Road Safety Week Celebration at Hindustan Zinc

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Hindustan Zinc celebrated National Road Safety week from 8th-14th January 2018 to create awareness on road safety rules such as traffic lights, speed limits, pedestrian rules to name a few. The event saw participation of senior management of Hindustan Zinc, employees of Hindustan Zinc and their families.

During the week, various initiatives like Poster making, Quiz completion, Nukkad Natak, ROKO-TOKO Abhiyaan, Road Shows & Rally, Awareness sessions and Rangoli competition were organised on the theme of “Avoid Over-Speeding – Prevent Accidents”.

At Chanderiya Smelting Complex, a Bike Road Show was organised to create awareness on Road Safety and Traffic Regulations. The Road Show was highly praised by District Collector, Shri Narayan Singh Charan. The bikers of the Road Show spread the message of importance of Crash Helmets  and Safety Belts for personal safety.

 Dariba Smelting Complex witnessed the participation of employees as well as children and ladies during the Road Safety Week. A special rally by students of DAV school was organised from DAV school premises to Truck Parking Yard of Dariba Smelting Complex. Children recited various slogans and Jingles to create Road Safety awareness during the rally.  A Rangoli Competition was also organised by ladies club on Road Safety theme.

At Rampura Agucha Mines, 5000 crash helmets were distributed to employees & contract workforce by safety department during the Road Safety Week  and various awareness sessions on theme “Avoid Over-Speeding – Prevent Accidents” were also conducted.

Head CC, Pavan Kaushik said, “Safety beyond the premises is as important as safety inside the premises. We need to change our behaviour towards safety. Being a Socially responsible company, Hindustan Zinc is reaching out to employees along with their families and school students through various interactions at the units”.

Being Safe session is one such interactive session by Hindustan Zinc program to reduce the mind stress of the employees and bring in a sense of realization of Being Safe for their own-self and for their families. The participants in the workshop takes oath of following the path of Being Safe and to make it a habit while working in the plant and outside too.

हिन्दुस्तान जिंक को तीसरी तिमाही में 2,230 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ .

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उदयपुर .18 जनवरी हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने गुरूवार को आयोजित अपनी निदेशक मण्डल की बैठक में 31 दिसम्बर 2017 को समाप्त तीसरी तिमाही व नौःमाही के वित्तीय परिणामों की घोषणा की।

‘‘हिन्दुस्तान जिंक के चेयरमैन श्री अग्निवेष अग्रवाल जी ने कहा कि मुझे यह बताते हुए अति प्रसन्नता हो रही है कि वर्ष के दौरान अब तक के कुल उत्पादन में भूमिगत खदानों का 85 प्रतिशत योगदान रहा है और कंपनी अपने भूमिगत खनन में बदलाव के लिए पूरी तरह से सफल रही है। हमारी परिवर्तनकारी यात्रा में, गत छः वर्षों में लगातार धातु कीमतों में वृद्धि, उत्कृष्ट उत्पादन, लाभप्रदता और रिकाॅर्ड लाभांश दिया है। कंपनी 1.2 मिलियन मैट्रिक टन खनित धातु उत्पादन करने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।’’

वित्तीय वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में खनित धातु का उत्पादन 240,000 टन हुआ है जो पिछली तिमाही की तुलना में 10 प्रतिषत अधिक है। तिमाही के दौरान रामपुरा आगुचा ओपन कास्ट व भूमिगत खदान अयस्क का सकारात्मक उत्पादन रहा है। नौःमाही के दौरान खनित धातु का उत्पादन 693,000 टन हुआ है जो गतवर्ष की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है।

एकीकृत जस्ता धातु का 200,000 टन उत्पादन हुआ जो इसी वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में 4 प्रतिषत अधिक है। एकीकृत सीसा धातु का उत्पादन 46,000 टन रहा है जो पिछली तिमाही की तुलना में 20 प्रतिषत अधिक है। चांदी धातु का उत्पादन 132 मैट्रीक टन हुआ जो पिछली तिमाही की तुलना में 6 प्रतिषत कम परन्तु गतवर्ष की समान अवधि की तुलना में 12 प्रतिषत अधिक दर्षाता है।

नौःमाही के दौरान एकीकृत जस्ता, सीसा एवं चांदी का उत्पादन गतवर्ष की तुलना में क्रमशः 28 प्रतिशत, 26 प्रतिशत एवं 24 प्रतिशत अधिक रहा है जो सकारात्मक खनित धातु की उपलब्धता के अनुरूप रहा है।

वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान कंपनी ने 2,230 करोड़ रुपये का श्ुाद्ध लाभ अर्जित किया है। कंपनी ने 5,846 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जो पिछली तिमाही की तुलना में 12 प्रतिषत तथा गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10 प्रतिषत अधिक है।

उत्पादन परिदृश्य के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018 में रिफाइण्ड जस्ता-सीसा धातु का उत्पादन लगभग 950,000 टन तथा रिफाइण्ड चांदी धातु का उत्पादन 500 टन से अधिक होने की संभावना है।

हिन्दुस्तान जिंक के हेड-कोर्पोरेट कम्यूनिकेषन पवन कौषिक ने बताया कि रामपुरा-आगुचा खदान का तिमाही के दौरान 5,958 मीटर तक विस्तार किया गया है जो पहले से 11 प्रतिशत अधिक है। तिमाही के दौरान कंपनी की सिन्देसर खुर्द खदान का 4,527 मीटर तक विस्तार किया गया है। सिन्देसर खुर्द खदान के मेन शाफ्ट का कार्य पूरा हो गया है। कंपनी की खदान विकास एवं विस्तार कार्य के तहत ऊर्जा विकास परियोजना का कार्य प्रगति पर है। सिन्देसर खुर्द खदान का 1.5 मिलियन टन मिल बनाने का कार्य प्रगति पर है तथा वित्तीय वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही तक पूरा हो जाने की संभावना है।

जावर खदान का तिमाही के दौरान 6,555 मीटर तक खदान विस्तार किया गया है। जावर मिल डी-बोटलनेकिंग के 2.7 एमटीपीए पूरा होने के बाद 2.0 एमटीपीए की नई मिल के लिए विस्तृत इंजीनियरिंग और साइट निर्माण कार्य शुरू किया गया है। नई मिल वित्तीय वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की संभावना है।

चंदरिया में फ्यूमर प्रोजेक्ट का कार्य प्रगति पर है। सिविल कन्स्ट्रक्शन का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019 के मध्य तक पूरा होने की संभावना है।

तीसरी तिमाही के मुख्य आकर्षण
-240,000 टन खनित धातु का उत्पादन – जो 10 प्रतिषत अधिक है।
-245,000 टन रिफाइन्ड जस्ता-सीसा धातु का उत्पादन-जो 7 प्रतिषत अधिक है।
-132 मीट्रिक टन रिफाइन्ड चांदी का उत्पादन – जो 6 प्रतिषत कम है।
-3,261 करोड़ रुपये का ईबीआईटीडीए – जो 7 प्रतिषत अधिक दर्षाता है।
नौःमाही के मुख्य आकर्षण
-693,000 टन खनित धातु का उत्पादन – जो 16 प्रतिषत अधिक है।
-704,000 टन रिफाइन्ड जस्ता-सीसा धातु का उत्पादन – 28 प्रतिषत अधिक है।
-387 मीट्रिक टन रिफाइन्ड चांदी का उत्पादन – जो 24 प्रतिषत अधिक है।
-8,717 करोड़ रुपये का ईबीआईटीडीए – जो 46 प्रतिषत अधिक दर्षाता है।

Zinc in Space…

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 Researchers were able to develop a Zinc-based coating capable of withstanding thermal cycling between 180˚C and -180˚C, and the bombardment of ultraviolet exposure equivalent to 19,000 sun hours. The Zinc-Oxide coating is now routinely used to protect components of spacecraft, which are some of the most technically advanced and complex machines ever made.

On Earth, corrosion of metal objects occurs due to the presence of moisture and oxygen in the atmosphere. Similarly, spacecrafts and satellites in the space and outer space are prone to corrosion because they are subjected to vacuum, exposure to ultraviolet light and X-rays and high-energy charged particles.

As a protective coating for steel, Zinc has no equal. The steel and Zinc industries have worked together for many years to perfect galvanized coatings capable of protecting steel from corrosion in an array of environment, including space.

In fact, Zinc, the fourth most used metal, is not only indispensable on Earth but also in Space.

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

Zinc and steel producers close in on the next technological leap for producing galvanised auto body material

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Steel has been used to make automobiles since the early 1900s but corrosion resistance features became standard in vehicles beginning in the early 1980s when Japanese cars gained entrance to the U.S. market. North American-made vehicles were having “real rust problems” that couldn’t be fought merely with heavier, and more expensive, paint. By the mid-1980s, one really had to galvanize the whole car if wanted to issue warranties.

By 1987, what became standard was a 10-year perforation and five-year cosmetic warranty from all the North American, European and Japanese automakers for vehicles sold in the North American market. That really put the burden on the steelmakers to ask, how are we going to galvanize cars? The first process adopted was electrogalvanizing(EG). So large-volume electroplating lines were built and they processed 20 million tons of steel per year through early 1990s. However, the industry found this process expensive because of the amount of electricity required. At the time, EG was the only process approved for automotive quality. Everyone saw the Holy Grail was to hot dip galvanize automotive steels. It was already done for building panels and appliances. Getting that to be automotive quality was the key, and that happened by the mid-1990s.

The annual consumption of zinc for autobodies today is roughly 120,000 metric tonnes. There is almost no galvanized steel on Chinese-made vehicles except for exports from China by Volkswagen AG, General Motors Co. and others. That’s 20 million cars in China not using galvanized steel.

India, is a huge and growing market for passenger vehicles, but galvanized steel is not used in auto manufacturing. India’s emerging market economies could bring 600,000 metric tons of zinc consumption per year. The need is to formulate standards for corrosion protection.

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

हज सब्सिडी के नाम पर किया जाने वाला छलावा बंद – मुसलमानों ने फैसले का किया स्वागत

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पोस्ट न्यूज़। हज यात्रा पर जाने वालों को मिलने वाली सब्सिडी अब नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार ने हज यात्रा पर मिलने वाली सब्सिडी पूरी तरह खत्म कर दी है। सरकार के इस फैसले का मुस्लिम समुदाय ने खुले दिल से स्वागत किया है। मुसलमानों का मानना था कि यह सब्सिडी सिर्फ एक दिखावा थी असल में सब्सिडी के नाम पर एयर्लाइन्स को फ़ायदा पहुचाया जारहा था।
सरकार का ये कहना है कि ये फ़ैसला अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण किए बगैर उनके सशक्तीकरण के एजेंडे के तहत लिया गया है। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने मंगलवार को हज सब्सिडी ख़त्म करने के सरकार के फ़ैसले की पुष्टि की। मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा, आज़ादी के बाद पहली बार 1.75 लाख मुसलमान बिना सब्सिडी के हज करेंगे. पिछले साल 1.25 लाख लोग हज गए थे. उन्होंने कहा कि सब्सिडी हटाने के फ़ैसले से सरकार के 700 करोड़ रुपये बचेंगे और ये पैसा अल्पसंख्यक की शिक्षा ख़ासकर लड़कियों की तालीम पर खर्च किया जाएगा.

सब्सिडी ख़त्म करने का मुस्लिमों ने किया स्वागत कहा यह सिर्फ लोलीपोप की तरफ थी।
हज सब्सिडी ख़त्म करने को लेकर मुस्लिम समुदाय ने स्वागत करते हुए कहा कि यह एक अच्छा फैसला था क्यूँ कि एक तरह से हज पर जाने वाले यात्रियों से पहले पाबन्द कर एयर्लाइन्स के नाम पर ज्यादा पैसा लिया जाता है और उसके बाद उन्ही पैसों में से मामूली रकम वापस कर उसको सब्सिडी का नाम दिया जाता रहा है। बहुत सारे मुसलमानों का मानना है कि हज सब्सिडी के नाम पर दर असल मुसलमानों को बेवक़ूफ़ बनाया जाता है.उनका कहना है कि हज एक लंबी प्रक्रिया है और सब्सिडी तो सिर्फ़ हवाई यात्रा के किराए में मिलती है. उनके अनुसार इसके नाम पर दरअसल भारत की राष्ट्रीय एयरलाइंस एयरइंडिया को कारोबार दिया जाता है। उनके मुताबिक़ सरकार से मिलने वाली सब्सिडी का फ़ायदा सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को होता है. अक्सर घाटे में चल रही एयर इंडिया को एक साथ एक लाख से ज़्यादा पैसेंजर मिल जाते हैं. लंबे अर्से से मुसलमानों का एक बड़ा तबक़ा, धार्मिक संस्थाएं और असदउद्दीन ओवैसी जैसे सांसद भी इसे ख़त्म करने की मांग करते रहे हैं. उनकी मांग है कि हज के लिए यात्रियों को अपनी सुविधा के अनुसार जाने की इजाज़त होनी चाहिए.

हज पर जाने का कितना खर्च आता है और कितनी सब्सिडी मिलती है।
हम ज्यादा घुमा कर नहीं और सीधे तौर पर देखें तो सुविधाओं के हिसाब से यात्रियों की तीन केटेगरी होती है और इन केटेगरी के अंतर्गत प्रति हज यात्री से रुपया लिया जाता है जो 2 लाख से २.५ लाख तक होता है। इस 2 या २.50 लाख रूपये में से 35 से 40 हज़ार रुपया वापस सब्सिडी के नाम पर दिया जाता है। अब यहाँ देखने वाली बात यह है कि हज कमिटी से जाने वाले हज यात्रियों को इन्डियन एयर्लाइन्स से ही टिकिट बुक करवाने के लिए प्रतिबंधित किया जाता है। यह एयर्लाइन्स हज के दौरान अपनी टिकिट तीन से चार गुना तक महगी कर देती है। आम दिनों में जहाँ सउदिया अरब के लिए 15 से 20 हज़ार रुपया किराया लगता है वही हज पर जाने वालों से यह एयर्लाइन्स 55000 से 60000 हज़ार रूपये तक वसूला जाता है। और उसमे से ही कुछ रकम सब्सिडी के नाम पर वापस की जाती है जो की असल में हज पर जाने वालों का खुद का ही रुपया है। जबकि इसी दौरान दूसरे यात्रियों से सामान्य किराया लिया जाता है. यानी सरकार सब्सिडी हज यात्रियों को नहीं, बल्कि एयर इंडिया को दे रही थी.”

इस बार हज कमेटी के तहत 1.75 हज़ार यात्री हज पर जा रहे थे जिनको दी जाने वाली सब्सिडी की राशि 700 करोड़ रुपया उसका अगर हिसाम लगाया जाय तो प्रति हाजी 40 हज़ार रुपया बनता है , पिछले साल यह राशि करीब 35 हज़ार रुपया थी।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए ARTO प्रकाश ने बनाई वेबसाइट, जरूरतमंद अभ्यर्थियों को मिल रहा है फायदा .

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post news. बड़े पद पर पहुच जाने के बाद अक्सर लोग समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भूल कर खुद मौज में लग जाते है. लेकिन कई अधिकारी ऐसे भी होते है जो समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझ कर समाज को कुछ देने का प्रयास करते रहते है. और उनके इस प्रयास में कई बार खुद का पैसा और अथाह मेहनत भी लगती है . ऐसे ही एक अधिकारी राजस्थान परिवहन विभाग के ARTO प्रकाश सिंह राठोड है जिन्होंने अपनी जेब के ३ लाख रूपये तक खर्च कर आम गरीब और जरूरत मंद अभ्यर्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तय्यारी के लिए एक वेब साईट बनाई है .

विविध प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बनाई गई बेबसाइट काफी फायदेमंद साबित हो रही है। अब तक 27 हजार अभ्यर्थी इसके जरिए आईएएस, आरएएस, कानिस्टेबल व पटवारी आदि की तैयारी कर चुके हैं। युवा अभ्यर्थियों को घर बैठे ऑनलाइन तैयारी की सुविधा देने की मंशा से इस अधिकारी के करीब तीन लाख रुपए खर्च हो चुके हैं।

यह काम किया प्रादेशिक परिवहन कार्यालय में एआरटीओ प्रकाश सिंह राठौड़ ने। जिनके अनुसार उनके द्वारा बाड़मेर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और फिर चयन के बाद वर्षों तक मन में यह बात आती रही कि किस तरह अपने अनुभव को युवा शक्ति के साथ साझा करें। ताकि प्रतिभा और मेहनतकश होने के बाद भी आर्थिक रूप से विवश दूरस्थ इलाकों के युवा को मदद मिल सके। ऐसे में www.wincompete.com वेबसाइट बना डाली। अब तक इसका 27 हजार से अधिक अभ्यर्थी उपयोग कर चुके हैं। तीन साल पहले बनाई वेबसाइट को इस साल तीन-चार बार अपडेट किया है। वेबसाइट का उपयोग करने के बाद अभ्यर्थी फीडबैक भी दे सकेंगे।

वेबसाइट www.wincompete.com की शुरुआत में आईएएस एवं आरएएस के लिए जरनल नॉलेज, हिस्ट्री तथा आईआईटी में कैमेस्ट्री के प्रश्नपत्र अपलोड किए थे। दूसरे चरण में पटवारी एवं कानिस्टेबल परीक्षा के प्रश्न पत्र अपलोड किए। अब आईआईटी में फिजीक्स, कानिस्टेबल में मेंटल एबिलिटी का पेपर अपलोड किया है। इस वेबसाइट की दो खास बात है। हर बार प्रश्न पत्र चेंज मिलेगा। अपनी रैंकिंग का पता भी चल सकेगा। वेबसाइट का उपयोग करने के लिए सीधे फेसबुक एवं गुगल पर लॉग इन करना होगा। वेबसाइट खुलते ही सिविल सर्विसेज या आईआईटी में से किसी पर टिक करना होगा। प्रश्न पत्र हल करने पर अपने रैंकिंग भी पता चलती रहेगी। अभ्यर्थी ने किस प्रश्न को हल करने के लिए क्या टिक किया, यह भी पता चलेगा।

भावुक हो आंसू बहाते तोगड़िया ने कहा – राजस्थान-गुजरात पुलिस मेरा एनकाउंटर करने की कर रही कोशिश।

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पोस्ट न्यूज़। विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के नेता प्रवीण तोगड़िया( praveen togadia ) के सोमवार को नाटकीय ढंग से गायब होने १० घंटे बाद अस्पताल में मिलने का आज प्रवीन तोगड़िया ने खुद प्रेस कोंफ्रेंस में किया। प्रेस के सामने प्रवीन तोगडिया ने भावुक हो रोते हुए कहा कि राजस्थान और गुजरात पुलिस ( rajasthan – gujrat police ) उनका एनकाउंटर ( encounter)करना चाहती है।
तोगड़िया ने एक निजी अस्पताल में संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित किया। इस दौरान वे कई बार भावुक भी हो गए और उनके आंसू निकलने लगे। उन्होंने कहा कि समय आने पर सबूत के साथ इस बात का खुलासा करेंगे कि कौन उनकी आवाज दबाने का और उन्हें जेल भेजने का लंबे समय से षडयंत्र कर रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तोगड़िया ने कहा, “कुछ समय से मेरी आवाज दबाने का हर संभव प्रयास होता रहा। मैं हिंदू एकता के लिए प्रयास करता रहा। कई वर्षों से जो हिंदुओं की आवाज थी, राम मंदिर बनाओ, गौ हत्या बंद करो, कश्मीरी हिंदुओं को बचाओ, इन बातों को मैं उठाता रहा।”
– “मैंने 10 हजार डॉक्टरों को तैयार किया। इनसे मरीजों का इलाज मुफ्त करने को कहा। आईबी ने उन्हें डराने का प्रयास किया। मैंने केंद्र सरकार को लेटर लिखा। यह आवाज दबाने के लिए देशभर में मेरे खिलाफ कानून भंग के केस दर्ज किए, इनकी जानकारी मेरे पास नहीं है।”
– “20 साल पुराने केस निकलवाकर एक जेल से दूसरी जेल भेजकर गुजरात में डराने का प्रयास हुआ। कल मकर संक्राति के दिन राजस्थान पुलिस ( rajasthan police ) का काफिला गिरफ्तारी वारंट लेकर आया। यह हिंदुओं की और मेरी आवाज दबाने कोशिशों का हिस्सा है।”
उन्होंने इस बात पर हैरत जताई कि उनके खिलाफ राजस्थान पुलिस के वारंट की जानकारी वहां के मुख्यमंत्री अथवा गृहमंत्री को क्यों नहीं थी। गौरतलब है कि तोगड़िया के खिलाफ राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर शहर की एक अदालत ने लगभग एक दशक पुराने निषेधाज्ञा के उल्लंघन मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था जिसको लेकर राजस्थान पुलिस सोमवार को उनके आवास पहुंची थी। लेकिन उनके नहीं मिलने पर वह लौट गई थी। लगभग इसी समय दिन के पौने ग्यारह बजे से वह लापता हो गए थे। इसको लेकर विहिप ने खासा हंगामा किया था।
गुजरात-राजस्थान पुलिस कर सकती है एनकाउंटर ( encounter )
तोगड़िया ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें सोमवार सुबह एक कार्यकर्ता ने बताया था कि गुजरात और राजस्थान पुलिस उनका एनकाउंटर कर सकती है। इसके बाद जब उन्हें पता चला कि पुलिस आ रही है तो वह अपनी जेड प्लस सुरक्षा के एक गार्ड को बता कर कार्यालय से एक कार्यकर्ता के साथ उनके घर पहुंचे। उन्होंने रास्ते में राजस्थान के गृह मंत्री और मुख्यमंत्री से पता कराया तो उन्हें उनके वारंट का पता नहीं था।
इसके बाद उन्होंने अपने लोकेशन को छुपाने के लिए सभी फोन स्विच ऑफ कर दिये। बाद में उन्होंने अपने एक कार्यकर्ता के फोन से वकीलों से बात की। मुठभेड़ की आशंका और कानून के पालन के लिए वकीलों की सलाह पर उन्होंने गुपचुप राजस्थान के
जयपुर जाकर अदालत में वारंट रद्द कराने अथवा समर्पण की योजना बनायी और अकेले ही शॉल ओढ़ कर ऑटो रिक्शा में बैठ कर हवाई अड्डे के लिए निकले पर पसीना और चक्कर आने के चलते उन्होंने ऑटो रिक्शा से उन्हें बापूनगर के एक अस्पताल ले जाने को कहा और फिर बेहोश हो गए। इसके बाद जब उन्हें होश आया तो उन्होंने खुद को एक अन्य अस्पताल में पाया।
जब डॉक्टर परमिशन देंगे, सरेंडर कर दूंगा
– “जब डॉक्टर अनुमति देंगे, न्यायालय के सामने समर्पण करूंगा। मैं न्यायालय से कभी भागा नहीं।”
– “मेरी गुजरात या राजस्थान पुलिस से कोई शिकायत नहीं है। मैं बस यह जानना चाहता हूं कि आप मेरे कमरे की तलाशी लेने क्यों जा रहे थे।”
– “मेरे रूम में कानून विरुद्ध कोई संपत्ति नहीं है। मैं क्राइम ब्रांच से प्रार्थना करूंगा कि वो राजनीतिक दबाव में ना आएं। किसी के विरुद्ध कम्प्लेन नहीं है। मेरा जीवन रहे न रहे, राम मंदिर, गौ-रक्षा और किसानों के लिए काम करता रहूंगा। मैं संपत्ति और समद्धि छोड़कर निकला हूं। मेरी आवाज दबाने का प्रयास न हो।”

– तोगड़िया के खिलाफ राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सेशन्स कोर्ट में करीब 10 साल पुराना निषेधाज्ञा उल्लंघन (Injunction violation) का मामला दर्ज है। उनके खिलाफ इस मामले में गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसी को लेकर वहां की पुलिस सोमवार को सुबह करीब 10 बजे सोला इलाके में तोगड़िया के घर पहुंची थी। इसके बाद से ही वो रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे।

ये बेशर्म बस के नीचे दबी लाश के साथ लेता रहा सेल्फी, 3 की दर्दनाक मौत

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पोस्ट न्यूज़ .  लोगों में इंसानियत इस हद तक मर चुकी है कि बेशर्म लोग दुर्घटना के स्थल मर पहुच जाते है तो बजाय घायलों की मदद करने के उनके साथ सेल्फी लेने लगते है . हद तो यह हो चुकी है एक्सीडेंट में मरे हुए लोगों के साथ भी सेल्फी लेने से नहीं चुकते . राजस्थान धोलपुर की घटना और यह फोटो इसका जीता जागता साबुत है . धोलपुर राजस्थान में यहाँ करौली से बाड़ी जा रही यात्रियों से भरी एक निजी बस रविवार दोपहर घाटी पर ढलान उतरते समय अनियंत्रित होकर पलट गई। बस में सवार लोगों ने बताया कि घटना के बाद बस की स्पीड करीब 90 किलोमीटर रही होगी। हादसे में बस के पायदान पर खड़े तीनों युवकों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए। इस दौरान कुछ लोग घायलों की मदद करने के बजाए वीडियो बनाते नजर आए। एक लड़का तो लाश के साथ सेल्फी लेने लगा।

हादसे में हल्के (40) पुत्र श्रीपति मीणा निवासी भउआपुरा (करौली), विक्रम (23) पुत्र विरजा मीणा निवासी नहर गढ़ (करौली) व शरीफ (35) पुत्र मोहम्मद रसीद निवासी कहार पाडा बाड़ी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं 20 यात्री घायल हो गए।
घायलों को ग्रामीणों की मदद से बस से बाहर निकाला गया तथा 19 घायलों को अस्पताल करौली व एक घायल को सरमथुरा में भर्ती कराया है।  प्रत्यक्षदर्शी बस सवार ने बताया कि हादसे के बाद बस में चीखपुकार मच गई थी। किसी के हाथ तो किसी के पैर में चोट लग गई थी।
– सभी यात्री एक-दूसरे के ऊपर दबे हुए थे। बस के गेट के तरफ पलटने के कारण निकलने का रास्ता बंद हो गया था।
– घटना के बाद ग्रामीणों ने बस के ऊपर से यात्रियों को खींचकर बाहर निकाला। बस के अंदर यात्री एक-दूसरे के ऊपर-नीचे हो रहे थे। पुरुष बस से निकलने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन महिलाएं व बच्चे चीख रहे थे।
–  हादसे के कारणों को घायल राजेश ने बयां करते हुए कहा कि चालक बस को 80-90 की स्पीड से दौड़ा रहा था, बथुआखोंह ढलान में आने पर एक साथ घुमा दिया। जिससे बस अनियंत्रित होकर पलट गई।

हत्यारे शम्भू ने मर्डर का खौफनाक वीडियो बनाने भांजे को दी थी ट्रेनिंग, हत्या की कई बार की रिहर्सल

दिसंबर को राजसमंद में अफराजुल हत्याकांड मामले में पेश 413 पेज की चार्जशीट में पुलिस ने 68 सबूत जुटाए हैं। इस चार्जशीट में हत्या के कई ऐसे फैक्ट्स और कारण हैं, जिन्हें भास्कर पहले ही उजागर कर चुका है, मामले में मुख्य गवाह है पूजा और चश्मदीद है शंभु का 15 साल का भांजा। वारदात का लाइव वीडियो बनवाने के लिए शंभु ने अपने भांजे के मन से डर निकालने ट्रेनिंग भी दी थी। वह अक्सर अपने भांजे को बलि के सीन दिखाता था।

वारदात का चश्मदीद नाबालिग भांजा और मुख्य गवाह पूजा

– राजनगर के रहने वाले शंभु ने पश्चिम बंगाल के ठेकेदार अफराजुल की हत्या राजसमंद से बंगालियों को भगाने के लिए उनमें खौफ पैदा करने और पूजा के साथ खुद के नाजायज रिश्तों के सबके सामने आने पर बदनामी के डर से की थी।

– शंभु के पूजा के नाजायज रिश्तों को अफराजुल और पश्चिम बंगाल के उसके दो दोस्त अज्जू और बल्लू शेख भी जानते थे। अड़चन बने इन लोगों को राजसमंद से भगाने के लिए वह अफराजुल को 6 दिसंबर को कलेक्ट्री से 700 मीटर दूर अपने खेत पर ले गया और गेंती से खौफनाक तरीके से ताबड़तोड़ वार कर हत्या के बाद उसकी लाश भी जला दी थी।

– पुलिस ने वारदात के 36 दिन बाद शुक्रवार शाम को 413 पेज की चार्जशीट चीफ ज्यूडियशरी मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश कर दी है। 68 सबूतों वाली इस चार्जशीट में पुलिस ने वारदात का चश्मदीद शंभु के नाबालिग भांजे और मुख्य गवाह पूजा को बनाया है। 413 पेज की इस चार्जशीट को भास्कर ने खंगाला तो कई फैक्ट्स सामने आए।

– पुलिस ने चार्जशीट में बताया कि हत्या के लाइव वीडियो के साथ ही शंभु ने वारदात से पहले और बाद में भांजे से 8 वीडियो बनवाए थे। इनमें उसने जिस लड़की का जिक्र किया था, वह पूजा ही है।

शंभु ने वारदात से दो महीने पहले हथियार जुटाए और हत्या की कई बार रिहर्सल की

– वारदात से करीब दो महीने पहले गेंती खरीदी और पसंद का धारिया(धारदार हथियार) बनवाकर अपने घर रख दिए।
– 5 दिसंबर को शंभु ने पांच वीडियो बनाए।
– 6 दिसंबर को सुबह सवा नौ बजे शंभु कार में मंदबुद्धि बेटी और भांजे को स्कूल छोड़ने गया। बेटी को स्कूल छोड़कर भांजे को साथ लिया और 100 फीट रोड स्थित भाई की दुकान कर कार खड़ी कर दी।
– घर जाकर स्कूटी लाया और भांजे के साथ टीवीएस चौराहा के पेट्रोल पंप से 100 रुपए का स्कूटी में पेट्रोल भरवाया। 50 रुपए का पेट्रोल बोतल में लेकर दोनों 100 फीट रोड पहुंचे।
– 11.44 बजे अफराजुल को फोन कर खेत पर कमरा बनाने के बहाने बुलाया।
– 11 बजकर 59 मिनट पर अफराजुल की हत्या का लाइव वीडियो अपने भांजे से बनवाया।
– 12.39 पर फोरलेन के बाबा रामदेव मंदिर में एक और वीडियो बनाया।
– 12. 44 पर फिर एक और वीडियो बनाया। इसके बाद घर चला गया। खून से सने कपड़े और जूते बाथरूम में रख दिए। नहाने के बाद बेटी और भांजे के साथ खाना खाकर घर से निकल गया।
– 12:59 पर शंभु भवानी वॉट्सएेप ग्रुप पर आठ वीडियो सेंड कर दिए।
– वॉट्सएेप ग्रुप के मैंबर्स को फोनकर वीडियो सोशल मीडिया पर डाउनलोड करवाए।
– फिर भांजे के साथ यूनियन बैंक मैनेजर अनुराग वर्मा के पास भेजकर तीनों लेटर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और बाबा रामदेव को भेजने के लिए कहा। बाद में देवथड़ी, डिप्टी होते हुए केलवा पहुंच गया।

शम्भू ने जिसको बहन बताया उसी से नाजायज रिश्ता सबके सामने आने और बदनामी के डर से की थी अफ्राजुल की ह्त्या

पोस्ट न्यूज़ .राजनगर के रहने वाले शंभु ने 6 दिसंबर 2017 को पश्चिम बंगाल के ठेकेदार अफराजुल की हत्या राजसमंद से बंगालियों को भगाने के लिए उनमें खौफ पैदा करने और पूजा के साथ खुद के नाजायज रिश्तों के सबके सामने आने पर बदनामी के डर से की थी। शंभु के पूजा के नाजायज रिश्तों के बारे में अफराजुल और पश्चिम बंगाल के उसके दो दोस्त अज्जू और बल्लू शेख भी जानते थे। अड़चन बने इन लोगों को इलाके से भगाने के लिए वह अफराजुल को अपने खेत पर ले गया और गेंती से खौफनाक तरीके से ताबड़तोड़ वार कर हत्या के बाद उसकी लाश भी जला दी थी।

पूजा : शंभु ने 8 वीडियो बनवाए थे, इनमें जिस लड़की का जिक्र वह पूजा

– पुलिस ने वारदात के 36 दिन बाद शुक्रवार शाम को 413 पेज की चार्जशीट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश कर दी है। 68 सबूतों वाली इस चार्जशीट में पुलिस ने वारदात का चश्मदीद शंभु के नाबालिग भांजे और मुख्य गवाह पूजा को बनाया है। 413 पेज की इस चार्जशीट को भास्कर ने खंगाला तो कई फैक्ट्स सामने आए।

– पुलिस ने चार्जशीट में बताया कि हत्या के लाइव वीडियो के साथ ही शंभु ने वारदात से पहले और बाद में भांजे से आठ वीडियो बनवाए थे। इनमें उसने जिस लड़की का जिक्र किया था, वह पूजा ही है। पुलिस ने पूजा को मुख्य गवाह बनाया है। पूजा के बयान को चार्टशीट में शामिल किया है।

15 साल का बच्चा : यही घटना का चश्मदीद, इसी ने बनाए थे वीडियो

वारदात शंभु के खेत पर हुई। यहां अफराजुल की बर्बर तरीके से हत्या करने के बाद उसे जलाने तक का वीडियो शंभु ने पंद्रह साल के भांजे सेे बनाया था। शंभु ने वारदात से पहले और बाद में मिलाकर अपने भांजे से ही 8 वीडियो बनवाए थे। पुलिस ने उसके भांजे को वारदात का चश्मदीद बनाया है।

अफराजुल : निर्दोष था, पर दोस्तों के लिप्त होने से खुद को जान गंवानी पड़ी

चार्जशीट में पूजा के बयानों में पुलिस ने लिखा है कि साल 2010 में पूजा बल्लू से दोस्ती होने पर उसके साथ पश्चिम बंगाल के सैयदपुर चली गई। बाद में वापस राजसमंद आई और फिर साल 2012-13 में अज्जू के साथ सैयदपुर चली गई। शंभु ने अज्जू को मारने की योजना बनाई थी, लेकिन अफराजुल मारा गया।

इसलिए मारा अफराजुल को

शंभु दो-तीन साल से बल्लू व अज्जू शेख से मोबाइल पर आए दिन हो रहे झगड़े से परेशान था। बल्लू और अज्जू शेख अक्सर अफराजुल के पास काम करने के लिए आते थे। अफराजुल बल्लू और अज्जू पूजा के घर शराब पार्टी भी करते थे। बार-बार नंबर बदलने पर भी दोनों के पास शंभु के मोबाइल नंबर पहुंच जाते थे। इस पर शंभु को शक था कि अफराजुल उसके नंबर दोनों को उपलब्ध कराता है। अज्जू और बल्लू तो उसे मिले नहीं। इस बीच किसी भी बंगाली को मारकर वह राजसमंद से बंगालियों को भगाना चाहता है।

पूजा को लेने पश्चिम बंगाल गया था शंभु, तब से ही देखने लगा भड़काऊ वीडियो

चार्जशीट में पुलिस ने बताया कि पूजा के बयानों के अनुसार अफराजुल, बल्लू शेख व अज्जू शेख उसके घर आते थे। 2010 में वह बल्लू शेख के साथ सैयदपुर चली गई। करीब 17 दिन बाद पूजा की मां डालीबाई, मामा अंबालाल मालदा पुलिस के साथ सैयदपुर गए और उसे राजसमंद ले आए, लेकिन बल्लू, अज्जू और अफराजुल का उसके घर पर आना-जाना लगा रहा। 2012-13 में अज्जू के साथ पूजा वापस सैयदपुर चली गई। चार साल तक वहीं रही। फिर एक दिन बल्लू के मोबाइल से उसने शंभु से बात कर वापस राजसमंद लाने की बात कही। इस पर शंभूलाल सैयदपुर गया। बल्लू के घर पर नहीं होने से शंभु रात वहीं रुका। बाद में बल्लू और अज्जू से फोन पर उसका विवाद हो गया। पूजा ने इन्हें खतरनाक बताते हुए शंभु को लौट जाने को कहा। करीब पंद्रह दिन बाद बाजार जाने के बहाने पूजा सैयदपुर से ट्रेन में बैठकर राजसमंद आ गईं।

पूजा को साथ रखने पर जाति पंचायत ने लगाया था दस हजार दंड

पूजा के सैयदपुर से राजसमंद आने के बाद शंभु ने उसे हाउसिंग बोर्ड स्थित अपने मकान पर रखा। यहां पहले से आरके अस्पताल की नर्स बेदला उदयपुर निवासी ज्योति चौहान रहती थी। इस बीच करीब एक माह बाद पूजा से बल्लू व अज्जू कांकरोली बस स्टैंड पर मिले और पश्चिम बंगाल चलने को कहा। इस पर पूजा ने मना कर दिया। फिर एक दिन ज्योति अस्पताल से जल्दी घर आ गई तो उसने पूजा और शंभु को आपत्तिजनक हालत में देख लिया। इस पर ज्योति और शंभु के बीच झगड़ा भी हुआ। पूजा की मां को पता चला कि वह शंभु के साथ रह रही है तो उसने जाति पंचायत बुलाई थी। जाति पंचायत ने शंभु पर दस हजार रुपए का दंड भी लगाया था। बाद में पूजा अपनी मां के पास ही रहने लगी। करीब चार माह बाद पूजा का मां से विवाद होने पर वह कांकरोली निवासी उमर भाई के मकान में रहने लगी। दीपावली पर पूजा से मिलने शंभु उसके किराए के मकान पर गया। जहां उसने बल्लू और अज्जू के अलावा बंगालियों से खुद को खतरा होने और मार देने का डर जताया था।