उदयपुर। महाराणा प्रताप के जीवन पर आधारित टीवी सीरियल में मेवाड़ के इस महान् सपूत के साथ तत्कालीन सभ्यता और संस्कृति को भी गलत ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है, जो निश्चित रूप से असहनीय और निंदनीय है। यह सीरियल सोमवार से गुरुवार रात 10 बजे सोनी टीवी पर दिखाया जा रहा है।
सीरियल की अब तक दिखाई गई कडिय़ों में महाराणा प्रताप के जन्म, बचपन और किशोरवय को प्रदर्शित किया गया है। इतिहास में महाराणा प्रताप के बाल्यकाल के बारे में ज्यादा कुछ नहीं मिलता। यही कारण हैं कि सीरियल के निर्माता निर्देशक को कल्पना करके फिल्मांकन की छूट मिलती है, लेकिन यह छूट इतनी नहीं मिलती कि मुगल बादशाह के मरजीवड़े रनिवास में घुस जाए और महाराणा उदयसिंह की रानियों से छेड़छाड़ करें। ऐसा ही दृश्य सोमवार को दिखाया गया, जो न केवल आपत्तिजनक बल्कि समस्त मेवाड़वासियों के लिए अपमान जनक भी है। विगत सोमवार को प्रसारित एपीसोड में ऐसा ही दिखाया गया है।
महाराणा प्रताप सीरियल के निर्माता निर्देशक ने उदयसिंह के शासनकाल के दौरान एक ऐसे जौहर की कल्पना की है, जो इतिहास में कहीं मौजूद नहीं है। मेवाड़ में जो तीन जौहर हुए हैं, उनकी काफी जानकारी मौजूद है, लेकिन सीरियल निर्माता यह चौथा जौहर कहां से उठा लाया, पता नहीं। यह इतिहास से खिलवाड़ है।जब से महाराणा प्रताप पर इस नये सीरियल का प्रसारण शुरू हुआ है, तभी से इस पर आपत्तियां आना शुरू हो गई। प्रतापसिंह का जन्म कुंभलगढ़ में हुआ और लालन-पालन भी वहीं हुआ, जो पहाड़ी इलाका है। सीरियल में इसे रेगिस्तानी क्षेत्र बताया गया तथा सभी पात्रों को वेशभूषा भी मराठी पहनाई गई। इस प्रथम कड़ी से ही यह पता चल गया था कि निर्माता को इतिहास की कोई जानकारी नहीं है। बाद के दो-तीन एसपीसोड्स में भी तत्कालीन समय के प्रतिकूल फिल्मांकन पर आपत्ति की गई और प्रदर्शन कर विरोध जताया तो निर्माता की ओर राजपूत समाज ने से जवाब मिला कि १५ कडिय़ां तो बन चुकी है, इसलिए कुछ नहीं किया जा सकता। इसके आगे की कडिय़ों में ऐसा कुछ नहीं होगा, जो मेवाड़ के आमजन की भावना को ठेस पहुंचाएं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। सोमवार को तो हद ही हो गई, जिसमें मुगल सैनिक महाराणा की रानियों से अभद्रता करता दिखाया गया। इन दृश्यों को देखने के बाद मेवाड़ के लोगों में, खासकर राजपूतों में गुस्सा है, लेकिन प्रात: स्मरणीय महराणा प्रताप के वंशज अपने महान पूर्वज महाराणा उदयसिंह के अपमान पर चुप्पी साधे बैठे हुए है।
कुछ भी गलत नहीं राणावत: महाराणा प्रताप सीरियल के सलाहकार पुष्पेंद्रसिंह राणावत ने कहा कि सीरियल बिलकुल ठीक है। इतिहासकारों ने उदयसिंह की जितनी मट्टीपलीद की है, वह तो दिखाया ही नहीं गया है। कहां थी महाराणा प्रताप के पास एक म्यान में दो तलवारें, फालतू का प्रचार है। मुगल सैनिक का रनिवास में घुसना एक ड्रामेटिक इफेक्ट है। यह बताने के लिए कि ऐसे हालात पैदा हो गए थे, जिनकी वजह से जौहर करना पड़ता था। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
आंदोलन किया जाएगा कानावत : मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष बालूसिंह कानावत ने कहा कि महाराणा प्रताप पर बने सीरियल में इतिहास से
छेड़छाड़ की गई है। ऐतिहासिक घटनाओं को विकृत तरीके से पेश किया गया है। मेवाड़ की संस्कृति और महाराणा प्रताप का अपमान किया गया है। इस सीरियल को बंद कराने के लिए प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।
हिंदुस्तान का अपमान है बान्सी : बीएन संस्थान के पूर्व एमडी तेजसिंह बान्सी ने कहा कि महाराणा प्रताप सीरियल में इतिहास को विकृत रूप देकर पेश किया जा रहा है, जो मेवाड़ का ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान का अपमान है। यह सीरियल बंद होना चाहिए। अगर बंद नहीं होगा तो जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
हाईकोर्ट में जाएंगे कृष्णावत : राजपूत महासभा अध्यक्ष तनवीरसिंह कृष्णावत ने कहा कि महाराणा प्रताप सीरियल में महाराणा प्रताप की छवि को धूमिल किया जा रहा है। सभी घटनाएं तोड़मरोड़ कर पेश की जा रही है। महाराणा प्रताप पहले स्वतंत्रता सैनानी थे। उनके साथ कई मुस्लिम मेवाड़ी यौद्धा भी थे। उन्होंने मुगलों से स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी थी, वो मुस्लिम विरोधी नहीं थे। जबकि सीरियल में महाराणा प्रताप को मुस्लिम विरोधी बताकर गुमराह किया जा रहा है। इस संबंध में हाईकोर्ट में जाकर सीरियल पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है।
मेवाड़ का अपमान: इस संबंध में एक गृहणी कनक कुंवर ने कहा कि राजपूत कल्चर तो सीरियल में दिखाया ही नहीं गया है। सीरियल पूरी तरह वास्तविकता से परे है। इस सीरियल में इतिहास के साथ छेड़छाड़ करके कई बार मेवाड़ का अपमान किया गया है।




