छात्रों का आक्रोश बढ़ा “ठप कर देंगे काउंसलिंग”

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उदयपुर। प्राध्यापकों की भर्ती नहीं होने के कारण मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के संघटक विधि महाविद्यालय की मान्यता खत्म होने के बाद से आंदोलनरत छात्रों ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन भी प्रदर्शन किया। शुक्रवार को छात्र भूख हड़ताल पर उतर आए और विवि प्रशासन के लिए सद्बूद्धि यज्ञ किया। छात्रों ने चेताया कि विधि महाविद्यालय का मामला नहीं निपटा तो विवि के किसी भी महाविद्यालय में काउंसलिंग नहीं होने दी जाएगी।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी इकाई अध्यक्ष देवेंद्र सिंह चूण्डावत के नेतृत्व में सद्बुद्धि यज्ञ किया। साथ ही विवि परिसर में हस्ताक्षर अभियान चलाया। भूख हड़ताल पर देवेंद्र सिंह चूण्डावत, लॉ कॉलेज अध्यक्ष अक्षय सिंह राणावत, ओम मेहरानिया, चंद्रवीरसिंह झाला बैठे हैं। सद्बुद्धि यज्ञ के समय हिमांशु चौधरी, पंकज बोराणा, जिला संयोजक प्रवीणसिंह, अजय आचार्य, विष्णु पालीवाल, भरत गायरी, धु्रवल शाह, वैभव, गौरव जैन आदि भी उपस्थित थे। वहीं, विधि महाविद्यालय के छात्रों का क्रमिक अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। छात्र नेता अक्षय शर्मा के नेतृत्व में चल रहे अनशन का छात्र नेता रोहित सुथार, जयदीपसिंह भीमावत, दिनेश भोई, शेखर चौधरी ने भी समर्थन किया। इन छात्र नेताओं ने चेताया कि विधि महाविद्यालय का मामला सुलझने तक किसी भी महाविद्यालय में काउंसलिंग नहीं होने दी जाएगी।

फूल दिया, हाथ जोड़े
विधि महाविद्यालय के छात्र निशांत बागड़ी के नेतृत्व में कलक्टर आशुतोष एटी पेडणेकर से मिले। छात्रों ने कलक्टर को सफेद गुलाब का फूल भेंट किया और हाथ जोड़कर मामला जल्दी सुलझाने का अनुरोध किया। छात्रों को सम्भावित नुकसान से अवगत कराते हुए महाविद्यालय में प्राध्यापकों की भर्ती शीघ्र सुनिश्चित करने, महाविद्यालय की मान्यता स्थायी कराने का आग्रह किया। इसे लेकर छात्रों ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा। इस अवसर पर राहुल सिंगोलिया, हेमंत योगी आदि उपस्थित थे।

पर्यटकों को दिवाली पर मिलेगा बड़ा तोहफा

rpkgonl011050720145Z30Z09 AMउदयपुर। रेलवे प्रशासन इस बार दिवाली पर पर्यटकों को बड़ा तोहफा देगा। रेलवे की ओर से सिटी स्टेशन के बाहर निर्माणाधीन मल्टीफंक्शनल कॉम्प्लेक्स दीपावली तक पर्यटकों के लिए तैयार हो जाएगा। कॉम्पलेक्स के संचालन का जिम्मा एक बड़े होटल समूह को दिया गया है।
गौरतलब है कि शहर में रेलगाड़ी से आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों को रेलवे स्टेशन पर ही खाने-पीने, मनोरंजन, ठहरने, चिकित्सा आदि सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए रेलवे प्रशासन 78 कमरों वाला वातानुकूलित होटल मय मल्टीफंक्शनल कॉम्प्लेक्स का निर्माण करा रहा है।
लगभग 5.50 करोड़ रूपए लागत से रेल भूमि विकास प्राधिकरण व इण्डियन रेलवे कंस्ट्रक्शन ऑर्गेनाइजेशन (इरकॉन) संयुक्त रूप से इस कॉम्प्लेक्स का निर्माण करा रहे हैं।
रेलवे ने यह कॉम्पलेक्स ली राय होटल इण्डिया लिमिटेड कंपनी नामक होटल समूह को 12 लाख रूपए प्रतिमाह के हिसाब से 40 वर्ष के लिए लीज पर सौंपा है। कंपनी कॉम्पलेक्स के भीतर इंटीरियर डेकोरेशन का काम करा रही है। रेलवे ने कम्पनी को 5 माह में यानी दिवाली तक यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया है। तब तक रेलवे प्रशासन कम्पनी राशि नहीं वसूलेगा।
ये सुविधाएं मिलेंगी
कॉम्पलेक्स के भूतल पर बीयर बार व रेस्टोरेंट, स्टेशनरी शॉप, ओपन गार्डन, हेण्डीक्राफ्ट शोरूम और ट्रावेल्स कंपनी का ऑफिस होगा। प्रथम तल पर वातानुकूलित 9 कमरे, बेटिंग रूम, कॉन्फरेंस हॉल होगा। द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ तल पर वातानुकूलित 23-23 कमरे होंगे। छत पर स्वीमिंग पूल व होटल में ठहरने वाले यात्रियों के लिए रेस्टोरेंट होगा।

BIMLA IS NO MORE AN ORDINARY RURAL WOMEN…

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Her husband Baldev did not have a proper land… her three children were struggling with education and not getting proper guidance. Bimla for the whole day was into her house-hold work and used to get tired.

Bimla always wanted to do something good in life. She always thought of doing something of her own, her own small business. She would think and smile and cherish her dream. Days passed. She got married and has 3 children now. Her dream remained unfulfilled.

Her husband Baldev never encouraged her rather he insisted Bimla should only do house-hold work.

One day Bimla met with her old friend, Meena. Meena was well dressed and had a mobile in her hand. She came in auto-rickshaw. She was carrying some home-furnishing items like bedsheets, pillow covers and other decorative items. When Bimla asked Meena how this all change happened, Meena narrated her story.

Meena told her that she with the help of Hindustan Zinc became member of “Sakhi” self-help-group and Hindustan Zinc provided her training in home-furnishing, tailoring and cutting and other creative items. The training gave her a lot of knowledge and confidence. She now has a small rural enterprise and earns about Rs. 4500/- per month.

Bimla decided to do the same. Meena introduced her to her group where Hindustan Zinc gave her training in stitching and tie & dye.

Today, Bimla runs her own “Sakhi” group which has about 13 members and she has tied-up with market vendors to sell her products. She has a mobile phone and runs all modern application to get in touch with the purchasers of the products her group makes. She is now planning to buy a ‘scooty’.

Bimla is an independent woman, a rural entrepreneur and a confident person who is supporting her family, children and house.

बाबेल प्रकरण में जैन समाज क्यो मौन?

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उदयपुर। हाल ही सं‍पन्‍न हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद देशभर में सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली कांग्रेस पूरी तरह मौन हो गई है। पांच माह बाद होने वाले निगम के चुनावों को लेकर भी कांग्रेसियों में कोई उत्साह नहीं दिखाई पड़ रहा है। निगम के एक्‍सईएन समरथसिंह बाबेल का सत्‍तारूढ पार्टी से परेशान होकर आत्महत्या का प्रयास करने के मामले में भी कांग्रेसी पार्षदों का मौन रहना यह साबित करता है कि उदयपुर शहर कांग्रेस वेंटिलेटर पर है, जो विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हुई करारी हार से पूरी तरह टूट चुकी है। चुनाव पूर्व एमएलए और एमपी का टिकट पाने के लिए दावेदारों की लंबी लिस्ट थी, जो भी अब सामने नहीं आ रहे हैं। हालांकि चं‍द लोगों ने जरूर विरोध किया, जिनमें दिनेश श्रीमाली, अजय पोरवाल और जेपी निमावत के नाम शामिल है।
आश्चर्य तो इस बात पर है कि उल्लेखनीय है नगरनिगम के वरिष्ठ इंजीनियर श्री बाबेल के पिछले दिनों दूध तलाई क्षैत्र में अपनी कलाई काटकर आत्महत्या का प्रयास कि या था। इस बारे में आरोप यह है कि श्री बाबेल पर गलत काम करने के लिए इतना दबाव डाला कि वे आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए। दिगम्‍बर जैन समाज, श्‍वेतांबर समाज, ओसवाल बड़े साजन, ओसवाल छोटे साजन, महावीर युवा मंच, महावीर युवा मंच संस्‍थान, महावीर जैन परिषद, जैन जाग्रति सेंटर, अखिल भारतीय जैन युवा फैडरेशन, दिगंबर जैन बीसा नर्सिंगपुरा जैन समाज सहित 100 से ज्‍यादा संस्‍थाएं उदयपुर में समाज उत्‍थान का काम कर रही है, लेकिन समरथसिंह बाबेल के समर्थन में एक भी संस्‍थान का अभी तक नहीं आना साबित करता है कि जैन समाज भी सत्‍तारूढ़ पार्टी के चंगुल में फंसा हुआ है।
: अगर समाज के किसी व्‍यक्ति को उसके आफिस में प्रताडित‍ किया जा रहा है तो यह सरासर गलत है, ऐसे लोगों या पार्टी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसका हम विरोध करते हैं, वैसे मैं चार दिन से बाहर हूं।
-निर्मल पोकरण, अध्‍यक्ष महावीर युवा मंच
: मुझे इस मामले की बिल्‍कुल जानकारी नहीं है, कल शाम को ही बाहर से आया हूं। धन्‍यवाद।
-राजकुमार फत्‍तावत, अध्‍यक्ष पोरवाड समाज।
: इस मामले में पुलिस अगर कोताही बरत रही है तो हम उच्‍चाधिक‍ारियों और भाजपा नेताओं से बात करेंगे। व्‍यक्ति किसी भी समाज का हो। इस प्रकार कि घटना का न होने देना ही उदयपुर के लिए पर्यटन का बढावा है।
-जिनेन्‍द्र शास्‍त्री,प्रदेशाध्‍यक्ष,अखिल भारतीय जैन युवा फै डरेशन।

राजस्थान में आजादी के बाद दुष्कर्म के मामलों में हुई 20 गुना बढ़ोतरी

पुलिस ने डकैती पर पाया काबू, अन्य सारे अपराध अनियंत्रित
चोरों का आतंक बढ़ता रहा
पुलिस का शिकंजा चोरों पर भी कमजोर रहा क्योंकि आज़ादी के वक्त राÓय में अगर अपराध होते थे, उनमें चोरी के मामले सबसे अधिक थे। 1947 में 8058 मामले दर्ज हैं, जो 201& में बढ़कर 28928 हो गए। अगर रिकॉर्ड की बात मानें तो यह अपराध चार गुना तक बढ़ा है, लेकिन एक पहलु यह भी है कि सबसे अधिक अगर कोई अपराध होता है, तो वह है चोरी और चोरी के कई मामले थाने में दर्ज भी नहीं किए जाते है। किसी भी अधिकारी और थाने की अगर सबसे बड़ी कमजोरी है, तो वह उस थाना क्षेत्र में कोई चोरी की वारदात होना। आला अधिकारी इस बात को मानते हंै कि चोरी के कई मुक़दमे दर्ज ही नहीं किए जाते।

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उदयपुर। आजादी के बाद जितना विकास बाकी सारे क्षेत्र में हुआ उतना ही विकास अपराधों में भी हुआ है। 67 सालों में राजस्थान में अपराधियों के हौसले बुलंद हुए है, और क़ानून को ठेंगा बताते हुए कई क्षेत्रों में अपराध में भारी वृद्धि हुई है। पुलिस के पिछले 67 सालों के रिकॉर्ड तो यही बताते हैं। इसमें अगर सबसे अधिक चिंता का विषय हैं तो आजादी के बाद बलात्कार की घटनाओं में बीस गुना वृद्धि होना।
साथ ही बलवा और गुटों के संघर्ष और दंगे भी बढ़े हैं। अगर किसी अपराध को पुलिस ने कम किया है, तो वह है डकैती।
रेप केस में बीस गुना वृद्धि
राÓय के पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार ऐसा लगता है कि सच में उस वक्त लोग भले हुआ करते थे, क्योंकि 1947 से 1974 तक 27 सालों में पूरे राÓय में पुलिस रिकॉर्ड में एक भी रेप का मुकदमा दर्ज नहीं है। 1975 में 164 रेप के मुक़दमे दर्ज हुए, जो की 201& में 20 गुना तक बढ़ते हुए &285 तक पहुंच गए। बढ़ते बलात्कार के मामले यह दर्शाते हैं कि जो समाज आज़ादी के वक्त साफ़ सुथरा था, अब उसका चेहरा बदल कर विकृत हो गया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों की अगर बात मानें, तो इन में कई मामले झूठे होते हैं या फिर कई समय तक आपसी सहमति से होते हैं, लेकिन जब किसी बात को लेकर अनबन होती है, तो महिला द्वारा रेप का मुकदमा लगा दिया जाता है। ख़ासकर आदिवासी क्षेत्रों में यह Óयादा होता है और रेप के मुक़दमें वहां गांव-ढाणियों में अधिक दर्ज होते हैं। अधिकारी कहते हैं कि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की रेप के मामले पहले के मुकाबले अब बढ़ोतरी हुई है। इसके कई कारण है सामाजिक, आंतरिक, घरेलु, बाहरी, युवाओं की सोच में माहौल की वजह से जो विकृति पैदा हुई है, यह भी एक कारण है। पुलिस वैसे इन पर लगाम लगाने की पूरी कोशिश कर रही है।
डकैती पर लगी लगाम
आज़ादी के बाद अगर राजस्थान पुलिस ने सबसे अधिक लगाम लगाई है, तो वह है डकैती पर। 1947 में पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार &20 मामले दर्ज हैं, जबकि 201& में सिर्फ 59 मामले ही रिकॉर्ड में दर्ज है। आज़ादी के बाद डकैती का ग्राफ निरंतर गिरता रहा, बाकी अपराध चाहे बढे हो और कभी घटे हो, लेकिन यह अपराध एक ऐसा है जिस पर पुलिस ने अपना पूरा शिकंजा कसा। इसकी वजह अधिकारी बताते हैं कि पहले डकैत हुआ करते थे, लेकिन धीरे-धीरे कइयों को समर्पण करवा दिया। कइयों को गिरफ्तार कर आतंक ख़त्म कर दिया।
बलवा, दंगों में भी आगे
दंगों की बात करें, तो इसका ग्राफ उतरता चढ़ता रहा और 1947 से आज की तुलना में तो दंगे कम हुए है, लेकिन बीच के सालों में 10 से 15 गुना तक बढ़ गए थे। 1947 में जहां दंगों के 772 मामले दर्ज हैं, वही 201& में 542 लेकिन 2004 के बाद कम हुए उसके पहले इनकी संख्या में इजाफा होते हुए 1997 में बढ़कर 21565 तक पहुंच गए थे। 2002 में इनकी संख्या 7178 दर्ज की गई। उसके बाद मामलों में कमी आना शुरू हुई, जो 201& में सिर्फ 542 मुक़दमे ही दर्ज है। अधिकारियों का कहना है यह सिर्फ सांप्रदायिक दंगों का ही रिकॉर्ड नहीं है। दंगे का मतलब पांच से अधिक लोग मिलकर किसी पर हमला करे, वह भी दंगे की श्रेणी में आता है। हालांकि उनका मानना है कि सांप्रदायिक दंगे भी कई सालों में बहुत अधिक हुए है। यह जब एक बार कही शुरू होते हैं, तो राजनैतिक से प्रेरित होकर राÓयभर में बढ़ाते चले जाते हैं। हत्या के रिकॉर्ड पर अगर नजऱ डाले, तो यह भी निरंतर बढ़ता हुआ चार गुना हो गया है। 1947 में जहां राÓयभर में 421 मामले दर्ज किये गए थे, वही 201& में यह बढ़कर 157& हो गए हैं।

पुलिस का निकम्मापन उजागर

अख्तर खान

समरथसिंह बाबेल मामले में आज तक घटनास्थल पर नहीं गई घंटाघर पुलिस, क्रमददगारञ्ज ने किया मौका मुआयना, मौके पर आज भी पड़ी है खून से सनी ब्लैड और टोपी-चश्मा, बयानों के आधार पर ही मान ली दुर्घटना

 दिन दयाल पार्क का घटना स्थल जहां बैठ कर एक्सईएन ने हाथ की नसें काटी, पांच दिन बाद भी खून से सनी हुई ।

दिन दयाल पार्क का घटना स्थल जहां बैठ कर एक्सईएन ने हाथ की नसें काटी, पांच दिन बाद भी खून से सनी हुई ।

उदयपुर। नगर निगम के एक्सईएन समरथसिंह बाबेल द्वारा आत्महत्या के प्रयास के कथित मामले में घंटाघर पुलिस की घोर लापरवाही उजागर हुई है, जिसे निकम्मापन भी कहा जा सकता है। घंटाघर पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते बाबेल के बयानों को आधार मानकर इस गंभीर मामले को दुर्घटना मान लिया है, जबकि बाबेल जहां घायल पड़े मिले। उस जगह का मौका मुआयना तक नहीं किया। पुलिस ने जहां उसे बताया गया, उसे ही घटनास्थल मान लिया है, जबकि बाबेल ने म्युजिकल फाउंटेन के पीछे आत्महत्या का प्रयास किया था, वहां खून से सनी ब्लैड, बाबेल की टोपी और चश्मा आज भी पड़ा है। क्रमददगारञ्ज ने जब मौका मुआयना किया, तो घंटाघर पुलिस की यह घोर लापरवाही सामने आई। घटना को पांच दिन बीत गए हैं। समरथसिंह बाबेल ने सोमवार दोपहर दूधतलाई स्थित दीनदयाल उपाध्याय पार्क के म्युजिकल फाउंटेन के पीछे पानी की पाइपलाइन पर बैठकर हाथ की नसें काटी थी, जहां ढेर सारा खून आज भी पड़ा है। खून से सनी ब्लैड, बाबेल की टोपी और चश्मा भी पड़ा है। हो सकता है हाथ की नसें काटने के बाद बाबेल या तो लुढ़क कर या फिर चलते हुए पहाड़ी के नीचे तक गए थे, जहां जाकर वे बेहोश हो गए।

घटना स्थल पर नसें काटने के लिए प्रयोग में लाई गयी ब्लेड जो घटना के पांच दिन बाद भी वही पड़ी हुई थी ।
घटना स्थल पर नसें काटने के लिए प्रयोग में लाई गयी ब्लेड जो घटना के पांच दिन बाद भी वही पड़ी हुई थी ।

इस मामले में पुलिस शुरू से ही राजनीतिक दबाव में रही। पुलिस ने बाबेल के बयान लेकर जांच वहीं खत्म कर दी। पुलिस को आसपास के इलाके में पूरी तरह छानबीन करनी चाहिए थी। बाबेल द्वारा किए गए प्रयास के कारणों तह तक जाना चाहिए था। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में बाबेल आत्महत्या करने का कारण तक लिख चुका है, लेकिन पुलिस ने सच्चाई जानने की कोई कोशिश नहीं की। पुलिस ने सिर्फ और सिर्फ बाबेल के कथित बयानों को ही सच मान लिया। जबकि वह बयानों में बता रहे हैं कि सीढिय़ों से लुढ़कने के कारण घायल हुए है, लेकिन घटनास्थल पर दूर-दूर तक सीढिय़ा नहीं है। पुलिस को बाबेल के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला और उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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:नगर निगम के एक्सईएन समरथसिंह बाबेल के आत्महत्या के प्रयास के मामले में अगर घंटाघर पुलिस ने कोई लापरवाही बरती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मैं अभी पुलिस को भेजकर मौका दिखवाता हूं।
डॉ. राजेंद्र भारद्वाज, एएसपी (सिटी)

पीछोला के रूण में पुलिस वालों की दारू पार्टी

मनीष गौड़

घंटाघर थाने की हॉक के पुलिसकर्मी आए दिन करते हैं पार्टी, क्रमददगारञ्ज के कैमरे में कैद हुए शराबी पुलिसकर्मी

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उदयपुर। नगर निगम के एक्सईएन समरथसिंह बाबेल की आत्महत्या के प्रयास के मामले में गंभीर लापरवाही बरतने वाली घंटाघर पुलिस की हॉक में शराबी पुलिसकर्मी गश्त करते हैं। ये शराबी पुलिसकर्मी पीछोला के रूण में क्रदारू पार्टीञ्ज करते हुए क्रमददगारञ्ज के कैमरे में कैद हुए हैं।पता चला है कि इन पुलिस कर्मियों ने पीछोला के रूण को अपनी क्रदारू पार्टीञ्ज का अड्डा बना रखा है, जहां पर वे मच्छी मार, नशेडिय़ों और गरदुल्लों को पकड़कर उनसे रुपए ऐंठते हैं। इस राशि से उनकी क्रदारू पार्टीञ्ज होती है। कल मददगार ने इन पुलिसकर्मियों का पीछा किया, तो यह सच्चाई सामने आई। इस क्रदारू पार्टीञ्ज में हॉक इंजार्च लक्ष्मणसिंह और पुलिस लाइन का जवान मुकेश भी शामिल था। अन्य पुलिस कर्मी आसपास के इलाकों में नशेडिय़ों को पकडऩे में व्यस्त थे।
ये हो सकती है कार्रवाई: यदि कोई पुलिस जवान नौकरी के दौरान किसी प्रकार के नशे का सेवन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ पुलिस सेवा नियमों के आधार पर अनुशासन हीनता का मामला बनता है। मामले की जांच पुलिस अधिकारियों द्वारा की जाती है। साथ ही आरोपी को १६ व १७ सीसी का नोटिस दिया जाता है।

उदयपुर। पीछोला के रूण में क्रदारू पार्टीञ्ज करते हॉक के पुलिसकर्मी। (इनसेट) में जीप नंबर

आईआईटी में उदयपुर के चित्रांग देश में अव्वल

Chitrang

उदयपुर। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) के ज्वाइंट एंट्रेंस एक्जाम के आज घोषित हुए परिणाम में पूरे देश में उदयपुर के चित्रांग मुर्डिया अव्वल रहे हैं। उदयपुर के ही कौशल बाबेल २७वें स्थान पर रहे हैं। चित्रांग पुत्र मनीष मुर्डिया डीपीएस के १२वीं कक्षा के छात्र हैं। डीपीएस की प्राचार्य नीरू टंडन ने बताया कि चित्रांग काफी काबिल और होशियर छात्र है। इससे पूर्व भी कई प्रतियोगिता परीक्षा में वह अव्वल रह चुका है। अभी चित्रांग परिवार के साथ जयपुर में हैं, जो कल उदयपुर पहुंचेगा। कौशल बाबेल पुत्र सत्यवीर बाबेल एमडीएस स्कूल का छात्र है। स्कूल संचालक शैलेंद्र सोमानी ने बताया कि कौशल मेधावी छात्र है, कौशल की उपलब्धि पर पूरे स्कूल को नाज है।

भाजयुमो जिलाध्यक्ष पर महिला कार्यकर्ता से बदसूलकी का आरोप

-महिला कार्यकर्ता ने सुखेर थाने में दर्ज कराया मामला, पहले जिलाध्यक्ष सूरजपोल थाने में करवा चुका है रिपोर्ट दर्ज
-मुख्यमंत्री को भी भेजा जिलाध्यक्ष के खिलाफ शिकायती पत्र
उदयपुर। भाजयुमो जिलाध्यक्ष जिनेंद्र शास्त्री के खिलाफ एक महिला कार्यकर्ता ने बदसलुकी का आरोप लगाते हुए सुखेर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह प्रकरण ५०६, ५०९ आईपीसी एवं ६६ (ए) आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। महिला कार्यकर्ता ने क्रमददगारञ्ज को एक रिकार्डिंग उपलब्ध कराई है, जिसमें जिनेंद्र शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई करने पर एक असामाजिक तत्व द्वारा उसे भद्दी गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। हालांकि उक्त महिला कार्यकर्ता के खिलाफ जिनेंद्र शास्त्री सूरजपोल थाने में पहले ही रिपोर्ट दर्ज करा चुका हैं, जिसमें उसने महिला कार्यकर्ता के खिलाफ मानहानि का आरोप लगाया है। इस संबंध में महिला कार्यकर्ता द्वारा मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर जिलाध्यक्ष जिनेंद्र शास्त्री के खिलाफ शिकायत की है।
सूत्रों के अनुसार महिला कार्यकर्ता न्यू भूपालपुरा क्षेत्र की रहने वाली है। उसने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि जब से वह पार्टी से जुड़ी है, तभी से भाजयुमो जिलाध्यक्ष जिनेंद्र शास्त्री उससे नजदीकी बढ़ाने लगा। पार्टी में बड़ा पद देने का लालच देने लगा। इनकार करने पर दोनों के बीच विवाद हो गया। महिला कार्यकर्ता द्वारा इसकी शिकायत पार्टी में करने पर उसे धमकाया जाने लगा। भाजयुमो जिलाध्यक्ष के नाम से कॉल आने लगे, जिसमें उसे जान से मारने तक की धमकियां दी जाने लगी। इस संबंध में महिला कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री से भी शिकायत की है। इस मामले की जांच सूरजपोल सीआई रमेश शर्मा को सौंपी गई है।
वर्जन…
इस मामले मेें मेरे विरोधी गुट का हाथ है, जो इस युवती को भ्रमित कर रहा है। जहां तक धमकी भरी रिकार्डिंग की बात है, वह उसने खुद ने बनवाई है, जो जांच में स्पष्ट हो जाएगी।
-जिनेंद्र शास्त्री, जिलाध्यक्ष, युवा मोर्चा
जहां तक मुझे जानकारी है, उक्त युवती भारतीय जनता पार्टी की कोई सदस्यता नहीं है।
अल्का मूंदड़ा, अध्यक्ष, महिला मोर्चा

बाबेल की हत्या करने का था प्लान !

डर के कारण बार-बार बयान बदल रहे हैं बाबेल, ठेकेदार माफिया ने रची हत्या की साजिश, आत्महत्या या हादसे जैसे कोई साक्ष्य नहीं लगे पुलिस के हाथ

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उदयपुर। नगर निगम के वरिष्ठ एक्सईएन समरथसिंह बाबेल ने आत्महत्या करने की कोशिश नहीं की थी, बल्कि उनकी हत्या करने के लिए कुछ बदमाशों ने उनकी कलाइयां काटकर उन्हेें वहां फेंक दिया था। पता चला है कि इस वारदात को ठेकेदार माफिया द्वारा अंजाम दिया गया है। हालांकि श्री बाबेल आज भी एमबी हॉस्पीटल के आईसीयू में उपचाराधीन है, लेकिन वहां भी उनकी जान को खतरा बना हुआ है।
विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि श्री बाबेल की कलाइयां काटकर आत्महत्या की कोशिश का रूप दिया गया है। प्लान तो उनका मर्डर करने का था लेकिन भाग्य से वे बच गए। पता चला है कि श्री बाबेल के पास लाखों रुपयों के भुगतान की फाइलें पड़ी हुई हैं, जिन पर उनके हस्ताक्षर आवश्यक है। श्री बाबेल ने फर्जी बिलों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया, इसी वजह से ठेकेदार माफिया उनकी जान लेने पर तुला हुआ है। बताया गया है कि करीब सात लाख रुपए के भुगतान की एक फाइल विवाद का कारण बनी तो उन्हें निबटाने की योजना बनाई गई। इसके तहत ठेकेदार माफिया ने सुपारी दे दी। सुपारी लेने वाले गिरोह ने रैकी करते हुए वारदात स्थल तय किया। जब बाबेल बाइक से दूधतलाई पहुंचे, तो कुछ लोगों ने उन्हें निर्जन स्थान पर दबोच लिया। उन्हीं लोगों ने बाबेल की कलाइयां काटी और उन्हें बेहोशी की हालत में वहीं छोड़ कर फरार हो गए। बताया यह भी गया है कि भय के कारण बाबेल बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं। पता चला है कि निगम में हर काम पर १५ प्रतिशत कमीशन लंबे अर्से से बंधा हुआ है। इसमें से दो प्रतिशत एक्सईएन, एक-एक प्रतिशत जेईएन, दो प्रतिशत कमिश्नर और आधा प्रतिशत बाबू को मिलता है। बताया गया है कि निगम में ऐसे कई कर्मचारी है, जिन्होंने अपने परिजनों और विश्वास के लोगों के नाम पर ठेके भी ले रखे हैं। एक कर्मचारी तो ऐसा भी है, जिसने अकेले ने ३४ वार्डों में ठेके ले रखे हैं। बताया गया है कि ईमानदार कर्मचारियों पर भारी दबाव है। कुछ समय पहले एक क्लर्क महेश गोयर को एक पार्षद ने निगम के दफ्तर में ही पीट दिया लेकिन कमिश्नर ने मामला पुलिस मेें दर्ज नहीं कराया। बताया गया है कि वर्षों पहले कमिश्नर रणजीतसिंह गठाला पर कथित आठ हजार की सुपारी देकर चांदपोल क्षेत्र में हमला करवाया गया था। इसमें लिप्त लोगों को बाद में तत्कालीन कांग्रेस के गृहमंत्री ने अपने प्रभाव से बचाया। सूत्रों ने बताया कि पूर्व कमिश्नर के पीए रंगीन मिजाज रघुवीरसिंह राठौड़ को भी आधी रात में सूरजपोल चौराहे पर ट्रक से कुचल दिया गया। वह भी मर्डर था, लेकिन उसे एक्सीडेंट में निरूपित कर दिया गया। पता चला है कि पुलिस ने श्री बाबेल के नये बयान में सीढिय़ों से गिरने से घायल होना लिखा है, लेकिन जहां वे पड़े मिले वहां दूर-दूर तक सीढिय़ां है ही नहीं।