पैट्रोल पम्पो की शहर में खुलेआम लूट – बेखबर प्रशासन

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उदयपुर । पेट्रोल के दाम कम तो हुए है, लेकिन पुरे शहर के पेट्रोल पंप अपने ही मनमाने दाम पर मनमाना पेट्रोल बेच रहे है। शहर के १० किलोमीटर की परिधि में २० से अधिक पेट्रोल पंप है, और सभी जगह अलग अलग दाम में पेट्रोल बिक रहा है। पेट्रोल पम्पो पर ३० से ५० पैसे का अंतर आरहा है। कही ६२.२२ पैसे है तो कही कही ६२. ८३ पैसे है। साथ ही पैट्रोल पंप मालिक अपनी आमदनी के चक्कर में सादा पेट्रोल नहीं भर कर हाई परफॉर्मेंस भर रहे है जो की सादे पेट्रोल से २ से ३ रुपये मंहगा है। सबसे बड़ी बात यह कि इस बात की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों ही नहीं है। उन्हें तो यह ही नहीं पता कि शहर में पेट्रोल अलग अलग दामों में बिक रहा है।

नियम के विपरीत शहर में अलग अलग दाम :
नियम के मुताबिक़ पुरे नगर निगम क्षेत्र में एक ही रेट में पेट्रोल बेचना जरूरी होता है। लेकिन शहर के सभी पेट्रोल पम्पो ने नियमों को ताक पर रख कर अपने मनमाने नियम लगा दिए है। चेतक सर्कल पर अप्पाजी पेट्रोल पंप पर ६२.53 रुपये लीटर है, वही मात्र १०० मीटर की दुरी पर मॉर्डन सर्विस पर ६२.२२ रुपये है। इससे थोड़ा आगे मध्ुबन में देखे तो ६२.२४ पैसे है। उदियापोल पर ६२.६३ पैसे इसके थोड़ा आगे पारस पर ६२.८३ रुपये तक बिक रहा है। वजह पूछो तो बताते है कि पेट्रोल लाने में आ रहा परिवहन खर्च है। जानकारों का कहना है कि पेट्रोल के घटते दामों की आड़ लेकर सभी कंपनियां तेल परिवहन में हो रहे घाटे की भरपाई रेट में अंतर से कर रही हैं। यही नहीं ऑयल कंपनियों के अफसरों का भी मानना है कि कीमतों पर सरकार का नियंत्रण खत्म हो गया है।
ग्राहकों को मेह्गा पेट्रोल लेने पर किया जारहा है मजबूर :
भारत पेट्रोलियम, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन तीन कंपनियों के पेट्रोल पंप शहर में है, तीनों कंपनियों के पेट्रोल पम्पो में अधिकतर मालिकों ने लूट मचा रखी है । अपने फायदे के लिए जनता की जेब पर डाका डाल रहे है। वाहनों में सादा पेट्रोल नहीं डाल कर एक्स्ट्रा प्रीमियम या स्पीड पेट्रोल डाला जारहा है जो की सादे पेट्रोल से २.५० से ३ रुपये तक महँगा है। यही नहीं चेतक स्थित अप्पा जी पेट्रोल पंप और मधुबन जैसे पेट्रोल पम्पों पर तो सादा पेट्रोल भरना ही बंद कर दिया है। ग्राहकों को मजबूरी में महगा पेट्रोल भरवाना पढ़ रहा है।
अपनी बैलेंस शीट मजबूत कर रही कंपनियां :
अर्थशास्त्रियों के अनुसार पेट्रोल के दामों की कीमतों में घोटाला सरकार से लेकर फुटकर व्यापारी तक कर रहे है। अर्थशाष्त्री प्रेमांशु पंड्या का कहना है कि केंद्र व राज्य सरकार और कंपनियां सभी मानती हैं कि 65 रुपए प्रति लीटर से नीचे पेट्राेल सस्ता है। ऐसे में केंद्र सरकार जहां बार-बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपनी तिजोरियां भर रही है। वहीं राज्य सरकारें क्षतिपूर्ति के नाम पर वैट बढ़ाने के साथ नए टैक्स ला रहीं हैं। कंपनियां भी पीछे नहीं है। वे जहां पेट्रोल 4 रुपए सस्ता होने की उम्मीद होती है, वहां केवल 50 पैसे सस्ता करती हैं। बाकी से अपनी बैलेंस शीट मजबूत कर रहीं हैं। अब वे किसी फुटकर व्यापारी की तरह हर डीलर प्वाइंट पर लागत निर्धारण के बाद दाम तय कर रहीं हैं।

इनका कहना ………….

अलग अलग दामों में पेट्रोल बिक रहा है इस बात की जानकारी नहीं है। अभी पेट्रोलियम कंपनियों से पुचता हु। हाई परफोर्मेंस पेट्रोल लेने के लिए किसी को जबरदस्ती नहीं की जासकती अगर एसा कही हो रहा है तो अभी जांच करवाता हूँ। हिम्मत सिंह भाटी , जिला रसद अधिकारी

अलग अलग कंपनियों और ट्रांसपोर्ट की वजह से पेट्रोल पुम्पो के दामों में फर्क आता है। हाई परफॉर्मेंस पेट्रोल के लिए किसी भी ग्राहक से जोर जबरदस्ती नहीं की जासकती उसकी इच्छा हो तो वह पेट्रोल भरा सकता है । भूपाल सिंह , दलाल पेट्रोल पंप संचालक

हिन्दुस्तान जिंक ने सुरक्षा के लिए उठाएं अनेकों कदम

लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के बाइकर क्लब के साथ मिलकर यातायात के नियमों का पालन करने का दिया संदेष, निकाली दरीबा तक बाईकर रैली

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उदयपुर। हिन्दुस्तान ज़िंक ने यातायात सुरक्षा को ध्यान में रखकर अनेकों कदम उठाएं हैं जिसमें आज रविवार को लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ के बाइकर क्लब के साथ मिलकर यातायात के नियमों का पालन करने का दिया संदेष, दरीबा तक निकाली बाइकर रैली। इस रैली को लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ एवं हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य प्रचालन अधिकारी विकास र्श्मा ने रैली को हरी झण्डी दिखाई। ‘‘हमारी सुरक्षा हमारी खुद की जिम्मेदारी है तथा हमें यातायात का व उसके नियमों को पूरी तरह से पालन करना चाहिए’’-विकास शर्मा, मुख्य प्रचालन अधिकारी हिन्दुस्तान जिंक ने कहा।

हिन्दुस्तान जिंक के हेड-कार्पोरेट कम्यूनिकेषन पवन कौषिक ने बताया कि हिन्दुस्तान जिंक ने हाल ही में विषेष सुरक्षा कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इस संदर्भ में ना सिर्फ हमारी हिन्दुस्तान जिंक की इकाइयों में बल्कि हिन्दुसतन जिं़क की आवासीय कॉलोनी में भी यातायात सुरक्षा सबंधित कार्यषालाओं का आयोजन भी किया गया है तथा कार्यषालाएं जारी है। सभी ड्राईवरों को मुख्यरूप से गतिसीमा पर नियंत्रण, निष्चितौर पर सीट बेल्ट लगाना, अपनी लेन में गाड़ी चलाना, व अन्य सभी यातायात के नियमों का पालन करना अनिवार्य है इस संदर्भ में लापरवाही प्रषासन द्वारा बर्दास्त नहीं की जाएगी।’’

सुरक्षा से संबंधित यातायत नियमों का पालन करने के लिए हमें यातयात पुलिस का ना सिर्फ सहयोग करना चाहिए बल्कि सुरक्षा से संबंधित अभियान को सफल बनाने के लिए अपना पूरा सहयोग देना चाहिए हिन्दुस्तान ज़िक के हेड-कार्पोरेट काम्यूनिकेषन पवन कौषिक ने बताया।

हिन्दुस्तान जिंक ने अपने कर्मचारियों के परिवारों को भी यातायात के नियमों के बारे में अवगत कराया है तथा उनका पालन करने के लिए भी अनिवार्य किया है।

ज्ञातव्य रहे कि राज्य में रोजना सड़क दुर्घटनाओं में, लापरवाही के कारण तथा नियमों के पालन न करने से, अनेकों दुर्घटनाएं हो रही है जिससे जन-जीवन की हानी हो रही है।

कौन बनेगा उदयपुर UIT का चेयरमेन – भाईसाहब की तूती बोलेगी या मैडम की होगी महरबानी

Gulab chand katariaउदयपुर। मल मॉस समाप्त होते ही राजनैतिक नियुक्तियां होना शुरु हो गई है, सोमवार को उदयपुर के अलावा अन्य नगर न्यास सुधार और विभिन्न बोर्ड के अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है। उदयपुर शहर के लिए भी यूआईटी चेयरमेन की घोषणा भी जल्दी होने वाली है उसके लिए जोड़तोड़ शुरू हो गयी है। भाजपा में दिग्गाझों की नज़र अब यूआईटी की खाली पड़ी कुर्सी पर है। जिस पर भाईसाहब की कृपा से कोई बैठता है या मेडम सीधा अपना फरमान जारी करती है।
यूआईटी चेयरमेन के लिए मेवाड़ के कद्दावार नेता गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की गुड बुक से कोई नाम निकलेगा या मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी गुड बुक में पहले ही तय कर रखा है। हालांकि इससे पहले भाजपा के शिव किशोर सनाढ्य की नियुक्ति में जलसंसाधन मंत्री किरण माहेश्वरी का दाव लगा था और उस वक़्त किरण महेशवरी की मुख्यमंत्री से निकटता अधिक थी।
जाती का समीकर होगा या गुटबाजी चलेगी :
भाजपा नेताओं की माने तो यूआईटी चेयरमेन के लिए अगर मेवाड़ की गुट बाजी हावी होती है, तो वसुंधरा गुटबाजी को बढ़ावा ना देते हुए अपना निर्णय सुनाएगी। और अगर श्री कटारिया का दखल रहता है तो कटारिया बेदाग़ छवि और जाती के आधार पर यूआईटी चेयरमेन का चुनाव कर सकते है।
जैन समाज का चेयरमेन विरोध का कारण बन सकता है क्यूंकि विधायक और महापौर दोनों जैन है। इसके अलावा पार्टी में भी जैन पदाधिकारियों का दबदबा है। इसको देखते हुए जैन समाज का चेयरमेन बनाना शायद मुश्किल है। राजपूत ब्राहमण या ओबीसी में से किसी अनुभवी और बेदाग़ छवि वाले को यह पद दिया जा सकता है।
दावेदारों की दौड़ शुरू :
भाजपा में चर्चा गर्म है कि भाईसाहब के उदयपुर आते ही भाजपा कार्यालय में दिग्गज भापाइयों और पदाधिकारियों की लाइन लग जाती है। उनकी दिन भर दौड़ शुरू हो जाती है भाजपा कार्यालय से लगाकर भाईसाहब के विभिन्न कार्यक्रमों तक। जिस दिन भाईसाहब उदयपुर में होते है सुबह से भाजपा कार्यालय में भाईसाहब का इंतज़ार में दिग्गज लगे रहते है, इस आस में की भाईसाहब आजाये और एक बार रामा-सामी हो जाए। हालांकि कोई भी दिग्गज अपनी मंशा जाहिर नहीं करता लेकिन यह भी तय है कि कब भाईसाहब की नज़र किस पर पढ़ जाए और यूआईटी की सीट उसको मिल जाए। और यूआईटी चेयरमेन नहीं तो ट्रस्टी के लिए ही भाईसाहब अपना मन बना लें। कुछ नहीं तो जिले की कार्यकारणी में ही कही जगह मिल जाय।
शक्तावत, कानावत या टांक :
भाजपा के राजनीति गलियारों में इन दिनों तिन नामों पे खासी चर्चा है। प्रेम सिंह शक्तावत जो की गुलाबचंद कटारिया की गुड बुक में है। बीएस कानावत जिन्होंने अपने चेयरमेन शिप के लिए दिल्ली तक जुगाड़ लगा रखा है। अगर ओबीसी को यह सीट दी जाती है तो जीएस टांक का नाम सबसे ऊपर है। इन तीनों नामों में प्रेम सिंह शक्तावत सबसे दमदार दावेदार माने जा रहे है। जो जाती और अपनी छवि के आधार पर अपना दावा मजबूत कर रहे है। सबसे मुख्य बात की गुलाबचंद कटारिया की गुडबुक में सबसे ऊपर प्रेम सिंह शक्तावत का ही नाम है। इन तीन के अलावा प्रमोद सामर का नाम भी यूआईटी चेयरमेन के लिए लिया जारहा था लेकिन पंचायती चुनाव में शंकरलाल के लाखो रुपये हड़पने के आरोप के बाद प्रमोद सामर को अब इस सूचि से बाहर हो गए है। हालांकि यह भी माना जारहा था की प्रमोद सामर के नाम पर कही ना कहीं गुलाब्चाद कटारिया को भी आपत्ति थी फिर चाहे वह जाती के आधार पर हो या पार्टी के अंदरूनी मामले को लेकर हो। इन सबके बीच कई अनुभवी भाजपाई यह भी कहते है कि यूआईटी चेयरमेन के नाम की घोषणा सबको चोंकाने वाली भी हो सकती है क्यूंकि अगर मैडम खुद इस पर निर्णय लेंगी तो कोई नया नाम भी सामने आसकता है जिसके बारे में किसी ने अभी तक सोचा भी नहीं है।

जातिगत गालिया देने पर चार पुलिस कर्मी सस्पेंड

police manउदयपुर । अभद्र व्यवहार, जातिगत गालिया और अनुशासन हीनता के लिए आईजी ने अम्बामाता थाने के दो एएसआई और दो कांस्टेबल को निलंबित कर दिया। पीड़ितों ने आईजी को परिवाद दिया था जिसकी जांच ट्राफिक डिप्टी ने की जिसमे थाने के चारों लोगों पर लगाए आरोप सही पाए गए ।
पुलिस महानिरीक्षक आनंद श्रीवास्तव ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए अम्बामाता थाने के एएसआई कैलाश सिंह और डालचंद तथा कांस्टेबल सुरेश और चेना राम को निलंबित कर दिया। चारों ने कुछ दिन पूर्व थाने में कुछ लोगों पर जाती गत गालिया देते हुए जबरदस्ती १५१ का मामला दर्ज कर दिया था तथा उनसे अभद्र व्यवहार किया था। जिसकी बाद में पीड़ित आयड निवासी सरफराज मक्कड़ पुलिस महानिरीक्षक को परिवाद पेश किया था पुलिस महानिरीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच ट्राफिक डिप्टी रिछपाल सिंह को सोंप दी रिछपाल सिंह पे जांच में अम्बामाता थाणे के दो ए एस आई और दो कांस्टेबल को दोषी पाया। एक कांस्टेबल सुरेश कुमार उस वक़्त पहरे पर था और चेनाराम वायरलेस पर जिसने परिवादी सरफराज और अन्य को जातिगत गालियाँ दी। तथा थाने में आइओ और एक ए एस आई मोजूद थे उन्होंने भी दोष नहीं होते हुए भी शांति भंग का मामला दर्ज किया तथा दोनों पक्ष रजामंदी को तैयार थे इसके बावजूद मामला दर्ज किया।
क्या था मामला :
जानकारी के अनुसार करीब १० दिन पूर्व आयड निवासी मोहम्मद ओन एक अन्य बाइक सवार से सुखाडिया सर्कल पर टकरा गया, जब आपस में झगड़ रहे थे जिनको बाद में अम्बामाता थाने से आई पुलिस ने गाडी में बैठा कर थाने ले गए । जहाँ पर दोनों पक्षों के परिजन आगये और कुछ जन प्रतिनिधि भी पहुच गए और आपस में सुलह कर मामला दर्ज नहीं करवाने की बात कही जिस पर थाने में मोजूद संत्री कांस्टेबल सुरेश कुमार चेना राम और एएसआई ने मोहम्मद ओन के परिजन सरफराज अहमद सहित तिन पर बेवजह मामला दर्ज कर दिया और उन्हें जाती गत गाली गलोच कर अभद्र व्यवहार किया। सरफ़राज़ अहमद ने बाद में अगले दिन जमानत करवा कर पुलिस महानिरीक्षक आनंद श्रीवास्तव को परिवाद दिया जिसकी जांच आईजी ने ट्राफिक उपाधीक्षक रिछपाल सिंह को दी रिछपाल सिंह ने जांच में चारों को दोषी पाया जिस पर महानिक्षक ने उनको निलंबित कर दिया।

उदयपुर के प्रदीप वेद को प्रशस्ति – प्रत्र व एक लाख का चैंक मिला

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FB_IMG_1452755739853उदयपुर। होटल ट्राईडेन्ट मुम्बई, मिनिस्ट्री ऑफ स्कील डवलपमेन्ट एण्ड इन्टरप्रिनियोरशीप द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम मे वर्ड स्कील कम्पीटिशन 2015 साऊ पाऊलो ब्राजिल मे प्रदीप वेद (आईबा व प्रभात हेयर एण्ड ब्यूटी एकेडमी उदयपुर) को हेयर ड्रेसींग मे प्राप्त मेडेलिंयन ऑफ एक्सीलेंस के लिए वेंकैया नायडु – मिनिस्टर ऑफ पार्लियामेन्ट अफेयर व राजीव प्रताप रूडी मिनिस्टर ऑफ स्कील डवलपमेन्ट द्वारा हेयर ड्रेसींग मे देश के लिए एप्रिसीएशन एण्ड एक्सीलेंट परर्फाेमेंस के लिए प्रशस्ति – प्रत्र व एक लाख रू. का चैंक दिया गया। ऑल इंडिया हेयर एण्ड ब्यूटी एसोसिएशन (आईबा) की अध्यक्ष डॉ. संगीता चौहान ,महासचिव अशोक पालीवाल व कोषाध्यक्ष विजय भारद्ववाज ने प्रदीप वेद के साथ उनके हेयर एक्सपर्ट समान्ता कौचर व ट्रेनर पुष्कर सेन, अलीशा चौहान, स्वेताशा पालीवाल व जय पारेख को भी बधाई दी है।

भाजपा नेता प्रमोद सामर और तख़्त सिंह ने जिलाप्रमुख बनाये जाने का झांसा दे कर 25 लाख रुपये लिए थे ? (VIDEO)

Snapshot 1 (1-12-2016 9-05 PM)उदयपुर । शहर में भाजपा की अंदरूनी कहल एक एक कर सामने आरही है। जिला प्रमुख शांति लाल मेघवाल द्वारा दलित होने पर कलेक्टर की उपेक्षा का मामला अभी थमा नहीं था कि देहात जिलाध्यक्ष और पूर्व प्रदेश मंत्री पर जिला परिषद सदस्य ने जिला प्रमुख बनाने का झांसा देकर लाखो रुपये ऐठने का आरोप लगाया है। यह भी आरोप लगाया कि यह लाखों रुपये गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को दिए जाने की बात कह कर लिए गए थे। जिलापरिषद सदस्य ने इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री को भी लेटर लिखा है।
शंकर लाल मेघवाल पटवारी के पद से सेवानिवृत्ति के बाद भाजपा के बैनर तले वार्ड 15 से जिला परिषद सदस्य चुन कर आया था। शंकरलाल मेघवाल ने आज भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री प्रमोद सामर और भाजपा के ही देहात जिलाध्यक्ष तख़्त सिंह शक्तावत पर २३ लाख रुपये लेने की बात कही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा की जब जिला प्रमुख चुना जाना था तब लगभग मेरा नाम तय था। प्रमोद सामर और तख़्त सिंह ने मुझसे २५ लाख रुपये की मांग रखी थी जिस पर मेने दोनों को करीब २३ लाख रुपये अपने बेटे का प्लाट बेच कर दिए थे। शंकरलाल ने आरोप लगाया की प्रमोद सामर और तख़्त सिंह से 23 लाख रुपये देने पहले इसकी जानकारी कटारिया को देने की बात कही तो दोनों नेताओ ने इस रुपये को उनके लिए ही लेने की बात कही। शंकर लाल ने कहा की इसकी शिकायत मेने दो माह पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पत्र लिख कर की है। शंकरलाल मेघवाल ने अपने द्वारा लिखे पत्र में साफ़ किया की जिला प्रमुख नहीं बनाये जाने पर उन्हें यह राशि लौटा दी जाए। अब शंकर लाल यह चाहते हे की उनकी राशि उन्हें फिर से लौटाई जाए क्यूंकि उन्हें जिला प्रमुख बनाने का वायदा पूरा नहीं किया गया हे। शंकर लाल ने कटारिया को ईमानदार अरबपति तो बताया लेकिन कह दिया किसी का ईमान कभी भी डोल सकता है।
संघ के सच्चे नियमों और संविधान का पालन करने वाली भारतीय जनता पार्टी विधान सभा, लोकसभा और उसके बाद पंचायत राज में भारी बहूमत के साथ सत्तासीन तो हुई लेकिन पैसे लेकर टिकिट देने के बाद उच्चे पद पर बिठाने के इस खुलासे के बात यह बात तो साफ हो गई है। पार्टी में टिकिट वितरण के दौरान कई लोगों की पौबारह हुई है तो कई पैसे से भी गए और दमडी कमाने वाला पद भी नहीं मिल पाया। इधर दोनों नेता तख़्त सिंह और प्रमोद सामर शंकर लाल के इस आरोप को निराधार और झूठा बताया है। और इसको संगठन विरोधी कार्रवाई बताई है।

इनका कहना। ……

मुझसे प्रमोद सामर और तख़्त सिंह ने जिला प्रमुख बनाये जाने पर २३ लाख रुपये की मांग की और मेने अपने बेटे का प्लाट बेच कर रुपये इन्हे दिए। जिला प्रमुख नहीं बना तो अब मुझे राशि वापस चाहिए। शंकर लाल मेघवाल , जिला परिषद सदस्य

शंकरलाल मेघवाल के आरोप बिलकुल गलत है निराधार है। कोई रुपये किसी से नहीं लिए गए। जिला प्रमुख बनाने का निर्णय संगठन का था। और यह बात शंकर लाल एक साल बाद क्यों कह रहे है तब क्यों कही। तख़्त सिंह , भाजपा देहात जिलाध्यक्ष

आरोप झूठे और निराधार है, एक तरह से यह संगठन विरोधी कार्रवाई है और इसके लिए संगठन को शिकायत भी की जायेगी। किसी ने किसी से कोई रुपया नहीं लिया। प्रमोद सामर , पूर्व प्रदेश मंत्री।

https://www.youtube.com/watch?v=9A6F2fLmXeQ

 

https://www.youtube.com/watch?v=zJVWRS43NMc

मानव अधिकार आयोग के सदस्य ने मेडिकल अधिकारियों को लताड़ा

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उदयपुर । राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य डॉ. एमके देवराजन ने सोमवार को जिला प्रशासन की बैठक लेकर सिलिकोसिस-एस्बेस्टोसिस के पीडि़त मरीजों के मामले में काम नहीं करने पर चिकित्सा एवं मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को जमकर लताड़ा। अफसरों को लताड़ते हुए देवराजन ने कहा कि वे आदिवासी अंचल में पीडि़त एस्बेस्टोसिस और सिलिकोसिस
जैसी घातक बीमारियों से ग्रसित खान मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच नहीं करने और इनकी रिपोर्ट सरकार को नहीं देकर एक अपराध कर रहे हैं। देवराजन जिला कलेक्टे्रट सभागार में सिलिकोसिस/एस्बेस्टोसिस बीमारी से पीड़ित खनिज श्रमिकों/मृत्यु उपरांत उनके विधिक उत्तराधिकारियों के भुगतान एवं केम्प कोर्ट व जन सुनवाई बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
डॉ. देवराजन ने कहा कि ऎसे जोखिम भरे उद्योगों में नियोजित श्रमिकों की पूर्ण पहचान हो तथा इनके स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाए ताकि रोग की स्थिति का पता चल सके। उन्होंने बताया कि राजस्थान में विगत तीन माहों में 2 हजार 200 प्रकरण चिह्नित किए गए हैं।उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि पूर्व में इस बीमारी की जांच की कोई व्यवस्था नहीं थी जबकि वर्तमान में मोबाइल वैन मिली है जिससे जांचें की जाएगी। इस पर देवराजन ने कहा कि प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव व मौजूदा अधिकारी तक इस बारे में गंभीर हैं लेकिन निचले स्तर पर पूरा मेडिकल विभाग पंगु बना हुआ है। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों से सिलिकोसिस व एस्बेस्टोसिस पर सवाल-जवाब किए व तकनीकी जानकारी मांगी। इसके अलावा कारखाना एव बॉयलर्स डिपार्टमेंट, खान विभाग, जिला प्रशासन व श्रम विभाग से भी सवाल-जवाब किए और आक्रामक रुख में आयोग ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि खान मजदूरों के स्वास्थ्य के प्रति अफसर गंभीर नहीं हैं और अफसर राज चलता है। उन्होंने ये कहा कि आयोग ने 2009 में इस मामले का प्रकरण दर्ज किया। एमएलपीसी संस्थान यह मामला आयोग में लाई थी। उसके वाबजूद उदयपुर का मेडिकल विभाग इस मामले में कभी भी सभी मजदूरों को इस बीमारी के चिह्नीकरण में मदद नहीं दे सका जिससे मरीजों की मौतें होती जा रही हैं। विभाग सही ढंग से इनकी पहचान नहीं कर सका।
उन्होंने जिला प्रशासन व तमाम विभाग को पुख्ता जांच की व्यवस्था कर खनन इलाकों में मोबाइल वैन भेज कर व मजदूरों की गहन चिकित्सा व इनकी रिपोर्ट ऊपर भेजने के आदेश दिए। इसके साथ ही न्यूमोकनोसिस बोर्ड के चिकिसाधिकारयों से भी सवाल- जवाब किए। उनके लंबित प्रमाण-पत्र तत्काल संबंधित एजेंसियों को देने के आदेश दिए। क्वाट्र्ज व फेल्सपार खनिज के खनन तथा प्रसंस्करण इकाइयों में लगे मजदूरों के भी स्वास्थ्य के जांच के एमके देवराजन ने आदेश दिए व कहा कि इसकी सत्यता का पता लगा जाए कि क्वाट्र्ज व फेल्सपार उद्योग से जुड़े लोगों व मजदूरों में सिलिकोसिस व एस्बेस्टोसिस बीमारी नहीं लगी। इसकी सत्यता का पता लगाकर इसकी रिपोर्ट पेश की जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार 2013 में एक योजना ऎसे श्रमिक/मृतक परिवारों के लिए बनाकर क्रमशः एक व तीन लाख की नकद सहायता का प्रावधान किया गया है।
डॉ. देवराजन ने क्वाटर््ज, मूर्ति निर्माण, जेम कटिंग, क्रेशर तथा खनन उद्योगों में नियोजित श्रमिकों की मॉनिटरिंग करने के साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से श्रमिकों के स्वास्थ्य जांच के शिविर आयोजित करने पर जोर दिया जिससे रोगी की पहचान हो सके। साथ ही उन्होंने ऎसे औद्योगिक क्षेत्रों के आस-पास रहने वाले निवासियों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने को कहा। डॉ. देवराजन ने जिले में गठित न्यूमोकोनियोसिस बोर्ड को प्रभावी भूमिका निभाते हुए इस योजना का लाभ पीड़ितजन को दिलाने की अपील की।
बैठक में जिला कलक्टर रोहित गुप्ता ने कहा कि योजना का लाभ प्रभावितों को दिलाने के लिए जिले में अधिकाधिक शिविर आयोजित किए जाएंगे। जिला प्रशासन अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जायेगा।
बैठक में खान सुरक्षा, श्रम विभाग, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, खान एवं भू-विज्ञान सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने अपनी बात और सुझाव भी रखे।
बैठक में जिला प्रमुख शांतिलाल मेघवाल, अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) ओ.पी.बुनकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी, उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक विपुल जानी, संयुक्त श्रम आयुक्त पतंजलि भू सहित संबंधित विभागों के अधिकारीगण मौजूद थे।

भारत में पानी से भी ज्यादा सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल!

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petrolउदयपुर . कच्चे तेल की कीमत में जारी गिरावट के मद्देनजर भारतीय बास्केट में तेल की कीमत एक लीटर मिनरल वाटर से भी नीचे आ सकता था, लेकिन सरकार के उत्पाद शुल्क में भारी बढ़ोतरी के कारण इसका फायदा आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
एक बोतल पानी की कीमत के बराबर पेट्रोल का प्राइज
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस हफ्ते के आखिरी में भारतीय बास्केट में कच्चा तेल 2001.28 (30.02 डॉलर प्रति बैरल) रुपए प्रति बैरल पर आ गया। एक बैरल 158 लीटर होता है। अगर लीटर के संदर्भ में इसकी गणना की जाए तो यह 12.67 रुपये प्रति लीटर का पड़ेगा जो एक लीटर पानी के मूल्य 15 रुपए से भी कम है। लेकिन, सरकार के नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच उत्पाद शुल्क में सात बार बढ़ोतरी करने से दिल्ली में पेट्रोल 59.35 रुपए और डीजल 45.03 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है।
सरकार ने कयों उठाया ऐसा कदम?
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ उठाते हुए राजस्व घाटा कम करने के लिए सरकार ने गत 07 नवंबर से अब तक तीन बार पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया है। 07 नवंबर को पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 1.60 रुपए तथा डीजल पर 30 पैसे प्रति लीटर बढ़ाया गया था, जबकि 16 दिसंबर को इनमें क्रमश: 30 पैसे तथा 1.17 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। 
नंवबर में 4 बार बढ़ाई गई कीमत
सरकार ने इससे पहले नवंबर 2014 से जनवरी 2015 के बीच भी चार बार में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 7.75 रुपए तथा डीजल पर 6.50 रुपए प्रति लीटर बढ़ाया था। इस प्रकार मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से सात बार में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 11.02 रुपए तथा डीजल पर 9.97 रुपए प्रति लीटर बढ़ चुका है।

दोस्त दोस्त ना रहा – बार चुनाव में दोस्त हुए आपने सामने, दोस्तों की लड़ाई का फायदा ले सकता है तीसरा

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उदयपुर । बार एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। और इस त्रिकोणीय संघर्ष में दो दोस्तों की लड़ाई में तीसरा बाजी ले जासकता है। अध्यक्ष पद के तीन दावेदारों में दो जिगरी दोस्त है। जिन्होंने दोस्त बन एक दूसरे का हमेशा साथ दिया हमेशा साथ रहे लकिन अब अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करते हुए एक दूसरे के सामने खड़े है। एक ही संगठन और एक ही ग्रुप के ये दो दोस्त अपने अध्यक्ष बनने की महत्वकांशा के चलते एक दूसरे को झुकाने में लगे हुए है।
बार एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद की लिए आज भरत वैष्णव ने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया पूर्व में भरत जोशी और प्रवीण खण्डेलवाल अध्यक्ष पद के लिए भर चुके है। कोर्ट में इस बात की चर्चा है कि एक ही संगठन के और एक ही गुट के आपस में जिगरी दोस्त भारत जोशी और प्रवीण खण्डेलवाल अध्यक्ष पद की दावेदारी करते जब एक दूसरे के विरोध में है तो इसका फ़ायदा तीसरे दावेदार भरत वैष्णव को मिल जाएगा।
भरत जोशी और प्रवीण खण्डेलवाल दोनों दावेदार अधिवक्ता बरसों से जिगरी दोस्त है और आज एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे है। पिछले चार वर्षों में तीन बार भरत जोशी अध्यक्ष रहे और एक बार प्रवीण खण्डेलवाल अध्यक्ष रहे। दोस्ती और एक ही ग्रुप के चलते दोनों ने एक दूसरे के प्रचार और चुनाव लड़ने में जी जान एक लगा कर मेहनत की और विजय हासिल की। यही नहीं दोनों भाजपा समर्थित है, लेकिन भाजपा ने अभी तक किसी भी प्रत्याशी के को हरी झंडी नहीं दी है। जोशी और खंडेलवाल के समर्थक भी लगभग सामान है, कई समर्थक इस दुविधा में भी है की कहाँ किसके साथ जाएँ। जोशी और खंडेलवाल का कहना है कि हम दोस्त है और रहेगे यह बात अलग है की चुनाव में अभी एक दुसरे के विरोध में खड़े है लेकिन इससे हमारे रिश्तों में कोई फर्क नहीं आयेगा।
एक दुसरे की बात नहीं समझे और दावेदारी कर दी :
तीन बार अध्यक्ष रह चुके भरत जोशी का कहना है कि उन्होंने प्रवीन खंडेलवाल से पूछा था की
क्या उनका इरादा चुनाव लड़ने का है ? उन्होंने चुनाव के प्रति अपनी अनिच्छा जाहिर की इसके बाद ही हमने अध्यक्ष पद के लिए तैयार की, लेकिन आखरी वक़्त में जब तैयारी पूरी हो गयी तब उन्होंने भी कहा कि में चुनाव लड़ना चाहता हु तब तक हमारी तैयारी पूरी हो चुकी थी। निवर्तमान अध्यक्ष प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि में एक बार और चुनाव लडुगा इसके बावजूद भी भरत जोशी ने अपनी दावेदारी की, मुझे और मेरे मित्रों का मानना है कि हमारी जीत निश्चित होगी।
तीसरा दावेदार हो सकता है मजबूत :
अध्यक्ष पद के तीसरे दावेदार भरत वैष्णव ने भी आज दिन में नामांकन दाखिल कर दिया। राव ग्रुप के माने जाने वाले भारत वैष्णव पूर्व में महासचिव रह चुके है। भरत जोशी के समय चुनाव में बढ़ चढ़ कर उनकी सहायता भी कर चुके है। दो दोस्तों की इस चुनावी लड़ाई में भरत वैष्णव को लाभ मिलने के पुरे चांस है। एक बोहत बड़ा अधिवक्ताओं का ग्रुप भारत वैष्णव के साथ है।

अब तक यह हुए नामांकन :
बार एसोसिएशन उदयपुर के चुनाव के लिए अब तक अध्यक्ष पद पर तीन उम्मीदवार भरत कुमार जोशी, भरत वैष्णव एवं प्रवीण खण्डेलवाल। उपाध्यक्ष पद पर चार उम्मीदवार अरूण सनाढ्य, गोपाल सिंह (चौहान), हरीश पालीवाल एवं विजय सिंह चौहान, महासचिव पद पर चार उम्मीदवार आशुतोष पुरी गोस्वामी, ओम प्रकाश बारबर, प्रवीण गदिया एवं राम लाल जाट, सचिव पद पर तीन उम्मीदवार भारत कुमावत, सौरभ दुबे एवं यशवन्त मेनारिया, वित्त सचिव पद पर चार उम्मीदवार प्रताप सिंह मईडा, शीतल नंदवाना, धर्मेन्द्र सोनी एवं उदयसिंह देवड़ा तथा पुस्तकालय सचिव पद पर तीन उम्मीदवार हरिश सेन, शरद अग्रवाल एवं मनीष खण्डेलवाल अपने-अपने नामांकन प्रस्तुत कर चुके है।

आंतकी हमले के विरोध में कालीपट्टी बाँध कर खेला क्रिकेट – MMS कप

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उदयपुर। एमएमएस कप के पांचवे दिन का नौवा मैच फयूरस क्लब और एम बॉयज के बीच खेला गया। आज के दोनो मैच में सभी खिलाडियो ने अपने हाथ पर काली पट्टी बांधकर पठानकोट में हुए आंतकी हमले का विरोध किया। फयूरस क्लब ने टॉस जीतकर पहले खेलते हुए 20 ओवर में चार विकेट खोकर 129 रन बनाये। फयूरस क्लब के सनी ने 48 गेंद पर 57 रन बनाये। एम बॉयज के सोहिल ने चार ओवर में 1 मेडन व 9 रन देकर 3 विकेट लिये। जबाव में एम बॉयज ने 20 ओवर में 8 विकेट पर 115 रन ही बना सके। एम बॉयज के मोनीष ने 48 गेंद पर 54 रन बनाये। फयूरस क्लब के समीर ने 4 ओवर में 21 रन देकर 3 विकेट लिये। मैन ऑफ द मैच फयूरस के सनी को भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष वीरू बन्ना, सुल्तान खान ने दिया।
दूसरा मैच पहाडा टाईगर व आर सी क्लक के बीच हुआ। आरसी क्लब ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर मे 9 विकेट पर 146 रन बनाये। मोहम्मद साहीद ने 26 गेंद पर 4 चौके व 3 छक्के लगाकर 45 रन बनाये। पहाडा टाईगर के अजहर ने 4 ओवर में 18 रन देकर 4 विकेट लिये। जबाव में लक्ष्य का पीछा करने उतरी पहाडा टाईगर ताश के पते की तरह बिखर गयी। फारूख के सामने पहाड़ा टाईगर का एक भी खिलाडी 15 रन तक नहीं बना सका और अपनी टीम को 85 रन से जीत दिला दी। पहाडा टाईगर 11 ओवर में 61 रन पर ऑल आउट हो गयी। फारूख ने 2.3 ओवर में 12 रन देकर 5 विकेट लिये। मैन ऑफ द मैच फारूख को दिया गया।