खुद के बारे में बोला, बाकी समय  वो उन देशों के बारे में बोल रहे थे। मोदी जी, क्या आप गुजरात में अपने पिछले 22 वर्ष की सत्ता के बारे में बात करने से डरते हैं? हम इसकी बात करेंगे। चलो पिछले समय की नहीं, कम से कम गुजरात के भविष्य की बात तो करो। मोदी जी आपको विश्व भर में ले जायेंगे। पर वे गुजरात में 22 साल के भाजपा शासन की बात नहीं करेंगे। वे जय शाह के बारे में एक शब्द भी नहीं बोलते। वे राफेल जेट सौदे के बारे में एक शब्द भी नहीं बोलते। वे किसानों को मिल रहे कपास के  दाम के बारे में नहीं बोलते।’’
मोदी केवल एक ही जवाब दे पाये हैं, जो कि एक जोशीली अपील थी-’’ गुजरात में भाजपा सरकार के आने के बाद, अनार, आलू और सब्जियों की उपज चार गुना बढ गयी है। अब, मैं प्रधानमंत्री हूँ।
इसलिये, आपके दोनों हाथों में लड्डू हैं। एक गांधीनगर में और एक दिल्ली में, अब आप दिल्ली आ सकते हैं और मुझे आवाज देकर कह सकते हैं, ’’नरेन्द्र मोदी, रूको, मुझे आपसे बात करनी है।’’ क्या आप को ऐसा प्रधानमंत्री मिलेगा। क्या आप को ऐसा अवसर मिलेगा कि अगले पांच साल, दिल्ली आपकी सेवा में खडी हो?’’
रमण स्वामी-
राष्ट्रदूत दिल्ली ब्यूरो

हत्यारे और रणबांकुरे होने में अंधेरे और उजाले का सा अंतर है .

त्रिभुवन 

यह किसी देश, किसी समाज या किसी समुदाय के लिए निकृष्टतम दौर होगा अगर किसी मुसलमान की हत्या पर मुसलमानों को ही विरोध प्रदर्शन करना पड़े। दलितों की हत्या पर दलितों को ही गुस्सा दिखाना पड़े। हिन्दुओं के किसी मसले पर हिन्दुओं को ही बोलना पड़े। यह मानव सभ्यता का वाकई में बुरा दौर होगा अगर एक देश को ही अपनी समस्याएं दुनिया में गाते रहना पड़े।

यह अंधकार युग कहा जाएगा अगर हत्यारों का महिमामंडन होने लगे। चाहे वे कोई भी हों। हत्यारे हत्यारे ही होते हैं, चाहे वे दक्षिणपंथी हों या वामपंथी। वे इस दल से जुड़े हों या उस दल से। चाहे उनकी वेशभूषा किसी भी धर्म से जुड़ी हो या किसी सरकार या विचारधारा से।

हत्याएं अगर घृणित नहीं होतीं तो महाराणा प्रताप हल्दीघाटी के युद्ध की पहली सांझ के झुरमुटे में चार-छह सिपाहियों के साथ शिकार के लिए निकले मानसिंह की हत्या करने में देरी नहीं करते। यह उनके लिए सुनहरा मौक़ा था। लेकिन उन्होंने यह सलाह देने वाले को न केवल फटकारा, बल्कि ऐसा सोचने काे भी घृणित बताया। वीर पुरुष प्रताप बोले : मानसिंह से कल सुबह युद्ध के मैदान में मिलेंगे। हम युद्ध लड़ने वाले वीर पुरुष हैं। हत्यारे नहीं।

हत्यारे के समर्थक मानसिक रूप से बीमार और आत्मिक रूप से कलुषित होते हैं और रक्तार्चन करने वाले रणबांकुरों के समर्थक नीतिमान् कहलाते हैं।

युद्ध में मरने और मारने वालों के गौरवगान इसीलिए होते हैं, क्योंकि वे घृणा के लिए आयोजित होने वाली हत्याओं या नरसंहार के सबब नहीं होते। जिन शासकों ने कत्लेआम करवाए औरयुद्ध को वीरता से विरत करके लड़ा, वे इतिहास में घृणा के पात्र ही रहे।

युद्ध हत्याओं का व्यापार नहीं थे। वे देशों और सेनाओं की शक्ति के संतुलन के लिए लड़े जाने वाले सफलता के उस समय के मानदंड थे और उनमें नियमों की पालना होती थी। राजस्थान के इतिहास में किसी भी ऐसे युद्ध विजेता तक को सूरमा नहीं कहा गया, जिसने किसी की पीठ पर पीछे से वार किया। ऐसे लोगों को घृणित हत्यारे कहा गया और उनकी एक स्वर से निंदा की गई। वीरों ने जब-जब युद्ध लड़े, नियमों का पालन किया। शत्रु का धर्म कुछ भी हो, शत्रु की राष्ट़्रीयता कुछ भी, वीरों ने रणभेरियां बजाकर ही युद्धों का एलान किया। अगर सांझ ढली तो वापस खेमों में लौट गए और एक-दूसरे के यहां से भाेजन-पानी और दवा-दारू तक का अादान प्रदान किया करते थे। और अगले दिन फिर युद्ध लड़ते।

किसी बूढ़े, किसी बच्चे, किसी स्त्री और किसी विकलांग पर वार नहीं किया जाता था। युद्ध भूमि से भागते सैनिक पर हमला करने वाले को कायर कहकर कलंकित किया जाता था।

युद्ध हत्याओं का आयोजन नहीं थे। युद्ध युद्ध थे और युद्धों की एक संस्कृति थी। वीर लोग शौर्यशाली थे। वे घृणित हत्यारे नहीं थे। चाहे महाराणा प्रताप का धर्म अलग था और अकबर के एक सेनापति अब्दुलरहीम खानखाना का धर्म कुछ और था, लेकिन उनका बेटा जब खानखाना के परिवार की महिलाओं को बंदी बनाकर लाया तो महाराणा ने उसे उलटे कदम दौड़ाकर कहा कि इन्हें ससम्मान वापस छोड़कर आओ।

आप रावण को हर साल जलाते हैं। लेकिन क्या यह बात याद है कि युद्ध के मैदान में रावण के बेटे मेघनाद के तीर से लक्ष्मण मूर्च्छित होते हैं तो उन्हें पुनर्जीवित करने वाला वैद्य कौन था? वह सुषेण था और उसे रावण ने अपने शत्रु खेमे में भेजा था।

दयानंद जैसा साधु जिन दिनों इस्लाम, ईसाई और हिन्दू धर्म की मूर्खताअों के खिलाफ़ अलख जगा रहे थे तो उन्हें लाहौर, मुंबई और अजमेर तक में किस धर्म के किन लोगों ने सहयोग किया और उनका कितना सहयोग इस साधु ने किया, यह सोचने की बात है।

विवेकानंद के महान् गुरु रामकृष्ण परमहंस ने तो इस्लाम के माध्यम से ईश्वर सिद्धि प्राप्त करने की कोशिश की थी। कहा तो यहां तक जाता है कि वे एक बार इस काम में गोमांस भक्षण तक को तैयार हो गए थे। यह तथ्य हैं और बारीकी से अध्ययन करने वाले इन्हेंं जानते हैं।

घ़ृणा और उन्माद का दौर चलाने वाले इस देश के न भक्त हैं और न मित्र। वे शत्रुओं से भी ख़तरनाक़ लोग हैं। क्योंकि शत्रु सामने होकर वार करता है। ऐसे लोग घृणाओं से विष वल्लरियां सींचकर देश की धमनियों के रक्तप्रवाह को दूषित करते हैं।

भारत अगर परम वैभव पर पहुंचेगा तो राम की तरह त्याग, कृष्ण की तरह वीतरागिता, शंकर की तरह बौद्धिक युद्ध, बुद्ध की तरह अहिंसक भाव, महावीर की तरह अपरिग्रहिता और नानक की तरह अपौरुषेय मानवता के भाव से ही पहुंच सकता है।

भारत के भाल पर घृणा का कलंक नहीं, मानवीयता से ओतप्रोत संस्कृति और विवेकशीलता का चंदन टीका ही चाहिए।