काश…अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को नहीं मारा होता

“दैया प्रेम”  की कलम से 

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उदयपुर। तेल के खेल में अमेरिका जब इराक के इस शासक सद्दाम हुसैन की तलाश कर रहा था तो दुनिया की कई बड़ी शक्‍ितयां खुश हो रही थीं। अमेरिका के साथ कदमताल कर रहे मिञ देशों की खुशी देखते बनती थी। लेकिन इससे अलग कुछ और विद्रोही ताकतें खुश हो रही थीं। ये ताकतें पूरा दम लगाने के बाद भी इराक के इस शासक का कुछ नहीं बिगाड़ पा रही थीं। वह राजा था। खाड़ी देशों का। उसने शायद यही फार्मूला अपनाया था। जीयो और जीने दो। वह सख्‍त था। अत्‍यधिक चतुर था। ताकतवर भी कम नहीं था। एक बड़ी फौज बना रखी थी उसने। शायद इतनी बड़ी कि अमेरिका जैसे downloadदेश को वह वास्‍तविक चुनौती दे सके। जैसे ही अमेरिका इराकी शासक के पीछे लगा, आतंकी ताकतें की बाछें खिल गईं। दरअसल इराक सहित अन्‍य खाड़ी देशों में कई कट्टरपंथी या आतंकी ताकतें सक्रिय थीं। वे सब मानवता के दुश्‍मन थे। मानवता के इन दुश्‍मनों से कैसी मानवता। सद्दाम हुसैन ने इन ताकतों को नियंञित कर के रखा था। जब भी ये ताकतें उठने की कोशिश करतीं, इराकी शासक उन्‍हें नेस्‍तनाबूत कर देता था। सामूहिक रूप से उड़ा देता था उन्‍हें। पकड़ जाने पर उन्‍हें सजा-ए-मौत तक दी जाती थी। यही वजह रही कि ये आतंकी ताकतें इराक और उसके इर्द गिर्द ही सिमटी रहीं और वे ज्‍यादा प्रभावी नहीं रहीं। इराकी शासक ने उन्‍हें पनपने ही नहीं दिया। ये आतंकवादी सद्दाम हुसैन के नाम से खौफ खाते थे। उन्‍हें अपने ईश्‍वर से उतना डर नहीं था जितना सद्दाम हुसैन से।
लेकिन शायद दुनिया को यह शांति मंजूर नहीं थी। अमेरिका इराक के तेल कुओं को हथियाना चाहता था। लेकिन सद्दाम हुसैन के रहते ऐसा संभव नहीं था। अमेरिका ने इराक के दुश्‍मन देशों या उन देशों को भड़काना शुरू किया जो इराक से मनमुटाव रखते हैं। तेल के विवाद को लेकर ही इराक का कुवैत के साथ झगड़ा हुआ। यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि इराक ने कुवैत पर हमला कर दिया। इसका द्वश्‍य सिनेमा एयरलिफ्ट में दिखाया गया है। जिन साथियों ने यह सिनेमा देखा हो तो उन्‍हें विवाद के बारे में याद होगा।
कुवैत पर हमला करते ही अमेरिका को मौका मिल गया। उसने कुवैत की मदद की। और सद्दाम हुसैन की जान के पीछे पड़ गया। अंत में सद्दाम हुसैन को अमेरिका ने बंदी बना लिया और फांसी दे दी। फांसी के वक्‍त उसने अपने मुंह को नहीं ढंका था। कहा था- मैं आज भी इराक का शासक हूुंं। आज से नया वक्‍त शुरू होगा। उसने दुनिया को चेतावनी दी थी। और तब वह फांसी के फंदे को खुद ही स्‍वीकार कर लिया। एक शासक की तरह।
सद्दाम हुसैन की मौत के साथ ही उस आतंकी संगठन का उदय हुआ जिससे आज पूरी दुनिया कांप रही है। इस्‍लामिक स्‍टेट यानी आइएसआइएस। यह अब पूरी दुनिया पर हावी हो चुका है। एक के बाद एक यूरोपीय देशों को आइएसआइएस निशाना बना रहा है। वह बेलगाम हो चुका है। पूरी दुनिया मिलकर इस आतंकी संगठन का खात्‍मा नहीं कर पा रही है। आज दुनिया सद्दाम हुसैन को याद कर रही है। अगर वो जिंदा होता तो आइएआएस को पैदा नहीं होने देता। आज पूरी दुनिया सद्दाम हुसैन की मौत का खामियाजा भुगत रही है। यह आतंकी संगठन सऊदी अरब तक अपनी पहुंच बना चुका है। इसका निशाना दुबई भी है। क्‍योंकि यहां बड़ी संख्‍या में विदेशी रहते हैं। यह विश्‍व व्‍यापार का केंद्र है। भारतीयों को खाड़ी देशों में सतर्क रहना होगा।
सद्दाम हुसैन भाारत का दोस्‍त था। उसने भारत से मदद की उम्‍मीद जताई थी लेकिन भारत ऐसा नहीं कर पाया। यहां की राजनीतिक इच्‍छशक्‍ित इतनी नहीं थी कि वो अमेरिका को फैसला वापस लेने के दबाव बना सके।
आज दुनिया यही कह रही है
…..काश सद्दाम हुसैन को नहीं मारा होता।

वरुण मॉल की दो मंजिल टूटेगी – हाईकोर्ट का फैसला

varun mallउदयपुर। भड्भुजा घाटी स्थित वरुण मॉल के ऊपर की दो मंजिले तोडने के आदेश जोधपुर हाईकोर्ट की डबल बैंच ने सूना दिया । पूर्व मे सिंगल बैंच ने व्यापारियों को राहत देते हुए दो करोड़ रुपये नगर निगम मे जमा करवा वरुण मॉल खोलने के आदेश दिए थे, जिसके बाद नगर निगम ने डबल बैंच मे अपील की थी। डबल बैंच ने आज फैलसा सूना दिया कि वरुण माल का नियमन नहीं किया जासकता इसलिए दो मंजिले तोड़ कर व्यावसायिक परिवर्तन किया जाय।
एक बार वरुण मॉल के व्यापारियों के सर फिर से आफत सर पर आगई। वरुण माल के ८४ व्यापारी पिछले पांच माह से बेरोजगार वरुण माल खुलने का इंतज़ार कर रहे है। खत्री समाज ने अपने इस मॉल को नियमन के लिए हाईकोर्ट मे अर्जी लगाईं थी जिसका कुछ दिन पहले ही आदेश आया था कि दो करोड़ रुपये नगर निगम मे जमा करवा कर दुकाने खोल दी जायें। खत्री समाज ने पांच दिन पूर्व ही नगर निगम मे दो करोड़ रुपये का ड्राफ्ट जमा करवाया था। ड्राफ्ट लेकर नगर निगम ने हाईकोर्ट की डबल बैंच मे अपील की थी जिसकी पहली ही सुनवाई मे डबल बैंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वरुण मॉल को नियमित नहीं किया जासकता। नियमन करने के लिए नगर निगम को ऊपर की दो मंजिले गिराने के लिए निर्देशित किया है। खत्री समाज के अध्यक्ष विजय अरोड़ा ने बताया कि अभी वह जोधपुर मे ही है। उदयपुर आकर समाज की बैठक के दौरान आगे की रणनीति का फैसला लिया जायेगा । समाज द्वारा सुप्रीम कोर्ट मे अपील लगाईं जासकती है।
वरुण माल की ऊपर के दो मंजिले गिराने का आदेश सुनते ही व्यापारियों और उनके घरों मे एक तरह से मातमी माहोल हो गया है। कई व्यापारियों ने अपनी जीवन भर की पूंजी लगा दी थी।
गौरतलब है कि फरवरी माह मे नगर निगम द्वारा कारवाई कर भड्भुजा घाटी स्थित वरुण मॉल को सीज कर दिया था। वरुण माल मे अनियमितताएं थी व्यावसायिक स्वीकृति नहीं थी और ऊपर की दो मंजिलों की भी स्वीकृति नहीं ली हुई थी। खत्री समाज के वरुण माल को नियमित करवाने के लिए हाईकोर्ट मे अपील की थी।

हार्दिक पटेल पर उदयपुर पुलिस ने कसा शिकंजा – हद याद दिलाई

hardik patelउदयपुर. गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के कमांडर हार्दिक पटेल को  राजद्रोह की सजा के तहत उसकी कानूनी हद  समझाने के लिए उदयपुर रेंज के आईजी और जिला पुलिस अधीक्षक ने बुधवार को तलब किया। दोनों अफसरों ने हार्दिक को गुजरात हाईकोर्ट का सशर्त आदेश बताकर कहा कि वह अपने अस्थायी प्रवास से बाहर आ-जा नहीं सकते हैं। यह भी गौरतलब हे कि हार्दिक का प्रवास प्रदेश के गृहमंत्री के गृहक्षेत्र में है।

खुद हार्दिक ने अफसरों की मुलाकात के बाद मीडिया को बताया कि उसे अस्थायी प्रवास से बाहर आने-जाने के लिए  मना किया गया है।   इस बारे में अफसरों ने हार्दिक को हाईकोर्ट से सशर्त आदेश  की पालना करने के लिए पाबंद किया है। हार्दिक का कहना है कि उसे गुजरात में जाने से अदालत ने मना किया है लेकिन अपने अस्थायी प्रवास से बाहर निकलने के लिए कोई पाबंदी नहीं है।  इस बारे में हार्दिक अपने वकील से कानूनी राय भी लेंगे।

छेड़ रखी है आंदोलन की बात

हार्दिक जब से उदयपुर में आया है तब से जनजाति उपयोजना क्षेत्र में ओबीसी वर्ग को आरक्षण दिलाने की मांग प्रबल हुई है। जबकि डांगी पटेल समाज ने आरक्षण की मांग उठाते हुए इस बारे में हार्दिक से भी आंदोलन में खुला समर्थन मांगा है। जबकि गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुवा नेता भी हार्दिक को लेकर गुजरात से उदयपुर आए थे और राजस्थान में भरतपुर, बयाना, करौली आदि जिलों का दौरा कराने के बाद  भी खुले मंच से कह चुके हैं।

बुधवार को ही अपना जन्मदिन मनाने के लिए गुर्जर बाहुल्य इलाके नाथद्वारा गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पुलिस के लिए  यह एक नया काम शुरू हो गया है कि हार्दिक पर कड़ी नजर रखी जाए।

कश्मीर में ज़िंदगियों पर छाया अंधेरा

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ये तस्वीर श्रीनगर के एक अस्पताल के बिस्तर पर दर्द में कराहती 14 साल की इंशा मुश्ताक़ की है.

दक्षिण कश्मीर की रहने वाली मुश्ताक़ की मां रज़िया बेगम उनके जल्द ठीक होने की दुआ मांग रही हैं.

महाराजा हरि सिंह अस्पताल के आईसीयू में भर्ती इंशा के चेहरे पर इतने छर्रे लगे हैं कि उनका चेहरा सूजकर पूरी तरह से विकृत हो गया है.

डॉक्टरों का कहना है कि इंशा की हालत गंभीर है. इंशा के पिता मुश्ताक़ अहमद मलिक सदमे में हैं. वो बड़ी मुश्किल से कुछ बोल पाने की हालत में हैं.

अस्पताल के कॉरिडोर में खड़े मलिक कहते हैं, “वो परिवार के दूसरे लोगों के साथ घर के पहले माले में थी. शाम का वक्त था. मैं नमाज़ पढ़ने मस्जिद गया था. उसने खिड़की से झांककर देखा और सीआरपीएफ के जवान ने बहुत नज़दीक से उसपर छर्रे दाग दिए.”

गहरी सांस भरते हुए रज़िया बेगम कहती हैं, “वो दर्द से रोते हुए कह रही थी, मां मैं मर रही हूं.”

कश्मीर में छर्रों से आंखों को नुक़सान

श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के नेत्र विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ तारीक़ कुरैशी कहते हैं, “उसकी दोनों आंखें बुरी तरह से ज़ख्मी हैं और उसकी दृष्टि लौटने की कोई उम्मीद नहीं है. हमारे पास ऐसे 117 मामले आए हैं.”

छर्रों से ज़ख्मी होने के कारण सात लोग पूरी तरह से आंखों की रोशनी खो चुके हैं. आंखों में चोट वाले 40 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

डॉक्टर कुरैशी का कहना है कि जो आंखें छर्रों से ज़ख़्मी हुई हैं उनमें पूरी तरह से रोशनी लौटने की संभावना बेहद कम है.

8 जुलाई को सरकारी बलों ने दावा किया था कि लोकप्रिय स्थानीय चरमपंथी नेता बुरहान वानी को मारकर उन्हें एक बड़ी कामयाबी मिली है.

वानी के मारे जाने के बाद से कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए.

सड़कों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को विफल करने के लिए सरकार ने कड़े कर्फ्यू नियम लागू किए हैं.

हालांकि युवाओं ने इन नियमों की अनदेखी करते हुए कश्मीर के ज्यादातर इलाकों में प्रदर्शन किए जिससे कई नागरिकों की मौत के साथ हज़ारों प्रदर्शनकारियों को गहरी चोटें आई हैं.

सरकारी बल बुलेट, आंसू गैस के गोले, पेपर गैस और छर्रों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों पर कर रही है.

कश्मीर आंखों में छर्रे

अमृतसर के सरदार बहादुर डॉ सोहन सिंह नेत्र अस्पताल में वरिष्ठ रेटिनल सर्जन डॉक्टर प्रीतम सिंह कहते हैं कि उनके पास लगातार कश्मीर से मरीज़ आ रहे हैं जो छर्रों से आंशिक या पूरी तरह से अंधे हो गए हैं.

डॉक्टर सिंह ने कहना था, “छर्रे आमतौर पर आंखों में छिद्रित चोटें पहुंचाती हैं. चूंकि ये मानव शरीर का बहुत ही नाजुक अंग होता है और ज्यादातर मामलों में ये रेटिना को नष्ट कर देता है. ये छर्रे लोगों की जान तो नहीं लेते पर ज़िन्दगी भर के लिए पंगु ज़रूर बना देते हैं.”

सरकारी बलों पर मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं जिससे उनकी कड़ी आलोचना हो रही है.

एसओपी के नियमों के तहत बहुत ही बेकाबू स्थिति में पैरों को निशाना बनाने की हिदायत है.

लेकिन विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 90 फीसदी से ज्यादा लोगों को कमर से ऊपर के हिस्से में चोटें आई हैं.

नाम नहीं बताने के शर्त पर एक डॉक्टर ने कहा, “सरकारी बल जानबूझकर छाती और सिर को निशाना बना रहे हैं. उनका उद्देश्य मारने का है.”

कश्मीर का अस्पताल

जिस अस्पताल में इंशा का इलाज चल रहा है, वहां दर्द और पीड़ा की कहानियां चारों तरफ़ से सुनाई पड़ती है.

ज्यादातर पीड़ित बात नहीं करना चाहते या नहीं चाहते कि उनकी तस्वीरें खींची जाए क्योंकि पुलिस एजेंसियां उनपर नज़र रखे हुए है.

इस वॉर्ड के बिस्तर पर 16 साल के आमिर फयाज़ गनाई लेटे हुए हैं. वो कश्मीर के बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ़ में 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं.

गनाई कहते हैं, “10 जुलाई को मैं अपने दोस्त के घर जा रहा था और विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. अचानक बहुत ज़ोर से मेरी बाईं आंख पर कुछ लगा. पूरी तरह से ब्लैकआउट हो गया. मुझे लगा कि गोली लगी है और मैं मर जाऊंगा.”

कमरे के कोने में गनाई के बिस्तर के बगल में एक नर्स 17 साल के शबीर अहमद डार के दाहिनी आंख की जांच कर रही है.

कश्मीर छर्रे से ज़ख़्मी

गनाई के मुकाबले डार की हालत ज्यादा गंभीर है. डॉक्टरों के मुताबिक डार अपने दाहिनी आंख की रोशनी खो सकते हैं.

आंखों के डॉक्टरों की तीन सदस्यों की एक टीम नई दिल्ली के एम्स अस्पताल से कश्मीर भेजी गई है जो संकट की इस घड़ी में घाटी के डॉक्टरों को सहयोग देगी.

इस टीम का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर सुदर्शन के कुमार ने घाटी के डॉक्टरों की कोशिशों की सराहना की है.

मरीज़ों की जांच करने के बाद डॉक्टर कुमार ने कहा कि वहां के डॉक्टरों को ‘युद्ध जैसी स्थिति’ से जूझना पड़ रहा है.

Source – BBC HINDI NEWS 

आपकी जिंदगी को खतरे में डाल सकता है नाई से गर्दन और सिर की मसाज करवाना

Neck massageउदयपुर . नाई से गर्दन और सिर की मसाज करवाना आपकी जिंदगी को खतरे में डाल सकता है। 40 साल के व्यापारी बाबू रेड्डी इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि गर्दन चटकवाने की कीमत 24 घंटे इमरजेंसी में भर्ती होकर चुकानी पड़ेगी। बाबू स्थानीय सैलून में गर्दन की मसाज कराने गए थे। उन्होंने सोचा था कि आराम महसूस होगा लेकिन उन्हें वर्टेब्रा-बॉयलर स्ट्रोक पड़ गया।

इस वाकये के बारे में बाबू रेड्डी बताते हैं कि गर्दन से चट्ट की आवाज आई, उन्हें लगा कि मसाज सफल हो गई है। लेकिन घर आते ही वह असहज महसूस करने लगे और थोड़ी देर बार सीधे चल भी नहीं पाए। उन्हें अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराना पड़ा। उनकी सांसें अनियमित थीं और ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। डॉक्टरों को बाबू रेड्डी को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

बाबू का इलाज करने वाले डॉ महेश संभशिवम का कहना है कि एमआरआई करवाने पर पता चला कि उनकी धमनी में खून की सप्लाई रुक गई है और उनको वर्टेब्रा-बॉयलर स्ट्रोक पड़ गया है। जांच में पता चला कि बाबू रेड्डी नियमित तौर पर नाई से गर्दन और सिर की मसाज करवाने के आदी हैं।

उनकी मसाज गर्दन के चटकने के साथ ही खत्म होती है। डॉक्टर महेश संभशिवम का कहना है कि अगर वक्त पर उनका इलाज नहीं किया जाता तो उनकी स्थिति और बिगड़ सकती थी। बाबू रेड्डी को गर्दन चटकवाने पर स्ट्रोक पड़ गया था। दरअसल जिस नाई ने बाबू रेड्डी की मसाज की थी वह अच्छी तरह से ट्रेंड नहीं था। यह एक न्यूरोलॉजिकल संबंधी समस्या है।

व्ही-बॉयलर स्ट्रोक

यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है

मधुमेह और उच्च रक्तचाप से भी हो सकती है यह समस्या

गलत तरीके से बैठने से होने लगती है समस्या

गर्दन और सिर की नियमित मसाज कराने से रहता है स्ट्रोक का खतरा

वर्टिब्रल आर्टरी डिसेक्शन आमतौर पर सेरिब्रल स्ट्रोक की वजह से होता है। इसके अलावा अनियमित दिनचर्या, मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले लोगों को भी इस स्ट्रोक की आशंका रहती है। 

डॉ. महेश संभशिवम, बेंगलुरू

मौका परस्त सीएसएस ( MLSU – STUDENT ELECTION )

cssउदयपुर।  मेवाड़ की छात्र राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाकर एक दशक तक विजय पताका फहराने वाली छात्र संघर्ष समिति (सीएसएस) ने एक  योजना के तहत गत वर्ष हुए चुनावों में भागीदारी न करके एबीवीपी को समर्थन दे दिया था। हमेशा से ही मौका परस्त रही सीएसएस के जिस संगठन को सैंकड़ों छात्रों ने मेहनत कर खड़ा किया उसे उसके कर्ताधर्ताओं ने एक ही झटके में अपने स्वार्थ को लेकर एबीवीपी में विलय कर दिया। विलय का प्रमुख कारण यह था कि सीएसएस के पदाधिकारी एबीवीपी व भाजपा के युवा मण्डलों में अपने पद चाहते थे लेकिन विलय के बाद भी पदाधिकारियों में से किसी को भी  कोई पद नहीं दिया गया तो वह अब पुन: छात्रसंघ चुनावों में अपनी ताल ठोकने की तैयारी कर रही है। हालांकि सीएसएस चुनाव लड़ेगी या नहीं इस पर अब भी संशय बना हुआ है।
सुविवि को दिए चार अध्यक्ष: संघ पृष्ठभूमि वाले कुछ नाराज छात्र नेताओं ने छात्र संघर्ष समिति बनाई। सीएसएस का उद्भव 2004 में एबीवीपी से ही हुआ था। सीएसएस का पहला चुनाव रवि शर्मा ने लड़ा और वे छात्रसंघ अध्यक्ष बने। छात्र हितों के कार्य कर इस संगठन में विश्वविद्यालय में अपनी पकड़ मजबूत की और दिलीप जोशी, परमवीर सिंह चुण्डावत, अमित पालीवाल के रूप में तीन अध्यक्ष विजयी हुए। सीएसएस का वजूद खत्म होने के बाद और पदाधिकारियों द्वारा अपने स्वार्थ लोलुपता में लिए निर्णय के बाद परमवीर सिंह और अमित पालीवाल अब अलग संगठनों से जुड़ गए है।
करार टूटा तो फिर उतरी मैदान में: गत वर्ष खेरवाड़ा विधायक नाना लाल अहारी के पुत्र सोनू अहारी ने चुनाव में खड़ा होकर सारे समीकरण खत्म कर दिए थे। सुखाडिय़ा युनिवर्सिटी के इतिहास में इतने धनबल का उपयोग नहीं हुआ जो पिछले साल देखा गया। एक दशक से अजेय रही छात्र संघर्ष समिति ने भी नतमस्तक होकर एबीवीपी को समर्थन दे दिया था। छात्रसंघर्ष समिति के आयोजक कटारिया विरेाधी गुट से माने जाते रहे है, जो पूर्व अध्यक्ष पंकज बोराणा के समय खुलकर सामने आई थी, बडगांव सरपंच कैलाश शर्मा अपने पुत्र दीपक शर्मा को एबीवीपी से चुनाव लड़वाना चाहते थे और कटारिया बोराणा के नाम पर अड़ गए। हालांकि उस समय दीपक शर्मा को हार मिली थी, लेकिन छात्र संघर्ष समिति का हमेशा के लिए बीजेपी व एबीवीपी से विरोध हो गया।
ब्राह्मण व परिवार के सदस्य ही प्रत्याशी: परमवीर सिंह को छोड़ दे तो छात्र संघर्ष समिति ने आज तक ब्राह्मण व परिवार के सदस्यों को ही छात्रसंघ अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया और इस बार भी इसी तरह उम्मीदवार को मैदान में उतारना तय किया गया है। चुनाव के लिए गौरव शर्मा ने भी कैम्पेनिंग भी शुरू कर दी है, जो गत वर्ष भी सीएसएस की ओर से अध्यक्ष पद के दावेदार थे लेकिन एनवक्त पर एबीवीपी में विलय कर सीएसएस ने चुनाव नहीं लड़ा था। सीएसएस में छात्र नेताओं की बात करें तो इस संगठन के प्रवक्ता पद पर रहे निखिल रांका की छात्रों में अच्छी पेठ है लेकिन ब्राह्मण गुट का ही प्रत्याशी उतारना इस संगठन की प्रमुखता है।
॥यह बात सच है कि सालभर हमारी ओर से कोई स्टेटमेंट नहीं आया, लेकिन छात्र हितों के लिए दोनो ही राष्ट्रीय संगठनों ने भी कुछ हीं किया। हम फिर से पूरी ताकत के साथ उतरेंगे और जीतेंगे।
– अशोक शर्मा, सदस्य,संरक्षक मण्डल
॥सीएसएस आज तक छात्रहित के जिन मुद्दों पर चुनाव लड़ती रही है, एबीवीपी ने उसी हिसाब से काम करने का वादा किया था। चुनावी एजेंडा भी हमारा लेकर चुनाव लडा इसलिए समझौता किया था, लेकिन वादा खिलाफी हुई जिस कारण फिर से चुनाव लडेंगे।
– सूर्य प्रकाश सुहालका,  मुख्य संयोजक
॥एबीवीपी ने हमसे वादा खिलाफी की। छात्र हितों के लिए किसी तरह के काम वर्षभर में नहीं हुए।
– दिलीप जोशी, पूर्व अध्यक्ष सीएसएस

60 की उम्र में भी जवां रहना है तो रोजाना पीजिए अनार का रस

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pomegranateउदयपुर। सेलिब्रिटी हो या आम इंसान उम्र चाहे कितनी ही बढ़ जाए, लेकिन जवां दिखने की चाहत हर किसी में होती है। इसके पीछे कोई जिम में पसीना बहाता है तो कोई ब्यूटी पार्लर के चक्कर काटता है। अगर आप भी अपनी बढ़ती उम्र में छिनती खूबसूरती को लेकर परेशान हैं तो बेिफ्रक हो जाएं, क्योंकि अनार का रस आपकी बढ़ती उम्र को थामकर आपको हमेशा जवां रख सकता है। इसका खुलासा एक अध्ययन में किया गया है।

इसका दावा है कि अनार में पाया जाने वाला यूरोलिथिन ए कोशिकाओं में नई ऊर्जा का संचार करता है। उनमें डिफेक्टिव माइटोकॉन्ड्रिया के घटकों को रिसाइकिल करने की क्षमता आ जाती है और इस प्रकार एक नई प्रक्रिया पुन: शुरू हो जाती है और बढ़ती उम्र के प्रभाव थम जाते हैं। इस अध्‍ययन को स्विटजरलैंड में एक रिसर्च इंस्‍टीट्यूट में पैट्रिक एबीसेचर ने किया है। एबीसेचर का कहना है कि अनार का जूस पूरी तरह से प्राकृतिक पदार्थ है, जो कि शरीर को भरपूर ताकत और ऊर्जा देता है।

अध्‍ययन करने के लिए टीम ने सबसे पहले हाईपोथेसिस को टेस्‍ट किया और उसके बाद उन्‍होंने परीक्षण को आखिरी रूप में किया। इस पूरे अध्‍ययन में उन्‍हें चौंकाने वाले परिणाम मिले कि 8-10 दिन में ही एंटी-एजिंग इफेक्‍ट दिखना शुरू हो गया था। साथ ही अध्‍ययन में यह भी निष्‍कर्ष निकले हैं कि यूरोलिथिन ए हमारी आंतों को स्‍वस्‍थ बनाता है और पाचन क्रिया को दुरूस्‍त करता है।

इस अध्‍ययन को मानवों पर करने से पहले चूहों पर लगभग 2 साल तक किया गया था कि यूरोलिथिन का शरीर पर सूक्ष्‍म प्रभाव क्‍या होता है। एक नियंत्रित समूह में लगभग दो साल तक सभी चूहों का अंडरऑब्‍जर्वेशन में रखा गया था। बाद में मानवों पर करके निष्‍कर्ष को जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसका मतलब यह है कि अनार के जूस का सेवन करने से बढ़ती उम्र के प्रभाव थम जाते हैं और त्‍वचा भी दमकदार बनी रहती है।

आपको बता दें जब अनार के जूस का सेवन करते हैं तो हमारे शरीर से यूरोलिथिन ए प्रोड्यूस होती है जो कि एक प्रकार की मॉलीक्‍यूल है। जब यह मॉलीक्‍यूल, गट में माईक्रोबेस के द्वारा बदल जाती है तो य‍ह मांसपेशियों की कोशिकाओं की रक्षा करता है और उन्‍हें उम्र बढ़ने के साथ बढ़ने वाले प्रभावों को स्‍पष्‍ट होने से रोकता है।

रोजाना 2617 बार छूते हैं हम अपना स्मार्ट फोन

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mobaileउदयपुर। हाल ही एक सर्वे में यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया है कि स्मार्टफोन का इस्तेमान करने वाले रोजना करीब 2 हजार 617 बाद अपने फोन की टच स्क्रीन को छूते हैं।

सर्वेक्षण के लिए एक लाख से ज्यादा लोगों में से अलग-अलग जगह के 94 लोगों को चुना गया। सर्वे को सही माने तो सामान्यतौर पर लोग साल में करीब 10 लाख बार अपना स्मार्टफोन छूते हैं, वहीं ज्यादा इस्तेमाल करने वालों में यह संख्या 20 लाख तक पहुंच जाती है।

सर्वेक्षण में पाया गया कि औसत इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के स्मार्टफोन की स्क्रीन 2.42 घंटे ऑन रहती है। वहीं बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने वालों में यह समय 3.75 घंटे तक हो जाता है।

यह वह समय है, जो लोग अपने फोन पर कुछ लिखते हुए या फेसबुक जैसी सोशल साइट पर बिताते हैं। सर्वेक्षण में शामिल 87 फीसद लोगों ने रोजाना रात 12 बजे से सुबह पांच बजे के बीच एक बार फोन का इस्तेमाल जरूर किया।

THE GREAT KHALI आएंगे उदयपुर, मिलेंगे पहलवानों से

उदयपुर. रेसलिंग की दुनिया में अपने दमदार दांव पेचों से बड़े से बड़े रेसलर को धूल चटाने वाले रेसलर द ग्रेट खली उर्फ  दलीप सिंह राणा शुक्रवार को पहली बार झीलों के शहर उदयपुर आएंगे।

खली यहां शोभागपुरा सर्किल स्थित फॉर श्योर फिटनेस जिम का शुभारम्भ करेंगे। करीब डेढ लाख स्क्वायर फीट मे बना यह जिम राजस्थान का एकमात्र जिम होगा जहां अत्याधुनिक मशीनों को लगाया गया है। इस जिम में विदेशों से आयात मशनों को स्थापित किया गया है जिसका लाभ शहरवासी उठा सकेंगे।

पहलवानों से मिलेंगे खली

khaliउदयपुर आ रहे द ग्रेट खली जिम उद्घाटन के दौरान शहर के पहलवानों से भी मुलाकात करेंगे जिसके लिए उद्घाटन स्थल पर ही व्यवस्था की गई है। खली के उदयपुर आने की खबर से लेकसिटी मे उनके प्रशंसकों में भारी उत्साह है और खासकर शहर के पहलवान द ग्रेट खली को देखने और उनसे मिलने के लिए खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं।

जिम के निदेशक अशोक जोशी और पालीवाल ने बताया कि हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों मे अभिनय करने के साथ ही विश्व की सबसे प्रसिद्ध रेसलिंग में विदेशी पहलवानों को पछाड़ देने वाले द ग्रेट खली ने बिग बॉस के चौथे सीजन में भी प्रतिभागी रहे हैं। जिम के उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के रूप मे पुलिस महानिरिक्षक आनंद श्रीवास्तव , जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता एवं गीतांजलि गु्रप के चेयरमैन जेपी अग्रवाल मौजूद होंगे।

लिंग जांच करने वाले अन्तरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, सरकारी एएनएम सहित डॉक्टर गिरफ्तार

l_doctor-crime-1468924032उदयपुर. लिंग जांच एवं चयन करने के आरोप में  हिम्मतनगर,अहमदाबाद के निजी चिकित्सालय के डॉक्टर सहित उदयपुर जिले की सरकारी एएनएम को गिरफ्तार किया गया है।  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक के निर्देश पर गठित राज्य स्तरीय टीम  ने जाल बिछाकर आरोपितों को रंगे हाथों पकड़ा।

रविवार को उदयपुर पहुंची टीम ने सरकारी एएनएम से सम्पर्क कर सोमवार सुबह उदयपुर जिले के खेरवाड़ा से डिकॉय आपरेशन में एजेंट की भूमिका निभाने वाली निर्मला राठौड़ को साथ लिया। टीम प्रात: 10 बजे हिम्मत नगर स्थित देवपूजन अस्पताल पहुंची। जहां उन्हें शाम 7 बजे लिंग जांच करने के लिए कहा गया। शाम 7 बजे बाद गर्भवती महिला को सहयोगी महिला पूजा कुमावत एजेंट निर्मला राठौड़ के साथ लिंग जांच करवाने अस्पताल के अंदर पहुंचे। कुछ ही देर बाद बिना किसी कागज पूर्ति के रजिस्टर्ड सोनोग्राफ ी सेंटर द्वारा लिंग जांच कर दी गई।

डॉक्टर जितेन्द्र शुक्ल ने लिंग जांच कर लड़का बताया। सहयोगी महिला पूजा कुमावत के इशारे पर राज्य पीसीपीएनडीटी सेल के रघुवीरसिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई प्रारंभ कर दी। डॉक्टर जितेन्द्र शुक्ल से सात हजार रुपए एवं सरकारी एएनएम से चौदह हजार रुपए बरामद किए गए  जो सहयोगी महिला पूजा कुमाावत द्वारा एनएम को दिए गए थे। टीम दोनों को गिरफ्तार कर मंगलवार  सुबह 3 बजे उदयपुर लेकर पहुंची।  पूछताछ में  सरकारी उपस्वास्थ्य केन्द्र पडुना में कार्यरत एएनएम ने बताया कि वह 15 साल से लिंग जांच का कार्य कर रही है तथा प्रतिमाह पांच से सात महिलाओं का लिंग जांच करवाती है। वहीं लिंग जांच करने वाले चिकित्सक डॉ.जितेन्द्र शुक्ल जब से सोनोग्राफी मशीन खरीदी है तब से लिंग जांच का कार्य करता है। अधिकतर समय डॉक्टर लिंग जांच करने के लिए एजेंटों के द्वारा ली जाने वाली राशि सीधी बैंक खाते में ही डलवाता है। कार्रवाई मेंं उदयपुर संभाग के सयुक्त निदेशक डॉ.आरएन बैरवा, पीसीपीएनडीटी सम्नवयक मनीषा भटनागर पुरी कार्रवाई में साथ रहे।  वहीं गुजरात के स्थानीय तालुका प्राधिकारी डॉ. जीएच परमार भी साथ थे।