जयपुर। राजधानी जयपुर के करणी विहार थाना क्षेत्र में नशीला पदार्थ खिलाकर दुष्कर्म करने और अश्लील फोटो खींचने का मामला सामने आया है। पीडिता ने इस्तेगासे के जरिए रिपोर्ट दर्ज कराकर आरोप लगाया कि युवक ने उसे शादी का झांसा दिया और लम्बे समय तक उसका देहशोषण भी किया। महिला थाना पश्चिम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
करणी पैलेस रोड निवासी 25 वर्षीया पीडिता ने रिपोर्ट दी है कि उसके पड़ोसी युवक सतवीर कुमावत से उसकी लंबे समय से दोस्ती थी। पीडिता का आरोप है कि आरोपी ने उसे शादी का झांसा देकर झूठे प्रेमजाल में फंसाया और कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ पिला दिया। इसके बाद उससे दुष्कर्म किया और उसकी अश्लील फोटो भी खींच ली।
पीडिता ने बताया कि आरोपी लंबे समय से शादी का झांसा देता रहा और देहशोषण करता रहा। अब उसने शादी से इंकार कर दिया। पीडिता ने महिला थाना पश्चिम में इस्तगासे के जरिए रिपोर्ट दर्ज करवाई है।
उदयपुर , पिछले एक दशक में हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने मुसलमानों के बीच कुछ थोडी बहुत पैठ बनाई है लेकिन उदयपुर में कांग्रेस की मुसलमानों पर मजबूत पकड बरकरार है। जुलाई २०१० में उदयपुर जिले में खैरवाडा के पास सराडा गांव में मुसलमानों के विरुद्घ हिंसा की जो घटना घटी थी उसने कांग्रेस को मिलने वाले मुस्लिम समुदाय के समर्थन को प्रभावित नहीं किया है। मुस्लिम छीपा समाज, उदयपुर, के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवत्त*ा मोहम्मद शरीफ छीपा ने कहा, ’’जहाँ तक मुसलमानों का प्रश्न है, भाजपा विकल्प नहीं है।’’
उन्होंने आगे कहा, ’’उदयपुर में मुसलमान अधिकतर गरीब और शिक्षा की दृष्टि से पिछडे हुए हैं और महसूस करते हैं कि उनकी प्रगति के लिये शैक्षणिक उन्नति आवश्यक है। हालांकि बहुत कुछ करने की आवश्यकता है लेकिन इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये कांग्रेस सरकार ने मुसलमानों की मदद के लिये कुछ योजनायें शुरु करके एक शुरुआत की है।’’
शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय एन जी ओ, लाइफ प्रोग्रेसिव सोसाइटी, के अध्यक्ष डा. खलील मोहम्मद अगवानी इस बात से सहमत थे कि शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अधिक पिछडे होने के कारण उदयपुर के मुसलमानों को शैक्षणिक उन्नति के लिये सहायता की आवश्यकता है।
राष्ट्रदूत जिन लोगों के साथ साक्षात्कार किया उनमें से कई लोगों ने इस भावना की पुष्टी की। तथापि, पिछले एक दशक में, कुछ मुस्लिम एक्टिविस्ट भाजपा नेता गुलाब चंद कटारिया के व्यत्ति*गत प्रयासों के कारण भाजपा में शामिल हुए हैं।
इनका मानना है कि उदयपुर में मुस्लिम नेतृत्व क्रब्रिस्तान, मस्जिद तथा दरगाहों के मुद्दों के आगे देख ही नहीं रहा है। समुदाय की $जरुरतों और मांगों के प्रति समुदाय का जो रुख है उसे लेकर अपनी चिंता जताते हुए एक युवा मुस्लिम एक्टिविस्ट, इकराम रशीद कुरैशी ने कहा, ’’हमें अपना सोच ब$डा करने की $जरुरत है और इन मुद्दों से आगे ब$ढकर सोचना चाहिये।’’
इकराम रशीद कुरैशी भाजपा प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्षों में एक हैं।
इकराम रशीद ने कहा, ’’समुदाय की आकांक्षाओं और उम्मीदों को ऐसे मुद्दों तक सीमित करने से हमारी दृष्टि संकीर्ण होती है। हमें समग्र विकास की कल्पना करनी चाहिये, जो कि उस समिति में संभव नहीं, यदि समुदाय भाजपा को अनदेखा करता है। क्योंकि भाजपा एक ब$डी राजनीतिक ताकत है।’’
उदयपुर जिले में आठ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं जिनमें से २००८ में कांग्रेस ने सात तथा भाजपा ने एक सीट जीती थी। मुस्लिम मतदाता मुख्यत: उदयपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में केन्द्रित हैं, जहाँ इनकी संख्या लगभग ३२ ह$जार है, जबकि उदयपुर ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र में करीब १० से १२ ह$जार मुसलमान हैं।
सन् २०१० जुलाई में उदयपुर जिले के सरा$डा गांव में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जहाँ राज्य के विभिन्न भागों के मुसलमान उत्तेजित हुए, वहीं उदयपुर के मुस्लिम एक्टिविस्ट इस घटना को कुछ दूसरी तरह से देखते हैं।
यह घटना २५ जुलाई, २०१० को घटी, जब आदिवासियों के एक झुण्ड ने सरा$डा गांव में मुसलमानों के करीब ७० घरों को लूटा और आग लगा दी। यह घटना एक आदिवासी, शराब विक्रेता मोहन मीना की ३ जुलाई को हुई हत्या को लेकर मुसलमानों और आदिवासियों के बीच पैदा हुए तनाव का नतीजा थी। कथित रुप से शराब के नशे में हुई ल$डाई में एक शह$जाद खान ने मोहन मीना की हत्या कर दी थी।
पुलिस ने ९ जुलाई को गुजरात से शह$जाद खान को गिरफ्तार कर लिया लेकिन आदिवासी खुश नहीं थे तथा बदला लेना चाहते थे। बातचीत के माध्यम से मुस्लिम और आदिवासी समुदायों के बीच सामान्य स्थिति बहाल करने के निरन्तर किये जा रहे प्रयासों के बावजूद तनाव बना रहा।
एक पंचायत के बाद २५ जुलाई को आदिवासी समुदाय ने मुस्लिम घरों पर हमला कर दिया। छितरे हुए घरों में रह रहे मुस्लिम परिवारों ने पहले ही अपने घरों को छो$डकर पुलिस स्टेशन में पनाह ले ली थी। उनकी अनुपस्थिति में घरों को लूटा गया तथा करीब ७० घरों में आग लगा दी गई।
२६ जुलाई को, आदिवासियों की तरफ से और अधिक हिंसा की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने इन मुस्लिम परिवारों को उस क्षेत्र से बाहर भेज दिया तथा बाद में उन्हें उदयपुर लाया गया।
मुस्लिम मुसाफिर खाना, उदयपुर, के अध्यक्ष इब्राहिम खान ने कहा, ’’सरा$डा से करीब १५० मुसलमान उदयपुर लाये गये और यहाँ उन्हें एक सामुदायिक भवन में रखा गया।’’ उन्होंने आगे कहा, ’’जिन मुसलमानों को उदयपुर लाया गया वो अधिकतर वही थे जिन्होंने पुलिस स्टेशन में शरण ली थी।’’ उन्होंने आगे कहा कि हालांकि तत्कालीन गृह मंत्री, शांति धारीवाल एवं राजस्थान मदरसा बोर्ड चेयरमैन फ$जालुल हक इन लोगों से मिलने आये और उनकी शिकायतें सुनीं, लेकिन भोजन तथा अन्य आवश्यकताओं को स्थानीय मुसलमानों ने पूरा किया, जिनमें प्रमुख थे हाजी अब्दुल गफूर मेवाफरोश।
जिस तरीके से मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने राज्य की राजधानी जयपुर में इस मुद्दे को उठाया उसकी कई लोगों ने आलोचना की। एक एक्टिविस्ट ने कहा, ’’जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार को पूरी तरह से दोषी ठहराने के चक्कर में इन नेताओं ने ना तो स्थानीय सामाजिक असलियत को समझा ना ही इस तथ्य को पहचाना कि अत्यधिक उत्तेजित माहौल के बावजूद घटना में एक भी मुसलमान ना तो घायल हुआ ना ही मरा।’’
उदयपुर के एक और एक्टिविस्ट, ने कहा, ’’यह संभव नहीं हो सकता था, यदि पुलिस तथा जिला प्रशासन ने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया होता, और यह तथ्य, कि पुलिस ने मुसलमानों को पूरी सुरक्षा दी और आक्रामक आदिवासी उन पर हमला नहीं कर पाये, दर्शाता है कि वहाँ पर मुसलमानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिये पुलिस ने कार्यवाही की।’’
एक स्थानीय मुस्लिम पत्रकार ने कहा ’’लोग, विशेषकर वे लोग जो नेतृत्व पाने का दावा कर रहे हैं, उन्हें हिंसा रोकने के लिये अधिकारियों द्वारा किये गए प्रयासों को पहचानना चाहिये। प्रशासन और पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर जैसे अधिकारियों के कार्य का निर्णय केवल नतीजों के आधार पर नहीं करना चाहिये।’’
यह मुसलमान करीबन १५ दिन की अवधि में सरा$डा लौटे हैं। दंगाइयों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किये गए हैं और लूट, आगजनी एवं दंगा करने के लिये करीबन ६० आदिवासी गिरफ्तार किये गए हैं।
इसके बाद जो मुद्दा शेष रहता है वह संपदाओं की हानि के लिये बेहद कम मुआवजे का है।
इस मुद्दे पर न$जरिया पेश करते हुए इब्राहीम $खान ने कहा कि सरा$डा में मुसलमान पठान पल्टन के वंशज हैं जो आक्रामक रुप से स्वतंत्र आदिवासियों में व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये पुराने मेवा$ड राज्य में सेना के हिस्से के तौर पर यहां तैनात की गई थी। इस क्षेत्र में एक $िकला भी है जो पूर्व कालीन मेवा$ड रियासत के सबसे उद्घंड अपराधियों के कारागार के रुप में काम आता था।
इब्राहीम $खान ने कहा ’’आदिवासी मानसिकता में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अब भी मुसलमानों के बारे में समझ को आकार देती है।’’ उदयपुर दिखाता है कि जब समाज और इसकी सोच को देखने की बात आती है तो अनेक न$जरिये होना मुमकिन है और जो दृश्य के न$जदीक होते हैं वे अक्सर वह तथ्य देख पाते हैं जो दूर के स्थानों के लोगों द्वारा अनदेखे कर दिये जाते हैं।
उदयपुर। उदयपुर के सांसद रघुवीर मीणा और उनकी पत्नी सलूंबर विधायक श्रीमती बसंती देवी मीणा ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में समय-समय पर भरे शपथ पत्रों में अलग-अलग क्रपेन कार्डञ्ज नंबर अंकित किए हैं। दस्तावेजों की छानबीन में यह गड़बड़झाला सामने आया है। आयकर विभाग किसी भी व्यक्ति को एक PAN कार्ड आबंटित करता है। यदि PNA कार्ड गुम हो जाए, तो पुलिस थाने में रिपोर्ट करके निर्धारित अवधि के बाद आयकर विभाग के सक्षम अधिकारी के समक्ष डुप्लीकेट पेन कार्ड के लिए आवेदन किया जा सकता है। यह कार्ड डुप्लीकेट बनेगा, न कि दूसरा। कार्ड के नंबर वहीं पुराने वाले होंगे। नंबर नहीं बदलेंगे। यदि कोई दूसरा पेन कार्ड बनवा लेता है, तो वह आयकर विभाग से धोखाधड़ी का दोषी है। विभाग इस आर्थिक अपराध में दस हजार रुपए की पैनल्टी लगा सकता है। विभाग चाहे तो उसके खिलाफ धारा 420 में केस दर्ज करवा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सांसद रघुवीर मीणा ने सात नवंबर 2008 को सलूंबर विधानसभा क्षेत्र से विधायक पद के लिए रिटर्निंग ऑफिसर के सामने प्रस्तुत नामांकन पत्र में परमानेंट अकाउंट नंबर एजेएलपीएम ४९३० डी बताए, जबकि १२ नवंबर २०१३ को श्री मीणा की पत्नी बसंती देवी मीणा ने सलूंबर क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में विधायक पद के लिए प्रस्तुत किए गए नामांकन पत्र में अपने पति रघुवीर मीणा के पेन कार्ड नंबर एजेएपीएम ५७४२-जे दर्शाए हैं। इस प्रकार सरकारी दस्तावेजों में अंकित जानकारी में आयकर विभाग से छल किया गया यह सामने आया है, जिसके जरिए आय छिपाए जाने का अंदेशा होता है।
दूसरी और यदि किसी त्रुटिवश ऐसा हुआ है, तो नामांकन की तिथि समाप्त होने से यह गलती सुधारने की गुंजाइश भी समाप्त हो गई है। ऐसे में गलत जानकारी की वजह से नामांकन रद्द होने का खतरा भी पैदा हो गया है। इस बारे में सांसद और उनकी पत्नी से काफी कोशिश के बाद भी बात नहीं हो पाई, जिससे उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।
udaypur, राज्य के शेखावाटी, मेवात और हाडौती अंचलों की राजनैतिक अंतर्धाराओं के एकदम विपरीत मेवाड के चित्तौडगढ और प्रतापगढ के मुसलमान इन चुनावों में कांग्रेस के साथ मजबूती से जुडे हुए है। इन भावनाओं को दोहराते हुए कई मुसलमानों ने कहा कि मतदान दिवस मुसलमानों के लिये त्यौहार जैसा होता है जो बडी संख्या में यह मानते हैं कि मत देने जाने का अर्थ कांग्रेस के लिये मत देना है।
इस भावना के बताए गए विभिन्न कारण कांग्रेस का उनकी प्राकृतिक पार्टी होने से लेकर गत पांच सालों में अशोक गहलोत सरकार के काम तक थे।
चित्तौडगढ में गहलोत है फेवरेट :
चित्तौडगढ के नजदीक मुस्लिम बाहुलय गांव सावा की पंचायत समिति के सदस्य अकरम हुसैन अंसारी ने मेडिकल जांच योजना, वृद्घावस्था पेंशन, विधवा पालनहार योजना के अलावा अशोक गहलोत सरकारी विशेष रुप से मुसलमानों के लिये लक्षित कई अन्य योजनाओं का उल्लेख इस समर्थन के कारण के रुप में किया। उन्होंने कहा ’’इन योजनाओं ने क्षेत्र में कांग्रेस सरकार की विशेष रुप से ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी साख बनाई है। इसके अलावा सरकार ने इस छोटे से गांव के लिये आई टी आई स्वीकृत किया है।’’ उन्होंने आगे कहा कि उनके क्षेत्र के ग्राम वासियों के पूर्व सक्रिय तरीकों तथा अधिक जागरुकता के कारण मुसलमानों सहित सभी समुदायों को इन योजनाओं से लाभ मिला है।
उनके दृष्टिकोण की पुष्टि करते हुए अंजुमन मुस्लिम समाज के अध्यक्ष अब्दुल गनी शैख ने कहा ’’हम हमेशा केवल राजनीतिज्ञों और राजनैतिक दलों पर निर्भर नहीं रह सकते, अपने हक का उचित हिस्सा पाने के लिये समुदाय को जागरुक और पूर्वसक्रिय होने की जरुरत है।
ऐसा एक उदाहरण देते हुए अब्दुल गनी शैख ने कहा कि अल्प संख्यक विद्यार्थियों के छात्रावास निर्माण हेतु जिला प्रशासन ने दो बीघा का भूखंड आवंटित किया। लेकिन यह प्लाट किसी काम का नहीं है क्योंकि उस तक पहुंचा नहीं जा सकता और यह नीचे दबे हुए स्थान पर है।
अब्दुल गनी शैख ने कहा कि जब उन्हें यह सूचना मिली तो वे तथा अंजुमन के अन्य लोग उस जगह को देखने गए और पाया कि वह भूखण्ड उपयुत्त* नहीं है।
वे स्थानीय विधायक सुरेन्द्र सिंह जाडावत को भी मौके पर ले गए जिन्होंने उनके मूल्यांकन से सहमति जताई। इसके बाद उन्होंने कुछ लोगों से संपर्क किया और चित्तौडगढ नगर परिषद के पास उपलब्ध कुछ वैकल्पिक भूखण्डों को चिन्हित किया।
अब्दुल गनी शैख ने आगे कहा कि अंजुमन का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मिला और इस अनुपयुत्त* भूखण्ड का आवंटन रद्द करवा के शहर में २०,००० वर्ग फीट का दूसरा भूखण्ड ले लिया।
मेवाड क्षेत्र में लगभग हर शहर और कस्बे में अपने सामुदायिक कार्यों को चलाने के लिये मुसलमानों की यह विशिष्ट संगठन व्यवस्था है। यह संगठन अंजुमन मुस्लिम समाज कहलाता है। अंजुमन इन सभी शहरों और कस्बों के मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करती है। अंजुमन के पदाधिकारियों का चुनाव होता है जहां हर मुहल्ले का प्रत्येक मुसलमान अपने प्रतिनिधि चुनने के लिये मत देता है। अंजुमन स्कूल, मदरसा, मुसाफिर खाना जैसी कुछ सामुदायिक संपदाओं का प्रबंध करती है।
भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता इकबाल खिलची ने कहा ’’इस क्षेत्र के मुसलमानों में एक मानसिकता विकसित हो गई है कि कांग्रेस ही एक मात्र पार्टी है जो उनके वोट के लायक है। इस कारण मुस्लिम मुद्दों के प्रति कांग्रेसी नेतृत में कुछ आत्म संतुष्टि की भावना आ गई है।’’
निम्बाहेड़ा में मुस्लिम कांग्रेस के समर्थन में लेकिन नगर पालिका में एक भी सीट नहीं :
एक वरिष्ठ कांग्रेसी तथा निंबाहेडा नगर पालिका के अध्यक्ष मनोहर लाल विरानी ने कहा कि मुस्लिम पंरपरागत रुप से कांग्रेस के समर्थक रहे हैं और इस संबंध को पार्टी संरचना तथा स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराके और भी मजबूत किया जाना चाहिये।
निंबाहे$डा नगर पालिका की वर्तमान संरचना से यह समस्या स्पष्ट दिख जाती है। निम्बाहे$डा में लगभग २५ प्रतिशत आबादी होने के बावजूद मात्र दो मुसलमान, एक कांग्रेस और एक भाजपा का, वर्तमान नगर पालिका में निर्वाचित हुए हैं। निंबाहे$डा के सामाजिक सक्रिय कार्यकर्ताओं के अनुसार यह स्थिति इस लिये आई कि कांग्रेस ने मुसलमानों को टिकिट वितरण में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया और कई मुसलमानों ने निर्दलीय के रुप में चुनाव लडा।
प्रताप गढ़ कि नगर परिषद् में भी कोई मुस्लिम पार्षद नहीं
जिन मुस्लिम सक्रिय कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार लिये उन्होंने प्रतापगढ में ऐसे ही मुद्दे उठाए। जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष और नगर कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष मंसूर खान ने कहा कि प्रतापगढ नगर परिषद के चुनावों के दौरान कांग्रेस ने मुसलमानों को एक भी टिकिट नहीं दिया जबकि भाजपा ने एक मुसलमान प्रत्याशी को टिकिट दिया लेकिन वह चुनाव हार गया।
मंसूर खान ने जोडा ’’अभी प्रतापगढ शहर की आबादी का लगभग २० प्रतिशत होने के बावजूद एक भी मुसलमान वर्तमान नगर परिषद का पार्षद नहीं है क्योंकि कांग्रेस ने नामांकित सीटों पर भी किसी मुसलमान को नामांकित नहीं किया।’’
उनके अनुसार प्रतापगढ नगर परिषद में २५ वार्ड हैं और पहले कांग्रेस से मुसलमानों को ३-४ टिकिट मिला करते थे।
नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के पद पर नामांकित करने के असर का मूल्यांकन देते हुए मुस्लिम महा सभा के जिला अध्यक्ष मुहम्मद शकील शैख ने कहा कि कुछ मुसलमान, हालांकि नगण्य ही हैं, अटल बिहारी वाजपेयी, भैरों सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे जैसे नेताओं के कारण भाजपा की तरफ झुक रहे थे लेकिन अब वह प्रवृति भी नरेन्द्र मोदी के वर्चस्व के कारण रुक गई है।
मुस्लिम समर्थन को आकृष्ट करने में भाजपा की विफलता के कारण स्पष्ट करते हुए चित्तौडगढ में हजरत चल फिर शाह दरगाह की प्रबंध समिति से जुडे हुए सैयद दौलत अली और सैयद बरकत अली ने कहा कि क्षेत्र में कांग्रेस को मुस्लिम समर्थन का कारण यह है कि एक मात्र दूसरी पार्टी भाजपा है जो हमेशा सामुदायिक मुद्दों पर मुस्लिम भावनाओं के विरुद्घ रुख अपनाती है।
सैयद दौलत अली ने आगे कहा ’’लेकिन कांग्रेस विभिन्न बोर्डों और निकायों में अयोग्य मुसलमानों को नियुत्त* करती है जो समुदाय की सेवा करने के बजाय अपने निजी और राजनैतिक हितों को बढावा देने में लग जाते हैं।
चित्तौडगढ जिले में पांच और प्रतापगढ जिले में दो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं। प्रतापगढ जिले के धरियावद निर्वाचन क्षेत्र के अलावा इन सभी चुनाव क्षेत्रों में मुसलमान मतदाता महत्वपूर्ण संख्या में हैं।
चित्तौडगढ जिले के ङ्क्षनबाहेडा चुनाव क्षेत्र में इस अंचल के सबसे अधिक मुसलमान मतदाता हैं जिनकी संख्या ५० हजार के आसपास है जबकि प्रतापगढ विधानसभा चुनाव क्षेत्र में यह संख्या ३५ हजार के करीब है। चित्तौडगढ विधानसभा सीट में लगभग १५ हजार, बेंगू में भी लगभग १५ हजार, कपासन में लगभग १२ हजार तथा ब$डी साद$डी में करीबन १० हजार मुस्लिम मतदाता हैं।
उदयपुर। उदयपुर शहर विधानसभा से कांग्रेस के प्रबल दावेदार लालसिंह झाला का टिकट काट कर पार्षद दिनेश श्रीमाली को शहर का दावेदार घोषित करने पर देहात कांग्रेस के कार्यकर्ता व् कुछ युवाओं ने अपना गुस्सा शहर के चेतक चौराहे पर जम कर निकाला
झाला समर्थकों ने चेटक सर्कल पर डॉ. सीपी जोशी के पुतले को जूतों की माला पहनाकर जूते मारे और एक झाला समर्थक ने सिर भी मुंडवा दिया। इस दौरान एक काली हांडी पर हार का ठीकरा भी लिखा था। सीपी जोशी के खिलाफ जम कर नारे लगाये । एक तरफ शहर के कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश श्रीमाली नामांकन भर रहे थे उसी वक़्त दूसरी तरफ सीपी जोशी के पुतले पर जूट मारे जारहे थे । प्रदर्शन के दौरान काफी संख्या में झाला समर्थक मौजूद थे,
उदयपुर। शहर विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी दिनेश श्रीमाली ने आज जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष दिग्गज नेताओं कि सर परस्ती में नामांकन दाखिल किया। और अपनी युवा शक्ति का परिचय देते हुए दिनेश ने सैकड़ों समर्थकों के साथ पैदल जुलुस भी निकाला ।
नामांकन भरने के पूर्व अमल का कांटा स्थित सूरजपोल थाने के सामने से श्रीमाली का जुलूस निकला, जिसमें सैंकड़ों लोग शामिल थे और ख़ास कर युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं कि खासी भीड़ थी । जुलूस अमल का काटा, मार्शल चौराहा, धानमंडी, तीज का चौक होते हुए देहलीगेट पहुंचा, जुलुस में कोई गाडी घोड़ा वाहन प्रयोग में नहीं लाकर दिनेश सभी व्यापारियों का अभिवादन करते स्वीकारते पैदल ही जुलुस में रवाना हुए और देहली गेट पहुच कर कलेक्ट्री पहुचे जहां दिनेश श्रीमाली ने कांग्रेस के बड़े दिग्गज नेता डॉ. गिरिजा व्यास, शहर जिलाध्यक्ष नीलिमा सुखाडिय़ा, सांसद रघुवीर मीणा, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया व् सज्जन कटारा के साथ नामांकन दाखिल किया। जुलूस सुबह साढ़े 11 बजे रवाना हुआ, साढ़े 12 बजे देहलीगेट पहुंचा। इस बीच जगह-जगह श्रीमाली का शहरवासियों और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया।
नाराज नहीं आए नजर: कांग्रेसी नेता लालसिंह झाला का गुट दिनेश श्रीमाली से नाराज बताया जा रहा है। श्रीमाली के नामांकन जुलूस के दौरान भी झाला गुट का एक भी व्यक्ति नजर नहीं आया। इस गुट से श्रीमाली को भीतरघात की आशंका भी है। लेकिन बाकी बचे डॉ गिरजा व्यास , रघुवीर मीना , नीलिमा सुखाडिया , गोपाल शर्मा , पंकज शर्मा का दिनेश श्रीमाली के साथ होना शुभ संकेत भी मना जारहा है।
खूबसूरती और व्यक्तित्व का एक अभिन्न अंग हैं आपके बाल। बाल एक महीने में एक सेंटीमीटर तक बढ़ते हैं। सर्दियों में इनका बढ़ना धीमी गति से और गर्मियों में कुछ तेज गति से होता है। पोषण के अभाव और बालों के प्रति जाने-अनजाने बरती जाने वाली लापरवाहियों के कारण ही बाल असमय सफेद होने लगते हैं। बालों की सही देखभाल के लिए अनेक चीजें प्राय: हमारे घर में उपलब्ध रहती हैं। थोड़ी समझदारी से इनका प्रयोग बालों को स्वस्थ और सुंदर बना सकता है… nicc डायरेक्टर स्वीटी छाबड़ा
बालों का झड़ना रोकने के लिए
बेरी और नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उपयोग में लाएं।
मेथी के पत्ते पीसकर बालों में लगाने और मेथी के दाने पीसकर आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम खाने से बालों का झड़ना रूकता है।
रात में आंवले के टुकड़े पानी में भिगोएं, सुबह उस पानी को पी लें, इससे बाल स्वस्थ और चमकदार होंगे।
इस्तेमाल करें ये
थोडे सरसों के तेल में एक नींबू का रस अच्छी तरह मिलाएं और उसे सिर में भली-भांति लगाकर सिर धोएं। इससे बालों की रूसी मिट जाएगी और बालों की जडें भी मजबूत होंगी।
आंवले के तेल में नींबू मिलाकर भी उपयोग में लाया जा सकता है।
सप्ताह में एक बार दही या मट्ठा या नींबू के रस या आंवला पाउडर से सिर धोकर साफ करें। इससे बाल मुलायम, चमकीले और लंबे हो जाते हैं।
बाल धोने के बाद मोटे तौलिए से बालों को हल्के हाथ से मलते हुए पौंछें और तौलिए में कुछ समय लपेटकर रखें।
कभी बालों को झटकें नहीं और न ही तेज धूप में उन्हें सुखाएं।
बाल सूखने के बाद उनकी जड़ों में उंगलियों के पोरों से हल्की मालिश करते हुए तेल लगाएं।
बालों के लिए नारियल का तेल अपेक्षाकृत अच्छा होता है। सरसों या आंवले का तेल भी उपयोग में लाया जा सकता है। सिर मे लगाने वाला तेल बार-बार बदलना नहीं चाहिए।
रूसी से मुक्ति के लिए सिरके में पानी मिलाकर लगाएं और सिर धो लें।
अगर लगाते हैं डाई
बालों में डाई लगाने वाले लोगों को बाल रूखे-सूखे रहने की शिकायत रहती है। उन्हें बालों में दूध में केला मसलकर लगाना चाहिए। पपीता मसलकर लगाने से भी लाभ होता है। दो-मुंहे बालों की समस्या से मुक्ति के लिए उच्च प्रोटीन वाला भोजन करना चाहिए। विटाामिन ई के कैप्सूल भी लिए जा सकते हैं।
लौकी के रस में जैतून या तिल का तेल मिलाकर एक घंटे धूप में रखने के बाद उसे बालों में लगाकर मालिश करने से बाल लंबे और काले होते हैं।
एक नींबू के रस में थोड़ा आंवला पाउडर और एक चम्मच रोगन बादाम अच्छी तरह मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं। फिर एक घंटे बाद बालों में मेहंदी लगाएं। डेढ़-दो घंटे बाद बालों को धो लें। इससे बाल झड़ना, दो मुंहे बाल, बाल पतले होने जैसी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
जंूओं से मुक्ति के लिए धतूरे के रस में थोड़ा कर्पूर मिलाकर इस लेप को किसी कपडे में लगा दें और रात में उस कपडे को सिर पर बांधकर सो जाएं। सुबह सिर धो लें।
ऎसे नहीं गिरेंगे बाल
अधिक बाल गिरना परेशानी का कारण हो सकता है। इसके लिए पूरी नींद लेना, हमेशा तनाव से बचना, संतुलित पौष्टिक भोजन लेना, बालों को अधिक कसकर न बांधना, बालों को सदा साफ रखना, अधिक गर्म पानी की बजाय सामान्य या गुनगुने पानी से बाल धोना, बालों को सूखा रखने की बजाय उनमें उंगलियों के पोरों से हल्की मालिश करते हुए तेल लगाना, बालों को रूसी से बचाए रखना, कभी-कभी बालों को भाप देना, दिन में कई बार कंघी करना (इससे तैलीय गं्रथियां सक्रिय रहती हैं) रात को सोते समय बालों को खोलकर या ढीले करके सोना, बालों में रसायन मिले तेल या अन्य पदार्थो का उपयोग न करना, खूब पानी पीना, बीमारी से शीघ्र बचाव के उपाय करना, हेयर ड्रायर का उपयोग कम से कम करना, बाल धोने के लिए रीठा, शिकाकाई, आंवला आदि प्राकृतिक उत्पादों को प्रमुखता देना आदि बातों का ध्यान रखना आपके बालों के हित में हैं।
उदयपुर, कांग्रेस की जारी हुई चौथी सूची में उदयपुर शहर जिला विधानसभा क्षेत्र से दिनेश श्रीमाली को अपना उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं भाजपा से इस सीट पर गुलाबचंद कटारिया चुनाव लड रहे है। वल्लभ नगर सिट से भाजपा ने गणपत मेनारिया को प्रत्याशी बना कर ब्राह्मणों का गुस्सा शांत करने कि कोशिश कि है |
कांग्रेस द्वारा रविवार को जारी की गई चौथी सूची में उदयपुर शहर विधानसभा सीट से कांग्रेस ने ब्राह्मण प्रतिनिधि पर अपना दांव खेलते हुए दिनेश श्रीमाली को मैदान में उतारा है। दिनेश श्रीमाली युवा नेता है और वर्तमान में नगर निगम पार्षद के साथ ही प्रतिपक्ष के नेता भी है। शहर में पिछले दिनों भाजपा द्वारा बा्रह्मण नेताओं को टिकट नहीं दिए जाने से खप*ा चल रहे ब्राह्मण समाज को कांग्रेस द्वारा टिकट दिया जाना प*ायदेमंद हो सकता है। विप्र प*ाउंडेशन की बैठक के दौरान भी ब्राह्मण नेताओं ने यह आव्हान किया था कि यदि ब्राह्मण नेता को प्रतिनिधित्व मिलेगा तो वे एकजुट होकर चुनाव की रणभेरी में उतरेंगे।
कांग्रेस ने ब्राह्मण व युवा नेता उतारा: उदयपुर शहर सीट पर कांग्रेस ने इस बार युवा नेता को टिकट दिया है। कांग्रेस से एक पार्षद की हैसियत रखने वाले दिनेश श्रीमाली को टिकट मिलना चर्चा का विषय बना रहा।
उदयपुर। चुनाव के इस दौर में उदयपुर शहर से मुस्लिमों ने भी अपना प्रत्याशी होने का दावा किया है। और दोनों पार्टयों को इस और ध्यान आकर्षित कराया कि शहर में ४० हज़ार मुसलमान है| और वोटिंग प्रतिशत भी यहाँ पर मुस्लिमों का सबसे अधिक होता है इसके बावजूद कभी मुस्लिम प्रत्याशी के लिए दोनों बड़ी पार्टी नहीं सोचती मुस्लिमों को महज वोट बैंक बना कर रख छोड़ा है ।
अपने आक्रामक अंदाज में यह बात प्रेस वार्ता में मुस्लिम महासभा के संस्थापक युनुस शैख़ ने कही उन्होंने मुस्लिमों के लिए आवाज़ उठाते हुए कहा कि अगर भाजपा और कांग्रेस दोनों में से कोई भी मेवाड़ में मुस्लिम प्रत्याशी घोषित नहीं करती तो शहर से मुस्लिम महासभा एक मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। युनुस शैख़ ने कहा कि आज तक मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक ही समझा जाता रहा है। मेवाड़ की २८ सीटों में से एक भी सिट पर कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं है। और चुनाव जीतने के बाद उन्हें हज कमेटी, वक्फ बोर्ड कमेटी , या अल्प संखयक विभाग का एक मंत्री बना कर छोड़ दिया जाता है । जब कि इसके अलावा कोई जिम्मेदार पद नहीं दिया जाता कई मुस्लिम यहाँ पार्टी कि सालों से सेवा कर रहे है । लेकिन उन्हें भी कभी कोई जिम्मेदार पद नहीं दिया गया। शैख़ ने कहा कि इस बार अगर दोनों पार्टियों ने मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक समझने कि भूल कि तो हम भी अपना प्रत्याशी खड़ा करेगे जिससे कि दोनों बड़ी पार्टियों को मुस्लिमों की ताकत का अंदाजा हो सके। शैख़ ने बताया कि सोमवार को तय किया जाएगा कि इस बार शहर से मुस्लिम महासभा को अपना प्रत्याशी मैदान में उतारना है या नहीं ।
उदयपुर। शहर भाजपा में सभाएं मान मनव्वल और रूठों को मानाने का दौर शुरू होगया है। एक तरफ ब्राह्मण, राजपूत और कुछ युवा संगठन प्रतिपक्ष नेता v शहर से भाजपा के प्रत्याशी गुलाबचंद कटारिया का विरोध कर रहे है । वहीं कटारिया ने भू रूठों को मानाने का मन बना लिया है। और अलग अलग समाज आकर कटारिया का स्वागत कर रहे है।
पिछले तिन सालों से कटारिया का खुल कर बगावत करने वाला कमल मित्रमंडल के दर पर आखिर कार आज कटारिया को उन्हें मानाने के लिए पहुचना पड़ा । हालाकिं यह १५ मिनट कि मुलाकात ३ साल कि दूरियों को नहीं पाट सकी और दोनों तरफ से महज ओपचारिकता हुई । जहा कटारिया ने सबको साथ लेकर चलने का फ़र्ज़ निभाया तो कमल मित्र मंडल के बागियों ने भी पार्टी के सिपाही होने का दम भरा और पार्टी के साथ वफादारी कायम राखी । लेकिन गुलाबचंद कटारिया से दोस्ती नहीं होसकी ।
सविना स्थित ताराचंद जैन कि वाटिका में कटारिया ने आज सुबह पहुच कर महज १५ मिनट में अपनी ओपचारिकता पूरी की साथ ही मिडिया को वहाँ देख कर कटारिया कुछ तल्ख़ भी हुए और वहाँ जमा कमल मित्र मंडल से कहा कि यहाँ तुमने मिडिया इसलिए बुलाया है । कि यह बताना चाहते हो कि गुलाबचंद कटारिया तुम्हारी चोखट पर आया है नाक रगड़ने के लिए । भाईसाब कि इस बात पर कोई कुछ नहीं बोला बस मंडल के मुखिया तारा चाँद जैन ने कहा कि मिडिया को यहाँ हमने नहीं बुलाया है । मिडिया को हर बात पहले से ह पता होती है यहाँ तक की जब आप मेरे घर आये थे और आपसे मांगीलाल जोशी ने कॉल पर बात कीथी वो बात भी मिडिया को पता थी।
महज पन्द्रह मिनट चली बैठक में कोई कुछ नहीं बोल पाया सिर्फ दिनेष माली ने ही यह कहा कि चुनाव तक सभी आपके साथ है। बाकी बात बाद में करेंगे। पन्द्रह मिनट चली इस मान मनौव्वल की बैठक के बाद कटारिया सभी को एक होने की अपील करते हुए रवाना हो गए। कटारिया को गाड़ी तक छोडने भी सिर्फ तीन लोग ही अपनी कुर्सी से खड़े हुए जिनमें विजय आहूजा,राजेष वैश्णव और फारूख हुसैन षामिल है। बैठक में रविन्द्र श्रीमाली, बलवीर दिग्पाल, अनिल सिंघल,अर्चना षर्मा,जगदीष षर्मा,सुशमा चैहान जैसे बड़े नाम भी षामिल थी जो पार्टी में अपना दमखम रखते है।